samacharsecretary.com

ओवैसी पर भड़के रामेश्वर शर्मा, ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर दिया जवाब

भोपाल  समान नागरिक संहिता यानी कि UCC के विरोध में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करने भोपाल पहुंचे AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के एक विवादित बयान पर तीखा पलटवार किया। भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में ओवैसी ने शर्मा के बयान का जिक्र करते हुए उन्हें सीधे चुनौती दी। इस दौरान उन्होंने विधायक के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया। क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी? ओवैसी ने कहा कि उन्होंने रामेश्वर शर्मा का बयान सुना है, जिसमें उन्होंने करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल लॉन्च करने की बात कही थी। ओवैसी ने कहा,     'रामेश्वर शर्मा, अगर तुम माई के लाल हो तो बताओ, कब मिसाइल लॉन्च करोगे? मैं अकेला काजी कैंप में खड़ा रहूंगा। मैं शहीद होने के लिए तैयार हूं, मरने के लिए तैयार हूं, लेकिन तुम्हारे सामने सिर झुकाने के लिए तैयार नहीं हूं। रामेश्वर शर्मा को काजी कैंप का इतिहास मालूम होना चाहिए। ये काजी कैंप क्या है? सुनो रामेश्वर शर्मा, ये काजी कैंप कौन थे? आजादी के मुजाहिदीन कौन थे?' शर्मा को औवैसी ने 'छोटू' कहा भाषण के दौरान ओवैसी ने शर्मा के खिलाफ एक बेहद आपत्तिजनक शब्द का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान सभा में  मौजूद लोग जमकर तालियां बजाते दिखे। ओवैसी ने अपने भाषण में काजी सैयद आबिद अली, वाजिद अली हुसैनी, खान शाहिद अली खान, फाजिल मोहम्मद खान, अब्दुल खान, शेख हमजा, सादात खान और रिसालदार वाली शाह जैसे नामों का भी जिक्र किया। उन्होंने रामेश्वर शर्मा पर निशाना साधते हुए उन्हें 'छोटू' कहा और बोले कि ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए। विधायक शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी बैरिस्टर हो तो बदतमीजी की भाषा छोड़ दो। तुम बदतमीजी की भाषा बोलोगे तो मैं पूछता हूं कि औवेसी क्या तुम हिजड़े की संतान हो? हमारे वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की, उसे भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में तुम्हारे अब्बा के घर गिराकर बता दी। जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं।विधायक ने कहा, मिसाइल चलती थी, मिसाइल चलती रहेगी। जहां-जहां आतंकवाद के कैंप रहेंगे, जहां-जहां भारत विरोधी कैंप रहेंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार है। मैं कल भी अपने बयान पर कायम था, आज भी हूं। ओवैसी, तुम पूरा भाषण सुनो और तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ। ‘मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी, आतंकवादी रो रहे थे’ ओवैसी के इसी बयान पर जवाब देते हुए शर्मा ने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की है, उसे भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल कर अपनी ताकत दिखाई। उन्होंने कहा, “जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं। शर्मा ने आगे कहा कि मिसाइल चलती थी और चलती रहेगी। उनके मुताबिक जहां-जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार है। उन्होंने कहा कि वह अपने पुराने बयान पर कल भी कायम थे और आज भी कायम हैं।   ‘पूरा भाषण सुनो, वकील हो तो कोर्ट ले जाओ’ रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी से कहा कि वह उनका पूरा भाषण सुनें। उन्होंने कहा, “तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ। शर्मा ने कहा कि उनके बयान का संदर्भ समझने की जरूरत है और वह अपने बयान पर कायम हैं। यूसीसी पर भी ओवैसी को घेरा रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी के यूसीसी विरोध पर भी पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब हर राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है। उन्होंने कहा कि “पांच बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी।  शर्मा ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के अनुसार 2029 तक 21 राज्यों में यूसीसी लागू हो जाएगा और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होगा और इसे बाबा साहेब आंबेडकर की भावना के अनुरूप लागू किया जाएगा।    UCC पर कहा-ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी यूसीसी पर विधायक शर्मा ने कहा कि हर दल हिंदुओं से वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है? ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी। भारत के गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा है कि 2029 तक 21 प्रांतों में UCC लागू हो जाएगा। मध्य प्रदेश में लागू हो गया है। अब तुम छाती पीटो या इस्लामाबाद से अपने तार जोड़ो, UCC लागू होगा और बाबा साहेब अंबेडकर की भावना के अनुसार ही होगा। किस बयान पर हुआ विवाद? दरअसल, कुछ दिन पहले जन्माष्टमी के दौरान आयोजित मटकी फोड़ कार्यक्रम में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कथित तौर पर कहा था, 'करोंद स्क्वायर से मिसाइल चलाओ तो काजी कैंप पर गिरे।' उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि, बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका इशारा पाकिस्तान के काजी कैंप की ओर था, न कि भोपाल के काजी कैंप की ओर। इसी बयान को लेकर अब ओवैसी ने भोपाल में आयोजित जनसभा के दौरान रामेश्वर शर्मा पर पलटवार किया। रामेश्वर शर्मा ने किया ओवैसी पर पलटवार रामेश्वर शर्मा ने असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भारत से चलने वाली मिसाइल का डर सिर्फ इस्लामाबाद में ही नहीं, बल्कि ओवैसी जैसे लोगों में भी है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा बयान करोंद से इस्लामाबाद के काजी कैंप पर मिसाइल दागने को लेकर था। शर्मा ने सवाल उठाया कि कांग्रेस को कैसे पता कि काजी कैंप इस्लामाबाद में है। उन्होंने कहा कि जहां भी आतंकवादियों के कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइलें दागी जाएंगी। साथ ही उन्होंने ओवैसी और राहुल गांधी पर आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। शर्मा ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा 'हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं है, हैदराबाद भारत का हिस्सा है।' UCC के मुद्दे पर भी सरकार पर निशाना जनसभा से पहले और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। ओवैसी ने … Read more

पठानकोट में बूचड़खाने पर कार्रवाई, अंदर मिले 400 मजदूरों से मचा हड़कंप

पठानकोट  पठानकोट के गांव अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खाने को लेकर लोगों में रोष व्याप्त है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बूचड़खाने को पूरी तरह खाली करवाया।  निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया। हिंदू संगठनों, सिख भाईचारे, रामलीला कमेटियों और विभिन्न गांवों के पंच-सरपंचों के विरोध तथा नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद पुलिस व नागरिक प्रशासन हरकत में आया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव शांत है। हालांकि हिंदू संगठनों ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस बूचड़खाने को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा। DC दफ्तर का घेराव और हाईवे जाम से हिला प्रशासन अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में एक बूचड़खाना खोले जाने की खबर से पिछले करीब डेढ़ महीने से इलाके के लोगों में रोष व्याप्त था। स्थानीय निवासियों को अंदेशा था कि इस बूचड़खाने में गौवंश और अन्य पशुओं को काटा जा रहा है। मंगलवार को विभिन्न हिंदू व सिख संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, पूर्व सरपंच और सुजानपुर हलके के सैकड़ों नागरिक डिप्टी कमिश्नर पठानकोट को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। आरोप है कि जिला प्रशासन और डीसी ऑफिस द्वारा करीब 2 घंटे तक उन्हें इंतजार करवाया गया और संतोषजनक बातचीत नहीं हुई। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से आक्रोशित होकर जनसैलाब सड़कों पर उतर आया और नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे संगठन हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तुरंत हरकत में आए। बुधवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न विभागों- औद्योगिक विभाग, बीडीपीओ कार्यालय सुजानपुर और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम पुलिस बल और नाराज संगठनों के साथ अखवाना स्थित बूचड़खाने के अंदर दाखिल हुई। हिंदू-सिख संगठनों का कड़ा रुख…     एडवोकेट भानु प्रताप और रमन ठाकुर: उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सनातन धर्म और हिंदू-सिख भाईचारे की एकजुटता की जीत है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया कि समय रहते स्थिति को संभाला गया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि आखिर एक विशुद्ध हिंदू बहुल इलाके में बूचड़खाना खोलने की मंजूरी किन अधिकारियों और विभागों ने दी? उन्होंने सरकार से मांग की कि उन दोषी अफसरों की जांच की जाए।     विशाल चौहान और एडवोकेट अमन ठाकुर (विहिप): उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना यहां नई मशीनरी पहुंचाई जा रही थी, जो बिना प्रशासनिक और राजनीतिक शह के संभव नहीं है। अगर इसे दोबारा खोलने की कोशिश की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।     संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों की चेतावनी: नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यहां से एक भी व्यक्ति अंदर-बाहर होता दिखा या दोबारा काम शुरू करने की कोशिश हुई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने स्थानीय गुर्जर समुदाय से भी अपील की कि वे चंद पैसों के लालच में गौहत्या या बूचड़खाने का समर्थन न करें, ताकि आपसी भाईचारा न बिगड़े। विभिन्न संगठनों के लोग रहे शामिल इस विरोध प्रदर्शन और निरीक्षण के दौरान राजपूत सभा से शिवा काटल, आरएसएस से अमित सिंह, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेवा संघ पंजाब के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शिवसेना हिंद पंजाब के महामंत्री बब्बू ठाकुर, विहिप जिला विधि प्रमुख एडवोकेट अमन ठाकुर, गौशाला मामून से राकेश महाजन, पूर्व सरपंच राजिंदर सिंह, पंडित राजिंदर सिंह, स्वामी नित्यानंद, अमन बढ़ोई, साबा तड़वाल सहित बड़ी संख्या में सुजानपुर और पठानकोट के हिंदू-सिख नागरिक मौजूद रहे।       अंदर से निकले 400 मजदूर, बांग्लादेशी भी शामिल: निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया।  स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन लगातार यह कह रहा था कि यह यूनिट "नॉट रनिंग" यानी बंद है, तो इतनी भारी तादाद में बाहरी लोग अंदर क्या कर रहे थे?     18 सितंबर को होना था उद्घाटन: मौके पर मौजूद बूचड़खाने के संचालक कुरैशी नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उनके पास स्लाटर हाउस से संबंधित सभी जरूरी अनुमतियां मौजूद हैं। उसने बताया कि अंदर नई मशीनरी फिट की जा रही है और इसका 18 सितंबर को औपचारिक उद्घाटन होना तय था।     अधिकारियों ने मौके पर जड़वाया ताला, दस्तावेज तलब: स्थिति की संवेदनशीलता और बिगड़ते माहौल को देखते हुए मौके पर तैनात एसपीडी विशालजीत सिंह, डीएसपी धारकलां राजेश कक्कड़, डीएसपी देहाती सुखजिंदर सिंह, थाना प्रभारी शाहपुरकंडी मोहित टाक, थाना प्रभारी सुजानपुर सब-इंस्पेक्टर अरुण कुमार और ट्रैफिक प्रभारी एएसआई ब्रह्म दत्त ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।     मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला: डीएसपी राजेश कक्कड़ और डीएसपी सुखजिंदर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए बूचड़खाने के अंदर मौजूद सभी कर्मचारियों और मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला और स्लाटर हाउस के मुख्य द्वार पर सरकारी ताला लगवा दिया।     एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई: पुलिस अधिकारियों ने संचालकों से बूचड़खाने के सभी कागजात व क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जब्त कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई में मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई और ताला लगवाने में सहयोग किया।

पंजाब में बिजली संकट बढ़ा, रोपड़ में उत्पादन घटकर 120MW तक पहुंचा

पटियाला  राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की खपत नित नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन दूसरी ओर बिजली उत्पादन व्यवस्था चरमराती दिख रही है। पटियाला से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली संकट से जूझ रहे पावरकॉम को एक और बड़ा झटका लगा है। बुधवार सुबह रोपड़ थर्मल प्लांट का एक और यूनिट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गया। इस नए संकट के बाद अब रोपड़ थर्मल प्लांट के कुल चार में से तीन यूनिट पूरी तरह से ठप पड़ चुके हैं। कुल 840 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले इस महत्वपूर्ण प्लांट से इस समय पावरकॉम को महज 120 मेगावाट बिजली ही हासिल हो पा रही है। प्लांट के अधिकांश यूनिट बंद होने से राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बिजली जनरेशन कम होने से कई इलाकों में लोगों को अघोषित बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बाजारों में सप्लाई लाइन ठीक न होने से रोजाना तारों में स्पार्किंग हो रही है। घंटों तक बिजली बंद रहती है। लुधियाना के चौड़ा बाजार स्थित हजूरी रोड पर मंगलवार देर रात तारों में भयानक स्पार्किंग हुई और इलाके की लाइट गुल हो गई। सुबह तक इलाके में बिजली गुल रही। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लग रहे बिजली कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल आज डिप्टी कमिश्नर दफ्तर लुधियाना में प्रदर्शन करेगा। राहत: प्राइवेट सेक्टर के दोनों थर्मल प्लांट एक्टिव दूसरी तरफ, राहत की बात केवल इतनी है कि प्राइवेट सेक्टर के दोनों बड़े थर्मल प्लांट, यानी राजपुरा और तलवंडी साबो, अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी प्लांट के यूनिट बार-बार ठप होने से बिजली की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। मांग तोड़ रही रिकॉर्ड गौरतलब है कि मौजूदा सीजन में राज्य के भीतर बिजली की मांग 17,300 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा राज्य के पावर सेक्टर के इतिहास में अब तक किसी एक दिन की सबसे ज्यादा मांग का नया रिकॉर्ड है। इतनी भारी मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को अब मुख्य रूप से सेंट्रल सेक्टर से बिजली की भारी खरीद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर जल्द ही रोपड़ प्लांट के खराब यूनिट्स को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को लंबे पावर कट का सामना करना पड़ सकता है। पंजाब में बिजली की डिमांड-सप्लाई व जनरेशन के बारे में जानिए…     प्राइवेट प्लांटों में पूरी कैपेसिटी से बन रही बिजली: पंजाब में प्राइवेट थर्मल प्लांटों से बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 3,380 मेगावाट है। इसमें से 1,980 मेगावाट बिजली का उत्पादन तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के 3 यूनिटों में होता है। प्रत्येक यूनिट में 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।     1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही: तलवंडी साबो में आजकल कुल 1,700 मेगावाट के आसपास बिजली पैदा हो रही है। वहीं, दूसरा प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा में है, जिसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इसमें आजकल 1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही है।     तीन में से एक प्लांट की स्थिति चिंताजनक: पंजाब में 3 सरकारी थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,300 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। रोपड़ थर्मल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है। इसमें 4 यूनिट हैं। दो यूनिट कल से बंद हैं। जो दो यूनिट चालू हैं, वे भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे।     लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट: रोपड़ में कुल 200 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट हैं। आज चारों यूनिट चल रहे हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है और आज यहां 805 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। गोइंदवाल में तीसरा सरकारी थर्मल प्लांट है, जिसमें 2 यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 520 मेगावाट है। आज एक यूनिट में करीब 430 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।     हाइड्रो प्रोजेक्टों से मदद मिल रही: पंजाब में छोटे-बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों से रात में 830 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और दिन में इसे घटाकर 500 मेगावाट के आसपास रखा जा रहा है। बिजली संकट को कम करने में हाइड्रो प्रोजेक्टों का इस समय अहम योगदान निभा रहा है।     सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही: पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 450 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट्स से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है।     केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद: पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) केंद्रीय पूल से बिजली ले रहा है।     महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर: PSPCL केंद्रीय पूल से करीब 11,700 मेगावाट तक बिजली खरीद रहा है। PSPCL को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा। बाजार में स्पार्किंग से आग लगने का खतरा हजूरी रोड के दुकानदार मोहित का कहना है कि पूरी मार्केट में तारों का जाल बिछा हुआ है। हल्की सी हवा या बरसात होती है तो स्पार्किंग शुरू हो जाती है। उनका कहना है कि कई बार अफसरों को इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यह पूरी मार्केट कपड़ों की है। इस तरह स्पार्किंग होने से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने बताया कि देर रात से सुबह तक बिजली सप्लाई बंद रही। अफसरों को फोन कर रहे हैं, तो वे फोन नहीं उठा रहे।

पीआरडी जवानों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, बढ़ा ड्यूटी भत्ता और कैशलेस इलाज

पीआरडी जवानों को योगी सरकार का दोहरा तोहफा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा और कैशलेस इलाज को मंजूरी 500 से बढ़कर 600 रुपये हुआ दैनिक ड्यूटी भत्ता, 27,794 स्वयंसेवकों को मिलेगा लाभ हर महीने 3000 रुपये तक बढ़ेगा मानदेय, सरकार उठाएगी 101.44 करोड़ का अतिरिक्त भार 31,130 पंजीकृत स्वयंसेवकों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों के हित में दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने पीआरडी स्वयंसेवकों का दैनिक ड्यूटी भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन करने के साथ ही स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना को भी स्वीकृति दी है। दोनों फैसलों से पीआरडी स्वयंसेवकों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा मिलेगी। हर महीने 3000 रुपये तक बढ़ेगा मानदेय, सरकार पर 101.44 करोड़ का अतिरिक्त भार योगी कैबिनेट के फैसले से 30 दिन की ड्यूटी करने वाले पीआरडी स्वयंसेवक के मानदेय में सीधे 3,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि होगी। इससे प्रदेश के 27,794 पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि भत्ते में वृद्धि से राज्य सरकार पर प्रतिवर्ष 101.44 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। इसके बाद पीआरडी स्वयंसेवकों पर कुल अनुमानित वार्षिक व्यय 6 अरब 8 करोड़ 68 लाख 86 हजार रुपये हो जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों के लिए अनुपूरक अनुदान से 45 करोड़ रुपये की तत्काल व्यवस्था की गई है। 31,130 पंजीकृत स्वयंसेवकों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ योगी कैबिनेट ने पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। वर्तमान में पंजीकृत 31,130 पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को इस योजना का लाभ मिलेगा। प्रति स्वयंसेवक 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से योजना पर करीब 9.34 करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों के लिए अनुपूरक अनुदान से 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। साचीज के जरिए लागू होगी योजना, सेवा अवधि तक मिलेगा स्वास्थ्य कवच मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से प्रस्तावित है। योजना का लाभ स्वयंसेवक और उनके आश्रितों को सेवा अवधि के दौरान ही मिलेगा। ऐसे स्वयंसेवक अथवा आश्रित, जो पहले से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान जैसी केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा पोषित किसी अन्य स्वास्थ्य योजना से आच्छादित हैं, इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगे।

महिला वोटबैंक साधने की कवायद, योगी सरकार लाई उद्यमी क्रेडिट योजना

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई हवा बह रही है. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा और निर्णायक मोहरा बनकर उभरी हैं राज्य की महिला वोटर. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना के जरिए सीधे 1 करोड़ महिलाओं को साधने की एक ऐसी रणनीति तैयार की है, जिसने सूबे के चुनावी माहौल में गर्मी बढ़ा दी है. जब सीधे महिलाओं के खाते में ब्याजमुक्त एक लाख रुपए पहुंचेंगे तो बीजेपी को उसी जादू के दोहराने की उम्मीद है, जो पिछले साल बिहार चुनाव में देखा गया।  उत्तर प्रदेश में पहले से ही कानून-व्यवस्था, एंटी-रोमियो स्क्वाड और सेफ सिटी प्रोजेक्ट्स की वजह से योगी आदित्यनाथ को महिला वोटरों का मजबूत समर्थन मिलता रहा है. लेकिन इस बार बात सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है. अब मुकाबला आर्थिक स्वावलंबन और आधी आबादी की जेब को सीधे राहत पहुंचाने का है. इस नए राजनीतिक दांव को उस समय के साथ जोड़कर देखा जा रहा है जब बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के जरिए एक बड़ा कार्ड खेला था. अब सवाल यह है कि क्या बिहार का वही फॉर्मूला यूपी की सरजमीं पर भी कमाल दिखाएगा? आधी आबादी को साधने की यह होड़ अचानक तेज नहीं हुई है. विपक्ष की तरफ से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार अपनी पत्नी और सांसद डिंपल यादव को आगे करके महिला वोटरों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में योगी आदित्यनाथ का यह मास्टरस्ट्रोक उनके सबसे मजबूत वोटबैंक की नींव को और ज्यादा पक्का करने की ठोस कोशिश माना जा रहा है. हालांकि, योगी आदित्यनाथ और बीजेपी को महिलाओं का एकतरफ समर्थन हासिल रहा है, जिसकी एक झलक 2022 के यूपी चुनाव नतीजों में देखी गई. जहां बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच पुरुषों के वोट प्रतिशत में तो महज 4 फीसदी का अंतर था, लेकिन महिला वोटरों ने योगी के पक्ष में बंपर मतदान किया. बीजेपी को 48 फीसदी महिला वोट मिले थे, जबकि सपा को महज 32 फीसदी।  बिहार का वो सबक, जिसने बदल दी सियासत की दिशा यूपी और बिहार की जातिगत पॉलिटिक्स कमोबेश एक जैसी ही है. और पेंचीदा भी. जिसमें गारंटी कम, रिस्क ज्यादा है. जातियों को अपने पक्ष में साधने की हर पार्टी कोशिश करती है. ऐसे में बीजेपी ने कई राज्यों में महिला वोटरों के रूप में एक स्थायी वोटबैंक कायम किया है।  बिहार के विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना एक ऐसा पासा साबित हुई थी, जिसने पूरे चुनाव का रुख बदल दिया. चुनाव की आहट के साथ ही राज्य के हर परिवार की एक महिला को सीधे बैंक खाते में आर्थिक मदद और रोजगार शुरू करने का ऑफर दिया गया. इस योजना ने सीधे तौर पर गांव-गांव की महिलाओं को सरकार से जोड़ा और जब नतीजे आए तो यह साफ दिखा कि महिला वोट बैंक किस तरह किसी भी दल की किस्मत पलटने का माद्दा रखता है।  बिहार के इस सफल मॉडल ने यह साबित कर दिया कि जब महिलाओं को सीधे आर्थिक रूप से सशक्त किया जाता है, तो वे मतदान केंद्र तक जाकर अपनी पसंद जाहिर करने में जरा भी नहीं हिचकतीं. यही वजह है कि यूपी के चुनावी मौसम से ठीक पहले योगी सरकार ने भी इसी राह पर तेजी से कदम आगे बढ़ाए हैं।  यूपी की योजना: 1 करोड़ महिलाओं को 1 लाख रुपए का बड़ा आधार योगी सरकार की 'महिला उद्यमी क्रेडिट योजना' का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि इसका असर सीधा और व्यापक हो. योजना के तहत उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी करीब 1 करोड़ महिलाओं को 1 लाख रुपए तक का ब्याजमुक्त क्रेडिट उपलब्ध कराने की पूरी तैयारी है।  इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका आसान और पारदर्शी तरीका है. महिलाओं को बिना किसी ब्याज के तीन किस्तों में पैसे दिए जाएंगे. पहली किस्त 20,000 रुपए की होगी, जिसे दिसंबर से वितरित करने की तैयारी है. इसके बाद समय पर भुगतान करने वाली महिलाओं को 30,000 रुपए और फिर 50,000 रुपए की तीसरी किस्त मिलेगी. यानी कोई कागजी उलझन नहीं, कोई ब्याज का बोझ नहीं और सीधे बैंक खाते में मदद।  दोनों योजनाओं में क्या है समानता और क्या है नयापन? बिहार की तरह यूपी की योजना का नारा भी वही है- आधी आबादी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।  समानता की बात करें तो दोनों ही योजनाओं में सरकार की मंशा किसी बिचौलिए के बिना सीधे महिलाओं तक पैसा पहुंचाने की है. दोनों जगहों पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का सहारा लिया गया है ताकि एक-एक पाई सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचे. इसके साथ ही दोनों योजनाओं में दिए जाने वाले पैसे को ब्याजमुक्त रखा गया है ताकि महिलाओं पर कर्ज का भारी बोझ न पड़े।  हालांकि, यूपी की योजना का दायरा और तरीका थोड़ा अलग है. बिहार जहां एकमुश्त और चरणबद्ध वित्तीय सहायता देने पर केंद्रित था, वहीं यूपी सरकार ने इसे स्वयं सहायता समूहों (SHG) के एक मजबूत नेटवर्क से जोड़ दिया है. यूपी में सरकार का लक्ष्य केवल पैसे बांटना नहीं, बल्कि महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाकर गांव-गांव में छोटे-छोटे कुटीर उद्योग, सिलाई केंद्र, डेयरी उत्पादन और ई-रिक्शा संचालन जैसे कामों से जोड़ना है।  कानून-व्यवस्था के भरोसे से आगे आर्थिक आत्मनिर्भरता का सफर उत्तर प्रदेश की राजनीति को गहराई से समझने वाले जानते हैं कि 2017 के बाद से योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत राज्य की कानून-व्यवस्था रही है. सड़कों पर सुरक्षा का माहौल, अपराधियों पर कार्रवाई और सेफ सिटी जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच योगी सरकार के प्रति एक गहरा विश्वास पैदा किया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर मंचों से इस बात को दोहराते रहे हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और उनका स्वावलंबन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी सोच को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था-  "अगर प्रदेश की आधी आबादी को घर के भीतर ही सीमित रखा जाएगा, तो राज्य का विकास अधूरा रहेगा. हमारी सरकार महिलाओं की सुरक्षा से लेकर उनके सम्मान और स्वावलंबन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. जब गांव की … Read more

CM यादव बोले- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दुनिया में बढ़ा भारत का कद

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की विश्व में बढ़ती साख का प्रतीक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ब्रिक्स सम्मेलन की अपार सफलता और नई दिल्ली घोषणा पत्र के लिए पूरी मंत्रिपरिषद् ने एक स्वर में प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई प्रदेश में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा से संकल्प अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को दी सरकार की उपलब्धियों एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नई दिल्ली में हाल ही में हुआ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सच्चे अर्थो में भारत की विश्व भर में बढ़ती भूमिका का प्रतीक बन गया। मुख्यमंत्री ने ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता और इस अवसर पर पारित हुए नई दिल्ली घोषणा पत्र को केन्द्र सरकार की कूटनीतिक जीत का प्रमाण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपना वर्चस्व साबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जी-20 और अब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता वैश्विक गवर्नेंस में भारत की बढ़ती लीडरशिप का जीवन्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद् की बैठक में मंत्रिगण को संबोधित कर रहे थे। बैठक में ब्रिक्स सम्मेलन की अपार सफलता के लिए पूरी मंत्रिपरिषद् द्वारा मेजें थप-थपाकर प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्र सरकार को बधाई और शुभकामनाएं देकर अभिनंदन किया गया। मंत्रिमण्डल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उनकी सफल दुबई यात्रा के लिए भी बधाई दी। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में दीर्घ अवधि से लंबित रहे बड़े कार्यों के पूरे होने, प्रदेश में परिवहन सेवाओं के विस्तार, ग्रामीण परिवारों को उनके पट्टे के पक्के अधिकार, निवेश के नए अवसरों तथा जनसेवा से जुड़े आगामी अभियानों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से अपने-अपने प्रभार के जिलों में भी सरकार की सभी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नेतृत्व करने का भी आह्वान किया।   नई दिल्ली घोषणा-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ब्रिक्स के 11 सदस्य देश विश्व की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से अपनाया गया। शांति, आतंकवाद, व्यापार, वित्त, तकनीक और सतत् विकास पर साझा दृष्टिकोण सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक व्यवस्था को “पिरामिड ऑफ प्रिविलेज” से “प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप” में बदलने और “रूल टेकर से रूल शेपर” बनने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई गई और 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम (कश्मीर) में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। तेज, सुरक्षित एवं कम लागत वाले क्रॉस-बॉर्डर भुगतान तंत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा साइबर सहयोग को समावेशी विकास के महत्वपूर्ण साधन के रूप में बढ़ाने पर जोर दिया गया। मध्यप्रदेश के लिए भी यह सम्मेलन गौरव का विषय रहा। इंदौर में ब्रिक्स युवा उद्यमिता कार्य समूह, कृषि कार्य समूह और 16वीं कृषि मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें ‘इंदौर घोषणा’ तथा भोपाल में संस्कृति कार्य समूह, ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव और 11वीं संस्कृति मंत्रियों की बैठक में ‘भोपाल घोषणा’अपनाई गई। 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 25 वर्षों में देश में विकास का जो दीपक जलाया है, उसका प्रकाश पूरे विश्व में भारत की छवि को उज्ज्वल बना रहा है। आगामी गुरुवार, 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री का जन्मदिन है और 7 अक्टूबर को लोक सेवाओं में उनके 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनसेवा के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले प्रधानमंत्री के प्रति आभार स्वरूप 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ चलाया जाएगा और इसे मध्यप्रदेश की जनता की सेवा में समर्पित किया जाएगा। उन्होंने मंत्रीगण को अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों की जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी देते हुए कहा कि सभी कार्यक्रमों के लिए संबंधित मंत्रीगण के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य नोडल अधिकारी बनाया गया है। मंत्रीगण और राज्य नोडल अधिकारी मिलकर जिला स्तर पर बेहतर तालमेल एवं सुनियोजित ढंग से कार्यक्रमों का ऐतिहासिक आयोजन सुनिश्चित करें। 17 सितम्बर को मंत्रीगण की उपस्थिति के संबंध में पृथक निर्देश जारी होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग एवं अन्य विभागों द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रसारित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सेवा माह में सभी पूरी ताकत के साथ जुट जाएं। मुख्यमंत्री ने कामना करते हुए कहा कि इस अभियान के सभी 13 कार्यक्रमों में हम सब सफलता के नए रिकॉर्ड बनाएंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में अनेक ऐसे बड़े कार्य हुए हैं, जो कई वर्षों से लंबित थे। चाहे यूनियन कार्बाइड के कचरे का निष्पादन हो, स्लिमनाबाद वाटर टनल हो या नक्सलवाद की समस्या का अंत—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में यह सब काम सफलतापूर्वक हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी क्रम में परिवहन क्षेत्र में भी एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। लगभग 21 वर्ष से बंद सरकारी बस सेवा फिर प्रारंभ होने जा रही है। उन्होंने बताया कि आने वाली अनंत चर्तुदशी अर्थात्  25 सितम्बर 2026 से मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा का शुभारंभ किया जा रहा है। इसके अंतर्गत लगभग 150 सिटी रूट, 450 इंटरसिटी रूट और 436 इंटरस्टेट रूट विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक हम प्रदेश के 75 प्रतिशत विकासखंडों को सुगम बस परिवहन सेवा से जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। पट्टों की देंगे पक्की रजिस्ट्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितम्बर को इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मुख्यातिथ्य में “स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना" का शुभारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेखों के निःशुल्क पंजीयन का निर्णय लिया है। ग्रामीण हितग्राहियों को स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क से पूरी छूट दी गई है तथा इसका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत 68 … Read more

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 23 प्रस्तावों को मंजूरी; शिक्षा-रोजगार और एक्सप्रेसवे पर जोर

योगी कैबिनेट में 23 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर, एक्सप्रेसवे से लेकर शिक्षा और रोजगार तक लिए गए बड़े फैसले चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, स्मार्ट स्कूल और पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण को मंजूरी किसानों को छह प्रतिशत ब्याज पर छह लाख रुपये तक ऋण, पीआरडी जवानों को कैशलेस इलाज की सुविधा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में विकास और जनकल्याण से जुड़े 23 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। फैसलों में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने, खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने, किसानों को सस्ती दर पर ऋण और पूर्व अग्निवीरों को सरकारी भर्ती में आरक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। बैठक में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास को लेकर भी निर्णय लिए गए। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रेसवार्ता में स्वीकृत प्रस्तावों की जानकारी दी। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 1,008.67 करोड़ मंजूर कैबिनेट में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को विकसित करने के लिए संशोधित परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 15.172 किलोमीटर लंबे प्रवेश नियंत्रित छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण ईपीसी मोड पर कराया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 1,008.67 करोड़ रुपये है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। निर्माणकर्ता के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। इससे बुंदेलखंड से चित्रकूट धाम तक आवागमन सुगम होने और पर्यटन को गति मिलने की उम्मीद है। परिषदीय विद्यालय बनेंगे स्मार्ट स्कूल बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रण वाले परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इससे सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा। किसानों को छह प्रतिशत ब्याज पर छह लाख तक ऋण मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों को रियायती ब्याज दर पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराने का फैसला किया गया। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से किसानों को छह लाख रुपये तक का ऋण छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर लंबी अवधि के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को कृषि और ग्रामीण जरूरतों के लिए सस्ती दर पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी। पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी भर्ती में आरक्षण योगी कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीरों को उत्तर प्रदेश जेल वार्डन की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत पद आरक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके साथ ही पूर्व अग्निवीरों को प्रवर्तन सिपाही (परिवहन) कि सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत पदों पर क्षैतिज एवं आयु सीमा में छूट देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली। इन फैसलों से सैन्य सेवा पूरी कर चुके युवाओं को सरकारी रोजगार के अवसर मिलेंगे। पीआरडी जवानों और आश्रितों को कैशलेस इलाज प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा देने का निर्णय हुआ। इससे पीआरडी जवानों और उनके परिवारों को उपचार के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी। खिलौना उद्योग को मिलेगा प्रोत्साहन कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दी गई। इस नीति से प्रदेश में खिलौना निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में मदद मिलेगी। अन्य महत्वपूर्ण फैसले औद्योगिक विकास एवं रोजगार – उत्तर प्रदेश के अभियांत्रिकी विभागों में कार्य के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन के लिए वित्तीय नियमों के तहत अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी – उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड की छाता शुगर कंपनी लिमिटेड, जनपद मथुरा में कंसेशन-कम-लीज के माध्यम से 120 केएलपीडी एथेनॉल उत्पादन संयंत्र की स्थापना को मंजूरी। – उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में वर्ल्डफिश परियोजना के संचालन के लिए राज्य सरकार, मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश और वर्ल्डफिश के बीच समझौता ज्ञापन पर अनुमोदन। सुरक्षा और प्रशासन – राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील स्थित ग्राम पूरे लाल खान में लगभग 65 एकड़ बंजर भूमि भारत सरकार को निशुल्क आवंटित करने की मंजूरी। – 10 वर्ष तक की अवधि के किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर प्रभावी स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट देने का प्रस्ताव पास। ग्रामीण विकास और जनकल्याण – प्रदेश में वाहनों की तकनीकी स्वस्थता को सुनिश्चित करने के लिए वाहनों की जांच हेतु स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) की स्थापना संबंधी नीति में संशोधन को मंजूरी। – प्रांतीय रक्षक दल के स्वयंसेवकों की ड्यूटी भत्ता दर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव स्वीकृत। – प्रदेश की उचित दर दुकानदारों को वितरित खाद्यान्न की मात्रा के सापेक्ष 25 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मार्जिन मनी देने का फैसला। शहरी विकास – लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत विकसित करने के लिए धनराशि स्वीकृत करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी। – लखनऊ में स्वीकृत हाईटेक टाउनशिप परियोजना को पूर्ण किए जाने के संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी।

यूपी में सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, 14,429 स्कूलों में बढ़ेगी डिजिटल शिक्षा

यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया आयाम, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड करेगी स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना, 300 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत, चरणबद्ध तरीके से होगा विद्यालयों का विकास वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की मिल रही सुविधा 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को दिए गए टैबलेट, बच्चों को आधुनिक और बेहतर डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराने पर योगी सरकार का जोर लखनऊ  उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। कैबिनेट ने 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। प्रदेश सरकार पहले से ही बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं। सरकार का प्रयास है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के बेहतर अवसर मिलें। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत योगी सरकार ने वर्ष 2021 में की थी और इनका विधिवत संचालन शैक्षिक सत्र 2022-23 से शुरू किया गया। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को विषयों को समझने में डिजिटल माध्यमों का लाभ मिल रहा है। अब प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के निर्णय से इस व्यवस्था का और विस्तार होगा। 300 करोड़ रुपये से होगा स्मार्ट स्कूलों का विकास कैबिनेट निर्णय के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना की जाएगी। स्मार्ट क्लास की स्थापना का कार्य नियमानुसार प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए प्रति विद्यालय 2,07,910 रुपये (सेनेटेज चार्जेज एवं जीएसटी सहित) की प्रस्तावित दर निर्धारित की गई है। यदि निविदा प्रक्रिया में प्रति विद्यालय इससे कम दर प्राप्त होती है, तो स्वीकृत कुल 300 करोड़ रुपये की धनराशि के भीतर अधिक संख्या में प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जा सकेगा। उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेंगी डिजिटल सुविधाएं प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या और उच्च नामांकन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की स्थापना की जाएगी। भारत सरकार की समग्र शिक्षा योजनान्तर्गत परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल इनिशिएटिव प्रोग्राम के तहत उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्थापित की जानी हैं। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने से बच्चों को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा। स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी बच्चों को सीखने के लिए अतिरिक्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराएगी। योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के बच्चों को बेहतर, आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों का लगातार विस्तार इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकें।

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’, प्रदेशभर में होंगे कार्यक्रम

प्रदेश में आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा 'सेवा संकल्प अभियान' सीएम योगी के निर्देश पर एक माह तक होंगे 12 प्रमुख कार्यक्रम सभी जनपदों में प्रत्येक कार्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नामित होगा जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाने पर जोर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को निर्देशित किया है कि आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर, 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जाएगा। अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों से जनजीवन में आए सकारात्मक बदलावों को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत-2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों को अपनी महत्वपूर्ण परियोजनाओं, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का विधानसभा क्षेत्रवार, विकासखंडवार तथा ग्राम पंचायतवार विस्तृत विवरण तैयार करने को कहा गया है। इस अभियान के दौरान लाभार्थियों की जानकारी भी विधानसभा, ब्लॉक और ग्राम पंचायतवार तैयार की जाएगी। विकास कार्यों के ‘पहले और बाद’ के फोटो, वीडियो, ड्रोन फुटेज तथा रील्स का डाटा बैंक तैयार किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों के प्रभाव को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जा सके। CMIS पोर्टल पर प्रतिदिन दर्ज होगी प्रगति अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों और विकास कार्यों की प्रगति का विवरण फोटो एवं वीडियो सहित राज्य स्तरीय CMIS पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी प्रगति प्रतिदिन दर्ज की जाएगी, जिससे अभियान की गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके। अभियान शुरू होने से पहले सभी विभागों एवं जनपदों को कार्यक्रमों की समय-सारणी निर्धारित करने, लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करने, कार्यक्रम स्थलों का चिन्हांकन, यात्रा रूट तय करने, व्यवस्थापन टीमों का गठन, नोडल अधिकारियों की तैनाती तथा आवश्यक बजट की समय से व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। 12 प्रमुख कार्यक्रमों का होगा आयोजन अभियान के अंतर्गत 12 प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनके लिए कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य, गतिविधियां, क्रियान्वयन एवं संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों का विस्तृत विवरण तैयार किया गया है। संबंधित विभागों और जनपदों को निर्धारित समय-सारणी के अनुसार इन कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संपादित करने के निर्देश दिए गए हैं। साप्ताहिक समीक्षा से होगी निगरानी अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्था की गई है। विभागीय अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव स्तर पर संबंधित कार्यक्रमों की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। मंडलायुक्त मंडल के समस्त जनपदों की तथा जिलाधिकारी अपने-अपने जनपद के सभी कार्यक्रमों की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे। इसके अलावा मंडल प्रभारियों द्वारा भी अभियान की तैयारियों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। सभी प्रशासनिक विभागों को विभागीय नोडल अधिकारी नामित कर विस्तृत कार्ययोजना एवं समय-सारणी तत्काल तैयार करने को कहा गया है। जिलों में प्रत्येक कार्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नामित कर जिला स्तरीय कैलेंडर तैयार किया जाएगा तथा मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से दैनिक अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाएगा।

योगी सरकार की पहल से आसान होगी पूर्व सैनिकों की इलाज की राह, 13 जिलों में ECHS विस्तार

पूर्व सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की राह आसान, 13 जिलों में ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक के लिए मुफ्त जमीन योगी सरकार की बड़ी पहल, 18 लाख पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य लाभ के लिए बढ़ेगा ईसीएचएस नेटवर्क लखनऊ  योगी सरकार ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के तहत प्रदेश के 13 जिलों में पॉलीक्लीनिक की स्थापना/निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए), सेंट्रल कमांड और भारत सरकार को नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को सीएम योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इससे संबंधित पॉलीक्लीनिक के निर्माण की राह आसान होगी और पूर्व सैनिकों को अपने नजदीक बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। करीब 18 लाख पूर्व सैनिकों को मिलेगा स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उत्तर प्रदेश में करीब 18 लाख भूतपूर्व सैनिक हैं। ईसीएचएस के माध्यम से इन्हें बेहतर चिकित्सा लाभ शीघ्र प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध होगी। योजना में लाभार्थियों को कैशलेस उपचार प्रदान करने का प्रयास है। ऐसे में प्रदेश में नए पॉलीक्लीनिक स्थापित होने से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा। 13 जिलों में पॉलीक्लीनिक के लिए भूमि की जरूरत ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक की स्थापना/निर्माण के लिए प्रदेश के 13 जिलों में भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इनमें इटावा, जालौन, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, बांदा, गाजीपुर, मिर्जापुर, देवरिया, सुल्तानपुर, आजमगढ़ और गोंडा शामिल हैं। इन जिलों में ग्राम पंचायतों अथवा स्थानीय प्राधिकरणों की उपलब्ध भूमि को पॉलीक्लीनिक निर्माण के लिए नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने की योजना है। केंद्र सरकार की ईसीएचएस योजना से कैशलेस इलाज पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना, भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग की प्रमुख योजना है। इसे 1 अप्रैल 2003 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ईसीएचएस पॉलीक्लीनिकों, सशस्त्र सेना चिकित्सा सुविधाओं, सरकारी और पैनलबद्ध निजी अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से भूतपूर्व सैनिक पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को नि:शुल्क बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। जमीन मिलने से निर्माण प्रक्रिया होगी आसान पॉलीक्लीनिकों के निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। प्रस्ताव के तहत ग्राम पंचायतों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि को स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए), सेंट्रल कमांड, भारत सरकार को नि:शुल्क हस्तांतरित किया जाना है। इससे चिन्हित जिलों में ईसीएचएस स्वास्थ्य ढांचे को विस्तार देने का रास्ता तैयार होगा।