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आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति देगा यह कानून: मुख्यमंत्री साय

वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा से पारित आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति देगा यह कानून: मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का नाम अब छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल -वित्त मंत्री ओ पी चौधरी रायपुर राज्य में आवासीय और शहरी अधोसंरचना विकास को व्यापक स्वरूप देने के उद्देश्य से वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह संशोधन द्वारा अब मंडल का नाम छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल किया गया है एवं मंडल की भूमिका को विस्तार देते हुए उसे एक आधुनिक और बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सदन में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का गठन मूलतः मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 के तहत किया गया था। राज्य गठन के बाद यह संस्था प्रदेश में आवासीय योजनाओं, नगरीय अधोसंरचना और किफायती आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में मंडल द्वारा लगभग 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। राज्य शासन द्वारा 735 करोड़ रुपये का ऋण भुगतान कर मंडल को ऋणमुक्त किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 2.0) के अंतर्गत 2,000 ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण को स्वीकृति मिली है। मंत्री चौधरी ने बताया कि 650 करोड़ रुपये से अधिक की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है। नवंबर 2025 में आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेले में 2,060 करोड़ रुपये की 56 नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया, जिसमें 2,517 संपत्तियों की बुकिंग और 1,477 का आवंटन किया जा चुका है। वर्तमान में मंडल छत्तीसगढ़ के 33 में से 27 जिलों में सक्रिय है और प्रक्रियात्मक सुधारों के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ भौतिक कब्जा सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अलावा, 858 करोड़ रुपये की लागत से 146 विकासखंडों में शासकीय आवासों का निर्माण कर मंडल ने अपनी तकनीकी क्षमता भी सिद्ध की है। उन्होंने कहा कि रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को एकीकृत कर एक शहरी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें गृह निर्माण मंडल की भूमिका अहम होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026 के पारित होने पर कहा कि यह निर्णय राज्य में आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि मंडल का दायरा बढ़ाकर उसे एक आधुनिक एवं बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे शहरीकरण को सुव्यवस्थित रूप मिलेगा और आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार “संकल्प से सिद्धि” के मंत्र के साथ प्रदेश में योजनाबद्ध शहरी विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले समय में एक सशक्त और विकसित राज्य के रूप में उभरेगा।

ईरान-इजरायल से लेकर पाक-अफगान तक युद्ध, करोड़ों बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा गहरा असर, सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट

  नई दिल्ली आज दुनिया के नक्शे पर एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां स्कूलों की घंटी नहीं बल्कि धमाकों का शोर सुनाई दे रहा है. ईरान-इजरायल, रूस-यूक्रेन, पाक-अफगान से लेकर दुन‍िया के कई देश इस आग में झुलस रहे हैं. लेकिन इस सनक का सबसे ज्यादा खामियाजा अगर कोई भुगत रहा है या भुगतने वाला है तो वो आज के बच्चे यानी कल के युवा…  दुनिया की सबसे बड़ी बाल अधिकार संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की ताजा और डराने वाली रिपोर्ट ने इस खतरे को सामने रखा है. रिपोर्ट कहती है कि मिडिल ईस्ट और उसके आसपास के देशों में जारी हिंसा ने करीब 5.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप कर दी है। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे एक 'एजुकेशन इमरजेंसी' कहा जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के डेटा पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि 5 से 17 साल के करोड़ों बच्चे अब स्कूल जाने के बजाय अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं। ईरान में 65 स्कूल मलबे में तब्दील ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी के हवाले से खबर है कि अकेले ईरान में हवाई हमलों ने 65 स्कूलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है. जिन कमरों में बच्चे पहाड़े और कविताएं याद करते थे, वहां अब सिर्फ ईंट-पत्थर और धुआं बचा है। स्कूल नहीं, अब 'शेल्टर होम' कहिए रिपोर्ट में उन 12 देशों का जिक्र है जहां शिक्षा व्यवस्था आईसीयू (ICU) पर है. इनमें ईरान, इजरायल, जॉर्डन, सऊदी अरब, फिलिस्तीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में दो बड़ी चुनौतियां सामने आई हैं। स्कूलों पर हमला: कई स्कूल बमबारी में क्षतिग्रस्त हो गए हैं. मजबूरी में शरण: जो स्कूल बच गए हैं, उन्हें बंद कर दिया गया है क्योंकि वहां बेघर हुए हजारों परिवार शरण लिए हुए हैं. यानी क्लासरूम अब रहने के ठिकानों में बदल गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई भी फेल! हालांकि कुछ देशों ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और बार-बार कटते इंटरनेट ने इस उम्मीद को भी तोड़ दिया है. कई इलाकों में बिजली और सुरक्षित इंटरनेट न होने के कारण बच्चे महीनों से अपनी किताबों से दूर हैं. बता दें कि इस क्षेत्रीय अस्थिरता का असर सिर्फ युद्ध लड़ रहे देशों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी इस हिंसा का 'रिपल इफेक्ट' (लहर जैसा असर) दिख रहा है. वहां भी अस्थिरता की वजह से बच्चों की नियमित पढ़ाई में बाधा आ रही है।

बासमती चावल का निर्यात ठप, MP में समुद्र में फंसा चावल, किसानों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ीं

भोपाल  मध्य पूर्व में लगातार गहराते तनाव और इजरायल-ईरान-अमेरिका के बीच बन रहे युद्ध जैसे हालातों का सीधा और गंभीर असर भारत के कृषि निर्यात, विशेषकर बासमती चावल के कारोबार पर दिखाई देने लगा है. खाड़ी देशों में पैदा हुए इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) के कारण भारत से होने वाला बासमती का निर्यात लगभग पूरी तरह से ठप पड़ गया है. हालात ये हैं कि देश का करीब 4 लाख टन प्रीमियम बासमती चावल बीच समुद्र में जहाजों पर या विभिन्न बंदरगाहों (पोर्ट) पर अनिश्चितकालीन स्थिति में फंसा हुआ है। खाड़ी देशों में इन किस्मों की है भारी मांग मध्य प्रदेश से, विशेषकर रायसेन जिले से बासमती चावल का बड़े पैमाने पर ईरान समेत कई खाड़ी देशों में निर्यात होता है. इन देशों में बासमती सेला 1509, 1121, सुगंधा और शरबती जैसे चावलों की भारी डिमांड रहती है. लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते पिछले कुछ दिनों से एक्सपोर्ट पूरी तरह रुक गया है और जहाजों के कंसाइनमेंट बीच रास्ते में ही फंस गए हैं। 2000 डॉलर का शिपिंग खर्च 9000 डॉलर पहुंचा रायसेन जिले में स्थित 'अपर्णा फूड मिल एसोसिएशन' के अध्यक्ष ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर टैक्स और लागत बेतहाशा बढ़ गई है. समुद्री रास्तों, खासकर लाल सागर (Red Sea) रूट पर बनी अस्थिरता के चलते शिपिंग लाइनों के किराए में भारी उछाल आया है. पहले जहां एक कंटेनर का शिपिंग खर्च लगभग 2000 डॉलर हुआ करता था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 9000 डॉलर प्रति कंटेनर तक पहुंच गया है। मिलर्स पर मंडरा रहा भारी नुकसान का खतरा लगातार बढ़ती लागत, बढ़े हुए टैक्स और रास्ते में फंसे माल के कारण एक्सपोर्ट कारोबार लगभग ठप होने की कगार पर पहुंच गया है. व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए और समुद्री रास्ते सुरक्षित नहीं हुए, तो बासमती चावल उद्योग से जुड़े किसानों, मिलर्स और व्यापारियों को एक बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. फिलहाल, पूरे बाजार की नजरें मध्य पूर्व के हालातों पर टिकी हुई हैं। 31 मार्च की क्लोजिंग से व्यापारियों पर दबाव 31 मार्च के आसपास वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग होती है। ऐसे समय में व्यापारियों और बैंकों को अपने हिसाब-किताब पूरे करने होते हैं, लेकिन निर्यात रुकने से व्यापारियों पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। माल बंदरगाहों और गोदामों में अटकने से बासमती की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है। गोयल के अनुसार भारत से होने वाले बासमती चावल निर्यात का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा और पंजाब से जाता है। इसलिए इस संकट का सबसे ज्यादा असर भी इन राज्यों के राइस मिलर्स और व्यापारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि एक बड़ी राइस मिल में करीब 200 मजदूर काम करते हैं, जिनमें से अधिकतर बिहार और उत्तर प्रदेश के होते हैं। सतीश गोयल ने बताया कि एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल सरकार से दो बार मिल चुका है। उन्होंने मांग की है कि बढ़े हुए फ्रेट और इंश्योरेंस का बोझ सरकार वहन करे या राहत दे। बंदरगाहों पर खड़े कंटेनरों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को माफ किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव जयपुर में उद्योगपतियों से करेंगे इंटरएक्टिव सेशन के माध्यम से संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव जयपुर में इंटरएक्टिव सेशन में उद्योगपतियों से करेंगे संवाद टेक्सटाइल, ईवी-ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन सेक्टर के निवेशक होंगे शामिल जयपुर के आईटीसी राजपूताना में “इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश” भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश को देश के सबसे भरोसेमंद और उभरते निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर निवेश आकर्षण की सक्रिय मुहिम चला रहे हैं। इसी कड़ी में वे विभिन्न राज्यों में रोड-शो और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद के माध्यम से मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को निवेशकों के सामने रख रहे हैं। भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित सफल संवाद के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव 21 मार्च 2026 को जयपुर के आईटीसी राजपूताना में “इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश” में उद्योग जगत से सीधा संवाद करेंगे, जहां वे मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों, नई औद्योगिक नीतियों और बेहतर अधोसंरचना की जानकारी देते हुए निवेशकों को राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित करेंगे। भारत की तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था के इस दौर में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज करा रहा है, तब मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने औद्योगिक विस्तार और संतुलित क्षेत्रीय विकास को लेकर एक स्पष्ट, आत्मविश्वासपूर्ण और परिणामोन्मुख रणनीति के साथ आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय निवेश परिदृश्य में भी मध्यप्रदेश अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए स्वयं को एक उभरते हुए निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है। जयपुर में आयोजित सत्र विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों—कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, टेक्सटाइल एवं गारमेंट्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, नवीकरणीय ऊर्जा, माइनिंग एवं मिनरल्स तथा पर्यटन से जुड़े उद्योगपतियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रत्यक्ष संवाद तथा चयनित निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें प्रमुख आकर्षण रहेंगी, जिनमें सेक्टर-विशिष्ट अवसरों, परियोजना स्तर के सहयोग और समयबद्ध निवेश क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य जयपुर एवं राजस्थान के आसपास के क्षेत्रों के उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों, उन्नत अधोसंरचना, नवीन औद्योगिक नीतियों तथा आकर्षक प्रोत्साहन योजनाओं की प्रत्यक्ष एवं तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करते हुए उन्हें राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि मध्यप्रदेश अब संभावनाओं तक सीमित राज्य नहीं रहा, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत औद्योगिक आधार के साथ निवेश को धरातल पर उतारने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है। उनका मानना है कि निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समग्र क्षेत्रीय विकास का माध्यम है। मोहन सरकार की प्राथमिकताओं में भी निरंतरता और स्पष्टता दिखाई देती है। विगत वर्ष को ‘औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन वर्ष’ के रूप में समर्पित करते हुए मध्यप्रदेश ने निवेश आकर्षण और औद्योगिक आधार को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। वहीं वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में चिन्हित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव अब कृषि, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औद्योगिक विकास के साथ समेकित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे है। यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य को समग्र और समावेशी विकास की ओर अग्रसर कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 26 फरवरी 2026 को राजस्थान के भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित एक सफल इंटरएक्टिव सत्र में मध्यप्रदेश के धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए जयपुर में यह दूसरा प्रमुख आयोजन हो रहा है, जिसके माध्यम से मध्यप्रदेश अपने औद्योगिक सामर्थ्य और निवेश संभावनाओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है। राज्य द्वारा अल्प समय में 18 नई औद्योगिक नीतियों का क्रियान्वयन तथा दो ‘जन विश्वास अधिनियमों’ को लागू कर प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाया जाना इस परिवर्तनशील और निवेशोन्मुखी दृष्टिकोण का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की “रीजनल बैलेंस अप्रोच” के अंतर्गत औद्योगिक विकास को पूरे प्रदेश में संतुलित रूप से विस्तार दिया जा रहा है। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क, नर्मदापुरम में पावर एवं रिन्यूएबल एनर्जी उपकरणों के लिए देश का पहला मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, जबलपुर में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब, रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क और धार में सबसे बड़े पीएम मित्रा पार्क जैसी पहलें राज्य की औद्योगिक प्रगति और दूरदर्शी योजना के सशक्त उदाहरण हैं। इसके साथ ही भोपाल में स्थापित देश का पहला संत रविदास मल्टी-स्किल्स ग्लोबल स्किल्स पार्क तथा इंदौर, भोपाल, उज्जैन और रीवा में विकसित हो रहे आईटी पार्क राज्य के नवाचार, कौशल विकास और प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति प्रदान कर रहे हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य मध्यप्रदेश के औद्योगिक पोटेंशियल को प्रदर्शित कर देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करना, उद्योगों को प्रदेश में स्थापित होने के लिये प्रेरित करना और रोजगार, कौशल तथा क्षेत्रीय समृद्धि के नए अवसर सृजित करना। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा राज्य की औद्योगिक तैयारियों, अधोसंरचना विस्तार, एक्सप्रेस-वे और औद्योगिक कॉरिडोर कनेक्टिविटी तथा लॉजिस्टिक दक्षता पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया जाएगा।

नई FASTag नियमों के तहत टोल न कटने पर दोगुना जुर्माना, सरकार ने कड़ा फैसला लिया

नई दिल्ली हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार ने FASTag rules में बदलाव करते हुए नया सख्त नियम लागू किया है। अब अगर टोल प्लाजा पर किसी कारण से FASTag से भुगतान नहीं हो पाता है, तो वाहन मालिक को तय समय में भुगतान करना जरूरी होगा, वरना दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा। 72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो देना होगा डबल चार्ज नए नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए बैरियर-फ्री टोल प्लाजा से गुजर जाता है और 72 घंटे के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाता, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी अगर आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपको मूल टोल से दो गुना रकम चुकानी पड़ेगी। क्यों लाए गए ये नए नियम? सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बिना भुगतान के टोल पार करने वालों पर रोक लगे और डिजिटल टोल सिस्टम को और मजबूत किया जा सके। नियमों का पालन सुनिश्चित हो। यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है। टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल की मांग अपने आप खत्म हो जाएगी। यानी अगर गलती एजेंसी की है और समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आपको राहत मिल सकती है। क्या है 'अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क'? संशोधित नियमों में 'अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यह वह टोल है जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली द्वारा वाहन के गुजरने की पुष्टि के बावजूद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे मामलों में, पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें वाहन का विवरण, टोल पार करने की तारीख और स्थान, और देय राशि की जानकारी होगी। ये नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस 'वाहन' से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया राशि वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके। FASTag यूजर्स के लिए जरूरी सलाह FASTag में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें। कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। 72 घंटे के अंदर भुगतान जरूर करें। कुल मिलाकर, सरकार ने टोल वसूली को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इससे जहां नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, वहीं सही यूजर्स को भी सुरक्षा और राहत मिलेगी।

महिंद्रा ने Batman Edition को लेकर ग्राहकों के दबाव में वापस किए पैसे

 नई दिल्ली देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा ने हाल ही में अपनी मशहूर इलेक्ट्रिक कार BE 6 का नया स्पेशल Batman Edition का दूसरा बैच लॉन्च किया था. लेकिन यह कदम कंपनी के लिए परेशानी का कारण बन गया. जहां नए ग्राहकों ने इसे उत्साह के साथ लिया, वहीं पहले बैच के खरीदार इस फैसले से नाराज हो गए. अब ग्राहकों की नाराजगी को देखते हुए कंपनी ने बड़ा फैसला लेते हुए बायबैक ऑफर पेश किया है। क्यों देना पड़ा बायबैक ऑफर दरअसल, कंपनी ने अगस्त 2025 में BE 6 बैटमैन एडिशन को 'लिमिटेड रन' मॉडल बताते हुए लॉन्च किया था और इसकी सिर्फ 999 यूनिट्स ही बनाने की बात कही थी. खास बात यह रही कि ये सभी यूनिट्स कुछ ही मिनटों में बिक गई थीं. लेकिन इसके करीब 7 महीने बाद, 6 मार्च 2026 को कंपनी ने इसी स्पेशल एडिशन का दूसरा बैच भी लॉन्च कर दिया. इससे पहले बैच के ग्राहकों को लगा कि कंपनी ने लिमिटेड एडिशन के नाम पर उनके साथ धोखा किया है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर ग्राहकों ने इस फैसले की जमकर आलोचना की। ग्राहकों की नाराजगी के बावजूद, BE 6 बैटमैन एडिशन का दूसरा बैच भी लॉन्च होते ही मिनटों में बिक गया. इस बार कीमत में करीब 70,000 रुपये की बढ़ोतरी भी की गई थी, फिर भी डिमांड में कोई कमी नहीं दिखी. हालांकि, पहले खरीदारों का गुस्सा लगातार बढ़ता रहा। कंपनी का बड़ा फैसला ग्राहकों के रिस्पांस को देखते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अब पहले बैच के ग्राहकों के लिए फुल बायबैक ऑफर की घोषणा की है. यानी अगर कोई ग्राहक अपनी कार वापस करना चाहता है, तो वह कंपनी से संपर्क कर सकता है. इसके लिए ग्राहकों को अपने नजदीकी डीलरशिप से संपर्क करना होगा. कंपनी ने साफ किया है कि यह ऑफर 18 मार्च 2026 से सिर्फ 30 दिनों के लिए ही वैलिड रहेगा। Batman Edition में क्या है ख़ास BE 6 Batman Edition में डार्क नाइट थीम दी गई है, जो इसे एक यूनिक लुक देती है. कार के एक्सटीरियर पर Batman के बैज दिए गए हैं, वहीं केबिन के अंदर भी इसी थीम को फॉलो किया गया है. हालांकि, इसके पावरट्रेन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें 79 kWh का बैटरी पैक मिलता है, जो एक बार चार्ज करने पर 682 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है. इसमें रियर माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 286 hp की पावर और 380 Nm का टॉर्क जनरेट करती है।

भोपाल में 5 मेट्रो स्टेशनों के नीचे पार्किंग होगी, ‘शहर सरकार’ का बजट 23 को पेश, 14 नई पार्किंग का प्रस्ताव

भोपाल  भोपाल की 'शहर सरकार' का बजट 23 मार्च को पेश होगा। अबकी बार करीब साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित है। टैक्स बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पिछले साल टैक्स बढ़ने की वजह से मंत्री-विधायकों ने टैक्स बढ़ाने पर आपत्ति ली है। बैठक में 14 नई पार्किंग को लेकर प्रस्ताव आएगा। इनमें से 5 पार्किंग मेट्रो स्टेशन के नीचे प्रस्तावित की गई है। जहां 40 फोर व्हीलर और 250 टू व्हीलर्स खड़े किए जा सकेंगे। 16 मार्च को हुई मेयर इन कौंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। अब परिषद में यह प्रस्ताव आएगा। पार्किंग को लेकर निगम ने पुलिस की भी सहमति ली है। मेट्रो स्टेशन बने, लेकिन पार्किंग नहीं बनाई बता दें कि भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है। इसमें कुल 8 स्टेशन- सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। इनमें से एक भी स्टेशन पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए मुश्किलें झेलनी पड़ रही है। मेट्रो स्टेशनों पर सिर्फ पिक एंड ड्रॉप की व्यवस्था ही है। यानी, यात्री किसी गाड़ी से उतर और चढ़ तो रहे हैं, लेकिन वे अपने वाहन यहां खड़ा नहीं कर सकते। इस मुद्दे पर मेट्रो अफसर दो महीने से पार्किंग के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। नगर निगम ने इस समस्या का हल निकाला है। इन जगहों पर पार्किंग रहेगी सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन के दोनों गेट, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी मेट्रो स्टेशन के नीचे पार्किंग बनेगी। एमपी नगर, रानी कमलापति और एम्स स्टेशन के नीचे फिलहाल को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, तीनों जगह पर दूसरी पार्किंग है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर ही बड़ी पार्किंग है। मेट्रो से आने-जाने वाले यात्री यहां पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं। एम्स के पास मेट्रो की खुद की जमीन है। जहां पार्किंग विकसित होगी। एमपी नगर में ही निगम की एक पार्किंग है। यात्री वहां पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर सकेंगे। लेगेसी वेस्ट के निपटारे का प्रस्ताव आएगा परिषद की बैठक में आदमपुर खंती लीगेसी वेस्ट के निपटान के लिए प्रस्ताव भी आएगा। दो दिन पहले एमआईसी ने इसे परिषद में लाने का निर्णय लिया था। इसमें 55.54 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निगम के 145 वाहनों को कंडम घोषित किया जाएगा निगम के अनुपयोगी 145 वाहनों को कंडम घोषित कराए जाने के संबंध में भी प्रस्ताव परिषद की बैठक में आएगा। इसे भी एमआईसी मंजूरी दे चुकी है।

बाजार में उथल-पुथल और सप्लाई संकट से बढ़े दबाव, क्या क्रूड $200 तक जाएगा?

मुंबई ईरान के साथ चल रहे युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल $110 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. यूएस क्रूड (WTI) करीब $100 के आसपास आ गया है. मार्च 2026 में ब्रेंट की कीमत $113 से $116 तक पहुंच चुकी है, जो पिछले कुछ हफ्तों में 50-60% की बढ़ोतरी दिखाती है. ईरान-इजराइल तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  में जहाजों की आवाजाही रोक दी है, जहां दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. इससे वेस्ट एशिया से तेल निर्यात 60% से ज्यादा घट गया है. फिलहाल दोपहर 3 बजे ब्रेंट क्रूड की कीमत 8 फीसदी उछलकर 117 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।  सीएनबीसी आवाज की रिपोर्ट में एनालिस्ट ने बताया है कि भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब खुल जाए, लेकिन बाजार की स्थिति सामान्य होने में अभी काफी समय लगेगा. सिटीग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, Q2 CY26 में ब्रेंट क्रूड की कीमत औसतन 130 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है. ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या फिलहाल तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकती है? चलिए जानते हैं. क्या तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकता है? कई विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अब असंभव नहीं रहा. ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाकारी ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो तेल $200 तक पहुंच सकता है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा बिगड़ रही है. ईरान ने कहा है कि अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों के लिए एक भी लीटर तेल नहीं गुजरेगा. होर्मुज सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि यहां अगर ब्लॉकेज हुआ तो सप्लाई तुरंत टूट जाएगी।  विशेषज्ञ अमृता सेन (एनर्जी एस्पेक्ट्स) का कहना है, “यह अब सिर्फ रिस्क प्रीमियम नहीं है, असली सप्लाई डिसरप्शन हो रहा है.” बॉब मैकनैली और हेलिमा क्रॉफ्ट जैसे एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर बड़ा डिसरप्शन हुआ तो कीमतें तेजी से उछल सकती हैं, क्योंकि स्पेयर कैपेसिटी बहुत कम है. कुछ एनालिस्ट्स कहते हैं कि $150-$200 तक जाना अब “अनथिंकेबल” नहीं रहा. हालांकि अमेरिकी एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने कहा है कि $200 “अनलाइकली” है, लेकिन पूरी तरह नामुमकिन नहीं।  करेंसी पर दबाव बढ़ेगा अगर होर्मुज बंद रहा तो ग्लोबल सप्लाई चेन बिगड़ जाएगी, महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक मंदी आ सकती है. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, करेंसी पर दबाव बढ़ेगा और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आएगा. भारत ने अपने टैंकरों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए हैं और डिप्लोमैसी से जहाजों को पास करवाया है. लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो गैसोलीन $6-7 प्रति गैलन तक जा सकती है, जो आम आदमी पर बोझ डालेगा।  इतिहास में 2008 में ब्रेंट $147 तक पहुंचा था (आज के मुताबिक $211 के बराबर), और 1973-74 के ऑयल क्राइसिस में भी कीमतें कई गुना बढ़ी थीं. आज का बाजार पहले से ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि कई जगहों पर डिसरप्शन एक साथ हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अब अनिश्चितता नहीं, बल्कि असली शॉक प्राइस कर रहा है. डिप्लोमेसी, स्ट्रैटेजिक रिजर्व रिलीज या मिलिट्री एक्शन से राहत मिल सकती है, लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो $200 तेल दुनिया को अलग ही दौर में ले जाएगा. ऐसे में महंगाई, मंदी और ग्लोबल पावर बैलेंस बदल सकता है। 

ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का सुनहरा मौका: पीएम मोदी ने दुनियाभर के निवेशकों से की अपील

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक निवेशकों से भारत के बिजली क्षेत्र में 'उत्पादन, निवेश, नवाचार और विस्तार' करने का आह्वान किया। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026' के पहले दिन केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल द्वारा पढ़े गए एक लिखित संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "मैं वैश्विक समुदाय को भारत में निर्माण करने, नवाचार करने, निवेश करने और भारत के साथ आगे बढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूं। मुझे विश्वास है कि यह समिट सार्थक संवाद और मजबूत साझेदारी को बढ़ावा देगा, जो भारत की प्रगति को ऊर्जा देगा।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस समिट का उद्देश्य पूरे पावर और एनर्जी सेक्टर को एक मंच पर लाना है ताकि विचारों का आदान-प्रदान हो, सहयोग बढ़े और क्षेत्र के विकास के लिए साझा दिशा तय की जा सके। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सतत विकास के साथ आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाने, वैश्विक कनेक्टिविटी मजबूत करने और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है और सभी तक भरोसेमंद बिजली पहुंच सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने पहले ही 50 प्रतिशत से ज्यादा गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर ली है और 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। पीएम मोदी ने 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' जैसी पहल का जिक्र करते हुए कहा कि यह वैश्विक सहयोग की दिशा में भारत के विजन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत मजबूत सप्लाई चेन, बैटरी निर्माण, ग्रीन जॉब्स और सुधारों के जरिए एक भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बन रहा है। 'शांति एक्ट 2025' से न्यूक्लियर एनर्जी के नए अवसर खुल रहे हैं, जबकि 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के जरिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है और टिकाऊ खपत को प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने लिखित संदेश में कहा कि बिजली वितरण क्षेत्र में हुए सुधारों से नुकसान (एटी एंड सी लॉस) कम हुआ है और वित्तीय स्थिति में सुधार आया है, जिससे यह सेक्टर और अधिक मजबूत और निवेश के लिए आकर्षक बन गया है।

शांति बहाली पर भारत का जोर, पीएम मोदी ने एक दिन में 4 देशों से साधा संवाद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार से गुरुवार के बीच दुनिया के चार राष्ट्राध्यक्षों से बात की। बुधवार को कुवैत के क्राउन प्रिंस से तो गुरुवार को ओमान के सुल्तान, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, और मलेशिया के पीएम से पश्चिम एशिया संकट की गंभीर स्थिति पर चर्चा की। पीएम मोदी ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी। पीएम ने अपने मलेशियाई समकक्ष इब्राहिम से बातचीत में कूटनीति और बातचीत को शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा, "मैंने अपने दोस्त मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से बात की। उन्हें और मलेशिया के लोगों को आने वाले हरि राया एदिलफित्री त्योहार के मौके पर दिल से बधाई दी। हमने वेस्ट एशिया के हालात पर चिंता जताई, साथ ही सहमति जताई कि संवाद और डिप्लोमेसी के जरिए ही तनाव कम कर शांति-स्थिरता बहाल की जा सकती है।" फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से हुई बातचीत का विवरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हालात को शांत करने और बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटना बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देश क्षेत्र और दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए आपसी सहयोग जारी रखेंगे। पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान को 'भाई' कहकर संबोधित किया। कहा, "मेरी भाई सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ अच्छी बातचीत हुई और ओमान के लोगों को ईद की अग्रिम बधाई दी। साथ ही हम इस बात पर सहमत हुए कि डी-एस्केलेशन (तनाव कम करने) और उसके बाद शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और डिप्लोमेसी को प्राथमिकता देने की जरूरत है। ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की भारत निंदा करता है और भारतीय नागरिकों समेत हजारों लोगों की सुरक्षित वापसी में मदद करने के लिए ओमान की कोशिशों की सराहना करता है। भारत और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और फ्री नेविगेशन के पक्ष में हैं। इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पीएम मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह से बुधवार रात बात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर बात की और हाल की घटनाओं पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने कुवैत पर हुए हमलों की भी कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने माना कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए लगातार बातचीत जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्राउन प्रिंस का धन्यवाद भी किया, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहता है।