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सरकार ने खोले राज: 1629 डिफॉल्टर नहीं चुका रहे ₹1.62 लाख करोड़ का कर्ज

नई दिल्ली बैंकों से लोन लिया… कारोबार किया… पैसा भी बनाया, लेकिन चुकाने का मन नहीं है. जी हां ऐसे ही विलफुल डिफॉल्टर्स (Wilful Defaulters) के पास देश के तमाम सरकारी बैंकों के बकाये का आंकड़ा चौंकाने वाला है, जिसका खुलासा सरकार ने किया है. संसद के मानसून सत्र में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) ने राज्यसभा में बताया कि PSU Banks से कर्ज लेकर न लौटाने वाले कॉरपोरेट कर्जदारों की संख्या 1600 के पार है और ये 1.62 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दबाए बैठे हैं.   1629 कर्जदारों पर 1.62 लाख करोड़ कर्ज सरकार की ओर से केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया. उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि 31 मार्च 2025 तक पीएसयू बैंकों ने 1629 कॉर्पोरेट कर्जदारों को ऐसे डिफॉल्टर्स के रूप में पहचाना है, जो जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहे हैं. इन विलफुल डिफॉल्टर्स पर कुल मिलाकर 1,62,961 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है. यह आंकड़ा विदेशी कर्जदारों को छोड़कर बैंकों द्वारा बड़े Loan पर सूचना के केंद्रीय भंडार (CRILC) को सौंपी गई रिपोर्टों के आधार पर जुटाया गया है.  क्या होते हैं ये विलफुल डिफॉल्टर?  Wilful Defaulters की ये संख्या और इनके ऊपर कर्ज का आंकड़ा भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों को दर्शाने वाला है. यहां ये जान लेना जरूरी है कि आखिर ये विलफुल डिफॉल्टर होते कौन हैं? तो बता दें कि ये ऐसे लोग या फिर कंपनियां होती हैं, बैंकों से लिया गया कर्ज (Loan) चुकाने की क्षमता तो रखते हैं, लेकिन फिर भी इसे चुकाने से बचने के लिए खुद को दिवालिया घोषित कर लेते हैं. साफ शब्दों में कहें तो ये ऐसे कर्जदार होते हैं, जिनके पास इसे चुकाने के लिए पर्याप्त रकम तो होती है, लेकिन जानबूझकर ये Loan Payment करने से इनकार कर देते हैं. सरकार ऐसे कस रही शिकंजा सरकार ने डिफॉल्टर्स, उनके ऊपर कर्ज का आंकड़ा पेश करने के साथ ही ऐसे कर्जदारों के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों पर भी जोर दिया है. इन पर लिए जाने वाले एक्शन की जानकारी देते हुए बताया गया कि Wilful Defaulters को अतिरिक्त ऋण सुविधाओं मना किया जाता है और इन पर 5 साल के लिए नए बिजनेस शुरू करने पर भी बैन शामिल है. इसके अलावा भविष्य में इस तरह के डिफॉल्ट्स को रोकने के उद्देश्य से इन कॉरपोरेट डिफॉल्टर्स से जुड़ी कंपनियों को इक्विटी मार्केट में एंट्री से भी प्रतिबंधित किया गया है, जिससे उनकी धन जुटाने की क्षमता घटी है या सीमित हो गई है.  पंकज चौधरी ने कहा कि बैंक बड़े मामलों में जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही भी शुरू कर सकते हैं और वे इसके लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, सरकार विलफुल डिफॉल्ट पर अंकुश लगाने के प्रयासों को तेज कर रही है, जिनका बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और फाइनेंशियल हेल्थ पर बड़ा असर पड़ता है. देश छोड़कर भागे कर्जदारों पर एक्शन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मास्टर दिशा-निर्देशों के तहत Willful Defaulters पर घरेलू स्तर पर शिकंजा कसने के अलावा देश छोड़कर भाग गए बड़े डिफॉल्टरों से भी सरकार निपट रही है. वित्त राज्य मंत्री के मुताबिक, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत 9 ऐसे लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उनकी 15,298 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है. यह राष्ट्रीय सीमाओं से परे अपराधियों पर शिकंजा कसने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है.

अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां: अल कायदा के 4 आतंकी गिरफ्तार, बड़ा हमला टला

अहमदाबाद गुजरात एटीएस ने एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा करते हुए अल कायदा इन इंडियन सबकॉंटिनेंट (AQIS) से जुड़े मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है. इस कार्रवाई में कुल चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है. गुजरात एटीएस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए चार आतंकियों में दो को गुजरात से, एक दिल्ली से और एक नोएडा (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया है. यह सभी आतंकवादी अल कायदा के AQIS से जुड़े बताए जा रहे हैं. गिरफ्तार आतंकियों की पहचान सैफुल्लाह कुरैशी (पिता: मोहम्मद रफीक), मोहम्मद फर्दीन (पिता: मोहम्मद रईस), और मोहम्मद फैक (पिता: मोहम्मद रिजवान) के रूप में हुई है. बड़ी आतंकी हमले की फिराक में थे गुजरात एटीएस द्वारा पकड़े गए चारों आतंकियों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. एटीएस के मुताबिक, सभी आरोपियों की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है और ये भारत में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे. गुजरात एटीएस का कहना है कि इन आतंकियों को कुछ खास और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे. ये चारों आतंकी सोशल मीडिया ऐप्स के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और जांच में यह भी सामने आया है कि इनका संपर्क सीमा पार बैठे आतंकियों से भी था. बड़े आतंकी हमले की फिराक में थे गुजरात एटीएस द्वारा पकड़े गए चारों आतंकियों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. एटीएस के मुताबिक, सभी आरोपियों की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है और ये भारत में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे. एटीएस डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि फिलहाल मामले की गहराई से जांच की जा रही है और बहुत जल्द एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी. सोशल मीडिया ऐप्स के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े थे गुजरात एटीएस का कहना है कि इन आतंकियों को कुछ खास और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे. ये चारों आतंकी सोशल मीडिया ऐप्स के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और जांच में यह भी सामने आया है कि इनका संपर्क सीमा पार बैठे आतंकियों से भी था. फंडिंग, ट्रेनिंग और विदेशी संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी ATS इस गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि समय रहते एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया. गुजरात एटीएस और केंद्रीय एजेंसियां अब इनके नेटवर्क, फंडिंग, ट्रेनिंग और विदेशी संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

बहराइच के एएनएम ट्रेनिंग सेंटर को ध्वस्त करने की स्वीकृति, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट योजना की जमीन मिली

लखनऊ   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न कैबिनेट बैठक में उप्र राज्य जिला न्यायालय सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2025 के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। अब जिला न्यायालय के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति मिलने पर फिर से परिवीक्षा अवधि पर रहने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब तक जिला न्यायालय के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति मिलने के बाद भी परिवीक्षा पर रहने का नियम था। अन्य सरकारी विभागों में कर्मचारी को सेवा आरंभ करने पर केवल एक बार परिवीक्षा अवधि पर रहना होता है। इसके साथ ही दिव्यांगता के आधार पर किसी कर्मचारी को सेवा से हटाया व स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा। नियमावली में संसोधान के माध्यम से अन्य सेवाओं में पहले से लागू इस व्यवस्था को जिला न्यायालय के कर्मचारियों के लिए भी लागू कर दिया गया है। कैबिनेट ने मथुरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उपयोग के लिए बोलेरो खरीदे जाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की है। अयोध्या में आइबी का कार्यालय, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट योजना की जमीन मिली अयोध्या में सुरक्षा प्रबंधों को लगातार पुख्ता किया जा रहा है। एनएसजी हब की स्थापना के साथ ही अयोध्या में इंटेलीजेंस ब्यूरो (आइबी) का कार्यालय भी होगा। कैबिनेट ने अयोध्या में आइबी के ओसीआर काम्प्लेक्स (कार्यालय व आवासीय परिसर) के निर्माण के लिए एक हजार वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा अयोध्या में भ्रष्टाचार निवारण संगठन की मंडल इकाई/पुलिस थाना एंटी करप्शन की स्थापना के लिए मुगलपुरा, सदर तहसील क्षेत्र में कुल 4067.87 वर्गमीटर भूमि गृह विभाग को आवंटित किए जाने का प्रस्ताव मंजूर किया। नगर निगम अयोध्या में सरयू नदी जलापूर्ति श्रोत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट फेज-वन योजना के तहत चिन्हित नजूल भूमि को नगर विकास विभाग के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। कैबिनेट ने लखनऊ के गणेशगंज फायर स्टेशन के लिए 3404.11 वर्ग मीटर नजूल भूमि का नामांतरण/हस्तांतरण गृह विभाग के पक्ष में किए जाने का प्रस्ताव भी मंजूर किया। बहराइच के एएनएम ट्रेनिंग सेंटर को ध्वस्त करने की स्वीकृति कैबिनेट बैठक में बहराइच के निष्प्रयोज्य एएनएम ट्रेनिंग सेंटर के ध्वस्तीकरण की अनुमति दे दी। सेंटर के पुराने जर्जर चार भवन काफी समय से इस्तेमाल में नहीं थे. इन पुराने भवनों दो तोड़ कर नया एएनएम ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। — हमीरपुर में बनेगा आशा ज्योति केंद्र हमीरपुर में आपकी सखी आशा ज्योति केंद्र-वन स्टाप सेंटर की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने  इस केंद्र के लिए महिला कल्याण विभाग को निश्शुल्क भूमि आवंटन-हस्तांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। आपकी सखी आशा ज्योति केंद्र पर महिलाओं को विभिन्न विषयों पर परामर्श, चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता, पुलिस सहायता आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।  

घटती जनसंख्या की चिंता: कई देशों में गिरावट, एक देश की आबादी 10 हजार से भी कम

नई दिल्ली दुनिया की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है। हजारों सालों के अंतराल में धरती पर इंसानों की आबादी एक अरब तक पहुंची थी। लेकिन फिर एक अरब से 8 अरब तक पहुंचने में महज 200 साल ही लगे। यही नहीं 1960 से अब तक यानी 65 सालों में दुनिया की आबादी 3 अरब से बढ़कर आठ अरब तक पहुंची है। लेकिन इस जोरदार ग्रोथ के बाद भी कुछ देश ऐसे हैं, जहां इंसानों की संख्या में कमी आ रही है। यही नहीं एक देश तुवालु पर तो अस्तित्व का खतरा ही मंडरा रहा है। पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर के इस द्वीपीय देश की आबादी महज 10 हजार ही है और अब उसमें भी गिरावट का दौर जारी है। वर्ष 2011 में दुनिया की आबादी 7 अरब थी और महज 14 सालों में ही आंकड़ा एक अरब और बढ़ गया। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2030 तक विश्व की आबादी 8.6 अरब हो जाएगी। फिर 2050 तक आंकड़ा 9.8 अरब होगा और 2100 में यह 11.2 अरब हो जाएगी। लेकिन यूक्रेन, जापान और ग्रीस जैसे कई देश हैं, जिनकी आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। यूक्रेन में तो 2002-23 में यानी एक साल के अंदर ही आबादी में 8.10 फीसदी की गिरावट आई। इस कमी की वजह युद्ध में मौतों और बड़ी संख्या में देश से पलायन को माना जा रहा है। इसके अलावा तुवालु की आबादी में 1.80 पर्सेंट की कमी आई है। देश की आबादी ही 10 हजार है, जो अब 9 हजार से कुछ अधिक ही रह गई है। यदि संख्या इसी तरह घटती रही तो वह लुप्त होने की कगार पर होगा। तुवालु ऑस्ट्रेलिया और हवाई के बीच का एक द्वीपीय देश है। यूरोपीय देश ग्रीस की आबादी में भी कमी हो रही है और कुल 1.60 पर्सेंट की गिरावट एक दिन के अंदर ही दर्ज की गई है। वहीं सैन मारिनो की आबादी 1.10 पर्सेंट कम हुई है। कोसोवो लैंडलॉक्ड की आबादी में भी 1 फीसदी गिरावट हुई। रूस के पड़ोसी देश बेलारूस की पॉपुलेशन में 0.60 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई। बोस्निया और अलबानिया की आबादी भी इतनी ही कम हुई है। अब बात करते हैं, जापान की। यहां भी आबादी में आधे फीसदी की कमी दर्ज की गई है। अन्य देशों में पलायन और कम जन्मदर के चलते आबादी घट रही है, लेकिन जापान में इसका एकमात्र कारण जन्मदर में कमी है। हालात ऐसे हैं कि जापान में तमाम इंसेटिव्स के ऐलान के बाद भी लोग बच्चे नहीं पैदा करने चाहते। यूक्रेन से तो बड़ी संख्या में लोग शरण के लिए दूसरे देशों में चले गए हैं। इसके अलावा युद्ध में भी हजारों लोग अब तक मारे जा चुके हैं। इस तरह यूक्रेन दुनिया में सबसे तेजी के साथ कम होती आबादी वाला देश है। अब यदि महाद्वीप के आधार पर बात करें तो यूरोप की आबादी तेजी से घट रही है। वह अकेला ऐसा महाद्वीप है। वहीं एशिया की आबादी में तेज इजाफा हो रहा है। चीन, भारत, पाकिस्तान, इंडोनेशिया जैसे देश एशिया में ही हैं, जिनकी आबादी सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। यूरोपीय देश ग्रीस की बात करें तो उसकी आबादी 2100 तक एक मिलियन कम होकर 9 मिलियन ही रह जाएगी, जो फिलहाल 10 मिलियन है। बता दें कि रूस, इटली और द. कोरिया जैसे देशों पर भी घटती आबादी का खतरा मंडरा रहा है।

बुलेट ट्रेन कब होगी तैयार? रेल मंत्री ने दिया टाइमलाइन का अपडेट

नई दिल्ली रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि वापी और साबरमती के बीच बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के गुजरात वाले हिस्से का काम दिसंबर, 2027 तक पूरा करने की योजना है और महाराष्ट्र से साबरमती सेक्शन तक पूरी परियोजना दिसंबर, 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। वैष्णव ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना (508 किलोमीटर) जापान से तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ निर्माणाधीन है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी और इसके मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती में 12 स्टेशनों पर ठहराव की योजना है। गुजरात वाला हिस्सा दिसंबर, 2027 तक होगा पूरा वैष्णव ने बताया, ‘‘वापी और साबरमती के बीच कॉरिडोर का गुजरात वाला हिस्सा दिसंबर, 2027 तक पूरा होने की योजना है। पूरी परियोजना (महाराष्ट्र से साबरमती खंड) दिसंबर, 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है।’’ प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये मंत्री ने कहा कि परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 1,08,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी 81 प्रतिशत यानी 88,000 करोड़ रुपये का वित्तपोषण कर रही है और शेष 19 प्रतिशत यानी 20,000 करोड़ रुपये रेल मंत्रालय (50 प्रतिशत) और महाराष्ट्र (25 प्रतिशत) तथा गुजरात (25 प्रतिशत) सरकारों के अंशदान के माध्यम से वित्त पोषित किए जाएंगे।

स्वास्थ्य विभाग में निकली 750+ वैकेंसी, 12वीं व डिप्लोमा पास अभ्यर्थी तुरंत करें आवेदन

भोपाल   मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने राज्य के विभिन्न विभागों में पैरामेडिकल पदों पर भर्ती के लिए पैरामेडिकल संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के माध्यम से योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने का मौका मिलेगा। आवेदन प्रक्रिया 28 जुलाई 2025 से शुरू होगी और उम्मीदवार 11 अगस्त 2025 तक आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। कुल 752 पदों पर होगा चयन इस भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन 27 सितंबर 2025 को दो पालियों में किया जाएगा। पहली पाली सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक होगी। इस भर्ती अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य विभागों में कुल 752 रिक्त पदों को भरना है। शैक्षिक योग्यता और निवास की शर्तें इस भर्ती में शामिल विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। कुछ पदों के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास मांगी गई है। वहीं अन्य पदों के लिए उम्मीदवार के पास फार्मेसी, ओटी टेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी, ऑप्टोमेट्री या अन्य संबंधित पैरामेडिकल विषयों में डिप्लोमा या डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अलावा, यदि कोई उम्मीदवार स्थानीय आरक्षण (मध्य प्रदेश राज्य के लिए आरक्षित कोटा) का लाभ लेना चाहता है, तो उसके पास मध्य प्रदेश का स्थायी निवास प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है। आयु सीमा और छूट अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 1 जनवरी 2025 के आधार पर की जाएगी। हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अन्य आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी। इतना लगेगा आवेदन शुल्क इस भर्ती प्रक्रिया में अनारक्षित (General) श्रेणी के आवेदकों को 500 रुपये का आवेदन शुल्क देना होगा। वहीं, मध्य प्रदेश राज्य के आरक्षित वर्गों जैसे कि एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और पीडब्ल्यूडी के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क घटाकर 250 रुपये निर्धारित किया गया है। ऐसे करें आवेदन     आधिकारिक वेबसाइट mponline.gov.in पर जाएं।     “Recruitment” या “Apply Online” लिंक पर क्लिक करें।     यदि आप पहली बार आवेदन कर रहे हैं, तो सबसे पहले अपनी जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन करें – जैसे नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आदि।     रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करें और आवेदन फॉर्म में अपनी शैक्षणिक योग्यता, व्यक्तिगत जानकारी, अनुभव (यदि हो), आदि भरें     पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर, डिग्री/डिप्लोमा की कॉपी और अन्य जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।     अपनी श्रेणी के अनुसार ऑनलाइन माध्यम (डेबिट कार्ड/नेट बैंकिंग/UPI) से आवेदन शुल्क जमा करें।     फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट जरूर लें।  

चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत, देशभक्ति की पराकाष्ठा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

चंद्रशेखर आजाद ने शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ न आये, यह देश प्रेम की है पराकाष्ठा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव शहादत का वह क्षण जब आज़ाद ने चुनी मृत्यु, पर न झुके अंग्रेजों के आगे: सीएम डॉ. यादव चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत, देशभक्ति की पराकाष्ठा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव चंद्रशेखर आजाद नगर में हुआ स्मरण आजाद कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव वी.सी. के जरिए हुए कार्यक्रम में शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमें गर्व है कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जैसे महानायक मध्यप्रदेश की धरती पर जन्मे हैं। उन्होंने कहा कि अपनी समूची चेतना, जीवन और अस्तित्व भारतमाता के चरणों में समर्पित करने वाले अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर हम गौरवान्वित हैं। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित चंद्रशेखर आजाद का जीवन ऊर्जा, संकल्प और सेवा का अमिट अध्याय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने जब यह देखा कि अब गिरफ्तारी से बच पाना मुश्किल है तो अपने हाथों से ही खुद के प्राणोत्सर्ग कर शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ नहीं आये, यह देश प्रेम की परकाष्ठा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आज़ाद नगर (भाभरा) में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम "स्मरण-आजाद" को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। वीसी में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिवशेखर शुक्ला सहित अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे। आज़ाद एक ऐसी आंधी थे, जिसने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद एक नाम नहीं, भारत की क्रांति का वह तेजस्वी स्वर था, जिसकी गूंज आज भी देशभक्ति की शपथ लेने वालों के हृदय में सुनाई देती है। बाल्यकाल से ही उनमें एक अलग तेज और एक अलग सोच थी। जब काशी में उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया और गिरफ्तार हुए, तब न्यायाधीश के पूछने पर जो जवाब उन्होंने दिया, वह आज भी हर देशभक्त के हृदय में बसा है। जब उनसे, उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया- 'आजाद'। पिता का नाम पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया-स्वाधीनता। तीसरी बार जब उनके घर का पता पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया था- जेल। वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, एक विचारधारा और आत्मबल के प्रतीक थे, जिन्होंने यह संकल्प लिया था कि-'मैं आज़ाद था, आज़ाद हूं और आज़ाद ही रहूंगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद ने केवल एक क्रांतिकारी की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वाधीनता आंदोलन के सेनापति की भूमिका निभाई। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सेनापति बने और शहीद भगत सिंह जैसे नौजवानों को भी उन्होंने दिशा दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय की शहादत का बदला लेने के लिए जब सांडर्स को लाहौर में मार गिराया गया, तब इस योजना के केंद्र में चंद्रशेखर आज़ाद ही थे और जब देश की क्रांति को धन की आवश्यकता पड़ी, तब काकोरी कांड (1925) में ब्रिटिश खजाने को लूटकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि अगर लक्ष्य पवित्र हो, तो क्रांति भी तपस्या बन जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि दुश्मनों से घिरे होने पर उन्होंने अंतिम गोली स्वयं पर चला दी, परंतु दुश्मन की पकड़ में नहीं आए। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (अब आज़ाद पार्क) में 27 फरवरी 1931 को पुलिस से घिरे होने पर अंतिम गोली खुद को मारकर प्राणोत्सर्ग कर दिया और अपने नाम के अनुरूप अंतिम सांस तक वे "आज़ाद" ही रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत आज भी हमें यह याद दिलाती है कि स्वतंत्रता किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लाखों बलिदानों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती पर देश के युवाओं को उनके साहस, त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। आजाद केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रखर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी को चाहिए कि वह आज़ाद जी के जीवन व चरित्र से सीखें कि कैसे कोई अकेला व्यक्ति इतिहास की धारा बदल सकता है। राष्ट्र के लिए जीना और राष्ट्र के लिए मरना क्या होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हम जिस आज़ाद हवा में सांस ले रहे हैं, वह चंद्रशेखर आजाद जैसे रणबांकुरों के बलिदान की ही देन है। हम सबका यह परम कर्तव्य है कि हम एकजुट होकर उनके सपनों का भारत गढ़ें। उल्लेखनीय है कि चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म मध्यप्रदेश के वर्तमान अलीराजपुर जिले के एक छोटे से गांव भाभरा (अब चंद्रशेखर आज़ाद नगर के रूप में प्रचलित) में 23 जुलाई 1906 को हुआ था। चंद्रशेखर आजाद नगर में हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल पर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, पूर्व विधायक एवं वर्तमान में म.प्र. लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष माधो सिंह डाबर, भाभरा नगर परिषद की अध्यक्षा श्रीमती निर्मला डाबर, नगर परिषद के अध्यक्ष नारायण अरोड़ा, भाभरा जनपद पंचायत के अध्यक्ष जगदीश गणावा और जनपद पंचायत उपाध्यक्ष परमार सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

24 जुलाई को राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे CM डॉ. यादव, वन विकास निगम की होगी विशेष बैठक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर 24 जुलाई को स्वर्ण जयंती वर्ष का उद्घाटन एवं राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे।वे ‘विजन डॉक्यूमेंट-2047’ का विमोचन एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे। कार्यक्रम में निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को सम्मानित भी किया जायेगा। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री असीम श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे। गुरुवार 24 जुलाई को प्रात: 10:30 बजे से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान नेहरू नगर भोपाल के ऑडिटोरियम में होने वाले कार्यक्रम के संबंध में प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम श्री व्ही.एन. अम्बाड़े ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना और कर्नाटक राज्य के वन विकास निगम के प्रबंध संचालक द्वारा विभिन्न विषयों जैसे थिनिंग व फेलिंग, जनरल प्लानटेशन, मियॉवाकी प्लानटेशन, डिपॉजिट वर्क, थीम वर्क, ईको टूरिज्म विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया जायेगा। कार्यशाला का उद्देश्य मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा विगत 50 वर्षों में किये गये वानिकी, वन एवं वन्य जीव संरक्षण कार्य को रेखांकित किया जाना है। कार्यक्रम में वन विकास निगम के कार्यों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जायेगा। वनीकरण में निगम की अनेक उपलब्धियां मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना 24 जुलाई 1975 को हुई थी। निगम की स्थापना का उद्देश्य निम्न कोटि के वन क्षेत्रों को तेजी से बढ़ने वाली बहुमूल्य तथा बहु उपयोगी प्रजातियों के रोपण द्वारा उच्च कोटि के वन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में सुधार लाना है। निगम का कार्य प्रदेश के 22 जिलों में संचालित है। निगम अंतर्गत कुल 13 काष्ठगार एवं 15 स्थाई रोपणियां स्थापित हैं। निगम को लगभग 4.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें से वर्ष 2025 तक 3.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का उपचारण किया जा चुका है एवं 3.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया गया है। विगत 2 वर्षों में निगम द्वारा 2 करोड़ 48 लाख पौधों का रोपण किया गया है। निगम की रोपणियों में वर्ष 2025 में कुल 1 करोड़ 70 लाख सागौन रूटशूट सागौन का उत्पादन हुआ है। टाइगर रिजर्व में चुनौती पूर्ण कार्य वन विकास निगम की अधिकांश परियोजना मंडल टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य क्षेत्र बफर जोन से लगे हैं। इन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, भालू एवं हिरण आदि वन्य जीवों के विचरण की उपस्थिति दर्ज की गई है। वन्य जीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये निगम द्वारा बोरीबंधान, तालाब निर्माण एवं झिरियां निर्माण का कार्य किया जाता है। वर्ष 2024-25 में लगभग 60 हजार घनमीटर इमारती काष्ठ एवं 3100 टन बांस का उत्पादन किया गया। जैव विविधता के साथ साथ जलगंगा संवर्धन भी निगम ने व्यावसायिक वृक्षारोपण के साथ जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। निगम द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन’ एवं ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अंतर्गत लगभग 125 करोड़ पौधों का रोपण वृहद स्तर पर किया जा रहा है। निगम को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 170 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।   

भोपाल में 400 करोड़ के निवेश से लगेगा रोजगार का मेला, 1500 युवाओं को मिलेगा लाभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार युवाओं और बहनों के रोजगार के लिए संकल्पित है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गुरुवार 24 जुलाई को भोपाल जिले के औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा में पांच औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने हाल ही में स्पेन और दुबई की यात्रा में अनेक निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष है। गांव से लेकर शहरों तक समृद्धि लाना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभा कर मध्यप्रदेश ने नए औद्योगिक युग की शुरूआत की है। पांच इकाईयों का होगा भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 जुलाई को अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 12.88 हेक्टेयर में 400 करोड़ से अधिक निवेश और लगभग 1500 व्यक्तियों को रोजगार देने वाली 5 इकाइयों का भूमि-पूजन करेंगे। इनमें गारमेंट सेक्टर में गोकुलदास एक्सपोर्टस, टेक्सटाइल सेक्टर में इंडो एकॉर्ड अप्पेरल्स, हाई टेक इलेक्ट्रानिक में एसेडस प्राइवेट लिमिटेड, फार्मा सेक्टर में सिनाई हेल्थ केयर और कृषि उपकरण में समर्थ एग्रीटेक इकाइयां शामिल हैं। मुख्यमंत्री  ने  कहा है कि राज्य सरकार युवाओं और बहनों के रोजगार के लिए संकल्पित है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गुरुवार 24 जुलाई को भोपाल जिले के औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा में पांच औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने हाल ही में स्पेन और दुबई की यात्रा में अनेक निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया है।  मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष है। गांव से लेकर शहरों तक समृद्धि लाना,  स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभा कर मध्यप्रदेश ने नए औद्योगिक युग की शुरूआत की है।    

विकसित भारत @2047 अंतर्गत रोजगार आधारित शिक्षा: रुझान एवं नए अवसर राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यपाल और मुख्यमंत्री हुए शामिल

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को पहचान कर विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम तैयार करें। उन्होंने प्रदेश में देश विदेश से निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल की सराहना की है। अपेक्षा की है कि निवेश परियोजना क्रियान्वयन के साथ ही उद्योग में रोजगार के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के लिए कोर्स प्रारम्भ करें, जिससे परियोजना शुरू होने के साथ ही आवश्यकता अनुसार स्थानीय स्तर के युवा उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज करेंसी का जमाना है, लेकिन स्किल (कौशल) ही करेंसी है, भारत इसे अच्छी तरह समझता है। इसीलिए हम नवाचार करते हुए कौशल विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान और तेजी से बढ़ता राज्य है। इसीलिए हम खेती की पढ़ाई को सामान्य महाविद्यालयों तक लेकर गए हैं। अगर कोई युवा खेती में करियर बनाना चाहे तो उसे आधुनिक तकनीक की जानकारी होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों के दायरे विस्तृत होने चाहिए। सभी कोर्स यहां से संचालित होने चाहिए। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त विचार उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित मध्यप्रदेश @2047 ‘रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही है। कार्यशाला का आयोजन बुधवार को  कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया गया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर कार्यशाला समय की आवश्यकता है। भविष्य की तैयारी का सशक्त मंच है। रोजगार केन्द्रित शिक्षा और विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश के योगदान को बढ़ाने की प्रभावी पहल है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ़ है। यह समय के साथ तालमेल बैठाने, नवाचारों को अपनाने और नवीन अवसरों का लाभ उठाने के लिए व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को सक्षम बनाती है। इसलिए हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार के अवसरों तक सुलभ पहुंच देने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा से मनुष्य का समग्र विकास होता है। यह आयोजन को बदलते दौर में रोजगार आधारित शिक्षा और अवसरों का विकास करने के क्रम किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सबसे पहले 1968 और उसके बाद 1988 में मंथन हुआ। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर तीसरी बार मंथन हो रहा है। लेकिन आजादी के बाद 2020 से पहले कभी भी लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से बाहर आकर विचार नहीं किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल शासन की मंशा को समझने वाले दृष्टा थे। इसी भाव से उन्होंने सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करते हुए देश की जड़ों को मजबूत करने का कार्य किया। महात्मा गांधी ने अहिंसा के अस्त्र का उपयोग करते हुए देश के गांव-गांव तक स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया, भारत के साथ आने के लिए लालायित है। आक्रांताओं ने भारतीय संस्कृति पर आक्रमण करने के लिए हमारी शिक्षा के बड़े केंद्रों तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला को तोड़ने और जलाने का कार्य किया। मध्य प्रदेश 64 कलाओं की शिक्षा वाली भूमि है। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। हम उस देश के वासी हैं, जहां होठों पर सच्चाई रहती है और जो होठों पर सच्चाई लेकर आए वही शिक्षा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में शासकीय और निजी मिलाकर 70 से अधिक विश्वविद्यालय हैं। भारत विश्वगुरु है और गुरु वह जो हमारे जीवन में अंधकार हटाकर उसे प्रकाशमय कर दे। जेएनयू ने भी मध्यप्रदेश की कुलगुरु परंपरा को आत्मसात कर लिया है। सरकार प्रदेश में 10 हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थाओं में एनईपी लागू करने पर आगे बढ़ चुकी है। प्रदेश में 220 से अधिक सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की गई है। यहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक कंप्यूटर कोडिंग लैब स्थापित की गई हैं। शिक्षा केवल कागज की डिग्री लेने के लिए न हो, बल्कि वह भविष्य की चुनौतियों से लड़ने और उसे समझने में समर्थ हो। इसीलिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्युटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हमने शीर्ष स्तर पर पहुंचने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पशुधन है, इसीलिए राज्य सरकार प्रदेश में वेटेनरी कॉलेज की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है। हम सिंचाई के रकबे के साथ-साथ मत्स्य उत्पादन को भी बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा हर काल में सर्वोच्च रही है। भारतीय संस्कृति में संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए रोजगार देने की परंपरा थी। बिना संस्कारों के हम श्रेष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक नहीं बना सकते हैं। प्रदेश में नई शिक्षा नीति और कार्य की जवाबदेही तय करने की पहल देश भर में स्थान बनाएगी और प्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। राज्यपाल पटेल का उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने पौधा, श्रीफल, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यशाला में विषय -विशेषज्ञ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और आई.ई.यू.ए.सी. के निदेशक डॉ. ए.सी. पांड़े ने विचार रखे। राष्ट्रीय कार्यशाला के प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने स्वागत उद्बोधन दिया। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. भरत शरण सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता, उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा, प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, वरिष्ठ प्राध्यापक और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित रहे।