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पाठ्यक्रम में होगा बड़ा बदलाव, छात्रों को सिखाई जाएगी अपने राज्य की विरासत और भूगोल

भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम पर फोकस होने की वजह से स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रदेश के इतिहास, भूगोल, संस्कृति और सामाजिक-आर्थिक ढांचे की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में तय हुआ है कि पाठ्यक्रम का 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश के इतिहास, भौगोलिक-सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिवेश पर केंद्रित रहेगा। दरअसल, मध्य प्रदेश के स्कूलों में भाषा को छोड़कर अन्य सभी विषयों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम चलता है। अब प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विभाग के अधिकारियों को एनसीईआरटी के लिए पत्र लिखकर इस योजना के मुताबिक बदलाव करने की अनुमति मांगने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने यह निर्देश हाल में हुई नई शिक्षा नीति 2020 की टास्क फोर्स समिति की बैठक में दिए। मंत्री ने कहा कि प्रदेश की स्कूली शिक्षा में भी प्रदेश का इतिहास, धरोहर, सांस्कृतिक विरासत समेत अन्य स्थानीय पाठ्यक्रम शामिल होना चाहिए। एनसीईआरटी की पुस्तकों में 25 से 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम मध्य प्रदेश का होना चाहिए। एनसीईआरटी से अनुमति मिलने के बाद पाठ्यक्रम समिति स्थानीय स्तर का पाठ्यक्रम प्रदेश की स्कूली शिक्षा की किताबों में शामिल करेंगे। नए पाठ्यक्रम को राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एससीईआरटी) की ओर से तैयार किया जाएगा। एससीईआरटी एकल इकाई बनेगी राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को मजबूत किए जाने के लिए संचालक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। यह एकल इकाई के रूप में कार्य करेगी। इसके लिए एससीईआरटी को मजबूत करना होगा। अब बच्चे पढ़ेंगे अपने वीरों की कहानियां स्कूल एजुकेशन में नया अध्याय शुरू हो गया है. अब कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को महाराणा प्रताप, वीर दुर्गादास, शिवाजी और दयानंद सरस्वती जैसे महान व्यक्तियों की कहानियां पढ़ाई जाएंगी. इस नए सिलेबस का मकसद बच्चों में अपने राज्य के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के प्रति गर्व और आत्मविश्वास पैदा करना है. राजस्थान सरकार ने नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने के लिए शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है. अब कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को एक नया सिलेबस पढ़ाया जाएगा जिसमें राज्य के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और महापुरुषों के योगदान को प्रमुखता दी गई है. यह बदलाव 2025-26 के नए शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा. आइए जानें School Syllabus Change के बारे में विस्तार से.

अहमदाबाद विमान हादसे में अमेरिकी साजिश? पायलटों पर ठीकरा और बोइंग को बचाने की कोशिश!

अहमदाबाद  अहमदाबाद प्लेन क्रैश के करीब 1 महीने बाद आई शुरुआती जांच रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि विमान का फ्यूल स्विच बंद होने की वजह से यह दुर्घटना हुई है। एएआईबी की रिपोर्ट यह बताती है कि दुर्घटनाग्रस्त बोइंग विमान 787 ड्रीमलाइनर का फ्यूल स्विच बंद होने होने की वजह से दो पायलटों के बीच भ्रम पैदा हुआ जो शायद दुर्घटना की वजह बनी। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि दुर्घटना के समय एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि आपने फ्यूल स्विच क्यों बंद कर दिया है? इस पर दूसरे पायलट ने यह जवाब दिया कि उसने बंद नहीं किया है। संभवत: पायलटों ने फ्यूल स्विच को फिर से चालू कर दिया हो, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एएआईबी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि फ्यूल स्विच बंद होने की स्थिति में विमान के दोनों इंजन में फ्यूल का प्रवाह बंद हो गया, जो दुर्घटना की बड़ी वजह हो सकता है। वहीं, बोइंग की इस मामले में फिर सफाई आई है कि अमेरिका की सरकारी एजेंसी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) और बोइंग ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए बताया कि बोइंग प्लेन के फ्यूल स्विच लॉक एकदम सेफ हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं क्या यह अमेरिकी सरकार की साजिश है, जो वह बोइंग को बचा रही है?  आइए-समझते हैं। बोइंग और अमेरिकी एजेंसी ने क्या दी है सफाई FAA ने कहा है कि फ्यूल कंट्रोल स्विच का डिजाइन, लॉकिंग फीचर्स, बोइंग के अलग-अलग विमानों में एक ही है। फिर भी हम इसे खतरे की स्थित नहीं मानते, जिसके लिए किसी भी बोइंग विमान मॉडल पर एयरवर्थनेस डायरेक्टिव देने की जरूरत पड़े। FAA और बोइंग की यह नोटिफिकेशन 11 जुलाई को अहमदाबाद-लंदन प्लेन क्रैश की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद सामने आई, जिसमें इंजन फ्यूल कटऑफ स्विच पर सवाल उठाए गए थे। फ्यूल कंट्रोल स्विच विमान के इंजन में फ्यूल के बहाव को कंट्रोल करते हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर अमेरिकी सरकार बोइंग को क्यों बचा रही है। 6 साल में 2 बार बदला गया था थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल एयर इंडिया ने 2019 में बोइंग के निर्देश के बाद पिछले 6 सालों में अहमदाबाद-लंदन बोइंग 787-8 फ्लाइट के थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल (TCM) को दो बार बदला था। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इनवेस्टीगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 12 जुलाई को बताया कि अहमदाबाद-लंदन प्लेन में TCM को 2019 और 2023 में बदला गया था। TCM में फ्यूल कंट्रोल स्विच होते हैं, जो प्लेन क्रैश हादसे की जांच का केंद्र बन गए हैं। क्योंकि 12 जून को अहमदाबाद-लंदन फ्लाइट में ये स्विच टेकऑफ के तुरंत बाद बंद हो गए थे। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर कंपोजिट कार्बर फाइबर से बने हैं बोइंग 787 ड्रीमलाइनर एक आधुनिक, मिड-साइज, ट्विन-इंजन, वाइड-बॉडी जेट विमान है, जिसे अमेरिकी विमानन कंपनी बोइंग ने बनाया है। ये लंबी दूरी की उड़ानों के लिए डिजाइन किया गया है और पुराने बोइंग 767 को रिप्लेस करने के लिए लाया गया। ये फ्यूल-एफिशिएंट विमान है। इस विमान का 50% हिस्सा कार्बन फाइबर जैसे कम्पोजिट मटेरियल से बना है, जो इसे हल्का और मजबूत बनाता है। वहीं, ड्रीमलाइनर की खिड़कियां किसी भी कॉमर्शियल विमान में सबसे बड़ी हैं। केबिन का प्रेशर 1,900 मीटर की ऊंचाई जैसा रखा जाता है, जिससे ऑक्सीजन 8% ज्यादा रहती है और थकान कम होती है। केबिन में रंग बदलने वाली LED लाइट्स हैं, जो टाइम जोन बदलने का असर कम करती हैं। बोइंग की बैटरी में आ चुकी है खराबी की बात बोइंग 787 ड्रीमलाइनर अपनी सहायक बिजली इकाई (APU) के लिए और इलेक्ट्रॉनिक उड़ान प्रणालियों के लिए बैकअप के रूप में लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग करता है। इन बैटरियों को उनके हाई एनर्जी डेंसिटी और लॉन्ग लाइफ साइकिल के लिए चुना गया था। हालांकि, वे सुरक्षा मुद्दों से जुड़े रहे हैं, जिसमें ओवरहीटिंग और आग लगना शामिल है, जिसके कारण 2013 में पूरे 787 बेड़े को अस्थायी रूप से ग्राउंडेड कर दिया गया था। सितंबर 2012 में तत्कालीन सरकारी स्वामित्व वाली एयर इंडिया लिमिटेड (AIL) के बेड़े में शामिल होने के तुरंत बाद सभी छह नए बोइंग 787 'ड्रीमलाइनर्स' के बैच को उनकी लिथियम-आयन बैटरी की खराबी के कारण चार महीने से अधिक समय (17 जनवरी, 2013 से 4 जून, 2013 तक) के लिए रोक दिया गया था। बोइंग के विमानों की बैटरी में शॉर्ट सर्किट नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की 2017 की एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया था। कुल मिलाकर एआईएल ने मेसर्स बोइंग से 27 बी-787-800 विमानों का ऑर्डर दिया था। हाई एनर्जी डेंसिटी और लॉन्ग लाइफ के लिए चुने गए विमान में लिथियम ऑयन बैटरियों का इस्तेमाल सहायक बिजली इकाई (APU) को शुरू करने और इलेक्ट्रॉनिक उड़ान प्रणालियों के लिए बैकअप पावर प्रदान करने के लिए किया गया था। हालांकि, शॉर्ट-सर्किट या उच्च परिचालन तापमान होने पर वे आग लगने जैसे अंतर्निहित सुरक्षा जोखिम हैं। उस वक्त सीएजी ने विमान के मैकेनिकल खामी बताई गई थी। जनवरी 2013 में दो नए ड्रीमलाइनर 787-8 विमान जापान की दो एयरलाइन कंपनियों के बेड़े में शामिल किए गए थे। इनमें लगी लीथियम आयन (Li-Ion) बैटरी में आग लगने से इमरजेंसी लैंडिंग करवानी पड़ी। इसके बाद अमेरिका के फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने 3 महीने के लिए दुनिया भर में सभी ड्रीमलाइनर विमानों की उड़ानों पर रोक लगा दी थी। बोइंग ने फिर अपने बैटरी सिस्टम में सुधार किया। बोइंग के विमानों में खराबी की भी बात आई 2020 से 2022 के दौरान ड्रीमलाइनर में कई बार मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट की खबरें आईं। दरअसल, ड्रीमलाइनर एक वाइड-बॉडी पैसेंजर प्लेन है। इसके हिस्से अलग-अलग बनते हैं, जिन्हें बाद में जोड़ा जाता है। इस दौरान कई विमानों में बॉडी के जोड़े गए हिस्सों में ज्यादा गैप की शिकायत आई। बॉडी में इस्तेमाल होने वाले कार्बन-फाइबर के हिस्सों को भी ठीक से नहीं जोड़ा गया था। बॉडी का झुकाव भी ठीक नहीं था। 2020 से 2022 के दौरान बोइंग ने एयरलाइंस को ड्रीमलाइनर की डिलीवरी रोक दी। अमेरिकी संस्था FAA ने निगरानी बढ़ाई और कई दूसरी कंपनियों को एयरक्राफ्ट डिलीवर करने की मंजूरी दी। बोइंग ने भी माना कि ड्रीमलाइनर की मैन्युफैक्चरिंग में कई तरह की गड़बड़ी थी। हालांकि, बोइंग का दबाव अमेरिकी सरकार पर … Read more

स्वाद में मीठा, सेहत में जानलेवा – जलेबी और समोसा सिगरेट जितने खतरनाक!

नागपुर  भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने समोसा, जलेबी और लड्डू जैसे लोकप्रिय भारतीय नाश्तों को लेकर एक निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने अब सिगरेट की तरह इन नाश्तों को भी एक स्वास्थ्य चेतावनी के साथ परोसने की योजना बनाई है। इस कदम का उद्देश्य देश में बढ़ते मोटापे और इससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर लगाम लगाना है। मोटापे की बढ़ती समस्या स्वास्थ्य मंत्रालय के आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, भारत में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य बीमारी बनती जा रही है। मंत्रालय की मानें तो साल 2050 तक भारत में 44.9 करोड़ लोग मोटापे से ग्रस्त हो जाएंगे। जिससे भारत अमेरिका के बाद इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित देश बन सकता है। वर्तमान में, हर पांच में से एक शहरी वयस्क मोटापे का शिकार है। बच्चों में मोटापे की बढ़ती दर, गलत खानपान की आदतें और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने इस चिंता को और भी बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर के केंद्रीय संस्थानों जैसे कि नागपुर के AIIMS, को निर्देश दिया है कि वे 'तेल और शुगर बोर्ड' (Oil and Sugar Boards) लगाएं। इन बोर्डों पर खाद्य पदार्थों में मौजूद छिपे हुए फैट और चीनी की मात्रा की स्पष्ट जानकारी लिखें। समोसा, जलेबी, लड्डू, वड़ा पाव, पकोड़ा जैसे तले हुए और चीनी से भरपूर नाश्तों को इस सूची में शामिल किया गया है। मंत्रालय का मानना है कि इन खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में ट्रांस-फैट, संतृप्त वसा और चीनी की अधिक मात्रा होती है। जो मोटापे और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण हैं। ऐसे में सरकार कैफे, रेस्तरां और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मेन्यू कार्ड्स और पैकेजिंग पर स्वास्थ्य चेतावनी छापने की योजना बना रही है।  क्या बोले कार्डियॉलजिस्ट AIIMS नागपुर के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें यह आदेश मिल गया है और वे कैंटीन और सार्वजनिक जगहों पर ये बोर्ड लगाने की तैयारी कर रहे हैं। कार्डियॉलजिक सोसाइटी ऑफ इंडिया की नागपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. अमर अमाले ने कहा, 'यह खाने की चीज़ों पर लेबल लगाने की शुरुआत है, जो सिगरेट की चेतावनी जितनी ही ज़रूरी होगी।' उन्होंने आगे कहा कि हम सालों से कह रहे हैं कि चीनी और ट्रांस फैट अब नए तंबाकू हैं। लोगों को यह जानने का हक है कि वे क्या खा रहे हैं। भारत बनने वाला है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोटापा का केंद्र सरकार की चिट्ठी में कुछ डराने वाले आंकड़े दिए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2050 तक 44.9 करोड़ से ज़्यादा भारतीय या तो ज़्यादा वज़न वाले होंगे या मोटापे का शिकार हो जाएंगे। इससे भारत दुनिया में मोटापे का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा। शहरों में पहले से ही हर पांच में से एक वयस्क ज़्यादा वज़न वाला है। बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या भी चिंता का विषय है, जिसका कारण खराब खानपान और सुस्त जीवनशैली है। 'चीनी और तला भोजन दे रहा बीमारियां' अधिकारियों का कहना है कि यह पहल गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से लड़ने का एक हिस्सा है। इन बीमारियों का सीधा संबंध ज़्यादा चीनी और तेल वाले भोजन से है। एक बार लगने के बाद, ये बोर्ड सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में चुपचाप खड़े संतरी की तरह काम करेंगे। ये लोगों को याद दिलाएंगे कि दिखने में मासूम लड्डू में इतनी चीनी हो सकती है कि वह आपकी सेहत के लक्ष्यों को बर्बाद कर दे। पीएम के फिट इंडिया अभियान का हिस्सा वरिष्ठ मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा कि यह खाने पर पाबंदी लगाने के बारे में नहीं है। लेकिन अगर लोगों को पता चले कि एक गुलाब जामुन में पांच चम्मच चीनी हो सकती है, तो वे दूसरी बार खाने से पहले सोच सकते हैं। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'फिट इंडिया' अभियान को आगे बढ़ाता है। इसमें उन्होंने तेल के इस्तेमाल में 10% की कटौती करने की बात कही थी। अब नागपुर उस संदेश को सबसे आगे रखने के लिए तैयार है, भले ही इसका मतलब ऑफिस के स्नैक काउंटर पर कुछ अजीब नज़रों का सामना करना पड़े। इसलिए, अगली बार जब आप किसी सरकारी कैंटीन में समोसे के लिए हाथ बढ़ाएं, तो हैरान न हों अगर पास में एक रंगीन बोर्ड धीरे से कहे, समझदारी से खाएं। आपका भविष्य आपको धन्यवाद देगा। यह पहल लोगों को स्वस्थ रहने के लिए जागरूक करने की एक कोशिश है। सरकार चाहती है कि लोग खाने-पीने की चीज़ों में मौजूद चीनी और तेल की मात्रा के बारे में जानें और अपनी सेहत का ख्याल रखें। समोसा, जलेबी और लड्डू ही क्यों चुने गए? अब सोचने वाली बात यह है कि सिर्फ समोसा, जलेबी और लड्डू को ही क्यों चुना गया। तो बताते चले समोसा, जलेबी और लड्डू भारतीय संस्कृति में लोकप्रिय खाद्य पदार्थ हैं। चाय के साथ यग घर पर आए मेहमानों के लिए अक्सर समोसा परोसा जाता है। कोई भी शुभ अवसर हो तो मुंह मीठा करने के लिए लड्डू और जलेबी खाई जाती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इन सभी खाद्य पदार्थों में मौजूद उच्च कैलोरी, तेल, और चीनी इन्हें स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा बनाती है। समोसा: तेल में तला हुआ, जिसमें मैदा और आलू या मांस की स्टफिंग होती है, जो ट्रांस-फैट और कैलोरी से भरपूर होता है। जलेबी: चीनी की चाशनी में डूबी जलेबी में अत्यधिक शुगर होती है, जो मधुमेह और वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। लड्डू: घी और चीनी से बने लड्डू में संतृप्त वसा और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इन खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता और रोजमर्रा के खानपान में इनका व्यापक उपयोग इन्हें चेतावनी सूची में शामिल करने का प्रमुख कारण है।

जैन समाज ने की मुख्यमंत्री साय से मुलाकात, सामाजिक विषयों पर हुई चर्चा

विधानसभा भ्रमण पर आए प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव, मानव सेवा के कार्यों में समाज की भूमिका की दी जानकारी रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर में दुर्ग जिले से आए जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को जैन समाज द्वारा मानव सेवा एवं सामाजिक उत्थान के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के भ्रमण और सदन की कार्यवाही के अवलोकन के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक प्रेरणादायक अवसर रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को निकट से देखने का अवसर मिलना गौरवपूर्ण अनुभव है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सकारात्मक गतिविधियाँ प्रदेश के समावेशी विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को उनके सामाजिक कार्यों के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर दुर्ग विधायक श्री गजेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।

दुबई में एक वार्षिक ‘MP-JITO निवेश फोरम’ की स्थापना करने पर भी विचार

दुबई यात्रा का दूसरा दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में JITO प्रतिनिधियों से किया संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्किलिंग, नवकरणीय ऊर्जा, टेक्नोलॉजी व संयुक्त निवेश फोरम की संभावनाओं पर चर्चा   दुबई में एक वार्षिक 'MP-JITO निवेश फोरम' की स्थापना करने पर भी विचार  भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई प्रवास के दूसरे दिन जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) के प्रतिनिधियों के साथ निवेश और सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा की। उन्होंने मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश, स्किलिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के सरकार के विजन को साझा किया और JITO समुदाय को प्रदेश की औद्योगिक प्रगति का भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आज लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, स्थायित्व, दक्ष मानव संसाधन और अनुकूल औद्योगिक नीतियों के कारण निवेश के लिए देश का सर्वाधिक उपयुक्त राज्य बन चुका है। सरकार निवेशकों को न केवल आकर्षित कर रही है, बल्कि ज़मीन आवंटन से लेकर परियोजनाओं के क्रियान्वयन तक सक्रिय सहयोगी की भूमिका भी निभा रही है। बैठक के दौरान मध्यप्रदेश और JITO के बीच संभावित सहयोग के अनेक बिंदु पर चर्चा हुई जिनमें दुबई में एक वार्षिक 'MP-JITO निवेश फोरम' की स्थापना करने पर भी विचार किया गया। इस फोरम के माध्यम से मध्यप्रदेश की लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रिक वाहन, फूड प्रोसेसिंग और सेमीकंडक्टर जैसी प्रमुख परियोजनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर JITO प्रतिनिधियों को आगामी निवेश फोरम के आयोजन का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य की नवीन लॉजिस्टिक्स नीति न केवल निर्यातकों को प्रोत्साहित करती है, बल्कि अधोसंरचना डेवलपर्स के लिए भी अनेक प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने JITO से जुड़े टेक्सटाइल और फूड सेक्टर के कॉरपोरेट्स को उज्जैन, मंदसौर और बसई जैसे क्षेत्रों में ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुझाव दिया कि दुबई स्थित कौशल विकास संस्थान मध्यप्रदेश के ग्लोबल स्किल पार्क के साथ मिलकर संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करे, जिससे उद्योगों को कुशल मानव संसाधन मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ODOP यानि वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के तहत दालें, तिलहन और प्रोसेस्ड फूड जैसे कृषि उत्पादों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने के लिए JITO उद्यमियों के साथ समन्वय को प्राथमिकता दे रही है। बैठक के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा और ड्रोन जैसे भविष्य के उद्योगों पर भी बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने JITO से जुड़ी क्लीनटेक कंपनियों को प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिये आमंत्रित किया और बताया कि राज्य की नवकरणीय ऊर्जा नीति इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान मध्यप्रदेश को मिले ऐतिहासिक निवेश प्रस्तावों के बाद अब सरकार प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश केवल आर्थिक अवसर नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है, जहां नए उद्यम, रोजगार और नवाचार को साकार रूप मिलेगा। बैठक में JITO के पदाधिकारी, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ और प्रमुख उद्यमी उपस्थित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे मध्यप्रदेश में स्किलिंग, टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन और सामाजिक परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। JITO प्रतिनिधियों ने प्रदेश के साथ दीर्घकालिक औद्योगिक संबंधों में रुचि जताई और एक विस्तृत निवेश संवाद आयोजित करने का प्रस्ताव भी मुख्यमंत्री को सौंपा।  

जैविक धरोहर का संरक्षण: मुख्यमंत्री साय ने किया वेटलैण्ड मित्र बनने का आह्वान

नवा रायपुर में वेटलैण्ड एवं जैव विविधता संरक्षण पर उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन रायपुर, जैव विविधता एवं आर्द्रभूमियों (वेटलैण्ड्स) के संरक्षण के उद्देश्य से आज नवा रायपुर स्थित दण्डकारण्य अरण्य भवन में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा सहित कैबिनेट के सभी मंत्री एवं विधायकगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना केवल आधारभूत ढांचे के विकास से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जैविक विविधता की रक्षा से ही पूर्ण होती है। उन्होंने आह्वान किया कि हर जनप्रतिनिधि व नागरिक जैव विविधता एवं वेटलैण्ड संरक्षण के लिए व्यक्तिगत दायित्व समझें और 'वेटलैण्ड मित्र' बनकर इस अभियान को जनांदोलन में परिवर्तित करें। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि जैव विविधता और वेटलैण्ड्स का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का सवाल भी है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से जैव विविधता के संरक्षण में भागीदारी सुनिश्चित करने और “वेटलैण्ड मित्र” बनकर जनजागरण फैलाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश चतुर्वेदी ने व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने 1992 के अर्थ सम्मिट, जैव विविधता अधिनियम 2002, राष्ट्रीय जैव विविधता बोर्ड की भूमिका और जैव विविधता प्रबंधन समितियों की संरचना एवं कार्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य है, जहां जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं। आर्द्रभूमि संरक्षण के संदर्भ में प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वेटलैण्ड्स पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और जिला स्तरीय आर्द्रभूमि संरक्षण समितियों के गठन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि इन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर वेटलैण्ड्स की निगरानी एवं संरक्षण को मजबूती मिल रही है। कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि राज्य का गिधवा-परसदा पक्षी अभ्यारण्य अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित रामसर साइट बनने की पात्रता रखता है। इसके अतिरिक्त, बलौदाबाजार जिले के खोखरा ग्राम को छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट के रूप में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। कार्यशाला के अंत में सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से “वेटलैण्ड मित्र” के रूप में जुड़कर जैव विविधता और आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। यह भागीदारी राज्य में पर्यावरणीय चेतना को जनआंदोलन का रूप देने में सहायक होगी। इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव (वन)  ऋचा शर्मा, छत्तीसगढ़ वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव राजेश कुमार चंदेले सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई

दुबई यात्रा का दूसरा दिन वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में मध्यप्रदेश को स्थापित करने की दिशा में अहम पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव का टेक्समास मुख्यालय दौरा  मुख्यमंत्री यादव ने दुबई के प्रमुख कपड़ा व्यापारियों से मुलाकात कर उद्योग एवं निवेश से जुड़े अनेक विषयों पर चर्चा की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई भोपाल  दुबई दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टेक्सटाइल मर्चेंट्स ग्रुप (TEXMAS) के मुख्यालय का भ्रमण किया और दुबई के प्रमुख कपड़ा व्यापारियों से मुलाकात कर उद्योग एवं निवेश से जुड़े अनेक विषयों पर चर्चा की। इस उच्च स्तरीय संवाद का उद्देश्य भारत-यूएई समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत कपड़ा क्षेत्र में व्यापार, नवाचार और निवेश के अवसरों को सशक्त बनाना है। टेक्समास की स्थापना 1990 में दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संरक्षण में हुई थी। यह दुबई के टेक्सटाइल री-एक्सपोर्ट हब के रूप में विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। चेयरमैन नासिर अखून, वाइस चेयरमैन विनोद नागदा, और अन्य भारतीय मूल के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में दोनों पक्षों ने CEPA के तहत द्विपक्षीय व्यापार को गति देने पर सहमति जताई। मध्यप्रदेश: टेक्सटाइल निवेश का अगला गंतव्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टेक्समास के प्रतिनिधियों को बताया कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख वस्त्र उत्पादन राज्यों में से एक है। यहां “पीएम मित्रा पार्क (धार)” जैसे अत्याधुनिक टेक्सटाइल क्लस्टर वैश्विक निवेशकों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने राज्य की नई औद्योगिक नीति 2025 के तहत भूमि, पूंजीगत अनुदान, SGST प्रतिपूर्ति और श्रम सुविधा जैसे प्रावधानों से अवगत कराया। डिजिटल टेक्सटाइल नवाचार में सहयोग टेक्समास द्वारा अपनाए जा रहे ई-कॉमर्स, RFID इन्वेंट्री और डिजिटल लॉजिस्टिक्स समाधानों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस क्षेत्र में तकनीकी सहयोग हेतु यूएई कंपनियों को आमंत्रित किया। हरित वस्त्र एवं सतत उत्पादन पर विशेष ध्यान बैठक में टेक्समास द्वारा EU/US मानकों के अनुरूप हरित वस्त्र उत्पादन और लॉजिस्टिक्स में ग्रीन इनिशिएटिव्स पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश हरित टेक्सटाइल और जैविक कॉटन जैसे क्षेत्रों में तेजी से उभर रहा है। I2U2 साझेदारियों के लिए तैयार मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश I2U2 (इंडिया, इज़राइल, यूएई, यूएसए) के फोकस क्षेत्रों—क्लीन टेक, फूड लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक नवाचार में निवेश हेतु तैयार है। उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट्स के लिए टेक्समास जैसी संस्थाओं को आमंत्रित किया। टेक्सटाइल में युवा उद्यमियों के लिए अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार नई पीढ़ी के टेक्सटाइल उद्यमियों को प्रशिक्षण, लाइसेंसिंग मार्गदर्शन और पूंजीगत समर्थन देने के लिए एक विशेष स्टार्टअप पॉलिसी लागू कर रही है। उन्होंने TEXMAS से युवा उद्यमियों के साथ जुड़ने और B2B संवाद आयोजित करने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल सिर्फ निवेश प्रोत्साहन नहीं, बल्कि भारत-यूएई टेक्सटाइल व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। टेक्समास जैसे वैश्विक संगठनों से सहयोग प्राप्त कर मध्यप्रदेश को कपड़ा उद्योग में वैश्विक हब बनाने की राज्य सरकार की योजना अब वास्तविकता की ओर बढ़ रही है।  

नर्मदा नदी के आस-पास के क्षेत्रों में वृहद स्तर पर पौधरोपण के कार्यक्रम किये जायेंगे : मंत्री विजयवर्गीय

प्रदेश की जीवनरेखा निर्मल नर्मदा के लिये केन्द्र से ली जाएगी पूरी मदद : नगरीय विकास मंत्री विजयवर्गीय  नर्मदा नदी को निर्मल बनाये रखने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध : नगरीय विकास मंत्री विजयवर्गीय नर्मदा नदी के आस-पास के क्षेत्रों में वृहद स्तर पर पौधरोपण के कार्यक्रम किये जायेंगे : मंत्री विजयवर्गीय 2459 करोड़ रूपये की तैयार की गई है पहले चरण की योजना भोपाल नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है और नर्मदा जी को निर्मल बनाये रखने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना में नर्मदा नदी को निर्मल बनाये रखने की योजना में केन्द्र सरकार से हरसंभव मदद ली जायेगी। मंत्री विजयवर्गीय सोमवार को मंत्रालय में निर्मल नर्मदा योजना की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस योजना पर पहले चरण में 2459 करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे। बैठक में अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के अधिकारी मौजूद थे। नगरीय विकास मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन के पहले कंपनी के अधिकारी अपने स्तर पर भौतिक सर्वे कर लें। उन्होंने कहा कि अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के नदी किनारे शहरों में सीवरेज प्लांट के कार्य समय-सीमा में पूरे किए जाये। उन्होंने अधिकारियों से कहा‍कि ग्रामीण विकास, जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास के अधिकारियों के साथ समन्वय कर योजना के संबंध में वास्तविक जानकारी लेकर प्रोजेक्ट पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में निकलने वाले दूषित पानी को नदी में मिलने से रोकने और पानी के ट्रीटमेंट के उपाय को प्रोजेक्ट में शामिल करें। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा स्थल के आस-पास के क्षेत्रों में भी सर्वे का कार्य किया जाये। उन्होंने वर्तमान में कार्यरत और निर्माणाधीन सीवरेज प्लांट की स्थिति की जानकारी ली। नदी से लगे धार्मिक स्थलों का भी हो सर्वे मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि नर्मदा नदी के आस-पास अनेक धार्मिक स्थल हैं। इन क्षेत्रों में दूषित जल के ट्रीटमेंट के लिये प्लांट की स्थापना और उनको पर्यटन स्थल के रूप में कैसे विकसित किया जा सकता है, इसको भी कार्ययोजना में शामिल किया जाये। नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि नेशनल रिवर कंजरवेशन प्रोजेक्ट के अंतर्गत नर्मदा नदी की स्वच्छता के लिये वर्ष 2025 को ध्यान में रखकर योजना तैयार की गयी है। उन्होंने बताया कि नदी से लगे शहरों में अधिक से अधिक आवासों को नजदीक के सीवरेज प्लांट से जोड़ने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। बैठक में तय हुआ कि नदी के आस-पास के क्षेत्रों के नगरीय निकायों के माध्यम से वृहद स्तर पर पौधरोपण के कार्यक्रम किये जाएं। निर्मल नर्मदा योजना योजना का उद्देश्य नर्मदा नदी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट जल उपचार कर पुन: उपयोग की प्रणाली निर्मित कर नदी को प्रदूषण मुक्त करना। उपचारित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा देना। प्रदेश में नर्मदा नदी की कुल लंबाई 1077 किलोमीटर है। इसके अंतर्गत 54 शहरी क्षेत्र और 818 ग्रामीण क्षेत्र आते हैं। योजना में 27 जिलों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किया गया है।  

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने रोगी कल्याण समिति की बैठक में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश

आदर्श चिकित्सालय बनेगा गोविंदपुरा सिविल अस्पताल: राज्यमंत्री श्रीमती गौर गोविंदपुरा सिविल अस्पताल से 5 लाख से अधिक लोगों को होगा लाभ: राज्यमंत्री श्रीमती गौर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने रोगी कल्याण समिति की बैठक में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा है कि भोपाल के हथाईखेड़ा क्षेत्र स्थित गोविंदपुरा शासकीय सिविल अस्पताल पांच लाख से अधिक आबादी के लिए आधुनिक और समर्पित स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में विकसित होगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने सोमवार को रोगी कल्याण समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि अस्पताल का विस्तार कर इसे आदर्श चिकित्सालय के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे आमजन को बेहतर इलाज और सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि महिला मरीजों की देखभाल को प्राथमिकता दी जाए और अस्पताल स्टाफ मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार रखे। सीएसआर से आएंगे आधुनिक उपकरण राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि सीएसआर मद से अस्पताल में पंजीयन के लिये कंप्यूटर के अलावा स्टेशनरी, चादरें व अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिये समर्पित यूनिट की स्थापना के साथ ही आभा आईडी जनरेशन के लिए कंप्यूटर और इंटरनेट की सुचारु व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। स्टाफ क्वार्टर और इंटर्नशिप की योजना बैठक में स्टाफ क्वार्टर निर्माण की योजना पर चर्चा हुई। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने मेडिकल स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे अस्पताल को अतिरिक्त मानव संसाधन मिल सकेगा और विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हो सकेगा। सुरक्षा-बुनियादी सुविधाओं पर दें ध्यान: राज्यमंत्री श्रीमती गौर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन से अग्निशमन प्रणाली के नवीनीकरण और नगर निगम से आवश्यक एनओसी जल्द प्राप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रात के समय अस्पताल परिसर की सुरक्षा के लिए पुलिस गश्त बढ़ाई जाए। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, प्रसूति कक्ष और सभी वार्डों में पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। आधुनिकता से लैस होगा अस्पताल वर्तमान में 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में 11 चिकित्सा अधिकारी, 20 नर्सिंग ऑफिसर, 3 लैब टेक्नीशियन, 2 एक्स-रे टेक्नीशियन, 3 फार्मासिस्ट और 20 आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएँ दे रहे हैं। भविष्य में यहां अतिरिक्त स्टाफ, आधुनिक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बैठक में सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा, मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. संजय खरे, अधीक्षक डॉ. अब्दुल हफीज, पार्षद श्रीमती छाया ठाकुर, श्रीमती ममता विश्वकर्मा सहित अस्पताल प्रबंधन और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने औद्योगिक, अधोसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया

दुबई प्रवास का दूसरा दिन भारतीय दूतावास स्तर पर स्थाई संपर्क तंत्र विकसित करने पर सहमति मध्यप्रदेश की छवि ब्रांड इंडिया के अंतर्गत वैश्विक स्तर पर स्थापित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने औद्योगिक, अधोसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया एमपी डे से लेकर ईवी और पर्यटन तक कई सेक्टर्स पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कॉउन्सल जनरल ने की चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के तीन दिवसीय दुबई दौरे के दूसरे दिन की शुरुआत भारतीय कॉउन्सल जनरल श्री सतीश कुमार सिवन द्वारा आयोजित ब्रेकफास्ट ब्रीफिंग से हुई। बैठक में भारतीय दूतावास स्तर पर एक स्थाई संपर्क तंत्र विकासित किये जाने पर  सहमति बनी जिससे मध्यप्रदेश और यूएई के बीच संस्थागत संवाद के निरंतरता बने रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की छवि ब्रांड इंडिया के अंतर्गत वैश्विक स्तर पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने में भारतीय मिशन की निर्णयाक भूमिका हो सकती है। ताज बिजनेस बे स्थित बॉम्बे ब्रैसरी में इस मुलाकात में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को यूएई में भारत की विभिन्न गतिविधियों और संभावित सहयोग क्षेत्रों की जानकारी दी गई। बैठक के दौरान जिन विषयों पर प्रमुखता से चर्चा हुई, उनमें मध्यप्रदेश प्रवासी व्यवसायियों को निवेश के लिए प्रेरित करने के विशेष प्रयास, दुबई-मध्यप्रदेश के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाएं और दुबई में “एमपी डे” आयोजित करने के लिए भारतीय मिशन की भागीदारी जैसे अहम विषय शामिल रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने औद्योगिक, अधोसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि दुबई के प्रमुख औद्योगिक समूहों से मध्यप्रदेश उद्योग विभाग के सीधे संपर्क के लिए मिशन स्तर पर समन्वय किया जाएगा। साथ ही कृषि, टेक्सटाइल, ईवी, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में कॉन्सुलेट की अगुवाई में सेक्टर-विशेष राउंडटेबल आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी प्रस्तावों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ लिया। कॉउन्सल जनरल श्री सिवन ने जानकारी दी कि दुबई में कार्यरत मध्यप्रदेश मूल के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम से जुड़े व्यवसायियों की पहचान कर उन्हें प्रदेश सरकार की अनुकूल नीतियों से जोड़ा जा सकता है। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं रेखांकित की गईं, जिसमें विशेष रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सौर ऊर्जा से जुड़ी संस्थाएँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन सभी प्रस्तावों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ लिया और कहा कि मध्यप्रदेश की छवि को ब्रांड इंडिया के अंतर्गत वैश्विक स्तर पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने में भारतीय मिशन की भूमिका निर्णायक हो सकती है। ब्रीफिंग के दौरान अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र सिंह, प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति श्री शिवशेखर शुक्ला, सचिव एवं आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।