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एआई, जीआईएस और सिंगल विंडो सिस्टम से निवेश प्रक्रिया होगी आसान, तेज व पारदर्शी

निवेश मित्र 3.0’ से बदलेगा निवेश का अनुभव, योगी सरकार का बड़ा डिजिटल कदम एआई, जीआईएस और सिंगल विंडो सिस्टम से निवेश प्रक्रिया होगी आसान, तेज व पारदर्शी कम दस्तावेज, कम प्रक्रियाएं और रियल-टाइम ट्रैकिंग से निवेशकों को मिलेगा बेहतर अनुभव लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  लोकभवन में 'निवेश मित्र 3.0’ का शुभारंभ किया। सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘निवेश मित्र 3.0’ को विकसित किया गया है, जो निवेशकों के लिए एक तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल प्रणाली के रूप में सामने आया है। सरल और प्रभावी होगा अनुभव ‘निवेश मित्र 3.0’ को खास तौर पर निवेशकों के अनुभव को सरल और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इसमें एआई आधारित चैटबॉट की सुविधा दी गई है, जिससे निवेशकों को तुरंत सहायता मिल सकेगी। साथ ही, आवेदन की स्थिति पर रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट की व्यवस्था की गई है, जिससे निवेशकों को हर चरण की जानकारी तुरंत मिलती रहेगी। एक प्लेटफॉर्म पर सभी मंजूरियां इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता डायनामिक कम्बाइंड एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) है, जिसके माध्यम से विभिन्न विभागों की अनुमतियां एक ही स्थान से प्राप्त की जा सकती हैं। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय की बचत होगी। जीआईएस लैंड बैंक से आसान होगी जमीन की पहचान निवेशकों के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जीआईएस आधारित लैंड बैंक को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार प्रदेश में उपयुक्त भूमि की पहचान आसानी से कर सकेंगे। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय ‘निवेश मित्र 3.0’ को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) से जोड़ा गया है, जिससे केंद्र और राज्य स्तर की मंजूरियों में बेहतर समन्वय और तेजी आएगी। यह सुविधा बड़ी परियोजनाओं वाले निवेशकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित होगी। प्रक्रियाओं में बड़ा सरलीकरण योगी सरकार ने निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इसके तहत आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी विभागीय कार्यवाही में 25%, दस्तावेजों में 15% तथा अन्य प्रक्रियात्मक चरणों में करीब 20% की और कमी की गई है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि अनुमोदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। सफलता की मजबूत नींव वर्ष 2018 में शुरू हुए ‘निवेश मित्र’ प्लेटफॉर्म ने पहले ही अपनी उपयोगिता साबित कर दी है। अब तक इस पोर्टल पर 21 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 97% का सफल निस्तारण किया जा चुका है। निवेश के लिए बन रहा पसंदीदा गंतव्य योगी आदित्यनाथ सरकार की डिजिटल पहल, पारदर्शी नीतियां और निवेशक-हितैषी माहौल उत्तर प्रदेश को देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य में बदल रहे हैं। ‘निवेश मित्र 3.0’ इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को और गति देगा।

यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प

योगी सरकार 142 बीपीएचयू के जरिए उपलब्ध कराएगी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी  इंचार्ज, रजिस्ट्रेशन रूम से लेकर वेटिंग रूम और सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब बनाई जाएंगी पीएचसी और सीएचसी के अंदर कराया जाएगा निर्माण लखनऊ  प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ब्लॉक स्तर तक मजबूत और आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार राज्य के विभिन्न ब्लॉकों में 142 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) स्थापित करने जा रही है। इन यूनिटों के जरिये ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जांच, पंजीकरण और प्राथमिक उपचार की बेहतर सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपये की लागत से हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें इंचार्ज कक्ष, रजिस्ट्रेशन रूम, वेटिंग रूम, सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब समेत कई आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इनका निर्माण मौजूदा पीएचसी और सीएचसी के भीतर ही कराया जाएगा, ताकि पहले से उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सक्षम बनाया जा सके। ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि योगी सरकार की योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन इकाइयों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी और मरीजों को जिला अस्पतालों पर निर्भरता कम रहेगी। सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को अब छोटी-बड़ी जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। ब्लॉक स्तर पर सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में भी सुधार आएगा। गांव के करीब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि बीपीएचयू मॉडल के लागू होने के बाद ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा। इससे मरीजों को पंजीकरण से जांच तक की कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगी। जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में होगा काम जनपद स्तर पर जिला पंचायतों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर निर्माण के लिए समस्त कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में किए जाएंगे। ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की इन घटकों की योजना बनाने एवं निगरानी में शामिल किया जाएगा।

एमपी सरकार ने 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण पूरा किया, बड़ी पहल

भोपाल   मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” और GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के माध्यम से कार्य प्रणाली में नवाचार का नया अध्याय जोड़ा है। विभाग ने यह महसूस किया कि सड़कों, पुलों और भवनों से संबंधित पूर्ण एवं प्रमाणिक डेटा के अभाव में योजनाओं का निर्माण अक्सर अनुमान के आधार पर करना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह संकल्प लिया कि सुधार की शुरुआत प्रमाणिक डेटा से की जाएगी। “आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है” इस कहावत को चरितार्थ करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” का विकास किया गया, जिससे विभाग की परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक और डिजिटल सर्वे संभव हो सका। इसके अंतर्गत अब तक राज्य की 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण कराया जा चुका है। ऐप के माध्यम से प्रदेश में तीन दिवसीय विशेष सड़क सर्वेक्षण अभियान संचालित किया गया, जिसमें विभाग के अभियंता स्वयं मैदान में उतरकर अपने-अपने क्षेत्रों की सड़कों का विस्तृत सर्वेक्षण करने में जुटे। सर्वेक्षण के दौरान सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट का प्रकार, राइट ऑफ वे (ROW), शोल्डर तथा सड़क की वर्तमान स्थिति सहित विभिन्न तकनीकी मापदंडों का डिजिटल रूप से डेटा संकलित किया गया। 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया व्यापक सर्वेक्षण में अब तक 71,210 किलोमीटर से अधिक सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण किया जा चुका है। इसके साथ ही 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया गया है। इस प्रक्रिया के दौरान नगरीय निकाय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा अन्य एजेंसियों की सड़कों के साथ लोक निर्माण विभाग की सड़कों की सीमाएं भी स्पष्ट रूप से चिन्हित की गई हैं। इससे विभाग के पास अपनी प्रत्येक परिसंपत्ति का अद्यतन, डिजिटल और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो गया है, जिसके आधार पर अब निर्णय अनुमान के बजाय तथ्यात्मक आधार पर लिए जा सकेंगे। प्रमाणिक GIS आधारित डेटा उपलब्ध होने के बाद विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क प्लानिंग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। पहले योजनाएं पारंपरिक पद्धति से कागजों पर तैयार की जाती थीं, किंतु अब पहली बार भास्कराचार्य संस्थान के तकनीकी सहयोग से विभाग के इंजीनियरों द्वारा प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए एक विशेष “मास्टर प्लान मॉड्यूल” विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की कनेक्टिविटी का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। इस मॉड्यूल के जरिए यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि किन पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। लोक निर्माण विभाग की यह पहल केवल एक योजना नहीं बल्कि प्रदेश के अधोसंरचना विकास के लिए तकनीक आधारित दीर्घकालिक दृष्टि का परिचायक है। GIS, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से भविष्य में सड़क निर्माण और उन्नयन की योजनाएं अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनेंगी। यह पहल प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन और सुदृढ़ अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।

भोपाल के आदमपुर खंती में कचरे के पहाड़ को हटाकर बनेगा हाईवे, आयोध्या बायपास पर होगा उपयोग

भोपाल आदमपुर खंती में वर्षों से ठोस कचरा का ढेर जमा है। यह भोपाल शहर के लिए मुसीबत है। अब कचरे का यह ढेर विकास का एक मजबूत आधार बनता जा रहा है। इसे लेकर एनएचआई ने एक प्रभावशाली पहल की है। साथ ही इस कचरे से मुक्ति के लिए स्थायी समाधान ढूंढा है। इस कचरे का इस्तेमाल अयोध्या बायपास के लगभग 16 किमी लंबे चौड़ीकरण कार्य में उपयोग किया जारहा है। साथ ही भोपाल–रायसेन से सागर तक NH-146 के निर्माण कार्यों में भी ऐसे पुनर्चक्रित मटेरियल के उपयोग को शामिल किया जा रहा है। इससे हरित और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे हो रहा है इस्तेमाल इस पहल के अंतर्गत आदमपुर खंती से प्राप्त ठोस कचरे का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जिसमें लगभग 10 लाख मीट्रिक टन सालिड वेस्ट के उपयोग का प्रावधान है। इसके साथ ही, कचरे के उपयोग से पूर्व उसके सैंपल लेकर लैब परीक्षण भी कराए गए हैं, ताकि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता, सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जा सके। बदबू और प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति आदमपुर खंती के आसपास रहने वाले लोगों को वर्षों से बदबू, प्रदूषण, धुएं और आग लगने जैसी समस्याओं से परेशान हैं। कचरे के निस्तारण से लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही कचरे से उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम होंगे और आसपास का वातावरण अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बन सकेगा। इस पहल के जरिए न केवल सालों से जमा कचरे के बड़े हिस्से को खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि एक मिसाल भी पेश होगी। सड़क निर्माण में कचरे का उपयोग कैसे होता है? ऐसे खत्म होगा कचरे का ढेर कचरे की छंटाई- आदमपुर खंती से निकाले गए कचरे को अलग-अलग श्रेणियों-प्लास्टिक, धातु, कांच, जैविक और इनर्ट (मिट्टी/मलबा) में विभाजित किया जाता है, ताकि केवल उपयोगी सामग्री को आगे प्रोसेसिंग के लिए चुना जा सके। प्रोसेसिंग और ट्रीटमेंट- छांटे गए कचरे को प्रोसेस किया जाता है। प्लास्टिक वेस्ट को साफ कर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदला जाता है, जबकि इनर्ट कचरे को छानकर निर्माण के लिए उपयुक्त बनाया जाता है। अनुपयोगी और हानिकारक तत्वों को अलग कर सुरक्षित रूप से निस्तारित किया जाता है। बिटुमिनस मिक्स तैयार करना- प्रोसेस्ड प्लास्टिक को गर्म बिटुमेन में मिलाकर मजबूत बिटुमिनस मिक्स तैयार किया जाता है। इससे सड़क की बाइंडिंग क्षमता बढ़ती है, दरारें कम होती हैं और पानी का असर कम होता है, जिससे सड़क अधिक टिकाऊ बनती है। सड़क की परतों में उपयोग- इनर्ट कचरा सड़क की निचली परत में उपयोग किया जाता है, जबकि बिटुमेन-प्लास्टिक मिश्रण को ऊपरी परत में बिछाया जाता है। इससे सड़क की लोड-बेयरिंग क्षमता और स्थायित्व दोनों बढ़ते हैं। गुणवत्ता जांच और निगरानी- निर्माण के प्रत्येक चरण में मटेरियल और कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाती है, ताकि सड़क सुरक्षा और दीर्घकालिक उपयोग के सभी मानकों को सुनिश्चित किया जा सके। 3R सिद्धांत पर आधारित सस्टेनेबल पहल इस पूरी पहल के तहत ‘3R – रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल’ की अवधारणा को अपनाकर कचरे का निरंतर और वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नया कचरा न्यूनतम उत्पन्न हो। हर दिन निकलने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए कई अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें ‘प्लास्टिक वेस्ट टू रोड कंस्ट्रक्शन’ एक सफल और प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। पर्यावरण और विकास का संतुलन इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक सहित सभी शहरी ठोस कचरे का 100% वैज्ञानिक प्रसंस्करण सुनिश्चित करना है, ताकि लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा को शून्य के करीब लाया जा सके। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत ‘प्लास्टिक वेस्ट से सड़क निर्माण’ की तकनीक स्वच्छता को टिकाऊ बुनियादी ढांचे से जोड़ते हुए सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

CM साय आज 5 लाख भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे

दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज 5 लाख भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे रायपुर जिला के सर्वाधिक 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर और सबसे कम बीजापुर जिला से 1542 भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिलेगा लाभ रायुपर दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के भूमिहीन कृषि श्रमिकों को सशक्त बनाना है। इस योजना से सर्वाधिक रायपुर जिला के 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर और सबसे कम बीजापुर जिला से 1542 भूमिहीन कृषि मजदूर शामिल हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि 'अंत्योदय' की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।             दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजनाके तहत 4.95 लाख से अधिक पात्र परिवारों के लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रूपए की वित्तीय सहायता सीधे हितग्राही के बैंक खाते में दी जाती है। 25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार से जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के न्याय और सुशासन की गूंज होगी। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है।          दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। संकल्प बजट 2026-27 में 600 करोड़ रूपए का प्रावधान के साथ भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक सुरक्षा का सशक्त संबल मिलेगा। यह सहायता सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचकर उन्हें स्थिरता, सम्मान और आत्मविश्वास प्रदान करेगी। सशक्त श्रमिकों के माध्यम से सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करना छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प है।          दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत रायपुर जिला के 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर, बिलासपुर जिला के 39 हजार 401 भूमिहीन कृषि मजदूर, महसमुंद जिला के 37 हजार 11 भूमिहीन कृषि मजदूर और सबसे कम बीजापुर जिला से 1542 भूमिहीन कृषि मजदूर, कोरिया जिला से 1549 भूमिहीन कृषि मजदूर और नारायणपुर जिला से 1805 भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिलेगा लाभ मिलेगा, जिनका ई केवायसी हो चुका है।          मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना को शुरू करने के पीछे हमारा उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करना है। इस योजना में भूमिहीन कृषि मजदूरों के साथ वनोपज संग्राहक भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी आदि पौनी-पसारी व्यवस्था से संबद्ध भूमिहीन परिवार भी शामिल हैं। इनके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले पुजारी, बैगा, गुनिया, माँझी परिवारों को भी शामिल किया गया है। लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ऐलान, जल्द लॉन्च होगा स्टेट एआई मिशन, सुशासन और विकास में होगी तेजी

शीघ्र ही लांच करेंगे स्टेट एआई मिशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुशासन और विकास को नई गति देगा स्टेट एआई मिशन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सुशासन के जरिए नागरिक सेवाओं और सुविधाओं को और भी सिविक-फ्रेंडली बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए नई-नई तकनीकों से जुड़कर प्रदेश में नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात् आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आज के दौर का सर्वाधिक संभावनाशील सेक्टर है। शासन-प्रशासन व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार भी आगे बढ़ रही है। अब इस दिशा में एआई की मदद ली जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम बहुत जल्द मध्यप्रदेश का अपना 'स्टेट एआई मिशन' लांच करने जा रहे हैं। यह एक लक्ष्य केंद्रित मिशन होगा। इस मिशन से शासन प्रणाली में कसावट और सुप्रबंधन लाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सुशासन एवं विकास को नई गति देने और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से इस मिशन को प्रारंभ किया जा रहा है। स्टेट एआई मिशन में कृषि, स्वास्थ्य, पोषण एवं आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संभावित जोखिमों की पूर्व पहचान संभव हो सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मिशन को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 में एआई तकनीक के लिए ढांचागत विकास किया जाएगा। वर्तमान एआई पहलों को एकीकृत कर आधारभूत तैयारी सुदृढ़ की जाएगी। वित्त वर्ष 2027-28 में सफल यूज़ केसेस को विभिन्न विभागों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा तथा वित्त वर्ष 2028-29 से एआई को शासन की स्थायी संस्थागत क्षमता के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक रूप से चर्चा कर रहे थे। जयपुर में निवेशकों से मिले 5,055 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीते शनिवार को जयपुर प्रवास के दौरान वहां निवेशकों से हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि निवेशकों ने मध्यप्रदेश के प्रति अगाध स्नेह और अपनत्व जताया। विभिन्न औद्योगिक समूहों, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, फूड-प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों सहित 400 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही। सीआईआई राजस्थान के अध्यक्ष एवं न्यूरोइक्विलिब्रियम के एमडी रजनीश भंडारी ने स्वागत भाषण में मध्यप्रदेश की नीतियों एवं उसके क्रियान्वयन की तारीफ की। प्रमुख उद्योगपतियों मनीष गुप्ता (चेयरमैन, इनसोलेशन एनर्जी), महावीर प्रताप शर्मा (चेयरमैन, राजस्थान एंजेल्स) और के एल जैन (अध्यक्ष, राजस्थान चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) ने भी अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस इन्टरैक्टिव सेशन में बेहद सकारात्मक संवाद के बाद सरकार को वहां के निवेशकों से 5,055 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनसे लगभग 3,530 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जयपुर में मिले निवेश प्रस्ताव के यह आंकड़े बताते हैं कि देश-विदेश के निवेशकों के बीच मध्यप्रदेश की साख और हमारी औद्योगिक नीतियों के प्रति विश्वास कितनी तेजी से बढ़ रहा है। 139 दिन लगातार चलेगा तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान गत 19 मार्च से प्रारंभ हो चुका है। बीते दो अभियानों को अच्छा प्रतिसाद मिला। इस दौरान प्रदेश में नये कुंए, बावड़ियों, अमृत सरोवरों, तालाबों के साथ-साथ पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्भरण और सूखी नदियों के पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किये गये। बीते साल खंडवा जिले में जल संचयन के लिए अभूतपूर्व काम हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तीसरे अभियान में करीब 2500 करोड़ रुपए से प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचयन कार्य किए जाएंगे। बीते सालों की तरह इस वर्ष भी जल संरक्षण के लिए विभिन्न कार्य किये जायेंगे। साथ-साथ नदियों, तालाबों, बावडियों और कुओं का जीर्णोद्धार भी मिशन मोड में किया जायेगा। नदियों के उद्गम क्षेत्रों में हरित विकास के लिये गंगोत्री हरित योजना में कार्य किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि हमारे जल गंगा संवर्धन अभियान को केंद्र सरकार से भी सराहना और समर्थन मिला है। जल बचाने के लिए देशभर में चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों में मध्यप्रदेश का जल गंगा संवर्धन अभियान अव्वल श्रेणी में आया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले वर्ष 2024 में करीब 30 दिन, दूसरे वर्ष 2025 में 120 दिन यह अभियान चलाया। मौजूदा साल में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक कुल 139 दिन तक लगातार यह अभियान चलाया जाएगा। 3 से 5 अप्रैल तक बनारस में होगा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भगवान काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी (बनारस) में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन किया जायेगा। यह वीर विक्रमादित्य के महात्म्य के दिनों-दिन बढ़ता प्रभाव है। उज्जैन में नैवेद्य लोक का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि उन्होंने हाल ही में उज्जैन में नैवेद्य लोक का लोकार्पण किया है। यह मालवांचल के व्यंजनों को एक प्लेटफार्म देने का प्रयोगात्मक प्रयास है। इसे इंदौर की छप्पन दुकानों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां कुल 108 दुकानें हैं, जो विभिन्न मालवी व्यंजनों का रसास्वादन कराती हैं। अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते सप्ताह आनंद विभाग के अधीन राज्य आनंद संस्थान द्वारा भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस मनाया गया। वे स्वयं इस आयोजन में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हमारे मनुष्यगत मनोभावों को अभिव्यक्त करने मनोरंजक का माध्यम बना। सरकार सबके जीवन में खुशहाली लाने के लिए ही तो काम कर रही है। इस प्रकार के आयोजनों से हमारी कार्यक्षमता और कार्यदक्षता सहित जीवन में खुशहाली भी बढ़ती है।  

25 मार्च को CM साय देंगे 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की मदद, अंत्योदय का संकल्प

अंत्योदय का संकल्प : करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 22 हजार से अधिक बैगा-गुनिया परिवार होंगे लाभान्वित 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना'  के अंतर्गत हितग्राहियों को मिलेगी धनराशि बलौदाबाजार में 25 मार्च को होगा भव्य कार्यक्रम रायपुर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के शिल्पकार भूमिहीन कृषि मजदूर अब आर्थिक सुरक्षा के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' न केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम है, बल्कि यह समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन देने का एक महायज्ञ भी है।             इस योजना के तहत इस साल 4 लाख 95 हज़ार 965 भूमिहीन हितग्राहियों के खाते में सीधे 10 हज़ार रुपये की धनराशि प्रत्येक हितग्राही के मान से अंतरित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इस सूची में 22 हजार 28 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी इस योजना के माध्यम से रिकॉर्ड सहायता प्रदान की थी। साल 2025 में कुल 5,62,112 हितग्राहियों को 10,000 रुपये के हिसाब से 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की राशि वितरित की थी। आंकड़ों का यह निरंतर प्रवाह दर्शाता है कि राज्य सरकार भूमिहीन परिवारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।            25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार की धरती से जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के 'न्याय और सुशासन' की गूंज होगी। 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। इस वर्ष की लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो हमारी प्राचीन औषधीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखे हुए हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि 'अंत्योदय' की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।          'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।

11 हवाई पट्टियां निजी हाथों में, सरकार ने शुरू किया जमीन अधिग्रहण

भोपाल  मध्य प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए हवाई पट्टियों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अभी आठ हवाई अड्डों के अलावा 23 हवाई पट्टियां हैं। यह उपयोग में रहें और बेहतर मेंटेनेंस होता रहे, इसके लिए 11 हवाई पट्टियां निजी संस्थाओं को उपयोग के लिए दी गई हैं। सिवनी, ढाना (सागर), गुना, रतलाम, उज्जैन, बिरवा (बालाघाट), उमरिया, छिंदवाड़ा, मंदसौर, नीमच और शिवपुरी की हवाई पट्टी को उड़ान प्रशिक्षण, अन्य विमानन गतिविधियों के संचालन के लिए निजी संस्थाओं को सौंपा गया है। अधिकारियों के अनुसार शिवपुरी और उज्जैन की हवाई पट्टियों के विकास व विस्तार के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हवाई पट्टियों को क्षेत्रीय हवाई अड्डों के रूप में विकसित किया जा रहा है। नियमित हवाई सेवा के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू इससे नियमित हवाई सेवाएं शुरू की जा सकेंगी। इनके लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है। केंद्र की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) के तहत 2024-25 में दतिया हवाई पट्टी को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को दिया गया था। दतिया प्रदेश का 8वां एयरपोर्ट। यहां से छोटे विमानों का संचालन शुरू हो चुका है। सरकार की इस पहल का बड़ा असर कहां? सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा असर प्रदेश के पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है। उज्जैन, छिंदवाड़ा, शिवपुरी और सिवनी जैसे शहर पहले से ही धार्मिक, प्राकृतिक और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। लेकिन सीमित कनेक्टिविटी के कारण इनकी पूरी क्षमता का उपयोग ही नहीं हो पा रहा है। अब सेवाएं शुरू होने से इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने और निवेश आने की उम्मीद है।  टूरिज्म को बढ़ावा खासतौर पर उज्जैन, जो महाकाल लोक के कारण देश-दुनिया भर के श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वहां हवाई सुविधा बढ़ने से यात्रा और आसान हो जाएगी। इसी तरह शिवपुरी और बालाघाट जैसे क्षेत्र, जो नेशनल पार्क और प्राकृतिक पर्यटन के लिए जाने जाते हैं। वहां भी पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी। स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा इसके अलावा उड़ान प्रशिक्षण और एविएशन की गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पायलट ट्रेनिंग, ग्राउंड स्टाफ, मेंटेनेंस और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा। समय पर जमीन अधिग्रहण से विकास तक का काम तो होगा बड़ा फायदा हालांकि इस पूरी योजना में सफलता की कहानी इन हवाई पट्टियों का विकास समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगी। एयरलाइंस कंपनियां इन रूट्स पर नियमित सेवाएं शुरू करें। जमीन अधिग्रहण, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और संचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं अगर तय समय सीमा में पूरी होती हैं, तो इसका पूरा फायदा प्रदेश को मिलेगा। सरकार का पूरा फोकस फिलहाल छोटे शहरों को बड़े हवाई नेटवर्क से जोड़ने पर है। इससे आने वाले समय में मध्य प्रदेश के उभरते हवाई कनेक्टिविटी हब के रूप में भी सामने आ सकता है।

लोकसभा में सीटों का विस्तार, महिलाओं को मिलेगा 2029 से रिजर्वेशन, सरकार लाएगी नया संशोधन बिल

नई दिल्ली लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने के लिए सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आई थी. यह बिल पारित हो जाने के बावजूद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू नहीं हो सका है. अब सरकार जल्द से जल्द महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने, यह कानून लागू करने की तैयारी में है।  महिलाओं को आरक्षण देने के लिए सरकार अब संसद में संशोधन विधेयक लाएगी. इस बिल में लोकसभा सीटों के परिसीमन और सीटें बढ़ाने के लिए 2011 की जनगणना को ही आधार मानने का प्रावधान किया जाएगा. यह संशोधन विधेयक पारित होने के बाद नए परिसीमन में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी. 816 सदस्यों वाली लोकसभा में 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।  गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जो संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था, उसमें यह प्रावधान था कि यह नई जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा. अब सूत्रों का कहना है कि सरकार इस हफ्ते नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम बिल में संशोधन लेकर आएगी. यह संशोधन इसलिए लाया जा रहा है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण लागू किया जा सके।  संविधान संशोधन लाने की भी तैयारी सरकार की तैयारी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के साथ ही संविधान संशोधन लाने की भी है. यह संविधान संशोधन इसलिए लाया जाएगा, जिससे साल 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा में सीटें बढ़ाई जा सकें और 2029 के आम चुनाव में महिला आरक्षण लागू किया जा सके. साल 2011 की जनगणना के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनाव में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है. इसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित की जा सकती हैं।  गृह मंत्री ने की विपक्ष के नेताओं से बात सरकार ने इसे लेकर विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत भी शुरू कर दी है. गृह मंत्री अमित शाह ने महिला आरक्षण बिल में संशोधन को लेकर शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार) जैसे विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बातचीत की है. शुरुआत में गृह मंत्री ने छोटे विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बातचीत की है. कांग्रेस जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टी और अन्य बड़े दलों के नेताओं के साथ बातचीत अभी बाकी है। 

ईरान संकट गहराया: भारत में बढ़ी हलचल, केंद्र ने बुलाई सर्वदलीय मीटिंग

नई दिल्ली मध्य एशिया में जारी तनाव का असर भारत पर भी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले ही कहा है कि हमें भी तैयार रहने की जरूरत है। वहीं अब सूत्रों का कहना है कि सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। जानकारी के मुताबिक बुधवार को शाम पांच बजे सर्वदलीय बैठक होगी। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बैठक करके क्षेत्रीय सुरक्षा की समीक्षा की थी। उन्होंने सीडीएस जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जनरल उपेंद्र द्विवेदी व ऐडमिरल डिनेश के त्रिपाठी के अलावा डीआरडीओ चेयरमैन के साथ बैठक करके तैयारियों की जानकारी ली। ईरान और इजरायल-ईरान के बीच जारी युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। वहीं होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझने लगी है। बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने अचानक ईरान पर हमला करके उसेक सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या कर दी थी। इसी के बाद से तनाव बढ़ता ही चला गया और ईरान ने खाड़ी देशों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। राज्यसभा में भी बयान दे सकते हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में इस संकट को लेकर बयान दिया था। वहीं जानकारी के मुताबिक आज वह राज्यसभा में भी अपनी बात रख सकते हैं। पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा था कि मध्य एशिया में जारी इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत जिस तरह से कोरोना संकट के दौरान तैयार था, वैसे ही तैयार रहने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा था कि पश्चिमी एशिया में जो कुछ भी हो रहा है वह बहुत ही दुखद और चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ ही आम आदमी के जीवन पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सारा विश्व यही चाहता है कि युद्ध जल्द रुके। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में तेल और गैस की आपूर्ति ज्यादातर उन्हीं देशों से होती है जो कि युद्ध के चपेट में हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर लोकसभा में वक्तव्य देते हुए यह भी कहा था कि इस संकट का सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा था कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है तथा भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।