samacharsecretary.com

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का वादा अधूरा, मायावती ने सपा को भी घेरा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला है. मायावती का कहना है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस अब जो बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, वो महज एक दिखावा है. उन्होंने कांग्रेस को गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी करार देते हुए साफ कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसने कभी SC, ST और OBC के आरक्षण का कोटा पूरा करने की कोशिश नहीं की. मायावती का यह वार सीधे तौर पर कांग्रेस के उस दावे पर है जिसमें वो अब इन वर्गों के हक की बात कर रही है।  मायावती ने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा इन वर्गों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब केंद्र की सरकार चला रही थी, तब उसने कभी भी पिछड़ों या दलितों के कोटे को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. आज वही पार्टी महिला आरक्षण के बहाने वोट बैंक की राजनीति कर रही है।  यही नहीं, मायावती ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए मंडल कमीशन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को जो 27 प्रतिशत आरक्षण मिला, उसे भी कांग्रेस ने लागू नहीं किया था. यह बीएसपी की मेहनत और लगातार किए गए प्रयासों का ही नतीजा था कि उस समय की वी.पी. सिंह सरकार ने इसे आखिरकार लागू किया. मायावती ने साफ संदेश दिया कि जो काम कांग्रेस दशकों में नहीं कर पाई, उसे BSP ने लड़कर करवाया।  जब सरकार में होती है सपा, तो भूल जाती है पिछड़ों का हक मायावती के निशाने पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं थी, उन्होंने समाजवादी पार्टी को भी जमकर घेरा. उन्होंने यूपी का एक पुराना किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि 1994 में जब पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का फायदा देने की रिपोर्ट आई थी, तो उस वक्त की सपा सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था. लेकिन जब 1995 में बीएसपी की सरकार बनी, तो इस फैसले को तुरंत लागू कर दिया गया. मायावती ने तंज कसते हुए कहा कि सपा जब सत्ता से बाहर होती है, तो बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन सरकार में आते ही इनका रवैया पूरी तरह बदल जाता है।  मायावती ने जनता को सावधान करते हुए कहा कि कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए रंग बदलती हैं. सत्ता में रहते हुए इनका रवैया जातिवादी और तिरस्कार से भरा होता है, लेकिन चुनाव आते ही ये लोग छलावा करने लगते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि इन दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा बचकर रहना चाहिए, क्योंकि ये कभी भी दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों का भला नहीं चाहतीं।  महिला आरक्षण को लेकर चल रही देरी पर भी मायावती ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर सरकार इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करना चाहती है, तो उसे जल्दी करना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी बीजेपी की तरह ही कदम उठाती. यानी घुमा-फिराकर बात वही है कि बड़ी पार्टियों के लिए इन वर्गों का कल्याण कभी प्राथमिकता नहीं रहा।  आखिर में मायावती ने एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलहाल जो कुछ भी मिल रहा है उसे स्वीकार करें, लेकिन असली मजबूती तभी आएगी जब यह समाज खुद अपने पैरों पर खड़ा होगा. मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि अपने समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। 

पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, भारत और रूस के रिश्तों को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए एक बार फिर से भारत का दौरा करेंगे। बता दें कि इससे पहले उन्होंने दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था। ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्य देशों) के नेताओं की यह वार्षिक बैठक आर्थिक सहयोग, व्यापार, वैश्विक शासन और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की जाती है। यह बैठक सितंबर के महीने में हो सकती है। रूस की समाचार एजेंसी टास ने बुधवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के हवाले से बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में निश्चित रूप से भाग लेंगे। अभी तक शिखर सम्मेलन की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन TASS ने पहले भारतीय सरकार के एक सूत्र के हवाले से बताया था कि यह 12-13 सितंबर को होने वाला है। ब्रिक्स में अब 11 देश हो गए शामिल ब्रिक्स वर्तमान में 11 सदस्य देशों का एक प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसकी शुरुआत 2006 में चार देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) के साथ हुई थी, जिसे तब 'ब्रिक' (BRIC) कहा जाता था। लेकिन 2010 में इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल हो गया जिसके बाद इसे ब्रिक्स कहा जाने लगा। लेकिन अब कुछ और देशों को इससे जोड़ा गया है जिनमें मिश्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। चौथी बार भारत कर रहा ब्रिक्स की मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सम्मेलन सितंबर में (संभावित रूप से 12-13 सितंबर) आयोजित होगा। भारत BRICS की चौथी बार मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी मेजबानी कर चुका है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन "निश्चित रूप से" सम्मेलन में शामिल होंगे। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने भी इस खबर की पुष्टि की है। भारत ने पुतिन को आधिकारिक निमंत्रण भेजा है और दोनों देशों के बीच कोई बाधा नहीं है। ब्रिक्स में शामिल हैं ये देश BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख उभरते अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं। हाल के वर्षों में इस समूह का विस्तार हुआ है और नए सदस्य भी जुड़े हैं। यह मंच वैश्विक आर्थिक सहयोग, व्यापार वृद्धि, बहुपक्षीय सुधारों, ग्लोबल गवर्नेंस और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में विश्व स्तर पर अनिश्चितता, ऊर्जा संकट, व्यापार युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। भारत की अध्यक्षता का थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जो लोगों-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण पर आधारित है।  भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग पहले से ही मजबूत है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी पुतिन भारत यात्रा की थी। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ उन्होंने वार्षिक शिखर सम्मेलन में शिरकत की थी। अब BRICS सम्मेलन में पुतिन की उपस्थिति से ग्लोबल साउथ की आवाज और मजबूती मिलेगी। यह बैठक उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर देगी। इससे पहले दिसंबर में भारत आए थे पुतिन इससे पहले, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर, 2025 को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका जोरदार स्वागत किया था। इस यात्रा के दौरान आर्थिक संबंधों, ऊर्जा सहयोग और रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा की गई थी। नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की थी।  

ED की रेड: पंजाब में संजीव अरोड़ा के घर और दफ्तर पर कार्रवाई, AAP ने BJP पर उठाए सवाल

लुधियाना पंजाब में आज सुबह-सुबह बड़ा एक्शन हुआ है. पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर पर ईडी की रेड हुई है. जी हां, मान सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा के घर और अन्य ठिकानों पर ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय का सर्च ऑपरेशन चल रहा है. FEMA के तहत गुरुग्राम, चंडीगढ़, लुधियाना और जालंधर में कुल 13 जगहों पर छापेमारी की गई. मंत्री संजीव अरोड़ा के सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि उनके कुछ अन्य ठिकानों पर भी एक साथ तलाशी ली गई. इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा को घेरा है।  दरअसल, ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की टीम आज सुबह लुधियाना में उनके घर में ईडी की टीम पहुंची और बाहर केंद्रीय पुलिस बल को तैनात किया गया है. मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास और अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी. ED सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक पुराने मामले और जमीन सौदों में कथित अनियमितताओं को लेकर की जा रही है।  सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पुराने मामले और कुछ जमीन सौदों में कथित अनियमितताओं के शक के आधार पर की जा रही है. हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक ईडी की तरफ से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जांच को लेकर कई तरह की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई हैं।  इस पर आम आदमी पार्टी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है. ‘आप’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘ईडी ने अब पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के यहां छापा मारा है. यह एक साफ पैटर्न है. भाजपा किसी भी राज्य चुनाव की तैयारी इसी तरह शुरू करती है।  वहीं पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘तीन दिन में पंजाब में आम आदमी पार्टी के खिलाफ ईडी की ये दूसरी रेड है. अब पंजाब केबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के यहां ईडी ने रेड की है. केंद्र सरकार ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं. अब ये लोकतांत्रिक व्यवस्था का दिखावा भी नहीं कर रहे, तानाशाही डिक्लेयर कर दी है. पश्चिम बंगाल में जो ईडी के साथ होता है वो सही ही होता है फिर तो।  इससे पहले 15 अप्रैल को भी ईडी ने आम आदमी पार्टी से जुड़े राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल और उनके परिवार से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी. उस दौरान गुरुग्राम, पंजाब और जालंधर समेत कई जगहों पर एक साथ कार्रवाई की गई थी. जांच कथित तौर पर फंड से जुड़े मामलों और यूनिवर्सिटी से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर की जा रही थी।  खुलासे होने की संभावना इस पूरे घटनाक्रम के बीच संजीव अरोड़ा या उनके कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे अटकलों का बाजार और भी गर्म हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो इसका असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल, ईडी की टीम द्वारा की जा रही यह कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इससे जुड़े कोई बड़े तथ्य सामने आते हैं या नहीं। कौन हैं संजीव अरोड़ा और कहां-कहां रेड? ईडी अभी पंजाब के मंत्री श्री संजीव अरोड़ा, उनके बि नेस पार्टनर लुधियाना के श्री हेमंत सूद और जालंधर के चंद्रशेखर अग्रवाल के घरों और बिज़नेस की जगहों पर तलाशी ले रही है. संजीव अरोड़ा M/s Hampton Sky Realty Ltd (पहले M/s Ritesh Properties and Industries Ltd) कंपनी के प्रमोटर हैं, जो पंजाब में बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स का काम करती है. उनके बेटे काव्य अरोड़ा अभी कंपनी के MD हैं और उनके यहां भी तलाशी ली जा रही है।  • संजीव अरोड़ा की कंपनी पर कई तरह की गड़बड़ियों का शक है. जैसे पंजाब में ज़मीन के इस्तेमाल में गैर-कानूनी बदलाव करना, शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बिक्री दिखाना, शेयर बाज़ार में इनसाइडर ट्रेडिंग के घोटाले करना, UAE से भारत में गलत तरीके से कमाए गए पैसों और गैर-कानूनी सट्टेबाजी के पैसों की राउंडट्रिपिंग करना, वगैरह।

संभल में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर मस्जिद और मदरसे पर चला बुलडोजर

 संभल संभल के असमोली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर बंद गांव में जिला प्रशासन ने अवैध रूप से बनी मस्जिद, गौसुल मदरसा और पांच दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में राजस्व टीम ने खाद के गड्ढे और खेल के मैदान के लिए आरक्षित 700 वर्गमीटर सरकारी भूमि को चिन्हित किया था।  पैमाइश के बाद अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, जिसके बाद मदरसे को ध्वस्त कर दिया गया. अब मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिराने के लिए बुलडोजर पहुंचा है. ग्रामीणों और मस्जिद कमेटी ने खुद ही प्रशासन से अवैध निर्माण हटाने में मदद मांगी थी।  भारी सुरक्षा के बीच ध्वस्तीकरण मस्जिद पर बुलडोजर चलने से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. सीओ कुलदीप सिंह के साथ दो थानों की पुलिस और आरपीएफ (RRF) के जवान मौके पर तैनात रहे. राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह निर्माण खेल के मैदान और खाद के गड्ढे की जमीन पर किया गया था. 31 मार्च से ही कमेटी के लोगों ने खुद दुकानों और मदरसे को हटाना शुरू कर दिया था, लेकिन मस्जिद का हिस्सा बाकी रहने पर अब प्रशासन ने इसे पूरी तरह ध्वस्त करने की कमान संभाली है।  प्रशासन का लैंड बैंक प्लान संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने साफ किया है कि सरकारी भूमि पर हुए सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे. जिले में सवा सौ हेक्टेयर भूमि को अब तक कब्जा मुक्त कराया जा चुका है. प्रशासन अब इन जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए एक 'लैंड बैंक' बना रहा है, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके. डीएम ने चेतावनी दी है कि अवैध अतिक्रमण करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण मौके पर शांति बनी हुई है. यह कार्रवाई संभल जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा बताई जा रही है. पूरा मामला अब तहसील स्तर पर निगरानी में है. गौरतलब है कि संभल जिला प्रशासन लगातार अवैध कब्जे पर बुलडोजर की कार्रवाई कर रहा है. जिलाधिकारी ने खुद कहा है कि जिले में किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. 31 जनवरी को बेदखली का आदेश मामले में लेखपाल स्पर्श गुप्ता ने 18 जनवरी, 2026 को तहसीलदार न्यायालय में धारा 67 के तहत वाद दायर किया। इसके बाद 31 जनवरी को सार्वजनिक नोटिस जारी कर अखबार में प्रकाशन कराया गया। ताकि संबंधित पक्ष सामने आकर अपना दावा पेश कर सके। हालांकि तय समय सीमा में कोई भी व्यक्ति स्वामित्व का दावा करने या अपत्ति दर्ज करने के लिए नहीं आया। अदालत ने इसके बाद अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए, लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो 31 जनवरी को ही बेदखली का आदेश पारित कर दिया गया। पर्याप्‍त समय दिए जाने के बाद भी नहीं हटाया गया अवैध निर्माण उल्लेखनीय है कि इस आदेश के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई आपत्ति सामने नहीं आई। इससे प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। गुरुवार को एसडीएम निधि पटेल और नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया। इसलिए अब बुलडोजर कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।  

महिला आरक्षण कानून 2023 की आधी रात को संसद में महा-बहस के बाद हुई घोषणा, नोटिफिकेशन जारी

नई दिल्ली सरकार ने गुरुवार से 2023 का नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम देशभर में लागू कर दिया।  सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब इस पर संसद में बहस जारी है इस अधिनियम में बदलाव के लिए कल यानी गुरुवार को ही लोकसभा में बिल आया और देर रात करीब 1.20 बजे तक चर्चा चली। आज भी इस पर दिनभर चर्चा होगी और शाम में करीब 4 बजे इस पर वोटिंग होगी। वहीं कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा 16 अप्रैल को पेश किए गए प्रस्ताव पर आगे विचार करते हुए, निम्नलिखित विधेयक लोकसभा में पारित करने के लिए पेश किए जाएंगे।     संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक      2026 और परिसीमन विधेयक, 2026। गुरुवार की देर रात तक बहस चली महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गुरुवार की देर रात तक संसद में बहस चली। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लोकसभा में बहस जारी है और इस बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को 16 अप्रैल बृहस्पतिवार से लागू कर दिया है।   केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन यानी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया है?  मौजूदा लोकसभा में नहीं होगा लागू एक सरकारी अधिकारी ने इसे ‘तकनीकी कारणों' से जुड़ा मामला बताया, लेकिन इस पर विस्तृत जानकारी नहीं दी. अधिकारी ने स्पष्ट किया कि कानून के लागू हो जाने के बावजूद मौजूदा लोकसभा में महिला आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता. अधिकारी के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षण केवल जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकेगा।  'सरकार श्रेय लेना नहीं चाहती' इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पर शुक्रवार शाम 4 बजे सदन में वोटिंग होगी. संसद में महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन पर चल रही चर्चा को लेकर रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी से इसका समर्थन करने की अपील की है. इसके बाद किसी तरह के भ्रम की गुंजाइश नहीं है।  गृह मंत्री अमित शाह ने भी दक्षिण भारत में फैल रही आशंकाओं को आंकड़ों के जरिए दूर किया है. इसके बावजूद अगर कोई विरोध करता है तो वह इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है. संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है और सरकार इसका श्रेय लेना नहीं चाहती।  विपक्ष के दावों पर सवाल उठाते हुए रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी दलों के नेताओं से बातचीत की है. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को तीन बार पत्र लिखे गए, जबकि टीएमसी, डीएमके और सपा के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर समर्थन की अपील की गई।  महिला आरक्षण पर ये बोले पीएम मोदी  संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर जोरदार बहस हुई थी. पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में विपक्ष को आइना दिखाते हुए कहा, 'चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस जिसने विरोध किया, उसका हाल बुरा हुआ है. मैं अपील करने आया हूं कि इसको राजनीतिक तराजू से मत तौलिए. आज का यह अवसर एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर विकसित भारत बनाने में खुले मन से स्वीकार करने का अवसर है. पूरा देश विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय तो देखेगी, लेकिन उससे ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी, इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।  प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा, महिला आरक्षण पर मैंने इसका प्रारूप पढ़ा है. सबसे पहले इसमें लिखा है कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू हो, हम सहमत हैं. दूसरा है कि सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाई जाएगी. इसके लिए परिसीमन आयोग बनाया जाएगा जो 2011 की जनगणना को आधार बनाएगा. इसकी गहराई में जाएं तो इसमें राजनीति की बू आती है. 2023 के बिल में दो चीजें थी जो इसमें नहीं है. उसमें लिखा था कि नई जनगणना कराई जाएगी।  प्रियंका ने कहा कि वे कह रहे हैं कि उन्हें इसका श्रेय नहीं चाहिए. बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को महिलाएं पहचान लेती हैं. सावधान हो जाइए नहीं तो पकड़े जाएंगे. 2023 में मोदी सरकार ने जब यह बिल पास किया तो हमने उसका समर्थन किया. आज भी उसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस इसका समर्थन नहीं करेगी. हम डटकर खड़े हैं।  क्या कहता है सरकार का नोटिफिकेशन कानून मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है, 'संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार 16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि नियुक्त करती है, जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।  गौरतलब है कि सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया था, जिसे महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है. यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान करता है।  हालांकि, 2023 के कानून के अनुसार यह आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा होने के कारण 2034 से पहले लागू नहीं हो सकता था. लोकसभा में वर्तमान में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा हो रही है, उन्हें सरकार ने इसी उद्देश्य से पेश किया है कि महिला आरक्षण को 2029 से लागू किया जा सके।  क्या है महिला आरक्षण कानून अधिसूचना के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार  16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि घोषित करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 2023 के कानून के तहत आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि … Read more

केदारनाथ धाम में बर्फीली चादर के बीच स्नो कॉरिडोर से खुलेंगे कपाट, अब तक 5.96 लाख रजिस्ट्रेशन

भोपाल 22 अप्रैल को बर्फ की चादर के बीच केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ग्लेशियर काटकर स्नो कॉरिडोर तैयार किया गया है । केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले धाम के चारों ओर भारी बर्फबारी के कारण लगभग 4-10 फीट (कुछ स्थानों पर 18 फीट तक) बर्फ की मोटी चादर जम गई है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और मजदूर मिलकर युद्धस्तर पर बर्फ काटकर मंदिर परिसर और पैदल मार्ग को तैयार करने में लगे हुये हैं। बर्फ की चादर में व्यवस्थाओं का खास ध्यान रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा ने बातचीत में बताया कि 100 से ज्यादा श्रमिक दिन-रात काम कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं के लिए रास्ता तैयार किया जा सके। बर्फ की मोटी परतें अभी भी चुनौती प्रस्तुत कर रही हैं। मंदिर परिसर और आसपास 2 से 3 फीट बर्फ जमी हुई है। पहले ये 4 से 5 फीट थी, लेकिन अब धीरे-धीरे कम हो रही है। ग्लेशियरों की चुनौती, लेकिन तैयारी पूरी गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर कई जगह ग्लेशियर टूटकर गिर गए हैं। इन क्षेत्रों में 3 से 4 प्रमुख ग्लेशियर पॉइंट चिन्हित किए गए हैं। थारू और चोराबारी ग्लेशियरों का टूटना मुश्किलें ला रहा है, लेकिन मजदूरों ने इन 8 से 10 फीट ऊंची बर्फ की दीवारों को काटकर सुरक्षित रास्ता तैयार किया है। श्रद्धालुओं को इस अद्भुत अनुभव का गवाह बनने का मौका मिलेगा। दर्शनों में कोई पाबंदी नहीं कई बार बर्फबारी के बाद यात्रियों की संख्या पर पाबंदी लगने की अफवाहें उठती हैं, लेकिन प्रशासन ने इस पर स्पष्ट कर दिया है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं है। बिजली और पानी की लाइनों की मरम्मत का काम पूरा हो चुका है, और धाम में इनकी आपूर्ति शुरू हो गई है। हेलीकॉप्टर सेवा में बाधा नहीं हेलीकॉप्टर सेवा के लिए हवाई पट्टी से बर्फ साफ कर दी गई है, जिससे हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को कोई समस्या नहीं होगी। इस बार की यात्रा पिछले साल की अपेक्षा पहले शुरू हो रही है, जिससे श्रद्धालु 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। धार्मिक परंपराओं का रहेगा पालन मंदिर की सफाई से लेकर कपाट खुलने की तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाएगा। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खोले जाएंगे। इस वर्ष की यात्रा का समय पिछले साल की तुलना में पहले होगा। बर्फबारी का अद्भुत नजारा विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल के अंत तक बर्फ का पिघलना सामान्य है, लेकिन इस बार मौसम भिन्न है। 2023 के बाद ऐसा भारी बर्फबारी का दृश्य श्रद्धालुओं को देखने को मिलेगा। केदारनाथ यात्रा के लिए अब तक 5.96 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं, जो पिछले साल के आंकड़ों के करीब है। थारू-चोराबारी ग्लेशियर काटकर रास्ता बनाया गया विभागीय अधिकारियों के अनुसार, थारू और चोराबारी जैसे ग्लेशियरों के टूटकर रास्ते में आने से बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। यहां बर्फ की ऊंचाई 8 से 10 फीट तक पहुंच गई थी। मजदूरों ने इंसानी कद से भी ऊंची इन बर्फ की दीवारों को काटकर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया है। जब श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरेंगे, तो उनके दोनों तरफ 8-9 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें होंगी, जो एक अद्भुत अनुभव होगा। कपाट खुलने से पहले पूरी होंगी तैयारियां डीएम ने बताया कि यात्रा की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्यू (लाइन को व्यवस्थित तरीके से संभालना) मैनेजमेंट के साथ ही सभी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ का मुख्य पहुंच मार्ग अब पूरी तरह से साफ करा दिया गया है। इस भारी बर्फ को हटाने और मार्ग को सुचारू करने के लिए 100 से अधिक अनुभवी मजदूरों को लगाया गया है। अब सिर्फ मंदिर परिसर के पास जमी बर्फ को हटाने का काम अंतिम चरण में है। बाबा केदार की पंचमुखी डोली के धाम पहुंचने से पहले मंदिर, परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह बर्फ से साफ हो जाएगा। श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं अक्सर भारी बर्फबारी के बाद यह अफवाहें उड़ने लगती हैं कि शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या सीमित की जाएगी, लेकिन प्रशासन ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। प्रशासन की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा तय नहीं की गई है। बर्फबारी के कारण क्षतिग्रस्त हुई बिजली और पानी की लाइनों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। धाम में बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू हो गई है। हेलीकॉप्टर सेवा के लिए हवाई पट्टी से बर्फ साफ हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अच्छी खबर है। केदारनाथ स्थित हवाई पट्टी (हेलीपैड) से पूरी बर्फ साफ कर दी गई है। अब हेलीकॉप्टर की लैंडिंग में कोई बाधा नहीं है। धार्मिक परंपराओं और शेड्यूल में बदलाव नहीं भारी बर्फबारी के बावजूद मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर के सफाई अभियान से लेकर कपाट खुलने के तय मुहूर्त और शेड्यूल में कोई परिवर्तन नहीं होगा। पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही यात्रा केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी। इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। 2023 के बाद फिर दिखेगा ऐसा अद्भुत नजारा विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, आमतौर पर अप्रैल के अंत तक केदारनाथ में बर्फ काफी हद तक पिघल जाती है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज अलग है। कपाट खुलने के समय इतनी भारी बर्फबारी का नजारा 2023 के बाद फिर देखने को मिल रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को बर्फ से ढके हिमालय के बीच बाबा केदार के दर्शन का खास अनुभव मिलेगा। केदारनाथ यात्रा के लिए अब तक 5.96 … Read more

राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव: 345 विधानसभा और 43 लोकसभा सीटों पर 33% महिला आरक्षण का असर

भोपाल  संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आज बुलाया गया है। इसमें महिला आरक्षण और परिसीमन के बिलों को रखा जाएगा। इससे मध्यप्रदेश की राजनीति आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव की ओर बढ़ सकती है। संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण और परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल लागू होने के बाद राज्य की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदलने की संभावना है। नई व्यवस्था के तहत मध्यप्रदेश विधानसभा की सीटें 230 से बढ़कर करीब 345 तक पहुंच सकती हैं। इसके साथ ही सदन में महिलाओं के लिए लगभग 114 सीटें आरक्षित होने की संभावना है, जिससे महिला प्रतिनिधित्व में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो मध्यप्रदेश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे सत्ता और संगठन दोनों के समीकरण बदल जाएंगे।  बहुमत का गणित भी बदलेगा सीटों की संख्या बढ़ने के बाद सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा भी बदल जाएगा। अभी जहां 116 सीटों पर बहुमत माना जाता है, वहीं नए परिसीमन के बाद यह बढ़कर करीब 174 सीटों तक पहुंच सकता है। कैबिनेट का आकार भी बढ़ सकता है विधानसभा की बढ़ी हुई संख्या का असर मंत्रिमंडल पर भी पड़ेगा। नियमों के अनुसार, सदन की कुल संख्या का लगभग 15% मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश में मंत्रियों की संख्या 35 से बढ़कर करीब 52 तक पहुंच सकती है। लोकसभा में भी बढ़ेगी मध्यप्रदेश की ताकत परिसीमन के बाद राज्य से लोकसभा सीटों की संख्या भी 29 से बढ़कर करीब 43 होने का अनुमान है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर लगभग 14 तक पहुंच सकती है। इन सभी प्रस्तावित बदलावों को 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।  कैबिनेट का भी होगा विस्तार परिसीमन का असर सिर्फ सदन की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। नियमों के मुताबिक, विधानसभा की कुल संख्या का 15% हिस्सा मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 35 से बढ़कर 52 हो जाएगी। यानी आने वाले समय में मध्य प्रदेश में मंत्रियों की एक बड़ी फौज नजर आएगी। लोकसभा के मोर्चे पर भी एमपी की ताकत बढ़ेगी। राज्य से लोकसभा सांसदों की संख्या 29 से बढ़कर 43 करने का प्रस्ताव है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर 14 होने की उम्मीद है। यह पूरा ढांचा 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से प्रभावी होने की संभावना है।

8वें वेतन आयोग का प्रस्ताव: ₹69,000 सैलरी, छुट्टी के बदले पैसा, 3x DA और क्या-क्या लाभ होंगे?

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों के बीच बड़ी हलचल है और अब इस दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (National Council– Joint Consultative Machinery (NC-JCM) ने अपना विस्तृत मेमोरेंडम सरकार और वेतन आयोग को सौंप दिया है, जिसमें सैलरी, भत्तों, छुट्टियों और पे स्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े बदलावों की मांग की गई है। अगर ये मांगें लागू होती हैं, तो कर्मचारियों की आय और सुविधाओं में बड़ा इजाफा हो सकता है। न्यूनतम वेतन ₹69,000 और ग्रेच्युटी में ढील सबसे बड़ी और चर्चा में रहने वाली डिमांड है, न्यूनतम वेतन को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने की। इसके साथ ही हर साल 6% की वृद्धि और प्रमोशन के समय कम से कम ₹10,000 की बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है। संगठन ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों को 30 दिन का न्यूनतम बोनस गारंटी के साथ दिया जाए और ग्रेच्युटी के नियमों में भी ढील दी जाए। छुट्टियों को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव रखा गया है। मैटरनिटी लीव को 240 दिन करने, पैटरनिटी लीव 45 दिन करने औरअर्न्ड लीव (EL) को बिना सीमा के जमा करने की मांग की गई है। इतना ही नहीं, 600 दिन तक लीव इनकैशमेंट और 20 साल की सेवा के बाद 50% इनकैशमेंट की सुविधा देने की बात भी कही गई है। महिलाओं के लिए विशेष मेडिकल लीव और 60 दिन का पैरेंट केयर लीव भी प्रस्ताव में शामिल है। बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस (CEA) को ₹10,000 प्रति माह प्रति बच्चे करने और इसे पोस्ट ग्रेजुएशन तक लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा हॉस्टल सब्सिडी को ₹35,000 प्रति माह तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, जिससे कर्मचारियों पर शिक्षा का खर्च कम हो सके। भत्तों (Allowances) में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। NC-JCM चाहता है कि सभी भत्तों को तीन गुना किया जाए और उन्हें महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ा जाए। इसके अलावा रिस्क अलाउंस ₹10,000 प्रति माह, नाइट ड्यूटी अलाउंस बेसिक सैलरी के आधार पर और सभी कर्मचारियों के लिए ड्रेस अलाउंस की मांग भी की गई है। फिटमेंट फैक्टर को 3.83 करने की डिमांड भी अहम है, क्योंकि इसी के आधार पर नई सैलरी तय होती है। साथ ही पे लेवल्स को मर्ज और अपग्रेड करने का सुझाव दिया गया है, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर को आसान और संतुलित बनाया जा सके। ये मेमोरेंडम केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। अब सबकी नजर सरकार और 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि कर्मचारियों की सैलरी और सुविधाओं में कितना बदलाव आता है।

गर्मी और लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी, हीटस्ट्रोक से कैसे करें बचाव जानें

 नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में तेज गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ रहा है. भारत मौसम विभाग (IMD) ने मध्य और पूर्वी भारत में लू (हीटवेव) की चेतावनी जारी की है. अप्रैल के मध्य से ही कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में 18 अप्रैल तक लू चलने की संभावना है. वहीं, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक (उत्तर आंतरिक) और गुजरात (सौराष्ट्र-कच्छ) में बढ़ते तापमान के बीच हीटवेव का अलर्ट है।  इसके अलावा राजस्थान, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा. IMD के मुताबिक, अप्रैल-जून के बीच इन इलाकों में लू के दिन सामान्य से ज्यादा हो सकते हैं. बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग के कारण देशभर में हीट वेव (लू) की अवधि लंबी हो रही है. जिसे देखते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हीटस्ट्रोक से बचने के लिए एडवाइजरी जारी की है।  हीटस्ट्रोक क्या है और क्यों खतरनाक है? हीटस्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104°F से ज्यादा हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता. यह स्थिति बहुत गंभीर होती है. हीटस्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है। कब और कैसे हो सकता है हीटस्ट्रोक? स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, गर्मी के मौसम में अगर पर्याप्त पानी न पिया जाए तो शरीर की ठंडक बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है. इससे तापमान बहुत बढ़ जाता है और हीटस्ट्रोक हो सकता है. हीटस्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान नियंत्रण से बाहर हो जाता है।  हीटस्ट्रोक से कैसे बचें? स्वास्थ्य मंत्रालय ने हीटस्ट्रोक से बचने के लिए कुछ आसान उपाय बताए हैं:-     गर्मी में शरीर से पानी की कमी बहुत तेजी से होती है. इसलिए दिन में बार-बार पानी पीते रहें. प्यान नहीं लगने पर भी खूब पानी पिएं.      दोपहर में 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर ना निकलें और ज्यादा मेहनत का काम ना करें.     ज्यादा कैफीन (जैसे चाय-कॉफी) से बचें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी कर सकते हैं.     हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें.     अगर बाहर काम करना जरूरी है तो थोड़ी-थोड़ी देर में छांव में बैठकर आराम करें. हीटस्ट्रोक होने पर तुरंत क्या करें?     अगर किसी व्यक्ति को हीटस्ट्रोक के लक्षण दिखें (जैसे तेज बुखार, चक्कर आना, उल्टी, बेहोशी, ज्यादा पसीना या पसीना बंद हो जाना) तो तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं और लिटा दें.     ठंडे पानी के कपड़े से शरीर को पोछें या ठंडी सिकाई करें.     होश में हो तो छोटे-छोटे घूंट में ठंडा पानी पिलाएं.     जब व्यक्ति बेहतर महसूस करने लगे तो खीरा, नारियल पानी जैसी नमी से भरपूर चीजें दें. स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्मी में सावधानी बरतने की अपील की है. बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर हीटस्ट्रोक के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं. ऐसे में इनपर खास नजर रखने की जरूरत है. गर्मी के मौसम में बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ जरूर रखें।   

28 हजार कर्मचारियों से हर घर का सर्वे, जानें मान सरकार के इस बड़े कदम के पीछे की रणनीति

चंडीगढ़  पंजाब की सियासत और सामाजिक ताने-बाने में 1 अप्रैल 2026 से एक ऐसी हलचल शुरू हो चुकी है, जो आने वाले दशकों तक अपना असर छोड़ेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब के पहले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वे का बिगुल फूंक दिया गया है। करीब 250 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट और 28 हजार प्रगणकों की फौज के साथ पंजाब के करीब 65 लाख परिवारों का दरवाजा खटखटाने की यह कवायद जारी है। सरकार का लक्ष्य साफ है कि अगले तीन महीनों में पंजाब के हर घर का कच्चा चिट्ठा सरकारी फाइलों में दर्ज हो जाए।  हम समझेंगे कि क्या यह सिर्फ एक सरकारी गिनती है या फिर पंजाब की रवायतों और हकीकतों को बदलने वाला कोई बड़ा मास्टरप्लान। आखिर क्यों पड़ी इस भारी भरकम सर्वे की जरूरत ? हकीकत यह है कि पंजाब में अनुसूचित जाति आबादी करीब 32 प्रतिशत है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। लेकिन यहां एक बड़ा पेंच है। यह आबादी कोई एकजुट समूह नहीं है। इस वर्ग में वाल्मीकि, रविदासिया, अधर्मी और मजहबी सिख जैसी कई जातियां शामिल हैं। इन सभी जातियों के बीच अपनी-अपनी अलग चुनौतियां और दूरियां हैं। अब तक सरकारों के पास कोई ठोस डाटा नहीं था कि विकास का पैसा वाकई किस घर की दहलीज तक पहुंचा है और कौन सा वर्ग आज भी पीछे छूटा हुआ है। यह सर्वे इसी बड़े डाटा गैप को भरने की एक गंभीर कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और कानूनी पेच इस सर्वे का एक बहुत गहरा कानूनी कनेक्शन भी है। अगस्त 2024 का वह ऐतिहासिक दिन याद कीजिए जब सुप्रीम कोर्ट ने द स्टेट ऑफ पंजाब बनाम दविंदर सिंह केस में एक अहम फैसला सुनाया था। अदालत ने साफ कहा था कि राज्य सरकारें आरक्षण के अंदर उप-वर्गीकरण कर सकती हैं। यानी आरक्षण के भीतर भी उन जातियों को प्राथमिकता दे सकती हैं जो सबसे ज्यादा पिछड़ी हुई हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की एक सख्त शर्त भी थी। कोर्ट का कहना था कि सरकारों के पास ऐसा करने के लिए मात्रात्मक और विश्वसनीय डाटा होना चाहिए। एक अप्रैल से शुरू हुआ यह सर्वे असल में वही डाटा जुटाने की कानूनी कवायद है, जिससे कल को सरकार के किसी भी फैसले को अदालत में चुनौती ना दी जा सके। सियासत की बिसात और 2027 के चुनाव का कनेक्शन जाहिर है जहां डाटा है, वहां राजनीति भी होगी। पंजाब की राजनीतिक पिच पर फिलहाल सभी दल इस सर्वे के साथ खड़े दिख रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और उनके निरंतर दबाव की जीत बता रही है, वहीं भाजपा के दिग्गज नेता भी इसे सामाजिक न्याय के लिए एक क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए यह अपना चुनावी वादा पूरा करने और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े वोट बैंक को साधने का सीधा मौका है। निजता का डर: क्या सुरक्षित रहेगी आपकी निजी जानकारी ? इस बड़े कदम के साथ सबसे बड़ी चिंता निजता की उठ रही है। जब 28 हजार सरकारी कर्मचारी आपके घर आकर आपकी जाति, आपकी कमाई और आपकी निजी जिंदगी के सवाल पूछेंगे, तो डर लगना लाजमी है। क्या यह डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा? क्या डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट के इस दौर में सरकार लोगों की प्रोफाइलिंग होने से रोक पाएगी? हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्ण गोपनीयता का भरोसा दिया है, लेकिन डिजिटल दौर में भरोसे और हकीकत के बीच हमेशा एक बारीक लकीर होती है। अंत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह डाटा वाकई पंजाब की सदियों पुरानी असमानता को खत्म करने का औजार बनेगा या फिर यह जातियों की दीवारें और ऊंची कर देगा। सर्वे के नतीजे ही भविष्य के इस पंजाब की असली तस्वीर साफ करेंगे।