samacharsecretary.com

हद से ज्यादा नमक खा रहे भारतीय …ICMR ने बताया कितना है सुरक्षित सेवन, जानें कितनी मात्रा सुरक्षित

नई दिल्ली  नमक खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता बल्कि यह शरीर के लिए भी काफी जरूरी होता है. बिना नमक के खाना फीका लगता है, चाहे वह कितना भी अच्छा पकाया गया हो. लेकिन नमक के सेवन की भी एक लिमिट होती है. हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारतीय नमक का अत्यधिक सेवन कर रहे हैं और ऐसे में साइलेंट महामारी को बढ़ावा मिल रहा है जिससे लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, हृदय रोग और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए नमक के कम सेवन और कम सोडियम वाले नमक का प्रयोग करने की सलाह दी है. नमक की कितनी मात्रा लोगों के लिए सुरक्षित होती है और नमक के और कौन से ऐसे सोर्स हैं जिनके माध्यम से नमक आपके शरीर में जा रहा है, इस बारे में भी जान लीजिए ताकि नमक के सेवन को कंट्रोल किया जा सके. नमक की कितनी मात्रा सुरक्षित? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) प्रति व्यक्ति प्रति दिन 5 ग्राम से कम नमक लेने की सिफारिश करता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने पाया कि भारतीय की शहरी आबादी रोजाना लगभग 9.2 ग्राम और ग्रामीण आबादी लगभग 5.6 ग्राम नमक का सेवन करती है. यानी कि दोनों आबादी नमक का सेवन तय सीमा से अधिक कर रहा है. राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) के सीनियर साइंटिस्ट और रिसर्च हेड डॉ. शरण मुरली ने कहा, 'सोडियम का कम सेवन ब्लडप्रेशर कम करने और ओवरऑल हार्ट हेल्थ में सुधार करने में मदद करता है, जिससे कम सोडियम वाले ऑपशंस हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं. सिर्फ कम सोडियम वाले नमक पर स्विच करने से ब्लडप्रेशर औसतन 7/4 mmHg तक कम हो सकता है. यह एक छोटा सा बदलाव है जिसका बड़ा असर होता है.' 'यह सिर्फ नमक कम करने की बात नहीं है. यह हमारी डाइट, हमारे शरीर और हमारे हृदय में संतुलन को बैलेंस करने के बारे में है. कम नमक के सेवन से ब्लडप्रेशर संबंधी समस्याओं में भी कमी देखी जा सकती है.' सोडियम और नमक में क्या अंतर है? सोडियम और नमक को अक्सर एक ही माना जाता है. लेकिन ये दोनों एक जैसे नहीं हैं. सोडियम एक मिनरल है जो खाने में प्राकृतिक रूप से पाया जा सकता है या खाने के दौरान उसमें मिलाया जा सकता है. खाने का नमक लगभग 40 प्रतिशत सोडियम और 60 प्रतिशत क्लोराइड होता है. टेबल नमक में सोडियम की मात्रा मोटे तौर पर इस प्रकार है. 1/4 चम्मच नमक = 600 मिलीग्राम (मिलीग्राम) सोडियम 1/2 चम्मच नमक = 1,200 मिलीग्राम सोडियम 3/4 चम्मच नमक = 1,800 मिलीग्राम सोडियम 1 चम्मच नमक = 2,400 मिलीग्राम सोडियम सोडियम को किन नामों से पहचान सकते हैं? सोडियम कई रूपों में पाया जाता है. खाने वाली पैकेज्ड चीजों पर कंपनियों सीधे सोडियम न लिखने की जगह नीचे बताए हुए नाम लिख सकती हैं. आप उन्हें देखकर सोडियम का पता लगा सकते हैं.     डिसोडियम ग्वानिलेट     डिसोडियम इनोसिनेट     मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG)     सोडियम बाईकारबोनेट     सोडियम नाइट्रेट     सोडियम सिट्रट     सोडियम क्लोराइड (नमक)     सोडियम डायएसीटेट     सोडियम एरिथोर्बेट     सोडियम लैक्टेट     सोडियम मेटाबाइसल्फाइट     सोडियम फास्फेट     ट्राइसोडियम फॉस्फेट भोजन में इतना सोडियम क्यों होता है? सोडियम हमारे भोजन में कई भूमिकाएं निभाता है. स्वाद बढ़ाना इसका सबसे आम काम है. सोडियम भोजन को एक संरक्षक के रूप में सुरक्षित भी रख सकता है, खाने की बनावट में सुधार कर सकता है. उदाहरण के लिए, बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) ब्रेड और अन्य बेक्ड खाद्य पदार्थों को फूलने में मदद करता है. लेकिन अक्सर, जरूरत से अधिक नमक डालने के कारण कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं. सोडियम के इनडायरेक्ट सोर्स क्या हैं? अमेरिकी रिसर्च से पता चलता है कि लोगों की डाइट में लगभग 14 प्रतिशत सोडियम कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. इसके अलावा, कई लोग खाना बनाते और खाते समय नमक डालते हैं. यह कुल सोडियम सेवन का केवल लगभग 11 प्रतिशत होता है. भले ही आप खाने में नमक कम डाल रहे हों लेकिन फिर भी आप शायद बहुत ज़्यादा सोडियम ले रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि सोडियम अक्सर पैकेज्ड और तैयार की गई चीजों जैसे डिब्बाबंद सूप, लंच मीट और फ्रोजन चीजों में अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसे नमक के रूप में या बेकिंग सोडा जैसे सोडियम के अन्य सामान्य रूपों के रूप में मिलाया जा सकता है. अमेरिका में जो लोग सोडियम खाते हैं, उसका 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा पैकेज्ड या रेस्टोरेंट के खाने से आता है. वहीं जब हम जो पैकेज्ड या बना हुआ खाना खरीदते हैं, उसमें सोडियम पहले से ही मिला हुआ होता है जिससे हमारी दैनिक सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है. सोडियम का सेवन कम करने के लिए हमेशा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूर रहें और घर पर ही खाना बनाएं. दवाइयां भी सोडियम का सोर्स होती हैं. बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाली दवाओं के लेबल पर एक्टिव और निष्क्रिय अवयवों की जांच करें और डॉक्टर से पूछें कि आपकी दवाई में कितना नमक है.

इंदौर का क्लीननेस रिकॉर्ड कायम! इंदौर फिर सबसे ऊपर? दिल्ली में आज 17 जुलाई को परिणाम का खुलासा

इंदौर स्वच्छ भारत सर्वेक्षण की रैंकिंग आज गुरुवार को जारी होगी। दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू की मौजूदगी में स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को पुरस्कार मिलेंगे। जनसंख्या के हिसाब से शहरोंं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इस बार इंदौर सहित अन्य 12 शहरों की स्वच्छता का पैमाना अलग रहेगा। उनका आंकलन भी अलग रहा। लगातार तीन वर्षों तक रैंकिंग में टाॅप रहे शहरों की केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने अलग केटेगरी बनाई है। इन शहरों को प्रीमियर लीग में रखा गया है। सात साल से लगातार देश में स्वच्छता का ताज बरकार रखने वाले इंदौर का दावा इस बार मजबूत है, लेकिन सूरत की तरफ से कड़ी टक्कर इंदौर को मिल रही है। सूरत ने पिछले साल भी इंदौर के साथ स्वच्छता का पुरस्कार साझा किया था। सफाई में इस बार स्वच्छता की अलग-अलग श्रेणियां रखी गई है। लीग में जो शहर पहले स्थान पर होगा, उसे स्वच्छता लीग पुरस्कार दिया जाएगा,जबकि लीग से बाहर के शहरों के पुरस्कारों की घोषणा अलग से रैंकिंग के आधार पर होगी। इस रैंकिंग में गुजरात का अहमदाबाद शहर पहले स्थान पर हो सकता है। दूसरे नंबर पर भोपाल शहर है। विजेता शहरों को राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत किया जाएगा। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर से अफसर रवाना हो गए है।   चार हजार से अधिक शहरों की रैंकिंग स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में 4 हजार 700 शहर शामिल है। इन शहरों को 12 हजार 500 में से अंक दिए जाएंगे। कचरा प्रबंधन, निपटान, पब्लिक फीडबैक, कचरा संग्रहण सहित अन्य केटेगरी में अलग-अलग नंबर दिए जाएंगे। इंदौर का दावा इसलिए मजबूत इंदौर में सड़कों की सफाई, कचरा कलेक्शन और कचरा निपटना का सिस्टम सबसे मजबूत है। इंदौर के लोग भी सफाई को लेकर सजग है। कचरा सड़कों पर नहीं फेंकते है। दूसरे शहरों में यह सिस्टम नियमित तौर पर काम नहीं कर पा रहा है। सूरत ने पिछले साल डोर डू डोर कचरा संग्रहण पर काफी काम किया था और उसमे समान नंबर आने के कारण रैंकिंग में इंदौर के समान नंबर पाए थे। स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में भोपाल देश के सबसे साफ शहरों में टॉप-3 पर स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में स्वच्छ शहरों के मामले राजधानी भोपाल ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है. भोपाल की रैंकिंग में सुधार करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया. देश के दूसरे क्लीनेस्ट सिटी में शुमार हुए भोपाल में अब जश्न की तैयारी है. भोपाल नगर निगम ने जनप्रतिनिधि स्वच्छता मित्रों और जनता के साथ जश्न मनाएंगी. स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में भोपाल देश के सबसे साफ शहरों में टॉप-3 पर है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पुरस्कार देगी। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया, भोपाल ने 3 पायदान छलांग लगाई है और देश में दूसरे नंबर पर आया है स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राजधानी भोपाल ने पिछले साल की तुलना में तीन पायदान की छलांग लगाते हुए भारत के दूसरे क्लीनेस्ट सिटी का तमगा हासिल किया है.अहमदाबाद अव्वल आया है, जबकि लखनऊ ने 44वें पायदान से बड़ी छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गई है. 17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में होगा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम गौरतलब है 17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम में होगा. अवॉर्ड समारोह में शामिल होने के लिए भोपाल मेयर और कमिश्नर आज नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां आधिकारिक रूप से स्वच्छ शहर के विजेताओं की घोषणा भी होगी, इसके बाद अवॉर्ड दिए जाएंगे. अवॉर्ड लेने नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे भोपाल नगर निगम मेयर और कमिश्नर रिपोर्ट के मुताबिक देश के स्वच्छ सिटी में दूसरा स्थान का अवॉर्ड पाने के लिए भोपाल नगर निगम मेयर और निगम कमिश्नर आज नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे और 17 जुलाई यानी कल राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के हाथों अवॉर्ड ग्रहण करेंगे.निगम शुक्रवार को भोपाल में जनप्रतिनिधि स्वच्छता मित्रों और जनता के साथ जश्न मनाने की तैयारी कर रही है. राष्ट्रपति 17 जुलाई को सुपर लीग श्रेणी में इंदौर को अवॉर्ड देंगी. यह अवॉर्ड इंदौर को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में मिलेगा. 3 से 10 लाख तक की जनसंख्या में उज्जैन और 20 हजार से अधिक जनसंख्या वाले में सीहोर जिले की बुदनी को यह अवॉर्ड मिलेगा. इधर, पुरस्कार लेने के लिए मेयर मालती राय और निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण बुधवार को दिल्ली के रवाना होंगे। 17 जुलाई को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक आयोजन होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू करेंगी। सबसे स्वच्छ राजधानी का तमगा मिलने की उम्मीद स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार भी मध्यप्रदेश के शहर बाजी मारेंगे। राजधानी भोपाल देश के सबसे स्वच्छ शहरों में दूसरे नंबर पर रहेगा। साथ ही सबसे स्वच्छ राजधानी का तमगा भी फिर मिलने की उम्मीद है। पिछली बार पांचवें नंबर पर था भोपाल पिछले सर्वे में भोपाल 5वें नंबर पर था। कचरे की प्रोसेसिंग में सुधार व डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था को और पुख्ता कर भोपाल ने दावा मजबूत किया है। वहीं, फरवरी में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) की वजह से भी भोपाल को फायदा मिलेगा। जीआईएस के चलते राजधानी में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम शहर में हुए हैं। इसमें स्वच्छता से जुड़े काम भी शामिल थे। इसी दौरान स्वच्छता सर्वेक्षण टीमें भी भोपाल पहुंची थी। इसलिए दावा मजबूत है। स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल का अब तक का सफर स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल ने 2017 और 2018 में लगातार दो साल देश में दूसरी रैंक हासिल की थी। 2019 में भोपाल खिसककर 19वें नंबर पर आ गया था। उस समय अफसरों के लगातार तबादले के कारण तैयारियों की दिशा ही तय नहीं हो पाई थी, लेकिन 2020 में कम बैक करते हुए 12 पायदान ऊपर खिसका और 7वीं रैंक हासिल की। 2021 के सर्वेक्षण में भी भोपाल ने 7वां स्थान हासिल किया था। 2022 के सर्वेक्षण में भोपाल की रैंक सुधरी और यह छठवें स्थान पर आ गया। वहीं, भोपाल को 5 स्टार मिला। 2023 के सर्वेक्षण में पांचवीं रैंकिंग रही थी। इस बार यह टॉप-3 में हो सकती है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में इस बार प्रदेश के कुल 8 शहर सम्मानित किया गया हैं … Read more

CSE की रिपोर्ट में शहरी भारत में ओजोन प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि, स्वास्थ्य और खेती पर बुरा असर

नई दिल्ली भारत के बड़े शहरों जैसे कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई में इस गर्मी (2025) में जमीन के स्तर पर ओजोन प्रदूषण ने खूब सिर उठाया है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन शहरों में ओजोन का स्तर कई दिनों तक 8 घंटे के मानक से ज्यादा रहा. यह प्रदूषण इतना खतरनाक है कि यह लोगों के स्वास्थ्य और खेती पर बुरा असर डाल रहा है. इस समस्या को समझते हैं और जानते हैं कि क्या करना जरूरी है.  क्या है ओजोन प्रदूषण? ओजोन एक गैस है जो तीन ऑक्सीजन अणुओं से बनती है. ऊंचे आसमान में यह हमें सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है, लेकिन जमीन के पास यह प्रदूषण बन जाता है. यह सीधे किसी स्रोत से नहीं निकलता, बल्कि वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है. यह गैस बहुत प्रतिक्रियाशील होती है. हवा में लंबी दूरी तक फैल सकती है, जिससे यह शहरों से लेकर गांवों तक को प्रभावित करती है. शहरों में ओजोन का हाल CSE की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गर्मी (मार्च-मई 2025) में कई शहरों में ओजोन का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया. दिल्ली की रिपोर्ट पहले ही जारी हो चुकी है, इसलिए इस अध्ययन में उसे शामिल नहीं किया गया. आइए, बाकी शहरों की स्थिति देखें…     बेंगलुरु: इस गर्मी में 92 दिनों में से 45 दिन ओजोन का स्तर मानक से ज्यादा रहा, जो पिछले साल की तुलना में 29% की बड़ी बढ़ोतरी है. होमबेगोड़ा नगर सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहा.     मुंबई: 92 दिनों में 32 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 42% कम है. चकाला सबसे प्रभावित इलाका रहा.     कोलकाता: 22 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 45% कम है. रवींद्र सरोवर और जादवपुर हॉटस्पॉट बने.     हैदराबाद: 20 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 55% कम है. बोल्लारम सबसे ज्यादा प्रभावित रहा.     चेन्नई: 15 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल शून्य था. आलंदुर सबसे प्रभावित क्षेत्र रहा. इन शहरों में ओजोन का स्तर सिर्फ गर्मियों में नहीं,बल्कि सर्दियों और अन्य मौसमों में भी बढ़ रहा है, खासकर गर्म जलवायु वाले इलाकों में. ओजोन के हॉटस्पॉट और असर हर शहर में कुछ खास इलाके हैं जहां ओजोन का स्तर सबसे ज्यादा बढ़ता है. इन हॉटस्पॉट्स में प्रदूषण का असर और गंभीर होता है. ओजोन सांस की नली को नुकसान पहुंचाता है. अस्थमा और दमा जैसी बीमारियों को बढ़ाता है. बच्चों, बुजुर्गों व सांस की बीमारी वालों के लिए खतरनाक है. यह फसलों को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ता है. क्यों बढ़ रहा ओजोन प्रदूषण? ओजोन का बढ़ना मौसम और प्रदूषण स्रोतों पर निर्भर करता है. गर्मी और सूरज की रोशनी इसकी रासायनिक प्रतिक्रिया को तेज करती है. वाहन, उद्योग, कचरा जलाना और ठोस ईंधन का इस्तेमाल इसके मुख्य कारण हैं. दिलचस्प बात यह है कि जहां नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) ज्यादा होता है, वहां ओजोन कम बनता है, लेकिन साफ इलाकों में यह जमा हो जाता है . समाधान क्या हो? CSE की अनुमिता रॉयचौधरी कहती हैं कि अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है.इसके लिए जरूरी कदम हैं…     सख्त कदम: वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने से निकलने वाली गैसों को कम करना होगा. शून्य उत्सर्जन वाहन और साफ ईंधन को बढ़ावा देना जरूरी है.     निगरानी बढ़ाएं: ओजोन के स्तर को मापने के लिए और स्टेशन लगाने चाहिए, ताकि हॉटस्पॉट्स की पहचान हो सके.     क्षेत्रीय योजना: ओजोन एक क्षेत्रीय प्रदूषण है, इसलिए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर मिलकर काम करना होगा.     जागरूकता: लोगों को इस प्रदूषण के बारे में बताना और साफ हवा के लिए कदम उठाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वर्तमान में, अपर्याप्त निगरानी, सीमित आँकड़े और अप्रभावी प्रवृत्ति विश्लेषण विधियों ने इस बढ़ते जन स्वास्थ्य जोखिम को समझने में बाधा डाली है। जमीनी स्तर पर ओज़ोन की जटिल रासायनिक संरचना इसे एक ऐसा प्रदूषक बनाती है जिसका पता लगाना और उसे कम करना मुश्किल है। ओज़ोन की अत्यधिक विषाक्त प्रकृति के कारण, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक केवल अल्पकालिक जोखिम (एक घंटे और आठ घंटे के औसत) के लिए निर्धारित किया गया है, और अनुपालन इन मानकों से अधिक दिनों की संख्या के आधार पर मापा जाता है। शोधकर्ताओं ने रेखांकित किया कि इसके लिए शीघ्र कार्रवाई आवश्यक है। इस पत्र में कहा गया है कि वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन को रोकने के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता है। इसमें भारत में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है, "कार्ययोजना के सह-लाभों को अधिकतम करने के लिए कण प्रदूषण, ओज़ोन और NOx जैसी इसकी पूर्ववर्ती गैसों के संयुक्त नियंत्रण हेतु कार्यनीति को तत्काल परिष्कृत किया जाना चाहिए।"  

इंदौर-खंडवा रेल परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी, वन विभाग की NOC, दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी

इंदौर इंदौर-खंडवा रेल परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए वन विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है, जिससे परियोजना की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। अब इस रेल मार्ग के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा मार्ग होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक विकास को नई गति देगी, बल्कि यात्रियों के लिए समय और दूरी की बचत भी करेगी। यह परियोजना मालवांचल के लिए एक नया युग शुरू करने वाली है, जो क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगी।  यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा रेल मार्ग साबित होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक भविष्य को नई रफ्तार देगा, बल्कि यात्रियों को भी समय और दूरी दोनों में राहत देगी। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने इस प्रोजेक्ट में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने रेलवे अधिकारियों और वन विभाग के बीच संयुक्त बैठक करवाई थी, जिससे आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल हुईं। इसके बाद हाल ही में सांसद लालवानी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस परियोजना की प्राथमिकता को रेखांकित किया और वन विभाग से अनुमति दिलवाने का अनुरोध किया था। इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का संपर्क सीधे खंडवा-भुसावल-नासिक-मुंबई की ओर तथा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से तेज़, किफायती और सुविधाजनक सफर हो जाएगा। इस रेल कॉरिडोर से मालवांचल के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों सभी को लाभ मिलेगा। सांसद ने बताया कि यह रेल मार्ग मालवांचल और दक्षिण भारत के बीच सीधी व बेहतर कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम है। बढ़कर 80 किमी हो जाएगी इंदौर-खंडवा की दूरी इंदौर से खंडवा की दूरी मीटरगेज में पहले 48 किमी थी, लेकिन अब बढ़कर 80 किमी हो जाएगी। ब्रॉडगेज का ट्रैक बनाने के लिए पातालपानी के पहले घूमकर ट्रेन बलवाड़ा पहुंचेगी, जिससे 32 किमी की दूरी बढ़ गई है। हालांकि इस ट्रैक के बनने से इंदौर की दक्षिण भारत के शहरों बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई व उत्तर भारत के जयपुर, अजमेर शहरों तक सीधी पहुंच होगी। अभी इन शहरों तक जाने के लिए घूमकर जाना पड़ता है। इंदौर खंडवा अकोला ब्रॉडगेज हो जाने से उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाला सबसे छोटा रूट होगा। इससे आम लोगों के समय की बचत होगी। रेलवे का मुनाफा बढ़ेगा। एक दशक से इंदौर से खंडवा रेल कनेक्टिविटी खत्म हो चुकी एक दशक से इंदौर से खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी खत्म हो गई है। पूर्व में यहां पर मीटरगेज लाइन थी, जो महू से पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा, चौरल होकर खंडवा तक जाती थी। अब ब्रॉडगेज लाइन महू से पातालपानी के पहले घूमकर बलवाड़ा तक जा रही है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 32 किमी का घुमाव है, जिसमें 454 हेक्टेयर जमीन वन विभाग की आ रही है। ट्रैक में महू और बड़वाह तहसील की अधिकांश भूमि जमीन आ रही है। उस पर ट्रैक डालने के लिए रेलवे लंबे समय से अनुमति मांग रहा था। दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी का सपना होगा साकार इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का सीधा संपर्क खंडवा, भुसावल, नासिक और मुंबई के साथ-साथ तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से हो जाएगा। यह रेल कॉरिडोर मालवांचल के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों के लिए तेज, किफायती और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प प्रदान करेगा। सांसद लालवानी ने बताया कि यह रेल मार्ग मालवांचल और दक्षिण भारत के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एक दशक से बंद थी रेल कनेक्टिविटी   पिछले एक दशक से इंदौर और खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी बंद थी। पहले यहां मीटरगेज लाइन थी, जो महू से पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा और चौरल होते हुए खंडवा तक जाती थी। अब ब्रॉडगेज लाइन के लिए महू से पातालपानी के पहले घूमकर बलवाड़ा तक ट्रैक बनाया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 32 किमी का घुमाव है, जिसमें 454 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन शामिल है। रेलवे लंबे समय से इस जमीन पर ट्रैक बिछाने की अनुमति मांग रहा था, जो अब मिल गई है।        

एचडीएफसी बैंक पहली बार देने जा रहा बोनस शेयर, मिलेगा डबल गिफ्ट

नई दिल्ली  भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक के निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। बैंक ने कहा है कि उनका बोर्ड 19 जुलाई को एक मीटिंग करने वाला है। इस मीटिंग में पहली बार बोनस शेयर जारी करने और फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए स्पेशल डिविडेंड देने पर विचार किया जाएगा। बैंक ने कहा है कि बोनस शेयर जारी करने का फैसला नियमों के अनुसार होगा। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी भी जरूरी होगी। अभी तक बैंक ने बोनस शेयर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। Trendlyne के डेटा के अनुसार अगर HDFC बैंक बोनस शेयर जारी करता है, तो यह पहली बार होगा। बोनस शेयर का मतलब है कि कंपनी अपने शेयरधारकों को मुफ्त में अतिरिक्त शेयर देगी। यह एक तरह से कंपनी की तरफ से शेयरधारकों को तोहफा होगा। बोनस शेयर के साथ-साथ बोर्ड 2025-26 के वित्तीय वर्ष के लिए स्पेशल डिविडेंड पर भी विचार करेगा। डिविडेंड का मतलब है कि कंपनी अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयरधारकों को देगी। पहली बार बोनस शेयर देने की तैयारी! बैंक के इतिहास में यह पहली बार होगा जब वह अपने निवेशकों को बोनस शेयर देने की योजना बना रहा है. इस संभावित घोषणा की खबर आते ही शेयर बाजार में तेजी देखी गई. बुधवार के कारोबारी सत्र में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) का शेयर करीब 1% बढ़कर ₹2,022 के स्तर पर पहुँच गया. बोनस के साथ विशेष लाभांश? एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) की 19 जुलाई को होने वाली बोर्ड मीटिंग सिर्फ बोनस शेयरों तक ही सीमित नहीं है. बैंक विशेष अंतरिम लाभांश पर भी विचार करेगा. अगर दोनों प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है, तो निवेशकों को एक साथ दोहरा तोहफा मिलने की संभावना है. शेयर में सकारात्मक तेजी, वॉल्यूम में उछाल बुधवार को शेयर का ट्रेडिंग वॉल्यूम 23,92,100 तक पहुंच गया, जिससे साफ जाहिर है कि बाजार में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है. बोनस शेयर और लाभांश की संभावना अल्पावधि में इस शेयर को और मजबूत बना सकती है. 2025 में अब तक 22% रिटर्न, भरोसा कायम एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयर ने साल 2025 में अब तक 22% से ज़्यादा रिटर्न दिया है. पिछले तीन महीनों में इस शेयर में लगभग 6% की वृद्धि और एक महीने में 3% का सकारात्मक रिटर्न देखने को मिला है. इससे पता चलता है कि मजबूत बुनियादी बातों के साथ यह शेयर लगातार निवेशकों को आकर्षित कर रहा है. मार्केट कैप में शीर्ष पर: बैंकिंग क्षेत्र की रानी ₹15.30 लाख करोड़ से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) न केवल भारत में बल्कि एशिया में भी सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक है. यह निवेशकों के लिए एक विश्वसनीय और स्थिर विकल्प बना हुआ है. शेयर की कीमत एचएफडीसी बैंक ने पहले ही बता दिया था कि उसके कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए शेयर बाजार में ट्रेडिंग 21 जुलाई, 2025 तक बंद रहेगी। यह नियम इसलिए है ताकि कोई भी अंदरूनी जानकारी का गलत इस्तेमाल न कर सके। बैंक के इस नियम को शेयर डीलिंग कोड कहा जाता है। बैंक की वेबसाइट के मुताबिक उसके निवेशकों की संख्या 41,21,815 है। बैंक में विदेशी निवेशकों की करीब 41 फीसदी हिस्सेदारी है। HDFC बैंक के शेयर की बात करें तो पिछले एक साल में इसके शेयर में 23.01% की बढ़ोतरी हुई है। इस साल की शुरुआत से अब तक इसमें 11.94% की तेजी आई है। पिछले छह महीनों में शेयर 21.46% बढ़ा है। पिछले तीन महीनों में 6.99% और पिछले एक महीने में 4.07% की बढ़ोतरी हुई है। HDFC बैंक ने पिछले 12 महीनों में 22 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया है। बीएसई पर आज बैंक का शेयर कारोबार के दौरान करीब 1 फीसदी तेजी के साथ 2021.90 रुपये तक गया। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 2,027.40 रुपये है।  

पहली सवारी में संकरे पड़े गए मार्ग, प्रशासन के लिए यह है बड़ा अलर्ट, सवारी मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी

उज्जैन  श्रावण के पहले सोमवार को राजाधिराज महाकाल की निकली भव्य सवारी के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साफ कर दिया है कि मौजूदा सवारी मार्ग इस विशाल जनसमूह के दबाव को सहने में सक्षम नहीं है। समय आ गया है कि अब बिना कोई देरी किए महाकाल सवारी मार्ग को मास्टर प्लान अनुसार 15 से 24 मीटर चौड़ा किया जाए। भीड़, अव्यवस्था और सीमित मार्ग की वजह से श्रद्धालुओं को जो कठिनाई हुई, वह प्रशासन के लिए चेतावनी से कम नहीं है। स्थितियों को देख शासन-प्रशासन ने इस मार्ग को चौड़ा करने का काम प्राथमिक सूची में शामिल कर लिया है। मालूम हो कि महाकाल सवारी मार्ग केवल एक रास्ता नहीं, यह आस्था की वह धारा है जिससे उज्जैन की सांस्कृतिक, धार्मिक और विकास की दिशा जुड़ी है। अब जबकि सिंहस्थ की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, तो इस मार्ग को उसकी गरिमा के अनुरूप बनाना समय की मांग है। प्रदेश सरकार, इसी वर्ष अप्रैल में इस कार्य के लिए 64 करोड़ रुपये स्वीकृत कर चुकी है, लेकिन अब तक ठेकेदार तय करने को निविदा प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है। इस विषय पर पिछले सप्ताह महापौर मुकेश टटवाल ने योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश नगर निगम के अधिकारियों को दिए थे। उनका ‘नईदुनिया’ से कहना है कि महाकाल सवारी मार्ग को अब उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड नहीं, बल्कि नगर निगम खुद अपने स्तर पर विस्तृत कार्य योजना बनाकर क्रियान्वित करेगा। यह काम उनकी प्राथमिकता में पहले भी था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। 4.3 किलोमीटर लंबे महाकाल सवारी मार्ग को मास्टर प्लान-2035 में 15 से 24 मीटर चौड़ा करने का लेख है। चौड़ीकरण के लिए सरकार 64 करोड़ रुपये अप्रैल में मंजूर कर चुकी है। स्पष्ट किया है कि मार्ग में डिवाइडर नहीं बनाएंगे। मार्ग में आने वाली ऐतिहासिक धरोहरों को फसाड़ लाइट से आकर्षक स्वरुप दिया जाएगा। बिजली, पानी और सीवरेज की सभी लाइनें भूमिगत की जाएंगीं। चौराहों को त्रिशूल, डमरू, नंदी जैसी कलाकृतियों से सजाया जाएगा। 2023 में बनी थी 110 करोड़ की योजना, विरोध के कारण काम नहीं हुआ महाकाल सवारी मार्ग काे चौड़ा करने को 110 करोड़ रुपये की योजना वर्ष 2023 में उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बनाई थी। सर्वे में 2500 भवन प्रभाव में आना चिह्नित किए थे। एक हिस्से का काम शुरू भी हुआ था, लेकिन विरोध और न्यायालय में याचिका के चलते काम आगे न बढ़ा और बंद हो गया। अब जब महाकुंभ सिंहस्थ-2028 निकट है, तो शासन इस कार्य को पुनः पूर्ण करने को तत्पर है। जन सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से बेहतर जरूरी श्रावण और भादौ मास में हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी को देखने लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भविष्य में सिंहस्थ जैसे आयोजनों में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की आमद तय मानी जा रही है। ऐसे में सवारी मार्ग का चौड़ीकरण यातायात, सुरक्षा और सुविधा तीनों ही दृष्टि से बेहद आवश्यक हो गया है।

मंत्री पटेल ने कहा- मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन जल संकट की आहट को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि ग्रामीण विकास एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे पंचायत प्रतिनिधियों को नियत और न्याय की भावना से स्वीकार करना होगा। मंत्री श्री पटेल धार में आयोजित पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री पटेल ने बताया कि सांसद रहते हुए उन्होंने सदैव कृषि और ग्रामीण विकास विषयक संसदीय समितियों में रहकर देश भर में इन विषयों को गहराई से समझने का प्रयास किया। प्रदेश में मंत्री के रूप में उन्हें इन नीतियों को लागू करने का अवसर मिला है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि अपने क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, वृक्षारोपण और योजनाओं का रिकॉर्ड पारदर्शिता से रखें। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का आहवान मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन जल संकट की आहट को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जल संरक्षण के लिये वृक्षारोपण ही सबसे स्थायी उपाय है। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत व्यापक पौधारोपण का आहवान किया और कहा कि “जो पौधा आप लगाते हैं, उसकी देखभाल भी आपकी व्यक्तिगत जवाबदेही है।” उन्होंने कहा कि “वृक्षारोपण अभियान 2025” में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन को भी बल मिलेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पुराने, जीर्ण-शीर्ण पंचायत भवनों को तोड़कर 48 लाख और 37 लाख रुपये की लागत से नए भवनों की मंजूरी दी गई है। कोई भी पंचायत अब भवन विहीन नहीं रहेगी। धार जिले में इस वर्ष 81 पंचायत भवन और 85 पुलियों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। चौथे चरण की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत अब मजरे-टोले को भी जोड़ा जा सकेगा, जिसके लिए राजस्व ग्राम की शर्त हटा दी गई है। केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रीमती सवित्री ठाकुर ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार की योजनाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाने का कार्य करें और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में जुट जाएँ। सम्मेलन में अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, विधायक नीना वर्मा और कालूसिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव,नीलेश भारती एवं चंचल पाटीदार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में अधिकारी सहित बड़ी संख्या में सरपंच व पंच उपस्थित रहे। 

पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर रोक, MP हाईकोर्ट करेगा व्यापक जांच और जवाबदेही तय

भोपाल /जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान एक अहम् फैसला सुनाते हुए पैरामेडिकल कॉलेजों को दी जा रही मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगा दी है , इस आदेश के बाद कॉलेज संचालकों में हड़कंप मच गया है, बता दें मध्य प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को लंबे इन्तजार के बाद मान्यता मिलने जा रही थी जिसे हाई कोर्ट ने रोक दिया है। नर्सिंग घोटाले के बाद अब पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और एडमिशन में गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर की डिवीज़नल बेंच ने एक महत्वपूर्ण स्थगन आदेश पारित किया है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दाखिल की गई नर्सिंग मामले की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पिछले दिनों एक आवेदन पेश कर कोर्ट को बताया गया था कि नर्सिंग की तरह पैरामेडिकल कॉलेजों के मान्यताओं में भी अनियमितताएँ की जा रही है। 2023-24 एवं 2024-25 सत्र के लिए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल दे रहा मान्यता  याचिका में कहा गया कि एमपी पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा निकल चुके एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से दी जा रही है और बगैर मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से सम्बद्धता प्राप्त किए सरकारी तथा निजी पैरामेडिकल कॉलेजों के द्वारा अवैध रूप से छात्रों के प्रवेश दिए जा रहे हैं, नर्सिंग घोटाले की जांच में जिन कॉलेजों को सीबीआई ने अनसूटेबल बताया है उन्हीं बिल्डिंग में पैरामेडिकल काउंसिल अब पैरा मेडिकल कॉलेजों की मान्यता दे रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूरी मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगाई   पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के आवेदन पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने इसे अलग जनहित याचिका (PIL) के रूप में पंजीबद्ध करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने इस गंभीर विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन व रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे, आज की सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य शासन के उस आदेश पर रोक लगा दी है जो पैरामेडिकल काउंसिल को एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से देने की अनुमति देता था। 24 जुलाई को होगी अगली सुनवाई  मामले में पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन और रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाया गया है बताते चलें कि मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ राजेंद्र शुक्ला, पैरामेडिकल काउंसिल के पदेन चेयरमैन हैं । इस मामले की अगली सुनवाई सभी नर्सिंग मामलों के साथ 24 जुलाई को होगी ।

म.प्र. में हर सेक्टर में हैं बड़ी संभावनाएं, स्पेन के निवेशकों को देंगे वर्ल्ड क्लास सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बेहिचक म.प्र. से जुड़िए और हमारी 18 हाईटेक औद्योगिक नीतियों का लाभ लें निवेश के लिए बढ़ाया गया हर कदम व्यापार-व्यवसाय में होगा मील का पत्थर साबित मध्यप्रदेश निवेशकों को केपिटल रिटर्न देने में पीछे नहीं रहेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मैड्रिड में इन्वेस्ट इन एमपी बिजनेस फोरम मीट में संबोधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत और स्पेन दो प्राचीन सभ्यताओं के संवाहक हैं। दोनों देशों ने नैतिक मूल्यों के आधार पर अपनी पुरा संस्कृति को आगे बढ़ाया है। दोनों देश जुड़वा भाईयों की तरह हैं। अब विकास के मामले में भी हम मिलकर आगे बढ़ेंगे। संस्कृति के साथ-साथ तकनीक में भी स्पेन की एक अलग ही पहचान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में इन्वेस्ट इन एमपी बिजनेस फोरम मीट को संबो‍धित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का सबसे तेजी से विकासशील प्रदेश है। यहां निवेश करना नि:संदेह फायदे का सौदा है। उन्होंने निवेशकों को मध्यप्रदेश की बेजोड़ खूबियां बताते हुए कहा कि यदि आप भारत में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो एक बार मध्यप्रदेश अवश्य आइये, मध्यप्रदेश को भूल नहीं पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में खनिज, पर्यटन, बड़े उद्योग, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री, तकनीकी विकास से जुड़े उद्योग स्थापित करने की अपार संभावनाएं हैं। भारत में एमपी टूरिज्म सबसे तेजी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भरपूर भू-संपदा उपलब्ध है, जिसमें नई तकनीक का इस्तेमाल करने से विकास की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश, भारत के मध्य क्षेत्र में स्थित है, इसलिए हम लॉजिस्टिक सेक्टर में अग्रणी बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अगर आप भारत के किसी और राज्य में भी उद्योग स्थापित करते हैं, तब भी आपको मध्यप्रदेश की आवश्यकता जरूर पड़ेगी। मध्यप्रदेश आंतरिक सड़कों, नेशनल हाईवेज, रेल और हवाई मार्ग से देश-विदेश से जुड़ा है। मध्यप्रदेश सभी सेक्टर्स में तेजी से आगे बढ़ने वाला भारत का राज्य बना है। हम अपने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में भी अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी, एग्री बेस्ड इंडस्ट्री और टेक्सटाईल सेक्टर में बड़ी संभावनाएं हैं। हम सभी सेक्टर्स में यहां आने वाले निवेशकों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं देने की क्षमता रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से आग्रह किया कि सुरक्षित निवेश के लिए आप बेहिचक मध्यप्रदेश से जुड़िए। हमारी 18 प्रकार की हाईटेक औद्योगिक नीतियों का लाभ लें। मध्यप्रदेश निवेशकों को केपिटल रिटर्न देने में पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की विकासशीलता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी प्रभावित किया है। मध्यप्रदेश में निवेश करने पर भारत सरकार की ओर से भी देशी-विदेशी निवेशकों को कई तरह की रियायतें दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में मेडिकल कॉलेजेस की संख्या भी तेजी से बढ़ाई जा रही है और नई मेडिकल डिवाईसेस के लिए देशी और विदेशी कंपनियां यहां निवेश कर रही हैं। अब मध्यप्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्पेन की शांतिप्रियता, सामुदायिक विकास, तकनीक के इस्तेमाल और फुटबॉल प्रेम ने भी यहां की अर्थव्यवस्था को बेहद मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि स्पेन आर्थिक व्यापार के मामले में भारत का छठा सबसे बड़ा साझेदार है। वर्तमान में स्पेन के साथ 9.32 बिलियन डॉलर का व्यापार हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्पेन के निवेशकों द्वारा मध्यप्रदेश में निवेश के लिए बढ़ाया गया हर एक कदम व्यापार-व्यवसाय के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव एवं एमडी टूरिज्म डॉ. इलैया राजा टी., एमडी एमपीआइडीसी श्री चंद्रमौली शुक्ला सहित फ्रेंड्स इन एमपी इन स्पेन के सदस्य एवं बड़ी संख्या में उद्योगपति/निवेशक उपस्थित थे। म.प्र. में हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म में निवेश के अवसर : प्रमुख सचिव पर्यटन श्री शुक्ला मध्यप्रदेश, इतिहास और विरासत की भूमि है। भारत में स्थित यूनेस्को की 62 विश्व धरोहर है जिसमें से 18 मध्यप्रदेश में है। संस्कृति और आध्यात्म की दृष्टि से मध्यप्रदेश अत्यंत समृद्ध है। प्रदेश में 2 ज्योतिर्लिंग के साथ विश्व की प्राचीनतम नदियों में से एक और प्रदेश में पूजनीय नदी माँ नर्मदा बहती है। आज के तनाव भरे जीवन में मां नर्मदा के किनारे स्थित सभी स्थल आपको अध्यात्म और सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन नीति 2025 की विशेषता बताते हुए प्रमुख सचिव श्री शुक्ला ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में निवेशकों के लिए प्रदेश में अपार संभावनाएं है। प्रदेश में हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म आदि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अवसर है। अपार संभावनाओं का भरोसेमंद स्थल मध्यप्रदेश : प्रमुख सचिव श्री राघवेन्द्र सिंह औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग के प्रमुख सचिव श्री राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि म.प्र. अपार संभावनाओं का भरोसेमंद निवेश स्थल है। प्रदेश का भौगोलिक विस्तार, संसाधनों की उपलब्धता, कुशल मानव संसाधन और स्थिर नेतृत्व इसे उद्योगों के लिए सबसे उपयुक्त गंतव्य बनाते हैं। स्पेन और भारत के बीच व्यापारिक संबंध लगातार सुदृढ़ हो रहे हैं। वर्ष 2024 में भारत से स्पेन को 5.93 बिलियन यूरो का निर्यात हुआ, जिसमें मध्यप्रदेश का योगदान 58.5 मिलियन यूरो का रहा।  

तीन साहसिक कदम: मोदी कैबिनेट ने ग्रीन एनर्जी के लिए 27K करोड़ तय किए, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा मजबूत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश की कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने वाले तीन बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई. इनमें एक ओर जहां कृषि जिलों के समग्र विकास की योजना को स्वीकृति दी गई, वहीं दूसरी ओर रेन्वेबल एनर्जी में बड़े पैमाने पर निवेश का रास्ता साफ किया गया. कैबिनेट ने “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” को 2025-26 से शुरू कर छह वर्षों के लिए मंजूरी दी है. इसका टारगेट 100 कृषि जिलों का विकास करना है. यह योजना नीति आयोग के ‘आकांक्षी जिलों’ कार्यक्रम से प्रेरित है, लेकिन यह खासतौर से कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर केंद्रित है. प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) योजना का मकसद कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल डाइवर्सिफिकेशन को प्रोत्साहित करना, टिकाऊ कृषि ऑप्शन को अपनाना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण की सुविधा बढ़ाना, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर करना शामिल है. इस योजना को 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं के कोऑर्डिनेशन के जरिए लागू किया जाएगा, जिसमें राज्य सरकारों की योजनाएं और निजी क्षेत्र की साझेदारी भी शामिल होगी. 100 जिलों का चयन कम उत्पादकता, कम फसल साइकिल और कम लोन डिस्ट्रिब्यूशन जैसे तीन प्रमुख मानकों के आधार पर किया जाएगा. हर राज्य से कम से कम एक जिला शामिल किया जाएगा. एनटीपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपये कैबिनेट ने एनटीपीसी लिमिटेड को रेन्वेबल एनर्जी क्षेत्र में निवेश के लिए मौजूदा सीमा से ऊपर जाकर 20,000 करोड़ रुपये तक निवेश की अनुमति दी है. यह निवेश एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NGEL) और इसकी सहायक कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों के जरिए किया जाएगा, ताकि 2032 तक 60 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल की जा सके. एनएलसी इंडिया लिमिटेड को 7,000 करोड़ रुपये की मंजूरी एनएलसीआईएल को भी 7,000 करोड़ रुपये के निवेश की विशेष छूट दी गई है, जो वह अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी NLC इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (NIRL) के जरिए रेन्वेबल एनर्जी प्रोजेक्ट में लगाएगी. इससे कंपनी को संचालन और वित्तीय लचीलापन मिलेगा. ग्रीन एनर्जी पर सरकार खर्च करेगी 27 हजार करोड़ एनटीपीसी को ग्रीन एनर्जी में निवेश के लिए 20000 करोड़ के निवेश को मंजूरी: मोदी कैबिनेट ने देश की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी NTPC को 20,000 करोड़ रुपये की मदद देने का फैसला किया है ताकि वो रिन्यूएबल एनर्जी (हरित ऊर्जा) में तेज़ी से निवेश कर सके. NLCIL को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार को मंजूरी: वहीं मोदी कैबिनेट ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) को 7,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार की मंजूरी दी है. 100 जिलों के लिए कृषि योजना को मंजूरी कैबिनेट ने 24 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक खर्च वाली प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दी है. कैबिनेट ने बुधवार को 6 साल के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दे दी, जिसमें 24,000 करोड़ रुपये के वार्षिक परिव्यय के साथ 100 ज़िले शामिल होंगे. केंद्रीय बजट में घोषित यह कार्यक्रम 36 मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगा. वहीं, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने को बढ़ावा देगा. केंद्रीय कैबिनेट में लिए गए फैसले की जानकारी साझा करते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाएगी, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करेगी और कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी करेगी. इस कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलने की उम्मीद है.