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फैंस के लिए खुशखबरी: एशिया कप में हो सकती है भारत-पाक टक्कर, जानिए वेन्यू की डिटेल

मुंबई  एशिया कप क्रिकेट 2025 सितंबर के महीने में आयोजित हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) इस टूर्नामेंट को दुबई और अबू धाबी में कराने पर सहमत हो गया है. BCCI के वाइस प्रेसिडेंट राजीव शुक्ला और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी अगले कुछ दिनों में टूर्नामेंट की फाइनल डेट्स तय करेंगे. स्पॉन्सर्स से भी बातचीत की जाएगी क्योंकि मार्केटिंग प्लान्स बनाने के लिए उन्हें अधिक समय चाहिए. टूर्नामेंट का आगाज 7 सितंबर को होने की संभावना है और इसकी समाप्ति तीसरे या चौथे हफ्ते में होगी. BCCI ने ECB (एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड) के साथ 3 वेन्यू के लिए करार किया है, लेकिन एशिया कप के लिए केवल 2 स्टेडियमों का उपयोग होगा. बीसीसीआई टूर्नामेंट के लिए सरकार की मंजूरी का भी इंतजार कर दिया है. इस टूर्नामेंट के लिए संभावित वेन्यू दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम और जायद क्रिकेट स्टेडियम (अबू धाबी) हैं. सूत्रों के मुताबिक इस टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान दोनों को एक ही ग्रुप में रखा जाएगा. यानी दोनों का मुकाबला ग्रुप स्टेज में होना तय दिख रहा है. एशियन क्रिकेट काउंसिल की बैठक 24 जुलाई को ढाका में हुई, जिसमें ये निर्णय लिए गए है. बैठक में BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने वर्चुअली भाग लिया. न्यूट्रल वेन्यू पर क्यों होगा ये टूर्नामेंट? बीसीसीआई के पास आठ टीमों के इस टूर्नामेंट की मेजबानी का अधिकार है, लेकिन भारत-पाकिस्तान के संबंधों में तल्खी के कारण टूर्नामेंट को न्यूट्रल वेन्यू पर कराया जाएगा. यह पहली बार है जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एक उच्च-स्तरीय एसीसी बैठक की मेजबानी की. बीसीबी के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ने कहा था कि बीसीबी केवल एसीसी को लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान कर रहा है. एशिया कप के आगामी संस्करण में आठ टीमें भाग लेंगीं. इसमें भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, हॉन्ग कॉन्ग, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात का नाम शामिल है. टूर्नामेंट में आठ टीमों को चार-चार के दो ग्रुपों में विभाजित किया जाएगा. फिर प्रत्येक ग्रुप से टॉप-2 टीमें सुपर-4 स्टेज के लिए क्वालिफाई करेंगी. ग्रुप-ए में भारत, पाकिस्तान, यूएई और हॉन्ग कॉन्ग को रखा जा सकता है. वहीं ग्रुप-बी में अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और ओमान को जगह मिल सकती है.

50 लोगों की जान पर आफत: रूस का यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त, बचाव अभियान जारी

मॉस्को  रूस में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक एक यात्री विमान चीन की सीमा के पास लापता हो गया था। विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया था। An-24 नाम के इस यात्री विमान में 49 लोग सवार थे और ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि सभी लोगों की मौत हो गई है। लापता विमान क्रैश हो गया था और अब उसका मलबा मिल गया है। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS की रिपोर्ट में पहले कहा गया था कि विमान ने टिंडा (Tynda) के लिए उड़ान भरी थी लेकिन गंतव्य के नजदीक पहुंचते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका उसका संपर्क टूट गया। बताया गया था कि चीन की सीमा के पास ये विमान लापता हो गया है। TASS की रिपोर्ट के मुताबिक यात्री विमान, अंगारा एयरलाइंस का था और अंतिम बार जब उससे संपर्क हुआ था, वह टिंडा एयरपोर्ट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर था। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है। यह इलाका चीन की सीमा के काफी पास स्थिति है और इस क्षेत्र में करीब करीब हमेशा मौसम काफी खराब रहता है, जिससे विमानों के लिए उड़ान भरना काफी चुनौतीपूर्ण रहता है। AN-24 का पूरा नाम Antonov-24 है, जो एक सोवियत निर्मित मध्यम दूरी का डबल इंजन टर्बोप्रॉप यात्री विमान है. इसे मुख्य रूप से कम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है और क्षेत्रीय उड़ानों के लिए इसका इस्तेमाल होता है. ये पहली बार 1959 में उड़ा था और इसे रूसी, पूर्वी यूरोप और एशिया के कठिन इलाकों में उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया था. ये विमान लगभग 1,500 से 2,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, जो इसे क्षेत्रीय उड़ानों के लिए परफेक्ट बनाता है. इसकी खासियत ये है कि ये कम दूरी के रनवे से टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है, जो इसे दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त बनाता है. इसके मजबूत और भरोसेमंद डिजाइन की वजह से इसे कार्गो विमान और सैन्य परिवहन में भी इस्तेमाल किया जाता है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS और SHOT न्यूज आउटलेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यात्री विमान के लापता होने की रिपोर्ट आने के साथ ही स्थानीय प्रशासन और एविएशन अथॉरिटी ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया था। बचाव दलों को जंगलों और पहाड़ी इलाकों की ओर रवाना किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि विमान की क्रैश लैंडिंग हो सकती है। जिस क्षेत्र में विमान लापता हुआ था वो अमूर क्षेत्र मौसम के लिहाज से काफी मुश्किल क्षेत्र है। यहां काफी ज्यादा ठंड होती है और पहाड़ी इलाका है। यहां घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ इलाके हैं। इसके अलावा मौसम में अचानक परिवर्तन आता रहता है। इसलिए पायलट्स के लिए इस क्षेत्र से विमानों को उड़ाना काफी मुश्किल होता है।

नक्सलवाद को तगड़ा झटका: 61 इनामी नक्सली सुरक्षा बलों के सामने हुए सरेंडर

बीजापुर/कांकेर/ नारायणपुर/दन्तेवाड़ा छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी मुहिम को बड़ी सफलता मिली है. कांकेर, बीजापुर और नारायणपुर में कुल 61 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का ऐलान किया है. इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर 2 करोड़ 10 लाख रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित था. कांकेर में मिलिट्री कमांडर का सरेंडर कांकेर में मिलिट्री कंपनी नंबर 1 के कमांडर मंगलू उर्फ रूपेश सहित 13 ईनामी नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया. इनमें 5 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं. उत्तर बस्तर डिविजन के रावघाट, परतापुर एरिया कमेटी एवं माड़ डिविजन में सक्रिय थे. आत्म समर्पित नक्सलियों पर कुल 62 लाख रुपए का इनाम घोषित था. बीजापुर में माओवादियों को बड़ा झटका बीजापुर जिले में 25 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें से एक 25 लाख का इनामी SZCM (साउथ जोनल कमेटी मेंबर) भी शामिल है. आत्मसमर्पण करने वालों में DVCM, ACM, LOS सदस्य, जनताना सरकार के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे शीर्ष कैडर शामिल हैं. इन सभी पर कुल 1 करोड़ 15 लाख रुपए का इनाम था. नारायणपुर में 8 ने किया सरेंडर इधर नारायणपुर से भी बड़ी खबर आई है जहां 8 सक्रिय माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं. इन पर कुल 33 लाख रुपए का इनाम था. सरेंडर करने वालों में दो बड़े नाम शामिल हैं कमलेश और डॉक्टर सुखलाल, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे. दन्तेवाड़ा में एक दंपति समेत 15 ने किया सरेंडर दन्तेवाड़ा जिले में चलाये जा रहे लोन वर्राटू अभियान और पूना मारगेम (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान से प्रभावित होकर कुल 17 लाख के 05 इनामी माओवादियों सहित 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इसमें  01 माओवादी दम्पति भी शामिल है. लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 254 ईनामी माओवादियों सहित कुल 1020 माओवादियों ने  आत्मसमर्पण किया. जिसमें जिला दन्तेवाड़ा के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के 824 पुरूष माओवादी और 196 महिला माओवादी शामिल हैं.  

प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुर्नवास बड़ी उपलब्धि निगम ने जंगल के साथ लोगों की जिन्दगी भी संवारी प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सम्मानित वन‍विकास निगम के विजन डाक्यूमेंट-2047 का किया अनावरण जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों के रेस्क्यू सेंटर स्थापित होंगे वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान सराहनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में खनन गतिविधियों और बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में बने राख के पहाड़ों पर वनों को विकसित करने की चुनौती स्वीकार कर मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया है। प्रदेश के तीन लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुनर्वास करना बड़ी उपलब्धि है। वन विकास निगम इस उपलब्धि के लिए बधाई का पात्र है। यह गर्व का विषय है कि अन्य राज्य भी निगम की इस विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए उत्सुक हैं। प्रदेश में अद्यतन तकनीक के माध्यम से वनों का उचित प्रबंधन किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश वन सम्पदा में देश में सर्वश्रेष्ठ है। राज्य सरकार वनों और वन उपज के साथ वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में भी हरसंभव प्रयास कर रही है। प्रदेश के सघन वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारी प्रशंसा के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सभी दिशाओं में क्षमता विकास और प्रगति के अवसर उपलब्ध हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में विशेष पहल की जा रही है। राज्य सरकार जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों का रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य वन विकास निगम द्वारा विकसित वनों के प्रबंधन और आगामी कार्ययोजना के बारे में विचार मंथन की आवश्यकता है। अब तक किए गए कार्यों का सिंहावलोकन करते हुए राज्य सरकार वन विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष नवाचार और पहल करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विकास निगम के केन्द्रों में ईको टूरिज्म की गतिविधियां संचालित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का जोधपुर आम और बबूल की लकड़ी के आधार पर फर्नीचर के बड़े केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में उपलब्ध सागौन और अन्य श्रेष्ठ काष्ठ के उपयोग से मध्यप्रदेश भी इस प्रकार की पहल कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। प्रदेश के वन, देश की कई प्रमुख नदियों को जलराशि से समृद्ध बनाते हैं। प्रदेश के विशाल भू-क्षेत्र में फैली वन आधारित जीवनशैली हमें प्रकृति के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। देश में सर्वाधिक बाघ मध्यप्रदेश में हैं। चंबल क्षेत्र में घड़ियाल भी वन्यजीव पर्यटन की शोभा बढ़ा रहे हैं। वन विभाग ने विलुप्तप्राय गिद्धों का संरक्षण करते हुए प्रदेश में गिद्धों को नया जीवन प्रदान किया है। सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्य सरकार योजनाओं पर कार्य कर रही है। प्रदेश में सर्प गणना की तैयारी हो रही है। मध्यप्रदेश ऐसा क्षेत्र हैं, जहां टाइगर और मनुष्य सहचर्य की भावना से साथ-साथ रहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने वन विकास निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों का सम्मान किया। इनमें सर्वआर.के. नामदेव, आर.एस. नेगी, रतन पुरवार, पी.सी. ताम्रकार तथा भगवंतराव बोहरपी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम के स्वर्ण जयंती वर्ष पर वन विकास की आगामी कार्ययोजना पर केन्द्रित विजन-2047 का अनावरण किया। इस अवसर पर वन विकास निगम द्वारा संचालित गतिविधियों और उसकी विकास यात्रा पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के संचालक के.रविचंद्रन ने अंगवस्त्रम और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा भेंटकर अभिवादन किया। वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन विकास निगम, स्थानीय लोगों को जोड़ते हुए वन संरक्षण की गतिविधियां संचालित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अनेक नवाचार क्रियान्वित हो रहे हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश को वन संपदा से समृद्ध करने के लिए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल-गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश में अनेकों कुए, बावड़ी, तालाब और जलस्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया गया। जल-गंगा संवर्धन अभियान भूजल स्तर सुधार के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है। राज्य वन विकास निगम की भूमिका सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णबाल ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि आयोग की अनुशंसा पर 1975 में स्थापित राज्य वन विकास निगम अपनी स्थापना से लेकर अब तक निरंतर लाभ में ही रहा है। पर्यावरणीय आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध निगम की गतिविधियों से जंगल के साथ-साथ लोगों की जिन्दगी भी संवर रही है। निगम का 50वां स्थापना दिवस मनाना हम सभी के लिए गौरव का क्षण है। वन विकास निगम के सहयोग से 3 लाख 90 हजार हेक्टेयर जंगलों का विकास और ट्रीटमेंट किया गया। इस उपलब्धि में निगम के अधिकारी और कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन तथा वानिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि और भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री ने सराहा, बोले-हरेली प्रकृति के प्रति सम्मान का तिहार

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: दिखी परंपरा और प्रगति की अनूठी झलक पारंपरिक-आधुनिक कृषि यंत्रों, लोक वेशभूषाओं की आकर्षक प्रदर्शनी मुख्यमंत्री ने सराहा, बोले-हरेली प्रकृति के प्रति सम्मान का तिहार रायपुर  छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और कृषि परंपराओं का प्रतीक हरेली तिहार इस वर्ष मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास परिसर में अत्यंत हर्षाेल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की समृद्ध विरासत, पारंपरिक कृषि यंत्रों, लोक परिधानों, खानपान और आधुनिक कृषि तकनीकों का समन्वय एक अद्भुत नजारे के रूप में सामने आया। कार्यक्रम स्थल को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी रंग-रूप में सजाया गया था, जहां ग्रामीण परिधान पहने अतिथि, कलाकार और आमजन लोक संस्कृति में रमे हुए नजर आए।  हरेली उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री निवास में परम्परागत और आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री साय ने प्रदर्शनी स्थल का भ्रमण कर विभिन्न पारंपरिक यंत्रों और वस्तुओं का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में काठा, खुमरी, झांपी, कांसी की डोरी और तुतारी जैसे ऐतिहासिक कृषि उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। कृषि विभाग द्वारा आयोजित आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी, जिसमें  नांगर, कुदाली, फावड़ा, रोटावेटर, बीज ड्रिल, पावर टिलर और स्प्रेयर जैसे यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। ‘काठा’ वह परंपरागत मापक है जिससे पुराने समय में धान तौला जाता था; ‘खुमरी’ बांस और कौड़ियों से बनी छांव प्रदान करने वाली टोपी है; ‘झांपी’ शादी-ब्याह में उपयोग होने वाली वस्तुएं रखने की बांस से बनी पेटी; ‘कांसी की डोरी’ खाट बुनने में काम आती है और ‘तुतारी’ पशुओं को संभालने में उपयोग होती है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे कृषि जीवन, पशुधन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी किसानों, युवाओं और आमजनों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रही। मुख्यमंत्री ने इन उपकरणों की जानकारी लेकर कृषि तकनीकी प्रगति की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ की खेती परंपरा और तकनीक के समन्वय से और भी अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनेगी। किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देकर हम राज्य की कृषि उत्पादकता को ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आम नागरिक, किसान, छात्र और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और कृषि नवाचार के अद्वितीय संगम को सजीव रूप में प्रस्तुत किया, जो राज्य की समृद्ध परंपरा और विकासशील सोच का प्रतीक है।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन: मोदी बोले– भारत में अब यूके प्रोडक्ट किफायती दामों पर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के दो दिनों के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने ब्रिटिश पीएम किएर स्टार्मर से लंदन में मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों ने फ्री ट्रेड डील (FTA) समझौते पर साइन किए. जिसका उद्देश्य भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है. इस मौके पर प्रेस को संबोधित करते हुए पीएम ने स्टार्मर के जोरदार स्वागत के लिए आभार जताया और उन्होंने ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता के दौरान साइन किए गए फ्री ट्रेड डील की भी तारीफ की. ये हमारे उपभोक्ताओं के लिए अच्छा सौदा होगा, क्योंकि इससे कपड़ों और जूतों की कीमतें कम हो जाएंगी. साथ ही भारत के सी फूड को ब्रिटेन की मार्केट में नए अवसर मिलेंगे. भारत के हर वर्ग के लिए ये समझौता लाभकारी होगा. इस समझौते के यूके की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा और भारत का निवेश भी बढ़ेगा. ये समझौते वैश्विक स्थिरता को भी बल देंगे. अब यूके के प्रोडक्ट सस्ते मिलेंगे. दोस्तों शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर नया अध्याय लिख रहे हैं. यूके की छह यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस खोल रही हैं, पिछले दिनों गुरुग्राम में कैंपस खोला है. दोस्तों पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा के लिए हम स्टार्मर का आभार जताते हैं.हम रूस और यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के साथ-साथ मिडिल ईस्ट की स्थिति पर भी विचार साझा करते रहे हैं. आज विस्तारवादी सोच नहीं विकासवादी सोच का दौर है.  भारत-ब्रिटेन मुफ्त व्यापार समझौते (FTA) के लिहाज से उनके इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पीएम मोदी ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी और स्टार्मर द्विपक्षीय संंबंधों पर चर्चा करेंगे.  भारत के साथ फ्री ट्रेड डील पर साइन करने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा कि भारत के साथ एक ऐतिहासिक समझौते का मतलब ब्रिटेन में रोजगार, निवेश और विकास है. इससे ब्रिटेन में हजारों नौकरियां पैदा होंगी. फ्री ट्रेड डील से कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे और कामकाजी लोगों की जेब में पैसा आएगा. ये हमारी काम करने की नीति में बड़ा बदलाव है. इससे पहले उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वे जिस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, नौकरियों और आर्थिक विकास के लिए वह एक बड़ी जीत है. इस समझौते के तहत टैरिफ में कटौती से कपड़े, जूते और खाद्य उत्पादों की कीमतें सस्ती होंगी.  भारत को क्या फायदा ब्रिटेन का कहना है कि एफटीए से भारत के लोगों को बहुत फायदा होगा। उन्हें ब्रिटेन के अच्छे प्रोडक्ट्स आसानी से मिल पाएंगे। जैसे कि सॉफ्ट ड्रिंक, कॉस्मेटिक्स, कारें और मेडिकल डिवाइस। FTA लागू होने के बाद, इन चीजों पर लगने वाला टैक्स 15% से घटकर 3% हो जाएगा। इससे ये चीजें सस्ती हो जाएंगी। अभी भी ब्रिटेन भारत से 11 अरब पाउंड का सामान खरीदता है। लेकिन टैक्स कम होने से ब्रिटेन के लोगों और कारोबारियों के लिए भारतीय सामान खरीदना और भी आसान हो जाएगा। इससे भारतीय कारोबारियों को भी फायदा होगा, क्योंकि वे ब्रिटेन को ज्यादा सामान बेच पाएंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा, "भारत के साथ हमारा यह बड़ा व्यापार समझौता ब्रिटेन के लिए बहुत बड़ी जीत है। इससे ब्रिटेन में हजारों नौकरियां पैदा होंगी, कारोबार के नए मौके मिलेंगे और देश के हर कोने में विकास होगा। यह हमारी बदलाव की योजना को पूरा करेगा।" ट्रेड के इतर यह समझौता सिर्फ व्यापार तक ही सीमित नहीं रहेगा। 2035 के लिए जो नई योजना बनाई जा रही है, उसमें दोनों देश मिलकर तरक्की करेंगे, नई चीजें खोजेंगे और अपनी सेना को भी मजबूत करेंगे। इसके लिए एक नया डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि भारत और ब्रिटेन ने बातचीत के दौरान एक-दूसरे की राजनीतिक संवेदनशीलता का सम्मान किया है। ब्रिटिश सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर से पहले एक बयान में कहा, "हमने भ्रष्टाचार विरोधी, श्रम अधिकार, जेंडर और डेवलपमेंट पर मुक्त व्यापार समझौते में भारत के पहले अध्यायों को सुरक्षित करते हुए अपने मूल्यों का समर्थन किया है. यह अध्याय महिलाओं के लिए यूके-भारत FTA के पूर्ण लाभों तक पहुंचने के अवसरों को बढ़ाएगा. यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी आगे बढ़ाएगा और व्यापार के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा." समझौते में टैरिफ में कटौती शामिल है. भारत ब्रिटेन की तुलना में काफी अधिक संरक्षणवादी अर्थव्यवस्था है, और उसने अपने 90 प्रतिशत टैरिफ में कटौती की है. इससे यूके से भारत आने वाले उत्पादों पर औसत टैरिफ 15 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत हो जाएगा. बदले में, ब्रिटेन – जो पहले से ही भारत से सालाना 11 अरब यूरो मूल्य का सामान आयात करता है – भारतीय निर्माताओं को अधिक बाजार पहुंच प्रदान करेगा. अब कपड़े-जूते समेत ये चीजें हो जाएंगी सस्‍ती, देखें लिस्‍ट!  भारत-यूके बीच इस डील से दोनों देशों के आम लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद होगा. दवाई से लेकर इलेक्‍ट्रॉनिक और फैशन तक के सामान सस्‍ते हो जाएंगे. हालांकि कुछ चीजें महंगे भी होंगे, जो आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालेगा.  इस डील को लेकर चर्चा की शुरुआत जनवरी 2022 में तत्कालीन ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के कार्यकाल में हुई थी. इसे पहले 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य था. पीएम मोदी ने इस डील को लेकर कहा कि दोनों देशों की अर्थव्‍यवस्‍था में उछाल आएगी. साथ ही नौकरियों के अवसर खुलेंगे. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत-ब्रिटेन की कोशिश द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्‍य रखा गया है.  भारत-यूके FTA का मतलब क्‍या है?  भारत और यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK FTA) से भारत को अपनी 99 फीसदी एक्‍सपोर्ट उत्‍पाद  पर UK में टैक्‍स फ्री एक्‍सपोर्ट मिलेगा.  वहीं भारत ब्रिटेन से आने वाले 90 फीसदी उत्‍पादों पर टैरिफ कम या फिर हटा दिया जाएगा. इससे भारतीय कंपनियों से लेकर आम लोगों को भी बड़ा फायदा होगा.  क्‍या सस्‍ता और क्‍या महंगा  इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, कपड़े, मरीन प्रोडक्‍ट्स, स्‍टील और मेटल, और ज्‍वेलरी समेत कई चीजें सस्‍ती हो सकती हैं. वहीं महंगे की बात करें तो एग्रीकल्‍चर प्रोडक्‍ट्स, कार और बाइक जैसे ऑटो प्रोडक्‍ट्स और स्‍टील जैसे प्रोडक्‍ट्स महंगे हो सकते हैं.  यह डील भारत को वैश्विक मानचित्र पर कैसे स्थापित करेगी? इस … Read more

सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम

हरेली की सुग्घर परंपरा के रंग में रंगा मुख्यमंत्री निवास सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडप  रायपुर  छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।  हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।  प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।  मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।  मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।  कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।  मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है। संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :  हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी  नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।  हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।

सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम

हरेली की सुग्घर परंपरा के रंग में रंगा मुख्यमंत्री निवास सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडप  रायपुर  छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।  हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।  प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।  मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।  मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।  कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।  मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है। संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :  हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी  नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।  हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।

BCCI का बड़ा फैसला: पंत खेलेंगे बतौर बल्लेबाज़, कीपिंग करेगा ये खिलाड़ी

मैनचेस्टर पैर में लगी चोट के बावजूद ऋषभ पंत मैनचेस्टर टेस्ट मैच में बैटिंग के लिए उपलब्ध होंगे. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इसे लेकर अपडेट दिया है. बीसीसीआई ने कहा कि ऋषभ पंत टीम के साथ दूसरे दिन के खेल के लिए जुड़ चुके हैं और जरूरत पड़ने पर बैटिंग करेंगे. हालांकि बीसीसीआई ने ये स्पष्ट किया कि ऋषभ अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ध्रुव जुरेल के कंधों पर होगी. बीसीसीआई की ओर से कहा गया, 'ऋषभ पंत को मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लगी थी. इसी कारण अब वह इस टेस्ट मैच में आगे विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. उनकी जगह ध्रुव जुरेल को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि, चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ मौजूद और जरूरत पड़ने पर वह बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे.' विकेटकीपिंग नहीं करेंगे पंत ऐसे में बीसीसीआई ने पहले दिन मैच के बाद पंत की चोट पर अपडेट जारी करते हुए कहा था कि उन्हे स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया है। मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है। गुरुवार को बीसीसीआई ने एक बार फिर अपडेट जारी किया और बताया, मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन चोटिल होने वाले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे। उनकी जगह अब ध्रुव जुरेल विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाएंगे। बल्लेबाजी के लिए हैं उपलब्ध अपनी चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ जुड़ गए हैं और जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे। टीम की आवश्यकता अनुसार, वे बैटिंग कर सकते हैं। यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम मैनेजमेंट की सलाह के बाद लिया गया है, ताकि ऋषभ पंत की चोट और टीम बैलेंस दोनों का ध्यान रखा जा सके।

BCCI का बड़ा फैसला: पंत खेलेंगे बतौर बल्लेबाज़, कीपिंग करेगा ये खिलाड़ी

मैनचेस्टर पैर में लगी चोट के बावजूद ऋषभ पंत मैनचेस्टर टेस्ट मैच में बैटिंग के लिए उपलब्ध होंगे. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इसे लेकर अपडेट दिया है. बीसीसीआई ने कहा कि ऋषभ पंत टीम के साथ दूसरे दिन के खेल के लिए जुड़ चुके हैं और जरूरत पड़ने पर बैटिंग करेंगे. हालांकि बीसीसीआई ने ये स्पष्ट किया कि ऋषभ अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ध्रुव जुरेल के कंधों पर होगी. बीसीसीआई की ओर से कहा गया, 'ऋषभ पंत को मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लगी थी. इसी कारण अब वह इस टेस्ट मैच में आगे विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. उनकी जगह ध्रुव जुरेल को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि, चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ मौजूद और जरूरत पड़ने पर वह बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे.' विकेटकीपिंग नहीं करेंगे पंत ऐसे में बीसीसीआई ने पहले दिन मैच के बाद पंत की चोट पर अपडेट जारी करते हुए कहा था कि उन्हे स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया है। मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है। गुरुवार को बीसीसीआई ने एक बार फिर अपडेट जारी किया और बताया, मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन चोटिल होने वाले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे। उनकी जगह अब ध्रुव जुरेल विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाएंगे। बल्लेबाजी के लिए हैं उपलब्ध अपनी चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ जुड़ गए हैं और जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे। टीम की आवश्यकता अनुसार, वे बैटिंग कर सकते हैं। यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम मैनेजमेंट की सलाह के बाद लिया गया है, ताकि ऋषभ पंत की चोट और टीम बैलेंस दोनों का ध्यान रखा जा सके।