samacharsecretary.com

निवेश प्रस्तावों की पड़ताल: 14 जिलों में जांच के दौरान 40% दिक्कतें सुलझाईं: CM योगी

लखनऊ  वैश्विक निवेशक सम्मेलन में हुए एमओयू को धरातल पर उतारने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम मैदान में उतार दी गई है। इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद के निर्देश पर टीमों ने 14 जिलों का औचक निरीक्षण कर एमओयू में आने वाली दिक्कतों को समझा। इसके लिए जिलों में प्रस्तावित निवेश परियोजनाओं को 24 मानकों की कसौटी पर कसा गया। इस कवायद की खास बात ये रही कि 40 फीसदी से ज्यादा दिक्कतों का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। नवंबर में भूमि पूजन समारोह का पांचवां संस्करण प्रस्तावित है। इसके लिए दस लाख करोड़ रुपये की तैयार परियोजनाओं का लक्ष्य रखा गया है। जनवरी-फरवरी में वैश्विक निवेशक सम्मेलन होना है। दोनों बड़े आयोजनों की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी के रूप में इन्वेस्ट यूपी की है। इसे देखते हुए इन्वेस्ट यूपी तैयारी चुस्त-दुरुस्त करने में जुटा है। इसी कड़ी में अधिकारियों की टीम बनाकर 14 जिलों का औचक निरीक्षण कराया गया। इन 24 बिंदुओं पर परखा जिलों का प्रदर्शन उद्यमी मित्रों और जिला उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधकों ने एमओयू को धरातल पर उतारने के लिए किस तरह से विश्लेषण किया। निवेशकों के साथ कितनी बैठकें कीं। निवेशकों के मुद्दों पर क्या किया। ऑफिस का वातावरण कैसा है। निवेशक ऑफिस में खुद को कितना सहज महसूस करता है। बैठने की व्यवस्थाएं क्या हैं। इन्वेस्ट यूपी की तैयारियों को कैसे पेश कर रहे हैं। कुल कितने लोगों ने निवेश को लेकर रुचि जाहिर की है। कितने एमओयू हुए हैं। कितने एमओयू भूमि पूजन समारोह-4.0 और कितने निवेश समारोह-5.0 के लिए हुए। कितने निवेशक पीछे लौट गए। कितनी इकाइयों का निर्माण और कितने में उत्पादन शुरू हो गया। औद्योगिक भूखंडों की स्थिति। ग्राम सभा की जमीनों की उपलब्धता, बीमार इकाइयों की संख्या और निवेश मित्र से जुड़े मुद्दे आदि। उद्योग बंधु की बैठकों का मांगा तीन महीने का रिकॉर्ड सीईओ विजय किरण आनंद ने उद्योग बंधु की बैठक में उठने वाले मुद्दों को प्राथमिकता से दूर करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सभी 75 जिलों से पिछले तीन महीने का उद्योग बंधु की बैठकों का रिकॉर्ड मांगा गया है। इसमें निवेशकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर की गई कार्यवाही का ब्योरा भी तलब किया गया है। उन्होंने उद्यमी एसोसिएशन के फीडबैक को गंभीरता से लेेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नए निवेश प्रस्तावों को ब्योरा अलग से तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

एचआरटीसी बस हादसा: सड़क से फिसलकर गिरी बस, पांच लोगों की मौत, कई घायल

सरकाघाट-मंडी हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट उपमंडल में मसेरन के पास तरांगला में बड़ा सड़क हादसा हुआ है। यात्रियों से भरी हिमाचल पथ परिवहन निगम(एचआरटीसी) की बस अनियंत्रित होकर नीचे खेतों में जा गिरी। हादसे में  पांच यात्रियों की माैत हो गई है। करीब 20 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में तीन महिलाएं व दो पुरुष शामिल हैं। घायलों का सरकाघाट अस्पताल में उपचार चल रहा है। चंबा में शिक्षक की मौत उधर, चंबा जिले के मंडून गांव में बीती रात को एक शिक्षक की सड़क हादसे में माैत हो गई।  जानकारी के अनुसार गाड़ी अनियंत्रित होकर टीन की छत पर गिर गई। हादसे में खेम राज पुत्र बृजलाल निवासी बुंदेडी की माैत हो गई।  पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने हादसे की पुष्टि की है।  

औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार: अचारपुरा में 5 इकाइयों का भूमि-पूजन आज

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज अचारपुरा में करेंगे 406 करोड़ रूपये के निवेश की 5 औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन अचारपुरा में 406 करोड़ के निवेश को हरी झंडी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे भूमि-पूजन औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार: अचारपुरा में 5 इकाइयों का भूमि-पूजन आज मुख्यमंत्री गारमेंट इकाई का भ्रमण करेंगे भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मध्यप्रदेश को औद्योगिक और रोजगार संपन्न राज्य बनाने की पहल रंग ला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 जुलाई को भोपाल के अचारपुरा में 406 करोड़ के निवेश वाली 5 औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन करेंगे। साथ ही 8 उद्योगों के निवेशकों को भूमि आवंटन के आशय-पत्र भी सौपेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत अचारपुरा स्थित गोकलदास एक्सपोर्ट्स की गारमेंट यूनिट के भ्रमण से होगी, जहाँ लगभग 2500 महिलाएँ कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यरत महिला श्रमिकों से संवाद करेंगे और इकाई में हो रहे उत्पादन कार्यों का अवलोकन करेंगे। यह इकाई न केवल औद्योगिक गतिविधियों बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। टेक्सटाइल, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मिलेगा विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव टेक्सटाइल, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से जुड़ी 5 प्रमुख इकाइयों का भूमि -पूजन करेंगे। इसमें इंडो एकॉर्ड अप्पैरल्स द्वारा 125 करोड़ रूपये के निवेश से 500 रोजगार, एसेड्स प्रा. लि. द्वारा 106 करोड़ रूपये के निवेश से 100 रोजगार, सिनाई हेल्थकेयर द्वारा 100 करोड़ रूपये से 200 रोजगार, समर्थ एग्रीटेक द्वारा 50 करोड़ रूपये से 200 रोजगार और गोकलदास एक्सपोर्ट्स द्वारा 25 करोड़ रूपये के निवेश से 500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। ये सभी 5 इकाइयाँ 12.88 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित होगी, जिसमें 406 करोड़ रूपये का निवेश और 1500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। विशेष औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेगा अचारपुरा मुख्यमंत्री डॉ. यादव अचारपुरा में 31.21 हेक्टेयर भूमि पर विकसित की जा रही नई औद्योगिक परियोजना का भूमि-पूजन भी करेंगे। यह परियोजना लगभग 15.61 करोड़ रूपये से विकसित की जाएगी, जिससे भविष्य में 800 करोड़ रूपये तक के निवेश आकर्षित होने की संभावना है और 1000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इस क्षेत्र को विशेष रूप से टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर के लिए विकसित किया जा रहा है। 8 नई इकाइयों को सौंपे जाएंगे भूमि आवंटन के आशय-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में महालक्ष्मी दाल उद्योग, जियो फिल्टेक, प्रवाह एंटरप्राइजेज, योगी इंडस्ट्रीज, अजमेरा इंडस्ट्रीज, सामवी एंटरप्राइजेज और बैग क्रिएशन इंडिया इकाइयों को औद्योगिक भूखंड आवंटन के आशय पत्र भी सौंपेंगे। ये 8 इकाइयाँ 12494.5 वर्ग मीटर भूमि पर 1770 लाख रूपये का निवेश करेंगी और 186 से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी। निवेशकों ने जताया विश्वास, सराहा सरकार का सहयोग गोकलदास एक्सपोर्ट्स के प्रतिनिधि प्रदेश में निवेश के अनुभवों को साझा करेंगे। मध्यप्रदेश की स्थिर नीतियाँ, कुशल श्रमिक बल और समय पर मिल रही सुविधाओं से उन्होंने अचारपुरा में विस्तार का निर्णय लिया है। टेक्सटाइल, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के अन्य उद्यमी भी प्रदेश सरकार और प्रशासन द्वारा दिए जा रहे सक्रिय सहयोग और नीतियों को साझा करेंगे। निवेश के लिए सुविधाजनक वातावरण, कुशल लॉजिस्टिक्स और 'प्लग एंड प्ले' की सुविधा कार्यक्रम में प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह  अचारपुरा को निवेशकों के लिए उद्योग अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा दी रही सुविधाओं की जानकारी देंगे। सरकार द्वारा निवेशकों को 'प्लग एंड प्ले' मॉडल, तेज़ स्वीकृति प्रक्रियाएँ और बेहतर लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सुविधाओं से औद्योगिक इकाइयों को सुगमता से संचालन का लाभ मिलेगा और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियाँ तेज़ होंगी।

उज्जैन बनेगा विकास और विरासत का प्रतीक: सीएम डॉ. यादव

बदलते दौर का उज्जैन विश्व में छोड़ेगा अनूठी छाप: मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैश्विक मंच पर चमकेगा उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विज़न आध्यात्मिक नगरी से स्मार्ट सिटी तक: उज्जैन का नया दौर उज्जैन बनेगा विकास और विरासत का प्रतीक: सीएम डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सौंपी गई स्वच्छता अवार्ड की ट्राफी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बदलते दौर का उज्जैन सिर्फ उज्जैन के लिए नहीं बल्कि भारत और पूरे विश्व के लिए महवपूर्ण छाप छोड़ने का कार्य करेगा। मेट्रोपॉलेटिन सिटी में शामिल होने के बाद इंदौर-उज्जैन वृहद महानगरीय क्षेत्र बन जाएगा। उज्जैन नगर निगम के महापौर, सभापति और अन्य पदाधिकारियों ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास के समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर उसे 10 लाख की आबादी श्रेणी में उज्जैन को सर्वश्रेष्ठ स्वच्छता आवार्ड की उपलब्धि से अवगत करवाकर उन्हें ट्राफी और प्रशस्ति पत्र सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन से आए जनप्रतिनिधि को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों ओर नागरिकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश को स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 पुरस्कारों में मध्यप्रदेश को कुल 8 अवार्ड मिले हैं, जो हर्ष और गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अभिनंदन के पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने स्वच्छता पुरस्कारों के लिए अनेक श्रेणियां निर्धारित कीं जिससे अनेक नगरीय निकाय योग्य होने पर पुरस्कार से वंचित नहीं हुए। अवंतिका नगरी की पहचान कई तरह की है। बाबा महाकाल की नगरी होने के साथ ही उज्जैन साइंस सिटी और खगोल विज्ञान की नगरी है। उज्जैन का गौरवशाली इतिहास है और राष्ट्र प्रेम भी उज्जैन के नागरिकों के संस्कार में शामिल है। विश्व के सबसे बड़े मेले सिंहस्थ: 2028 को यादगार बनाना है: मुख्यमंत्री डॉ यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ:2028 को यादगार बनाना है। यह विश्व का सबसे बड़ा मेला होगा। भविष्य में ग्वालियर और जबलपुर महानगरीय क्षेत्र भी परस्पर कनेक्ट होंगे। इस तरह जुड़वा महानगरीय क्षेत्र प्रदेश की पहचान बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय था जब नागरिकों को सिंगल रोड से आना जाना होता था। आज देवास-इंदौर सिक्स लेन मार्ग है। अन्य अनेक फोर लेन और सिक्स लेन सड़कें आवागमन को आसान बना रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कर विरासत को सहेजने और विकास को तीव्र करने का कार्य हुआ है। उज्जैन में कोठी पैलेस में वीर भारत संग्रहालय, भारत के महापुरुषों और राष्ट्रभक्तों की गाथा बताने का कार्य करेगा। उज्जैन के महापौर श्री मुकेश टटवाल ने कहा कि 17 जुलाई को नई दिल्ली में विज्ञान भवन में हुए पुरस्कार समारोह में उज्जैन को 3 से 10 लाख आबादी की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ शहर का अवार्ड देते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने तीन बार उज्जैन का विशेष उल्लेख किया। वे गत वर्ष सितम्बर माह में सफाई मित्रों के सम्मान कार्यक्रम में उज्जैन आई थीं तब उन्होंने महाकाल मंदिर परिसर को बुहारने का कार्य भी किया था। विधायक श्री अनिल जैन कालूखेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कर्म में विश्वास रखते हैं। उन्होंने केन-बेतवा सहित अन्य अंतर्राज्जीय सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए दिन रात एक कर दिया। नगर निगम उज्जैन की अध्यक्ष श्रीमती कलावति यादव ने उज्जैन को प्राप्त उपलब्धि के लिए जनप्रतिधियों, नागरिकों, प्रशासनिक अमले और सफाई मित्रों की सक्रिय भूमिका की प्रशंसा की। श्री संजय अग्रवाल, श्री राजेंद्र भारती, अनेक पार्षदगण,उज्जैन नगर निगम के आयुक्त श्री आशीष पाठक भी कार्यक्रम में शामिल थे।  

मध्यप्रदेश के बड़े गांवों को मिलेगा नियोजित विकास का तोहफा, मास्टर प्लान की तैयारी शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के 2000 से ज्यादा आबादी वाले गांवों को आदर्श गांव बनाने के लिए जल्द ही एक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. इसके लिए संभागों से 5-5 गांवों का चयन किया गया है. प्रदेश के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि इस योजना के तहत पहले चरण में राज्य के संभागों से 5-5 गांवों का चयन किया गया है, जिन्हें आदर्श गांवों के रूप में विकसित किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि मास्टर प्लान का उद्देश्य 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों का विकास करना है ताकि विकास का प्रवाह अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंच सके. इस योजना का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है जहां विकास को लागू करके बदलाव लाया जा सके. इस मामले पर बात करते हुए पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश के गांवों को लेकर मास्टर प्लान का उद्देश्य 2,000 से अधिक आबादी वाले गांवों को विकसित करना है। इस मास्टर प्लान की विकास की धारा अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रयास ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है जहां विकास को अमली जामा पहना कर परिवर्तन लाया जा सके। इन गांवो के विकास के लिए सरकार की तरफ से मास्टर प्लान बनाकर इनका विकास किया जाएगा। इससे लोगों को काफी सुविधाएं मिल जाएंगी मंत्री ने कहा कि दो हजार से अधिक की आबादी वाले गांवों की पहचान होनी है ताकि उन्हें आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पांच संभाग से पांच गांव लिए गए हैं, जिनमें इंदौर का परवलिया, उज्जैन का चिंतामन जवासिया, ग्वालियर का बदरवास, जबलपुर का बरमान और सागर का मडियादो शामिल हैं। पटेल ने कहा कि इन गांवों को आदर्श के तौर पर विकसित किया जाएगा ताकि अन्य गांवों के लिए योजना बनाने में सुविधा हो। प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों की पहचान की जानी है ताकि उन्हें आदर्श गांवों के रूप में विकसित किया जा सके. उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पांच संभागों से 5 गांवों को चुना गया है. इनमें इंदौर का परवलिया, उज्जैन का चिंतामन जवासिया, ग्वालियर का बदरवास, जबलपुर का बरमान और सागर का मड़ियादोह. उन्होंने कहा कि इन गांवों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि अन्य गांवों के लिए योजना बनाना आसान हो सके. 

अब पुरुष भी ले सकेंगे गर्भनिरोधक गोली, वैज्ञानिकों ने पास किया मानव परीक्षण का पहला चरण

नई दिल्ली पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोली की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है. YCT-529 नाम की इस नई गोली ने पहला ह्यूमन सेफ्टी टेस्ट पास कर लिया है. ये गोली बिना हार्मोन के पुरुषों में शुक्राणु (स्पर्म) बनने की प्रक्रिया को रोकती है. अभी ये शुरुआती टेस्ट था, जिसमें 16 लोगों पर जांच की गई कि गोली शरीर में सही मात्रा में पहुंचती है या नहीं और क्या इससे कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं. अच्छी खबर ये है कि कोई बड़ा साइड इफेक्ट नहीं दिखा. अब ये गोली बड़े टेस्ट्स की ओर बढ़ रही है, जहां इसकी सेफ्टी और असर दोनों की जांच होगी. आइए, समझते हैं कि ये गोली क्या है? कैसे काम करती है? पुरुषों के लिए ये क्यों खास है? पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोली: क्या है ये नया आविष्कार? अभी तक पुरुषों के पास गर्भनिरोध के लिए सिर्फ दो विकल्प थे: कन्डोम और वासेक्टॉमी (नसबंदी). कन्डोम हर बार इस्तेमाल करना पड़ता है. वासेक्टॉमी एक स्थायी तरीका है, जिसे उलटना (रिवर्सल) मुश्किल होता है. लेकिन YCT-529 नाम की ये गोली पुरुषों के लिए नया और आसान विकल्प ला सकती है. ये गोली…     बिना हार्मोन के काम करती है: महिलाओं की गर्भनिरोधक गोलियों में हार्मोन होते हैं, जो कई बार साइड इफेक्ट्स जैसे मूड स्विंग्स या वजन बढ़ना लाते हैं. YCT-529 में ऐसा कुछ नहीं है.     शुक्राणु बनने से रोकती है: ये पुरुषों के शरीर में शुक्राणु बनाने की प्रक्रिया को अस्थाई तौर पर बंद कर देती है.     उलटने योग्य (रिवर्सिबल): गोली बंद करने के 4-6 हफ्तों में पुरुष की फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) वापस आ जाती है. 22 जुलाई 2025 को Communications Medicine जर्नल में इस टेस्ट के नतीजे छपे. यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा और कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने इस गोली को बनाया. YourChoice Therapeutics कंपनी इसके टेस्ट्स कर रही है. कैसे काम करती है YCT-529? YCT-529 गोली पुरुषों के शरीर में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को रोकती है. ये कैसे होता है, समझते हैं…     रेटिनॉइक एसिड रिसेप्टर अल्फा: हमारे शरीर में एक प्रोटीन होता है, जिसे रेटिनॉइक एसिड रिसेप्टर अल्फा कहते हैं. ये प्रोटीन शुक्राणु बनाने में अहम रोल निभाता है. इसे एक ताले की तरह समझिए, जिसमें विटामिन A (रेटिनॉइक एसिड) एक चाबी की तरह काम करता है. जब चाबी ताले में लगती है, तो शुक्राणु बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.     YCT-529 का जादू: ये गोली उस चाबी को ताले में लगने से रोकती है. इससे शुक्राणु बनने की प्रक्रिया रुक जाती है. पुरुष अस्थाई तौर पर बांझ (इन्फर्टाइल) हो जाता है.     बिना हार्मोन: ये गोली हार्मोन को छूती तक नहीं, इसलिए इससे हार्मोनल बदलाव जैसे मूड स्विंग्स, वजन बढ़ना या यौन इच्छा में कमी जैसी समस्याएं नहीं होतीं. वैज्ञानिकों ने इस गोली को बनाने के लिए रेटिनॉइक एसिड रिसेप्टर की संरचना को गहराई से समझा. कई अणुओं (मॉलिक्यूल्स) का टेस्ट किया, ताकि सही दवा बन सके. पहला ह्यूमन टेस्ट: क्या हुआ? पहला टेस्ट 16 पुरुषों (32 से 59 साल की उम्र) पर किया गया. ये टेस्ट सिर्फ ये देखने के लिए था कि…     क्या गोली शरीर में सही मात्रा में पहुंचती है?     क्या इससे कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं, जैसे दिल की धड़कन, हार्मोन, सूजन, मूड या यौन स्वास्थ्य में बदलाव? खास बात: सभी पुरुषों ने पहले वासेक्टॉमी (नसबंदी) करा रखी थी. ऐसा इसलिए, ताकि अगर गोली से कोई लंबा असर हुआ, तो प्रजनन क्षमता पर खतरा न हो. टेस्ट का तरीका कुछ लोगों को प्लेसीबो (बिना दवा की गोली) दी गई, कुछ को कम डोज (90 मिलीग्राम) और कुछ को ज्यादा डोज (180 मिलीग्राम). कुछ ने खाली पेट गोली खाई. कुछ ने खाना खाने के बाद ताकि ये देखा जाए कि खाना दवा के असर को कैसे प्रभावित करता है. नतीजे सभी डोज में गोली शरीर में अच्छी मात्रा में पहुंची. 180 मिलीग्राम डोज सबसे अच्छी थी. शायद यही भविष्य में इस्तेमाल होगी. कोई बड़ा साइड इफेक्ट नहीं दिखा. न हार्मोन बदले.न मूड खराब हुआ. न यौन स्वास्थ्य प्रभावित हुआ. गोली दिन में एक बार लेने की जरूरत होगी, लेकिन ये पक्का अगले टेस्ट्स में तय होगा. डॉ. स्टेफनी पेज (यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन) ने कहा कि ये पुरुषों के लिए नया गर्भनिरोधक विकल्प लाने की दिशा में पहला कदम है. हमें पुरुषों के लिए रिवर्सिबल तरीकों की सख्त जरूरत है.  जानवरों पर टेस्ट: क्या कहते हैं नतीजे? इससे पहले YCT-529 का टेस्ट चूहों और बंदरों पर किया गया था… चूहों पर: गोली लेने के 4 हफ्तों में शुक्राणु बनना बंद हो गया. गोली बंद करने के 4-6 हफ्तों में प्रजनन क्षमता वापस आ गई. मादा चूहों के साथ टेस्ट में 99% गर्भधारण रुका. बंदरों पर: 2 हफ्तों में शुक्राणु की संख्या बहुत कम हो गई. गोली बंद करने के 10-15 हफ्तों में पूरी फर्टिलिटी वापस आ गई. इन नतीजों ने गोली को इंसानों पर टेस्ट करने का रास्ता खोला. क्यों है ये गोली जरूरी? पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोली कई मायनों में खास है…     जिम्मेदारी बांटना: अभी तक परिवार नियोजन (फैमिली प्लानिंग) का ज्यादातर बोझ महिलाओं पर है. ये गोली पुरुषों को भी जिम्मेदारी लेने का मौका देगी.     आजादी: पुरुषों को अपनी प्रजनन क्षमता पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा. वो खुद तय कर सकेंगे कि कब बच्चा चाहिए और कब नहीं.     सुरक्षित और आसान: कंडोम हर बार इस्तेमाल करना पड़ता है. वासेक्टॉमी स्थाई है. ये गोली रोज लेने का आसान और उलटने योग्य विकल्प है.     साइड इफेक्ट्स कम: क्योंकि ये हार्मोन-फ्री है, इससे मूड, वजन या यौन इच्छा पर असर होने की संभावना कम है. गुंडा जॉर्ज (यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा), जिन्होंने इस गोली को बनाया है कहती हैं कि ये गोली कपल्स को ज्यादा विकल्प देगी. पुरुषों को परिवार नियोजन में बराबर का रोल देगी.  आगे क्या? पहला टेस्ट पास होने के बाद अब बड़े टेस्ट्स की बारी है… 28 और 90 दिन का टेस्ट: अभी एक नया ट्रायल चल रहा है, जिसमें पुरुष 28 और 90 दिन तक YCT-529 लेंगे. इसमें सेफ्टी के साथ-साथ शुक्राणु की संख्या पर असर देखा जाएगा. ज्यादा लोग शामिल होंगे: अगले टेस्ट्स में ज्यादा पुरुषों को शामिल किया जाएगा, ताकि … Read more

हेरिटेज ट्रेन से घूमिए मध्यप्रदेश की हसीन वादियां, पातालपानी-कालाकुंड रूट फिर से होगा शुरू

इंदौर   प्रदेश की एकमात्र हेरिटेज ट्रेन, जो यात्रियों को सुहानी वादियों और प्राकृतिक नजारों का अनुभव कराती है, उसका संचालन चार माह के अंतराल के बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेन 26 जुलाई से प्रत्येक शनिवार और रविवार को पातालपानी रेलवे स्टेशन से कालाकुंड तक चलेगी। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल द्वारा इसके संचालन के लिए विभागीय आदेश जारी कर दिया गया है। हालांकि, पातालपानी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को सड़क मार्ग से ही जाना होगा। ट्रेन की यह यात्रा महू तहसील के घने जंगलों, ऊंची-नीची पहाड़ियों, झरनों और पक्षियों की चहचहाहट के बीच से गुजरती है, जिससे यात्रियों को अद्भुत अनुभव मिलता है। प्राकृतिक सौंदर्य और खानपान का मिलेगा लुत्फ पातालपानी का झरना, भुट्टा, मैगी और गरमा-गरम भजिए के साथ इस यात्रा का स्वाद और आनंद कई गुना बढ़ जाएगा। यह पूरा सफर सुबह से शाम तक चलेगा, जिसमें पर्यटक हर पल प्राकृतिक नजारों का भरपूर आनंद उठा सकेंगे। मानसून की शुरुआत होते ही पर्यटक इस हेरिटेज ट्रेन के संचालन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। रेलवे ने हाल ही में एक ट्रायल रन भी किया है जो पूरी तरह सफल रहा। संचालन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही टिकट बुकिंग भी शुरू की जाएगी। महू तहसील के जंगल, पहाड़ियां और उनके बीचे बहते हुए प्राकृतिक झरने, पक्षियों की चहचहाट पातालपानी के झरने और भुट्टे, मैगी, भजिए के आनंद लेने का समय आ चुका है। ये आनंद पातालपानी रेलवे स्टेशन से कालाकुंड रेलवे स्टेशन तक चलने वाली हेरिटेज ट्रेन के सफर में मिलेगा। सुबह से शाम तक के इस सफर में पर्यटकों प्राकृतिक नजारों को देखकर दमक उठेंगे। मानसून शुरू होते ही पर्यटक हेरिटेज ट्रेन संचालन का इंतजार करते हैं। इसके संचालन के लिए रेलवे द्वारा एक बार ट्रायल रन भी कर लिया है, जो सफल भी रहा है। अब रेलवे ने संचालन शुरू करने की सभी तैयारी पूरी कर ली है। जल्द ही टिकट बुकिंग शुरू की जाएगी। हेरिटेज ट्रेन का किराया और खासियत -हेरिटेज ट्रेन के रैक में दो विस्टाडोम और तीन सेकंड क्लास के कोच रहेंगे। -विस्टाडोम का किराया 265 रुपये और नान एसी चेयर कार का किराया 20 रुपये होगा। -टाइमटेबल व स्टापेज सभी पहले की तरह ही रहेंगे। -विस्टाडोम के एक कोच में 60 सीटें हैं, दो कोच में 120 सीट रहेंगी। -विस्टाडोम कोच का एक ओर का किराया 265 रुपए रहेगा। -ट्रेन में नान एसी चेयर कार के तीन कोच रहेंगे। -चेयर कार के दो कोच में 64-64 सीटें और एक कोच में 24 सीटें हैं। -नान एसी चेयर कार का किराया 20 रुपए प्रति सवारी होगा। हेरिटेज ट्रेन से जुड़ी अन्य विशेषताएं 2018 में शुरू हुई थी हेरिटेज ट्रेन मध्य प्रदेश की इस पहली हेरिटेज ट्रेन का संचालन 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुआ था। कुछ माह में ही इस ट्रेन ने प्रदेश सहित देशभर में अपनी पहचान बना ली थी। कोरोना काल के चलते अप्रैल 2020 में इस ट्रेन का संचालन बंद कर दिया गया था। चार अगस्त 2021 को ट्रेन में कई बदलाव कर दोबारा संचालन शुरू किया था। गर्मी का मौसम आते ही मार्च में इसे बंद कर दिया जाता है। विस्टाडोम कोच है आकर्षण का केंद्र रेलवे ने हेरिटेज ट्रेन में पर्यटकों के सफर को बेहतर और आरामदायक बनाने के लिए एसी विस्टाडोम लगाएं हैं। इन कोच में बड़े साइज के विंडो ग्लास, ट्रेलिंग विंडो, स्नैक्स टेबल और साइड पेंट्री हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए कोच में स्वच्छ टायलेट का निर्माण भी किया गया है। कोच की बाहरी भाग को आकर्षक पीवीसी शीट से सजाया गया है। हेरिटेज ट्रेन के रैक में दो विस्टाडोम और तीन नॉन एसी चेयर कार कोच होंगे। विस्टाडोम कोच का एक ओर का किराया 265 रुपए होगा जबकि नॉन एसी चेयर कार का किराया मात्र 20 रुपए प्रति सवारी तय किया गया है। विस्टाडोम कोच में बड़े साइज की खिड़कियां, ट्रेलिंग विंडो, स्नैक्स टेबल और साइड पेंट्री जैसी सुविधाएं होंगी। दो विस्टाडोम कोचों में कुल 120 सीटें होंगी जबकि नॉन एसी चेयर कार के तीन कोचों में कुल 152 सीटें (64+64+24) उपलब्ध होंगी। कोचों में स्वच्छ टॉयलेट और आकर्षक पीवीसी शीट से सजे बाहरी भाग पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाएंगे। 2018 से लेकर अब तक का सफर यह हेरिटेज ट्रेन पहली बार 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुई थी और कुछ ही महीनों में प्रदेश ही नहीं, देशभर में मशहूर हो गई थी। अप्रैल 2020 में कोरोना महामारी के चलते इसका संचालन बंद कर दिया गया था। इसके बाद 4 अगस्त 2021 को कई बदलावों के साथ इसका पुनः संचालन शुरू किया गया था। हर वर्ष गर्मी का मौसम शुरू होते ही मार्च में इस ट्रेन का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाता है, और अब मानसून आते ही एक बार फिर यह पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता की सैर कराने के लिए तैयार है। 

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: घरेलू हिंसा के मामलों में गिरफ्तारी से पहले 2 माह की मोहलत

नई दिल्ली घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है और इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो साल पुराने दिशा-निर्देशों को अपनाते हुए कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत दर्ज मामलों में पुलिस आरोपियों को दो महीने तक गिरफ्तार न करे। कोर्ट ने कहा कि जब कोई महिला अपने ससुराल वालों के खिलाफ 498A के तहत घरेलू हिंसा या दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराए तो पुलिस वाले उसके पति या उसके रिश्तेदारों को दो महीने तक गिरफ्तार न करे। कोर्ट ने दो महीने की अवधि को शांति अवधि कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह आदेश एक महिला IPS अधिकारी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने उस महिला अधिकारी को उससे अलग हुए पति और उसके रिश्तेदारों के उत्पीड़न के लिए अखबारों में माफीनामा प्रकाशित कर माफी मांगने का भी आदेश दिया है। दो माह तक पुलिस कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2022 के दिशानिर्देशों के मुताबिक, दो महीने की शांति अवधि पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तारी सहित कोई भी कार्रवाई करने से रोकता है। HC के दिशानिर्देशों के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत दर्ज मामलों को पहले संबंधित जिले की परिवार कल्याण समिति (FWC) को निपटारे के लिए भेजा जाना चाहिए, और इस दौरान यानी पहले के दो महीनों तक पुलिस कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मंगलवार को इन दिशानिर्देशों को पूरे भारत में लागू करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, "इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 13 जून 2022 को क्रिमिनल रिवीजन नंबर 1126/2022 के विवादित फैसले में अनुच्छेद 32 से 38 के तहत 'आईपीसी की धारा 498ए के दुरुपयोग से बचाव के लिए परिवार कल्याण समितियों के गठन' के संबंध में तैयार किए गए दिशानिर्देश प्रभावी रहेंगे और उपयुक्त अधिकारियों द्वारा लागू किए जाएंगे।" सुप्रीम कोर्ट ने पहले कर दिया था निरस्त बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जारी यह दिशानिर्देश 2017 में राजेश शर्मा एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले पर आधारित हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2018 में सोशल एक्शन फॉर मानव अधिकार बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ इसे संशोधित कर दिया था बल्कि इसे निरस्त भी कर दिया था। इस वजह से FWC निष्क्रिय हो गए थे। बहरहाल, कल के फैसले के साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट का वे दिशानिर्देश अब लागू हो गए हैं। प्रत्येक जिले में FWC को भेजा जाएगा मामला उन दिशा निर्देशों के मुताबिक, प्राथमिकी या शिकायत दर्ज होने के बाद, "शांति अवधि" (जो कि प्राथमिकी या शिकायत दर्ज होने के दो महीने बाद तक है) समाप्त हुए बिना, नामजद अभियुक्तों की कोई गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस "शांति अवधि" के दौरान, मामला तुरंत प्रत्येक जिले में FWC को भेजा जाएगा। दिशा निर्देशों में कहा गया है कि केवल वही मामले FWC को भेजे जाएँगे, जिनमें IPC की धारा 498-A के साथ-साथ, कोई क्षति न पहुँचाने वाली धारा 307 और IPC की अन्य धाराएँ शामिल हैंऔर जिनमें कारावास 10 वर्ष से कम है।

भोपाल को मिलने जा रहा 26 करोड़ की लागत वाला लग्जरी वृद्धाश्रम, हर महीने देना होगा 50 हजार

भोपाल  भोपाल में पहली बार ऐसा वृद्धाश्रम खुलने जा रहा है जिसकी कल्पना आपने सपने में भी नहीं की होगी. ये वृद्धाश्रम आम ओल्ड ऐज होम से बहुत अलग होने वाला है. यहां आपको 24×7 मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी, रहने, खाने पीने की पूरी व्यवस्था भी की गई है. हालांकि इन 5 स्टार जैसी सुविधाओं का लुत्फ उठाने के लिए आपको हर महीने 50-82 हजार खर्ज करने पड़ेंगे. मध्य प्रदेश का पहला लग्जरी वृद्धाश्रम इस वृद्धाश्रम का नाम संध्या छाया रखा गया है जो 1 अगस्त से भोपाल में शुरू हो रहा है. संध्या छाया को एमपी का पहला पेड लग्जरी वृद्धाश्रम माना जा रहा है. इस वृद्धाश्रम को सीनियर सिटिजन की हर जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. संध्या छाया के निर्माण में करीब 26 करोड़ रुपए खर्च किए गए है जिसकी वजह से ये ओल्ड एज होम एक लग्जरी ठिकाना माना जा रहा है. क्या है लग्जरी वृद्धाश्रम की खासियत भोपाल के लिंक रोड-3 के पत्रकार कॉलोनी स्थित संध्या छाया ओल्ड एज होम में आपको सिंगल बेडरुम से लेकर डबल बेडरुम की सुविधा मिलती है. पूरा वृद्धाश्रम 5 एकड़ में फैला हुआ है. पूरे परिसर में सीसीटीवी की सुविधा है. यहां दो रेसिडेंशियल ब्लॉक के साथ लॉन भी बनाया गया है. इस वृद्धाश्रम में 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग रह सकते हैं. कितना है किराया इस वृद्धाश्रम में रहने के लिए आपको हर महीने कम से कम 50 हजार का बजट रखना होगा. सिंगल रुम का 50 हजार वहीं डबल रुम में रहने के लिए प्रति व्यक्ति को  41 हजार रुपए खर्च करने होंगे. रजिस्ट्रेशन के वक्त एक लाख रुपए सिक्योरिटी अमाउंट भी जमा करना होगा . यहां खानापान से लेकर हर बेसिक सुविधाओं का भी खास ख्याल रखा गया है. बुजुर्ग यहां जैसे चाहे वैसे रह सकते हैं. हेल्थ चेकअप के लिए डॉक्टर हफ्ते में एक बार विजिट करेंगे. किसके अंडर में होगा वृद्धाश्रम एमपी सरकार इस वृद्धाश्रम को चलाने की पूरी जिम्मेदारी सेवा भारती को दी है. बुजुर्ग जो अमाउंट देंगे वो राशि सेवा भारती को मिलेगी. वहीं सिक्योरिटी अमाउंट एमपी सरकार को दी जाएगी. आश्रम के मैनेजमेंट, सुविधाओं में विस्तार और स्टाफ को वेतन देने में ये सिक्योरिटी अमाउंट खर्च की जाएगी.   

सरकार ने खोले राज: 1629 डिफॉल्टर नहीं चुका रहे ₹1.62 लाख करोड़ का कर्ज

नई दिल्ली बैंकों से लोन लिया… कारोबार किया… पैसा भी बनाया, लेकिन चुकाने का मन नहीं है. जी हां ऐसे ही विलफुल डिफॉल्टर्स (Wilful Defaulters) के पास देश के तमाम सरकारी बैंकों के बकाये का आंकड़ा चौंकाने वाला है, जिसका खुलासा सरकार ने किया है. संसद के मानसून सत्र में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) ने राज्यसभा में बताया कि PSU Banks से कर्ज लेकर न लौटाने वाले कॉरपोरेट कर्जदारों की संख्या 1600 के पार है और ये 1.62 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दबाए बैठे हैं.   1629 कर्जदारों पर 1.62 लाख करोड़ कर्ज सरकार की ओर से केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया. उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि 31 मार्च 2025 तक पीएसयू बैंकों ने 1629 कॉर्पोरेट कर्जदारों को ऐसे डिफॉल्टर्स के रूप में पहचाना है, जो जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहे हैं. इन विलफुल डिफॉल्टर्स पर कुल मिलाकर 1,62,961 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है. यह आंकड़ा विदेशी कर्जदारों को छोड़कर बैंकों द्वारा बड़े Loan पर सूचना के केंद्रीय भंडार (CRILC) को सौंपी गई रिपोर्टों के आधार पर जुटाया गया है.  क्या होते हैं ये विलफुल डिफॉल्टर?  Wilful Defaulters की ये संख्या और इनके ऊपर कर्ज का आंकड़ा भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों को दर्शाने वाला है. यहां ये जान लेना जरूरी है कि आखिर ये विलफुल डिफॉल्टर होते कौन हैं? तो बता दें कि ये ऐसे लोग या फिर कंपनियां होती हैं, बैंकों से लिया गया कर्ज (Loan) चुकाने की क्षमता तो रखते हैं, लेकिन फिर भी इसे चुकाने से बचने के लिए खुद को दिवालिया घोषित कर लेते हैं. साफ शब्दों में कहें तो ये ऐसे कर्जदार होते हैं, जिनके पास इसे चुकाने के लिए पर्याप्त रकम तो होती है, लेकिन जानबूझकर ये Loan Payment करने से इनकार कर देते हैं. सरकार ऐसे कस रही शिकंजा सरकार ने डिफॉल्टर्स, उनके ऊपर कर्ज का आंकड़ा पेश करने के साथ ही ऐसे कर्जदारों के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों पर भी जोर दिया है. इन पर लिए जाने वाले एक्शन की जानकारी देते हुए बताया गया कि Wilful Defaulters को अतिरिक्त ऋण सुविधाओं मना किया जाता है और इन पर 5 साल के लिए नए बिजनेस शुरू करने पर भी बैन शामिल है. इसके अलावा भविष्य में इस तरह के डिफॉल्ट्स को रोकने के उद्देश्य से इन कॉरपोरेट डिफॉल्टर्स से जुड़ी कंपनियों को इक्विटी मार्केट में एंट्री से भी प्रतिबंधित किया गया है, जिससे उनकी धन जुटाने की क्षमता घटी है या सीमित हो गई है.  पंकज चौधरी ने कहा कि बैंक बड़े मामलों में जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही भी शुरू कर सकते हैं और वे इसके लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, सरकार विलफुल डिफॉल्ट पर अंकुश लगाने के प्रयासों को तेज कर रही है, जिनका बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और फाइनेंशियल हेल्थ पर बड़ा असर पड़ता है. देश छोड़कर भागे कर्जदारों पर एक्शन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मास्टर दिशा-निर्देशों के तहत Willful Defaulters पर घरेलू स्तर पर शिकंजा कसने के अलावा देश छोड़कर भाग गए बड़े डिफॉल्टरों से भी सरकार निपट रही है. वित्त राज्य मंत्री के मुताबिक, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत 9 ऐसे लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उनकी 15,298 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है. यह राष्ट्रीय सीमाओं से परे अपराधियों पर शिकंजा कसने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है.