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भोपाल स्लॉटर हाउस कांड पर बड़ा एक्शन, 11 कर्मचारी सस्पेंड, ठेका मालिक को ब्लैक लिस्ट किया गया

भोपाल  गोवध मामले में नगर निगम के 32 करोड़ से बने स्लॉटर हाउस को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। निगम शहर में पशु स्लॉटरिंग का इंतजाम नहीं करेगा। शहर के बाहर व्यवस्था करने की जिम्मेदारी प्रशासन के पाले में डाल दी। स्लॉटर हाउस में जानवरों की कटाई करने वाली लाइव स्टॉक प्रालि कंपनी व मालिक असलम कुरैशी को आजीवन ब्लैकलिस्ट किया गया है। निगम ने 11 कर्मियों को सस्पेंड किया है।   भोपाल नगर निगम की परिषद बैठक में जोरदार हंगामा हुआ. नगर निगम के स्लॉटर हाउस से गोमांस की सप्लाई के मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने बैठक में कड़ा विरोध जताया. इस मामले को लेकर परिषद में कांग्रेस पार्षद दल के सदस्य भी आक्रामक रहे और नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का घेराव किया. वहीं मामले से दुखी 2 भाजपा पार्षद परिषद की बैठक छोड़कर चले गए. एक घंटे देरी से शुरू हुई बैठक बता दें की गोमांस को लेकर पहले से ही हंगामा होना तय था. कांग्रेस पार्षदों ने पहले ही इसकी तैयारी कर ली थी. वहीं भाजपा के पार्षदों ने भी इस मामले में परिषद को घेरने की तैयारी की ली. एक दिन पहले गोमांस वाले मुद्दे को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने भी नगर निगम कार्यालय का घेराव किया था. महापौर और परिषद पर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई का भी दवाब था. ऐसे में सबसे पहले स्लॉटर हाउस में पदस्थ वेटनरी डॉक्टर बेनी प्रसाद गौर को निलंबित कराया गया. इसके आदेश संभागायुक्त संजीव कुमार सिंह ने जारी किए. निलंबन का लेटर जारी होने के बाद करीब एक घंटे देरी से परिषद की बैठक शुरू हुई और सत्तापक्ष ने डॉक्टर के निलंबन की जानकारी दी. 11 नगर निगम के कर्मचारी होंगे निलंबित परिषद बैठक शुरू होते ही दोनों पक्षो के पार्षद ने गोमांस मामले में उच्च स्तरीय कमेटी और आरोपितों पर कार्रवाई करने की मांग की. इस पर निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने सदन को कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने देंगे. निगम अध्यक्ष ने आयुक्त को निर्देश दिया कि इस मामले में स्लाटर हाउस में कार्यरत नगर निगम के सभी 11 कर्मचारियों को निलंबित किया जाए. इसके साथ ही स्लॉटर हाउस का संचालन करने वाली लाइव स्टॉक को ब्लैक लिस्टेड करने के निर्देश दिए. साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में यह एजेंसी नगर निगम के किसी भी टेंडर में पार्टिसिपेट ना कर सके, यह भी सुनिश्चित किया जाए. शासन स्तर पर होगी उच्च स्तरीय जांच कांग्रेस पार्षद दल के सदस्यों ने कहा कि उन्हें नगर निगम की जांच कमेटी पर भरोसा नहीं है. इसलिए शासन स्तर पर एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाई जाए. यदि नगर निगम के अधिकारी ही जांच कमेटी में शामिल होंगे तो निष्पक्ष जांच नहीं होगी. इसके बाद नगर निगम अध्यक्ष ने कहा कि परिषद की ओर से व्यवस्था दी जा रही है कि इस मामले की जांच नगर निगम के बाहर के शासन स्तर के अधिकारी करेंगे, इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा. भाजपा पार्षद का इस्तीफ़ा, अध्यक्ष ने किया अस्वीकार नगर निगम परिषद की बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और महापौर व एमआईसी के इस्तीफे की मांग की. भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव भी विरोध में जैकेट पर कागज चस्पा कर पहुंचे. भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों समेत कई सदस्यों ने विरोध जताया. इस दौरान भावुक होकर भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने परिषद से इस्तीफ़ा देने की चेतावनी दी. उनका कहना था कि जब तक गोमांस के मामले में शामिल सभी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती वह परिषद में वापस नहीं आएंगे. हलाकि बाद में भाजपा पार्षद उन्हें परिषद में लेकर आए और निगम अध्यक्ष ने उनका इस्तीफ़ा अस्वीकार कर दिया. परिषद से बहिर्गमन के दौरान भार्गव के साथ भाजपा पार्षद नीरज सिंह भी साथ रहे. महापौर ने कहा- एमआईसी ने नहीं दी गोवंश काटने की अनुमति महापौर मालती राय ने कहा कि स्लॉटर हाउस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जा चुके हैं. विपक्ष द्वारा 2024 में एमआईसी के अनुमोदन पर भवन निर्माण और अनुमति को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय न तो महापौर परिषद थी और न ही यह प्रक्रिया उनके कार्यकाल में शुरू हुई. महापौर परिषद ने स्लॉटर हाउस में गोवंश काटने की अनुमति नहीं दी थी. पीपीपी मोड पर बने टेंडर, प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका और निगरानी से जुड़े सभी बिंदुओं की जांच होगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. भाजपा पार्षद ने दिया इस्तीफा भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव, सुरेंद्र वाडीका, पप्पू विलासराव घाटगे ने एमआइसी पर मनमानी के आरोप लगाए। कहा, संगठन गोरक्षा मुद्दे पर राजनीति करता है, पर हमारी ही सरकार गो-रक्षा नहीं कर सकी। पार्षद देवेंद्र ने पद से इस्तीफा दिया और चले गए। अध्यक्ष ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। यह है मामला जिंसी स्थित स्लॉटर हाउस से भैंस के मांस की आड़ में गोमांस सप्लाई किया जा रहा था। दिसंबर में पुलिस ने मुंबई भेजे जा रहे मांस की बड़ी खेप से सैंपल लिए तो गोमांस की पुष्टि हुई। इसके बाद स्लॉटर हाउस की ठेका कंपनी लाइव स्टॉक और मालिक कुरैशी पर कार्रवाई हुई। इन पर हुई कार्रवाई अब्दुल खान, रहमान खान, मोहम्मद खान, फरीद खान, राजा खान, सलीम, वसीम खान, युसूफ खान, अब्दुल हकीम, मो. रफीक।

गुटखा किंग पर छत्तीसगढ़ जीएसटी ने लगाया तीन सौ करोड़ का जुर्माना

दुर्ग. छत्तीसगढ़ जीएसटी ने दुर्ग के गुटखा किंग गुरमुख जुमनानी पर 317 करोड़ की पेनल्टी लगाई है. जुमनानी बीते 5 वर्षों से सितार नाम का गुटखा बनाकर पूरे राज्य में बेच रहे थे. तंबाखू युक्त गुटखा सितार पूरी तरह से प्रतिबंधित है. इस वजह से विभाग गुरमुख जुमनानी ने पांच वर्षों की गणना करके टैक्स और पैनल्टी की राशि तय की है. जीएसटी विभाग के अधिकारी ने बताया गुटखे का पूरा धंधा प्लानिंग के तहत था. गोदाम के लिए गुरमुख के पिता लोगों से रेंट एग्रीमेंट करते थे. इसी स्थान पर गुटखे की पैकिंग होती थी. इसके बाद बोरे में भरकर गुटखा दुकानों तक सप्लाई किया जाता था. जांच में टीम ने कई पुराने एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं. गुरमुख के सितार गुटखे की कीमत बाजार में 2 रुपए थी. गुटखे का फॉर्मूला बनाने वाले दीपक पांडे ने बताया कि 1 मिनट में 250 गुटखे के पैकेट मशीन से तैयार किए जाते थे. एक दिन में 50 बोरा गुटखा मार्केट में खपाया जाता था. महीने में सिर्फ 18 दिन ही मजदूर काम करते थे. जानकारी के मुताबिक, गुरमुख के जोरातराई और गनियारी स्थित फैक्ट्री पर जुलाई 2025 में जीएसटी विभाग ने छापा मारा था. तब पता चला कि दोनों फैक्ट्री में सिर्फ पैकिंग होती है. गुटखे का रॉ मटेरियल उसके बेटे सागर की राजनांदगांव स्थित कोमल फूड नाम की फैक्ट्री में तैयार किया जाता है. बाद में टीम ने उस फैक्ट्री में छानबीन की. जो मजदूर गनियारी और जोरातराई में काम करते मिले थे, वही कोमल फूड में मिले.

टक्कर के बाद आग की भयंकर लपटों में घिरी शुक्ला ब्रदर्स बस, इंदौर में यात्रियों ने बचाई जान

इंदौर इंदौर के पटेल ब्रिज के नीचे बुधवार सुबह विधायक गोलू शुक्ला की बस में अचानक आग लग गई। आग लगने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ी को मौके पर बुलाया गया। विधायक गोलू शुक्ला के परिवार की ट्रेवर्ल्स एजेंसी की बस ने एक बाइक सवार को टक्कर मार दी। वह गंभीर रुप से घायल हुआ है। इसके बाद भीड़ ने बस को आग के हवाले कर दिया।  जानकारी के मुताबिक एक्टिवा से जा रहे संतोष को बस ने टक्कर मारी और गाड़ी बस के नीचे आ गई। इस घटना में संतोष गंभीर रूप से घायल हो गया। बस ने पीछे से संतोष की गाड़ी को टक्कर मारी थी, इस दौरान वह बस के नीचे फंस गया था। स्थानीय लोगों ने बस के नीचे से युवक को निकालकर अस्पताल भेजा। घटना के बाद बस में से अचानक चिंगारी उठी और देखते ही देखते वह आग का गोला बन गई। जानकारी के मुताबिक बस सांवेर से इंदौर आ रही थी। पुलिस दो पहलुओं पर कर रही जांच बस द्वारा एक्टिवा सवार को टक्कर मारने और उसमें आग लगने के मामले में पुलिस दो पहलुओं पर जांच कर रही है। इसमें यह देखा जा रहा है कि बस में शार्ट सर्किट की वजह से आग लगी या फिर किसी में बस में जानबूझकर आग लगाई। तुकोगंज पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसा राजकुमार ब्रिज के पास हुआ। घटना की सूचना पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी गई, लेकिन तब तक आग बस में फैल चुकी थी। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने बस में लगी आग को बुझाया। जानकारी के मुताबिक बस इंदौर-उज्जैन रूट की बताई जा रही है। बस में बैठे यात्री घटना के बाद से डर गए थे, इसके बाद वे अन्य साधनों से अपने स्थान के लिए रवाना हुए। पुलिस अब बस को सड़क से हटाकर यातायात सुधारने में जुट गई है। फायर ब्रिगेड के एसआई शोभाराम मालवीय के मुताबिक, एक टैंक पानी डालकर आग पर काबू पा लिया गया है। ड्राइवर अभी मौके पर नहीं मिला है। संभवतः बस को बाहर निकालने के दौरान ही उसमें शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसमें ड्राइवर तुरंत गाड़ी से उतरकर बाहर आ गया। तुकोगंज टीआई जितेंद्र यादव के मुताबिक, एक बाइक को बस ने टक्कर मारी थी, इसके बाद बस में आग लगी। बाइक सवार को ज्यादा चोट नहीं आई है। उसे उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के हाथों उज्जैन में श्रीमहाकाल महोत्सव का उद्घाटन, पाँच दिन चलेगा उत्सव

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में करेंगे श्रीमहाकाल महोत्सव का शुभारंभ 14 से 18 जनवरी तक मनाया जाएगा श्रीमहाकाल महोत्सव उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जनवरी को श्रीमहाकाल महालोक उज्जैन में पाँच दिवसीय 'श्रीमहाकाल महोत्सव' का शुभारंभ करेंगे। 18 जनवरी 2026 तक चलने वाला यह महोत्सव श्रीमहाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय के प्रांगण में कला, संगीत और वैचारिक विमर्श का अनूठा संगम होगा। वीर भारत न्यास और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर भारतीय संस्कृति, कला और अटूट श्रद्धा के महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है। 5 दिनों तक बहेगी संगीत सरिता महोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे। 14 जनवरी: महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ 'शिवोऽहम्' की संगीतमय प्रस्तुति देंगे। 15 जनवरी: मुम्बई का प्रसिद्ध 'द ग्रेट इंडियन क्वायर' 'शिवा' थीम पर प्रस्तुति देगा। 16 जनवरी: सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी। 17 जनवरी: इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुम्बई के विपिन अनेजा व उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी। 18 जनवरी: महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों द्वारा प्रस्तुत 'शिव केंद्रित नृत्य नाटिका' से होगा, जो महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाएगा। त्रिवेणी संग्रहालय में प्रतिदिन जनजातीय संस्कृति के होंगे दर्शन महोत्सव में प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन होंगे। इसमें छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन होगा। प्रतिदिन निकलने वाली 'कला यात्रा' शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रीमहाकाल लोक पहुँचेगी। इसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब के रोमांचक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे। 15 जनवरी को होगा बौद्धिक विमर्श सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ, 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय 'शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में' रखा गया है, जहाँ विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराईयों पर प्रकाश डालेंगे। आमजन को इस भक्तिमय उत्सव में सहभागी होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का ऐलान: रायपुर को मेट्रो सिटी के रूप में किया जाएगा विकसित

रायपुर : रायपुर को मेट्रो सिटी के रूप में विकसित करेगी सरकार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बढ़ते शहरीकरण के अनुरूप विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े अधोसंरचनाओं को समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश रायपुर शहर विकास के रोडमैप पर हुई व्यापक चर्चा: रेल्वे,नगर निगम एवं लोक निर्माण विभाग बेहतर समन्वय कर विकास कार्य की गति में लाए तेजी रायपुर शहर एवं आसपास स्थित क्षेत्रो के समग्र विकास को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कनेक्टिविटी,शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस रायपुर रायपुर शहर के विकास में धन की कोई कमी आड़े नहीं आएगी। राज्य सरकार जनादेश और जनभावना के अनुरूप रायपुर को मेट्रो सिटी की तर्ज पर विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं की आधुनिक और सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव  साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में रायपुर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नगरीय निकायों को अधोसंरचना विकास के लिए पूर्व की तुलना में ढाई गुना अधिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे राजधानी क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध विकास कार्य संभव हो सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण रायपुर में यातायात, आवास, जल आपूर्ति और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर ठोस और व्यावहारिक योजना बनाकर कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि शहर की जरूरतों को आने वाले दशकों तक पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि रायपुर का समग्र विकास तभी संभव है जब नगर निगम, रेलवे और लोक निर्माण विभाग आपसी समन्वय के साथ योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा बताए गए जमीनी मुद्दों और आवश्यकताओं को प्राथमिकता के साथ कार्ययोजनाओं में शामिल किया जाए। बैठक में शहर के ड्रेनेज सिस्टम की स्थिति, प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिक्रमण, निगम द्वारा निर्मित व्यवसायिक परिसरों में खाली दुकानों के पुनः विक्रय, स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण तथा मेकाहारा मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं के उन्नयन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने, पेयजल आपूर्ति, जल शोधन संयंत्रों, सीवरेज नेटवर्क, खेल मैदानों के संरक्षण तथा झुग्गी-झोपड़ी पुनर्विकास योजनाओं की प्रगति की भी गहन समीक्षा की गई, ताकि शहरी जीवन की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार लाया जा सके। मुख्यमंत्री साय ने भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अंडरग्राउंड विद्युत लाइनें, नए सड़क मार्ग, फ्लाईओवर, सार्वजनिक भवनों तथा स्टेडियमों के निर्माण जैसे प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स के सम्बन्ध में भी निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री साय ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजे जाएँ और बुनियादी अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए, ताकि रायपुर को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और नागरिक-अनुकूल राजधानी के रूप में विकसित किया जा सके। बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, वित्त ओ.पी. चौधरी एवं कौशल उन्नयन मंत्री खुशवंत साहेब, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी सहित पुरंदर मिश्रा, राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

मकर संक्रांति की तारीख तय क्यों हो गई? अगले 54 वर्षों तक 15 जनवरी का ही संयोग

नई दिल्ली ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9:39 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। इस वर्ष संक्रांति का पुण्यकाल लगभग 16 घंटे तक रहेगा, जो अगले दिन सूर्योदय के बाद 15 जनवरी की दोपहर तक माना जाएगा। क्यों बदलती है मकर संक्रांति की तिथि? ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य के राशि परिवर्तन में हर वर्ष लगभग 20 मिनट की देरी होती है। इस प्रकार 3 वर्षों में लगभग 1 घंटे का अंतर, 72 वर्षों में 24 घंटे यानी 1 दिन का अंतर हो जाता है। चूंकि सूर्य और चंद्रमा अपने मार्ग में पीछे नहीं चलते, इसलिए हर 72 वर्षों में संक्रांति की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाती है।   2080 तक 15 जनवरी को ही संक्रांति ज्योतिषविद् आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, इस गणना के आधार पर वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद संक्रांति की तिथि बढ़कर 16 जनवरी हो जाएगी। हालांकि 72 वर्षों का यह चक्र वर्ष 2008 में ही पूरा हो गया था, लेकिन कुछ वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातः काल में होने के कारण पूर्वकाल मानकर मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रही। पहले कब-कब मनाई जाती थी मकर संक्रांति?     1936 से पहले: 14 जनवरी     1864 से 1936: 13 जनवरी     1792 से 1863: 12 जनवरी विशेष बात यह है कि 12 जनवरी 1863, जब स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व था। इस वर्ष का योग और धार्मिक महत्व इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व वृद्धि योग, शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि, ज्येष्ठा नक्षत्र और गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन साधारण नदी में स्नान भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है। राशि के अनुसार करें दान मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। जातक अपनी राशि के अनुसार दान कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। इस दिन किसी का अपमान न करें, पेड़ न काटें और तुलसी की पत्तियां न तोड़ें।     मेषः लाल मिर्च, लाल वस्त्र, मसूर दाल     वृषभः सफेद तिल के लड्डू, चावल, चीनी     मिथुनः हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत मूंग     कर्कः जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, घी     सिंहः गुड़, चिक्की, शहद, मूंगफली का दान     कन्याः मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को खिलाएं     तुलाः सफेद वस्त्र, मखाना, चावल, चीनी     वृश्चिकः मूंगफली, गुड़, लाल रंग के गर्म कपड़े     धनुः पीले वस्त्र, केले, बेसन, चने की दाल     मकरः काले तिल के लड्डू, कंबल     कुंभः ऊनी कपड़े, सरसों तेल, जूता-चप्पल     मीनः पीली सरसों, चने की दाल, मौसमी फल

मुख्यमंत्री ने मशाल प्रज्जवलन के साथ “खेलो एमपी यूथ गेम्स” की घोषणा की

प्रदेश के खिला‍ड़ियों को समग्र सुविधाएँ करायेंगे उपलब्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने मशाल प्रज्जवलन के साथ "खेलो एमपी यूथ गेम्स" की घोषणा की वॉटर प्रोजेक्शन और लेजर-शो के साथ बोट क्लब पर हुई रंगारंग शुरूआत देश में पहली बार खेल विभाग और खेल संघों के संयुक्त समन्वय से होंगे गेम्स शेफाली अल्वारेस एवं दिव्या कुमार की सुमधुर प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोहा मुख्यमंत्री ने खेलो एमपी यूथ गेम्स के लोगो, जर्सी, थीम सांग और शुभंकर का किया अनावरण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेलो एमपी यूथ गेम्स की भव्य लांचिंग ओलम्पिक खेलों की तरह हुई है। आगाज़ ऐसा हुआ है तो अंजाम भी बहुत सुखद ही होगा। राज्य सरकार खेल, खिलाड़ी और खेल मैदानों के उन्नयन के लिये कार्य कर रही है। खिलाड़ियों को लाखों नहीं, करोड़ों तक की सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के बोट क्लब पर खेलो एमपी यूथ गेम्स का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां किसी वैश्विक आयोजन का नजारा दिख रहा है। उन्होंने आयोजक खेल एवं युवा कल्याण मंत्री और उनके विभाग को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल से किया गया कार्य इसी तरह छटा बिखेरता है। समारोह में वॉटर प्रोजेक्शन, लेजर-शो, भव्य आतिशबाजी, शेफाली अल्वारेस एवं दिव्या कुमार की प्रस्तुति के साथ खेलो एमपी यूथ गेम्स की शुरूआत हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह इसलिए भी प्रशंसनीय आयोजन है क्योंकि यहां व्यापक जन भागीदारी दिखाई दे रही है। इससे खिलाड़ी उत्साहित और प्रोत्साहित होंगे। खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने में राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खेलो एमपी यूथ गेम्स के स्लोगन "मध्यप्रदेश की जय-सबकी विजय'' की सराहना की। खेल संघों के संयुक्त समन्वय से आयोजित झीलों की नगरी भोपाल से एमपी के सबसे बड़े खेल महाकुंभ का भव्य शुभारंभ हुआ। शुभारंभ समारोह में भोपाल के तालाबों की भव्यता सजीव रूप में दिखाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सभी खेलों में देश आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश भी इसमें कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि खेलो एमपी यूथ गेम्स में पिट्टू जैसे खेलों को शामिल कर नवाचार किया गया है। साथ ही ग्रामीण अंचल की प्रतिभाओं को निखारने के लिये विकासखण्ड, जिला, संभाग और फिर राज्य स्तर पर प्रतियोगिताएँ आयोजित की गई हैं। इसमें डेढ़ लाख खिलाड़ियों के भाग लेने की उम्मीद है। मेरी सभी खिला‍ड़ियों से आशा है कि जो भी काम करो, दिल से करो, तो परिणाम सुखद ही प्राप्त होगा। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खिलाड़ियों को बेहतर से बेहतर खेल सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। वहीं हमारे खेल प्रेमी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में खेलों का लगातार उन्नयन हो रहा है। कार्यक्रम में "खेलो एम. पी यूथ गेम्स" के लोगो, थीम सांग, टीशर्ट और शुभंकर (मैस्कॉट) लाँच किया गया। प्रतियोगिता 31 जनवरी तक होगी। यूथ गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे राज्य टीम चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य स्तर पर विजेता खिलाड़ियों को लगभग 4 करोड़ रूपये की राशि पुरस्कार स्वरूप दी जाएगी। इसमें प्रथम पुरस्कार 31 हजार रूपये, द्वितीय 21 हजार एवं तृतीय पुरस्कार 11 हजार रूपये रहेगा। चयन प्रक्रिया ब्लॉक स्तर से प्रारंभ होगी। खेलो एमपी यूथ गेम्स-2025 में कुल 28 खेलों की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। खेल संघों के साथ बेहतर समन्वय के लिये खेल विभाग द्वारा समन्वय अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। उद्घाटन समारोह में खेल प्रेमियों को बड़ी संख्या में आमंत्रित किया गया। राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधि भी अतिथि के रूप में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि जिन खेलों की परंपरा एवं लोकप्रियता जिस क्षेत्र में है, उन्हीं क्षेत्रों में संबंधित खेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया गया है। महिला दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम की सदस्यों दी प्रोत्साहन राशि समारोह के दौरान ब्लाइंड वुमन्स टी20 वर्ल्ड कप 2025 की विश्व विजेता भारतीय महिला दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम की मध्यप्रदेश की खिलाड़ी सुनीता सराठे, दुर्गा येवले एवं सुषमा पटेल को प्रोत्साहन स्वरूप 25 लाख रूपए दिए गए। इसमें से 10 लाख रूपए नगद एवं 15 लाख रूपए फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में दिए गए। इसके साथ ही महिला खिलाड़ियों के कोचेस को एक-एक लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। समारोह के मुख्य आकर्षण में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के चित्रों को वॉटर प्रोजेक्शन के माध्यम से देखकर दर्शक अभिभूत हुए। बड़े तालाब पर कतारबद्ध रोशनी के साथ खड़े शिकारों ने दर्शकों का मन मोहा। लोक कलाकारों के सामूहिक नृत्य से समारोह की शुरूआत हुई। कार्यक्रम में मंत्री कुंवर विजय शाह, राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजी कैलाश मकवाना, हितानंद शर्मा और खेल संचालक राकेश कुमार गुप्ता मौजूद थे। प्रदेश के 313 विकासखंडों की होगी सहभागिता राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, शिवपुरी, ग्वालियर, सागर एवं नर्मदापुरम में प्रस्तावित है। ब्लॉक स्तर से चयन प्रक्रिया के अंतर्गत जिला स्तर पर प्रदेश के 313 विकासखंडों की सहभागिता होगी। राज्य स्तर पर प्रदेश के 10 संभाग- भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा, चंबल, नर्मदापुरम एवं शहडोल की टीमें भाग लेंगी। तीन चरणों में 11 खेलों की प्रतियोगिताएँ तीन चरणों (ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर) में 11 खेलों की प्रतियोगिताएँ होंगी। इसमें हॉकी, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, खो-खो, तैराकी, टेबल टेनिस, मल्लखम्ब, कुश्ती, जूडो, शतरंज, वेटलिफ्टिंग शामिल हैं। चार चरणों (ब्लॉक, जिला, संभाग एवं राज्य स्तर) में 10 खेलों की प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी। इसमें फुटबॉल, व्हालीबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन, पिट्टू, बास्केटबॉल, टेनिस, योगासन, रस्साकसी, कबड्डी शामिल हैं। आर्चरी, ताईक्वांडो, क्याकिंग- कैनोईंग, रोईंग, फैंसिंग, शूटिंग, थ्रो बॉल की प्रतियोगिताएँ सीधे राज्य स्तर पर आयोजित की जाएँगी।  

राजकोट ODI: भारत सीरीज जीतने उतरेगा, न्यूजीलैंड की निगाहें बराबरी पर

राजकोट विराट कोहली और रोहित शर्मा की शानदार फॉर्म ने टीम इंडिया की कुछ प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों को लेकर बढ़ती चिंताओं को कुछ हद तक कम कर दिया है। टीम इंडिया न्यूजीलैंड के खिलाफ बुधवार 14 जनवरी को राजकोट में होने वाले दूसरे वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट मैच में जीत हासिल करके तीन मैच की सीरीज में अजेय बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी। भारत ने वडोदरा में खेले गए पहले मैच में न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराया था। वॉशिंगटन सुंदर उस मैच में चोटिल हो गए थे और वह वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनसे पहले ऋषभ पंत इंजर्ड होकर सीरीज से बाहर हो गए थे।   चयनकर्ताओं ने दिल्ली के आयुष बडोनी को टीम में शामिल किया है, लेकिन भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर की ऑलराउंडर को प्राथमिकता देने की रणनीति को देखते हुए नीतीश कुमार रेड्डी के रूप में एक और ऑलराउंडर को अंतिम एकादश में शामिल किया जा सकता है। ऋषभ पंत पहले वनडे से पूर्व चोटिल होने के कारण सीरीज से बाहर हो गए थे। चयनकर्ताओं ने उनकी जगह ध्रुव जुरेल को टीम में शामिल करने का फैसला किया, जो टीम प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में एक और विकल्प हो सकते हैं। भारतीय टीम के पास कई विकल्प हैं, लेकिन अगले महीने से शुरू होने वाले टीम टी20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए वह किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहेगी। टी20 टीम में वनडे टीम से बिल्कुल अलग बल्लेबाजी क्रम होगा, लेकिन कुछ नाम दोनों टीमों में समान हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण नाम ऑलराउंडर तिलक वर्मा का है, जो ग्रोइन की चोट के कारण न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले तीन टी20 मैचों में नहीं खेल पाएंगे। भारतीय टीम की इन चिंताओं के बीच सभी की निगाह कोहली और रोहित शर्मा पर टिकी रहेगी जो अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर भी दमदार क्रिकेट खेल रहे हैं। पहले मैच में कोहली वनडे में अपने 54वें शतक से चूक गए, लेकिन उनकी 91 गेंदों पर खेली गई 93 रन की पारी ने भारत की जीत की नींव रखी। भारत और न्यूजीलैंड की टीमों में काफी अंतर नजर आता है। कीवी टीम का गेंदबाजी आक्रमण मजबूत नहीं है और भारतीय बल्लेबाज इसका पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। पहले मैच में कप्तान शुभमन गिल ने सधी हुई अर्धशतकीय पारी खेली, जबकि उप कप्तान श्रेयस अय्यर एक रन से अर्धशतक बनाने से चूक गए। रोहित शर्मा फिर से भारत को अच्छी शुरुआत दिलाने की कोशिश करेंगे। कोहली इस समय अलग ही तरह की क्रिकेट खेल रहे हैं और वह आत्मविश्वास से भरे हुए नजर आते हैं। ऐसा लगता है कि वह अपेक्षाओं और आलोचनाओं के बोझ से पूरी तरह मुक्त हैं। कोहली ने शुरुआत से ही न तो आक्रामक बल्लेबाजी करने से परहेज की है और न ही रन बनाने का कोई मौका छोड़ा है। यही कारण है कि उन्होंने वडोदरा में सभी प्रारूपों में सबसे कम पारियों में 28,000 रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया। भारत को हालांकि अपनी गेंदबाजी विशेषकर स्पिनरों के प्रदर्शन में सुधार करने की जरूरत है। पिछले मैच में तेज गेंदबाजों को गेंद की गति कम करने की रणनीति अपनाने से कुछ विकेट मिले थे और स्पिनरों को निरंजन शाह स्टेडियम में बेहतर पिच की उम्मीद होगी। पहले वनडे में हार के बावजूद न्यूजीलैंड को इससे काफी आत्मविश्वास मिला होगा कि कोहली के शानदार प्रदर्शन के बावजूद उसने भारत को कड़ी टक्कर दी। भारत जब सहजता से लक्ष्य हासिल करने की तरफ बढ़ रहा था तब काइल जैमीसन ने अपने गेंदबाजी कौशल का शानदार प्रदर्शन करके मैच को रोमांचक बना दिया था। उसकी टीम को आखिरी क्षणों में कैच छोड़ने का खामियाजा भुगतना पड़ा था। बाएं हाथ के बल्लेबाजों डेवोन कॉनवे और हेनरी निकोल्स ने पहले विकेट के लिए 117 रन जोड़कर न्यूजीलैंड को अच्छी शुरुआत दिलाई थी लेकिन उसके मध्यक्रम के बल्लेबाज इसका फायदा नहीं उठा पाए। उसकी टीम इस विभाग में सुधार करने के उद्देश्य से मैदान पर उतरेगी। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा। टीमें इस प्रकार हैं: भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रवींद्र जड़ेजा, नितीश कुमार रेड्डी, आयुष बडोनी, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा और यशस्वी जायसवाल न्यूजीलैंड: माइकल ब्रैसवेल (कप्तान), डेवोन कॉनवे (विकेटकीपर), मिशेल हे (विकेटकीपर), निक केली, हेनरी निकोल्स, विल यंग, ​​जोश क्लार्कसन, जैक फाउल्स, डैरिल मिशेल, ग्लेन फिलिप्स, आदित्य अशोक, क्रिस्टियन क्लार्क, काइल जैमीसन, जेडन लेनोक्स, माइकल रे।  

यूपी में बड़े सियासी फेरबदल के संकेत, 70% मंत्रियों की खिसक सकती है कुर्सी, चर्चाओं में ये नाम

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में बड़े स्तर पर फेरबदल के आसार हैं. माना जा रहा है कि पिछले साल गुजरात में जिस तरह से कैबिनेट में बदलाव हुए और लगभग सारे चेहरे बदल दिए गए. कुछ ऐसा ही यूपी में भी हो सकता है. सूत्रों का दावा है कि 70 फीसदी से अधिक मंत्री बदले जा सकते हैं.  इन बदलावों का असर उन पर हो सकता है जो वर्ष 2017 और फिर साल 2022 की सरकार में भी मंत्री रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक बीते 8-9 सालों से जो मंत्री हैं उनमें से कुछ ही चेहरों को छोड़कर बाकियों पर फेरबदल की गाज गिर सकती है. सूत्रों के मुताबिक भले ही भारतीय जनता पार्टी की यूपी इकाई के अध्यक्ष का जिम्मा कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को दी है, उसके बाद भी नए विस्तार में कुर्मियों का बोलबाला रह सकता है. कुर्मी समाज से 2-3 नेताओं की एंट्री कैबिनेट में हो सकती है. यूपी कैबिनेट में इन नेताओं की हो सकती है एंट्री सूत्रों के अनुसार रामपुर में भारतीय जनता पार्टी के नेता और विधायक आकाश सक्सेना, अलीगढ़ से कुंवर जयवीर सिंह को नए मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह, साध्वी निरंजन ज्योति, भूपेंद्र सिंह चौधरी, पूजा पाल, मनोज पांडेय, कृष्णा पासवान, राम रतन कुशवाहा, पद्मसेन चौधरी , अशोक कटारिया के नाम की भी चर्चा है. इसके अलावा दावा किया जा रहा है कि योगी सरकार में पहले मंत्री रह चुके महेंद्र सिंह की दोबारा काबीना में एंट्री हो सकती है. बीते वर्ष बीजेपी संगठन में बदलाव के बाद कैबिनेट में फेरबदल के आसार जताए जा रहे हैं. पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद कोरग्रुप की बैठक हुई थी. जिसमें संगठन से सरकार तक की किन को क्या जिम्मेदारी देनी है उनकी चर्चा हो चुकी है. इसी चर्चा के बाद पहले पंकज चौधरी दिल्ली आए और हाईकमान से मुलाकात की. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन्हीं मुद्दों पर बीजेपी नेतृत्व से चर्चा की. माना जा रहा है कि हाईकमान से चर्चा के बाद यूपी में किसको संगठन से सरकार में लाया जाए और किन्हें सरकार से वापस संगठन में अहम जिम्मेदारी दी जाए, इसका फैसला हो जाएगा. मकर संक्रांति के बाद किसी भी दिन कैबिनेट फेरबदल की संभावना है. योगी सरकार में कुल 54 मंत्री, अभी कौन कौन कैबिनेट में शामिल? कैबिनेट में सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, सुरेश कुमार खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, अनिल राजभर, राकेश सचान, अरविंद कुमार शर्मा, योगेंद्र उपाध्याय, आशीष पटेल, संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, सुनील कुमार शर्मा, अनिल कुमार बतौर कैबिनेट मंत्री हैं. वहीं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की सूची में नितिन अग्रवाल, कपिल देव अग्रवाल, रवीन्द्र जायसवाल, संदीप सिंह, गुलाब देवी, गिरीश चन्द्र यादव, धर्मवीर प्रजापति, आसिम अरुण, जयेंद्र प्रताप सिंह राठौर, दयाशंकर सिंह, नरेन्द्र कुमार कश्यप, दिनेश प्रताप सिंह, अरुण कुमार सक्सेना, डॉ. दयाशंकर मिश्रा “दयालु” शामिल हैं. इसके अलावा राज्य मंत्रियों की लिस्ट में  मयंकेश्वर शरण सिंह,  दिनेश खटीक,  संजीव गोंड,  बालदेव सिंह ओलख,  अजीत पॉल,  जसवंत सिंह सैनी,  रामकेश निषाद,  मनोहर लाल मनु कोरी,  संजय सिंह गंगवार,  ब्रजेश सिंह,  के. पी. मलिक,  सुरेश रही,  सोमेंद्र तोमर,  प्रतिभा शुक्ला,  राकेश राठौर गुरु, राजनी तिवारी,  सतीश चन्द्र शर्मा,  दानिश आज़ाद अंसारी, विजय लक्ष्मी गौतम शामिल हैं.  

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कुत्ते के काटने से हुई मौत पर राज्य सरकार को भरना होगा भारी मुआवजा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि कुत्ते के काटने और किसी बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट लगने पर, वह भारी मुआवजा तय कर सकता है, जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले में सुनवाई की. पीठ ने कहा कि 75 साल से सरकारों ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कुछ नहीं किया. अदालत ने कहा कि वह इस लापरवाही के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराना चाहती है. पीठ ने कहा कि "इसके लिए उनसे जवाब तलब करें." जस्टिस नाथ ने कहा, "हर कुत्ते के काटने और बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट के लिए, हम सरकार की तरफ से भारी मुआवजा तय कर सकते हैं. पिछले 75 वर्षों से कुछ नहीं किया गया." एक पशु कल्याण संगठन की तरफ से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा, माय लॉर्ड्स, आपको ऐसा करना चाहिए, आपको बिल्कुल करना चाहिए. जस्टिस नाथ ने कहा, "साथ ही, उन सभी लोगों की जिम्मेदारी और जवाबदेही है जो दावा करते हैं कि वे कुत्तों को खाना खिला रहे हैं… उनकी रक्षा करें, उन्हें घर ले जाएं. उन्हें अपने परिसर में, अपने घर में रखें. उन्हें हर जगह कूड़ा क्यों फैलाना चाहिए और लोगों को डराना और काटना, जिससे मौत हो." जस्टिस मेहता ने कुत्तों द्वारा लोगों का पीछा करने के बारे में भी कहा. जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते के काटने का प्रभाव जिंदगी भर रहता है. गुरुस्वामी ने कहा कि वह भी कुत्ते के हमले का शिकार हो चुकी हैं. जस्टिस मेहता ने कहा कि भावनाएं और चिंताएं सिर्फ कुत्तों के लिए होती हैं. गुरुस्वामी ने जवाब दिया कि उन्हें इंसानों की भी उतनी ही चिंता है. गुरुस्वामी ने कहा कि जो तरीके काम करेंगे, वे हैं कुत्तों का रोगाणुनाशन (Sterilization) और उनके साथ मानव व्यवहार. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नियामक अपना काम करने में विफल रहे. पीठ के सामने यह तर्क दिया गया कि ऐसे नियामक या केंद्र फंड का कम इस्तेमाल कर रहे हैं, और ABC रूल्स सिर्फ कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के बारे में नहीं हैं, बल्कि ये जानवरों को बंद रखने के खिलाफ एक कोशिश है. सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा, जब नौ साल के बच्चे को आवारा कुत्ते मार देते हैं, जिन्हें कुत्ता प्रेमी संगठन खाना खिला रहे हैं, तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? पीठ ने आगे पूछा, क्या इस कोर्ट को अपनी आंखें बंद कर लेनी चाहिए और चीजों को होने देना चाहिए? पीठ ने कहा कि उसके पास केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से गंभीर सवाल हैं, वह उन्हें कब सुनेगी. पीठ ने यह भी कहा कि जानवरों से इंसानों को होने वाले दर्द का क्या, अगर जानवर इंसानों पर हमला कर दे तो कौन जिम्मेदार होगा?