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इंदौर की छात्राओं को बनाया जा रहा धर्मांतरण का टारगेट, ब्राह्मण युवती का शोषण और धर्मांतरण की कोशिश

इंदौर   इंदौर, जिसे मिनी मुंबई के नाम से जाना जाता है. इसी शहर में एक ब्राह्मण युवती के साथ धर्मांतरण और दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है. पीड़िता ने सुल्तान रोशन नागोरी पर संगीन आरोप लगाए हैं, जिसमें शारीरिक शोषण, धर्म परिवर्तन का दबाव, और अश्लील फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग शामिल है. लसुड़िया पुलिस ने शिकायत के आधार पर सुल्तान के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और दुष्कर्म सहित कई धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है.पीड़िता ने कहा कि सुल्तान ने उसके ऊपर जादू-टोना भी करवाया ताकि वह उसके प्रभाव में आ जाए. युवती ने आरोप लगाया कि इंदौर में मुस्लिम युवक खासकर कोचिंग में पढ़ने वाली हिंदू लड़कियों को टारगेट करते हैं. उसने बताया कि लगभग 10 हजार हिंदू लड़कियां मुस्लिम लड़कों के निशाने पर हैं. कॉल सेंटर और टेलीपरफॉर्मेंस के कार्यस्थलों पर भी धर्मांतरण के लिए स्लीपर सेल सक्रिय हैं. युवती ने कहा कि हिंदू लड़कियों को मुसलमान लड़कों की टीम में रखा जाता है, जहां उन्हें बताया जाता है कि “अल्लाह ने तुम्हें हमारे लिए बनाया है.” इसके बाद उन्हें खाने में नशा देकर शारीरिक शोषण किया जाता है. नशा देकर शारीरिक शोषण पीड़िता ने बताया कि सुल्तान ने 2018 से उसके साथ शारीरिक शोषण शुरू कर दिया था. उसने धमकी दी कि अगर उसने धर्म परिवर्तन नहीं किया तो उसके अश्लील फोटो और वीडियो वायरल कर देगा. होटल में शारीरिक संबंध के दौरान सुल्तान ने कई फोटो और वीडियो बनाए, जिससे दबाव बनाकर वह युवती को मुसलमान बनने के लिए मजबूर करता रहा. इस कारण पीड़िता 2019 में पंजाब चली गई और वहां नौकरी करने लगी.हालांकि, 2020 में सुल्तान की शादी के बाद, मार्च 2025 में युवती इंदौर लौटी और टेली परफॉर्मेंस में नौकरी शुरू की, लेकिन 6 जून 2025 को सुल्तान ने फिर से उससे संपर्क किया और पुराने फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर शारीरिक संबंध बनाए पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए लसुड़िया थाने में शिकायत दर्ज की. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुल्तान को हिरासत में लिया. इस मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है, और जांच में स्लीपर सेल्स और धर्मांतरण के कथित नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.

पाकिस्तान से आए हिंदुओं को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, यूपी में विस्थापित हिंदुओं को राहत

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित होकर यूपी के विभिन्न जिलों में बसे परिवारों को बड़ी राहत दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लोगों को वैधानिक रूप से भूमि स्वामित्व का अधिकार दिया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल जमीन के कागज देने की बात नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की पीड़ा और संघर्ष को स्वीकार कर उन्हें सम्मान लौटाने का समय है, जिन्होंने सीमाओं के उस पार से विस्थापित होकर भारत में शरण ली और पिछले कई दशकों से पुनर्वास की उम्मीद में दिन गिना है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मुद्दे को संवेदनशीलता से देखा जाए और प्रभावित परिवारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए. कब और कैसे बसे ये परिवार विभाजन के बाद, खासकर 1960 से 1975 के बीच पूर्वी पाकिस्तान से हजारों हिंदू परिवार जबरन विस्थापित होकर भारत आए. इनमें से बड़ी संख्या को यूपी के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर और रामपुर जनपदों में बसाया गया. प्रारंभिक दौर में इन्हें ट्रांजिट कैंपों के जरिए अस्थायी ठिकानों पर रखा गया और फिर विभिन्न गांवों में जमीन आवंटित की गई. लेकिन वर्षों बाद भी इनमें से अधिकतर परिवार विधिसम्मत भूस्वामी नहीं बन सके. क्या आ रही थी दिक्क्तें  – इन लोगों को जमीनें तो दी गईं, मगर कागज अधूरे रहे. – कई मामलों में जमीन वन विभाग के नाम दर्ज रही. – नामांतरण की प्रक्रिया लंबित पड़ी रही. – कुछ लोगों के पास कब्जा है लेकिन वैध दस्तावेज नहीं, वहीं कुछ गांवों में ऐसे परिवार अब मौजूद ही नहीं हैं जिनके नाम पर जमीन थी. – कुछ परिवारों ने कानूनी प्रक्रिया के बगैर कब्जा कर लिया, जिससे विवाद की स्थिति बनी. अधिकारियों ने बताया कि इन सभी परिस्थितियों के चलते हजारों परिवार आज भी उस ज़मीन पर सिर्फ खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा कि यह विषय कानूनी या प्रशासनिक समस्या मात्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी और मानवीय दायित्व है. उन्होंने निर्देश दिए कि जहां भूमि पूर्व में Government Grant Act के तहत दी गई थी, वहां मौजूदा कानूनी ढांचे के अनुसार विकल्प तैयार किए जाएं, क्योंकि यह कानून 2018 में निरस्त हो चुका है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि इस पूरे मसले को केवल पुनर्वास योजना के रूप में न देखें, बल्कि यह सामाजिक न्याय, मानवता और राष्ट्रधर्म का विषय है.

जस्टिस वर्मा पर संकट गहराया, लोकसभा में 152 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव को दी मंजूरी

नई दिल्ली कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने के लिए उनके खिलाफ संसद में महाभियोग चलाने की कार्यवाही शुरू हो गई है. हाई कोर्ट के जज वर्मा अपने आवास पर बेहिसाब नकदी मिलने के बाद कदाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं. संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को लोकसभा के 145 सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए. वहीं, राज्यसभा में 54 सांसदों ने हाई कोर्ट जज वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया.  सरकारी आवास में अधजला कैश मिलने के मामले में मुश्किलों का सामना कर रहे जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं, आज मानसून सत्र के पहले ही दिन सांसदों ने इस पर हंगामा किया और जस्टिस वर्मा पर कार्यवाही की मांग की, सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए एक ज्ञापन लोकसभा स्पीकर को सौंप दिया, बताया जा रहा है कि इस ज्ञापन पर भाजपा और विपक्षी दलों के करीब 150 सांसदों ने हस्ताक्षर किये हैं । संसद के पहले दिन की कार्यवाही आज हंगामेदार रही , विपक्ष ने अपनी बात रखनी चाही उधर लोकसभा स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए तय बिन्दुओं पर ही चर्चा की समझाइश दी जिसपर विपक्ष ने हंगामा किया, इस दौरान सदन की कार्यवाही को स्थगित भी करना पड़ा। ज्ञापन पर सभी दलों के करीब 150 सांसदों के हस्ताक्षर!    उधर जस्टिस वर्मा को हटाने के मामले में सभी सांसद एकमत दिखाई दिए, उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया गया जिसपर भाजपा, कांग्रेस सहित कई कई दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किये, दस्तखत करने वाले सांसदों की संख्या 150 के करीब बताई जा रही है। कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चलेगा महाभियोग, 207 सांसदों ने प्रस्ताव का किया समर्थन लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ को सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपे जाने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए आगे की कार्यवाही शुरू हो गई है. संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत दायर इस महाभियोग प्रस्ताव को भाजपा, कांग्रेस, टीडीपी, जेडीयू, सीपीएम सहित विभिन्न दलों के सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ. प्रस्ताव पर अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, केसी वेणुगोपाल और पीपी चौधरी जैसे सांसदों में हस्ताक्षर किए. उच्च सदन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्हें न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने की मांग वाला एक प्रस्ताव मिला है, जिस पर 50 से अधिक राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं. राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि हाई कोर्ट जज को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी संख्या से ज्यादा सांसदों का नोटिस मिला है. उन्होंने कहा कि अगर एक सदन में प्रस्ताव आए तो प्रीसाइडिंग ऑफिसर के पास यह अधिकार होता है कि वह उसे स्वीकार करे या खारिज कर दे. लेकिन अगर दोनों सदनों में एक ही दिन मोशन आता है, तो यह सदन की प्रॉपर्टी हो जाता है.  संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश, हाई कोर्ट के एक चीफ जस्टिस और एक सदस्य को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जाती है. इस कमेटी की रिपोर्ट के बाद स्पीकर या चेयरमैन मोशन पर फैसला ले सकते हैं. सभापति जगदीप धनखड़ ने राज्य सभा के सेक्रेटरी जनरल से इस बात की पुष्टि करने के लिए कहा कि क्या यह मोशन लोकसभा में भी आया है. इस पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि लोक सभा में भी सदस्यों ने स्पीकर को मोशन सौंपा है. इसकी पुष्टि होने के बाद राज्य सभा के सभापति ने सेक्रेटरी जनरल को महाभियोग प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया. धनखड़ ने यह भी कहा कि उन्हें मिले मोशन पर 55 हस्ताक्षर हैं, लेकिन हस्ताक्षर करने वाले सदस्यों की संख्या 54 ही है. हम इस बात की पुष्टि करेंगे कि किस सदस्य ने दो बार हस्ताक्षर किए हैं. उस सदस्य का दूसरा हस्ताक्षर अमान्य कर दिया जाएगा. संविधान के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए राष्ट्रपति के आदेश के बाद, कम से कम 100 लोकसभा या 50 राज्यसभा सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है. प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं, इसका निर्णय अध्यक्ष या सभापति करते हैं. जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से मिले थे जले नोट जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कदाचार के आरोप तब लगे जब 15 मार्च को उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में लगी आग के बाद बड़ी संख्या में जले हुए नोट बरामद हुए. तब वह दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे. कैश कांड में घिरने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया था. उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश होने के साथ ही अब संसद इस मामले की जांच करेगी. जज वर्मा ने किसी भी तरह के कदाचार में संलिप्त होने से इनकार किया है. सुप्रीम कोर्ट के जांच पैनल ने मामले को गंभीर माना हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय जांच पैनल ने पाया कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के जिस स्टोर रूम में जले हुए नोट मिले थे, उस पर उनका और उनके परिवार का सक्रिय नियंत्रण था. पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि यह कदाचार इतना गंभीर था कि उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए. जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उनका तर्क है कि जांच समिति महत्वपूर्ण तथ्यों की जांच करने में विफल रही और एक व्यक्ति और एक संवैधानिक पदाधिकारी के रूप में उनके अधिकारों का उल्लंघन किया. इस प्रकरण ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक चिंताएं पैदा कर दी हैं. महाभियोग चलाने लोकसभा स्पीकर को सौंपा ज्ञापन  महाभियोग चलाने के प्रस्ताव वाला एक ज्ञापन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत दायर किया गया है। प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अलावा भाजपा सांसद अनुराग सिंह … Read more

सावधान! बिजली उपभोक्ताओं को साइबर ठग बना रहे निशाना: ऊर्जा मंत्री की चेतावनी

बिजली उपभोक्ता सायबर जालसाजों से रहें सावधान : ऊर्जा मंत्री तोमर बिजली बिल का भुगतान बिजली कंपनी के अधिकृत गेटवे अथवा बिजली कंपनी के कैश काउण्टर पर करें : ऊर्जा मंत्री तोमर सावधान! बिजली उपभोक्ताओं को साइबर ठग बना रहे निशाना: ऊर्जा मंत्री की चेतावनी भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बिजली बिलों का नकद भुगतान कंपनी के जोन, वितरण केन्द्र कार्यालय, पीओएस मशीन अथवा अधिकृत भुगतान केन्द्रों जैसे एम.पी.ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेन्टर, आईसेक्ट कियोस्क पर ही करें। उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के केशलेश भुगतान के लिये कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम ऐप, व्हाट्सएप एवं उपाय मोबाइल ऐप के माध्यम से भी बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने उपभोक्ताओं से सायबर जालसाजों से बचने की अपील की है। बिजली कंपनी के सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकारियों ने बताया है कि कंपनी अंतर्गत विद्युत देयकों के भुगतान के लिए उपभोक्ता पहचान नंबर यानि आईवीआरएस नंबर की जरूरत होती है। आईवीआरएस नंबर के आधार पर ही जोन, वितरण केन्द्रों या अन्य गेटवे एमपी ऑनलाइन, पेटीएम, फोन, गूगल, अमेजन, व्हाट्सएप आदि पर बिजली बिलों का भुगतान होता है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी मोबाइल नंबर से आए फोन के आधार पर किसी भी मोबाइल नंबर पर देयकों की राशि अंतरित न करें। साथ ही अपना पिन नंबर भी किसी के साथ साझा न करें। कंपनी के संज्ञान में आया है कि सायबर जालसाजों द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज अथवा आई.व्ही.आर. तकनीक से फोन कॉल पर नंबर दबाने के लिये कहा जाता है। जालसाजों द्वारा बिल भुगतान कराने के लिये बिजली कुछ घंटों बाद काट दी जाएगी, जैसा भय बनाया जाता है और इसके लिए बिल भुगतान करने के लिये विशेष नंबर दबाएं अथवा मोबाइल नंबर विशेष पर संपर्क कर बकाया राशि जमा कराएं, जैसे संदेश दिये जाते हैं, जो सायबर ठगी है। इस प्रकार के एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज एवं आई.व्ही.आर. फोन कॉल फर्जी हैं, इन पर ध्यान नहीं दिया जाए। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि इस प्रकार के फर्जी सायबर जालसाजों से सतर्क और सावधान रहें।  

खुशबुओं की राह पर मध्यप्रदेश, फूलों में देश का अगुआ बनने की ओर, जल्द बनेगा पूरे देश का सिरमौर

विशेष समाचार मध्यप्रदेश फूलों के उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर जल्दी ही बनेगा देश का सिरमौर भोपाल  मध्यप्रदेश ने फूलों के उत्पादन में देश में अलग पहचान बनाई है। देश में मध्यप्रदेश पुष्प (फूल) उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में उद्यानिकी के कुल 27.71 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में फूल उत्पादन की भागीदारी 42 हजार 978 हैक्टेयर है। प्रदेश के किसानों द्वारा वर्ष 2024-25 में 5 लाख 12 हजार 914 टन फूलों का उत्पादन किया गया है, जो रिकार्ड है। वह दिन दूर नहीं जब फूलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश का सिरमौर बनेगा। प्रदेश में किसानों का फूलों के उत्पादन के प्रति बढ़ता रूझान ही है कि गत चार वर्षों में फूलों का उत्पादन रकबा जो वर्ष 2021-22 में 37 हजार 647 हैक्टेयर था वह वर्ष 2024-25 में बढ़कर 42 हजार 976 हैक्टेयर और उत्पादन में 86 हजार 294 टन की बढ़ोत्तरी हुई है। किसानों की आय को दोगुना करने और खेती को लाभ का धंधा बनाने में केन्द्र और राज्य सरकार किसान को कैश-क्रॉप की ओर प्रेरित कर रही है। छोटी कृषि जोत रखने वाले किसान, जिनके पास एक-दो एकड़ या तीन एकड़ की कृषि भूमि है, वे फूलों का उत्पादन कर अच्छा लाभ कमा सकते है। मध्यप्रदेश के उत्पादित फूलों की मांग देश के महानगरों के साथ विदेशों में भी बढ़ी है। गुना जिले के गुलाब की महक जयपुर, दिल्ली, मुम्बई के बाद अब पेरिस और लंदन में भी पहुँच रही है। शिक्षित युवाओं के साथ गांव में रहने वाले ग्रामीण किसान भी फूलों के उत्पादन की ओर आकर्षित हुए है। राजधानी भोपाल की ग्राम पंचायत बरखेड़ा बोदर की रहने वाली श्रीमती लक्ष्मीबाई कुशवाह धान, गेहू, सोयबीन की खेती छोड़कर गुलाब, जरबेरा और गेंदा के फूल का उत्पादन कर, हर महीने तीन से चार लाख रूपये कमा रही है। ऐसे अनेक उदाहरण है, जिनसे प्रदेश में फूलों का उत्पादन बढ़ा है। मध्यप्रदेश में प्रमुख रूप से उत्पादित किये जाने वाले फूलों में गेंदा, गुलाब, सेवन्ती, ग्लेडूलस, रंजनीगंधा तथा औषधीय पुष्पों में इसेवगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली और कोलिक्स है। प्रदेश में सर्वाधिक उत्पादन क्षेत्र गेंदा के फूल का है। किसानों द्वारा 24 हजार 214 हैक्टेयर में गेंदे की खेती की जा रही है। दूसरे स्थान पर गुलाब है जिसका रकबा 4 हजार 502 हैक्टेयर और तीसरे स्थान पर सेवन्ती एक हजार 709 हैक्टेयर, चौथे स्थान पर ग्लेडूल्स एक हजार 58 हैक्टेयर, पांचवें स्थान पर रंजनीगंधा 263 हैक्टेयर सहित अन्य पुष्प 11 हजार 227 हैक्टेयर में बोए जा रहे है। प्रदेश में फूलों की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता 15.01 मैट्रिक टन है, जो फूलों की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस उत्पादकता के लिये प्रदेश की जलवायु, यहाँ की मिट्टी के साथ सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसानों को शासन का सहयोग है। फूलों के उत्पादन से लेकर फूलों की गुणवत्ता में सुधार और मार्केटिंग महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर मध्यप्रदेश शासन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग लगातार काम कर रहा है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2024-25 में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में 14 हजार 438 हैक्टेयर का विस्तार हुआ है और इसमें फूलों का रकबा 5329 हैक्टेयर बढ़ा है। प्रदेश में 33 प्रतिशत से अधिक फूलों (पुष्प) के उत्पादन को प्रोत्साहित करने में उद्यानिकी विभाग की हाइटेक नर्सरी, प्रशिक्षण के माध्यम से कृषकों को तकनीकी की जानकारी प्रदान करना लगातार जारी है। इसी कड़ी में केन्द्र सरकार के सहयोग से ग्वालियर जिले में 13 करोड़ रूपये की लागत से हाइटेक फ्लोरी कल्चर नर्सरी विकसित की जा रही है। यह नर्सरी मध्यप्रदेश में पुष्प उत्पादन के लिये वरदान साबित होगी। वह दिन दूर नहीं जब मध्यप्रदेश फूलों के उत्पादन में देश का सिरमौर बनेगा।  

नवाचार और विकास का प्रतीक बनेगा नया विधायक विश्राम गृह: मुख्यमंत्री यादव

नवीन विधायक विश्राम गृह का नवनिर्माण आधुनिक प्रक्रियाओं के साथ भविष्य की ओर अग्रसर होने के भाव को दर्शाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन विधायक विश्राम गृह के द्वितीय चरण के निर्माण की घोषणा नवीन विधायक विश्राम गृह का भूमि-पूजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में सिंहावलोकन की परंपरा रही है। पिछले अनुभवों की समीक्षा करते हुए भविष्य की कार्य योजना बनाना और उसका क्रियान्वयन सुखद और सफलता प्रदान करने वाला रहता है। समय की मांग के अनुरूप हो रहा विधायक विश्रामगृह का नवनिर्माण आधुनिक प्रक्रियाओं के साथ भविष्य की ओर अग्रसर होने के भाव को दर्शाता है। भवन निर्माण और वास्तुकला के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों के उपयोग से बनने वाला यह भवन लोक कल्याण और जन सेवा के लिए विधायकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराएगा। राज्य सरकार ने विधायकों के कार्यालयों के आधुनिकीकरण के लिए बजट में 5-5 लाख रुपए के आवंटन का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवीन विधायक विश्रामगृह के द्वितीय चरण के निर्माण को भी स्वीकृति प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नवीन विधायक विश्रामगृह के निर्माण कार्य के भूमि पूजन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में विधायक विश्राम गृह परिसर में नवीन विधायक विश्रामगृह के निर्माण कार्य का भूमि पूजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी उपस्थित थे। नवीन विधायक विश्रामगृह लगभग 160 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा, इसमें सभी आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ 102 फ्लैट्स का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भूमिपूजन के बाद शिलालेख अनावरण किया तथा भगवान श्रीराम और भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन और वंदे मातरम गान के साथ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि अगले स्वच्छता सर्वेक्षण में भोपाल को शीर्ष स्तर पर लाने का लक्ष्य रखा है। अगर कुछ कमियां हैं तो उन्हें दूर करेंगे। प्रदेश को नई-नई सौगातें मिल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 11 साल में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिससे दुनिया चकित है। स्पेन सहित यूरोप में भारतीय संस्कृति, खानपान और पहनावे को वहां के लोग आदर के साथ आत्मसात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश का सिंचाई रकबा बढ़ रहा है, स्वच्छता की मुहिम चल रही है। सरकार विकास कार्यों को गति प्रदान करते हुए आगे बढ़ रही है। श्रावण मास में प्रदेश की लाड़ली बहनों को शगुन के तौर पर 250 रूपये की विशेष सौगात मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में उदारता का भाव कूट-कूट कर भरा है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संगठित रहने और शिक्षित बनने का संदेश दिया। राज्य सरकार उनके विचारों को क्रियान्वित करते हुए सबके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल उन्नयन के लिए तकनीकी दक्षता उपलब्ध कराने की दिशा में सघन प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रावण मास की एकादशी और बाबा महाकाल की दूसरी सवारी का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के देवस्थानों पर समाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में निवासरत जनजातीय समुदायों के समूह नृत्य और संगीत की छटा बिखेरते हुए महाकाल की सवारी में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार राष्ट्रीय अखंडता के लिए प्रतिबद्ध है, इसी के चलते जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई गई। सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्लिम बहनों को तीन तलाक से मुक्ति दिलाई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि विधायक जनता का प्रतिनिधि होते हैं और उनको समयानुकूल सुविधाएं मिलना आवश्यक है और इसकी पूर्ति करने के लिए नए विधायक विश्राम गृहों का निर्माण किया जा रहा है। आने वाले समय में मध्यप्रदेश की विधानसभा ई-असेंबली के रूप में तैयार हो जाएगी तो इसका लाभ विधायकों को मिलेगा। वर्तमान विधायक विश्राम गृह का निर्माण वर्ष 1958 में हुआ था जो अब पुराना हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश को विकास में अग्रणी बनाने के लिए संकल्प के साथ जुड़े हैं। प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए उन्होंने विदेश दौरा संपन्न किया है। स्वच्छता में प्रदेश के 8 शहरों ने झंडे गाड़े हैं। इंदौर तो स्वच्छ है ही, अगले वर्ष भोपाल को नंबर-1 बनाने के लिए सभी कृतसंकल्पित हैं। नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह विश्राम गृह आधुनिक सुविधाओं, सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं से सुसज्जित होगा, जो विधायकों को कार्य और चिंतन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करेगा। उन्होंने विधायक जीवन के प्रारंभिक वर्षों की स्मृतियाँ साझा करते हुए वर्तमान में हो रहे बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज विधायकों के लिए तकनीकी संसाधनों की दिशा में निरंतर प्रयास हो रहे हैं, इससे वे विकास प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। मंत्री विजयवर्गीय ने मध्यप्रदेश के आठ शहरों को स्वच्छता पुरस्कार मिलने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की और इसे प्रदेश की विकासशील सोच और समर्पित नेतृत्व का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के मार्गदर्शन में विधानसभा को आधुनिक तकनीकी से लैस किया जा रहा है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि लोकतंत्र केवल संस्थाओं का तंत्र मात्र नहीं है, बल्कि विश्वास का ताना-बाना भी है, जो जनप्रतिनिधियों के उत्तरदायित्व से बुना जाता है। मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर में ही नवनिर्मित विधायक विश्राम गृह के निर्माण का भूमि-पूजन हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में प्रदेश में नए-नए कीर्तिमान गढ़े जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विचार दिया जिससे राज्यों में वैश्विक स्तर पर होने वाले निर्माण मापदण्डों के अनुरूप अधोसंरचना विकास हो रहा है। मध्यप्रदेश अधोसंरचना विकास में निरंतर प्रगति कर रहा है। इंदौर ने इस वर्ष फिर स्वच्छता में शीर्ष स्थान हासिल किया है। भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर को भी स्वच्छ शहरों की सूची में स्थान मिला है। निकट भविष्य में और अधिक शहर स्वच्छता सूची में आएंगे। उन्होंने बताया कि विधायकों के लिए बनाए जा … Read more

ऑनलाइन सट्टेबाजी केस में नया मोड़:Meta और Google को ED ने भेजा समन, हाजिर होने को कहा

नई दिल्ली भारत में टेक्नोलॉजी कंपनियों और कानून विभाग दोनों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक कंपनियों Google और Facebook की पेरेंट कंपनी Meta को समन भेजा है। यह समन भारत में तेजी से फैल रहे अवैध ऑनलाइन सट्टा ऐप्स को प्रमोट और एडवर्टाइज करने के मामले में भेजा गया है। ED की मानें तो Google और Meta ने ऐसे कई ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन पब्लिश किए और एल्गोरिदम के जरिए उन्हें प्रमोट किया, जिससे उनका एडवर्टाइजमेंट और यूजेस दोनों तेजी से बढ़े। इस तरह के ऐप्स को बढ़ावा देना Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के अंतर्गत एक गंभीर अपराध माना जा रहा है। जांच एजेंसी का मानना है कि इन कंपनियों ने सट्टा ऐप्स से एडवर्टाइजमेंट रेवन्यू भी जेनरेट किया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिला। कब और कहां होनी है पूछताछ? Google और Meta के सीनियर अधिकारियों को 21 जुलाई, 2025 को दिल्ली स्थित ED के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। उनसे पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश की जाएगी कि क्या इन कंपनियों को अवैध सट्टा ऐप्स की गतिविधियों की जानकारी थी और क्या उन्होंने जानबूझकर उनके साथ व्यावसायिक संबंध बनाए। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ED ने सट्टा या ड्रग रैकेट्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी या मीडिया फिगर्स पर शिकंजा कसा हो। इससे पहले प्रकाश राज, राणा दग्गुबाती और विजय देवरकोंडा जैसे फिल्म स्टार्स को भी इसी तरह की जांच के लिए बुलाया गया था। अब जांच का दायरा बढ़कर टेक कंपनियों तक पहुंच गया है। सरकार की गाइडलाइंस की अनदेखी? भारत सरकार की ओर से 2022 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश जारी किया था कि वे सट्टा और जुए से जुड़े ऐप्स के विज्ञापन ना दिखाएं। इसके बावजूद इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कई विज्ञापन लगातार देखने को मिले, जिनमें स्किल बेस्ड गेमिंग के नाम पर सट्टे से गतिविधियों को प्रमोट किया गया। इस मामले में अब आगे क्या होगा? ED इन कंपनियों के विज्ञापन डाटा, पेमेंट ट्रांजैक्शन्स और एल्गोरिदमिक प्रिफरेंसेज की गहराई से जांच करेगी। अगर यह पाया गया कि इन कंपनियों ने सट्टा प्लेटफॉर्म्स से पैसा लेकर उन्हें प्रमोट किया, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला ना सिर्फ भारत में बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी टेक कंपनियों की जवाबदेही और जिम्मेदारियों को लेकर बहस शुरू कर सकता है।

पासपोर्ट टू लाइफ (पी2एल) सर्वाइवरशिप क्लीनिक भोपाल का किया शुभारंभ

कैंसर से जीतकर जीवन की नई शुरुआत करने वाले बच्चे सच्चे योद्धा हैं: राज्य मंत्री पटेल कैंसर से जूझकर जीते बच्चे हैं असली योद्धा: राज्य मंत्री पटेल पासपोर्ट टू लाइफ (पी2एल) सर्वाइवरशिप क्लीनिक भोपाल का किया शुभारंभ भोपाल  लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा है कि कैंसर से जीतकर जीवन की नई शुरुआत करने वाले बच्चे सच्चे योद्धा हैं। उनकी आगे की ज़िंदगी को सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानपूर्ण बनाना हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है। कैनकिड्स द्वारा सर्वाइवरशिप क्लिनिक और केयर प्लान इस दिशा में उत्कृष्ट प्रयास है। राज्य मंत्री पटेल ने कैनकिड्स संस्था के "पासपोर्ट टू लाइफ (सर्वाइवरशिप)" परियोजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय सर्वाइवरशिप क्लीनिक (पी2एल क्लिनिक) भोपाल का शुभारंभ किया। राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में सर्वांगीण विकास के लिये निरंतर कार्य कर रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित हर बच्चा न केवल जीवन रक्षक इलाज पाए, बल्कि इलाज के बाद की ज़रूरतों की भी समुचित पूर्ति हो। कार्यक्रम में कैनकिड्स संस्था द्वारा तैयार किए गए सर्वाइवर केयर प्लान का विमोचन भी राज्य मंत्री पटेल द्वारा किया गया। यह केयर प्लान कैंसर से उबर चुके बच्चों के दीर्घकालीन स्वास्थ्य प्रबंधन, नियमित फॉलोअप, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य तथा सामाजिक पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। राज्यमंत्री पटेल ने कैंसर से उबर चुके बच्चों से संवाद किया, उन्हें प्रोत्साहित किया और उनके साहस की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने बीमारी को नहीं बल्कि हालात को भी हराया है। आप सबके लिए प्रेरणा हैं। प्रदेश सरकार आपकी आगे की यात्रा को सरल, सुरक्षित और संबलयुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि कैंसर के इलाज के बाद फॉलोअप महत्वपूर्ण है। हमारे समाज में जानकारी के अभाव, आर्थिक कठिनाइयों और दूरी के कारण कई बच्चे जरूरी देखरेख से वंचित रह जाते हैं। यह पहल इन सभी बाधाओं को दूर करने में सहयोगी होगी। कैनकिड्स की सह-संस्थापक एवं निदेशक श्रीमती सोनल शर्मा ने बताया कि संस्था द्वारा पहले से ही इंदौर के एम.वाई. अस्पताल, सैम्स तथा जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में पी2एल क्लिनिक संचालित किए जा रहे हैं। अब भोपाल में राज्य स्तरीय क्लिनिक की शुरुआत के साथ संस्था का उद्देश्य प्रदेश के हर जिले तक सेवा पहुंचाना है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, डॉक्टर्स, कैंसर से उबरे बच्चे तथा उनके परिजन उपस्थित रहे।  

प्रशासनिक फेरबदल की आहट: सीएम की वापसी के बाद तेज़ हुई बदलाव की चर्चा

भोपाल  स्पेन-दुबई की यात्रा से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को लौट आए। अब उनके विदेश के दौरे से लौटते ही प्रदेश में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। मंत्रालय से लेकर फील्ड तक नॉन परफार्मर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रालय से लेकर जिलों तक प्रशासनिक सर्जरी की जाना है। इसमें कलेक्टर, एसपी, संभागायुक्त से लेकर मंत्रालय में सचिव और प्रमुख सचिव के नाम शामिल हो सकते हैं। मंत्रालय में कई अधिकारियों की जिम्मेदारी बदल जा सकती है। कुछ अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों के काम की जिम्मेदारी है। इसको कम किया जा सकता है। कई जिलों के कलेक्टर बदले जाएंगे प्रदेश के एक दर्जन जिलों के कलेक्टर बदले जा सकते हैं। इसमें अलीराजपुर, भिंड, धार, रतलाम, शिवपुरी, गुना, रीवा, जबलपुर के कलेक्टर को बदला जा सकता है। जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना को राज्य स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसी प्रकार कुछ जिलों के कलेक्टर को भी बदला जा सकता है। वहीं लगभग 100 डिप्टी कलेक्टरों, जॉइंट कलेक्टरों और एडिशनल कलेक्टरों को भी नई पोस्टिंग मिल सकती है। प्रत्येक जिले को मिलेंगे एडीएम और जॉइंट कलेक्टर राज्य प्रशासनिक सेवा के डिप्टी कलेक्टरों में से 30 से ज्यादा को जॉइंट या एडिशनल कलेक्टर पद पर प्रमोट किया जा चुका है। इन अधिकारियों को अब उन जिलों में पदस्थ किया जाएगा, जहां अपर कलेक्टर नहीं हैं। ऐसे करीब 8-9 जिले चिन्हित किए गए हैं। जॉइंट कलेक्टरों की खाली जगहों को भी भरा जाएगा। प्रशासन ने इस बार यह भी ध्यान में रखा है कि पति-पत्नी दोनों यदि अधिकारी हैं तो उन्हें एक ही जिले में पोस्टिंग न दी जाए। मुख्यमंत्री मंत्रालय और जिलों में प्रशासनिक सर्जरी कर सकते हैं। इसमें कलेक्टर, एसपी, से लेकर सचिव जैसे बड़े अधिकारी शामिल हो सकते हैं। कई अधिकारियों के विभागों में बदलाव हो सकता है। कुछ अधिकारियों के पास ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी है, जिसे कम किया जा सकता है। सीएम मोहन यादव विदेश यात्रा से रविवार को वापस आ गए हैं। उनके लौटते ही प्रदेश में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। जो आईएएस और आईपीएस अधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, उनकी धड़कनें बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री मंत्रालय से लेकर जिलों तक अधिकारियों में बदलाव कर सकते हैं। कई स्तर पर हो सकते हैं तबादले सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के लगभग एक दर्जन जिलों के कलेक्टर बदले जा सकते हैं। अलीराजपुर, भिंड, धार, रतलाम, शिवपुरी, गुना, रीवा और जबलपुर जैसे जिलों के कलेक्टर बदले जा सकते हैं। जबलपुर के कलेक्टर दीपक सक्सेना को राज्य स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। कुछ और जिलों के कलेक्टर भी बदले जा सकते हैं। लगभग 8-9 जिले ऐसे हैं जहां अपर कलेक्टर की पोस्ट खाली है। जॉइंट कलेक्टरों की खाली जगहों को भी भरा जा सकता है। प्रशासन इस बार इस बात का भी ध्यान रख रहा है कि अगर पति-पत्नी दोनों अधिकारी हैं तो उन्हें एक ही जिले में पोस्टिंग न दी जाए। इससे पहले कई बार ऐसा देखा गया है कि पति-पत्नी दोनों एक ही जिले में पदस्थ होते थे। रीवा पहुंचे सीएम मोहन यादव, दिवंगत ससुर को दी श्रद्धांजलि  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर रीवा पहुंचे, जहां उन्होंने अपने दिवंगत ससुर ब्रह्मानंद यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री विदेश दौरे पर थे और इसी कारण 16 जुलाई को हुए अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे। दिल्ली एयरपोर्ट से सीधे विशेष विमान के जरिए रीवा पहुंचे मुख्यमंत्री यादव ने पत्नी डॉ. सीमा यादव के साथ ससुराल पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। इस दौरान वे लगभग 45 मिनट तक परिवार के साथ रहे और परिजनों को ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने रामानंद यादव और सदानंद यादव से मुलाकात कर दुख की इस घड़ी में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। भावुक माहौल के बीच मुख्यमंत्री ने ब्रह्मानंद यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके चेहरे पर गहन सम्मान और भावुकता साफ झलक रही थी। स्वर्गीय ब्रह्मानंद यादव एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् थे, जिन्होंने जीवन के लगभग 50 वर्ष रीवा में व्यतीत किए। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के निवासी होने के बावजूद उन्होंने रीवा को अपनी कर्मभूमि और अंतिम विश्रामस्थली के रूप में स्वीकार किया। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार भी रीवा में ही किया गया। इससे पहले रविवार सुबह रीवा जिले के प्रभारी मंत्री प्रह्लाद पटेल भी ब्रह्मानंद यादव के निवास पर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की।  

मंत्री सारंग ने किया कई विकास योजनाओं का भूमि-पूजन, जनता को बड़ी सौगात

भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड 38 में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मंत्री सारंग ने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि नरेला के समग्र विकास का संकल्प हमारी प्रतिबद्धता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार प्रदेश में हर क्षेत्र को विकास, सुशासन और जनकल्याण की मुख्यधारा से जोड़ रही है। मंत्री सारंग ने कहा कि नरेला के हर घर में नर्मदा जल के साथ ही सीएम राइज स्कूल, शासकीय कॉलेज, थीम आधारित आधुनिक पार्क, फ्लाईओवर, स्मार्ट सड़कों का नेटवर्क और आदर्श ड्रेनेज सिस्टम जैसी अधोसंरचनाएं क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि नरेला के रहवासियों को सुविधाजनक, सुरक्षित और समृद्ध जीवन मिले इसके लिए हम कटिबद्ध हैं। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक सहित बड़ी संख्या में रहवासी उपस्थित रहे। विकास कार्यों की सौगात नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड 38 के पुरुषोत्तम नगर, सेमरा, शिव मंदिर के पास सड़क निर्माण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाएगा। इन कार्यों से स्थानीय नागरिकों को सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।