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गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत, 102 चीनी मिलों ने किया 100% भुगतान

गन्ना किसानों को 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत भुगतान पेराई सत्र (2025-26)  23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का किया भुगतान, निजी चीनी मिलों ने भी किया शत-प्रतिशत भुगतान  योगी सरकार ने गन्ना किसानों को किया 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान  निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना है उत्तर प्रदेश  पेराई सत्र (2025-26) में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का किया जा चुका भुगतान  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर मॉनीटरिंग की बदौलत पेराई सत्र 2025-26 में 102 चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया। वहीं 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का भुगतान किया। प्रदेश में संचालित राज्य चीनी निगम की तीन मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 में 543.51 करोड़ का भुगतान किया है। निजी चीनी मिलों की ओर से भी किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना हुआ है। योगी सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया। उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। पेराई सत्र 2025-26 में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है। गन्ना, शीरा और एथेनॉल उत्पादन में शीर्ष पर बना है यूपी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने किसान कल्याण, चीनी उत्पादन और एथेनॉल में नए आयाम स्थापित किए हैं। योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। सरकार ने न केवल गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता माना, बल्कि ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब तक रिकॉर्ड ₹3.25 लाख करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित भी किया।  94.86 प्रतिशत से अधिक का भुगतान सुनिश्चित वर्तमान पेराई सत्र में भी 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि प्रदेश की 102 चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य का शत- प्रतिशत भुगतान कर दिया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के गन्ना किसानों की औसत आय में ₹40,720 प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 9 वर्ष में चीनी मिलों ने की 9220 लाख टन गन्ने की पेराई गन्ना विकास विभाग ने बताया कि विगत नौ वर्ष में प्रदेश की चीनी मिलों ने रिकॉर्ड 9,220 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है। जो इससे पहले के 9 वर्ष की कुल गन्ना पेराई 6168 लाख टन से 3052 लाख टन अधिक है। 9 वर्ष में 879.06 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।  सहकारी चीनी मिलों ने किया 100 प्रतिशत भुगतान  उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2025-26 में सहकारी चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य के रूप में 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। अनूपशहर, बदायूं, बागपत, बेलरायां, बिलासपुर, बीसलपुर, गजरौला, घोसी, कायमगंज, महमूदाबाद, मोरना, नानपारा, नानौता, पूरनपुर, पुवायां, रमाला, सहारनपुर, सरसावां, सठियांव, सेमीखेड़ा, स्नेह रोड, सुल्तानपुर, तिलहर समेत कुल कुल 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820.89 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। 23 सहकारी चीनी मिलों की पेराई क्षमता 65375 टीसीडी है।  निजी चीनी मिलों द्वारा किया गया भुगतान  पेराई सत्र 2025-26 में निजी चीनों मिलों ने किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। लखनऊ संभाग की मिलों ने सर्वाधिक 6462.19 करोड़ का भुगतान किया। वहीं मुरादाबाद संभाग की मिलों द्वारा 6398.36 करोड़, सहारनपुर संभाग की चीनी मिलों ने 4799.25 करोड़ का भुगतान किया।    संभाग   भुगतान प्रतिशत          भुगतान  अयोध्या   100 फीसदी             1212.35 करोड़  बरेली    89.25 फीसदी             2315.74 करोड़  देवरिया 97.86 फीसदी              1016.95 करोड़  देवीपाटन   91.63 फीसदी           2249.01 करोड़  गोरखपुर    93.46 फीसदी            749.97 करोड़  लखनऊ    91.34 फीसदी             6462.19 करोड़  मेरठ     94.09 फीसदी              4227.24 करोड़  मुरादाबाद   98.96 फीसदी          6398.36 करोड़  सहारनपुर   94.64 फीसदी       4799.25 करोड़

गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण

माफिया और मच्छर की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण   खून बनाया नहीं जा सकता, रक्तदान से जरूरतमंद को मिलता है नया जीवन : मुख्यमंत्री योगी    साढ़े नौ वर्ष पहले खुद बीमार था बीआरडी, आज स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र   75 जिलों में 85 मेडिकल कॉलेज, एमबीबीएस की सीटें 13,500 के पार   पहले डॉक्टरों के अपहरण और रंगदारी के खिलाफ करना पड़ता था आंदोलन   पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश लगाएं, स्वैच्छिक रक्तदान को दें बढ़ावा    गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। अब इंसेफेलाइटिस समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं।   मुख्यमंत्री योगी  तारामंडल स्थित सेठ बद्री प्रसाद जायसवाल मेमोरियल हॉल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था नहीं है। गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है।   उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा। गोरखपुर में आईएमए से 1400 से अधिक चिकित्सक जुड़े हैं।   एक बेड पर भर्ती रहते थे चार-चार मरीज मुख्यमंत्री योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर पंखे, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक का अभाव था। नौ वर्ष पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।   उन्होंने कहा कि गोरखपुर में एम्स स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।   डॉक्टरों के लिए सड़कों पर करना पड़ता था आंदोलन मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।   गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल और ब्लड बैंक सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सरकार ने जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू की है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है और एसजीपीजीआई में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।   स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं लोग मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।   उन्होंने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।   मशीनों का निरीक्षण कर जानी कार्यप्रणाली इससे पहले मुख्यमंत्री योगी ने चैरिटेबल ब्लड सेंटर में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों का निरीक्षण किया। चिकित्सकों से मशीनों के संचालन, रक्त संग्रह, जांच और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके बाद शिलापट्ट का अनावरण कर ब्लड सेंटर का विधिवत लोकार्पण किया।   नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर मुख्यमंत्री योगी की नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची … Read more

सात अक्तूबर से एक सप्ताह लगेंगे कैंप, विभिन्न सरकारी योजनाओं से छूटे पात्र लोगों को किया जाएगा संतृप्त

 गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन को दी जा रही पेंशन की संख्या भी बढ़ेगी और राशि भी। अभी प्रदेश में 1.10 करोड़ वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन को सालाना 12 हजार रुपये पेंशन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा, “बहुत शीघ्र इसकी संख्या भी बढ़ेगी और इसकी राशि भी बढ़ेगी।” इसके साथ ही अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होगी।   मुख्यमंत्री योगी बुधवार को उर्वरक नगर में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गोरखपुर में करीब 40 करोड़ रुपये की 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उर्वरक नगर में नवनिर्मित कल्याण मंडपम का फीता काटकर लोकार्पण किया और पौधरोपण कर मंत्रोच्चार के बीच जल अर्पित किया।   सात अक्तूबर से एक सप्ताह लगेंगे कैंप मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कोई निराश्रित बुजुर्ग, निराश्रित महिला या दिव्यांगजन हो, उसे इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि आगे उसका गुजर-बसर कैसे होगा। सरकार की पेंशन सुविधा उसका संबल बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष का कार्यकाल सात अक्तूबर को पूरा हो रहा है। सात अक्तूबर से एक सप्ताह तक कैंप लगाए जाएंगे। इनमें सरकार की विभिन्न योजनाओं से छूटे पात्र लोगों को योजनाओं से संतृप्त किया जाएगा।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गरीब को राशन, आवास, शौचालय और उज्ज्वला योजना के कनेक्शन का लाभ मिल रहा है। गरीब परिवार को प्रधानमंत्री मुफ्त अन्न योजना के माध्यम से राशन की गारंटी है। बेटियों के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना उपलब्ध है। सरकार का उद्देश्य गरीबी समाप्त कर गरीब व्यक्ति को सामान्य जीवनयापन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।   छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अगले छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले प्रदेश में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत 19 सितंबर से की जा रही है। इनमें 77 हजार भर्तियां यूपी पुलिस और होमगार्ड में होंगी। इससे पहले साढ़े नौ लाख नौजवानों को नौकरी दी जा चुकी है।   उन्होंने कहा कि माध्यमिक, बेसिक और अन्य विद्यालयों में टीजीटी, पीजीटी और बेसिक शिक्षा परिषद के शहरी क्षेत्रों में हजारों शिक्षकों की नियुक्ति के विज्ञापन जारी हो गए हैं और आवेदन मांगे जाने शुरू हो गए हैं।   मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले नौकरी निकलती थी तो ‘सैफई सिंडिकेट’ वसूली के लिए निकल पड़ता था। नौकरियों में सौदेबाजी होती थी, न्यायालय से रोक लगती थी और नौजवानों का जीवन और भविष्य प्रभावित होता था।   करीब 40 करोड़ की 119 परियोजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री योगी ने समारोह में गोरखपुर के विकास से जुड़ी करीब 40 करोड़ रुपये की 119 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम में वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से गोरखपुर में हुए विकास कार्यों को भी दिखाया गया।   मुख्यमंत्री योगी ने नकहा पुल, रेलवे ओवरब्रिज, फोरलेन सड़कों, स्पोर्ट्स कॉलेज और सैनिक स्कूल समेत शहर में उपलब्ध हुई सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बरगदवा से नकहा, स्पोर्ट्स कॉलेज और पादरी बाजार होते हुए मोहद्दीपुर तक फोरलेन की सुविधा मिली है। गोरखनाथ से स्पोर्ट्स कॉलेज, फर्टिलाइजर से झुंगिया गेट और असुरन से मेडिकल कॉलेज होते हुए भटहट तक मार्ग फोरलेन हुए हैं।   उन्होंने रुस्तमपुर, आजाद चौक और ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में बने लंबे फ्लाईओवर का भी जिक्र किया। रामगढ़ताल के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि आज यह देश-दुनिया के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।   गरीब बेटी की शादी से सम्मेलन तक के काम आएगा मंडपम मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कुछ महीने पहले उर्वरक नगर में जिस स्थान पर डेढ़ से दो मीटर का गड्ढा और कूड़ा-गंदगी थी, वहां अब शानदार कल्याण मंडपम बन गया है। इसमें गरीब परिवार की बेटी की शादी, बच्चे का मुंडन संस्कार, प्रवचन, सम्मेलन और गोरखपुर के विकास से जुड़ी बैठकें भी हो सकेंगी।   उन्होंने कहा कि महानगर में ऐसे स्थान चिह्नित किए गए जहां महंगे होटल नहीं हैं और लोग बड़े बारात घरों का खर्च नहीं उठा सकते। इसके बाद तय किया गया कि कुछ कल्याण मंडपम विधायक निधि, कुछ नगर निगम और कुछ गोरखपुर विकास प्राधिकरण बनाएगा।   उन्होंने बताया कि बाबा गंभीरनाथ वार्ड मानबेला, जंगल तुलसीराम बिछिया, जंगल बेनी माधव और बशारतपुर में बने कल्याण मंडपम का उपयोग शुरू हो चुका है। उर्वरक नगर का मंडपम अब जनता को समर्पित कर दिया गया है। दो अन्य मंडपम निर्माणाधीन हैं और विधायक निधि से एक और स्वीकृत किया गया है। इस तरह महानगर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 10 कल्याण मंडपम की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया है।   उर्वरक नगर का कल्याण मंडपम करीब 3.09 करोड़ रुपये की लागत से 2461 वर्गमीटर में बनाया गया है। इसमें बड़ा हॉल, मिनी हॉल, चार कमरे, मांगलिक कार्यक्रमों के लिए मंडप, भोजनालय और पार्किंग की व्यवस्था है।   गोरखपुर में 500 से अधिक उद्योग, 50 हजार को नौकरी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अकेले गोरखपुर में 500 से अधिक उद्योग लगे हैं। इनमें करीब 50 हजार नौजवानों को नौकरी मिली है। पहले यहां के युवाओं को रोजगार के लिए पंजाब, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जाना पड़ता था।   उन्होंने कहा कि अब गीडा में गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, मऊ, संतकबीरनगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर समेत आसपास के जिलों के नौजवानों को नौकरी मिल रही है। दूसरे राज्यों और देशों से भी युवा यहां आकर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।   यूपी अब बीमारू नहीं, ग्रोथ इंजन की निभा रहा भूमिका मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के सामने पहचान का संकट था। अब उत्तर प्रदेश बीमारू नहीं है और भारत की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो, एयर कनेक्टिविटी, नए एयरपोर्ट और नए कल-कारखाने प्रदेश की नई पहचान बन रहे हैं।   जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर न बंटें मुख्यमंत्री योगी ने लोगों से जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बंटने … Read more

शहडोल में सेवा संकल्प अभियान की तैयारी तेज, डिप्टी सीएम शुक्ल ने लिया जायजा

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने शहडोल में सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों की समीक्षा की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने एवं पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश शिविरों में संकलित रक्त का व्यवस्थित संधारण एवं सुरक्षित रख-रखाव किया जाये सुनिश्चित भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शहडोल जिले में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों एवं विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाली सभी गतिविधियों का व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालन सुनिश्चित किया जाए। सभी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। 17 सितम्बर को रक्तदान शिविरों का आयोजन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 17 सितम्बर को आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि शिविरों में संकलित रक्त का व्यवस्थित संधारण एवं सुरक्षित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने रक्तदान शिविरों के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्व से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसेवा संकल्प यात्रा में जनसंवाद एवं आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जनसेवा संकल्प यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान निर्धारित सभी आयोजन व्यवस्थित रूप से संपन्न किए जाएं। यात्रा में शामिल दल एवं स्थानीय जनता के बीच प्रभावी संवाद सुनिश्चित किया जाए। यात्रियों के ठहरने एवं भोजन की समुचित व्यवस्था के साथ निर्धारित रूट एवं कार्यक्रम के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय से पूर्ण करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निबंध एवं रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन प्रतियोगिताओं का व्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित किया जाए। आंगनवाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन का मिलन’ की गतिविधियां हों उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आंगनवाड़ी केन्द्रों में आयोजित होने वाले ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित सभी गतिविधियों का व्यवस्थित रूप से आयोजन किया जाए। आंगनवाड़ी केन्द्रों में कार्यक्रमों की नियमित निगरानी एवं आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। कलेक्टर पार्थ जायसवाल एवं सीईओ जिला पंचायत शिवम प्रजापति ने सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान विधायक जैतपुर जयसिंह मरावी, जिला योजना समिति सदस्य श्रीमती अमिता चपरा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।  

नवा रायपुर में 32वें अखिल भारतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त सम्मेलन का भव्य आगाज

नवा रायपुर में 32वें अखिल भारतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त सम्मेलन का भव्य शुभारंभ राज्यपाल रमेन डेका ने किया ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book–2026’ का विमोचन रायपुर,   छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में 32वें अखिल भारतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त सम्मेलन का आज भव्य शुभारंभ हुआ। लगभग 11 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद छत्तीसगढ़ को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है। सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने दीप प्रज्वलित कर किया।           शुभारंभ समारोह के विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book–2026’ के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया। यह प्रकाशन छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रिया, उपलब्धियों, नवाचारों और चुनावी व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करता है।           उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने स्थानीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों की निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी और तकनीक-सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और इनके निर्वाचन की प्रक्रिया में निरंतर सुधार तथा आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग आवश्यक है।           इस अवसर पर राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने सम्मेलन में देशभर से आए राज्य निर्वाचन आयुक्तों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं निर्वाचन विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों और स्थानीय निकाय निर्वाचन को अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।             छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकास  शील ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने स्थानीय स्वशासन, निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने तथा प्रशासन और निर्वाचन संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों से जुड़े समसामयिक विषयों, डिजिटल पहलों, तकनीकी नवाचारों तथा निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उपायों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है।             समारोह में राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह एवं आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन के प्रथम दिन डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग, निर्वाचन प्रबंधन में नवाचार, पारदर्शिता तथा स्थानीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रियाओं को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर परिचर्चा की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में राज्य निर्वाचन आयुक्तों की स्थायी समिति के अध्यक्ष विजय देव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। स्थायी समिति के संयोजक सुधांशु पांडे ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।            दो दिवसीय यह सम्मेलन देश में स्थानीय लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने, निर्वाचन व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक के समावेश तथा विभिन्न राज्यों के अनुभवों और नवाचारों को साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच के रूप में आयोजित किया जा रहा है। कल  17सितम्बर को छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय नवा रायपुर अटल नगर में स्टैंडिंग कमिटी की बैठक होनी है। इसके बाद, नया रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी केपिटल सिटी, नया रायपुर के निर्माण और विकास के बारे में प्रस्तुतीकरण होगा। तत्पश्चात सभी अतिथियों को नया रायपुर के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जायेगा, जिसमें छत्तीसगढ़ विधानसभा, छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का भ्रमण भी शामिल है।

मक्का के करीब ड्रोन का खतरा, सऊदी के कई शहरों में बढ़ी सुरक्षा

 दुबई  सऊदी अरब और हूतियों के बीच जंग फिर तेज हो गई है. दक्षिणी सऊदी के शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं, मक्का की तरफ भेजे गए ड्रोन को मार गिराने का सऊदी ने दावा किया है. यानबू में तेल लोडिंग रोक दी गई है और यमन में सऊदी गठबंधन के हवाई हमले जारी हैं।   हूतियों ने दक्षिणी सऊदी अरब में नए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ जैसे शहरों में नागरिक और सैन्य इलाकों को निशाना बनाए जाने की खबर है. इन हमलों में 13 नागरिक घायल हुए, घरों को नुकसान पहुंचा और किंग खालिद एयर बेस के पास आग लगने की खबर सामने आई।  इस जंग का असर सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों और अहम समुद्री रास्तों पर भी दिख रहा है. हूतियों ने लाल सागर और बाब अल-मंदब स्ट्रेट के आसपास अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं. इसी बीच सऊदी अरब ने मक्का की तरफ हूतियों की तरफ से भेजे गए ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट करने का दावा किया है. हालिया ड्रोन हमलों के बाद यानबू बंदरगाह पर तेल की लोडिंग भी रोक दी गई है।  सऊदी अरब ने हूती हमलों के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की बात कही है. इसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पश्चिमी और उत्तरी यमन में हूतियों के ठिकानों पर दर्जनों हवाई हमले किए हैं. वहीं अमेरिका ने सऊदी अरब के लिए अपनी ट्रैवल एडवाइजरी को लेवल 3 कर दिया है और नागरिकों से सऊदी की यात्रा पर दोबारा विचार करने को कहा है. ऐसे में सऊदी-हूती जंग से जुड़े हर बड़े अपडेट के लिए जुड़े रहिए।  मक्का-मदीना पर हमलों के दावे को लेकर OIC ने की निंदा ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी OIC के महासचिवालय ने मक्का और मदीना क्षेत्र पर हूतियों के हमलों और सऊदी अरब के खिलाफ जारी हमलों की निंदा की है. OIC ने कहा कि पवित्र स्थलों, मस्जिदों और नागरिक ठिकानों पर हमले इस्लामी मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।  OIC ने सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता जताई है. संगठन ने पवित्र स्थलों, आम लोगों, सुरक्षा और सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों का समर्थन किया है।  Yemen PM ने कहा- बढ़ता हमला अब पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा यमन के प्रधानमंत्री शाया मोहसेन अल-जिंदानी ने हूतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है. अदन में उन्होंने संसद के डिप्टी स्पीकर मोहम्मद अल-शद्दादी से मुलाकात की. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, बैठक में हूतियों की सैन्य बढ़त, नागरिकों और विस्थापित लोगों के खिलाफ कथित उल्लंघन और सरकारी संस्थानों के बीच तालमेल पर चर्चा हुई।  अल-जिंदानी ने कहा कि हूतियों की बढ़त अब सिर्फ यमन का अंदरूनी सैन्य मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है. उन्होंने हूतियों को ईरान से मिलने वाले समर्थन का भी आरोप लगाया. उनके मुताबिक, सऊदी अरब पर हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों को यमन के पश्चिमी तट पर बढ़ी सैन्य गतिविधियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।  हूती हमलों के बीच मिस्र क्यों गए थे सऊदी क्राउन प्रिंस? सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मंगलवार को काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मुलाकात की. यह बैठक ऐसे वक्त हुई है जब हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब के शिपिंग और तेल से जुड़े ठिकानों पर दबाव बढ़ा है. दोनों नेताओं ने लाल सागर और बाब अल-मंदब स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही की आजादी और सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।  मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने सऊदी अरब को समर्थन देने की बात कही है. हालांकि, दोनों पक्षों ने आगे उठाए जाने वाले किसी ठोस कदम की जानकारी नहीं दी. रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र सऊदी अरब को सैन्य मदद देने की संभावना कम है, लेकिन अरब दुनिया में उसका प्रभाव है और वह सऊदी अरब के समर्थन में दूसरे देशों को साथ लाने में मदद कर सकता है।   अल-जौफ में सऊदी समर्थित बलों से सीधी भिड़ंत का दावा यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच जंग और तेज होती दिख रही है. हूती समर्थक मीडिया ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें सऊदी समर्थित बलों के साथ सीधी भिड़ंत का दावा किया गया है. करीब से शूट किए गए इस वीडियो में गोलीबारी और हमले होते दिखाई दे रहे हैं. हूती पक्ष के मुताबिक, यह लड़ाई अल-जौफ के पूर्वी इलाके में हुई।  वीडियो में लड़ाकों की आवाज भी सुनाई दे रही है. इसमें दुश्मन पर हमला करने और ऑपरेशन वाले इलाके के अंदर उसे निशाना बनाने की बात कही जा रही है. हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही जगह और इसमें किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।  अल-जौफ के पूर्व में सऊदी समर्थित बलों से सीधी भिड़ंत का दावा हूती समर्थित मीडिया की ओर से जारी फुटेज में सऊदी समर्थित बलों के साथ सीधी भिड़ंत का दावा किया गया है. बताया गया है कि यह झड़प अल-जौफ के पूर्वी इलाके में हुई। वीडियो में इलाके में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़े को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है. यह फुटेज अंसार अल्लाह की ओर से जारी किया गया है।   

यूपी में शिक्षक भर्ती का बड़ा मौका, 15,000 से अधिक पदों पर जल्द होगी नियुक्ति

प्रयागराज  नौकरी के इंतजार में बैठे अभ्यर्थियों को लिए राहत भरी खबर है। यूपी में जल्द ही शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 15,000 से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने मंगलवार शाम भर्ती से जुड़े दो विज्ञापन जारी किए। इसके साथ ही सहायक अध्यापक और प्रवक्ता (पीजीटी) के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सहायक अध्यापक भर्ती के तहत कुल 12,405 पदों पर ऑनलाइन भर्ती की जाएगी। इसमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (अशासकीय सहायता प्राप्त) के 897 पद और जहां बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 पद शामिल हैं। वहीं, प्रवक्ता संवर्ग भर्ती के तहत प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 2,607 रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी किया गया है। तीन और चार दिसंबर को होगी परीक्षा सहायक अध्यापक भर्ती भी ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन बुधवार से शुरू हो जायेंगे। वहीं शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर रहेगी और आवेदन में संशोधन करने की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर तक रहेगी और परीक्षा तिथि तीन और चार दिसंबर होंगी और पीजीटी की ऑनलाइन पंजीकरण 18 सितंबर से शुरू होगा और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर रहेगी। आवेदन में संशोधन 21 अक्टूबर तक किया जाएगा और परीक्षा तिथि: 15 और 16 दिसंबर रहेगी। अभ्यर्थियों के लिए आरटीआर व्यवस्था लागू आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन (आटीआर) व्यवस्था लागू की गई है। यह प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। विस्तृत विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका के लिए अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा की इस भर्ती में प्रदेश के शिक्षामित्रों को कोई वेटेज या वरीयता का जिक्र नहीं है। जबकि, 25 जुलाई 2017 को उच्चतम न्यायालय के निर्णय में शिक्षामित्रों को समान्य शिक्षक भर्तियों में वरीयता देने के निर्देश हैं। राज्य सरकार को विचार करते हुए 26 सालों से सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को इस भर्ती में वेटेज देना चाहिए।

विजय शाह के खिलाफ अभियोजन को मंजूरी नहीं, MP सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी रिपोर्ट

भोपाल  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम की जानकारी देशवासियों के बीच लाने वाली सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान देने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अब आगे मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। कैबिनेट की अनुशंसा पर एमपी के राज्यपाल की मुहर लग चुकी है। अब इस केस को आगे बढ़ाने की अनुमति न देने की रिपोर्ट प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट भेजी जाएगी। बता दें कि, कैबिनेट की अनुशंसा पर मंगलवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी मुहर लगा दी है। वहीं, गृह विभाग ने अपने स्तर पर मामले का परीक्षण कराकर आदेश प्रारूप मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। एक-दो दिन में यहा से हरी झंडी मिलते ही गृह विभाग अभियोजन की स्वीकृति न देने संबंधी आदेश जारी कर उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेज देगा। क्या है पूरा मामला? आपको बता दें कि, मोहन कैबिनेट में मंत्री विजय शाह ने पिछले साल यानी 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। मंच को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि, उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतारकर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उन्हीं की बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेज दिया।' विजय शाह के इस बयान के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जन ने भी उनकी शब्दावली पर सवाल उठाए थे। जमकर बवाल मचने के बाद हाईकोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया था। कर्नल सोफिया पर टिप्पणी करके विवादों में आए थे विजय शाह भारत ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर चलाकर आतंकवादियों की कमर तोड़ दी और पाकिस्तान के दांत खट्टे कर दिए थे. इसके बाद भारत की तरफ से मीडिया ब्रीफिंग में कर्नल सोफिया कुरैशी ने हिस्सा लिया था. तब विजय शाह ने कथित तौर पर उनको लेकर विवादित टिप्पणी कर दी थी. बाद में विजय ने अपने बयान के लिए माफी भी मांगी थी और उन्होंने कहा था कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया था।  खामोश हो गए विजय शाह इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और राहत की खबरों के बीच जब मीडिया ने भोपाल में मंत्री विजय शाह से सवाल पूछे, तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली. इस दौरान उनके चेहरे पर एक राहत भरी मुस्कान बनी रही. उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि नौ कमेंट्स. वह अब इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।  लगातार 8 बार से विधायक है कुंवर विजय शाह कुंवर विजय शाह मकराई रियासत शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं. बताया जाता है कि उनके परिवार ने कई सदियों तक मकराई पर शासन किया. वह हरसूद विधानसभा से लगातार 8 बार से विधायक हैं और कांग्रेस उनके अभेद किले को जीत नहीं पाई है. उनकी गिनती बीजेपी के बड़े नेताओं में होती है और उनकी अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ है।  कर्नल सोफिया कुरैशी पर कथित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह को बड़ी राहत मिली है. कैबिनेट ने उनके खिलाफ मुकदमा न चलाने का फैसला लिया था, जिसे अब राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने भी मंजूरी दे दी है. इसके बाद राज्य सरकार का गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट भेजेगा कि मंत्री के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए।  कैबिनेट रिपोर्ट के अनुसार, विजय शाह अपने बयान के लिए लिखित और मौखिक रूप से चार बार से अधिक माफी मांग चुके हैं. इसके अलावा, सरकार के पांच सूत्रीय स्पष्टीकरण में कहा गया है कि इस मामले में किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, उन्होंने कर्नल सोफिया का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था और उनका इरादा सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने या उनका अपमान करने का नहीं था।  पिछले साल भारत द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में हिस्सा लिया था. इस दौरान मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने उन पर कथित तौर पर विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह मामला कानूनी विवाद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।  SIT ने सौंपी रिपोर्ट मंत्री विजय शाह की इस टिप्पणी पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी के निर्देश दिए। आगे मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की गई। एसआईटी ने जांच करके सीलबंद रिपोर्ट न्यायालय में पेश की। साथ ही, विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी। लगातार मामला टलने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार को शीघ्र निर्णय करने के निर्देश दिए थे। कैबिनेट की अनुशंसा पर राज्यपाल की मुहर पिछली बार 31 अगस्त को सुनवाई से पहले 25 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में राज्यपाल (सक्षम प्राधिकारी) से मुकदमा न चलाने संबंधी अनुशंसा का फैसला लेकर प्रस्ताव भेजा, जिसे अनुमोदन के साथ उन्होंने लौटा दिया है। सूत्रों की मानें तो गृह विभाग ने विधि एवं विधायी विभाग से आदेश के प्रारूप का परीक्षण कराकर मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा है। यहां से स्वीकृति मिलते ही विभाग सरकार के फैसले के आधार पर आदेश जारी कर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेजेगा।

महाराष्ट्र सड़क हादसे के घायलों से मिले विजय शर्मा, एम्स रायपुर पहुंचकर जाना हाल

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एम्स रायपुर में महाराष्ट्र सड़क हादसे के घायलों से की मुलाकात विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार की जानकारी लेकर बेहतर इलाज के दिए निर्देश रायपुर  महाराष्ट्र के भंडारा जिले में नागपुर-रायपुर राजमार्ग पर हुए सड़क हादसे में घायल कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा क्षेत्र के लोगों से उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने एम्स रायपुर पहुंचकर मुलाकात की। मंगलवार देर शाम रायपुर एम्स पहुंचे शर्मा ने घायलों और उनके परिजनों से आत्मीयता से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी मुलाकात कर घायलों के उपचार की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, चल रहे उपचार और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के संबंध में चर्चा की तथा सभी घायलों को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।        इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने ग्राम बांधाटोला निवासी पांच वर्षीय लुकेश पटेल, दो वर्षीय डाली पटेल और 26 वर्षीय ललिता पटेल से मुलाकात कर उनका हाल जाना। मासूम बच्चों सहित हादसे में घायल लोगों और उनके परिजनों के बीच पहुंचकर शर्मा ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि इस कठिन समय में सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़ा है। उप मुख्यमंत्री शर्मा हादसे के बाद लगातार परिवार जनों से संपर्क बनाए हुए हैं, अस्पताल में भर्ती से लेकर घायलों के उपचार तक निरंतर संपर्क कर पीड़ित परिवारों को सहायता प्रदान कर रहे हैं। दिवंगतों के घर पहुंचकर पहले ही जता चुके हैं संवेदना         उल्लेखनीय है कि हादसे के बाद उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कबीरधाम जिले में दुर्घटना में दिवंगत हुए पीड़ितों के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की थीं और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था। इसी दौरान उन्होंने हादसे में घायल लोगों के परिजनों से भी मुलाकात कर उनके उपचार की जानकारी ली थी।

EPFO से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा, PF सैलरी लिमिट ₹25 हजार होने की संभावना

नई दिल्ली  देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर आ रही है. आज केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक होने वाली है, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है. सरकार पीएफ और पेंशन के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है।  यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती है, तो यह करीब 12 साल बाद पीएफ नियमों में होने वाला सबसे बड़ा सुधार होगा. इससे पहले आखिरी बार 1 सितंबर 2014 को इस सीमा को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था. इस नए फैसले से देश के संगठित क्षेत्र के करीब 1 करोड़ अतिरिक्त कर्मचारी सीधे तौर पर पीएफ और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे।  किस पर और कैसे लागू होगा यह नया नियम? वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹15,000 तक है, उनके लिए पीएफ खाता खोलना और उसमें योगदान देना अनिवार्य है. नई सीमा लागू होने के बाद, ₹25,000 तक की मासिक आय वाले सभी नए कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन फंड में योगदान करना जरूरी हो जाएगा।  हालांकि, ₹25,000 से अधिक बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि उनके लिए इस योजना में शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा. वे अपनी इच्छा के अनुसार ही इसमें योगदान देने का फैसला कर सकते हैं।  इन-हैंड सैलरी और कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर? इस फैसले का सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम (In-Hand) सैलरी पर पड़ेगा. जो कर्मचारी ₹15,000 से ₹25,000 के वेतन ब्रैकेट में आते हैं और अब तक पीएफ का हिस्सा नहीं थे, उनके वेतन से हर महीने पीएफ का 12% हिस्सा कटेगा. इस वजह से हर महीने उनके हाथ में आने वाली नगद सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी, लेकिन दूसरी तरफ उनकी भविष्य की बचत और रिटायरमेंट फंड में तेजी से बढ़ोतरी होगी।  वहीं, उद्योगों और कंपनियों को वित्तीय बोझ से बचाने के लिए सरकार ने एक बीच का रास्ता निकाला है. प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को अपना पीएफ योगदान कैलकुलेट करने के लिए पुरानी ₹15,000 की लिमिट का इस्तेमाल जारी रखने की छूट मिल सकती है. इससे कंपनियों पर अचानक कोई बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है।