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न्यायिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘द्वितीय श्रेणी का व्यवहार न करें जिला जजों से’

जबलपुर  जबलपुर हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश अतुल श्रीधरन व न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल की युगल पीठ ने अपने एक आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हाई कोर्ट और जिला कोर्ट के बीच सामंत और गुलाम जैसे रिश्ते हैं। जिला कोर्ट के जज हाई कोर्ट जजों से मिलते हैं तो उनकी बॉडी लैंग्वेज बिना रीढ़ की हड्डी वाले स्तनधारी के गिड़गिड़ाने जैसी होती है। हाई कोर्ट के जज खुद को सवर्ण और जिला कोर्ट के जजों को शूद्र समझते हैं। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक फैसले में उच्च न्यायालय और जिला न्यायपालिका के रिश्तों को लेकर तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच का रिश्ता सामंती व्यवस्था जैसा है, जहां उच्च न्यायालय खुद को सवर्ण और जिला न्यायपालिका को शूद्र समझता है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में व्यापमं मामले में आरोपी को जमानत देने के कारण हाई कोर्ट ने संबंधित जज को बर्खास्त कर दिया। हाई कोर्ट के ऐसे कृत्य से जिला न्यायपालिका में संदेश जाता है कि बड़े मामलों में निर्दोष साबित करने, जमानत देने से संबंधित जज के खिलाफ के विपरीत कारवाई हो सकती है। कोर्ट ने गलत तरीके से बर्खास्त किए गए न्यायाधीश को बैकवेजेस के साथ पेंशन का भुगतान करने को कहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता जज को पांच लाख का मुआवजा प्रदान करने की निर्देश भी दिए। 2016 का है मामला, भोपाल जिला अदालत में पदस्थ थे जगत मोहन चतुर्वेदी 2016 में एससी एसटी एक्ट की विशेष न्यायाधीश के रूप में भोपाल जिला अदालत में पदस्थ रहे जगत मोहन चतुर्वेदी की ओर से यह याचिका दायर की गई थी। उन पर आरोप लगा था कि 2015 में व्यापमं मामले के आरोपी कुछ छात्रों को उन्होंने अग्रिम जमानत दी। जबकि इसी मामले में अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। अलग-अलग तथ्यों के चलते विभिन्न आदेश दिए। इस पर हाई कोर्ट प्रशासन ने उनके विरुद्ध कदाचरण की कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया। हाई कोर्ट की फुल कोर्ट मीटिंग में अनुमोदन किया गया। याचिकाकर्ता की अपील भी निरस्त कर दी गई। यह टिप्पणी जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की बेंच ने दी। बेंच व्यापमं केस से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका भोपाल के पूर्व एससी-एसटी कोर्ट जज जगत मोहन चतुर्वेदी ने लगाई थी। उन्हें एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने के बाद बर्खास्त किया गया था। जिला जज ऐसे मिलते हैं जैसे रीढ़ हीन स्तनधारी कोर्ट ने डबल बेंच ने कहा कि जब जिला कोर्ट के जज हाई कोर्ट के जजों से मिलते हैं तो उनकी शारीरिक भाषा ऐसी होती है जैसे कोई रीढ़विहीन स्तनधारी गिड़गिड़ा रहा हो। रेलवे स्टेशन पर स्वागत करना, जलपान कराना आम बात हो गई है। हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में प्रतिनियुक्त जजों को शायद ही कभी बैठने को कहा जाता है। इस मानसिकता का फैसलों पर भी असर यह रिश्ता सम्मान का नहीं, बल्कि डर और हीनता पर आधारित है। यह मानसिकता इतनी गहरी है कि असर न्यायिक फैसलों में भी दिखता है। कई बार योग्य मामलों में जमानत नहीं दी जाती या सबूतों के अभाव में दोषसिद्धि हो जाती है। सिर्फ इसलिए कि आदेश ‘गलत’ न मान लिया जाए। "डर के साए में न्याय नहीं, सिर्फ दिखावा" राज्य की न्याय प्रणाली की असली तस्वीर जिला कोर्ट की स्वतंत्रता से दिखती है, न कि केवल हाई कोर्ट से। लेकिन जब हाई कोर्ट बार-बार छोटी-छोटी बातों पर सख्त रवैया अपनाता है, तो जिला जज डर जाते हैं। परिवार, नौकरी और प्रतिष्ठा के डर से वे न्याय नहीं कर पाते, बस दिखावा करते हैं। कोर्ट का आदेश- सेवा लाभ बहाल हो.. कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता जज को सिर्फ अलग सोचने और काम करने के कारण दंडित किया गया। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें सेवा समाप्ति की तारीख से सेवानिवृत्ति तक का बकाया वेतन 7% ब्याज सहित दिया जाए। पेंशन और अन्य सेवा लाभ बहाल हों। मानसिक क्षति और सामाजिक अपमान के लिए 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। तर्क दिया गया कि अलग-अलग मामलों के तथ्यों के आधार पर उन्होंने जज की हैसियत से अलग-अलग आदेश दिए थे। …अब यह कहा कोर्ट ने सुनवाई के बाद कोर्ट ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों के बीच निराशाजनक संबंध की आलोचना की। इसे एक सामंत और दास के बीच का रिश्ता बताया। कोर्ट ने कहा कि एक अहंकारी उच्च न्यायालय छोटी-छोटी गलतियों के लिए जिला न्यायपालिका को फटकार लगाने की कोशिश करता है, जिससे जिला न्यायपालिका को दंड के भय में रखा जाता है। पीठ ने कहा कि इससे न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है। हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश जब उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का अभिवादन करते हैं, तो उनकी शारीरिक भाषा, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने गिड़गिड़ाने जैसी होती है। जिससे जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश अकशेरुकी यानि बिना रीढ़ के स्तनधारियों की प्रजाति बन जाते हैं। जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों द्वारा रेलवे प्लेटफार्म पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनके लिए जलपान की सेवा करने के उदाहरण आम हैं। उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में प्रतिनियुक्ति पर आए जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कभी भी बैठने की पेशकश नहीं करते हैं। जब कभी उन्हें ऐसा मौका मिलता भी है, तो वे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने बैठने में हिचकिचाते हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि जाति व्यवस्था की छाया राज्य के न्यायिक ढांचे में स्पष्ट दिखाई देती है, जहां उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सवर्ण हैं और जिला न्यायपालिका के जज शूद्र व दयनीय हैं। इससे जिला न्यायपालिका मानसिक रूप से कमजोर हो जाती है, जो अंतत: उनके न्यायिक कार्यों में परिलक्षित होती है। जहां सबसे योग्य मामलों में भी जमानत नहीं दी जाती, अभियोजन पक्ष को संदेह का लाभ देकर सबूतों के अभाव में दोषसिद्धि दर्ज की जाती है और आरोप ऐसे लगाए जाते हैं, मानो दोषमुक्त करने का अधिकार ही न हो। यह सब उनकी नौकरी बचाने के नाम पर होता है, जिसका खामियाजा इस मामले में याचिकाकर्ता को अलग तरह से सोचने और काम करने के कारण भुगतना पड़ा। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुका है। उसके साथ हुए … Read more

UK के साथ मुक्त व्यापार समझौता प्रदेश के उद्योग और निर्यात को देगा नया आयाम: डॉ. यादव

UK के साथ मुक्त व्यापार समझौता प्रदेश के उद्योग और निर्यात को देगा नया आयाम: डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एफटीए के लिए प्रधानमंत्री मोदी का किया अभिनंदन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते यानि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट-FTA की उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक अभिनंदन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, युवाओं के साथ-साथ समूचा भारत गौरवान्वित हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर जो करार किया है, यह न केवल उद्योग, व्यापार और रोजगार की दृष्टि से, बल्कि वैश्विक संबंधों की दृष्टि से भी भारत को नई ऊंचाईयों पर लेकर जाएगा। भारत सरकार के "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" जैसे अभियानों से वैश्विक स्तर पर मिला विस्तार देश की बढ़ती प्रतिष्ठा का अतुलनीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हम सभी को एफटीए के स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। मध्यप्रदेश को भी भविष्य में ब्रिटेन के साथ हुए इस मुक्त व्यापार समझौते का भरपूर लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि नये मुक्त व्यापार समझौते से मध्यप्रदेश को कृषि सेक्टर, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, सर्विस सेक्टर, एविएशन सेक्टर, लेदर इंडस्ट्री, प्लास्टिक एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर सहित मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्रियल ग्रोथ में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।  

इतिहास में नया मुकाम: इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ PM मोदी बने दूसरे सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के दौरे पर हैं, इसी बीच उन्होंने एक और बेहद खास कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। उन्होंने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का खास रिकॉर्ड तोड़ दिया। नरेंद्र मोदी 25 जुलाई यानी आज भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री पद संभालने वाले पीएम बन गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इंदिरा गांधी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए ये कामयाबी हासिल की है। इंदिरा गांधी सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के मामले में दूसरे नंबर थीं। हालांकि, पीएम मोदी अब उनसे आगे निकल गए हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी से आगे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ही हैं। पीएम मोदी ने इस मामले में इंदिरा को पछाड़ा नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यह मुकाम हासिल कर लिया। वह लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के मामले में इंदिरा गांधी से आगे निकल गए हैं। इंदिरा गांधी 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक, 4,077 दिनों तक प्रधानमंत्री रहीं। पीएम मोदी मोदी का 25 जुलाई को कार्यकाल 4,078 दिनों का हो गया है। लगातार तीसरी बार स्थिर सरकार नरेन्द्र मोदी ने लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जीत दिलाकर प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी की है. आजादी के बाद जन्मे पहले प्रधानमंत्री के रूप में पीएम मोदी ने गैर-कांग्रेसी नेताओं में सबसे लंबे समय तक सेवा देने का गौरव भी हासिल किया है. वह दो पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले एकमात्र गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जो उनकी राजनीतिक स्थिरता का प्रमाण है. पीएम मोदी ने जीते 6 चुनाव पीएम मोदी का राजनीतिक सफर साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ, जहां उन्होंने 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की. इसके बाद साल 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद उन्होंने लगातार तीन आम चुनावों में भाजपा को विजय दिलाई. एक अधिकारी ने बताया कि मोदी एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने एक ही पार्टी के तहत छह विधानसभा और लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज की है. यह उपलब्धि उनकी रणनीतिक कुशलता और जनता के बीच उनकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाती है. पीएम मोदी की नीतियों पर जनता को विश्‍वास पीएम मोदी का यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की बदलती राजनीतिक गतिशीलता को भी दर्शाता है. जहां नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर में कांग्रेस का वर्चस्व था, वहीं मोदी ने गैर-कांग्रेसी नेतृत्व को एक नई ऊंचाई दी है. उनकी नीतियों, जैसे डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत, ने देश की प्रगति को नई दिशा दी है.यह उपलब्धि मोदी के नेतृत्व की स्थिरता और उनके सुधारवादी एजेंडे के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाती है. हालांकि, विपक्षी दलों द्वारा उन पर लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने और ध्रुवीकरण की राजनीति करने के आरोप भी लगते रहे हैं. फिर भी, यह ऐतिहासिक क्षण भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. अब पीएम मोदी से आगे सिर्फ पहले प्रधानमंत्री नेहरू सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अभी भी जवाहरलाल नेहरू के नाम है। पंडित नेहरू ने 1952 से 1964 तक देश के प्रधानमंत्री की जिम्मा संभाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात करें तो उन्होंने पीएम पद संभालने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली है। वह 13 साल तक गुजरात के सीएम रहे। गैर कांग्रेसी पीएम के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल गैर कांग्रेस पीएम के तौर पर भी सबसे लंबा कार्यकाल भी प्रधानमंत्री मोदी का ही है। पीएम मोदी ने गुजरात में लगातार तीन बार BJP को जीत दिलाई। यह जीत 2002, 2007 और 2012 में मिली। उन्होंने केंद्र में भी यह कमाल किया। उनकी पार्टी बीजेपी ने 2014, 2019 और 2024 में लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीते। मई 2026 में तोड़ देंगे पूर्व पीएम नेहरू का रिकॉर्ड जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे जल्द ही वो नेहरू को भी पीछे छोड़ देंगे। पीएम मोदी मई 2026 में पूर्व पीएम नेहरू के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। इसी के साथ वो सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले व्यक्ति बन जाएंगे। यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि नरेंद्र मोदी बीते 24 सालों से सत्ता में हैं। वह पहले लगातार गुजरात के सीएम रहे और फिर लगातार करीब 11 सालों से प्रधानमंत्री बने हुए हैं। एक बात और है कि पीएम नरेंद्र मोदी देश की आजादी के बाद पैदा होने वाले पहले शख्स हैं, जो पीएम की कुर्सी तक बैठे हैं। आइए जानते हैं, उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य… – वह सबसे लंबे कार्यकाल वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम था। – गैर-हिंदी भाषी राज्य से आने वाले वह पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनका कार्यकाल इतना लंबा रहा है। – यदि राज्य में उनके सीएम कार्यकाल को भी गिन लिया जाए तो वह पहले नेता हैं, जो किसी चुनी हुई सरकार के सबसे लंबे समय तक मुखिया रहे हैं। – वह ऐसे पहले और गैर-कांग्रेसी पीएम हैं, जिन्होंने अपने दो कार्यकाल लगातार पूरे किए हैं। – एक रिकॉर्ड यह भी है कि वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अपने दम पर बहुमत हासिल करके दो बार सरकार बनाई। – इंदिरा गांधी के कार्य़काल के बाद वह पहले ऐसे पीएम हैं, जिन्होंने दोबारा बहुमत के साथ सत्ता हासिल की। इसके अलावा पंडित नेहरू के बाद वह दूसरे ऐसे नेता हैं, जो केंद्र सरकार का लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर नेतृत्व कर रहे हैं। – वह देश के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने लगातार 6 चुनाव जीते हैं। उन्हें 2002, 2207 और 2012 में गुजरात चुनाव में जीत मिली थी। इसके अलावा 2014, 2019 और 2024 में उन्हें लोकसभा चुनाव में जीत मिली थी।

उत्तर प्रदेश में कृषि श्रमिकों को मिलेगा नियमित भत्ता, सरकार देगी ₹6552 प्रति माह

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि श्रमिकों को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य सरकार ने कृषि से जुड़े श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा. अब कृषि श्रमिकों को प्रतिदिन 252 रुपये या मासिक 6552 रुपये का वेतन मिलेगा. सरकार के इस फैसले की खास बात यह है कि अब पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन जैसे कार्यों को भी कृषि श्रम की कैटेगरी में रखा गया है. इससे ऐसे श्रमिकों को भी न्यूनतम मजदूरी के तहत सुरक्षा और लाभ मिल सकेगा, जो पहले असंगठित क्षेत्र में आते थे. मजदूरी का भुगतान अब सिर्फ कैश तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल माध्यम में भी मजदूरी भुगतान करने का फैसला लिया है. इससे लेनदेन पारदर्शी होगा और श्रमिकों को समय पर मजदूरी मिल सकेगी. अब श्रमिकों को प्रति घंटे के हिसाब से भी न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी. यह व्यवस्था खास तौर से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो पूरे दिन की बजाय कुछ घंटों के लिए काम करते हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो श्रमिक पहले से इस नई दर से अधिक मजदूरी पा रहे हैं, उन्हें उनका पुराना लाभ मिलता रहेगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. सरकार ने इसे सिर्फ आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि श्रमिकों को सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने वाला कदम बताया है. प्रदेशभर में सभी प्रकार की खेती, बागवानी, सिंचाई, फसल कटाई और कृषि सहायक कार्यों पर ये नई मजदूरी दरें लागू होंगी. माना जा रहा है कि यह फैसला श्रमिकों के कल्याण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.

भारत-मालदीव संबंधों में गर्मजोशी की वापसी? मुइज्जू ने एयरपोर्ट पर किया मोदी का स्वागत

माले  मालदीव दौरे पर पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का माले एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू खुद एयरपोर्ट पर पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया है। जिसके बाद अब संभावना है कि दोनों देशों के संबंध, जो मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद खराब होने लगे थे, वो फिर से सुधर गये हैं। मुइज्जू ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया है। राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ-साथ मालदीव सरकार के कई शीर्ष मंत्री, जिनमें विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री शामिह हैं, वो भी प्रधानमंत्री मोदी की आगवानी के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे। यह साफ संकेत है कि द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊर्जा देने के लिए दोनों देशों में राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पिछले कुछ महीनों में भारत और मालदीव के रिश्तों में सुधार होने लगा है। मोहम्मद मुइज्जू ने 2023 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन चलाया था। राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू ने पहला द्विपक्षीय विदेशी दौरा चीन का किया था। इसके अलावा उन्होंने अपरोक्ष तौर पर भारत के खिलाफ कुछ बयान भी दिए थे। वहीं जनवरी 2024 में मालदीव के कुछ मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की थी, जिसके बाद दोनों देशों के संबंध काफी खराब होने लगे थे। भारत में 'मालदीव का बहिष्कार' करने की मुहिम भी चलाई गई थी। मालदीव और भारत के सुधर रहे हैं रिश्ते एक्सपर्ट्स का कहना है कि मालदीव के राष्ट्रपति ने पहले चीन और तुर्की जैसे देशों से संबंध बढ़ाने की कोशिश की थी। उनका मकसद भारत को दरकिनार करना था। लेकिन बहुत जल्द उन्हें अहसास हो गया कि भारत के बिना स्थिति काफी मुश्किल हो सकती है। क्योंकि मालदीव हिंद महासागर के बीच में है और कई द्वीपों में बिखरा देश है। यहां भारत की मदद के बिना मालदीव को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। किसी भी आपत स्थिति में सबसे पहले भारतीय मदद ही पहुंच सकती है। श्रीलंका ने भी मालदीव के राष्ट्रपति को भारत के साथ संबंध सुधारने की सलाह दी थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के तीसरी बार शपथ ग्रहण समारोह में मोहम्मद मुइज्जू दिल्ली आए थे। इसके अगले महीने फिर से मोहम्मद मुइज्जू ने दिल्ली का द्विपक्षीय दौरा किया था। फिर धीरे धीरे संबंध सुधरने लगे। प्रधानमंत्री मोदी को मालदीव ने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर राजकीय मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया है। इस दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, समुद्री निगरानी और आतंकवाद विरोधी रणनीति, आर्थिक सहायता और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में समझौते या घोषणाएं हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्षेत्रीय दबाव और घरेलू आर्थिक चुनौतियों के चलते मालदीव को भारत जैसे पड़ोसी और सहयोगी की आवश्यकता है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे के दौरान मालदीव के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान कर सकते हैं, जो क्रेडिन लाइन के जरिए होने की संभावना है। मोहम्मद मुइज्जू को चीन का हिमायती माना जाता था, उन्होंने मालदीव चुनाव में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी का मुद्दा बढ़ चढ़कर उठाया था. राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू परंपरा को बदलते हुए अपनी पहली यात्रा पर दिसंबर 2023 में तुर्की गए, फिर जनवरी 2024 में उन्होंने चीन की यात्रा की. जबकि मालदीव में रवायत ये थी कि नए राष्ट्राध्यक्ष पहले भारत का दौरा करते थे.  मोहम्मद मुइज्जू  का ये कदम बताता था कि वे मालदीव को भारत से दूर ले जा रहे हैं. इसके बाद मालदीव के मंत्रियों के बयान पीएम मोदी को लेकर आए जो गरिमा के विपरीत थे.  लेकिन साल 2023 से 2025 के बीच राष्ट्रपति मोइज्जू को और मालदीव के थिंक टैंक को भारत को नजरअंदाज करने का मतलब समझ में आ गया. शुक्रवार को पीएम मोदी जब मालदीव की राजधानी माले पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए मालदीव की पूरी सरकार पलक पांवड़े बिछाए तैयार थी.  खुद राष्ट्रपति मुइज्जू, मालदीव के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, गृह मंत्री एयरपोर्ट पर मौजूद थे. दो साल से कम समय में भी मोइज्जू की बायकॉट इंडिया की नीति, 'वेलकम मोदी' में तब्दील हो गई. आखिर क्या वजह रही जो राष्ट्रपति मोइज्जू को 18-20 महीनों में भारत को लेकर अपनी गलतियों को सुधारने पर मजूबर होना पड़ा.  आर्थिक संकट: कोरोना खत्म हो गया है लेकिन असर से मालदीव की अर्थव्यवस्था निकल नहीं पा रही है.  मालदीव की अर्थव्यवस्था संकट में है, विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 में मात्र $440 मिलियन था जो डेढ़ महीने के आयात के लिए पर्याप्त था. ऐसे मुश्किल मौके पर भारत ने मालदीव की मदद की. भारत ने 750 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप की सुविधा दी और 100 मिलियन डॉलक ट्रेजरी बिल रोलओवर के साथ महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की. इसके अलावा भारत अरबों रुपये का प्रोजेक्ट मालदीव में चला रहा है. ये प्रोजेक्ट मालदीव में बुनियाद ढांचे के विकास में अहम रोल अदा करेंगे. थिंक टैंक ओआरएफ ऑनलाइन के अनुसार मालदीव में भारत के सहयोग से बनाए जा रहे हनीमाधू हवाई अड्डा परियोजना और साथ ही 4,000 घरों के अगस्त 2025 से पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है. भारत यहां  ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (जीएमसीपी) पर काम कर रहा है. इसके जरिये एक पुल बनाया जा रहा है जो सितंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा. मालदीव के अड्डू में भारत ने अगस्त 2024 में एक लिंक ब्रिज परियोजना का उद्घाटन किया है. भारत यहां 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से एक हवाई अड्डा भी विकसित कर रहा है. भारत से रिश्तों में खटास की वजह से मालदीव के ये सारे प्रोजेक्ट फंस गए थे. 2025 में भारत और मालदीव ने मालदीव में नौका सेवाओं के विस्तार के लिए 13 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें 56 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता शामिल है. भारत मालदीव के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, जिसका व्यापार मूल्य 548 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है. ऐसे स्थिति में मालदीव का इंडिया बायकॉट का नारा महज चुनावी प्रोपगेंडा साबित हुआ. पर्यटन पर निर्भरता: मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान 28% है, जिसमें भारतीय … Read more

नशा मुक्ति अभियान को मिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव का समर्थन, संकल्प पत्र पर किए हस्ताक्षर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नशे से दूरी है जरूरी अभियान के संकल्प पत्र पर किए हस्ताक्षर समाज को नशा और अपराध मुक्त बनाने के लिए प्रदेश पुलिस चला रही है जागरुकता अभियान-मुख्यमंत्री डॉ. यादव नशा मुक्ति अभियान को मिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव का समर्थन, संकल्प पत्र पर किए हस्ताक्षर 30 जुलाई तक जारी रहेगा अभियान अभियान समाज और पुलिस की सहभागिता का सशक्त प्रयास भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान केवल अभियान नहीं, मादक पदार्थों की लत से युवाओं को बचाने की दिशा में समाज और पुलिस की सहभागिता का सशक्त प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित वृहद जन-जागरूकता अभियान "नशे से दूरी-है जरूरी" के अंतर्गत भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर किए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह अभियान 15 से 30 जुलाई 2025 तक प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस मुख्यालय के नारकोटिक्स विंग द्वारा संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य किशोरों और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना, उन्हें इस लत से दूर रखना और जो लोग पहले से नशे की गिरफ्त में हैं, उन्हें उचित परामर्श और सहयोग प्रदान कर पुनर्वास की दिशा में मार्गदर्शन देना है। पुलिस के नशा मुक्ति अभियान से जुड़ीं स्वयंसेवी संस्थाएं नशा मुक्ति अभियान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस अधिकारी, नगर एवं ग्राम रक्षा समितियां और कम्युनिटी पुलिसिंग के सभी विंग साथ मिलकर स्कूल, कॉलेज के युवाओं और आमजनों को नशे से दूरी बनाने के लिए जागरुक करेंगी। स्वयंसेवी संस्थाओं को भी प्रदेश स्तरीय महाअभियान से जोड़ा जा रहा है ताकि जनता में विशेषकर युवाओं में जागृति आए कि नशा किस प्रकार से उनके स्वास्थ्य एवं सामाजिक प्रतिष्ठा को खत्म कर प्रगति को बाधित कर रहा है। पुलिस का यह कार्य जन-जागरुकता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि समुदाय को कानून, असुरक्षा, गलत नीतियों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है, ताकि प्रदेशवासी नशा और अपराध मुक्त वातावरण में एक बेहतर जीवन जी सकें। जागरूकता, संवाद, सहयोग और सुरक्षा है अभियान का मूलमंत्र नशे के विरुद्ध समुदाय आधारित जन-जागरुकता अभियान में विभिन्न शासकीय विभाग, गैर-सरकारी संगठन (NGO), धर्माचार्य, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, सभी समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस गली-गली में जाकर आम जनता से संवाद कर रही है कि कैसे वे नशे से मुक्त रहें और युवा पीढ़ी नशे से दूरी बनाकर अपना भविष्य सुरक्षित करे। यह अभियान स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए जन-जागृति फैलाने में सहायक सिद्ध होगा। जागरूकता, संवाद, सहयोग और सुरक्षा अभियान का मूलमंत्र है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से किया संवाद, युवा उद्योगपतियों को वितरित किए भूमि आवंटन आशय-पत्र

मध्यप्रदेश को औद्योगिक और रोजगार संपन्न राज्य बनाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने किया 6 औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में शीघ्र प्रारंभ होगी पुलिस चौकी, महिला अधिकारी भी होंगी पदस्थ 15 करोड़ 61 लाख लागत के विस्तारित अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र का हुआ भूमि-पूजन युवा उद्योगपतियों को वितरित किए भूमि आवंटन आशय-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से किया संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे उद्योग और कारखाने मंदिरों की तरह हैं, जो लोगों के कष्ट मिटाते हैं। मध्यप्रदेश में उद्योगों का निरंतर जाल फैलाया जा रहा है। प्रदेश के युवाओं को पलायन की आवश्यकता नहीं है, नए उद्योग शुरू होने से प्रदश में तेजी से समृद्धि आएगी। युवाओं को रोजगारपरक उद्योगों में प्रोत्साहन देते हुए 5 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। मध्यप्रदेश को औद्योगिक और रोजगार संपन्न राज्य बनाएंगे और मध्यप्रदेश देश का नंबर एक राज्य होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को भोपाल के निकट अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 416 करोड़ रूपये निवेश वाली 6 नवीन औद्योगिक इकाईयों के भूमि-पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अचारपुरा विशेष औद्योगिक केन्द्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र एक्सटेंशन फेज-3 (ग्राम हज्जामपुर) का शिलान्यास भी किया, जो 31.21 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दुनिया के बड़े-बड़े उद्योगपति उद्योग लगाने के लिए आ रहे हैं। अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में आज हर पीढ़ी के उद्यमी हैं। जहां गोकलदास एक्सपोर्टस प्रा.लि. के प्रभात सिंह उपस्थित हैं वहीं सिनाई हेल्थकेयर के युवा आदित्य शर्मा और एसेड्स प्राइवेट लिमिडेट के रौनक चौधरी की उपस्थिति प्रसन्नता प्रदान कर रही है। अचारपुरा की तस्वीर बदल गई है। सावन का समय है और यहां उद्योगों की वर्षा हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सहित देशभर में उद्योग-व्यापार का वातावरण बना है। मध्यप्रदेश में उद्योग प्रारंभ करने के लिए छोटे-बड़े उम्र की कोई सीमा नहीं है और सरकार के द्वार सभी के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि खुशी का विषय है कि अचारपुरा की फैक्ट्रियों में ऐसी जैकेट बनाई जा रही हैं जो अमेरिका और अन्य देशों में निर्यात होती हैं। मध्यप्रदेश की प्रतिभाएं इन उत्पादों को तैयार कर विश्व में पहुंचा रही हैं। चीन जैसा देश हमारे कॉटन को बेच रहा है। मध्यप्रदेश की कपास की गुणवत्ता विश्व विख्यात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेहनत के मंदिर हमारे कारखाने इस बात के प्रतीक हैं कि वे सभी की तकलीफें दूर करते हैं। उद्योगपतियों की पूंजी और युवाओं का परिश्रम मिलकर अच्छा परिणाम देता है। राज्य सरकार ने देश के अलग-अलग शहरों में उद्योगों की स्थापना के लिए रोड शो आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया है। राज्य सरकार भारत ही नहीं यूके, दुबई, स्पेन, जर्मनी, जापान सहित अनेक देशों से निवेश लेकर आई हैं।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अर्थव्यवस्था के मामले में भारत का नंबर दुनिया में वर्ष 2014 में 15वें स्थान पर था, अब भारत तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्र में संपन्नता लाने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में 20 वर्ष पूर्व प्रति व्यक्ति आय 11 हजार रुपए थी, जो अब 1 लाख 52 हजार रुपए हो गई है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 55 लाख हेक्टेयर है जिसे बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करेंगे। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद 1500 रुपए की राशि हर माह दी जाएगी। सावन का महीना है, बहनों को शगुन की राशि भी देंगे। लाड़ली बहनों की राशि साल दर साल बढ़ाएंगे और इसे वर्ष 2028 तक बढ़ाकर 3000 रुपए तक ले जाएंगे। 6 नई औद्योगिक इकाईयों का किया भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा नए उद्योगों के भूमि-पूजन के साथ-साथ युवा उद्यमियों को भूमि-आवंटन के आशय पत्र भी बांटे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां 6 नई औद्योगिक इकाईयों ऐसेड्स प्राइवेट लिमिटेड, सिनाई हेल्थ केयर, गोकुलदास एक्सपोर्ट, इंडो एकॉर्ड अपरल्स, थिंक गैस एवं समर्थ अग्रीटेक का रिमोट दबाकर भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर अचारपुरा में पुलिस चौकी काम करना शुरू कर देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित आईजी (पुलिस) को इस चौकी पर महिला पुलिसकर्मियों को तैनात करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अचारपुरा में गोकलदास गारमेंट इकाई का भ्रमण किया। उन्होंने यहां कार्य करने वाली बहनों से बातचीत की और उनका उत्साहवर्धन किया। एमएसएमई और भोपाल जिले के प्रभारी मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व में यह परिवर्तन हुआ है।रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। गोकलदास एक्सपोर्टस प्रा.लि. में क्षेत्र की लगभग 2500 महिलाएँ दक्षता से कार्य कर रही हैं।मध्यप्रदेश के युवा उद्योगपति बनकर यहीं उद्योग स्थापित कर रहे हैं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव हाल ही दुबई एवं स्पेन की यात्रा से आए हैं।वे निरंतर उद्योगपतियों से संवाद कर रहे हैं जिससे औद्योगिक परिदृश्य बदला है एवं मध्यप्रदेश का स्थान विश्व में ऊँचा उठ रहा है।प्रदेश में सम्पूर्ण विकास की अवधारणा बनी है। कृषि एवं औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।प्रदेश में उद्योगपतियों की आवश्यकताओं के आधार पर औद्योगिक नीतियां बनाई गई हैं एवं निरंतर उद्योगपतियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही कारण है कि आज नवीन औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन हो रहा है और अनेक निवेशकों को उद्योग के लिए भूमि आवंटन के आशय-पत्र दिए गए हैं। बैरसिया विधायक विष्णु खत्री ने कहा कि अचारपुरा और आसपास का क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों का सक्रिय केंद्र बनना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि MSME क्षेत्र के अंतर्गत 280 हेक्टेयर में औद्योगिक विकास की योजना से बैरसिया का हर घर किसी न किसी रूप में औद्योगिक विकास से जुड़ेगा। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र अब राज्य का एक सक्रिय और आदर्श औद्योगिक केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयों की … Read more

मैनचेस्टर टेस्ट में दूसरे दिन का खेल खत्म, इंग्लैंड का स्कोर 225/2, क्राउली-डकेट शतक से चूके

मैनचेस्टर भारत और इंग्लैंड के बीच एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी 2025 का चौथा मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जा रहा है. इस मुकाबले में दूसरा दिन (24 जुलाई) का खेल समाप्त हो चुका है. इंग्लैंड का स्कोर स्टम्प तक दो विकेट के नुकसान पर 225 रन है. ओली पोप 20 और जो रूट 11 रन पर नाबाद हैं. इंग्लैंड की टीम पहली पारी के आधार पर 133 रन पीछे है और उसके 8 विकेट शेष हैं. मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 358 रन बनाए. भारत के लिए पहली पारी में ऋषभ पंत अर्धशतक (54 रन) जड़ने में सफल रहे. इंग्लैंड के लिए कप्तान बेन स्टोक्स ने पांच विकेट झटके. 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में फिलहाल इंग्लिश टीम 2-1 से आगे है. ऐसे में शुभमन गिल की अगुवाई वाली टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला 'करो या मरो' जैसा है. अगर भारतीय टीम यह टेस्ट हारती है तो इंग्लैंड सीरीज अपने नाम कर लेगा. भारत की तरह मेजबान इंग्लैंड की भी पहली पारी में शुरुआत शानदार रही. बेन डकेट और जैक क्राउली ने जबरदस्त बैटिंग करते हुए पहले विकेट के लिए 166 रनों की पार्टनरशिप की. डकेट ने इस दौरान 7 चौके की मदद से 46 गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी कर ली. वहीं क्राउली ने 73 गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी की, जिसमें 9 चौके शामिल रहे. इस शतकीय पार्टनरशिप को रवींद्र जडेजा ने तोड़ा. जडेजा ने जैक क्राउली को चलता किया, जिन्होंने 84 रन बनाए. फिर अंशुल कम्बोज ने डकेट को 94 रनों के निजी स्कोर पर आउट करके अपने टेस्ट करियर का पहला विकेट लिया. यहां से जो रूट और ओली पोप ने दूसरे दिन के खेल में भारत को कोई और नुकसान नहीं होने दिया. जख्मी ऋषभ पंत की एंट्री पर मैदान में जमकर बजीं तालियां भारत-इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का चौथा मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जा रहा है. इस मुकाबले के दूसरे दिन विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत चोट के बावजूद भारत की पहली पारी में दोबारा बैटिंग के लिए उतरे. ऋषभ को टेस्ट मैच के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लग गई थी. तब उन्हें मैदान छोड़कर जाना पड़ा था. अब ऋषभ इंजरी के बावजूद जैसा हौसला दिखाया है, वो काबिले तारीफ है. ऋषभ पंत जब दोबारा बैटिंग करने उतरे तो उन्होंने मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान को चूमा. वो थोड़ा इमोशनल भी नजर आए. दूसरी ओर मैदान पर मौजूद दोनों टीमों के ही सपोर्ट्स ने तालियां बजाकर इस स्टार बल्लेबाज का स्वागत किया. ऋषभ पंत की ग्रैंड एंट्री से दर्शक खुशी से झूम उठे. ऋषभ पंत को लेकर भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने अपडेट दिया था कि वो अब इस मुकाबले में विकेटकीपिंग करते नजर नहीं आएंगे. वो जरूरत पड़ने पर ही बैटिंग करने उतरेंगे. अब पंत ने पहली पारी में शार्दुल ठाकुर का विकेट गिरने के बाद मैदान पर उतरने का फैसला किया. बीसीसीआई ने क्या कहा? बीसीसीआई की ओर से कहा गया, 'मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लगने के बाद ऋषभ पंत इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. ध्रुव जुरेल विकेटकीपर की जिम्मेदारी निभाने जा रहे हैं. चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम से जुड़ गए हैं और टीम की जरूरतों के मुताबिक बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे.' ऋषभ पंत को मैनचेस्टर टेस्ट मैच के पहले दिन क्रिस वोक्स की गेंद पर चोट लग गई थी. तब पंत 37 रन पर बैटिंग कर रहे थे और वो गेंद पर रिवर्स स्वीप मारने की कोशिश कर रहे थे. चोट इतनी गंभीर थी कि पंत को मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा. पंत अब 6 हफ्ते के लिए क्रिकेटिंग एक्शन से दूर रह सकते हैं.

सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा: छत गिरने से 4 बच्चों की मौत, प्रशासन पर सवाल

 झालावाड़  राजस्थान के झालावाड़ में स्कूली बच्चों के साथ बड़ा हादसा हुआ है. इलाके में एक स्कूल की छत गिरने की खबर हैं, जिसमें 4 छात्रों की मौत हो गई और कई बच्चों के दबे होने की आशंका है. हादसे के बाद 17 बच्चों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. कई बच्चे गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पीपलोदी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत अचानक गिर गई. क्लास में मौजूद छात्र इसके नीचे दब गए. जानकारी के मुताबिक, क्लास के अंदर करीब 60 बच्चे मौजूद थे, जिसमें से पच्चीस के दबे होने की आशंका है. स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे के बाद इलाके के लोग मदद के लिए पहुंचे. मौके पर लोगों का मजमा इकट्ठा हो गया. मलबे में दबे बच्चों को लोग निकालने की कोशिश करने लगे. छत गिरने के बाद मलबे को देखकर ऐसा लग रहा है, जैसे स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया हो. एजेंसी के मुताबिक, झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि चार बच्चों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए. दस बच्चों को झालावाड़ रेफर किया गया है, जिनमें से तीन से चार की हालत गंभीर है. पुलिस ने बताया कि शिक्षकों और ग्रामीणों की मदद से बच्चों को मलबे से बाहर निकाला गया. राजस्थान सरकार में शिक्षा मंत्री मदन दिवालर ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "झालावाड़ में स्कूल में दुखद घटना की सूचना मिली है. दुख है, बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. बच्चों का इलाज सरकारी खर्चे पर होगा. उच्च स्तरीय जांच होगी कि आखिर कैसे छत गिरी. शिक्षा मंत्री ने कहा, "कांग्रेस सरकार का किया हुआ पाप है. पिछले 5 सालों में कांग्रेस सरकार ने स्कूलों की देख-भाल नहीं की. कांग्रेस सरकार के दौरान स्कूल जर्जर हो गए थे, इनकी मरम्मत नहीं की. हम स्कूलों की चरणबद्ध तरीके से मरम्मत करवा रहे हैं और स्कूलों को पूरी तरह ठीक करेंगे." उन्होंने आगे कहा कि कोटा में भी कई स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालत पूरी तरह जर्जर है. हालत इतनी बुरी है कि छत का प्लास्टर टूट-टूट कर गिर रहा है और नीचे बच्चे पढ़ रहे हैं.  शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अब अस्वस्थ किया है कि राजस्थान के सभी स्कूलों का निर्माण करवाया जाएगा और पूरी तरह से ठीक करवाए जाएंगे. सीएम ने जताया दुख… राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "झालावाड़ के पीपलोदी में विद्यालय की छत गिरने से हुआ दर्दनाक हादसा अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है. घायल बच्चों के समुचित उपचार सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. ईश्वर दिवंगत दिव्य आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति दें."

गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री

भारतीय नायकों के गौरवशाली इतिहास से युवाओं को परिचित कराने का नाटक सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को इतिहास से जोड़ेगा नाटक: डॉ. यादव ने बताया सांस्कृतिक माध्यम का महत्व गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री नाटक बनेगा प्रेरणा का मंच, युवाओं में भरेगा राष्ट्रभक्ति : डॉ. यादव का संदेश 6 दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वास्तव में नाटक कला अनूठी है। नाटकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग की संस्था मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से रवीन्द्र भवन में आयोजित छह दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य सुवाणी त्रिपाठी और अन्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि वे हरिहर की नगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की चौदह विद्याओं और चौसठ कलाओं में नाट्य शास्त्र के सभी आयाम शामिल हैं। उज्जैन ऐसी नगरी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा हुई साथ ही महाकाल की नगरी होने का आशीर्वाद भी इसे मिला है। उज्जैन में श्रावण माह, कार्तिक माह और अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजन अनूठे होते हैं। हमारे इतिहास में जहां राष्ट्र के दुर्बल होने के निराशाजनक उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहीं हमारे समर्थ होने के भी प्रमाण मिलते हैं। विदेशी आक्रांताओं ने आराध्य स्थलों को नष्ट करने और प्रतिमाएं अन्य देशों में ले जाने का कृत्य किया, लेकिन यह भी सत्य है कि हमारे पराक्रमी और राष्ट्रप्रेमी शासकों ने उन प्रतीकों को पुन: स्वदेश लाने का कार्य भी किया। नाटक कला अनूठी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन स्तर से नाटकों के मंचन से जुड़े रहे हैं। उन्हें अनेक वर्ष पूर्व महानाट्य जाणताराजा देखने का सौभाग्य मिला, जो शिवाजी महाराज के साहसिक जीवन पर केन्द्रित था। बाद में इस तर्ज पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन को मंच पर लाने में सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विविध  पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज की तरह सम्राट विक्रमादित्य सुशासन और शौर्य के प्रतीक थे। उनके राज्य का काफी विस्तार हुआ। उन्होंने अपने भूभाग के समस्त नागरिकों का ऋण समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया और विक्रम संवत् के प्रर्वतन की दिशा में आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को छह दिवसीय नाट्य समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'लोक में मणिधर-बघेश्वर' और नाट्य समारोह की स्मारिका का विमोचन किया। प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रस्तुत होने वाले नाटकों और भरतमुनि राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे।