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गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री

भारतीय नायकों के गौरवशाली इतिहास से युवाओं को परिचित कराने का नाटक सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को इतिहास से जोड़ेगा नाटक: डॉ. यादव ने बताया सांस्कृतिक माध्यम का महत्व गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री नाटक बनेगा प्रेरणा का मंच, युवाओं में भरेगा राष्ट्रभक्ति : डॉ. यादव का संदेश 6 दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वास्तव में नाटक कला अनूठी है। नाटकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग की संस्था मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से रवीन्द्र भवन में आयोजित छह दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य सुवाणी त्रिपाठी और अन्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि वे हरिहर की नगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की चौदह विद्याओं और चौसठ कलाओं में नाट्य शास्त्र के सभी आयाम शामिल हैं। उज्जैन ऐसी नगरी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा हुई साथ ही महाकाल की नगरी होने का आशीर्वाद भी इसे मिला है। उज्जैन में श्रावण माह, कार्तिक माह और अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजन अनूठे होते हैं। हमारे इतिहास में जहां राष्ट्र के दुर्बल होने के निराशाजनक उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहीं हमारे समर्थ होने के भी प्रमाण मिलते हैं। विदेशी आक्रांताओं ने आराध्य स्थलों को नष्ट करने और प्रतिमाएं अन्य देशों में ले जाने का कृत्य किया, लेकिन यह भी सत्य है कि हमारे पराक्रमी और राष्ट्रप्रेमी शासकों ने उन प्रतीकों को पुन: स्वदेश लाने का कार्य भी किया। नाटक कला अनूठी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन स्तर से नाटकों के मंचन से जुड़े रहे हैं। उन्हें अनेक वर्ष पूर्व महानाट्य जाणताराजा देखने का सौभाग्य मिला, जो शिवाजी महाराज के साहसिक जीवन पर केन्द्रित था। बाद में इस तर्ज पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन को मंच पर लाने में सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विविध  पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज की तरह सम्राट विक्रमादित्य सुशासन और शौर्य के प्रतीक थे। उनके राज्य का काफी विस्तार हुआ। उन्होंने अपने भूभाग के समस्त नागरिकों का ऋण समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया और विक्रम संवत् के प्रर्वतन की दिशा में आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को छह दिवसीय नाट्य समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'लोक में मणिधर-बघेश्वर' और नाट्य समारोह की स्मारिका का विमोचन किया। प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रस्तुत होने वाले नाटकों और भरतमुनि राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे।  

कौन बनेगा अगला उपराष्ट्रपति? थावरचंद गहलोत सहित कई नामों की चर्चा तेज

भोपाल  उपराष्ट्रपति जगदीप धनखंड के इस्तीफे के बाद रेस में कई नाम हैं। सियासी गलियारों में उन नामों को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। इस रेस में मध्य प्रदेश के भी एक दिग्गज नेता का नाम है। वह केंद्र की मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में उम्मीदवार के नाम जल्द ही आ जाएंगे। अभी एमपी से कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का नाम भी चल रहा है। पॉलिटिक्ल अनुभवों के साथ-साथ सियासी समीकरण में भी फिट बैठते हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं थावरचंद गहलोत थावरचंद गहलोत एमपी के सीनियर नेता हैं। केंद्र की राजनीति में शुरू से सक्रिय रहे हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। उन्हें उपराष्ट्रपति पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। उनके राजनीतिक अनुभव और जाति के समीकरण को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इससे उनका नाम इस दौड़ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रतलाम के रहने वाले हैं थावरचंद गहलोत थावरचंद गहलोत का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के आलोट से शुरू हुआ है। वह राजनीतिक और जातिगत समीकरणों में फिट बैठते हैं। उनके पास राज्यसभा का लंबा अनुभव है। वह राज्यसभा में सदन के नेता भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह मोदी सरकार में दो बार केंद्रीय मंत्री रहे हैं। वह बीजेपी की सबसे बड़ी संसदीय समिति के सदस्य भी रहे हैं। अनुसूचित जनजाति से आते हैं गहलोत 77 साल के गहलोत अनुसूचित जनजाति से आते हैं। इस वजह से जातिगत समीकरणों में भी वह फिट बैठते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी किसी समर्पित कार्यकर्ता को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बना सकती है। थावरचंद गहलोत उनमें से एक हो सकते हैं। 1980 में बने थे पहली बार विधायक थावरचंद गहलोत 1980 में पहली बार मध्य प्रदेश में विधायक बने थे। 1990 में वह एमपी सरकार में राज्यमंत्री बन गए। 1996 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। वहीं 1998 से 2004 तक लगातार लोकसभा सांसद रहे हैं। 2012 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। 2018 में फिर से राज्यसभा गए। 2014 में मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। 2019 में केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ राज्यसभा में वह सदन के नेता भी बने। 2021 में कर्नाटक के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद से पद पर बने हुए हैं। पीएम मोदी के गुड बुक में हैं गहलोत थावरचंद गहलोत को पीएम मोदी का करीबी माना जाता है। उनके पास राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ बीजेपी में भी बड़ी जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव है। वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और उत्तर पूर्व भारत के प्रभारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं।हालांकि थावरचंद गहलोत के साथ अन्य भी कई नामों की चर्चा है। मध्य प्रदेश से वह अकेले हैं, जिनके नाम की चर्चा है। हालांकि अंतिम निर्णय बीजेपी और एनडीए गठबंधन को लेना है कि उनका संयुक्त उम्मीदवार कौन होगा।  

स्वास्थ्य सेवाओं में नई उपलब्धि: सीएम डॉ. यादव करेंगे भोपाल में अत्याधुनिक सीटी स्कैन और एमआरआई का लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में अत्याधुनिक सी.टी. स्कैन एवं एम.आर.आई. सेवाओं का करेंगे लोकार्पण भोपाल को मिलेगी नई स्वास्थ्य सुविधा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे आधुनिक सीटी स्कैन व एमआरआई सेवा का शुभारंभ स्वास्थ्य सेवाओं में नई उपलब्धि: सीएम डॉ. यादव करेंगे भोपाल में अत्याधुनिक सीटी स्कैन और एमआरआई का लोकार्पण मशीनें फास्ट स्क्रीनिंग में सक्षम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध भी किया जा सकेगा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेशवासियों को आधुनिक, सुलभ और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। चिकित्सा शिक्षा एवं जनस्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित कर सर्वसुलभ और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में सरकार सतत कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में अत्याधुनिक तकनीकी से युक्त सी.टी. स्कैन मशीन (80 रो डिटेक्टर एक्वारिंग – 128 स्लाइस) तथा एम.आर.आई. मशीन (1.5 टेसला) का 25 जुलाई को लोकार्पण करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह सुविधा प्रदेश के समस्त शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में सर्वप्रथम भोपाल में प्रारंभ की गई है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल की गरिमामयी उपस्थिति भी रहेगी। चिकित्सा छात्रों को बेहतर शिक्षा और शोध कार्यों को मिलेगी गति इन आधुनिकतम मशीनों से आयुष्मान भारत योजना एवं अन्य शासकीय योजनाओं के अंतर्गत आने वाले मरीजों को निःशुल्क सी.टी. स्कैन एवं एम.आर.आई. जाँच की सुविधा प्रदान की जाएगी। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी। इन मशीनों की स्थापना से चिकित्सा छात्रों यू.जी., पी.जी. एवं पैरामेडिकल को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलेंगे, साथ ही शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। साथ ही, प्रदेश की जनता को उच्च गुणवत्ता की वे जाँच सुविधाएं अब भोपाल में ही मिल सकेंगी। इसके लिए पूर्व में अन्य राज्यों में जाना पड़ता था। मशीनों के संचालन हेतु प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता भी शासन द्वारा सुनिश्चित की गई है। इन मशीनों में हाई-क्वालिटी कार्डियक पैकेजेस शामिल हैं, जिनसे हृदय रोगों की उन्नत और सटीक जाँच संभव है। एम.आर.आई. मशीन में डेडीकेटेड ब्रेस्ट कॉइल्स सहित उच्च गुणवत्ता की सभी आवश्यक कॉइल्स प्रदाय की गई हैं, जिससे स्तन कैंसर की गहन जांच सरलता से की जा सकेगी। सी.टी. स्कैन मशीन वॉल्यूमेट्री, फ्यूजन एवं परफ्यूजन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है, जिससे तीव्र एवं गहन जांच संभव है। ये मशीनें फास्ट स्क्रीनिंग में सक्षम हैं और इन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध भी किया जा सकता है।  

नौकरीपेशा के दिन बहुरेंगे! 8वें वेतन आयोग से ₹51,000 बेसिक सैलरी की उम्मीद

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग का गठन जल्‍द होने जा रहा है. जनवरी 2026 तक इसे लागू करने का प्रस्‍ताव रखा गया है, जिसे लेकर राज्‍य वित्त मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी दी है कि 8th Pay Commission को लेकर राज्‍य सरकारों, वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों से परामर्श की प्रक्रिया चल रही है. जल्‍द ही इसे लागू कर दिया जाएगा.  इस आयोग के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन और भत्तों में इजाफा हो जाएगा. कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जबरदस्‍त उछाल देखने को मिलेगी. साथ ही महंगाई भत्ता और फिटमेंट फैक्‍टर भी बढ़ेगा, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा. आइए समझते हैं, आपकी सैलरी कितनी बढ़ सकती है…  इस फॉर्मूले से बढ़ेगी कर्मचारियों की सैलरी 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी में ठीक वैसे ही इजाफा होगा, जैसे 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के लागू होने पर हुआ था. कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी के लिए एक्रोयड फॉर्मूले का उपयोग किया जाएगा.  क्‍या है ये फॉर्मूला?  डॉ वालेस एक्रोयड ने यह फॉर्मूला पेश किया था, जिसे जीवन के न्‍यूनतम लागत तय करने के लिए डिजाइन किया गया था. इस फॉर्मूले में यह बताया गया था कि एवरेज कर्मचारियों की पोषण संबंधी जरूरतों के आधार पर सैलरी का कैलकुलेशन किया जाना चाहिए. इस फॉर्मूले को बनाते वक्‍त भोजन, कपड़ा और मकान जैसी कर्मचारियों की जरूरतों को ध्‍यान में रखा गया था. 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) ने 1957 में इस फॉर्मूले को अपनाया गया था.  7वें वेतन आयोग पर भी लागू हुआ था ये फॉर्मूला  इस फॉर्मूले का उपयोग करते हुए 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत भी कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा किया गया था. 7वें वेतन आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 7000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये हो गई थी. कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को अपडेट करने के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था. ये फिटमेंट फैक्‍टर एक्रोयड फॉर्मूला से तय किया गया था.  8वें वेतन आयोग के तहत 3 गुना बढ़ जाएगी सैलरी!  अनुमान है कि 8th Pay Commission के लागू होते ही कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल देखने को मिलेगी. बेसिक सैलरी में करीब 3 गुना बढ़ोतरी हो सकती है, जो एक्रोयड फॉर्मूला के तहत संभव होगा. अगर ये फॉर्मूला 8वां वेतन आयोग के तहत भी यूज किया जाता है तो सैलरी और पेंशन का कैलकुलेशन 2.86 फिटमेंट के आधार पर होगा. इसका मतलब है कि न्‍यूनतम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर 51480 रुपये तक हो सकती है. वहीं पेंशन 9000 रुपये से बढ़कर 25740 रुपये हो जाएगी.

केंद्र सरकार का बड़ा कदम: अपात्र राशन कार्ड होंगे कैंसिल, तुरंत करें दस्तावेज़ों की जांच

नई दिल्ली सरकार से मिलने वाला गेहूं-चावल तो छोड़िए..सरकारी योजनाओं के लाभ भी हाथ से फिसलने वाले हैं। राशन कार्ड बनवाकर सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों पर सरकार ने सख्ती करने का मूड बना लिया है। केंद्र सरकार ने राज्यों को नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। 22 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि जो लोग 6 महीने से ज्यादा समय से राशन नहीं ले रहे हैं, उनके राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएं। अभी देश में करीब 23 करोड़ राशन कार्ड हैं। माना जा रहा है कि देशभर में करीब 18 फीसदी तक राशन कार्ड रद्द हो सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश में 25 लाख से ज्यादा फर्जी राशन कार्ड हैं। सरकार के नए आदेश के मुताबिक जिन लोगों ने 6 महीने से राशन नहीं लिया है, उन पर सबसे पहले गाज गिरने वाली है। बात यहीं नहीं रुकेगी। प्रशासन घर-घर जाकर राशनकार्ड धारकों की जांच करने वाला है। यहां तक कि जिन लोगों ने ई-केवाईसी कराया हुआ है, उनकी भी पात्रता की फिर से जांच होगी। गरीब कल्याण अन्न योजना भी दायरे में केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना यानी गरीब कल्याण अन्न योजना के लाभार्थियों पर भी नया आदेश लागू होगा। अगर कोई लाभार्थी इस योजना के तहत मुफ्त राशन ले रहा है और पिछले 6 महीने से उसने राशन नहीं उठाया है तो नाम कटने की पूरी संभावना है। तुरंत करा लें राशन कार्ड का ई-केवाईसी अगर अभी तक आपने अपने राशन कार्ड का ई-केवाईसी नहीं कराया है तो इस काम को पहली फुर्सत में निपटा लें। बिना ईकेवाईसी के राशन कार्ड पर खतरा सबसे ज्यादा है। राशन कार्ड का ई-केवाईसी आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं। लगातार मौके दिए जाने के बावजूद अभी भी बड़ी संख्या में राशन कार्ड के e-KYC नहीं हुए हैं। सरकार को आशंका है कि ये कार्ड फर्जी हो सकते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फर्जी राशन कार्ड दरअसल ऐसा देखा जा रहा है कि ऐसे लाखों लोगों ने भी राशन कार्ड बनवा रखे हैं, जो पात्रता की शर्तों को पूरा भी नहीं करते हैं। इन लोगों ने सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए फर्जी दस्तावेजों की मदद से राशन कार्ड बनवा रखे हैं। इन परिवारों को राशन की जरूरत नहीं है, लेकिन राशन कार्ड के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेना है। मसलन आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए राशन कार्ड की जरूरत होती है। आयुष्मान कार्ड से 5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है। इसी तरह EWS कोटे से दाखिला लेने में भी राशन कार्ड बहुत काम आता है।

चुनावी पारदर्शिता पर सवाल: CEC ने उठाया मुद्दा, मरे हुए लोगों के नाम लिस्ट में क्यों?

 नई दिल्ली बिहार में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान को लेकर विपक्ष के लगातार विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इस प्रक्रिया का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग को मरे हुए मतदाताओं, डुप्लिकेट मतदाता पहचान पत्र धारकों और विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल करने की अनुमति देनी चाहिए। यह बयान तब आया है जब राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने SIR अभियान के खिलाफ तीखा विरोध जताया है। विपक्षी दलों का दावा है कि SIR की प्रक्रिया से 50 लाख से अधिक मतदाताओं के मताधिकार छिन सकते हैं। SIR अभियान पर उठे सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त ने इंटरव्यू में कहा, "क्या चुनाव आयोग को मृत मतदाताओं को वोटर लिस्ट में रखने की अनुमति देनी चाहिए? क्या डुप्लिकेट वोटर आईडी वाले लोगों को अनुमति दी जानी चाहिए? क्या विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल करना चाहिए? इस पर आपत्ति क्या है?" उन्होंने जोर देकर कहा कि एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची लोकतंत्र की सफलता की नींव है। विपक्ष का विरोध और संसद में हंगामा कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत इंडिया गठबंधन के कई सांसदों ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में संशोधन के खिलाफ संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और इसे वापस लेने के साथ-साथ दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले, कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, झामुमो, राजद और वामपंथी दलों सहित विपक्ष के शीर्ष नेता और सांसद संसद के मकर द्वार के बाहर एकत्र हुए और सरकार तथा मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप है कि यह अभियान बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं, खासकर गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की साजिश है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RJD नेता तेजस्वी यादव ने इस अभियान को "लोकतंत्र के खिलाफ साजिश" करार दिया। चुनाव आयोग का आंकड़ा चुनाव आयोग ने  एक बयान में बताया कि SIR अभियान के तहत अब तक 56 लाख मतदाताओं को अयोग्य पाया गया है। इसमें 20 लाख मृत मतदाता, 28 लाख ऐसे मतदाता जो बिहार से बाहर चले गए हैं, 7 लाख ऐसे मतदाता जो दो जगहों पर पंजीकृत हैं, और 1 लाख ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनका पता नहीं चल सका। CEC ने सवाल उठाया, “क्या चुनाव आयोग को ऐसे मतदाताओं को नहीं हटाना चाहिए?” पारदर्शी प्रक्रिया का दावा ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR अभियान पूरी तरह पारदर्शी है और इसका उद्देश्य एक शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना है। उन्होंने बताया कि बिहार के मतदाताओं ने इस अभियान में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया है और अब तक 57.48% गणना फॉर्म एकत्र किए जा चुके हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है, जबकि शेष 3 करोड़ मतदाताओं को अपनी जन्म तिथि या स्थान साबित करने के लिए 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक जमा करना होगा। उन्होंने पूछा, "क्या चुनाव आयोग द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से तैयार की जा रही शुद्ध मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव और एक मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला नहीं है?" मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "किसी न किसी मोड़ पर, हम सभी को, और भारत के सभी नागरिकों को, राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर, इन सवालों पर एक साथ गहराई से विचार करना होगा।" सुप्रीम कोर्ट में मामला SIR अभियान के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि यह प्रक्रिया असंवैधानिक है और लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को अभियान जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन यह भी सुझाव दिया कि आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों को स्वीकार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने अभियान के समय पर भी सवाल उठाए, पूछा कि इसे केवल बिहार में ही क्यों लागू किया गया और इसे पूरे देश में क्यों नहीं किया गया। विपक्ष की रणनीति एक दिन पहले, बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने धमकी दी थी कि अगर एसआईआर प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो वे राज्य में आगामी चुनावों का बहिष्कार करेंगे। उनके बहिष्कार वाले बयान के बारे में पूछे जाने पर, तेजस्वी ने कहा, "देखेंगे कि लोग क्या चाहते हैं और हमारे सहयोगी क्या कहते हैं।" उन्होंने पूछा, "अगर राज्य के चुनाव पक्षपातपूर्ण और जोड़-तोड़ वाले तरीके से कराए जाते हैं, जहां यह पहले से ही तय होता है कि कौन कितनी सीटें जीतेगा, तो ऐसे चुनाव कराने का क्या फायदा?"

मध्यप्रदेश के गांव बनेंगे स्मार्ट! 23 हजार पंचायतों में शहरी ढांचे की होगी शुरुआत

भोपाल  मध्य प्रदेश के गांवों की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है. आने वाले सालों में एमपी के गांव विकास के मामले में शहरों को टक्कर देंगे. एमपी की हर पंचायत के लिए एक मास्टर प्लान बनाया जाएगा जिसमें शहरों जैसी तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी. इस मास्टर प्लान के तहत रोजगार और पर्यटन पर ज़्यादा फोकस रहेगा. फिलहाल दो पंचायतों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जबकि आने वाले समय में कुल 23 हज़ार पंचायतों को कवर करने की योजना है. क्या है ये मास्टर प्लान अक्सर शहरों को डेवलप करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जाते हैं लेकिन मध्य प्रदेश ग्रामीण विकास की ये पहल प्रदेश के गांवों को नई दिशा प्रदान करेगी. इस मास्टर प्लान के तहत रोजगार और पर्यटन पर फोकस किया जाएगा जिससे लोग अपने स्तर पर कमाई को रास्ते खोज सकें. फिलहाल पंचायत  बिलकिसगंज, जिला सीहोर और पंचायत मुरवास, जिला विदिशा में इस मास्टर प्लान की नींव रखी जा चुकी है. ऐसे ही बाकी पंचायतों के लिए भी प्लान तैयार किए जाएंगे. किन बिंदुओं पर केंद्रित होगा प्लान इस मास्टर प्लान के तहत गांव में सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट और cctv कैमरे जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. साथ ही साथ साफ-सफाई, और वेस्ट मैनेजमेंट पर भी ध्यान रखा जाएगा. हेल्थ, एजुकेशन, हाउसिंग और एंटरटेंमेंट के  लिए भी पूरी व्यवस्थाएं रखी जाएंगी. शहरों की तरह गांव की जमीन के हिसाब से सेक्टर भी मार्क किया जाएगा.   किस स्तर तक पहुंची मास्टर प्लान की गाड़ी फिलहाल बिलकिसगंज और मुरवास, दोनों पंचायतों में सीसीटीवी लगाए जाने, लेक फ्रंट, नया बाजार, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, ग्रे वॉटर और ड्रेनेज सिस्टम, प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर, नट उत्पादन, खेती, गौशाला निर्माण करने की योजना बनाई जा रही है. ये मेगा प्लान दो चरणों में काम करेगा. पहला चरण साल 2026 से 2030 और दूसरा चरण साल 2030 से 2035 तक चलेगा.  भोपाल के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर द्वारा दोनों पंचायतों का प्लान तैयार किया गया है.  प्लान में हुई शामिल बातें     गांव में सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं। साफ-सफाई, सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था।     हेल्थ, एजुकेशन, हाउसिंग और मनोरंजन के लिए अलग क्षेत्र तय। गांव की जमीन के हिसाब से सेक्टर चिह्नित किए गए हैं। गांवों में भी लेक फ्रंट, स्थानीय व्यापार पर जोर     इस प्लान के तहत दो चरणों में काम होगा। पहला चरण 2026 से 2030 और दूसरा चरण 2030 से 2035 तक चलेगा।     बिलकिसगंज के लिए 11 और मुरवास के लिए 7 खास प्रोजेक्ट बनाए गए हैं, जैसे- लेक फ्रंट, नया बाजार, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, ग्रे वॉटर और ड्रेनेज सिस्टम, प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर, गो-काष्ठ निर्माण, नट उत्पादन और खेती, गौशाला निर्माण। प्लान की जरूरत क्यों पड़ी? अभी इनमें रोजगार, छोटे कारोबार और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी जरूरतें नहीं हैं। गांवों व जंगलों को साफ-सुथरा और टिकाऊ बनाए रखना जरूरी है। क्या संभावना है? : अगर लोगों को सही ट्रेनिंग दी जाए, तो वे अपने स्तर पर कमाई के रास्ते खोज सकते हैं। गांवों में चल रहे स्वयं सहायता समूह और पर्यटन से भी आमदनी बढ़ सकती है। आईआईटी बना रहा प्लान : योजना को लेकर भोपाल में दो दिन तक अफसरों और विशेषज्ञों की बैठक हुई। इसमें गांवों के सरपंच भी थे। योजना केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसमें 14 राज्यों की 36 पंचायतें शामिल हैं। योजना आईआईटी व एसपीए जैसे संस्थान बना रहे हैं।

इंडिया से हायरिंग पर ट्रंप का ऐक्शन! टेक दिग्गजों को सख्त हिदायत

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को एक सख्त मैसेज दिया है, जिसमें भारत समेत दूसरे देशों से हायरिंग करने को मना किया है. इसमें Google, Microsoft, Meta जैसे नाम शामिल हैं. बुधवार को वॉशिंगटन में आयोजित AI Summit के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी टेक कंपनियों को ये संदेश दिया है. साथ ही अमेरिकी टैलेंट को हायरिंग करने की भी सलाह दी है.  यहां आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में बहुत से कर्मचारी यहां तक कि CEO तक के पोस्ट पर कई भारतीय मूल के लोग पहुंच चुके हैं. इसमें Google CEO सुंदर पिचाई और Microsoft CEO सत्य नडेला जैसे नाम शामिल हैं. हाल ही में Meta ने भी एक बड़ी AI टीम की हायरिंग की है, जिसमें कई भारतीय नाम शामिल हैं.  डोनाल्ड ट्रंप ने AI Summit  के दौरान के दौरान टेक इंडस्ट्री में ग्लोबल माइंडेस्ट की आलोचना की. उन्होंने आगे कहा कि इस वजह से कई अमेरिकी नागरिक और अमेरिकी टैलेंट को इग्नोर किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया है कि कई टॉप कंपनियां प्रोफिट के लिए अमेरिका की आजादी का फायदा उठा रहे हैं और बाहरी लोगों पर बड़ा इनवेस्ट कर रहे हैं.  चीन में लगा रहे फैक्ट्री और भारत से कर रहे भर्तीः ट्रंप  ट्रंप ने आगे कहा कि बहुत सी टेक कंपनियां अमेरिकी आजादी की वजह से अपनी फैक्टरी को चीन में लगा रहे हैं और भारत से कर्मचारियों को भर्ती कर रहे हैं, ये सब बातें आप जानते हैं. इन सब के बावजूद वे अपने ही देश के लोगो को नकार रहे हैं और आलोचना तक कर रहे हैं.  अमेरिका AI टेक कंपनियां Sr No- कंपनी का नाम संस्थापक / CEO स्पेशल प्रोडक्ट 1 OpenAI सैम ऑल्टमैन (CEO), एलन मस्क (Co-founder) ChatGPT, GPT मॉडल्स 2 Google DeepMind डेमिस हासाबिस (CEO) Gemini, AlphaGo, AI रिसर्च 3 Anthropic डारियो अमोदेई (CEO, Ex-OpenAI) Claude AI मॉडल 4 xAI एलन मस्क (Founder) Grok AI, Twitter/X इंटीग्रेशन 5 NVIDIA जेन्सेन हुआंग (CEO) AI चिप्स (GPU), AI हार्डवेयर 6 Microsoft सत्या नडेला (CEO) Azure AI, Copilot, OpenAI में निवेशक 7 Amazon (AWS AI) एंडी जेसी (CEO), रूहित प्रसाद (Alexa AI Chief) Alexa, Amazon Bedrock 8 IBM Watson अरविंद कृष्णा (CEO) Watson AI, एंटरप्राइज AI समाधान 9 Meta AI (Facebook) मार्क ज़ुकरबर्ग (Founder & CEO) LLaMA, FAIR रिसर्च, AI चैटबॉट 10 Palantir Technologies एलेक्स कार्प (CEO) AI डेटा एनालिटिक्स, गोथाम प्लेटफॉर्म अमेरिकी फर्स्ट पॉलिसी को फिर से दोहराया  ट्रंप ने एक बार फिर से अमरिकी फर्स्ट पॉलिसी को याद दिलाया. उन्होंने आगे कहा कि AI की रेस में न्यू स्प्रिट की मांग है, साथ ही राष्ट्र के प्रति लगाव जरूरी है. उन्होंने कहा कि हमें अमेरिकी कंपनियों की जरूरत है, जो अमेरिका में ही रहें. साथ ही वह अमेरिकी फर्स्ट पॉलिसी को फॉलो करें. ये सब आपको करना ही पड़ेगा.   

पुलिस थानों में रामायण पाठ शुरू, कॉन्स्टेबल खुश तो कांग्रेस ने खड़े किए सवाल

भोपाल  मध्य प्रदेश में पुलिस के नए आरक्षकों की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है. प्रदेश में 8 अलग अलग ट्रेनिंग सेंटर में करीब 3800 आरकक्षों की ट्रेनिंग चल रही है, जो 9 महीने तक चलेगी. हालांकि, इस बार की ट्रेनिंग चर्चा में इसलिए है क्योंकि इस बार नई रंगरूट फिजिकल ट्रेनिंग के साथ-साथ रामचरितमानस का पाठ करते भी नजर आएंगे. मध्य प्रदेश पुलिस के पुलिस प्रशिक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक रामबाबू सिंह ने नए रिक्रूटर्स को रामचरितमानस पढ़ने के निर्देश दिए हैं. भगवान राम के जीवन से शिक्षा लें दरअसल कई नए रिक्रूटर्स ने यह इच्छा जताई थी कि उनकी ट्रेनिंग उनके गृह जिले के पास के ट्रेनिंग सेंटर में होनी चाहिए. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में संबोधित करते हुए कहा कि ने रिक्रूटर्स ट्रेनिंग के साथ-साथ रामचरितमानस का पाठ करें. भगवान राम के जीवन से शिक्षा लें, उन्होंने कहा प्रभु श्री राम 14 साल तक वन में रहें है. आप 9 माह अपने घर से दूर ट्रेनिंग सेंटर में नहीं रह सकते. उन्होंने एक आदेश भी जारी किया जिसमें लिखा कि आप सभी को प्रेरणा के लिए रामचरितमानस पढ़ना चाहिए. इससे आपके जीनव को प्रेरणा और ऊर्जा मिलेगी.  क्यों पढ़ाई जा रही रामचरितमानस? तनावभरे माहौल में रोज जनता की सेवा में डटी रहने वाली मध्य प्रदेश पुलिस ने अब एक नई पहल शुरू की है, रामचरितमानस पाठ. इसका उद्देश्य सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि नैतिक और मानसिक सशक्तिकरण है. यह पाठ अब नए पुलिसकर्मियों को उनके ड्यूटी के बीच मानसिक शांति, आत्मनियंत्रण और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनेगा. सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता, सेवा और त्याग जैसे आदर्श अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं वर्दीधारी कर्मयोगियों के व्यवहार में उतर रहे हैं. 'रामजी के वनवास के आगे ये ट्रेनिंग कुछ भी नहीं' ट्रेनिंग ले रही कॉन्स्टेबल उस्मानी शबनम ने कहा, साहब ने बताया कि राम जी ने किस तरह 14 साल का वनवास लिया था। उसके सामने तो ये पुलिस ट्रेनिंग कुछ भी नहीं है। इससे हमें सीख लेना चाहिए कि परिवार से दूर रहकर हम भी देशभक्ति कर सकें। रामचरितमानस का पाठ करने से हमें रामजी के आचरण पर चलने और अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान रहने की सीख मिलेगी। 'रामायण पाठ करने से हम मोटिवेटेड रहेंगे' कॉन्स्टेबल अयान महमूद खान ने कहा, राम जी हमारे प्रेरणा स्रोत हैं। यहां अच्छे से ट्रेनिंग करके निकलेंगे और देश की सेवा करेंगे। रामचरित मानस पढ़ने का अच्छा सुझाव दिया है। इससे हम मोटिवेटेड रहेंगे और हमारा मन शांत रहेगा। दिन भर की थकान के बाद अगर हम शाम को इसका पाठ करते हैं तो हमें मेंटली पीस मिलेगा। एडीजी सर का अच्छा सजेशन है, हम लोग भी इसे ट्राय करेंगे। ट्रेनिंग से एक दिन पहले की कॉन्स्टेबलों से बात बुधवार 23 जुलाई से मप्र के आठ पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में करीब 4 हजार नए पुलिस आरक्षकों की ट्रेनिंग शुरू हुई। जून में पुलिस की नौकरी में चयनित होकर आए करीब 600 आरक्षकों ने अपने गृह जिले के करीब वाले पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS) में तबादला करने के आवेदन दिए। बड़ी संख्या में जब नए आरक्षकों की ट्रेनिंग के पहले ही तबादलों के आवेदन और सिफारिशें आईं तो एडीजी ने प्रशिक्षण शुरू होने एक दिन पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इसके जरिए सभी आठ पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के एसपी और नए कॉन्स्टेबलों से बात की। ट्रांसफर एप्लिकेशन से परेशान होकर दी सलाह एडीजी (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह ने बताया, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (पीटीएस) चेंज करने के लिए बहुत सारे एप्लिकेशन आ रहे थे। पीटीएस बदलवाने के लिए भीड़ लगी हुई थी। ज्यादातर एप्लिकेशन में लिखा है- छिंदवाड़ा का रहने वाला हूं, मुझे पीटीएस पचमढ़ी में कर दिया जाए। मैं चंबल का रहने वाला हूं, पीटीएस तिघरा कर दिया जाए। कोई कह रहा था मां बीमार तो किसी के पिता बीमार हैं। मंगलवार को एडीजी राजाबाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में ट्रेनिंग लेने पहुंचे कॉन्स्टेबलों से कहा, भगवान राम ने 14 साल का वनवास स्वीकार किया था। भगवान जब माता-पिता की आज्ञा मानने के लिए 14 साल वन में रह सकते हैं तो आप अपने ट्रेनिंग के लिए घर-परिवार से दूर नहीं रह सकते। आप भगवान राम के जीवन को देखिए, रावण से लड़ने के लिए वानरों की सेना तैयार की और लंका पर विजय प्राप्त की। मेरा सुझाव है कि जो नए आरक्षक हैं वो रोज सोने से पहले रामचरितमानस का पाठ करें। रामचरितमानस से क्या बदलेगा? • तनाव में राहत: रोज की भागदौड़ और तनाव में यह आध्यात्मिक अभ्यास शांति देगा • सकारात्मक कार्यसंस्कृति: आपसी रिश्तों में सौहार्द और जनता के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी • अनुशासन और प्रेरणा: मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन से सीखकर पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों में और निखार ला सकेंगे क्या है मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा रामायण पाठ की सलाह का मामला?     रामायण पाठ की सलाह: मप्र पुलिस के नव आरक्षकों को प्रशिक्षण के दौरान रामायण पाठ करने की सलाह दी गई है, ताकि वे मानसिक शांति और प्रेरणा प्राप्त कर सकें।     एडीजी का संदेश: एडीजी (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में नव आरक्षकों से रामायण का पाठ करने की अपील की, भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने की बात की।     विपक्ष का विरोध: कांग्रेस ने इस निर्णय पर सवाल उठाए, और इसे धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन बताया, क्योंकि किसी को धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।     प्रशिक्षण में बदलाव: मप्र पुलिस के नव आरक्षकों की नौ महीने की ट्रेनिंग में तकनीकी शिक्षा, जैसे ई-साक्ष्य और सीसीटीएनएस, भी शामिल की गई है।     सिर्फ सलाह, अनिवार्य नहीं: रामायण पाठ करना अनिवार्य नहीं है, यह सिर्फ एक सुझाव है जो जवानों को प्रेरणा और मार्गदर्शन देने के लिए दिया गया है। भोपाल के भौरी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से ट्रेनिंग कर रहे आरक्षकों से बातचीत  भोपाल स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पहुंची, जहां ट्रेनिंग कर रहे आरक्षकों से हमने बातचीत की. उन्होंने कहा कि ADG साहब ने कोई गलत बात नहीं कही है. रामचरितमानस से हमें प्रेरणा ही मिलेगी, त्याग, समर्पण और सेवा ही सीखेंगे. वहीं, ट्रेनिंग कर रहे कुछ मुस्लिम आरक्षकों ने कहा कि जहां से भी प्रेरणा मिले, वहां से लेना चाहिए. राम जी वन में रहे और हम क्या 9 माह ट्रेनिंग … Read more

मंदिर में इस्लाम प्रचार पर दर्ज FIR रद्द, हाईकोर्ट ने कहा– यह अपराध नहीं, मुस्लिम युवकों को राहत

बेंगलुरु कर्नाटक हाई कोर्ट ने वैसे तीन मुस्लिम व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है, जिन पर एक हिंदू मंदिर में इस्लाम की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले पर्चे बांटने और मौखिक रूप से अपनी धार्मिक मान्यताओं को समझाने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि किसी मंदिर में सिर्फ इस्लाम का प्रचार करने वाला पर्चा बांटने और उसके बारे में व्याख्या करने से कोई अपराध नहीं हो जाता, जब तक कि धर्मांतरण से जुड़ा कोई साक्ष्य न मिलता हो। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 299, 351(2) और 3(5) और कर्नाटक धर्म स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2022 की धारा 5 के तहत आरोप लगाए गए थे। जस्टिस वेंकटेश नाइक टी की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों ने उपरोक्त कानूनों के तहत कोई अपराध नहीं किया है, क्योंकि उन लोगों ने किसी भी व्यक्ति को इस्लाम में धर्मांतरित करने का कोई प्रयास नहीं किया। हिन्दू धर्म पर अपमानजनक टिप्पणी के भी आरोप लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि चार मई 2025 को शाम 4:30 बजे, जब वह जामखंडी स्थित रामतीर्थ मंदिर गया था, तो कुछ लोग वहां मंदिर परिसर में इस्लामिक शिक्षा का प्रचार करने वाले पर्चे बाँट रहे थे और अपनी धार्मिक मान्यताओं के बारे में लोगों को मौखिक रूप से समझा रहे थे। शिकायत में बताया गया है कि घटनास्थल पर मौजूद हिन्दू श्रद्धालुओं ने उन लोगों से उनकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ की थी, तो इसके जवाब में, मुस्लिम युवकों ने कथित तौर पर हिंदू धर्म की आलोचना करते हुए अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। नौकरी और गाड़ी का दिया था प्रलोभन शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी मंदिर में मौजूद लोगों को इस्लाम धर्म अपनाने के एवज में गाड़ी देने और दुबई में नौकरी दिलाने का प्रलोभन दे रहे थे। दूसरी तरफ, अपने खिलाफ दर्ज अपराध को रद्द करने की मांग करते हुए, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे केवल अल्लाह या पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं का प्रचार कर रहे थे। धर्मांतरण के साक्ष्य नहीं याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा किसी व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास करने के आरोप केपीआरएफआर अधिनियम की धारा 5 के तहत दंडनीय अपराध के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करते हैं क्योंकि ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिससे साबित हो कि वे सभी धर्मांतरण कराने की कोशिश कर रहे थे।