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भोपाल में बनेगा निशातपुरा रेलवे ओवरब्रिज, 100 करोड़ की लागत से पुराने और नए शहर को जोड़ेगा, नवंबर तक होगा तैयार

भोपाल  भोपाल में निशातपुरा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) इस साल नवंबर तक बनकर कम्प्लीट हो जाएगा। करीब 100 करोड़ रुपए से बनने वाला आरओबी नए और पुराने शहर को जोड़ेगा। करीब 9 लाख लोगों को फायदा मिल सकेगा। शनिवार को मंत्री विश्वास सारंग ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। मंत्री सारंग ने कहा कि यह देश का पहला ऐसा आरओबी होगा, जो एकसाथ 7 रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरेगा। यह आरओबी भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्म-1 से छोला खेड़ापति हनुमान मंदिर तक पहुंचेगा। निर्माण पूरा होने के बाद करीब 9 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। पीडब्ल्यूडी, रेलवे, एफसीआई सहित संबंधित विभागों में समन्वय के लिए एक कमेटी बनाई गई है। ताकि, निर्माण कार्य में कोई अड़चन न आए और यह जल्दी बन जाए। रेलवे स्टेशन पर आना होगा आसान मंत्री सारंग ने बताया कि आरओबी के बनने के बाद करोंद, बैरसिया, बैरागढ़, विदिशा से आने वाले लोग आसानी से भोपाल रेलवे स्टेशन आ-जा सकेंगे। पुराने शहर से किसी को भेल इलाके में जाना होगा तो यह आरओबी काफी फायदेमंद रहेगा। अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा समेत कई इलाकों से आना-जाना आसान हो जाएगा। भविष्य में यही आरओबी एयरपोर्ट तक आने-जाने के लिए भी उपयोग आ सकेगा। ब्रिज की डिजाइन देखी मंत्री सारंग ने शनिवार को निर्माण स्थल पर जाकर निरीक्षण किया और अफसरों से चर्चा की। साथ ही ब्रिज की डिजाइन भी देखी। महापौर मालती राय, वीरेंद्र पाठक समेत कई समर्थक भी मौजूद थे।

मुस्ताफिजुर रहमान को KKR ने किया रिलीज, अब आईपीएल 2026 में नहीं खेल पाएंगे बांग्लादेशी गेंदबाज

कोलकाता    कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान को अपनी टीम से रिलीज कर दिया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मुस्ताफिजुर को टीम से रिलीज करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद केकेआर की ओर से ये फैसला लिया गया. केकेआर ने पिछले महीने हुई मिनी नीलामी के दौरान मुस्ताफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था. इस दौरान चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के साथ उसकी कड़ी बोली लगी थी. 30 वर्षीय तेज गेंदबाज के लिए यह आईपीएल इतिहास का सबसे महंगा सौदा साबित हुआ था. कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया, 'केकेआर ये पुष्टि करती है कि आईपीएल की नियामक संस्था के तौर पर बीसीसीआई/आईपीएल ने आगामी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सीजन से पहले फ्रेंचाइजी को मुस्ताफिजुर रहमान को टीम से रिलीज करने का निर्देश दिया था.' बयान में आगे कहा गया, 'बीसीसीआई के निर्देशों के तहत सभी जरूरी प्रक्रियाओं और परामर्श के बाद रिलीज करने का फैसला किया गया. बीसीसीआई ने आईपीएल नियमों के अनुसार कोलकाता नाइट राइडर्स को एक रिप्लेसमेंट खिलाड़ी शामिल करने की अनुमति दी है. इस बारे में आगे की जानकारी समय पर साझा की जाएगी.' शाहरुख खान की भी हुई थी आलोचना बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या के बाद वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने चिंता जताई थी. इसके बाद से ही मुस्ताफिजुर रहमान की आईपीएल 2026 में भागीदारी को लेकर बीसीसीआई पर दबाव बढ़ता जा रहा था. इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई थी और कुछ सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने मौजूदा हालात में बांग्लादेशी खिलाड़ी को शामिल करने पर सवाल उठाए थे. इस आलोचना का दायरा केकेआर के सह-मालिक और बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान तक भी पहुंच गया था. मुस्ताफिजुर रहमान 2016 से अब तक आठ आईपीएल सीजन खेल चुके हैं. वह केवल 2019 और 2020 में टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं रहे. मुस्ताफिजुर सनराइजर्स हैदराबाद (SRH), मुंबई इंडियंस (MI), दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स (RR) जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. आईपीएल 2026 उन्हें पहली बार केकेआर की जर्सी पहनने का मौका देने वाला था, जो अब नहीं होगा. दोनों देशों के रिश्तों में भी पिछले कुछ समय से तल्खी देखने को मिल रही है. भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले साल प्रस्तावित व्हाइट-बॉल द्विपक्षीय सीरीज को टाल दिया गया था. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने शुक्रवार को कहा कि यह सीरीज सितंबर में बांग्लादेश में खेली जाएगी, हालांकि बीसीसीआई ने अब तक इस शेड्यूल पर कोई ठोस सहमति नहीं दी है और मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए इसके होने की संभावना कम है.

माघ मेला शुरू, जानिए इस साल के पवित्र स्नान की तारीखें और उनके पुण्य लाभ

प्रयागराज  नए साल के आगमन के साथ ही साल 2026 को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास उत्साह देखने को मिल रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह वर्ष सूर्य ग्रह के प्रभाव वाला माना जा रहा है, ऐसे में लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और कर्मों पर सूर्य की ऊर्जा का विशेष असर पड़ने की मान्यता है। इसी शुभ संयोग के साथ वर्ष की शुरुआत में लगने वाला माघ मेला भी आरंभ होने जा रहा है। यह मेला हर साल माघ मास में आयोजित किया जाता है और इसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा से मानी जाती है। माघ मेले के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु प्रयागराज संगम पहुंचकर कल्पवास करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में किया गया स्नान, दान और तपस्या अक्षय पुण्य प्रदान करती है। प्रशासन और मेला समिति द्वारा इसकी तैयारियां बीते कई महीनों से की जा रही थीं। करीब 40 से 45 दिनों तक चलने वाला यह भव्य धार्मिक आयोजन आस्था और परंपरा का अनूठा संगम माना जाता है। आइए जानते हैं माघ मेले के दौरान कौन-कौन सी तिथियां सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जिन पर स्नान और दान का विशेष फल प्राप्त होता है। माघ मेला 2026 कब से कब तक रहेगा? वर्ष 2026 में माघ मेले की शुरुआत आज यानी 3 जनवरी 2025 से हो रही है। इस दिन पौष पूर्णिमा का पहला पवित्र स्नान किया जाएगा। यह मेला करीब 40 से अधिक दिनों तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि के दिन होगा। इस पूरे कालखंड में कई प्रमुख स्नान पर्व, धार्मिक अनुष्ठान और त्योहार मनाए जाएंगे, जिनमें मकर संक्रांति और माघ पूर्णिमा विशेष महत्व रखते हैं। संगम स्नान का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यता है कि माघ मेले के दौरान संगम में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार माघ माह में किया गया स्नान, दान और जप कई गुना फल देता है। इसी कारण इस दौरान साधु-संत, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम तट पर निवास कर साधना, ध्यान और पूजा-पाठ करते हैं। कल्पवास और साधना का विशेष महत्व माघ मेले में कल्पवास का विशेष महत्व होता है। कल्पवासी इस पूरे माह संगम तट पर रहकर सात्विक जीवन अपनाते हैं। वे ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, सूर्य उपासना, हवन, जप और ध्यान करते हैं। माना जाता है कि इस दौरान की गई साधना से जन्म-जन्मांतर के बंधन समाप्त हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। संगम स्नान का धार्मिक महत्व माघ मास में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. पुराणों के अनुसार माघ महीने में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है.यह समय दान, जप, तप और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना गया है. कल्पवास का महत्व कल्पवास माघ मेले की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा है.कल्पवासी पूरे माघ मास संगम तट पर रहकर  सादा और संयमित जीवन व्यतीत करते हैं.इस दौरान वे ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करते हैं, एक समय सात्विक भोजन , भूमि पर शयन, जप, तप, ध्यान और दान, क्रोध, अहंकार और भोग से दूरी  बनाए रखते हैं शास्त्रों में कहा गया है कि एक माघ मास का कल्पवास हजारों वर्षों की तपस्या के समान फल देता है.विशेष रूप से उम्रदराज और गृहस्थ इस परंपरा का पालन करते हैं. माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियां माघ मेले के दौरान कई महत्वपूर्ण स्नान पर्व आते हैं— 3 जनवरी – पौष पूर्णिमा (कल्पवास आरंभ) 14 जनवरी – मकर संक्रांति  21 जनवरी – मौनी अमावस्या (राजयोग स्नान) 30 जनवरी – बसंत पंचमी 5 फरवरी – माघी पूर्णिमा 15 फरवरी – महाशिवरात्रि (कल्पवास समापन) आस्था और संस्कृति का महापर्व माघ मेला भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वरूप है.यहां संतों के प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है. माघ मेले में इन बातों का रखें विशेष ध्यान माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। इस समय मांस-मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। छल-कपट, क्रोध और गलत शब्दों के प्रयोग से बचें। स्नान करते समय मन को शांत रखें और हंसी-मजाक न करें। पूरे समय अच्छे विचार रखें और सात्विक जीवनशैली अपनाएं।

पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना में 65 लाख परिवारों को 10 लाख तक का मुफ्त इलाज

चंडीगढ़. पंजाब सरकार 15 जनवरी को मुख्यमंत्री सेहत योजना लागू करने जा रही है। सीएम भगवंत मान व आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल इस योजना की औपचारिक शुरुआत करेंगे। इसके तहत यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पंजाब में हर परिवार का 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा करेगी। इसके लिए स्टेट हेल्थ एजेंसी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर संयम अग्रवाल और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मैथ्यू जॉर्ज ने एमओयू किया। माैके पर स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. बलबीर सिंह मौजूद रहे। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्थ स्कीम के तहत पहले मिलने वाला पांच लाख रुपये का हेल्थ कवरेज, जो कुछ खास कैटेगरी तक ही सीमित था, उसे दोगुना कर दिया गया है। इसलिए नई स्कीम का मकसद पंजाब के सभी निवासियों जिसमें सरकारी कर्मचारी और पेंशनर शामिल हैं, के हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देना है। मंत्री ने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आय सीमा या अन्य क्राइटेरिया नहीं है। सिर्फ आधार और वोटर आईडी का इस्तेमाल करके कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जरिये रजिस्ट्रेशन को आसान बना दिया गया है। इसके बाद लाभार्थी को डेडिकेटेड एमएमएसवाई हेल्थ कार्ड मिलेंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी। मंत्री के अनुसार कंपनी राज्य के सभी 65 लाख परिवारों को हर परिवार को एक-एक लाख रुपये का हेल्थ कवर देगी। एक लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच की मेडिकल जरूरतों के लिए इंश्योरेंस स्टेट हेल्थ एजेंसी द्वारा ट्रस्ट के आधार पर दिया जाएगा। यह स्कीम इनोवेटिव हेल्थ बेनिफिट पैकेज (एमबीपी 2.2) को अपनाती है, जो 2000 से ज्यादा चुने हुए ट्रीटमेंट पैकेज के जरिये पूरी कवरेज पक्का करता है। 824 सूचीबद्ध अस्पताल देंगे सर्विस इस स्कीम के तहत, लाभार्थी 824 सूचीबद्ध अस्पतालों के एक मजबूत नेटवर्क का इस्तेमाल करके सेकेंडरी और टर्शियरी हेल्थकेयर सर्विस का फायदा उठा सकते हैं, जिसमें अभी 212 सरकारी हॉस्पिटल, केंद्र सरकार के आठ हॉस्पिटल और 600 से ज्यादा प्राइवेट हॉस्पिटल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत लिस्टेड हॉस्पिटल की संख्या समय के साथ और बढ़ने की उम्मीद है।

इंदौर में हुई मौतों के मामले में CM मोहन यादव की कड़ी प्रतिक्रिया, ‘सीवर पानी वाले बैक्टीरिया’ की जांच जारी

इंदौर  देश के सबसे साफ और स्‍वच्‍छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई. शौचालय मिश्रित पानी पीने के कारण बीमार पड़े लोगों में से 200 अभी भी अस्‍पताल में भर्ती हैं, जबकि 32 आईसीयू में हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया और अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई त्रासदी के मामले में सरकार की पहली बड़ी कार्रवाई है. इस घटना में 29 दिसंबर से लोग बीमार पड़ने लगे थे. स्‍थानीय लोगों ने इसके खिलाफ स्‍थानीय प्रशासन से शिकायत भी की थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने से कई परिवार उजड़ गए. इंदौर के भगिरथपुरा क्षेत्र में पानी की सप्लाई दूषित होने के कारण डायरिया और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलीं. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी से चार लोगों की मौत हुई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने का आदेश दिया. साथ ही अतिरिक्त नगर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दूसरी तरफ, इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सरकार ने हाई कोर्ट में 40 पन्नों की स्‍टेटस रिपोर्ट पेश की है. सरकार ने अदालत को बताया कि हालात अब नियंत्रण में हैं और नए मामलों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हो रही . साथ ही मिनट-टू-मिनट निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है.  जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी – CM मोहन यादव   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से पैदा हुए संकट को लेकर अधिकारियों की लापरवाही की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राज्य सरकार दूषित पेयजल के कारण इंदौर के भागीरथपुरा में हुई घटना में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि इस संबंध में कड़े फैसले लिए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस घटना के बाद दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है. इसके साथ ही इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं. इंदौर में हुई मौतों के पीछे 'सीवर पानी वाले' बैक्टीरिया, अब तक क्या पता चला इंदौर में एक ऐसी त्रासदी सामने आई है जो दिल दहला देने वाली है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने कहर बरपाया है, जहां सीवर जैसी गंदगी वाले बैक्टीरिया पानी में घुस गए। इस पानी को पीने से कम से कम 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हजारों लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। सब कुछ शुरू हुआ 25 दिसंबर से, जब लोगों ने पानी में अजीब सी बदबू और गंदगी की शिकायत की। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जांच में पता चला कि मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था, और ऊपर बने एक शौचालय का गंदा पानी सीधे सप्लाई में मिल गया। लैब रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि पानी में वो बैक्टीरिया मिले जो आमतौर पर सीवर और मानव अपशिष्ट में पाए जाते हैं। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि शुरुआती टेस्ट में असामान्य बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, लेकिन पूरी कल्चर रिपोर्ट का इंतजार है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'पिछले कई हफ्तों से समस्या थी, लेकिन 25 दिसंबर को हालात बिगड़ गए। पानी पीते ही पेट में आग सी लगती थी।' इंदौर जल त्रासदी मौतों का बढ़ता आंकड़ा और मरीजों की तादाद आधिकारिक तौर पर मौतें 4 बताई जा रही हैं, लेकिन मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने खुद माना कि उन्हें 10 मौतों की जानकारी है। स्थानीय लोग तो 14 तक का दावा कर रहे हैं। अब तक 2456 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त के शिकार हुए, 162 से अधिक अस्पताल में भर्ती। कई मरीज ICU में हैं, और इलाका लगभग खाली हो चुका है। परिवार वाले अपनों का इलाज कराने अस्पतालों में डेरा डाले हुए हैं। सरकार पर उठे सवाल, NHRC और हाईकोर्ट की सख्ती लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करने का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लिया और मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस थमा दिया। दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने कहा, 'निवासियों ने कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।' इंदौर बेंच ऑफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी सरकार से घटना की पूरी डिटेल्स मांगी हैं। कोर्ट ने साफ पानी की सप्लाई और मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने के आदेश दिए। सीएम की मदद और कार्रवाई मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हर मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज घोषित किया। लीकेज ठीक करने, पाइपलाइन साफ करने और नई लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है। दूषित पानी पीने से बीमार पड़े लोगों का क्‍या है हाल सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 294 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया. इनमें से 93 मरीजों का सफल इलाज कर उन्हें छुट्टी दे दी गई है. बाकी 200 मरीजों में से 32 अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी मरीजों को जरूरी इलाज दिया जा रहा है. जमीनी स्तर पर जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं. इन टीमों का उद्देश्य नए मरीजों की पहचान करना और बीमारी को फैलने से रोकना है. लोगों को ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां मुफ्त बांटी जा रही हैं ताकि लक्षण … Read more

RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले: संघ और भाजपा को जोड़कर देखना गलत, हिंदुत्व को मनोवृत्ति बताया

भोपाल  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने  भोपाल में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष के तहत ‘प्रबुद्ध जन सम्मेलन’ को संबोधित किया. इस दौरान भागवत ने संघ की विचारधारा,और भविष्य के लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से सामने रखा. रवींद्र भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने हिंदुत्व, भाषा, संगठन विस्तार और संघ-भाजपा संबंधों को लेकर कई बड़ी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि संघ को केवल भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के  नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए भागवत ने कहा कि संघ किसी राजनीतिक दल का रिमोट कंट्रोल नहीं है, बल्कि समाज निर्माण का संगठन है. संघ की स्थापना हिंदुओं को शांतिपूर्ण तरीके से संगठित करने के लिए हुई थी. उन्होंने कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, बल्कि एक मनोवृत्ति है, जो सभी पंथों और संप्रदायों का सम्मान करती है. अभी भी कई इलाकों तक नहीं पहुंच पाया संघ- भागवत संघ के संगठनात्मक विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में संघ से करीब 60 लाख स्वयंसेवक जुड़े हैं, जबकि देश में अपने आप को हिंदू मानने वालों की संख्या लगभग 100 करोड़ है. उन्होंने चिंता जताई कि शहरी क्षेत्रों की करीब 10 हजार बस्तियों और कई अन्य इलाकों तक संघ अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है. भागवत ने कहा, 'ऐसी बस्तियों तक पहुंचना बहुत जरूरी हैं. संघ की शाखाओं में जो संस्कार मिलते हैं, वही समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। पहले यह व्यवस्था मजबूत थी, अब उसे फिर से सशक्त करने की जरूरी है.' उन्होंने कहा कि साधु-संतों से लेकर देश-विदेश के कई संगठन संघ के साथ जुड़े हुए हैं. अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों से लोग संघ की कार्यपद्धति को समझने आते हैं और पूछते हैं कि संघ अपने युवाओं को इस तरह कैसे तैयार करता है. और उन्हे भी इसकी ट्रेनिंग देने के लिए कहते है. भाषा के मुद्दे पर मोहन भागवत ने तीन भाषाएं सीखने पर जोर दिया- राज्य की भाषा, देश की भाषा और दुनिया की भाषा. उन्होंने कहा कि चीन से यह सीखना चाहिए कि एक बड़ा राष्ट्र कैसे संगठित किया जाता है. समाज को जोड़ना है संघ का काम मोहन भागवत ने हिंदुत्व को 'जाति' नहीं बल्कि एक 'मनोवृत्ति' बताया. उन्होंने कहा कि हिंदू, हिंदवी और भारत, तीनों एक ही हैं और  जो सनातन काल से चला आ रहा है और आज भी उतना ही प्रासंगिक है. संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों को लेकर फैली भ्रांतियों पर उन्होंने कहा, 'अगर कोई भाजपा, विहिप या विद्या भारती को देखकर संघ को समझने की कोशिश करेगा, तो वह संघ के मूल विचार को कभी नहीं समझ पाएगा.' उन्होंने साफ कहा कि संघ का काम समाज को जोड़ना, संस्कार देना और उत्तम जीवन मूल्यों का निर्माण करना है, न कि किसी एक संगठन या दल तक सीमित रहना.

दो चरणों में योजनाओं की पड़ताल से अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की रणनीति

जीरो पावर्टी की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश, योगी सरकार का मॉडल ले रहा आकार दो चरणों में योजनाओं की पड़ताल से अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की रणनीति हर पात्र परिवार को योजनाओं से जोड़कर गरीबी के दुष्चक्र को स्थायी रूप से तोड़ने की तैयारी संख्या से अधिक पात्रता, पारदर्शिता और परिणाम पर ध्यान केंद्रित कर रही योगी सरकार लखनऊ के रहने वाले रामसागर, उर्मिला और रामू को मिल रही है मूलभूत सुविधाएं लखनऊ  उत्तर प्रदेश में गरीबी उन्मूलन अब महज नीतिगत घोषणा नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘जीरो पावर्टी' मिशन ने प्रशासनिक इच्छाशक्ति, तकनीक और जमीनी सत्यापन को जोड़ते हुए एक सशक्त मॉडल प्रस्तुत किया है। इस अभियान का उद्देश्य स्पष्ट है, हर पात्र परिवार को योजनाओं से जोड़ा जाए। दो चरणों में किए गए इस व्यापक अभ्यास से यह साफ हो गया है कि योगी सरकार संख्या से अधिक पात्रता, पारदर्शिता और परिणाम पर ध्यान केंद्रित कर रही है। लखनऊ के गोसाईगंज में रहने वाले रामसागर, उर्मिला और रामू इसी का जीता जगता उदाहरण हैं, जिन्हें योजना के तहत मकान, पानी, सड़क, बिजली, राशन समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं से लैस किया गया है।   समावेशी विकास की ओर निर्णायक कदम प्रदेश सरकार द्वारा जीरो पावर्टी अभियान के तहत लखनऊ के गोसाईगंज में रहने वाले रामसागर, उर्मिला और रामू को मकान, पानी, सड़क, बिजली, राशन समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इनकी तरह, प्रदेश भर में वंचितों को चिन्हित कर सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। ये सभी लाभार्थी योगी सरकार की तारीफ करते नहीं थक रहे। इनका कहना है कि योगी सरकार का जीरो पावर्टी मिशन केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि भोजन, स्वास्थ्य, आवास, शिक्षा, जल, ऊर्जा और आजीविका से जुड़े समग्र समाधान का नाम है। यह अभियान उत्तर प्रदेश को समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल है। पहला चरण: 8 मूलभूत योजनाओं में डीबीटी पर फोकस जीरो पावर्टी अभियान के प्रथम चरण में 8 प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत पात्र परिवारों को शत-प्रतिशत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया। जिला स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार राशन योजना में 97 प्रतिशत पात्र परिवारों तक लाभ पहुंच चुका है, जो खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। निराश्रित महिला पेंशन योजना में 87 प्रतिशत और दिव्यांग पेंशन में 62 प्रतिशत लाभार्थियों को आच्छादित किया गया है। वहीं पीएम/सीएम जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 63 प्रतिशत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है।वृद्धावस्था पेंशन, बीओसीडब्ल्यू श्रम कार्ड, किसान सम्मान निधि और पीएम/सीएम आवास योजना में पात्रता मानकों की जांच, डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान और डेटा शुद्धिकरण का काम तेजी से जारी है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि सभी वास्तविक जरूरतमंद हर हाल में योजनाओं से जुड़ें। दूसरा चरण: वंचित परिवारों का घर-घर सत्यापन 15 अक्टूबर 2025 से शुरू हुए दूसरे चरण में 16 योजनाओं के अंतर्गत वंचित परिवारों का स्थलीय सत्यापन किया जा रहा है, जिसे 15 जनवरी तक पूरा किया जाना है। इस दौरान  पीएम उज्ज्वला योजना, शौचालय सहायता योजना, जल जीवन मिशन के अलावा विद्युत कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए पात्र लाभार्थियों के सत्यापन का कार्य पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।  महिला और शिक्षा सशक्तिकरण पर विशेष जोर सर्वे में सामने आए तथ्यों के आधार पर महिलाओं को बड़े पैमाने पर आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने की तैयारी है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में करीब 11 हजार बच्चों को पुनः नामांकन के माध्यम से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076: फीडबैक से नीति निर्माण योगी सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 को योजनाओं की समीक्षा का मजबूत आधार बनाया है। हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों और सुझावों के विश्लेषण से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नीतियां जमीनी जरूरतों के अनुरूप हों और किसी भी पात्र परिवार को वंचित न रहना पड़े।

नक्सली बारसे देवा का तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर

सुकमा. नए साल की शुरुआत होते ही लाल आतंक को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष नक्सली हिड़मा के करीबी और पीएलजीए कमांडर बारसे देवा ने आज शनिवार, 3 दिसंबर 2026 को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सली कमांडर बारसे देवा के सरेंडर के बाद की सबसे पहली तस्वीर सामने आई है। तेलंगाना पुलिस जल्द ही देवा के सरेंडर की आधिकारिक घोषणा करने वाली है। आपको बता दें कि कल पीएलजीए कमांडर बारसे देवा के सरेंडर करने की सूचना मिली थी। बताया गया था कि आज वह तेलंगाना के डीजीपी के सामने हैदराबाद में आत्मसमर्पण करेंगे। बारसे देवा पर 50 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। वह नक्सल संगठन के भीतर एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। हिड़मा के एनकाउंटर के बाद बारसे देवा को पीएलजीए का कमांडर बनाया गया था। इसके बाद से वह संगठन की सैन्य गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे थे। 2025 में तेलंगाना में घुसा देवा सूत्रों के अनुसार, यह समूह अक्टूबर 2025 में तेलंगाना के जंगलों में घुसा था और वरिष्ठ माओवादी बारे चोक्का राव उर्फ दामोदर के नेतृत्व वाली राज्य समिति के साथ मिलकर काम कर रहा था। तेलंगाना की खास ग्रेहाउंड्स फोर्स और खुफिया अधिकारियों द्वारा लगातार की गई घेराबंदी और तलाशी अभियानों ने उनकी गतिविधियों को सीमित कर दिया था। साथ ही, पुलिस के शीर्ष अधिकारियों द्वारा लगातार की गई अपीलें भी देवा के आत्मसमर्पण का कारण बनीं। बारसे देवा ने 2000 में माओवादी आंदोलन में कदम रखा था। 2003 तक, उसने छत्तीसगढ़ के पुव्वारथी में दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ के लिए काम किया। दिसंबर 2022 में, वह दंडकारण्य विशेष ज़ोनल समिति के सदस्य बने और जून 2023 में उन्हें PLGA का बटालियन कमांडर नियुक्त किया गया। सबसे खूंखार हमलों से जुड़ा था देवा देवा का सीपीआई (Maoists) के साथ 25 साल का जुड़ाव मध्य भारत के कुछ सबसे खूंखार हमलों से जुड़ा था। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर 2013 में झीरम घाटी नरसंहार का आरोप है, जिसमें बस्तर में 27 कांग्रेस नेताओं की जान चली गई थी। इसके अलावा, अप्रैल 2021 में बीजापुर के टेकलगुडेम में हुए हमले में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे। 2006 से 2019 के बीच कम से कम पांच बड़े IED हमलों में भी उनका हाथ माना जाता है, जिसमें बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत वाला धमाका भी शामिल था। जांचकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से 16 जनवरी 2025 को तेलंगाना के कुमारम भीम आसिफाबाद जिले में धर्माराम बेस पर हमला और 30 जनवरी को छत्तीसगढ़ के जीरमगुडा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले का नेतृत्व किया था।   बारसे देवा माओवादी पार्टी की सैन्य टुकड़ियों (सशस्त्र बलों) की गतिविधियों को संभाल रहा था। नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है, और इसका कमांडर बारसे देवा है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन तीन जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। माओवादी पार्टी को हथियारों की सप्लाई में बारसे देवा की भूमिका बेहद अहम मानी जाती रही है। हिड़मा और बारसे देवा दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे हिड़मा पूवर्ती गांव का रहने वाला था। वहीं बारसे देवा भी सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का रहने वाला है। करीब 2 साल पहले जब हिड़मा को सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया तो उसने ही बारसे देवा को PLGA बटालियन नंबर 1 का कमांडर बनाया था। देवा के साथ बड़ी संख्या में नक्सली थे। लेकिन अब पुलिस के बढ़ते दबाव और लगातार हो रहे एनकाउंटर के बाद से बटालियन भी लगभग टूट गई है। 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को नक्सल संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। हालांकि, अब फोर्स ने इस टीम को काफी बैकफुट कर दिया है। इस टीम में AK-47, इंसास, SLR, स्नाइपर गन जैसे हथियारों से लैस सैकड़ों नक्सली थे। टेकलगुडेम, बुरकापाल, मिनपा, ताड़मेटला, टहकवाड़ा में नक्सलियों की इसी टीम ने बड़े हमले किए थे। जिसमें सैकड़ों जवानों की शहादत हुई है। हालांकि, अब ये टीम भी कमजोर हो गई है। अब देवा सरेंडर करना चाह रहा है। जानकारी ये भी है कि किसी माध्यम से उसने अपना संदेश बाहर भी भिजवाया है। देवा सरेंडर करता है तो उसकी बटालियन टूट जाएगी। इसका नेतृत्व करने वाला कोई नक्सली नहीं रहेगा। गृह मंत्री ने मां से की थी मुलाकात दरअसल, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा कुछ दिन पहले पूवर्ती गांव गए थे। वहां उन्होंने देवा और हिड़मा इन दोनों की मां से मुलाकात की थी। इनके माध्यम से उनसे सरेंडर करने की अपील की थी। वहीं हिड़मा नहीं माना और आंध्र प्रदेश के जंगल में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पत्नी राजे समेत 6 साथियों के साथ मारा गया। जिसके बाद अब देवा बारसे छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने की कोशिश कर रहा है। 15 में से 7 एरिया कमेटी बची, डिवीजन भी खत्म बस्तर IG सुंदरराज पी के मुताबिक बस्तर में नक्सलियों की कुल 7 डिवीजन और 15 एरिया कमेटी सक्रिय थी। माड़ डिवीजन, केशकाल और दरभा डिवीजन में नक्सली लगभग खत्म हो गए हैं। पश्चिम बस्तर डिवीजन में कुछ नक्सली हैं। लेकिन अब 7 एरिया कमेटी में कुछ छिटपुट नक्सली ही बचे हैं। दंडकारण्य इलाके में महज 120 से 150 सशस्त्र नक्सली ही सक्रिय हैं। ये नक्सली खत्म हुए तो नक्सलवाद लगभग खत्म हो जाएगा।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी मुठभेड़, 12 से ज्यादा नक्सली मारे गए

सुकमा  छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों का बड़ा अभियान जारी है। सुकमा और बीजापुर जिलों में पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ चल रही है। सुकमा जिले के किस्टाराम क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 10 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है, जबकि इलाके में अब भी रुक-रुककर फायरिंग जारी है। दूसरी ओर बीजापुर जिले में दो माओवादियों को ढेर कर दिया गया है, जिनके शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की टीम ने नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था। इसी दौरान शनिवार तड़के नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में मुठभेड़ शुरू हो गई। माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था। डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की टीम ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान शनिवार तड़के नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। सुबह करीब 5 बजे से माओवादियों के साथ रुक-रुककर मुठभेड़ जारी है। सर्च ऑपरेशन के दौरान अब तक बीजापुर क्षेत्र से दो नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। मुठभेड़ की पुष्टि एसपी जितेंद्र यादव ने की है। सुरक्षा कारणों को देखते हुए मुठभेड़ के सटीक स्थान और ऑपरेशन में शामिल सुरक्षाबलों की संख्या का खुलासा नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी। 3 जनवरी की सुबह करीब 5 बजे से लगातार रुक-रुककर गोलीबारी चल रही है। बीजापुर में हुई मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने अब तक दो नक्सलियों के शव बरामद किए हैं। मुठभेड़ की पुष्टि बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने की है। उन्होंने बताया कि इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सुरक्षा कारणों को देखते हुए फिलहाल मुठभेड़ के सटीक स्थान और ऑपरेशन में शामिल जवानों की संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी आधिकारिक रूप से साझा की जाएगी। हाल के दिनों में तेज हुए नक्सल विरोधी अभियान गौरतलब है कि 8 दिन पहले पड़ोसी राज्य ओडिशा के कंधमाल जिले में हुए एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने 1 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली नेता गणेश उईके समेत 6 माओवादियों को मार गिराया था। उस कार्रवाई में दो महिला नक्सली भी ढेर हुई थीं और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे। छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती राज्यों में लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को नक्सल नेटवर्क पर अब तक का बड़ा दबाव माना जा रहा है। Yearender 2025 – छत्तीसगढ़ के बड़े नक्सल एनकाउंटर  छत्तीसगढ़ में मार्च 2026 तक नक्सल खात्मे का लक्ष्य रखा गया है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर दौरे में नक्सलियों से हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी. इस अपील के बाद बड़ी संख्या में नक्सलियों ने फोर्स के सामने हथियार डाले. जिन नक्सलियों ने हथियार के साथ फोर्स को चुनौती देने की कोशिश की उनके नामो निशान मिट गए.साल 2025 बड़े नक्सलियों के खात्मे के लिए भी जाना जाएगा. दिसंबर 19.12.2025 : बीजापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 5 लाख का इनामी नक्सली मारा गया. ASP चंद्रकांत गोवर्णा ने बताया कि भैरमगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले इंद्रावती क्षेत्र में डीआरजी टीम ने तलाशी अभियान चलाया था.जिसमें एक नक्सली ढेर हुआ. 18.12.2025: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 3 नक्सली मारे गए, जिनमें कई हिंसक घटनाओं में शामिल एक महिला नक्सली भी थी. गोलापल्ली पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी वन क्षेत्र में यह मुठभेड़ हुई. 03.12.2025: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गंगालूर में हुई मुठभेड़ में पीएलजीए कंपनी नंबर 2 के कमांडर मोदियामी वेल्ला समेत 18 नक्सली मारे गए. मुठभेड़ में तीन सुरक्षाकर्मी भी शहीद हो गए, जबकि दो घायल हुए. छत्तीसगढ़ सरकार ने वेल्ला पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था. नवंबर 18.11.2025: आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 6 माओवादी मारे गए. इनमें बस्तर का वरिष्ठ माओवादी नेता और केंद्रीय समिति सदस्य माडवी हिड़मा भी शामिल था. 11.11.2025: बीजापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे गए. इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में सुरक्षाकर्मियों की एक संयुक्त टीम क्षेत्र में वरिष्ठ माओवादी कैडरों की उपस्थिति की सूचना के आधार पर नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी. सितंबर 28.09.2025: छत्तीसगढ़ के कांकेर में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में 14 लाख रुपए के 3 इनामी नक्सली मारे गए. कांकेर पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसला के मुताबिक कांकेर और गरियाबंद जिलों की सीमा पर स्थित छिंदखड़क गांव के पास एक पहाड़ी पर मुठभेड़ हुई. 22.09.2025: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के जंगलों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 2 नक्सली मारे गए. नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर, महाराष्ट्र से सटे अबूझमाड़ के मूसफरशी जंगलों में एक अभियान शुरू किया गया और सुबह गोलीबारी शुरू हो गई. नारायणपुर के एसपी रॉबिन्सन गुड़िया ने कहा कि महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर अबूझमाड़ के जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. 11.09.2025: छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने हाल के वर्षों में अपनी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक को अंजाम दिया, जब उन्होंने गरियाबंद क्षेत्र में एक सुनियोजित अभियान में 10 कट्टर नक्सलियों को मार गिराया. मारे गए लोगों में मोदम बालकृष्ण उर्फ ​​मोनाज (CCM) भी शामिल था, जिस पर एक करोड़ रुपए का इनाम था. 5.22 करोड़ रुपए के इनामी 10 नक्सली मारे गए: रायपुर रेंज के आईजी अमरीश मिश्रा ने बताया कि गरियाबंद मुठभेड़ में 10 नक्सली मारे गए. इनमें बालकृष्ण उर्फ मनोज उर्फ ​​बलन्ना भी शामिल था, जिस पर एक करोड़ रुपए का इनाम था.इस मुठभेड़ में अन्य नक्सली भी मारे गए, जिन पर कुल मिलाकर 4.22 करोड़ रुपए का इनाम था. अगस्त 13.08.2025: छत्तीसगढ़ के मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों ने भीषण मुठभेड़ में दो वरिष्ठ माओवादी नेताओं को मार गिराया. यह मुठभेड़ मदनवाड़ा क्षेत्र के बांदा पहाड़ रेतेगांव … Read more

रायपुर: CM साय ने केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया से की मुलाकात, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेज़बानी पर चर्चा

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया से की भेंट प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को  मिलना समूचे राज्य के लिए गर्व और सम्मान का विषय  – मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित “प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स – 2026” के सफल आयोजन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व तथा भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के मार्गदर्शन में खेलों को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलना समूचे राज्य के लिए गर्व और सम्मान का विषय है, यह अवसर राज्य की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने अवगत कराया कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के अंतर्गत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, हॉकी, फुटबॉल और तैराकी सहित कुल 07 मुख्य खेलों की स्पर्धाएँ आयोजित की जाएँगी, वहीं 2 खेल डेमो स्वरूप प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रस्तावित आयोजन के अनुसार सरगुजा संभाग में कुश्ती, तीरंदाजी एवं वेटलिफ्टिंग,रायपुर में हॉकी, फुटबॉल एवं तैराकी तथा बिलासपुर में एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने  कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026 का उद्घाटन समारोह 14 फरवरी 2026 को रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय मंत्री मांडविया को उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं में खेल प्रतिभा प्रचुर मात्रा में है और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इस प्रकार के आयोजन खेलों के प्रति नए उत्साह और अवसर पैदा करेंगे। उन्होंने आयोजन की सभी तैयारियों में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से आदिवासी अंचलों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा तथा छत्तीसगढ़ खेल महाशक्ति के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर मनसुख मांडविया को ईएसआईसी अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। उन्होंने राज्य में खेलों के आधारभूत ढाँचे के विकास, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण अवसरों के विस्तार तथा खेल संस्कृति को बढ़ावा देने में खेल मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने देश में कार्यान्वित ऐतिहासिक लेबर कोड के लिए भी केंद्रीय मंत्री को बधाई देते हुए कहा कि इससे श्रमिक हितों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा कवरेज और श्रम क्षेत्र में पारदर्शिता एवं सरलता को नई दिशा मिली है।