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IMF की चेतावनी: 2029 में द्वितीय विश्वयुद्ध जैसा माहौल, भारत की स्थिति क्या होगी?

 नई दिल्ली ग्लोबल टेंशन के बीच एक और टेंशन बढ़ाने वाली खबर आई है. ये खबर दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर को एक बड़ी चेतावनी भी है. दरअसल, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने एक रिपोर्ट जारी की है।  आईएमएफ की 'फिस्कल मॉनिटर' रिपोर्ट के अनुसार दुनिया पर कर्ज का बोझ इतना बढ़ता जा रहा है कि साल 2029 तक यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 100 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह एक ऐसी स्थिति है जो सामान्य समय में नहीं देखी जाती है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दुनियाभर में संकट का माहौल जारी रहा, तो साल 2029 तक वैश्विक सरकारी कर्ज (Global Debt) दुनिया की कुल GDP के 100% तक पहुंच सकता है. चिंता की बात ये है कि इस तरह का डेटा आखिरी बार दूसरे विश्व युद्ध के बाद देखने को मिला था।  द्वितीय विश्वयुद्ध जैसी स्थिति की आहट IMF की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल 2025 में वैश्विक कर्ज करीब 94% GDP तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसमें लगातार बढ़ोतरी की आशंका है. इसका सीधा मतलब है कि दुनिया जितना एक साल में कमाती है, उतना ही पैसा कर्ज के रूप में बकाया हो सकता है।  रिपोर्ट की मानें तो दुनिया आखिरी बार कर्ज के इस स्तर पर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहुंची थी. उस समय युद्ध की विभीषिका और युद्ध के बाद इंफ्रा पर बेतहाशा खर्चों ने देशों को कर्ज के जाल में धकेल दिया था. करीब 80 साल के बाद दुनिया फिर से उसी मोड़ पर खड़ी दिख रही है. एक तरह के उस समय के मुकाबले अभी स्थिति ज्यादा गंभीर है. क्योंकि उस समय केवल युद्ध की वजह से ऐसी स्थिति आई थी, जबकि मौजूदा समय में केवल युद्ध नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे, ऊंची ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव भी हैं।  IMF की इस रिपोर्ट कर्ज बढ़ने के कई बड़े कारण बताए गए हैं.  1. ग्लोबल तनाव बड़ी वजह सबसे प्रमुख वजह है दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव. खासकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है, जिससे सरकारों का खर्च बढ़ गया है. कई देशों में जनता पर बोझ न पड़े इसके लिए अतिरिक्त सब्सिडी की दी जा रही है, इसके लिए सरकारों को कर्ज लेना पड़ रहा है।  2. महंगाई बढ़ने का खतरा इसके अलावा महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी बड़ी वजह है. जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो सरकारों के लिए पुराने कर्ज को चुकाना और नया कर्ज लेना दोनों महंगा हो जाता है. इससे कुल कर्ज का बोझ और तेजी से बढ़ता है. पिछले कुछ वर्षों में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं. इस कारण सरकारों के लिए पुराना कर्ज चुकाना और नया कर्ज लेना, दोनों ही महंगा हो गया है. वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में ब्याज भुगतान का हिस्सा 2% से बढ़कर 3% हो गया है।  3. आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया  IMF ने यह भी कहा है कि कई देश लगातार बजट घाटे (Fiscal Deficit) में चल रहे हैं, यानी उनकी आमदनी कम और खर्च ज्यादा है. इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकारें उधार ले रही हैं, जिससे कर्ज का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है.  यही नहीं, सबसे ज्यादा चोट विकासशील और गरीब देशों पर पड़ने वाला है. खासकर जिन देशों की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है या जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है. ऐसे देशों में कर्ज चुकाने की क्षमता सीमित होती है, जिससे आर्थिक संकट का खतरा बढ़ जाता है।  इस चुनौती से निपटने के लिए IMF ने देशों को सलाह दी है कि वे अपने खर्च पर काबू रखें, सिर्फ जरूरतमंद लोगों को ही वित्तीय सहायता दें और लंबी अवधि में कर्ज कम करने की ठोस योजना बनाएं।  भारत के लिए क्या है संकेत? दुनिया भर की खराब स्थिति के बीच आईएमएफ ने भारत को एक 'ब्राइट स्पॉट' बताया है. रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपने प्राथमिक खर्चों पर नियंत्रण रखकर अपनी राजकोषीय स्थिति में सुधार किया है. भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ के कारण आने वाले समय में इसके कर्ज के अनुपात में स्थिरता या कमी आने की उम्मीद है. फिलहाल भारत का कर्ज-जीडीपी अनुपात 84% के करीब है. जबकि अमेरिका का कर्ज 2031 तक उसकी जीडीपी का 142% होने का अनुमान है, जबकि चीन का कर्ज 127% तक पहुंच सकता है। 

महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होगी आधी कीमत में, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला

आधी कीमत में महिलाओं के नाम होगी प्रॉपर्टी, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का फैसला, प्रदेश की तस्वीर बदलने वाला कदम महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होगी आधी कीमत में, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: महिलाओं को मिलेगी आधी कीमत पर प्रॉपर्टी, प्रदेश की तस्वीर बदलने की दिशा में कदम रायपुर छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने एक ही झटके में प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक दिशा बदलने वाले दो बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है। बुधवार को रायपुर में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने UCC यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए हाई-लेवल कमेटी के गठन और महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री शुल्क में 50% कटौती का ऐलान किया। इसका उद्देश्य राज्य में कानूनों में एकरूपता लाना और महिलाओं को संपत्ति का अधिकार दिलाने में मदद करना है, जिसे ड्राफ्ट तैयार कर विधानसभा में पेश किया जाएगा। UCC के लिए रंजना देसाई फॉर्मूला छत्तीसगढ़ सरकार ने वही रास्ता चुना है जो उत्तराखंड ने अपनाया था। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी नागरिकों, कानूनी विशेषज्ञों और संस्थाओं से सीधा संवाद करेगी। एक समर्पित वेब पोर्टल के जरिए जनता की राय ली जाएगी। इसका मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को खत्म कर एक समान कानून लाना है। खजाने पर 153 करोड़ की चोट कैबिनेट ने महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50% की छूट को मंजूरी दी है। हालांकि, इससे सरकारी खजाने पर 153 करोड़ रुपये का सालाना बोझ पड़ेगा, लेकिन सरकार इसे खर्च नहीं बल्कि निवेश मान रही है। प्रशासन का तर्क है कि इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर संपत्ति का स्वामित्व बढ़ेगा, जो लंबे समय में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 2026 के बड़े मिशन की तैयारी UCC का मुद्दा सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक महत्व रखता है। रंजना प्रकाश देसाई वही जस्टिस हैं जिन्होंने उत्तराखंड के UCC ड्राफ्ट में मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्हें छत्तीसगढ़ की कमान सौंपना यह साफ करता है कि सरकार बिना किसी देरी के एक सटीक और कानूनी रूप से मजबूत मॉडल चाहती है। वहीं, रजिस्ट्री में छूट देना एक चतुर आर्थिक दांव है, जो मध्यम वर्ग की महिलाओं को सीधे तौर पर सरकार से जोड़ता है। यह कदम विपक्षी दलों के लिए महिला कार्ड और सांप्रदायिक कार्ड दोनों को एक साथ फेल करने की रणनीति जैसा है।     छत्तीसगढ़ में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित।     जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में जनता और विशेषज्ञों से ली जाएगी राय।     महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री फीस अब आधी होगी, जिससे मालिकाना हक बढ़ेगा।     राजस्व में ₹153 करोड़ की कमी के बावजूद इसे सामाजिक निवेश बताया गया।     कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी के बाद विधानसभा में विधेयक के रूप में लाया जाएगा।  

धीरेंद्र शास्त्री की संस्था को मिली केंद्र सरकार की मंजूरी, विदेशों से भी आएगा दान

छतरपुर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम को अब विदेश से पैसा (दान) लेने की सरकारी मंजूरी मिल गई है. यह मंजूरी भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत दी है. यानी अब बागेश्वर धाम से जुड़ी संस्था विदेश में रहने वाले लोगों से भी कानूनी तरीके से दान ले सकेगी. पहले ऐसा करने के लिए खास अनुमति जरूरी होती थी, जो अब मिल गई है।  धीरेंद्र शास्त्री की देखरेख में काम करने वाली धार्मिक संस्था बागेश्वर जन सेवा समिति ग्राम गड़ा जिला छतरपुर मध्य प्रदेश में स्थित है. यह संस्था धार्मिक (हिंदू), सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में काम करती है. अब विदेश से मिलने वाले फंड का उपयोग इन सभी कामों को आगे बढ़ाने में किया जा सकेगा।  बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पिछले कुछ समय से काफी चर्चा में हैं. उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और उनके अनुयायी भारत ही नहीं, विदेशों में भी मौजूद हैं. ऐसे में यह मंजूरी उनके लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।  विदेशी भक्त अब दे सकेंगे दान दरअसल, अभी यह नियम था कि विदेशी चंदा के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी। अब यह अनुमित लेने की जरूरत नहीं है। विदेशी भक्त उनकी संस्था के खाते में सीधे दान की राशि डाल सकते हैं। इस धार्मिक संस्था का नाम बागेश्वर जन सेवा समिति गड़ा में स्थित है। यह संस्था सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में काम करती है। बागेश्वर धाम प्रबंधन विदेशी फंड का उपयोग सभी कामों के लिए किया जा सकेगा। विदेशी दान का रखना होगा हिसाब वहीं, विदेशों से मिलने वाली राशि का हिसाब संस्था को रखना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि उन पैसों को कहां खर्च किया गया। इसकी जानकारी केंद्र की सरकार को देनी होती है। साथ ही दान की यह राशि एक ही खाते में आएगी। विदेशों में भी है बाबा की प्रसिद्धि     बाबा बागेश्वर की प्रसिद्धि देश ही नहीं विदेश में भी है     यूएई से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक में होती है बाबा की कथाएं     अब विदेशी भक्तों से बाबा की संस्था को मिल सकेगा दान 15 एनजीओ को मिली है अनुमति गौरतलब है कि 15 अप्रैल को 38 एनजीओ को एफसीआरए रजिस्ट्रेशन दिया गया है। ये संस्थाएं विदेशों से दान ले सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें पश्चिम बंगाल के बोलपुर, बिहार के पूर्णिया में रामकृष्ण मिशन, दिल्ली में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, कर्नाटक के धर्मस्थल द इंस्टीट्यूशन और यूपी के आगरा में राधा स्वामी सस्संग शामिल हैं। पांच साल तक वैध होता है यह रजिस्ट्रेशन एफसीआरए रजिस्ट्रेशन पांच साल के लिए वैध होता है। इसके बाद इसे रिन्यू करवाने के लिए एनजीओ को फिर से आवेदन करना होता है। वहीं, 2015 से अब तक 18000 से ज्यादा एनजीओ को एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द किए जा चुके हैं। मुनेश्वर कुमार हालांकि, इस मंजूरी के साथ कुछ जरूरी नियम भी जुड़े होते हैं. FCRA के तहत जो भी संस्था विदेश से पैसा लेती है, उसे पूरा हिसाब रखना होता है. यानी पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ, इसकी जानकारी सरकार को देनी होती है. साथ ही, एक तय बैंक खाते के जरिए ही यह लेन-देन करना होता है और समय-समय पर रिपोर्ट भी जमा करनी पड़ती है।  संस्था को सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा. इस फैसले से बागेश्वर धाम की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. यह संस्था दान के जरिए मिलने वाले फंड से शिक्षा, सेवा और अन्य योजनाओं पर काम करती है।  इन संस्थाओं को भी मिली मंजूरी  बागेश्वर धाम के अलावा, इस कैटेगरी के तहत रजिस्टर्ड अन्य संस्थाओं में पश्चिम बंगाल के बोलपुर और बिहार के पूर्णिया में रामकृष्ण मिशन, दिल्ली में 'दिव्य ज्योति जागृति संस्थान', कर्नाटक के धर्मस्थल में 'द इंस्टीट्यूशन' और उत्तर प्रदेश के आगरा में 'राधा स्वामी सत्संग' शामिल हैं। FCRA रजिस्ट्रेशन पांच साल के लिए वैध होता है, जिसके बाद NGO को इसे रिन्यू करवाने के लिए आवेदन करना होता है। 2015 से अब तक 18,000 से ज्यादा NGO के FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द किए जा चुके हैं। 15 अप्रैल तक, देश में 14,538 FCRA-रजिस्टर्ड NGO सक्रिय हैं। नए विधेयक पर सरकार को झटका संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने 2010 के अधिनियम में संशोधन करने के लिए 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, विपक्षी दलों के हंगामे के बाद, इस पर चर्चा और इसे पारित करने का काम टाल दिया गया। चुनावी राज्यों तमिलनाडु और केरल के मुख्यमंत्रियों एवं ईसाई समूहों ने इस विधेयक का विरोध किया। यह मंत्रालय को किसी NGO की संपत्ति और परिसंपत्तियों को अपने कब्ज में लेने का अधिकार देता है, यदि उस NGO का FCRA पंजीकरण रद्द या निलंबित कर दिया जाता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अबू सलेम की रिहाई की अर्जी खारिज की, कहा- ‘2030 से पहले रिहाई संभव नहीं’

 मुंबई 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट और अन्य मामलों में सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने उसकी समय से पहले रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वह 2030 से पहले जेल से बाहर नहीं आ सकता।  जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि सलेम की याचिका समय से पहले और आधारहीन है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 25 साल की सजा पूरी होने से पहले किसी तरह की रियायत या रिमिशन (छूट) पर विचार नहीं किया जा सकता।  हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह सजा पूरी होने से एक महीने पहले ही रिमिशन पर विचार करे. यानी सलेम के मामले में यह प्रक्रिया नवंबर 2030 के आसपास ही शुरू हो सकती है।  कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने सजा को 25 साल तक सीमित करते हुए किसी भी अतिरिक्त छूट का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है. इसलिए इससे पहले किसी तरह की राहत देना संभव नहीं है।  अबू सलेम की दलील क्या थी? अबू सलेम ने अपनी याचिका में कहा था कि वह 25 साल की सजा लगभग पूरी कर चुका है. उसने अपने अंडरट्रायल अवधि, सजा के बाद की जेल अवधि और जेल में मिली छूट (रिमिशन) को जोड़कर यह दावा किया था कि अब उसे रिहा किया जाना चाहिए. उसकी ओर से वकील फरहाना शाह ने कोर्ट में दलील दी।  केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने इस दलील का विरोध किया. उन्होंने कहा कि सलेम की याचिका समय से पहले दायर की गई है और इसमें कोई दम नहीं है. सरकार का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 25 साल की सजा का मतलब वास्तविक जेल में बिताया गया समय है, न कि वह अवधि जिसमें रिमिशन जोड़कर सजा कम की जाए।  सीबीआई और जेल प्रशासन की ओर से भी इस याचिका का विरोध किया गया और कहा गया कि सलेम को कम से कम 25 साल जेल में रहना ही होगा. हाईकोर्ट ने सरकार और सीबीआई के तर्कों से सहमति जताई और कहा कि सलेम की याचिका पूरी तरह गलत आधार पर दायर की गई है. अदालत ने कहा कि रिमिशन को जोड़कर सजा की गणना करना इस मामले में लागू नहीं होता, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सजा को 25 साल की निश्चित अवधि में सीमित कर दिया है।  कब तक जेल में रहेगा अबू सलेम? अबू सलेम को पुर्तगाल से प्रत्यर्पण (Extradition) के जरिए नवंबर 2005 में भारत लाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्यर्पण समझौते के तहत उसकी उम्रकैद की सजा को 25 साल तक सीमित किया था. इस आधार पर देखा जाए तो सलेम की 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी. इसके बाद ही उसकी रिहाई या किसी तरह की राहत पर विचार किया जा सकता है. अबू सलेम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में दोषी है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. इसके अलावा वह एक व्यवसायी प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी सजा काट रहा है। 

PM मोदी का संदेश: ‘समस्या का समाधान सैन्य टकराव से नहीं

नई दिल्ली  दुनिया इस वक्त जिस तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है, उसमें ताकत और टकराव की राजनीति फिर से केंद्र में नजर आ रही है. ऐसे माहौल में भारत की ओर से शांति और संवाद का संदेश देना अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान इसी सोच को सामने लाता है, जहां उन्होंने साफ कहा कि किसी भी समस्या का हल सैन्य टकराव से नहीं निकल सकता. यह बयान सिर्फ एक कूटनीतिक लाइन नहीं बल्कि भारत की उस नीति को दर्शाता है जो लंबे समय से बातचीत और संतुलन पर आधारित रही है. खास बात यह है कि यह संदेश ऐसे समय आया है जब यूक्रेन से लेकर वेस्ट एशिया तक हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।  प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भारत न सिर्फ शांति की बात करता है, बल्कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर सख्त रुख भी रखता है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है. यानी एक तरफ जहां भारत संवाद का समर्थन करता है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा और सख्ती के बीच संतुलन बनाए रखने की नीति भी अपनाता है।  क्या बोले पीएम मोदी, क्यों अहम है बयान?     नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक हालात पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व एक गंभीर और तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है, इसका असर सभी देशों पर पड़ रहा है. ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रिया दोनों स्थायी और टिकाऊ शांति के पक्ष में खड़े हैं।      पीएम मोदी ने कहा कि यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हर जगह भारत स्थिर और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करता है. उन्होंने यह भी दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई समझौता नहीं किया जा सकता और इसे खत्म करना सभी देशों की साझा प्रतिबद्धता होनी चाहिए।      इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर भी अहम बातें सामने आईं. पीएम मोदी ने ऑस्ट्रिया के साथ रिश्तों को नए दौर में ले जाने की बात कही. इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया. साथ ही आईआईटी दिल्ली और मॉन्टान यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू को ज्ञान साझेदारी का बड़ा उदाहरण बताया गया।  भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों में नया अध्याय पीएम मोदी ने कहा कि चार दशकों बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हालिया समझौतों के बाद रिश्तों में नया अध्याय शुरू हुआ है. भारत का टैलेंट और ऑस्ट्रिया की इनोवेशन क्षमता मिलकर नए अवसर पैदा कर सकती है।  ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने क्या कहा? ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने अपनी भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और यह करीब 3 बिलियन यूरो तक पहुंच चुका है. स्टॉकर ने यह भी बताया कि लगभग 160 ऑस्ट्रियाई कंपनियां भारत में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को और मजबूत बना रही हैं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – नर्मदापुरम-टिमरनी स्टेट हाईवे तरक्की का खोलेगा नया मार्ग

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज का दिन भारत के लोकतंत्र के इतिहास का बड़ा दिन है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 21वीं शताब्दी के सबसे बड़े निर्णय नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत हुई है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम बहनों के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। नारी केवल सृष्टि की जननी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की उन्नति की वास्तविक सूत्रधार है। जब हम विकसित भारत की कल्पना करते हैं, तो उसकी नींव में आधी आबादी के सामर्थ्य, संघर्ष और सफलता की कहानियां स्पष्ट दिखाई देती हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी सामर्थ्य को संवैधानिक मान्यता देने और लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के लिए नेतृत्व के नए द्वार खोलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों के सामाजिक-आर्थिक उन्नयन के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी समान रूप से ध्यान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 972 करोड़ से अधिक लागत के 72 किलोमीटर लंबे नर्मदापुरम-टिमरनी स्टेट हाईवे-67 का उन्नयन एवं पुनर्निर्माण कार्य के भूमि-पूजन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को नर्मदापुरम जिले के सिवनी-मालवा में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री और नर्मदापुरम के प्रभारी राकेश सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पहले से ही स्थानीय निकाय और नगरीय निकाय चुनावों में 50 प्रतिशत पद बहनों के लिए आरक्षित हैं। राज्य सरकार बहनों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, राज्य सरकार जो कहती है, उसे पूरा करती है। प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को अब तक 55 हजार करोड़ रूपए से अधिक राशि दी जा चुकी है। लाड़ली बहना योजना की शुरुआत से लेकर अब तक प्रति बहन 40 हजार 500 रुपए से अधिक राशि बहनों के बैंक खातों में आई है। बहनें चिंता न करें, योजना की राशि बढ़कर 1500 रुपए करने के साथ आगे भी जो संभव होगा वह किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। प्रदेश में पहली बार शासकीय स्कूलों के बच्चों को "माता यशोदा योजना" के अंतर्गत नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटे जाएंगे। हमारे बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से तंदुरुस्त बनेंगे। प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने और गौपालन को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए "डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना" की शुरू की है। इससे हमारे भाई-बहनों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार ने कठिन समय में सड़क पर घायलों की मदद के लिए राहवीर योजना शुरू की है, जिसमें घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार रुपए की राशि प्रोत्साहन स्वरूप देने की व्यवस्था है। मुश्किल वक्त में गरीब-जरूरतमंदों की मदद के लिए एयर एम्बुलेंस भी संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि, पर्यटन, उद्योग, वन्य जीव और जनजातीय क्षेत्रों को समेटे नर्मदापुरम जिला विविधता से परिपूर्ण है। पचमढ़ी में राजा भभूत सिंह के नाम पर कैबिनेट बैठक आयोजित की गई थी। नर्मदापुरम में नर्मदा लोक भी बन रहा है। नर्मदापुरम में उद्योग और कृषि के विकास के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सड़कें विकास का आधार हैं, इस तथ्य को दृष्टिगत रख नर्मदापुरम जिले में अनेक सड़क परियोजनाओं का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि सिवनी मालवा को लगभग 1000 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। इसमें 972 करोड़ से अधिक लागत के 72 किलोमीटर लंबे नर्मदापुरम-टिमरनी स्टेट हाईवे-67 का उन्नयन एवं पुनर्निर्माण कार्य का भूमि-पूजन शामिल है। यह केवल सड़क नहीं है, इससे सीधे इंदौर-उज्जैन तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस स्टेट हाईवे के माध्यम से सिवनी-मालवा नए दौर में प्रवेश करेगा और कनेक्टिविटी का लाभ पूरे क्षेत्र को मिलेगा। सिवनी-मालवा में इस सड़क के साथ विकास का सूर्योदय हुआ है। स्टेट हाईवे के साथ सिवनी-मालवा को 106 करोड़ 30 लाख लागत के 96 विकास कार्यों की सौगात मिली है। जिसमें 48 करोड़ 61 लाख की लागत के 45 विकास कार्यों का लोकार्पण और 57 करोड़ 69 लाख की लागत के 51 विकास कार्यों का भूमि-पूजन संपन्न हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा नदी आंवली घाट के हथनापुर गांव में सिंचाई परियोजना के विकसित करने की घोषणा की। इस परियोजना का लाभ क्षेत्र के 40 गांवों के 10 हजार से अधिक किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने नगर पालिका सिवनी-मालवा में सड़क, सीवेज, बिजली-पानी की मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए विशेष निधि से राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिवनी-मालवा-शिवपुर बावरी मुख्य मार्ग की मंजूरी, पीपलपुरा पुल निर्माण और बनापुरा के शासकीय स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही शिवपुर और डोलपुर में सांदीपनि विद्यालय के लिए सर्वे कराने और एक विद्यालय की मंजूरी देने की घोषणा की। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री एवं नर्मदापुरम जिले के प्रभारी राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के प्रत्येक जिले में विकास की अनेक सौगातें दी हैं। सिवनी-मालवा कृषि से समृद्ध क्षेत्र है। पिछले दो साल में ही 984 करोड़ की लागत की सड़कों की सौगात सिवनी-मालवा को मिली है। राज्य सरकार ने नर्मदापुरम जिले में ऐतिहासिक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की है, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ। लोक निर्माण विभाग गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने विभाग के लोकपथ ऐप की जानकारी दी। विधायक प्रेमशंकर वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सिवनी-मालवा को लगातार विकास कार्यों की सौगातें मिल रही हैं। इस क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने और सिंचाई सुविधाओं के विकास से किसानों को लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल के परिणामस्वरूप इंडियन ऑयल द्वारा डोलरिया में नया प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इससे नर्मदापुरम के युवाओं को रोजगार मिलेगा। विधायक वर्मा ने आंवली घाट पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधा के विकास कार्य और सिवनी-मालवा शहर का सीवेज नदी में मिलने से रोकने के लिए योजना तैयार करने का अनुरोध किया। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, विधायक विजयपाल सिंह, विधायक ठाकुर दास नागवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधा पटेल, जिलाध्यक्ष सुप्रीति शुक्ला तथा बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सिवनी … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को ओंकारेश्वर में सांस्कृतिक महाकुंभ एकात्म पर्व का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव, ज्ञान की पुण्यभूमि ओंकारेश्वर में सांस्कृतिक महाकुंभ एकात्म पर्व का शुक्रवार को करेंगे शुभारंभ दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का पाँच दिवसीय आयोजन देश-विदेश के शीर्ष संत, मनीषी और विद्वान देंगे एकात्मता का वैश्विक संदेश ओंकारेश्वर भारतीय संस्कृति के पुनरुद्धारक और अद्वैत वेदांत के प्रखर प्रणेता आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा स्थली ओंकारेश्वर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल, 17 अप्रैल शुक्रवार से पाँच दिवसीय 'एकात्म पर्व' का मंगलमय शुभारंभ करेंगे। मांधाता पर्वत की कंदराओं में रचे-बसे 'एकात्म धाम' में आयोजित यह महोत्सव दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम होगा। वैशाख शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस अनुष्ठान में देश-विदेश के शीर्ष संत, मनीषी और विद्वान सम्मिलित होकर एकात्मता के वैश्विक संदेश को रेखांकित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अद्वैत लोक एवं अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण करेंगे साथ ही वैदिक अनुष्ठान में भी सम्मिलित होंगे। इस अवसर पर द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के पावन सान्निध्य तथा विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मनिवेदिता भिड़े, स्वामी शारदानंद सरस्वती की गरिमामय उपस्थिति रहेगी। एकात्म पर्व के महत्वपूर्ण वैचारिक सत्र 'अद्वैतामृतम् – विमर्श सभा' के अंतर्गत अद्वैत दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता पर गहन संवाद होगा। विशेष रूप से प्रथम दिन 'अद्वैत एवं Gen-Z' जैसे आधुनिक विषय पर युवा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जाएगा। आगामी दिनों में अद्वैत दर्शन का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक शांति और सिख संप्रदाय के 'एक ओंकार' के साथ अंतर्संबंधों पर विद्वतापूर्ण चर्चा होगी। यह बौद्धिक मंथन आधुनिक समाज और नई पीढ़ी को अद्वैत की शाश्वत अवधारणा से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है। सांस्कृतिक संध्या 'रसो वै सः' के अंतर्गत प्रतिदिन देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी कला की प्रस्तुति देंगे। महोत्सव के प्रथम दिवस जयतीर्थ मेवुंडी का शास्त्रीय गायन और शुभदा वराडकर की ओड़िसी प्रस्तुति 'एकम्' आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसी क्रम में आगामी दिनों में भरतनाट्यम, कर्नाटक संगीत और निर्गुण वाणी के माध्यम से अद्वैत के भावों को अभिव्यक्त किया जाएगा। महोत्सव का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष 21 अप्रैल को आयोजित होने वाला दीक्षा समारोह है, जिसमें देश-विदेश के 700 से अधिक युवा 'शंकरदूत' के रूप में संकल्प लेंगे। मध्य प्रदेश शासन 'ओंकारेश्वर' में 'एकात्म धाम'के माध्यम से आचार्य शंकर के दर्शन को वैश्विक फलक पर स्थापित कर रहा है। यहाँ स्थापित 108 फीट ऊँची 'एकात्मता की मूर्ति' (Statue of Oneness) और निर्माणाधीन 'अद्वैत लोक' संग्रहालय न केवल पर्यटन बल्कि आध्यात्मिक जिज्ञासा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। कल से प्रारंभ हो रहा यह पर्व समस्त राष्ट्र को सांस्कृतिक और वैचारिक सूत्र में पिरोने की दिशा में एक महती कदम सिद्ध होगा।  

युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर.  छत्तीसगढ़ में युवाओं के सशक्त भविष्य और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित गरिमामय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत चयनित 430 प्रयोगशाला परिचारकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने सभी नवनियुक्त अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन में शुचिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन किया गया है तथा मंत्रालय के कार्यों को ई-प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे भ्रष्टाचार के रास्तों को प्रभावी रूप से बंद किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व में हुए पीएससी घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि पारदर्शिता और न्याय सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ ही भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए कड़े कानूनी प्रावधान किए गए हैं, जिससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने आगे कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं को सरल और सुलभ बनाने के लिए ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल’ के गठन तथा एक निश्चित ‘परीक्षा कैलेंडर’ लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। उद्योगों को प्रोत्साहन देकर रोजगार सृजन को गति दी जा रही है, ताकि सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र भी युवाओं के लिए सशक्त विकल्प बन सके। मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों से निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने इस भर्ती प्रक्रिया को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुशासन के सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक पहल है। मंत्री वर्मा ने बताया कि पदस्थापना प्रक्रिया में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए काउंसलिंग प्रणाली अपनाई गई। यह व्यवस्था सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह नई पीढ़ी छत्तीसगढ़ को प्रगति और समृद्धि के नए आयामों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हाल ही में लैब टेक्नीशियन और अब प्रयोगशाला परिचारकों की नियुक्तियाँ इस दिशा में सरकार की सक्रियता का स्पष्ट प्रमाण हैं। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा सचिव  डॉ. एस. भारतीदासन ने चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त डॉ. संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

सभी अधिकारी नगरीय निकायों को स्वावलंबी और विकास केंद्र के रूप में स्थापित करें: मंत्री विजयवर्गीय

सभी अधिकारी नगरीय निकायों को स्वावलंबी और विकास केंद्र के रूप में करें स्थापित : मंत्री विजयवर्गीय अधिकारी विद्यार्थी भाव से सेवा और जन-भागीदारी को बनाएँ अपना ध्येय सड़क और जल आपूर्ति के साथ रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि पर दें विशेष ध्यान सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में "शहरी सुधार कार्यशाला" का किया शुभारंभ भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में दीप प्रज्ज्वलित कर "शहरी सुधार कार्यशाला"का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारियों को संबोधित करते हुए दूरदर्शी नेतृत्व और कर्मठता के साथ नगरों के कायाकल्प करने का आह्वान किया। प्रशासन व्यवहार से चलता है, जन-सेवा ही सर्वोपरि: मंत्री विजयवर्गीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि, "यदि सभी अधिकारी विद्यार्थी भाव को आत्मसात कर जीवन जिएंगे, तो व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों ही उत्कृष्ट होंगे। उन्होंने कहा  कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि उचित व्यवहार से चलता है। जनता की सेवा के लिए समर्पण और कठोर परिश्रम ही एक सफल अधिकारी की वास्तविक पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को दोहराते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप हमें सभी नगरीय निकायों को 'आत्मनिर्भर' बनाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि हमारे शहरी केंद्रों को 'विकास केंद्र' के रूप में विकसित किया जाए। अधिकारियों को अब केवल सुदृढ़ सड़क और स्वच्छ जल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शहर में रोजगार के नवीन अवसर उत्पन्न करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। नवाचार और राजस्व वृद्धि पर विशेष बल मंत्री विजयवर्गीय ने नगरों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए भूमि मुद्रीकरण और भूमि के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि नगरीय भूमि का उपयोग जनकल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए प्रभावी ढंग से हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाला समय शहरीकरण का है। यदि आप पारदर्शिता और जन-भागीदारी के साथ नवीन कार्य करेंगे और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ देंगे, तो जनता भी कर वृद्धि जैसे निर्णयों में सहर्ष आपका साथ देगी। उन्होंने अधिकारियों को जन-प्रतिनिधियों के साथ सामंजस्य बिठाकर चुनौतियों को स्वीकार करने की सीख दी। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारियों से संवाद के दौरान कहा कि नगरीय निकायों में कार्य करते समय सेवा भाव अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह सीधे जनता से जुड़ा दायित्व है। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संस्थान में प्रथम बार इस प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से सक्रियता, ऊर्जा और पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। दुबे ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आगामी वर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना और नियोजित विकास के साथ नागरिक जागरूकता विकसित करना है। उन्होंने अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावनाओं पर भी बल दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विभाग एक परिवार और सामूहिक भावना के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के आयुक्त, मुख्य नगरपालिका अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यशाला में सम्मिलित हैं। कार्यशाला का मुख्य केंद्र नागरिक संतुष्टि और मूलभूत सिद्धांतों पर कार्य करना है।        इस कार्यशाला के माध्यम से आगामी दो दिनों तक नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार , समीक्षा और संवाद का क्रम निरंतर जारी रहेगा, ताकि प्रदेश के शहरों को आधुनिक और जन-सुविधाओं से युक्त बनाया जा सके।  

PAK में आतंकी हाफिज सईद के सहयोगी हमजा को मारी गोली, फिर अज्ञात गनमैन हुआ एक्टिव

 लाहौर पाकिस्तान में एक बार फिर अज्ञात हमलावरों ने अपनी मौजूदगी से दहशत फैला दी है. नजारा कुछ-कुछ वैसा ही है जैसा हमने धुरंधर फिल्म में देखा था, चुपचाप आना, सटीक निशाना लगाना और फिर गायब हो जाना. इस बार इन बंदूकधारियों की हिटलिस्ट में था भारत का एक पुराना और खूंखार दुश्मन अमीर हमजा. लाहौर की सड़कों पर एक न्यूज चैनल के दफ्तर के बाहर उसे घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई, जिसमें वह बुरी तरह जख्मी हो गया. फिलहाल, लश्कर का यह फाउंडर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है । हमलावरों ने जिस सफाई और सूझबूझ से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, उसने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. सरेआम हुई इस गोलीबारी ने एक बार फिर उन चर्चाओं को हवा दे दी है कि क्या पड़ोसी मुल्क में छिपे बैठे आतंकियों का सफाई अभियान अपने अगले चरण में पहुंच चुका है? हमजा को संभलने तक का मौका नहीं मिला और अब वह अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये अमीर हमजा आखिर है कौन? तो आपको बता दें कि ये सिर्फ एक मामूली आतंकी नहीं है. अमीर हमजा को लश्कर-ए-तोयबा का रणनीतिक दिमाग माना जाता है. ये उन शुरुआती लोगों में से एक था, जिन्होंने हाफिज सईद के साथ मिलकर लश्कर की नींव रखी थी. इसे संगठन का मुख्य विचारक कहा जाता है, यानी वो शख्स जो आतंकियों को तैयार करने के लिए उनका ब्रेनवॉश करता था. इसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि अमेरिका ने इसे 'वैश्विक आतंकवादी' घोषित कर रखा है । अमीर हमजा का काम सिर्फ बंदूक उठाना नहीं था, बल्कि वो लश्कर के लिए पैसा जुटाना, नए लड़कों की भर्ती करना और पकड़े गए आतंकियों को छुड़ाने के लिए सौदेबाजी करने में माहिर था. उसने लश्कर की मैगजीन का संपादन किया और जिहाद को बढ़ावा देने वाली किताबें भी लिखीं. जब 2018 में पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा और लश्कर पर कार्रवाई हुई, तो इसने 'जैश-ए-मनकाफा' नाम का एक नया मुखौटा तैयार कर लिया ताकि कश्मीर में दहशतगर्दी जारी रख सके। क्या हकीकत बन रही है धुरंधर की कहानी? अगर आप पिछला रिकॉर्ड देखें, तो ये किसी सस्पेंस फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा लगता है. इसी साल 2026 की शुरुआत में लश्कर कमांडर बिलाल आरिफ सराफी को ठिकाने लगाया गया. 2025 में झेलम में फैसल नदीम और सिंध में अबू सैफुल्लाह खालिद का भी यही हश्र हुआ. यहां तक कि कंधार विमान अपहरण (IC-814) का गुनहगार जाहूर मिस्त्री भी कराची में सरेआम मार गिराया गया था. अमीर हमजा पर हुए इस हमले ने अब आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. अब सवाल ये नहीं है कि हमला किसने किया, सवाल ये है कि अगला नंबर किसका है? कौन है आमिर हमजा? आमिर हमजा केवल एक सदस्य नहीं, बल्कि आतंकी हाफिज सईद के साथ मिलकर लश्कर-ए-तैयबा की नींव रखने वाला मुख्य चेहरा है। उसे लश्कर के वैचारिक प्रचार-प्रसार और फंड जुटाने का विशेषज्ञ माना जाता है। वह अफगानिस्तान में मुजाहिदीन के तौर पर भी लड़ चुका है। हमजा अपनी कट्टरपंथी विचारधारा और भड़काऊ भाषणों के लिए जाना जाता है। वह लश्कर की आधिकारिक पत्रिकाओं का संपादक रह चुका है और 'काफिला दावत और शहादत' जैसी कई विवादित पुस्तकें लिख चुका है। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने लश्कर को आतंकी संगठन घोषित करते हुए हमजा पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। साल 2018 में जब पाकिस्तान में जमात-उद-दावा (JuD) जैसे संगठनों पर वित्तीय कार्रवाई हुई तो हमजा ने दिखावे के लिए लश्कर से किनारा कर लिया था। हालांकि उसने 'जैश-ए-मनकफा' नाम से एक अलग गुट बना लिया। भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह गुट पाकिस्तान में स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना है। हमजा अब भी लश्कर के शीर्ष नेतृत्व के साथ करीबी संपर्क में था और युवाओं की भर्ती व फंड जुटाने में अहम भूमिका निभा रहा था।