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सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।

सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।

24 घंटे में 4.5 इंच बारिश का अनुमान, जबलपुर सहित 20 जिलों में रेड अलर्ट, मड़ीखेड़ा डैम से छोड़ा जा रहा पानी

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होने की वजह से तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। आज जबलपुर समेत 20 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को विदिशा, सीहोर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, छतरपुर, दमोह, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, पन्ना, कटनी, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर और उमरिया में भारी बारिश का दौर बना रहेगा। अगले 24 घंटे में इन जिलों में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। इससे पहले बुधवार को नर्मदापुरम के इटारसी में बाढ़ जैसे हालात रहे। भोपाल, इंदौर समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। अगले चार दिन तक भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग कि सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश में फिलहाल मानसून ट्रफ और दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव हैं। इस वजह से प्रदेश में बारिश का दौर शुरू हुआ है। अगले चार दिन तक कहीं भारी तो कहीं अति भारी बारिश का अलर्ट है। छिंदवाड़ा में 9 घंटे में 2.1 इंच बारिश बुधवार को छिंदवाड़ा में 9 घंटे में 2.1 इंच पानी गिर गया। वहीं, गुना में 1.8 इंच, नर्मदापुरम-ग्वालियर में 1.5 इंच, शाजापुर में 1.2 इंच और शिवपुरी में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। भोपाल, दतिया, इंदौर, शिवपुरी, उज्जैन, जबलपुर, छतरपुर के नौगांव, टीकमगढ़, बालाघाट के मलाजखंड, श्योपुर, भिंड, राजगढ़, आगर-मालवा समेत कई जिलों में बारिश का दौर चला। सीजन में अब तक औसतन 21.1 इंच बारिश हुई मध्यप्रदेश में इस सीजन में औसत 21.1 इंच बारिश हो चुकी है जबकि अब तक 14.1 इंच बारिश होनी थी। इस हिसाब से 7.3 इंच बारिश ज्यादा हो चुकी है, जो 53% अधिक है। 3 जिले- निवाड़ी, टीकमगढ़ और श्योपुर में तो कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में सामान्य से 25% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। ग्वालियर समेत 5 जिले भी बेहतर स्थिति में हैं। यहां 80 से 95% तक बारिश हो चुकी है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे पीछे है। इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर और आगर-मालवा में 10 इंच से भी कम पानी गिरा है।  मौसम विभाग ने आज जबलपुर समेत 20 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, विदिशा, सीहोर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, छतरपुर, दमोह, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, पन्ना, कटनी, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर और उमरिया में भारी बारिश का दौर बना रहेगा। अगले 24 घंटे में इन जिलों में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश में अभी मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव हैं। अगले चार दिन तक कहीं अति भारी तो कहीं भारी बारिश हो सकती है। पचमढ़ी में 3.4 इंच बारिश पिछले 24 घंटे के दौरान पचमढ़ी में 3.4 इंच पानी गिर गया। छिंदवाड़ा में 2.6 इंच, गुना में 2.3 इंच, बालाघाट के मलाजखंड में 2.1 इंच, नर्मदापुरम में 1.8 इंच, ग्वालियर में 1.5 इंच, श्योपुर में 1.1 इंच, मंडला में 1 इंच बारिश हुई। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, उमरिया, सिवनी, खजुराहो, जबलपुर, नौगांव, सागर, बैतूल, सीधी, रायसेन, दमोह, शिवपुरी में भी बारिश का दौर रहा। इस बार 7 इंच बारिश ज्यादा मध्यप्रदेश में इस मानसूनी सीजन में औसत 21.1 इंच बारिश हो चुकी है जबकि अब तक 14.1 इंच बारिश होनी थी। इस हिसाब से 7.3 इंच बारिश ज्यादा हो चुकी है, जो 53% अधिक है। 3 जिले- निवाड़ी, टीकमगढ़ और श्योपुर में तो कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में सामान्य से 25% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। ग्वालियर समेत 5 जिले भी बेहतर स्थिति में हैं। यहां 80 से 95% तक बारिश हो चुकी है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे पीछे है। इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर और आगर-मालवा में 10 इंच से भी कम पानी गिरा है। 10 साल में बारिश का ट्रेंड, पहले भोपाल के बारे में जानिए भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 में हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है। साल 2024 में पूरे जुलाई महीने में 15.70 इंच बारिश हुई थी। भोपाल में जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है यानी हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है। अगले चार दिन ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, मध्यप्रदेश में मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव है। इसलिए बारिश हो रही है। अगले चार दिन तक मौसम ऐसा ही रहेगा। कहीं अति भारी तो कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार को भी 20 से ज्यादा जिलों में भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में गिरा पानी रायसेन, उज्जैन, डिंडौरी , नर्मदापुरम, सिवनी मालवा सहित कई जिलों में बुधवार को अच्छी बारिश हुई। उज्जैन में तेज पानी गिर। भोपाल में बूंदाबांदी का दौर चलता रहा। इटारसी में बाजार और सरकारी रेस्ट हाउस में पानी भर गया। जमानी गांव का बिजली सब स्टेशन डूब गया। सिवनी मालवा तहसील के ग्रामीण इलाकों में खेत और रास्ते डूबे रहे। छिंदवाड़ा में 9 घंटे में 2.1 इंच पानी गिर गया। गुना में 1.8 इंच, नर्मदापुरम-ग्वालियर में 1.5 इंच, शाजापुर में 1.2 इंच और शिवपुरी में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। इन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश भारत में मानसून (Monsoon) की एंट्री 24 मई को हुई। मानसून ने सबसे पहले केरल पहुंचा। फिर कर्नाटक में दस्तक दी। तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड, आंध्र प्रदेश होते हुए 16 जून को मानसून एमपी आया। 20 जून तक मानसून ने सभी जिलों को करव कर लिया। तब से सूबे में झमाझम बारिश हो रही है। अब तक 537 मिमी पानी बरस चुका है। यह सामान्य वर्षा 359 मिमी से 49 फीसदी ज्यादा है। निवाड़ी में सबसे ज्यादा 225 फीसदी पानी बरसा। छतरपुर में 177, मंडला 102, टीकमगढ़ 165, अशोकनगर 116, ग्वालियर 142, मुरैना 131, श्योपुर 191 और शिवपुरी में 141 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। 

Mumbai blast case : बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 12 आरोपी फिलहाल नहीं होंगे बरी

मुंबई  2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में 12 आरोपियों को बरी किए जाने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर SC ने अंतरिम रोक लगाई SC ने महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर नोटिस जारी.2006 के मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सभी 12 आरोपियों को बरी करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रोक लगा दी। महाराष्ट्र सरकार और आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में सात बम विस्फोट हुए थे, जिनमें 187 लोगों की मौत हुई और 800 से अधिक घायल हुए थे। इस मामले में 2015 में विशेष एमसीओसीए कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जिसमें पांच को मृत्युदंड और सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 21 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव और अभियोजन पक्ष की विफलता का हवाला देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।. सीजेआई बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची बेंच के सामने महाराष्ट्र सरकार के वकील ने मामले का उल्लेख किया और मामले की जल्द सुने जाने की मांग की गई. जिस पर कोर्ट ने कहा कि देखिए, इतनी जल्दी क्या है? आठ लोग पहले ही रिहा हो चुके हैं. बरी करने पर रोक केवल दुर्लभतम मामलों में ही लगाई जाती है. 24 जुलाई को होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट स मामले में गुरुवार (24 जुलाई) को सुनवाई करेगा. महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि इसकी जल्द सुनवाई जरूरी है. मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले को गुरुवार के लिए सूचीबद्ध किया है. हाई कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को किया बरी सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 के मुंबई सीरियल ट्रेन ब्लास्ट मामले में सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा, इससे यह विश्वास करना मुश्किल है कि आरोपी ने अपराध किया है. फैसला सुनाते हुए सबूतों के अभाव में कोर्ट ने 12 आरोपियों को बरी कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि आरोपियों ने अपराध किया है, इसलिए उन्हें बरी किया जाता है. कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर वो किसी दूसरे मामले में वॉन्टेड नहीं हैं, तो उन्हें फौरन जेल से रिहा किया जाए. जांच एजेंसियों के कामकाज पर सवाल करीब 19 साल बाद मिली इस राहत ने जहां इन निर्दोषों के परिवारों को सुकून पहुंचाया है, वहीं इस फैसले ने देश की जांच एजेंसियों के कामकाज पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोपियों को बरी किए जाने से जांच की विश्वसनीयता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि हाई कोर्ट ने सिमी और लश्कर-ए-तैयबा की संलिप्तता वाली एटीएस की कहानी को सिरे से खारिज कर दिया. हाईकोर्ट का यह फैसला मामले की जांच कर रही महाराष्ट्र एटीएस के लिए बड़ा झटका है. एजेंसी ने दावा किया था कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के सदस्य थे और उन्होंने आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के पाकिस्तानी सदस्यों के साथ मिलकर साजिश रची थी. 180 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत विशेष अदालत ने 12 में से 5 को मौत की सजा और 7 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. मौत की सजा पाए एक दोषी की साल 2021 में मौत हो गई थी. 11 जुलाई 2006 को पश्चिमी लाइन पर कई जगहों पर मुंबई लोकल ट्रेनों में हुए 7 विस्फोटों में करीब 180 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. हाई कोर्ट ने 2015 में एक विशेष अदालत की ओर से आरोपियों को दी गई सजा और उनकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली उनकी अपीलों को स्वीकार कर लिया था.  

नई पीढ़ी के संस्कारों पर सवाल: स्पीकर बिरला ने कांग्रेस सांसद को लिया निशाने पर

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को सदन में हंगामा करने के लिए कांग्रेस सदस्यों को आड़े-हाथों लिया और कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के संस्कार सदन में नारेबाजी करने, तख्तियां लाने और मेजें ठोंकने के लिए नहीं रहे हैं, लेकिन इस दल के मौजूदा सांसदों का आचरण पूरा देश देख रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही बिहार में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विषय पर हंगामा किया जिससे कार्यवाही बाधित हुई। बिरला ने कहा, 'आपसे पहले भी कहा गया है कि प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है। इसमें जनता के महत्वपूर्ण सवाल होते हैं और सरकार की जवाबदेही होती है…कई सांसदों ने कहा कि उनका प्रश्नकाल के दौरान मुश्किल से प्रश्न आता है, लेकिन आप लोगों का जिस तरह का व्यवहार होता है, वो संसद की गरिमा के अनुकूल नहीं है।' उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बगैर कहा, 'आप लोग इतने पुराने राजनीतिक दल के संसद सदस्य हो, जिसका इस सदन के अंदर गरिमा और मर्यादा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। लेकिन लोग देखेंगे कि आप किस तरह से सदन में व्यवहार करते हैं, तख्तियां लेकर आते हैं और मेजें ठोकते हैं।' लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों का आह्वान किया कि वे संसद की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखें। उनका कहना था, 'यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतंत्र के अंदर हमारी पारदर्शिता और जवाबदेही को दुनिया जानती है। आप इस तरह का आचरण करेंगे तो इसका लोकतांत्रिक संस्थाओं में क्या संदेश जाएगा।' बिरला ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से कहा, 'वेणुगोपाल जी, क्या आप अपने सांसदों को यही सिखाते हो। नारेबाजी करना, तख्तियां लाना, मेज थपथपाना आपकी पार्टी के संस्कार नहीं रहे हैं, लेकिन नई पीढ़ी जिस तरह का संस्कार पेश कर रही है वो पूरा देश देख रहा है।' उन्होंने कहा, 'आप लोग माननीय हैं, लाखों लोगों ने आपको चुनकर भेजा है…तख्तियां लेकर मेजें तोड़ने के लिए नहीं भेजा है।' बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि तख्तियां लेकर आने पर सदन नहीं चलेगा। लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात का उल्लेख किया कि संसद पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल के बाद नियमों के तहत हर मुद्दे पर चर्चा का अवसर दिया जाएगा। हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी। इससे पहले 21 जुलाई से शुरू हुए मॉनसून सत्र के पहले तीन दिन भी सदन में विपक्ष के हंगामे के कारण कामकाज बाधित रहा।

ऋषभ पंत के अंगूठे में फ्रैक्चर, मैनचेस्टर में 10 ख‍िलाड़‍ियों के साथ खेलेगी टीम इंड‍िया? सब्स्टीट्यूट रूल पर उठे सवाल

मैनचेस्टर भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को बुधवार को चौथे टेस्ट के पहले दिन इंग्लैंड के तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वीप करने की कोशिश में ‘रिटायर्ड हर्ट’ होकर मैदान से बाहर ले जाया गया. पंत को दाहिने पैर में चोट लगी, उस समय वह 48 गेंदों में 37 रन बनाकर खेल रहे थे. पहले तो उनका मैदान पर ही उपचार किया गया, लेकिन बाद में उन्हें एम्बुलेंस जैसी गाड़ी में बैठाकर मैदान से बाहर ले जाया गया. अब बताया जा रहा है कि ऋषभ पंत के दाहिने पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है. डॉक्टरों ने उन्हें कम से कम 6 हफ्ते आराम की सलाह दी है.   इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने ऋषभ पंत की पैर की चोट के बाद टेस्ट क्रिकेट के नियमों में बदलाव की मांग की, जबकि एक और पूर्व इंग्लैंड कप्तान एलिस्टेयर कुक इससे सहमत नहीं दिखे. माइकल वॉन ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण चोट अब टेस्ट मैच को असंतुलित बना देगी. पंत के अंगूठे में फ्रैक्चर, 6 हफ्ते के ल‍िए हुए बाहर टीम इंड‍िया को इंग्लैंड दौरे के बीच बड़ा झटका लगा है. स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के दाहिने पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है. डॉक्टरों ने उन्हें कम से कम 6 हफ्ते आराम की सलाह दी है. ऐसे में पंत की वापसी पर भी फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है. मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन वो चोटिल होकर रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से वापस लौटे थे.  भारत की पारी के 68वें ओवर में, जब पंत 37 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तो उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाज क्रिस वोक्स के खिलाफ रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके जूते पर लग गई. गेंद ने उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा लिया और पैर की उंगली पर जा लगी. इसके बाद पंत जमीन पर लेट गए और दर्द में कराहने लगे. उनका पैर सूज गया था और खून भी निकल रहा था. वह चल नहीं पा रहे थे, और फिजियो की मदद से उन्हें मेडिकल टीम की गाड़ी में बैठाकर मैदान से बाहर ले जाया गया. बीसीसीआई सूत्रों ने बताया,'स्कैन में फ्रैक्चर पाया गया है.वह 6 हफ्ते तक नहीं खेल सकेंगे. मेडिकल टीम देख रही है कि क्या वह पेनकिलर लेकर दोबारा बल्लेबाजी कर सकते हैं, लेकिन अभी तो वह चल भी नहीं पा रहे हैं, इसलिए उनके दोबारा खेलने की संभावना बहुत कम है.' इस बीच चयन समिति ने अंतिम टेस्ट (31 जुलाई से 4 अगस्त, ओवल) के लिए ईशान किशन को टीम में जोड़ने का फैसला किया है क्योंकि पंत अब उस मैच में नहीं खेल पाएंगे. भारत पहले से ही चोट की समस्या से जूझ रहा है. ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी (घुटने की चोट) पहले ही बाहर हैं और तेज गेंदबाज आकाश दीप (जांघ की चोट) और अर्शदीप सिंह (अंगूठे की चोट) भी चौथे टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं. वॉन ने टेस्ट मैच स्पेशल पर कहा, 'मुझे यह बात पसंद नहीं कि अब मैच के चार दिन बाकी हैं और इस शानदार सीरीज के अगले चार दिन 10 बनाम 11 खिलाड़ियों के बीच खेले जाएंगे.' उन्होंने सुझाव दिया कि चोट की स्थिति में खिलाड़ी को बदलने की अनुमति दी जानी चाहिए. वॉन ने आगे कहा, 'जब सिर की चोट के लिए सब्स्टीट्यूट की इजाजत दी गई थी, तब भी मैं कह रहा था कि क्यों न पहली पारी में किसी भी स्पष्ट चोट की स्थिति में सब्स्टीट्यूट की अनुमति हो.' उन्होंने सब्स्टीट्यूट मामले में कहा, 'अगर यह दूसरी पारी में होता है, तो टीमों द्वारा नियमों का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन अगर चोट साफ तौर पर दिख रही है- जैसे किसी का हाथ या पैर टूटना या मांसपेशियों में गंभीर खिंचाव..  तो यह साफ है कि खिलाड़ी आगे नहीं खेल सकता. ऐसे में सब्स्टीट्यूट की अनुमति होनी चाहिए.' दूसरी तरफ, एलिस्टेयर कुक ने इस सुझाव पर सवाल उठाए. उन्होंने एक काल्पनिक उदाहरण देकर बात रखी, 'मैं अभी तय नहीं कर पा रहा कि क्या सही है. लेकिन मान लीजिए पंत दर्द में हैं और बाहर चले गए. बाद में स्कैन में कुछ नहीं निकला- बस एक मामूली चोट (bruise) है. तो क्या उसे फिर से खेलना चाहिए?' कुक ने कहा,  'अगर पैर टूट गया होता, तो बात अलग होती…  लेकिन कई बार किसी को गेंद लगती है, हाथ हिलता नहीं और बहुत दर्द होता है. पर असल में सिर्फ सूजन होती है. तो क्या उसे भी सिर्फ तकलीफ के आधार पर बदला जा सकता है, भले ही चोट गंभीर न हो?' दरअसल, वोक्स की फुल लेंथ गेंद पंत के पैर के अंगूठे पर जोर से लगी. इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने एलबीडब्ल्यू की अपील की, लेकिन रिव्यू में देखा गया कि बल्ले का हल्का सा किनारा लगा था, जिससे पंत बच गए. चोट के बाद पंत के पैर से खून निकलता दिखा और उस हिस्से में सूजन भी थी. यह इस सीरीज में पंत की दूसरी चोट है. इससे पहले लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान विकेटकीपिंग करते हुए उनकी उंगली में चोट लगी थी, जिससे वह इंग्लैंड की दूसरी पारी में विकेटकीपिंग नहीं कर सके थे.

ऋषभ पंत के अंगूठे में फ्रैक्चर, मैनचेस्टर में 10 ख‍िलाड़‍ियों के साथ खेलेगी टीम इंड‍िया? सब्स्टीट्यूट रूल पर उठे सवाल

मैनचेस्टर भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को बुधवार को चौथे टेस्ट के पहले दिन इंग्लैंड के तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वीप करने की कोशिश में ‘रिटायर्ड हर्ट’ होकर मैदान से बाहर ले जाया गया. पंत को दाहिने पैर में चोट लगी, उस समय वह 48 गेंदों में 37 रन बनाकर खेल रहे थे. पहले तो उनका मैदान पर ही उपचार किया गया, लेकिन बाद में उन्हें एम्बुलेंस जैसी गाड़ी में बैठाकर मैदान से बाहर ले जाया गया. अब बताया जा रहा है कि ऋषभ पंत के दाहिने पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है. डॉक्टरों ने उन्हें कम से कम 6 हफ्ते आराम की सलाह दी है.   इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने ऋषभ पंत की पैर की चोट के बाद टेस्ट क्रिकेट के नियमों में बदलाव की मांग की, जबकि एक और पूर्व इंग्लैंड कप्तान एलिस्टेयर कुक इससे सहमत नहीं दिखे. माइकल वॉन ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण चोट अब टेस्ट मैच को असंतुलित बना देगी. पंत के अंगूठे में फ्रैक्चर, 6 हफ्ते के ल‍िए हुए बाहर टीम इंड‍िया को इंग्लैंड दौरे के बीच बड़ा झटका लगा है. स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के दाहिने पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है. डॉक्टरों ने उन्हें कम से कम 6 हफ्ते आराम की सलाह दी है. ऐसे में पंत की वापसी पर भी फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है. मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन वो चोटिल होकर रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से वापस लौटे थे.  भारत की पारी के 68वें ओवर में, जब पंत 37 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तो उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाज क्रिस वोक्स के खिलाफ रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके जूते पर लग गई. गेंद ने उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा लिया और पैर की उंगली पर जा लगी. इसके बाद पंत जमीन पर लेट गए और दर्द में कराहने लगे. उनका पैर सूज गया था और खून भी निकल रहा था. वह चल नहीं पा रहे थे, और फिजियो की मदद से उन्हें मेडिकल टीम की गाड़ी में बैठाकर मैदान से बाहर ले जाया गया. बीसीसीआई सूत्रों ने बताया,'स्कैन में फ्रैक्चर पाया गया है.वह 6 हफ्ते तक नहीं खेल सकेंगे. मेडिकल टीम देख रही है कि क्या वह पेनकिलर लेकर दोबारा बल्लेबाजी कर सकते हैं, लेकिन अभी तो वह चल भी नहीं पा रहे हैं, इसलिए उनके दोबारा खेलने की संभावना बहुत कम है.' इस बीच चयन समिति ने अंतिम टेस्ट (31 जुलाई से 4 अगस्त, ओवल) के लिए ईशान किशन को टीम में जोड़ने का फैसला किया है क्योंकि पंत अब उस मैच में नहीं खेल पाएंगे. भारत पहले से ही चोट की समस्या से जूझ रहा है. ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी (घुटने की चोट) पहले ही बाहर हैं और तेज गेंदबाज आकाश दीप (जांघ की चोट) और अर्शदीप सिंह (अंगूठे की चोट) भी चौथे टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं. वॉन ने टेस्ट मैच स्पेशल पर कहा, 'मुझे यह बात पसंद नहीं कि अब मैच के चार दिन बाकी हैं और इस शानदार सीरीज के अगले चार दिन 10 बनाम 11 खिलाड़ियों के बीच खेले जाएंगे.' उन्होंने सुझाव दिया कि चोट की स्थिति में खिलाड़ी को बदलने की अनुमति दी जानी चाहिए. वॉन ने आगे कहा, 'जब सिर की चोट के लिए सब्स्टीट्यूट की इजाजत दी गई थी, तब भी मैं कह रहा था कि क्यों न पहली पारी में किसी भी स्पष्ट चोट की स्थिति में सब्स्टीट्यूट की अनुमति हो.' उन्होंने सब्स्टीट्यूट मामले में कहा, 'अगर यह दूसरी पारी में होता है, तो टीमों द्वारा नियमों का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन अगर चोट साफ तौर पर दिख रही है- जैसे किसी का हाथ या पैर टूटना या मांसपेशियों में गंभीर खिंचाव..  तो यह साफ है कि खिलाड़ी आगे नहीं खेल सकता. ऐसे में सब्स्टीट्यूट की अनुमति होनी चाहिए.' दूसरी तरफ, एलिस्टेयर कुक ने इस सुझाव पर सवाल उठाए. उन्होंने एक काल्पनिक उदाहरण देकर बात रखी, 'मैं अभी तय नहीं कर पा रहा कि क्या सही है. लेकिन मान लीजिए पंत दर्द में हैं और बाहर चले गए. बाद में स्कैन में कुछ नहीं निकला- बस एक मामूली चोट (bruise) है. तो क्या उसे फिर से खेलना चाहिए?' कुक ने कहा,  'अगर पैर टूट गया होता, तो बात अलग होती…  लेकिन कई बार किसी को गेंद लगती है, हाथ हिलता नहीं और बहुत दर्द होता है. पर असल में सिर्फ सूजन होती है. तो क्या उसे भी सिर्फ तकलीफ के आधार पर बदला जा सकता है, भले ही चोट गंभीर न हो?' दरअसल, वोक्स की फुल लेंथ गेंद पंत के पैर के अंगूठे पर जोर से लगी. इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने एलबीडब्ल्यू की अपील की, लेकिन रिव्यू में देखा गया कि बल्ले का हल्का सा किनारा लगा था, जिससे पंत बच गए. चोट के बाद पंत के पैर से खून निकलता दिखा और उस हिस्से में सूजन भी थी. यह इस सीरीज में पंत की दूसरी चोट है. इससे पहले लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान विकेटकीपिंग करते हुए उनकी उंगली में चोट लगी थी, जिससे वह इंग्लैंड की दूसरी पारी में विकेटकीपिंग नहीं कर सके थे.

सीएम विष्णु देव साय ने हरेली पर दी प्रदेश को बधाई, कहा– प्रकृति से जुड़ने का पर्व है हरेली

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के परंपरागत लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमारी कृषि संस्कृति, लोक परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली पर्व खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्योहार है, जिसमें किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर धरती माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। यह पर्व न केवल अच्छी फसल की कामना का अवसर है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य की भावना को भी प्रकट करता है। साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस वर्ष हरेली पर्व को हम और भी सार्थक बनाएं — धरती माता की पूजा के साथ वृक्षारोपण करें, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित हो सके। यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि हरेली पर्व प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और हरियाली लेकर आए। उन्होंने सभी नागरिकों से इस लोकपर्व को आपसी सौहार्द, प्रकृति प्रेम और परंपरा के सम्मान के साथ मनाने का आह्वान किया।

भारत के पड़ोस में भड़की जंग: थाइलैंड ने किया कंबोडिया पर हवाई हमला

बैंकॉक  थाईलैंड और कंबोडिया के बॉर्डर पर गुरुवार सुबह शुरू हुई झड़पों के बाद दोनों देशों में जंग जैसे हालात बनते जा रहे हैं। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी का आरोप लगाया है। सीमा पर सैनिकों की गोलीबारी के बाद थाईलैंड ने फाइटर जेट F-16 की तैनाती कर दी है और हवाई हमले भी किए हैं। थाईलैंड की बमबारी से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इससे भारत के पड़ोस में एक भीषण जंग छिड़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। दोनों देशों में इस लड़ाई की वजह दशकों पुराना सीमा विवाद है। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि थाईलैंड ने उसके क्षेत्र में हवाई हमले किए हैं। कंबोडिया ने बताया है कि थाईलैंड की सेना ने F-16 लड़ाकू विमानों से वाट काऊ किरी स्वरक पैगोडा की ओर जाने वाली सड़क पर बम गिराए गए हैं। थाईलैंड ने छह F-16 विमान लड़ाई में उतारने और कंबोडिया के दो क्षेत्रीय सैन्य मुख्यालयों को नष्ट करने का दावा किया है। इससे भड़के कंबोडिया ने कहा है कि वह इन हमलों का जवाब देगा। दोनों देश कैसे बने दुश्मन कंबोडिया और थाईलैंड पड़ोसी हैं लेकिन आज ये दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देश जंग के मुहाने पर हैं। मौजूदा तनाव की शुरुआत 28 मई को हुई, जब झड़प में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई। यह घटना एमराल्ड ट्रायंगल नामक क्षेत्र में हुई, जो थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की साझा सीमा है। यह क्षेत्र लगातार विवादित बना हुआ है क्योंकि थाईलैंड और कंबोडिया दोनों क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं। 29 मई के बाद से दोनों देश एक दूसरे पर हमलावर हैं। कंबोडिया और थाईलैंड 817 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। फ्रांस का 1863 से 1953 तक कंबोडिया पर कब्जा रहा। ऐसे में फ्रांस ने ज्यादातर बॉर्डर तय किया। इसका आधार 1907 के थाईलैंड और कंबोडिया के प्राकृतिक जलविभाजक रेखा (वाटरशेड लाइन) के समझौते पर आधारित था। थाईलैंड ने बाद के वर्षों में इस नक्शे पर यह कहते हुए एतराज जताया कि डांगरेक पर्वत पर स्थित 11वीं शताब्दी के प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया में रखा गया है। नक्शे पर मतभेदों के चलते सीमा के आसपास के क्षेत्र ऐसे बन गए, जिन पर दोनों देश अपना दावा करते हैं। थाई सेना ने बताया कि कंबोडिया ने भारी हथियारों से लैस सैनिकों को तैनात करने से पहले क्षेत्र में एक निगरानी ड्रोन भेजा था. उन्होंने बताया कि गोलीबारी में कम से कम दो थाई सैनिक घायल हो गए. कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेता ने कहा, 'हमारे सैनिकों ने थाई सैनिकों के आक्रमण के खिलाफ अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया. थाईलैंड ने कंबोडिया की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया है.' कंबोडिया के नेताओं ने क्या कहा? कंबोडिया के पूर्व नेता हुन सेन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि थाई सेना ने कंबोडिया के दो प्रांतों पर गोलाबारी की है. पोस्ट में उन्होंने लोगों से अपील की कि वो घबराए नहीं. वहीं, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने फेसबुक पर कहा, 'कंबोडिया ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों को सुलझाने की इच्छा जताई है, लेकिन इस बार जब हम पर हथियारों से आक्रमण किया गया तो हमारे पास भी हथियारों से उसका जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.' थाईलैंड के प्रधानमंत्री क्या बोले? थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने कहा कि कंबोडिया के साथ उसका विवाद 'नाजुक स्थिति' में बना हुआ है और इसे सावधानीपूर्वक अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से सुलझाया जाना चाहिए. गुरुवार की दोनों देशों के बीच झड़प से एक दिन पहले थाईलैंड ने कंबोडिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था. इससे पहले सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट में एक थाई सैनिक घायल हो गया था जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और थाईलैंड ने अपना राजदूत वापस बुला लिया था. बुधवार को थाईलैंड ने यह भी कहा कि वो कंबोडिया के राजदूत को देश से निष्कासित करेगा. मई में दोनों देशों के बीच हुए सशस्त्र संघर्ष में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई थी जिससे दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. पिछले दो महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और सीमा पर सैनिकों की उपस्थिति बढ़ा दी है. इंटरनेशल कोर्ट में मुकदमा कंबोडिया ने 1959 में मंदिर विवाद को लेकर थाईलैंड को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में घसीटा और 1962 में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रीह विहियर कंबोडियाई क्षेत्र में आता है। थाईलैंड ने उस समय इसे स्वीकार किया लेकिन तर्क दिया कि आसपास की सीमाएं विवादित हैं। इससे सीमा रेखाएं और जटिल हो गईं। ये तनाव 2008 में बढ़ा, जब कंबोडिया ने प्रीह विहियर मंदिर के लिए यूनेस्को विश्व-धरोहर का दर्जा मांगा। जुलाई में मंदिर को मान्यता मिलने के बाद सीमा क्षेत्र के पास कंबोडियाई और थाई सैनिकों के बीच सैन्य झड़पें शुरू हो गईं। ये झड़पें लगातार चलती रहीं और 2011 में चरम पर पहुंच गईं। इस साल 36,000 लोग विस्थापित हुए। दोनों देशों में सैन्य संघर्ष रुका लेकिन अंदर-अंदर एक तनाव चलता रहा। थाईलैंड ने सीमा विवादों को सुलझाने में मदद के लिए एक संयुक्त सीमा आयोग (जेबीसी) की स्थापना भी की लेकिन इसकी बैठकों से कोई महत्वपूर्ण नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के मुकदमों और कई झड़पों के बाद भी चीजें जस की तस हैं। हालिया हफ्तों में इन्होंने काफी खराब रूप से लिया है।

राजनीतिक समीकरणों के बीच मप्र में नियुक्तियां तेज, ओबीसी आयोग में कुसमारिया-मौसम बिसेन को बड़ी भूमिका

भोपाल  हेमंत खंडेलवाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के 21 दिन के भीतर ही मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बड़ा निर्णय हुआ है। बुधवार को डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया को ओबीसी कल्याण आयोग का अध्यक्ष और मौसम बिसेन को सदस्य बनाने का आदेश जारी हुआ है। इसके साथ ही पार्टी ने राजनीतिक नियुक्तियों की शुरुआत के संकेत दे दिए हैं। मौसम बिसेन पूर्व मंत्री गौरी शंकर बिसेन की बेटी हैं, जो वर्ष 2021 में आयोग के गठन के साथ अगस्त 2023 तक इसके अध्यक्ष रहे। अब उनकी जगह ओबीसी आयोग के अध्यक्ष कुसमारिया को कल्याण बोर्ड का भी अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही संतुलन की दृष्टि से मौसम को सदस्य बनाया गया है। बालाघाट से टिकट दिया था बता दें कि पार्टी ने मौसम बिसेन को विधानसभा चुनाव में भी बालाघाट से टिकट दिया था। बाद में इसे बदलकर गौरी शंकर बिसेन को लड़ाया था, जिसमें वह हार गए थे। मौसम की नियुक्ति के साथ उन नेताओं में भी निगम, मंडल और आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य बनने की आस जगी है, जो लंबे समय से प्रतीक्षा में हैं। इसमें विधानसभा चुनाव हार चुके तो कुछ कांग्रेस से आए नेता भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा चुनाव के पहले 13 फरवरी 2024 को 46 निगम, मंडल और आयोगों में नियुक्तियां रद कर दी थीं। सभी नियुक्तियां शिवराज सरकार में हुई थीं। 25 पदों पर 2021 में नियुक्तियां हुई थीं। शैलेन्द्र बरुआ, जितेन्द्र लिटोरिया और आशुतोष तिवारी जैसे भाजपा के संगठन मंत्रियों को भी निगम मंडलों में जगह मिली थी। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 सामाजिक कल्याण बोर्ड भी बनाए थे। हालांकि, इनकी नियुक्तियां रद नहीं की गई थीं। नए प्रदेश अध्यक्ष की प्रतीक्षा में टलती रहीं नियुक्तियां माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही राजनीतिक नियुक्तियां प्रारंभ होंगी, पर अध्यक्ष का निर्वाचन दो जुलाई 2025 को पूरा हो पाया। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य नहीं होने से कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। नीतिगत निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है अब चरणबद्ध तरीके सभी निगम मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियां शीघ्र होंगी। सबसे पहले उन्हें लिया जा सकता है, जिनके लिए दावेदार कम हैं और नियुक्ति में अंदरूनी विरोध होने की संभावना नहीं है। सत्ता-संगठन के सामंजस्य से सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को देखते हुए नियुक्तियां की जाएंगी। प्रदेश में वर्ष 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इस कारण पार्टी का पूरा जोर संतुलन पर रहेगा, जिससे कोई नाराज नहीं होने पाए। अगले चरण में कैबिनेट विस्तार की संभावना राजनीतिक नियुक्तियों के बाद अगली कड़ी में सरकार मंत्रिमंडल में रिक्त तीन पदों को भरने के लिए कैबिनेट का विस्तार भी कर सकती है। कई महीने से विस्तार की अटकलें चल रही हैं।