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पेराई सत्र 2026-27 शुरू, यूपी की 9 चीनी मिलों में गन्ना पेराई शुरू

पेराई सत्र 2026-27 का विधिवत शुभारंभ, प्रदेश की 09 चीनी मिलों ने शुरू किया गन्ना पेराई कार्य प्रदेश में गन्ना खरीद एवं आपूर्ति के लिए 33 चीनी मिलों ने जारी किया गन्ना इंडेंट प्रदेश की 09 चीनी मिलों ने शुरू किया गन्ना पेराई कार्य चीनी मिलों के संचालन से किसानों को गेहूं की समय से बोआई हेतु खेत होगा खाली लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्तमान पेराई सत्र 2026-27 का कार्य प्रारम्भ हो चुका है। प्रदेश की 33 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद हेतु इंडेंट जारी कर दिया है। गन्ना विकास विभाग ने बताया कि प्रदेश की 09 चीनी मिलों में पेराई कार्य प्रारम्भ हो चुका है, इनमें सहकारी क्षेत्र की 01, निजी क्षेत्र की 08 चीनी मिलें शामिल हैं। प्रदेश की संचालित चीनी मिलों में सहारनपुर परिक्षेत्र की 03 चीनी मिलें, मेरठ परिक्षेत्र की 01, मुरादाबाद परिक्षेत्र की 02, लखनऊ परिक्षेत्र की 03 चीनी मिलों ने पेराई कार्य प्रारम्भ कर दिया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश की अन्य चीनी मिलों द्वारा अपना पेराई कार्य शुरू करने की समस्त औपचारिकतायें पूर्ण कर ली गई हैं और 24 चीनी मिलों द्वारा गन्ना खरीद हेतु इण्डेंट जारी कर दिया गया है, जिनका दीपावली से पूर्व शुरू होना प्रस्तावित है। अन्य चीनी मिलें अपना पेराई सत्र दीपावली त्योहार के पश्चात शुरू करेगीं।     विभाग ने सभी चीनी मिलों को निर्देशित किया गया है कि तत्काल अपने-अपने आवंटित क्रय केन्द्रों पर आवश्यक व्यवस्थायें पूर्ण कराते हुए समय से संचालन सुनिश्चित करे।

रायपुर में राशन दुकानों से शक्कर का वितरण जारी, सप्लाई बंद होने की खबर भ्रामक

रायपुर जिले में उचित मूल्य दुकानों से शक्कर की आपूर्ति एवं वितरण जारी आपूर्ति बंद होने की खबर पूरी तरह भ्रामक रायपुर,  रायपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में शक्कर की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रूप से संचालित हो रही है। जिला प्रशासन और खाद्य विभाग द्वारा जिले में शक्कर की आपूर्ति व वितरण प्रक्रिया पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है, ताकि पात्र हितग्राहियों को तय व्यवस्था के अनुरूप समय पर राशन सामग्री प्राप्त हो सके और किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।       खाद्य विभाग के जिला कार्यालय स्थित खाद्य शाखा द्वारा जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों में शक्कर के स्टॉक, उपलब्धता और वितरण की स्थिति की सतत समीक्षा की जा रही है। इस बीच, कुछ माध्यमों में जिले में शक्कर की आपूर्ति पूरी तरह बंद होने संबंधी भ्रामक खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जो कि तथ्यहीन हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिले में शक्कर की उपलब्धता और वितरण का कार्य पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है। हितग्राहियों से अपील है कि वे ऐसी अप्रमाणित और भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान से हितग्राही शक्कर के साथ ही महिने का राशन भी प्राप्त कर सकते हैं।

बिलासपुर में चीनी की कालाबाजारी पर लगाम की तैयारी, केंद्र सरकार ने सख्त किए स्टॉक नियम

बिलासपुर. बिलासपुर में बीते दिनों कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए, जिनमें केंद्र सरकार द्वारा चीनी की जमाखोरी पर सख्ती से लेकर स्थानीय अपराधों पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई तक शामिल है।केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने व्यापारियों के लिए चीनी स्टॉक की सीमा निर्धारित करते हुए जमाखोरी रोकने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिसका सीधा प्रभाव बिलासपुर के बाजारों पर पड़ेगा। वहीं, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने के लिए आठ नए विधि अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो महत्वपूर्ण मामलों में राज्य की पैरवी करेंगे। इन सबके बीच, शहर में नकली नोटों को बाजार में खपाने की कोशिशों पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है, जबकि नाबालिग से दुष्कर्म और दुर्गा पंडाल के पास हुए विवाद के बाद मारपीट के मामलों में त्वरित गिरफ्तारियां कर पुलिस ने अपनी सक्रियता का प्रदर्शन किया है। ये घटनाक्रम बिलासपुर में कानून व्यवस्था और आर्थिक अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रशासन के बहुआयामी प्रयासों को दर्शाते हैं। आर्थिक मोर्चे पर केंद्र की सख्ती और कानूनी तैयारी केंद्र सरकार ने देश भर में चीनी की कीमतों को स्थिर रखने और उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जमाखोरी पर शिकंजा कसा है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब कोई भी व्यापारी एक समय में 1000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख पाएगा। यह कदम विशेष रूप से त्योहारों के मौसम से पहले उठाया गया है, जब चीनी की मांग बढ़ जाती है। बिलासपुर के थोक और खुदरा व्यापारियों को भी इन नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा, जिस पर प्रशासन की निगरानी रहेगी। इस पहल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीनी उपलब्ध कराना और बाजार में कालाबाजारी को रोकना है। पोर्टल पर देना होगा स्टॉक का विवरण विभाग ने जिले के सभी चीनी डीलरों, व्यापारियों और थोक विक्रेताओं को फूड स्टॉक मॉनिटरिंग पोर्टल पर अपने स्टॉक का विवरण नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए व्यापारियों को https://foodstock.dfpd.gov.in/ पर निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार जानकारी दर्ज करनी होगी। जिन व्यापारियों ने अभी तक पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करवाया है, उन्हें जल्द पंजीकरण करवाने को कहा गया है। पंजीकरण के बाद स्टॉक से संबंधित जानकारी नियमित रूप से अपडेट करना भी अनिवार्य होगा।  औचक निरीक्षण करेंगे विभागीय अधिकारी जिला नियंत्रक शीतल शर्मा ने बताया कि पोर्टल पर स्टॉक का नियमित विवरण उपलब्ध रहने से बाजार में चीनी की उपलब्धता पर नजर रखने और निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण की निगरानी करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा विभाग के निरीक्षक वर्ग को औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान यह जांच की जाएगी कि व्यापारी निर्धारित स्टॉक सीमा और अन्य दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं। विभाग ने सभी व्यापारियों से नियमों का पालन करने और स्टॉक की जानकारी समय पर अपडेट करने की अपील की है। 

चीनी के दाम में 10% तक गिरावट, त्योहार से पहले सरकार ने स्टॉक लिमिट भी बढ़ाई

इंदौर   अब त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है. दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ सामने है. ऐसे में चीनी की बढ़ी कीमत ने मन खट्टा कर रखा है. चीनी की कीमत सांतवें आसमान पर है. आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ गया है. ऐसे में सरकार लगातार चीनी की मिठास लौटाने के लिए कदम उठा रही है. जी हां, त्योहारी सीजन से पहले चीनी को लेकर राहत की खबर है. पिछले तीन हफ्तों में चीनी के खुदरा दाम करीब 10% घटकर 65 रुपये से 58.5 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने भी बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है. इससे त्योहारों के दौरान चीनी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।  टीओआई की खबर के मुताबिक, त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने शुक्रवार को थोक चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा में ढील दी. अब वे मौजूदा 15 दिनों के बजाय 30 दिनों तक चीनी का स्टॉक रख सकते हैं. इसकी वजह है कि पिछले तीन हफ्तों में खुदरा कीमतों में लगभग 10% की कमी आई है।  क्यों अहम है यह कदम सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब चीनी की खुदरा कीमत लगभग 65 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 58.5 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई . हालांकि, त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने की उम्मीद है. कारण कि दुर्गा पूजा से लेकर दिवाली और छठ में मिठाई और पकवानों खूब बनते हैं. इसमें चीनी का यूज होता है. ऐसे में यह तय है कि चीनी की डिमांड बढ़ेगी।  अब आपको भी कम कीमत में मिलेगी चीनी हालांकि, खाद्य विभाग ने इंडस्ट्री को बताया है कि खुदरा कीमतों में गिरावट चीनी की मिल से निकलने के बाद वाली कीमतों में हुई बड़ी कमी के मुकाबले कम है. विभाग के मुताबिक, मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत करीब 25% घट चुकी है, लेकिन सप्लाई चेन के जरिए इसका पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है. विभाग ने थोक विक्रेताओं, खुदरा दुकानदारों और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों से तुरंत कीमतों में हुई कमी का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने को कहा है।  एक शर्त के साथ मिली छूट थोक उपभोक्ताओं में बड़ी कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियां, बिस्किट निर्माता, सॉफ्ट ड्रिंक और बेवरेज कंपनियां, मिठाई विक्रेता और हलवाई शामिल हैं. अभी कच्चे माल के तौर पर हर महीने 10 टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक रखने की अनुमति है. विभाग ने कहा कि अब इस सीमा को बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया है, लेकिन एक शर्त के साथ. पुरानी 15 दिनों की सीमा से अधिक जो भी स्टॉक रखा जाएगा, उसे टैरिफ रेट कोटा या एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत आयात की गई चीनी से ही लेना होगा।  सरकार ने क्या आदेश दिया केंद्र सरकार ने टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दी है. इसके अलावा एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत खरीदी गई निर्यात के लिए तय चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की भी अनुमति दी गई है. वहीं, घरेलू खुले बाजार से खरीदी गई चीनी का स्टॉक अभी भी 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगा. सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे हर शुक्रवार को खाद्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने चीनी स्टॉक की जानकारी दें। 

गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत, 102 चीनी मिलों ने किया 100% भुगतान

गन्ना किसानों को 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत भुगतान पेराई सत्र (2025-26)  23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का किया भुगतान, निजी चीनी मिलों ने भी किया शत-प्रतिशत भुगतान  योगी सरकार ने गन्ना किसानों को किया 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान  निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना है उत्तर प्रदेश  पेराई सत्र (2025-26) में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का किया जा चुका भुगतान  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर मॉनीटरिंग की बदौलत पेराई सत्र 2025-26 में 102 चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया। वहीं 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का भुगतान किया। प्रदेश में संचालित राज्य चीनी निगम की तीन मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 में 543.51 करोड़ का भुगतान किया है। निजी चीनी मिलों की ओर से भी किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना हुआ है। योगी सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया। उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। पेराई सत्र 2025-26 में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है। गन्ना, शीरा और एथेनॉल उत्पादन में शीर्ष पर बना है यूपी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने किसान कल्याण, चीनी उत्पादन और एथेनॉल में नए आयाम स्थापित किए हैं। योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। सरकार ने न केवल गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता माना, बल्कि ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब तक रिकॉर्ड ₹3.25 लाख करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित भी किया।  94.86 प्रतिशत से अधिक का भुगतान सुनिश्चित वर्तमान पेराई सत्र में भी 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि प्रदेश की 102 चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य का शत- प्रतिशत भुगतान कर दिया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के गन्ना किसानों की औसत आय में ₹40,720 प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 9 वर्ष में चीनी मिलों ने की 9220 लाख टन गन्ने की पेराई गन्ना विकास विभाग ने बताया कि विगत नौ वर्ष में प्रदेश की चीनी मिलों ने रिकॉर्ड 9,220 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है। जो इससे पहले के 9 वर्ष की कुल गन्ना पेराई 6168 लाख टन से 3052 लाख टन अधिक है। 9 वर्ष में 879.06 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।  सहकारी चीनी मिलों ने किया 100 प्रतिशत भुगतान  उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2025-26 में सहकारी चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य के रूप में 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। अनूपशहर, बदायूं, बागपत, बेलरायां, बिलासपुर, बीसलपुर, गजरौला, घोसी, कायमगंज, महमूदाबाद, मोरना, नानपारा, नानौता, पूरनपुर, पुवायां, रमाला, सहारनपुर, सरसावां, सठियांव, सेमीखेड़ा, स्नेह रोड, सुल्तानपुर, तिलहर समेत कुल कुल 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820.89 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। 23 सहकारी चीनी मिलों की पेराई क्षमता 65375 टीसीडी है।  निजी चीनी मिलों द्वारा किया गया भुगतान  पेराई सत्र 2025-26 में निजी चीनों मिलों ने किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। लखनऊ संभाग की मिलों ने सर्वाधिक 6462.19 करोड़ का भुगतान किया। वहीं मुरादाबाद संभाग की मिलों द्वारा 6398.36 करोड़, सहारनपुर संभाग की चीनी मिलों ने 4799.25 करोड़ का भुगतान किया।    संभाग   भुगतान प्रतिशत          भुगतान  अयोध्या   100 फीसदी             1212.35 करोड़  बरेली    89.25 फीसदी             2315.74 करोड़  देवरिया 97.86 फीसदी              1016.95 करोड़  देवीपाटन   91.63 फीसदी           2249.01 करोड़  गोरखपुर    93.46 फीसदी            749.97 करोड़  लखनऊ    91.34 फीसदी             6462.19 करोड़  मेरठ     94.09 फीसदी              4227.24 करोड़  मुरादाबाद   98.96 फीसदी          6398.36 करोड़  सहारनपुर   94.64 फीसदी       4799.25 करोड़

त्योहारी सीजन में महंगाई का झटका, चीनी और सरसों तेल के दाम कब होंगे कम?

नईदिल्ली  चीनी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में गिरावट जरूर देखने को मिली है। लेकिन अब भी दाम 60 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर बना हुआ है। वहीं, सरसों का तेल अब भी 200 रुपये के पार ही बिक रहा है। चीनी और तेल ने मिलकर त्योहारों के इस सीजन को थोड़ा फीका बना दिया है। अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि कब तक दाम में गिरावट देखने को मिलेगी? चीनी के दाम में गिरावट (Chini Ka rate) बीते हफ्ते चीनी का रेट 65.08 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि अब घटकर 62.57 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। यानी रिटेल मार्केट में कीमतों में 3.85 प्रति किलोग्राम की गिरावट देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चीनी का रेट कल शुक्रवार को 59 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि पिछले साल की तुलना में 14 रुपये अधिक है। बीते इस साल 4 सितंबर को 1 किलो चीनी के लिए लोगों को 45 रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। ड्यूटी फ्री चीनी इम्पोर्ट की मिली परमिशन सरकार ने विदेशों से चीनी आयात करने के लिए खरीदारों को बड़ी छूट देते हुए इसे ड्यूटी फ्री कर दिया है। हालांकि, इसकी सीमा एक मिलियन टन की है। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इससे होलसेल के साथ-साथ रिटेल के दाम भी घटेंगे। इसके अलावा कालाबाजारी रोकने के लिए भी सरकार काफी सख्ती दिखा रही है। सरसों के तेल का दोहरा शतक (Mustard Oil Price today) पिछले एक महीने से सरसों के तेल का दाम भी सातवें आसमान पर है। कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले साल इसका दाम 187 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि इस समय 201 रुपये के आस-पास बना हुआ है। बीते एक महीने से सरसों के तेल की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिला। कब गिरेगा चीनी और तेल का दाम चीनी की कीमतों में फिलहाल कोई खास गिरावट की उम्मीद कम ही है। इस इंडस्ट्री पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट के अनुसार चीनी का रेट नई फसल के आने के बाद यानी अक्टूबर के बाद ही गिरने की संभावना है। वहीं, सरसों की कीमतों में आने वाले कुछ हफ्तों में आपको कटौती देखने को मिल सकती है। राजस्थान की फसल मार्केट में एंट्री करते ही दाम नीचे आ सकता है।

चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक्स-मिल रेट 20% टूटे; त्योहारों तक मिल सकती है और राहत

इंदौर  चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। आने वाले त्योहारों गणेश चतुर्दशी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ तक चीनी के दाम और गिरने की उम्मीद बढ़ गई है। डिपॉर्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने एक्स पर पोस्ट करके चीनी के सस्ता होने की जानकारी दी है। X पर की गई पोस्ट के मुताबिक देश के खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 5% तक कम हो गए हैं। इससे पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की बड़ी गिरावट आई है। अगर चीनीमंडी के आंकड़ों की बात करें तो गुरुवार शाम को अपडेट किए गए रेट के मुताबिक चीनी के दाम 61 रुपये किलो तक आ गए हैं। दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, रांची में 3 सितंबर को चीनी 61 रुपये में बिकी। गुवाहटी, कानपुर और रायपुर में 62 रुपये किलो थी और चेन्नई में 63 रुपये। कब तक एक्स-चीनी मिल रेट का दिखेगा असर सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार में दिखाई देने लगा है और आने वाले दिनों में चीनी के दाम और नरम पड़ सकते हैं। सरकार के मुताबिक एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में इसका प्रभाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है। यानी चीनी की कीमतों में अभी जो राहत मिली है, उसे शुरुआत माना जा सकता है। अगर मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो थोक बाजार के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी और सस्ती होने की संभावना है। अगस्त में तेजी के बाद सरकार ने बढ़ाई निगरानी दरअसल, अगस्त में चीनी की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद सरकार ने चीनी बाजार की निगरानी बढ़ा दी। चीनी के स्टॉक, बिक्री और बाजार भाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके। सरकार का जोर इस बात पर है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और सप्लाई में किसी तरह की परेशानी न हो। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा है कि सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक व्यापार और वितरण से जुड़ी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यानी निगरानी और कार्रवाई का मकसद सामान्य कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में कृत्रिम कमी और अनावश्यक कीमत बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है। फिलहाल सरकार के ताजा आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत दे रहे हैं। अगस्त में तेजी के बाद अब चीनी की कीमतों का रुख नीचे की ओर है, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम लोगों को मिलना शुरू हो गया है।

चीनी की कीमतों में आई नरमी, एक हफ्ते में करीब 4% सस्ती हुई; दाम अब भी 27% ज्यादा

नई दिल्ली देशभर में चीनी की कीमतों में अब नरमी दिखने लगी है. एक हफ्ते में चीनी का औसत रिटेल भाव 3.85% घटकर ₹62.57 प्रति किलो पर आ गया है. एक हफ्ते पहले यह कीमत ₹65.08 प्रति किलो थी. हालांकि, गिरावट के बावजूद चीनी अब भी महंगी है और इसका रिटेल भाव पिछले महीने के ₹49.33 प्रति किलो के स्तर से करीब 27% ऊपर बना हुआ है।  कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल के दिनों में कई कदम उठाए हैं. इनमें 10 लाख टन चीनी के इंपोर्ट की अनुमति देना भी शामिल है. इसके अलावा बल्क यूजर्स और डीलरों के लिए स्टॉक रखने से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है. माना जा रहा है कि इन उपायों का असर अब थोक बाजार में दिखाई देने लगा है।  थोक बाजार में भी घटी कीमत उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2 सितंबर को चीनी का औसत थोक भाव ₹57.62 प्रति किलो रहा. एक हफ्ते पहले यह ₹60.39 प्रति किलो था. यानी इस दौरान थोक कीमत में भी करीब ₹2.77 प्रति किलो की कमी आई है. हालांकि, थोक बाजार में कीमत घटने के बावजूद इसका पूरा फायदा रिटेल ग्राहकों को तुरंत नहीं मिल रहा है. इसकी वजह दुकानदारों के पास मौजूद पुराना स्टॉक है. कई रिटेलर्स ने चीनी पहले ही ऊंची कीमत पर खरीदी हुई है. ऐसे में वे उसे तुरंत कम भाव पर बेचकर नुकसान उठाना नहीं चाहते।  दुकानों तक सस्ता स्टॉक पहुंचने में लगेगा समय उद्योग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, रिटेल कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं. आम तौर पर एक दुकानदार के पास चीनी की 10-15 बोरियां स्टॉक में रहती हैं और हर बोरी का वजन करीब 50 किलो होता है. ऐसे में पुराने महंगे स्टॉक के खत्म होने और नए सस्ते स्टॉक की सप्लाई आने के बाद ही रिटेल कीमतों में बड़ी गिरावट दिख सकती है।  उत्पादन घटा फिर भी पर्याप्त स्टॉक की उम्मीद चीनी की कीमतों को लेकर सरकार और चीनी मिलों के बीच भी खींचतान देखने को मिली है. केंद्र ने मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है. सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. वहीं, 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है. इसके बावजूद सरकार के सालाना घरेलू खपत के अनुमान के मुकाबले उपलब्धता को लेकर फिलहाल बड़ा संकट नहीं माना जा रहा है. देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।  अगले 10 दिन अहम सरकार की कोशिश एक साथ सप्लाई बढ़ाने और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर नजर रखने की है. हालिया आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इन कदमों के बाद थोक और रिटेल, दोनों बाजारों में कीमतों में कुछ नरमी आई है. हालांकि, रिटेल ग्राहकों को इसका पूरा फायदा मिलने में थोड़ा समय लग सकता है. अगर आप घर के लिए चीनी खरीदते हैं, तो आने वाले दिनों में राहत और बढ़ सकती है. नया और सस्ता स्टॉक दुकानों तक पहुंचने के बाद रिटेल कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है. फिलहाल चीनी के दाम एक हफ्ते में जरूर घटे हैं, लेकिन वे अभी भी पिछले महीने के मुकाबले काफी ऊंचे हैं. आने वाले दिनों में नए स्टॉक की सप्लाई और बाजार में मांग के आधार पर कीमतों की अगली दिशा तय होगी। 

त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई चीनी, एथेनॉल डिमांड ने बढ़ाईं कीमतें; ₹4,700 प्रति क्विंटल तक पहुंचे रेट

ग्वालियर त्योहारी सीजन की दस्तक से पहले ही आम आदमी की रसोई का स्वाद कड़वा होने लगा है। शकर के दाम में ऐतिहासिक तेजी हुई है। थोक में शकर 4,650 से 4,700 रुपए प्रति क्विंटल तो फुटकर बाजार में कीमत 48 से 49 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। शकर खांडसारी एसोसिएशन ग्वालियर के मनीष बांदिल की मानें तो जुलाई की शुरुआत के साथ ही भाव अप्रत्याशित उछले हैं। राष्ट्रीय व्यापारिक कल्याण बोर्ड के सदस्य रमेश खंडेलवाल ने बताया, गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि व एथेनॉल उत्पादन पर सरकार का बढ़ता जोर इसका कारण है। इससे मिलों का फोकस शकर उत्पादन से हटकर एथेनॉल पर हो गया। इन तीन कारणों से महंगी हुई मिठास  एथेनॉल उत्पादन पर बढ़ता जोर: सरकार पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसमें बड़े पैमाने पर गन्ने का उपयोग हो रहा है। चीनी (Sugar Price Ethanol Production) मिलों में कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हुई। गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि: अधिकांश राज्यों में गन्ने का समर्थन मूल्य बढऩे से उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर शकर की कीमतों पर दिख रहा है। 12 साल में सबसे कम जून की बारिश: इस वर्ष जून में 12 साल की तुलना में सबसे कम वर्षा हुई। देश में सामान्य से 38त्न कम वर्षा व जुलाई में भी कमजोर मानसून की आशंका से शकर उत्पादन 80 लाख टन तक कम हो सकता है। कैसे बनाया जाता है एथेनॉल? भारत में किससे तैयार हो रहा? एथेनॉल बनाने वाली सामग्री को फीड स्टॉक (Sugar Price Hit Record 2026) कहा जाता है। कई तरह के एथेनॉल उत्पादन संयंत्र अलग-अलग फीडस्टॉक का उपयोग करते हैं। इसके लिए मक्का, गेहूं या अन्य प्रकार के कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया एक ही जैसी होती है। जबकि भारत में गन्ने का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों में शुरू होती है। पकने के बाद गन्नों की कटाई की जाती है। इसके बाक प्रसंस्करण के लिए चीनी मिलों और डिस्टिलरी में ले जाया जाता है। जानें गन्ने से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया से पेट्रोल पंप तक का सफर     चीनी मिल में गन्नों को पेराई मशीनों में डाला जाता है। यह गन्ने का रस निचोड़ लेती हैं। यह रस चीनी और एथेनॉल के उत्पादन के लिए आधार सामग्री तैयार होती है।     गन्ने के रस को संशोधित कर चीनी बनाई जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान गुड़, नामक एक गाढ़ा गहरे रंग का सिरप उप उत्पाद के रूप में मिलता है। गुड़ परम्परागत रूप से भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से माना जाता है।     मॉडर्न एथेनॉल संयंत्र गुड़ और गन्ने के रस दोनों से एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। इन कच्चे माल को आसवन संयंत्रो तक पहुंचाया जाता है जहां इनले जैव ईंधन एथेनॉल शुरू किया जाता है।     कच्चे माल के मिश्रण में सबसे पहले खमीर उठाया जाता है। फिर सूक्ष्मजीव शर्करा का सेवन करते हैं और प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया द्वारा उन्हें अल्कोहल में बदला जाता है। उत्पादन की विधियों (Sugar Price break record 2026) के आधार पर यह चरण चंद घंटों से लेकर कुछ दिन तक का हो सकता है।     किण्वित द्रव में अल्कोहल, पानी और अन्य यौगिक होते हैं। अब आसवन विधि से अल्कोहल को अलग कर लिया जाता है और फिर सांद्रित किया जाता है। इस विधि से उच्च शुद्धता वाला एथेनॉल तैयार होता है।     संयंत्र से निकाले जाने से पूर्व एथेनल की गुणवत्ती की कड़ी जांच होती है। इसके बाद उत्पादक शुद्धता स्तर, रासायनिक संरचना और ईंधन के मानकों के अनुपालन की जांच कर सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद सरकारी विनिर्देशों के पूरा करता है या नहीं।      मंजूरी के बाद एथेनॉल को टैंकरों के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों के डिपो तक पहुंचाया जाता है। ये सुविधाएं ईंधन के उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले मिश्रण प्रक्रिया संभालती हैं।     अंतिम चरण में अनुमोदित मिश्रण अनुपात के मुताबिक एथनॉल (Sugar Price Hike making fuel) को पेट्रोल में मिलाया जाता है। फिर इस मिश्रित ईंधन को देशभर के पेट्रोल पंपों पर वितरित कर दिया जाता है।  

कम बारिश और बढ़ती इथेनॉल मांग से संकट में चीनी उद्योग, निर्यात पर लंबा असर संभव

 नई दिल्ली भारत दुनिया के चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन आने वाले सालों में तस्वीर बदल सकती है. मौसम विशेषज्ञों ने इस साल अल-नीनो के असर से कम बारिश की आशंका जताई है. सरकार के इथेनॉल पर बढ़ते फोकस की वजह से गन्ने का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. ऐसे में जानकारों का कहना है कि कम से कम तीन साल तक भारत के पास इतनी ज्यादा चीनी नहीं बच सकती कि वह बड़े पैमाने पर देशों को बेच सके।  भारत में गन्ने की खेती काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करती है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रह सकती है. जून महीने में भी कई जगहों पर सामान्य से कम बारिश हुई है. इसी वजह से कुछ किसान गन्ने की जगह सोयाबीन, अरहर और दूसरी कम पानी वाली फसलें लगाने का फैसला कर रहें हैं. अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले सीजन में गन्ने की खेती और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है।  चीनी की जरूरत ज्यादा, उत्पादन कम उद्योग के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रह सकता है. वहीं देश में हर साल करीब 2.85 करोड़ टन चीनी की खपत होती है. यानी देश में जितनी चीनी बन रही है, उससे ज्यादा चीनी की जरूरत है. इसी वजह से मिलों में चीनी का स्टॉक घटकर करीब 35 लाख टन रह सकता है, जो कई दशक में सबसे कम लेवल में से एक होगा।  इथेनॉल की बढ़ती मांग भी बड़ी वजह सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके. इसके लिए गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ रहा है. फिलहाल देश में इथेनॉल की मांग करीब 12 से 13 अरब लीटर है. आने वाले सालों में यह बढ़कर 30 अरब लीटर तक पहुंच सकती है. ऐसे में गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो सकता है।  सरकार की नजर घरेलू सप्लाई पर  भारत पहले दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी का एक्सपोर्टर था. 2022-23 तक पांच सालों में देश हर साल आमतौर पर 68 लाख टन चीनी विदेशों में बेचता था, जो वैश्विक चीनी करोबार का करीब 10% हिस्सा था. अब हालात बदल चुके हैं. सरकार की प्राथमिकता देश के भीतर चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है. आने वाले सीजन में भी चीनी निर्यात को लेकर सख्त रुख देखने को मिल सकता है।  क्या भारत को भी चीनी खरीदनी पड़ सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल-नीनो का असर ज्यादा रहा और गन्ने की खेती में बड़ी गिरावट आई, तो आने वाले वर्षों में भारत को विदेशों से चीनी खरीदने की जरूरत भी पड़ सकती है. भारत ने आखिरी बार 2016-17 और 2017-18 में चीनी आयात की थी. उस समय सूखे और कम उत्पादन की वजह से ऐसी स्थिति बनी थी।  इससे पहले 2009 और 2010 में भारत की बड़ी खरीदारी ने दुनिया भर में चीनी की कीमतों को काफी ऊपर पहुंचा दिया था. कम बारिश की आशंका, गन्ने की खेती पर बढ़ता दबाव और इथेनॉल की बढ़ती मांग भारत के चीनी सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।  अगर मौसम के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले कुछ सालों तक देश के पास विदेशों में बेचने के लिए अतिरिक्त चीनी कम बच सकती है. इतना ही नहीं, हालात ज्यादा बिगड़े तो भारत को भविष्य में चीनी आयात करने पर भी विचार करना पड़ सकता है।