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योगी सरकार के प्रयासों का असर! यूपी में बच्चों का नाटापन 8.2% घटा, बढ़ रही कद-काठी

राष्ट्रीय पोषण माह पर विशेष योगी सरकार के प्रयासों से यूपी के नौनिहालों की बढ़ रही कद-काठी प्रदेश के पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 8.2 प्रतिशत घटा   एनएफएचएस- 5 में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, जो घटकर 31.5 प्रतिशत हो गया लखनऊ  योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के नौनिहालों की सेहत और पोषण की तस्वीर में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन यानी उम्र के अनुपात में कम लंबाई की समस्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) में जहां प्रदेश में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, वहीं एनएफएचस-6 में यह घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है। यानी करीब चार वर्षों में नाटेपन के मामलों में 8.2 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता : डॉ. पिंकी जोवल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में नाटेपन में कमी का उल्लेखनीय है क्योंकि बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता। यह लंबे समय तक बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार की देखभाल का परिणाम होता है। एनएफएचएस-5 से एनएफएचएस-6 के बीच नाटेपन के आंकड़ों में आई गिरावट इसलिए प्रदेश के बच्चों के स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर का महत्वपूर्ण संकेत है। अब चुनौती इस सुधार को और गति देने तथा यह सुनिश्चित करने की है कि हर बच्चे को जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण और स्वस्थ विकास का अवसर मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अभियान चलाकर गर्भवती महिलाओं को जागरुक करने के साथ उन्हे पोषण पोटली वितरित की जा रही है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में 31.5 प्रतिशत का आंकड़ा यह भी बताता है कि अभी बड़ी संख्या में बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं इसलिए शुरुआती वर्षों में पोषण की निगरानी, गर्भवती महिलाओं के पोषण, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार, संक्रमण की रोकथाम तथा बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी पर लगातार जोर देने की जरूरत है और इस पर फोकस काम किया जा रहा है।  बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन शारीरिक – मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की उम्र तक पर्याप्त पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण, स्तनपान और उचित पूरक आहार पर ध्यान देने से कुपोषण की स्थिति को कम किया जा सकता है। इसी दिशा में आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के स्तर पर चलाए जा रहे पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सीएम योगी के निर्देश पर सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यूपी में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे नियमित लाभान्वित हो रहे हैं। शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका प्रोफेसर ने बताया कि नाटेपन को बच्चों में लंबे समय तक रहने वाले कुपोषण का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। यह केवल बच्चे की लंबाई तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण, जन्म के समय बच्चे की स्थिति, स्तनपान, छह माह बाद पूरक आहार, बार-बार होने वाले संक्रमण और शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका होती है। ऐसे में आंकड़ों में आई गिरावट को बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जा सकता है। एनएफएचएस-5 में उत्तर प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 39.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसी सर्वे में 17.3 प्रतिशत बच्चे दुबलापन (वेस्टिंग) और 32.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन की श्रेणी में थे। एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के पोषण से जुड़े संकेतकों में देशभर में भी सुधार हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश में नाटापन 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत हुआ है।   प्रोफेसर शालिनी त्रिपाठी, केजीएमयू

मध्यप्रदेश में मानसून का आखिरी दौर, 21 सितंबर से झमाझम बारिश के आसार; 3 जिलों में अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम दौर में है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में इसकी विदाई का सिलसिला शुरू होने का अनुमान है। हालांकि, इससे पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, 21 सितंबर तक कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। मौसम के आगामी सात दिनों के पूर्वानुमान के अनुसार 18 से 21 सितंबर तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। 22 सितंबर से बारिश में कुछ कमी आ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून की वापसी सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान से शुरू होने के संकेत हैं, जबकि मध्य प्रदेश में इसकी सक्रियता सितंबर के आखिरी सप्ताह तक बनी रह सकती है। कम बारिश वाले जिलों को मिल सकती है राहत मानसून के बचे हुए दिनों में होने वाली बारिश से प्रदेश के उन जिलों में स्थिति सुधर सकती है, जहां इस सीजन अब तक सामान्य से कम पानी गिरा है। फिलहाल प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। वहीं, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की तुलना में करीब आधा पानी ही दर्ज हुआ है। दूसरी ओर निवाड़ी में सामान्य से 54% ज्यादा बारिश हो चुकी है। भोपाल-सीहोर और देवास में झमाझम बारिश गुरुवार दोपहर भोपाल, सीहोर और देवास में बारिश का तेज दौर देखने को मिला। भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में कुछ समय के लिए इतनी तेज बारिश और अंधेरा छाया कि वाहन चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ी। ग्वालियर में भी दिनभर की उमस के बाद शाम को मौसम बदला। शहर में झमाझम बारिश होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, फिलहाल सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है। इसके अलावा मानसून ट्रफ भी इसी कम दबाव वाले क्षेत्र से होकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इन मौसम प्रणालियों के कारण मध्य भारत में नमी और बारिश की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। 19 सितंबर के बाद बन सकता है नया सिस्टम मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, 18 से 19 सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश में अलग-अलग चरणों में बारिश हो सकती है। इसके बाद 19 सितंबर की शाम के आसपास एक नई मौसम प्रणाली बनने के संकेत हैं। उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह सिस्टम आगे दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकता है। इसके असर से मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य विदाई आमतौर पर 2 अक्टूबर के आसपास होती है। हालांकि, इस साल मानसून के जाने से पहले सितंबर के आखिरी हफ्ते में राज्य में बारिश का एक और दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार, 18 सितंबर की शाम तक बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम तक एक कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। यदि यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए मजबूत होता है, तो 21 सितंबर से राज्य में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश का 88.7 प्रतिशत है। राज्य में आमतौर पर मानसून के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश होती है। वर्तमान में राज्य में सामान्य से लगभग 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है, लेकिन नए सिस्टम के सक्रिय होने से इस कमी में सुधार हो सकता है। MP में अब तक 33.1 इंच बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 842.1 मिलीमीटर यानी करीब 33.1 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह मानसूनी कोटे का 88.9% है। इस अवधि में सामान्य बारिश 905.3 मिलीमीटर यानी करीब 35.6 इंच होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में अभी करीब 2.5 इंच बारिश कम है। ओवरऑल प्रदेश में बारिश सामान्य से 7% कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में यह कमी करीब 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% दर्ज की गई है।

नए दौर की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो रहा छत्तीसगढ़, भविष्य के उद्योगों पर हमारा फोकस : मुख्यमंत्री

भविष्य के उद्योगों का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नए दौर की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो रहा छत्तीसगढ़, भविष्य के उद्योगों पर हमारा फोकस : मुख्यमंत्री सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक, भविष्य के उद्योगों का नया गंतव्य बन रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ निवेश और उद्योगों की नई संभावनाओं का केंद्र : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय ने रायपुर में किया ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी तीन दिवसीय औद्योगिक मेले में ले रहे हिस्सा नई औद्योगिक विकास नीति से छत्तीसगढ़ में निवेश को मिली नई गति, प्रस्तावों के साथ धरातल पर भी उतर रही परियोजनाएं : मुख्यमंत्री साय आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी सहित नए एवं उभरते सेक्टरों पर राज्य सरकार का विशेष फोकस निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ उद्योगों के लिए ‘एक्सीलरेटर’ की भूमिका निभा रही राज्य सरकार स्थानीय संसाधनों के वैल्यू एडिशन और युवाओं के रोजगार को औद्योगिक विकास का आधार बना रही सरकार मुख्यमंत्री ने औद्योगिक स्टॉलों का किया अवलोकन, देशभर से आए उद्यमियों से किया आत्मीय संवाद रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए उद्यमियों, निवेशकों और औद्योगिक प्रतिनिधियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपनी पारंपरिक औद्योगिक ताकत के साथ नई अर्थव्यवस्था और उभरते उद्योगों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खनिज, ऊर्जा, वन संपदा, पर्याप्त मानव संसाधन और देश के मध्य में अनुकूल भौगोलिक स्थिति हमारी स्वाभाविक ताकत है। राज्य सरकार इन खूबियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और निवेशक हितैषी नीतियों से जोड़कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की भूमिका केवल उद्योगों के लिए नियामक की नहीं है। हम सरकार को उद्योग और निवेश की राह आसान करने वाले सहयोगी और ‘एक्सीलरेटर’ के रूप में विकसित कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि निवेश का प्रस्ताव आने से लेकर उद्योग के धरातल पर स्थापित होने तक हर चरण में निवेशकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था मिले। मुख्यमंत्री ने लघु उद्योग भारती द्वारा राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक आयोजन के लिए रायपुर का चयन किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर उद्यमिता बढ़ती है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु उद्योग भारती देशभर के 750 से अधिक जिलों में उद्यमियों को संगठित कर उद्योग और उद्यमिता को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ के 25 जिलों में भी 1200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्योग संगठन से जुड़े हैं। 18 से 20 सितम्बर तक आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों की भागीदारी इस आयोजन के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह औद्योगिक मेला केवल उत्पादों और तकनीकों की प्रदर्शनी नहीं है। यह उद्यमियों के बीच संवाद, अनुभव, नवाचार और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से नए व्यावसायिक संबंध बनेंगे, नई संभावनाओं पर चर्चा होगी और युवाओं को उद्योग तथा उद्यमिता की दुनिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। नई औद्योगिक नीति से निवेश को मिली नई गति मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की है। इस नीति का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें निवेश, उत्पादन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था एक साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति में प्रक्रियाओं के सरलीकरण, निवेशकों को प्रोत्साहन, नए एवं उभरते सेक्टरों को बढ़ावा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। नीति लागू होने के बाद प्रदेश को बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और प्रसन्नता की बात है कि अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी प्रारंभ हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब केवल कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार प्रदेश के औद्योगिक आधार को विविधता देने के लिए आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल, ग्रीन एनर्जी सहित विभिन्न नए और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में लगभग 1100 करोड़ रुपए की सेमीकंडक्टर परियोजना पर कार्य प्रारंभ होना इस बदलते औद्योगिक परिदृश्य का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यहां आधुनिक अधोसंरचना के साथ नए उद्योगों और तकनीक आधारित कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। राज्य में टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है। निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं सरल, सरकार बनेगी सहभागी मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राज्य में उद्योग तभी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं, जब निवेशकों को नीतिगत स्थिरता के साथ सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएं मिलें। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योग स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में काम किया है, ताकि निवेशकों को विभिन्न कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि उद्योगों को समय पर आवश्यक भूमि, अधोसंरचना और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि उद्यमी अपना समय और ऊर्जा प्रक्रियागत जटिलताओं में लगाने के बजाय उत्पादन, नवाचार, विस्तार और रोजगार सृजन में लगाएं। खनिज, ऊर्जा और वन संपदा छत्तीसगढ़ की बड़ी ताकत मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से देश … Read more

ममता बनर्जी की पार्टी को मिला नया नाम-चिह्न, ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ सिंबल; ऋतब्रत गुट को ‘लिफाफा’

कोलकाता/नई दिल्ली   चुनाव आयोग ने टीएमसी में टूट के बाद ममता बनर्जी गुट को नए नाम की मंजूरी दे दी है। ममता बनर्जी गुट ने तीन नामों का विकल्प पेश किया था, इस आधार पर आयोग ने ' ऑल इंडिया तृणमूल ममता कांग्रेस ( AITMC ) का नाम दिया है। उनका चुनाव चिन्ह फुटबॉल खिलाड़ी होगा। जबकि बागी रितब्रत गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम के साथ लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। रितब्रत गुट ने आयोग को दो नाम सुझाए थे। गुरुवार को विवाद पर सुनवाई के बाद निर्वाचन आयोग ने टीएमसी का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया था। गुरुवार को फ्रीज हुआ था दो फूल वाला सिंबल गुरुवार को चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों के दावों पर विचार किया था। करीब एक सप्ताह पहले भी आयोग ने ममता बनर्जी गुट और रितब्रत बनर्जी से दावों के समर्थन में दस्तावेज देने को कहा था। रितब्रत बनर्जी ने दावा किया था कि टीएमसी के संविधान के मुताबिक, ममता बनर्जी का अध्यक्ष पद का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका था। अब नई कार्यकारिणी ने अरुप रॉय को अध्यक्ष चुना है। ममता बनर्जी ने गुट ने कहा कि पार्टी के संविधान के मुताबिक ममता बनर्जी ही पार्टी की अध्यक्ष हैं। उनके पास ही नई कार्यकारिणी और पदों पर नियुक्ति का अधिकार है। इसके बाद चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव से पहले सिंबल विवाद पर निर्णय सुरक्षित रख गया। गुरुवार को आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और चुनाव चिन्ह पत्तियों के साथ दो फूल को फ्रीज कर दिया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निंदा चुनाव आयोग के फैसले से ममता बनर्जी गुट के सांसद कल्याण बनर्जी ने असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्वीकार नहीं है, मगर परिस्थितियों के आगे कुछ किया नहीं जा सकता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी टीएमसी के सिंबल और नाम फ्रीज किए जाने पर हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी वोट लूट के बाद अब पार्टी लूट रही है। यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर वोटर की लड़ाई है, जो निष्पक्ष चुनाव चाहता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि आयोग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह बीजेपी की कठपुतली है। 11 बजे तक चुनाव आयोग ने मांगे थे नए नाम और चिन्ह तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी घमासान और पार्टी के टूटने के बाद चुनाव आयोग ने यह अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने स्पष्ट किया था कि ममता बनर्जी का गुट यानी 'कालीघाट-तृणमूल' और विरोधी गुट यानी 'ऋतब्रत-तृणमूल', दोनों में से कोई भी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम या पुराना 'जोड़ाफुल' सिंबल इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। आयोग ने दोनों गुटों को आज सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन नए नाम और चुनाव चिन्हों की लिस्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। ममता और ऋतब्रत ने क्या-क्या नाम दिए? चुनाव आयोग की डेडलाइन से पहले दोनों धड़ों ने अपने-अपने नए नाम और प्रतीकों की लिस्ट आयोग को सौंप दी है। ममता बनर्जी ('कालीघाट-तृणमूल') गुट के विकल्प: 3 संभावित नाम: 'ममता सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस', 'सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस ममता', और 'तृणमूल ममता कांग्रेस'। चुनाव चिन्ह के विकल्प: सूत्रों के मुताबिक इस गुट ने फुटबॉल खिलाड़ी और क्रिकेट बैट जैसे प्रतीकों को अपनी पहली पसंद बताया है। ऋतब्रत गुट ('ऋतब्रत-तृणमूल') के विकल्प: 3 चुनाव चिन्ह: इस गुट ने चुनाव आयोग के फ्री-सिंबल लिस्ट में से 'ब्लैक बोर्ड', 'लिफाफा' और 'टॉर्च' की मांग की है। तृणमूल की टूट पर मचा सियासी घमासान तृणमूल का नाम और सिंबल छिन जाने के बाद राज्य और देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, "तृणमूल पहले ही टूट चुकी थी, अब उसका नाम और सिंबल भी चला गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से पीएम मोदी को जन्मदिन का ये लेट-नाइट गिफ्ट है।" वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने चुनाव आयोग के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में जारी फूट और कानूनी स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग का यह फैसला पूरी तरह से तर्कसंगत और निष्पक्ष है। बहरहाल, 28 साल बाद अपने ही बनाए नाम और चुनाव चिन्ह से महरूम हुईं ममता बनर्जी के लिए यह उप-चुनाव एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनने जा रहा है।  

प्रदेश के 3.80 लाख युवाओं ने कराया ऑनलाइन पंजीयन, 6 लाख का लक्ष्य; मंत्री सारंग ने बताया सरकार का विजन

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग-2027 प्रदेश के 3.80 लाख युवाओं ने किया ऑनलाइन पंजीयन; 6 लाख पंजीयन का लक्ष्य पीएम मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं मिल रहें नए अवसर : मंत्री सारंग भोपाल खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग-2027 (15 से 29 वर्ष) युवाओं को नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की एक संरचित, योग्यता-आधारित यात्रा में भाग लेने का एक राष्ट्रव्यापी अवसर है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उन युवाओं की पहचान करना, उन्हें प्रोत्साहित करना और राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है, जो 2047 तक विकसित भारत में योगदान देना चाहते हैं। मंत्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के 3.80 लाख युवाओं ने माय भारत पोर्टल में ऑनलाइन पंजीयन किया है और सरकार ने 6 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। मंत्री सारंग ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश के लिए ट्राइबल लीडरशिप, नेचुरल रिसोर्सेस और इन्क्लूसिव डेवलपमेंट थीम निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं को नए अवसर मिल रहे हैं। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रदेश के युवा बड़ी संख्या में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। अंतिम चरण में चयनित युवा 10-12 जनवरी 2027 को प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। प्रतियोगिता की महत्वपूर्ण तिथियां मंत्री सारंग ने बताया कि 17 अगस्त-30 सितंबर तक विकसित भारत क्विज, 5-19 अक्टूबर तक विकसित भारत निबंध प्रतियोगिता, 10-16 नवंबर जिला चैंपियनशिप, 17 नवंबर–7 दिसंबर राज्य स्तरीय और 10-12 जनवरी, 2027 राष्ट्रीय स्तर, नई दिल्ली इन दिनांकों में निर्धारित कार्यक्रम चरणबद्ध तरीकों से किए जाएंगे। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच मंत्री सारंग ने बताया कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का एक सशक्त मंच है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बढ़ चढ़ कर मध्यप्रदेश के युवा प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। यह कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं को आपस में संवाद करने, विभिन्न संस्कृतियों को समझने तथा भारत की विविधता का सम्मान एवं उत्सव मनाने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की नेतृत्व क्षमता एवं विविध प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना, जिसमें लोकगीत, लोकनृत्य, चित्रकला, भाषण, कविता लेखन आदि क्षेत्र शामिल हैं। क्विज़ से लेकर चैंपियन तक विकसित भारत चैलेंज 5 चरणों वाले मार्ग का अनुसरण करेगा। पहले चरण में (विकसित भारत प्रश्नोत्तरी): डिजिटल क्विज प्रतियोगिता MY Bharat पोर्टल आयोजित की जा रही है। दूसरे चरण में (निबंध लेखन और मूल्यांकन) डिजिटल क्विज प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी शामिल होंगे। फिर भारत सरकार द्वारा प्राप्त विषयों का निबंध का मूल्यांकन राज्य स्तर पर किया जाएगा। तीसरे चरण में (जिला स्तर पर पीपीटी प्रतियोगिता और मूल्यांकन) निबंध प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी जिला स्तर पर निर्धारित विषयों में पीपीटी प्रस्तुतीकरण देंगे। फिर जिला स्तर पर मूल्यांकन एवं चयन होगा। चौथे चरण में (राज्य स्तर पर पीपीटी प्रतियोगिता और मूल्यांकन) जिला स्तर पर चयनित प्रतिभागी राज्य स्तर पर निर्धारित विषयों में पीपीटी प्रस्तुतीकरण देंगे। फिर राज्य स्तर पर मूल्यांकन एवं चयन होगा। और अंतिव व पांचवें चरण में (राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता) भारत मंडपम, नई दिल्ली: राज्य स्तर पर चयनित युवा माननीय प्रधानमंत्री के समक्ष राष्ट्रीय युवा महोत्सव में सहभागिता करेंगे। युवा प्रतिभा, नेतृत्व और नवाचार को प्रदर्शित करने वाली 6 श्रेणियां VBYLD-2027 (विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग) 6 प्रमुख श्रेणियों के माध्यम से युवाओं के लिए कई अवसर उपलब्ध कराएगा। विकसित भारत चैलेंज (यह प्रमुख मंच है जो युवाओं को प्रश्नोत्तरी, निबंध प्रतियोगिता और प्रस्तुति-आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से 2047 तक विकसित भारत के लिए अभिनव विचारों और समाधानों को व्यक्त करने में सक्षम बनाता है), सांस्कृतिक प्रतियोगिता (लोकनृत्य, लोकगीत, चित्रकला, भाषण कला और कविता लेखन प्रतियोगिताएं, जो युवाओं को भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेंगी), भारत के लिए डिजाइन (वास्तविक दुनिया की विकासात्मक चुनौतियों के लिए समाधान विकसित करने पर केंद्रित एक राष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता), हैकिंग फॉर सोशल कॉज (एक टेक्नोलॉजी-आधारित नवाचार चुनौती जो सामाजिक और विकासात्मक चुनौतियों के लिए स्केलेबल डिजिटल समाधान आमंत्रित करती है), युवा उद्यमी चुनौती (VBYLD 2027 के लिए एक नया ट्रैक, जो युवा उद्यमियों को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप स्टार्टअप पिच और व्यावसायिक योजनाएं प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करता है) और युवा संसद (इसे VBYLD 2027 में एकीकृत किया गया है, जिसके राष्ट्रीय फाइनलिस्ट राष्ट्रीय VBYLD में भाग लेंगे) शामिल हैं।  

राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह के बलिदान को CM यादव ने किया नमन, अर्पित की श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमर शहीद राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह को अर्पित की श्रद्धांजलि  भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोंडवाना साम्राज्य के अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के 169वें बलिदान दिवस पर माल गोदाम चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिमा स्‍थल के समीप बने देव स्‍थल पर पूजन-अर्चन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बलिदान स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए नगर निगम जबलपुर को बधाई देते हुये कहा कि सरकार जनजातीय अंचलों के महानायकों और महापुरुषों की स्मृतियों को संरक्षित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। रानी दुर्गावती सहित अनेक जनजातीय नायकों के योगदान को स्मरण करते हुए उनकी गौरवशाली विरासत को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गढ़ा मंडला और किला सहित ऐतिहासिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया जा रहा है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जनजातीय कार्य तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री विजय शाह और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव संग्रहालय पहुंचकर अमर शहीदों को किया नमन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी दुर्गावती चिकित्सालय के सामने स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह संग्रहालय में बंदीग्रह में पहुंचकर उनकी गौरव गाथा को याद करते हुए राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमाओं पर पुष्‍पांजली अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन किया। उन्होंने संग्रहालय परिसर में स्थित सरग नसैनी पर भी पूजन-अर्चन किया।

‘धर्म जीवन में सुख देने के साथ मोक्ष की ओर ले जाता है’, उज्जैन में मोहन भागवत का संबोधन

उज्जैन  रिलिजन धर्म नहीं, धर्म जीवन का अनुशासन है। किसी इच्छा की पूर्ति, भय, लोभ या प्राण बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन धर्म नित्य रहता है। यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कही। वे उज्जैन में ‘युवा धर्म संसद’ को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में जिस भौतिक सुख और अर्थ-काम की अपेक्षा मनुष्य करता है, वह धर्म के पालन से प्राप्त होती है। धर्म का सेवन जीवन के सुख देने के साथ व्यक्ति को मोक्ष की ओर भी अग्रसर करता है।उन्होंने महाभारत की फलश्रुति का उल्लेख करते हुए कहा कि सुबह भारत सावित्री का स्मरण करने और उसके भाव को दिनभर जीवन में रखने से महाभारत सुनने का फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि आज धर्म को लेकर भ्रम का एक कारण अपनी भाषा और धर्म के वास्तविक अर्थ को भूल जाना है। पश्चिमी लोगों ने भारत में धर्म के आचरण और उससे जुड़े कर्मकांड व अनुशासन को देखा और उसे अपने यहां के ‘रिलिजन’ के समान समझ लिया। बाद में हम भी धर्म को रिलिजन कहने लगे। वक्ता ने कुश्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कुश्ती सीखने के लिए अखाड़े में जोर-बैठक लगाना जरूरी है, वैसे ही धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं। कर्मकांड धर्म का एक अंग है, पूरा धर्म नहीं। उन्होंने कहा- ‘रिलिजन धर्म नहीं है।’ 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित सेवाज्ञ संस्थानम् के इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल होने पहुंचे हैं। दूसरे दिन करीब 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उद्घाटन सत्र में, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 सितंबर को समापन सत्र में शामिल होंगे। सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में यह आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और काञ्चीपुरम् के बाद यह युवा धर्म संसद का छठा संस्करण है। अगले साल इसका आयोजन द्वारका में किया जाएगा। देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र भी होगा दूसरे दिन सुबह युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन होगा। कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत, आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज, संरक्षक-सेवाज्ञ संस्थानम्, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलगुरु-केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और आशीष कुमार आशु, अध्यक्ष-सेवाज्ञ संस्थानम् शामिल होंगे। इस दौरान धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा पर व्याख्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना-विचार संघर्ष पर संवाद तथा देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र होगा। व्याख्यान सत्र में प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर भी शामिल होंगे उद्घाटन सत्र के बाद दोपहर 12 से 2 बजे तक व्याख्यान सत्र आयोजित होगा। इसमें अवधेशानंद गिरि जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा; मनोज मुंतशिर, प्रसिद्ध पटकथा लेखक एवं गीतकार; प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय; स्मृति अनंतलक्ष्मी जी, सह-संस्थापिका एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शिका, अनादि फाउंडेशन और जे. नंद कुमार जी, राष्ट्रीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे। 25 राज्यों से 1,700 युवा कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे सह-मीडिया प्रमुख बादल सिंह ने बताया कि युवा धर्म संसद का छठा संस्करण इस बार उज्जैन में आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से करीब 1,700 छात्र-छात्राओं के साथ लगभग 300 विद्वान, शिक्षक और प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन को ध्यान में रखते हुए युवा धर्म संसद का आयोजन किया गया है। इससे पहले काशी, अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा और कांचीपुरम में इसका आयोजन हो चुका है। इन आयोजनों में करीब 7,100 प्रतिभागी शामिल हो चुके हैं। इस बार रजिस्ट्रेशन जुलाई में शुरू हुए थे और 31 अगस्त को बंद कर दिए गए।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों का कुनबा बढ़ा, KGP12 ने 4 शावकों को दिया जन्म

श्योपुर प्रोजेक्ट चीता के 4 साल पूरे होने के एक दिन बाद 18 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में जन्मी मादा चीता KGP12 ने 4 शावकों को जन्म दिया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। भारत की धरती पर जन्मी मादा चीता KGP12 ने खुले जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है। इस नए जन्म के साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चीते अब भारतीय जलवायु और जंगलों में पूरी तरह से रच-बस गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने साझा की खुशखबरी शावकों के जन्म की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए लिखा, "4 साल, 4 नई जिंदगियां – प्रोजेक्ट चीता के लिए यह उम्मीद और सफलता का प्रतीक है।" भारत में दूसरी पीढ़ी की शुरुआत मादा चीता KGP12 का खुले जंगल में मां बनना इस प्रोजेक्ट की एक बहुत बड़ी कामयाबी है। KGP12 दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता 'गामिनी' की बेटी है। गामिनी भारत में शावकों को जन्म देने वाली पहली चीता थी। अब उसकी बेटी द्वारा शावकों को जन्म देना यह साबित करता है कि यह प्रोजेक्ट अब विदेशों से चीते 'लाने' के शुरुआती चरण से आगे बढ़कर भारत में उनके 'बसने और बढ़ने' के प्राकृतिक दौर में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है। कूनो में चीतों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद KGP12 का भारत में जन्म लेना और अब उसके शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए खास महत्व रखता है। इससे भारत में जन्मे चीतों के प्राकृतिक प्रजनन की प्रक्रिया बढ़ने का संकेत मिला है। कूनो में चीतों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए अनुकूल माहौल बनाने के प्रयासों के बीच चार नए शावकों का जन्म वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी अच्छी खबर है। पर्यावरण मंत्री ने इस मौके पर कूनो और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पूरे परिवार को बधाई दी। चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीता संरक्षण अभियान की उपलब्धियों में एक और खास अध्याय जुड़ गया है। सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने इसकी जानकारी दी है। कूनो में चीता प्रोजेक्ट के 4 साल चार साल पहले 17 सितंबर 2022 को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की वापसी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। अब इस परियोजना के चार साल पूरे होने पर 17 सितंबर को कूनो के टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए । यह आयोजन सेवा संकल्प अभियान के तहत हुआ । चीतों की वापसी के चार साल बाद कूनो में उनकी संख्या बढ़ी है और यहां भारत में भी शावकों का जन्म हुआ है। परियोजना ने श्योपुर को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है। 4 साल में क्या बदला? चीता परियोजना के चार वर्ष पूरे होने पर देश में 52 चीते हैं। इनमें 49 कूनो नेशनल पार्क और 3 मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में हैं। कुल 52 चीतों में से 32 का जन्म भारत में हुआ है। कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हुआ है। भारत में जन्मे शावकों ने परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 17 सितंबर को कूनो में क्या होगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और चीता परियोजना के चार साल पूरे होने के मौके पर टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए । दीपों के जरिए चीता संरक्षण और भारत में चीतों की वापसी के प्रति आभार व्यक्त किया ।    

चंडीगढ़ में आज शुरू होगी ‘भारत टैक्सी’ सेवा, ड्राइवरों से नहीं लिया जाएगा कमीशन; जानें फायदे

 चंडीगढ़  Bharat Taxi News: चंडीगढ़ में आज से भारत टैक्सी सेवा की शुरुआत हो रही है। आज सेक्टर 9 में मौजूद नई यूटी सचिवालय इमारत में आयोजित कार्यक्रम में इसका शुभारंभ होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल तथा केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। डिजिटल शुभारंभ के बाद भारत टैक्सी (Bharat Taxi App Launched) वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। भारत टैक्सी से लोगों को क्या फायदा होगा, ड्राइवरों को यह कैसे फायदा पहुंचाएगी, ओला-उबर जैसी टैक्सी सेवाओं से यह सर्विस कैसे अलग है, क्या यह सरकार द्वारा जारी एक नई पहल है? आइए, इन सभी सवालों के जवाब यहां जानते हैं। लेकिन इससे पहले जानना जरूरी है कि हाल ही में चंडीगढ़ में कई नामी टैक्सी सेवाओं के लाइसेंस छह महीने के लिए रद किए गए हैं। इसके कुछ दिनों बाद ही प्रशासन केंद्रशासित प्रदेश में भारत टैक्सी की शुरुआत कर रहा है। ओला-उबर जैसी सेवाओं पर लगी रोक पिछले सप्ताह चंडीगढ़ प्रशासन ने एक अहम फैसला लिया। इसके अनुसार, केंद्रशासित प्रदेश में एप आधारित कैब-बाइक टैक्सी सेवाओं वाली कंपनियों पर छह महीने की रोक लगा दी गई। ओला, इन-ड्राइव, उबर, रैपिडो का एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड किया गया है। क्यों लिया यह फैसला? कैब और टैक्सी ड्राइवरों के करीब 100 दिन से चल रहे धरने और 15 दिन की भूख हड़ताल के बीच स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने यह फैसला लिया है। अब जानिए क्या है भारत टैक्सी सेवा भारत टैक्सी सेवा सरकार की एक नई पहल है, जिसकी शुरुआत 2 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली से हुई थी । इसका उद्देश्य कॉ-ओपरेटिव टैक्सी प्लेटफॉर्म पर प्राइवेट कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाना है। सरकार इस एप के जरिए यात्रियों और ड्राइवर दोनों के हितों का ध्यान रख रही है। सरकार के इस एप के जरिए टैक्सी चालकों को केवल सेवा प्रदाता के रूप में नहीं, बल्कि सहकारी व्यवस्था के हिस्सेदार के रूप में जोड़ा जाएगा। ड्राइवरों को क्या होगा फायदा? भारत टैक्सी सेवा का उद्देश्य तकनीक आधारित परिवहन सेवा में सहकारिता की भावना को लागू करना और ड्राइवरों की भागीदारी बढ़ाना है। प्रशासन के अनुसार, इस पहल से सहकारी मॉडल का विस्तार परिवहन क्षेत्र में होगा, जिससे चालकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें उनकी भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सकेगी। यानी ड्राइवर खुद इस प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार होंगे। खास बात है कि इसमें ड्राइवरों को कोई कमीशन नहीं देना होगा। इसके साथ ही राइडर को एक्सीडेंट और इंश्योरेंस कवरेज जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। भारत टैक्सी एप से ड्राइवर को फायदे     किराया ड्राइवर के बैक अकाउंट में जाएगा।     एप में कंपनी का कोई वॉलेट नहीं है।     ड्राइवर कर्मचारी नहीं , बल्कि हिस्सेदार होंगे।     एप में कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं है।     किराए में कोई फेरबदल नहीं होता। यात्रियों को क्या होगा फायदा? भारत टैक्सी एप का किराया अन्य टैक्सी सेवाओं की तुलना में 30 फीसदी (Bharat Taxi fare) तक कम है। वहीं, इस एप के जरिए यात्रियों की सुरक्षा, विशेषतौर पर महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस किया गया है। गलत व्यवहार पर यात्री भारत टैक्सी एप के हेल्प-सपोर्ट सेक्शन में जाकर राइड से संबंधित कोई भी शिकायत दर्ज करवा सकता है। खास बात है कि 150 से ज्‍यादा महिला ड्राइवर ‘बाइक दीदी’ योजना के तहत प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं, इससे महिलाएं महिला कैप्टन या ड्राइवर का भी चुनाव कर सकती हैं।     कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं।     महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस।     अन्य टैक्सी सेवाओं से 30 फीसदी तक सस्ता।     राइड बुक करना काफी आसान।     कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं।     वाहन को ट्रैक करना काफी आसान। किन शहरों में जारी है भारत टैक्सी एप की सेवाएं? भारत टैक्सी एप की शुरुआत दिल्ली में  हुई। आज इसे चंडीगढ़ में लॉन्च किया जा रहा है। इसके साथ ही जयपुर और राजकोट जैसे शहरों में भी इसका संचालन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इस सहकारी मॉडल को उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में भी चलाए जाने की प्रक्रिया जारी है। कैसे करें डाउनलोड? भारत टैक्सी एप (Bharat Taxi booking) को गुगल प्ले स्टोर या आईओएस से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। जिसके बाद यूजर अपनी ई-मेल आईडी या फिर मोबाइल नंबर से लॉग-इन कर सकता है। वहीं, राइडर्स भारत टैक्सी ड्राइवर एप डाउनलोड कर अपना आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस व वाहन से जुड़े अन्य डॉक्यूमेंट अपलोड कर वेरिफाई के बाद सर्विस शुरू कर सकते हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन पहुंचे नितिन नबीन, धोती पहन महाकाल के किए दर्शन

 उज्जैन विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक भगवान श्री महाकालेश्वर के आंगन में शुक्रवार तड़के भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर में आयोजित भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नितिन नबीन भाजपा राष्ट्रीय नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व अन्य बाबा महाकाल के दरबार में अल सुबह 04 बजे पहुंचे. जहां उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर 2 घण्टे तक भस्म आरती के दर्शन लाभ लिए. भगवान का आशीर्वाद लिया और पूजन अर्चन आरती की. वे नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नजर आए. बाबा का भी इस दौरान राजा स्वरूप में श्रृंगार हुआ. नितिन नबीन मंदिर के ही पास सम्राट विक्रमादित्य हेरीटेज होटल में ही रात रुके. अब इंदौर एयरपोर्ट और वहां से पंजाब निकलने का कार्यकम है।  भस्म आरती में लीन दिखे भाजपा अध्यक्ष बाबा महाकाल की भस्म आरती के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शिवभक्ति में लीन नजर आए। नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने पूरे समय हाथ जोड़कर भगवान शिव का ध्यान किया और महाकाल के जाप में डूबे रहे। आरती के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ तालियां बजाकर शिवभक्ति की लय में सहभागिता की। उज्जैन आगमन पर भस्म आरती में शामिल होने का यह अनुभव उनके लिए खास रहा। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए। उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी। मंदिर की परंपरा के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के दौरान निर्धारित पारंपरिक परिधान धारण किया जाता है। देश की यश-कीर्ति और प्रधानमंत्री के लिए की प्रार्थना भस्म आरती के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नितिन नबीन ने कहा कि यह बाबा महाकाल की पवित्र नगरी है और यहां पहली बार आने का सौभाग्य पाकर वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल पूरे विश्व का ध्यान रखते हैं।  अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पहुंचे उज्जैन नितिन नबीन ने कहा, ''बाबा महाकाल की भूमि पर आकर जो खुशी हो रही है उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मैंने बाबा महाकाल से देश की सुख समृद्धि की मनोकामना की है.'' उन्होंने बताया कि, ''अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन आया हूं. आज जो कुछ हूं बाबा के आशीर्वाद से हूं. इसलिए तय कर रखा था बाबा का आशीर्वाद लेना है. बाबा का बुलावा आया और मैं चला आया. कल हमने पीएम मोदी का जन्मदिवस मनाया है. बाबा से प्रार्थना की है कि पीएम नरेंद्र मोदी की आयु लंबी हो और वे ऐसे ही विकास कार्य करते रहे. बाबा का आशीर्वाद प्रधानमंत्री पर बना रहे. यश कीर्ति वैभव उन्हें मिले।  पारंपरिक सोला-पारिधान में दिखा राष्ट्रीय अध्यक्ष सबसे खास बात यह रही ही महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए. उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी. दर्शन के बाद मंदिर में कलेक्टर एवं मंदिर समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक द्वारा नितिन नबीन एवं हेमंत खंडेलवाल को बाबा महाकाल का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया. उन्हें लड्डू प्रासद दिया गया. साथ ही प्रभारी मंत्री, सांसद व अन्य नेताओं ने भी दोनों पार्टी अध्यक्षों का स्वागत सम्मान किया।  'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए नितिन नबीन इससे पहले नितिन नबीन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के मशहूर राम घाट पर महाकाल के भक्तों के साथ 'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए. इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की प्रार्थना की. नितिन नबीन ने अपने X हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ता रहे यही कामना है।