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BJP के नेतृत्व वाली महायुति ने महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में 68 सीटों पर किया कब्जा, बिना एक भी वोट डाले

मुंबई  महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले महाराष्ट्र नगर निकाय और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव से पहले बीजेपी-नेतृत्व वाली महायुति ने बड़ी बढ़त बना ली है. नामांकन वापसी की अंतिम तारीख के बाद विभिन्न नगर निकायों में महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए. इन 68 सीटों में से बीजेपी को 44 सीटें, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 22 सीटें और अजित पवार की एनसीपी को 2 सीटें मिली हैं. सबसे ज्यादा निर्विरोध जीत ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में दर्ज हुई. इसके अलावा पुणे, पिंपरी-चिंचवाड, पनवेल, भिवंडी, धुले, जलगांव और अहिल्यानगर से भी सीटें महायुति के खाते में गईं. पुणे में वार्ड नंबर 35 से बीजेपी उम्मीदवार मंजूषा नागपुरे और श्रीकांत जगताप को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया. केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इसे बीजेपी के कामकाज पर जनता के भरोसे का परिणाम बताया और दावा किया कि पुणे का अगला मेयर बीजेपी का होगा. समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए मोहोल ने कहा, "हमारा लक्ष्य 125 सीटें जीतना है. इनमें से दो सीटें निर्विरोध जीती जा चुकी हैं, अब 123 सीटें शेष हैं." उद्धव गुट का आरोप भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा कि इन घटनाक्रमों से राज्य भर के शहरी नगर निकायों में पार्टी की बढ़ती पकड़ का पता चलता है. पार्टी नेताओं ने इस रुझान का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता और राज्य इकाई के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा निर्देशित चुनावी रणनीति को दिया. हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को ईडी-सीबीआई की धमकी या सौदेबाज़ी के जरिए नाम वापस लेने पर मजबूर किया गया. सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए. प्रियंका चतुर्वेदी ने मुंबई में पत्रकारों से कहा, "लोकतंत्र को खत्म करने का यह एक ऐसा तरीका है जिसमें विपक्षी उम्मीदवार ईडी और सीबीआई की धमकियों से डराकर या रिश्वत देकर उनसे समझौता कर लेते हैं. वे अपनी जीत खरीदने की कोशिश कर रहे हैं और यह शर्म की बात है कि चुनाव आयोग इस पर चुप्पी साधे हुए है." महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों, जिनमें मुंबई की बीएमसी भी शामिल है, के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन होगी.  

भोपाल में अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण होगा, बचे प्लाटों को बेचा जाएगा

 भोपाल  भोपाल जिले में अब तक अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई कर उन्हें रोकने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन इनमें कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में अब प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण करने की योजना बनाई है। जिसके तहत नए साल में जिला प्रशासन, नगर निगम और जिला पंचायत द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण किया जाएगा, इसके बाद इनमें बचे हुए प्लाटों को बेचा जाएगा। इन प्लाटों से जो भी धन प्रशासन को प्राप्त होगा, उसी से कॉलोनियों में सड़क, बिजली, पानी, सीवेज आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। इससे लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। बता दें कि जिले की हुजूर, कोलार तहसील में हर साल 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों का विकास हो रहा है, लेकिन इनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। शहर में हुजूर, कोलार और बैरसिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पिछले छह से आठ साल में तेजी से बसाहट हो रही है। यहां लोग कॉलोनियों में अपने बजट के अनुसार प्लाट खरीदकर उनमें मकान बनाकर रह रहे हैं। इन अवैध कॉलोनियों के कॉलोनाइजर लोगों को बिजली, पानी, सड़क, सीवेज, पार्क आदि की सुविधाओं का दावा कर प्लाट बेचकर मोटी रकम वसूल कर लेते हैं, लेकिन बाद में ऐसी कोई भी सुविधा लोगों को नहीं मिलती है। इससे परेशान होकर रहवासी एसडीएम, तहसील और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाना शुरू कर देते हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए कलेक्टर ने अवैध कालोनियों को अधिग्रहित कर विकास कार्य करने की योजना बनाई है। निरंतर शिकायतों के कारण लिया फैसला कलेक्ट्रेट में लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि भूमाफिया सस्ती कृषि भूमि खरीदकर खेतों में मुरम डालकर प्लाट काट रहे हैं और कालोनी बताकर बेच रहे हैं। कई जगह न सड़क है, न नाली, न बिजली-पानी, फिर भी प्लाट टीएंडसीपी से स्वीकृत कालोनियों के बराबर दामों पर बेचे जा रहे हैं। इससे आम लोग भविष्य में बुनियादी सुविधाओं और रजिस्ट्री जैसी समस्याओं में फंस सकते हैं। ऐसे में अवैध कालोनी काटने वालों पर कार्रवाई और लोगों को सुविधा देने अधिग्रहण का फैसला लिया गया है। नौ अवैध कॉलोनियों को नोटिस किए जारी अधिकारियों ने बताया कि जिन कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित किया जा रहा है। अब तक नौ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं, प्लाटिंग रोकी गई है और संबंधित बिल्डरों के खिलाफ वैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई है। आने वाले दिनों में अभियान और तेज किया जाएगा। इन क्षेत्रों को किया चिह्नित अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की शुरुआत मुबारकपुर, सेवनिया ओंकारा, पिपलिया बेरखेड़ी, कुराना, थुआखेड़ा, सुरैया नगर, छावनी पठार, कान्हासैया, सिंकदराबाद, शोभापुर, जहेज, कोलुआखुर्द, नरेला वाज्याफ्त, बंगरसिया, अरेड़ी, इब्राहिमपुरा, परेवाखेड़ा, हज्जामपुरा ईंटखेड़ी सड़क, जगदीशपुर, अरवलिया, चौपड़ा कलां, बांसिया, गोलखेड़ी, इमलिया, मालीखेड़ी, दामखेड़ा, कोलुआ सहित आदि को चिह्नित किया गया है। 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों की लिस्ट तैयार हुजूर तहसील में आने वाली 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार की जा चुकी है। जब तक अवैध कॉलोनियों को लेकर शासन स्तर से नए नियम लागू नहीं होते हैं, तब तक प्रशासन पुराने प्रविधानों के तहत कार्रवाई करेगा। इसी के चलते इन 100 अवैध कॉलोनियों में प्लाट बेचने वाले कॉलोनाइजर व भूमि स्वामी पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत व प्रशासन द्वारा अधिग्रहण किया जाएगा। इन कॉलोनियों में शेष रह गए प्लाटों को बेचकर आने वाले रुपये से सड़क, नाली, बिजली आदि सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्लाट बेचने वालों पर होगी कार्रवाई     अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत 100 से अधिक कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है, इनमें प्लाट बेचने वालों पर कार्रवाई होगी। इसके अलावा शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत व एसडीएम स्तर पर अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण शुरू होगा, जिससे इनमें बचे प्लाटों को बेचकर आने वाले धन से मूलभूत सुविधाओं का कार्य करवाया जा सके। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान, 90 दिन में हिड़मा और बसवाराजू का एनकाउंटर, 6 अन्य की तलाश

बस्तर  बस्तर में नक्सलवाद खत्म करने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर बनाने की डेडलाइन तय की है। अब इस तारीख तक सिर्फ 90 दिन बचे हैं। 2025 में नक्सलवाद पर बड़ा अभियान चलाया गया। डेढ़ साल में कुल 23 बड़े नक्सली मारे गए हैं। इनमें सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन सचिव बसवाराजू, गणेश उइके सहित 16 बड़े नक्सली शामिल हैं। भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। अब केवल पोलित ब्यूरो मेंबर देवजी, मिशिर बेसरा और गणपति तीन शीर्ष नक्सली बचे हैं, जो संगठन चला रहे हैं। बस्तर में पापाराव और देवा अपनी जान बचाने के लिए अब भी जंगल में घूम रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। बस्तर में 200 से 300 नक्सली बचे नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 से 300 आर्म कैडर के नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है। अब फोर्स के लिए इन 90 दिनों में दक्षिण बस्तर डिवीजन को नक्सल मुक्त करना ही सबसे बड़ी चुनौती है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में ही देवा और पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है। कुछ समय पहले देवजी की लोकेशन तेलंगाना-आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन में थी। हालांकि, वह बार-बार ठिकाने बदल रहा है। इन 90 दिनों में अगर ये 5 से 6 बड़े नक्सली मारे जाते हैं या सरेंडर करते हैं तो बस्तर के फ्रंट लाइन के सभी टॉप लीडर्स खत्म हो जाएंगे। जानिए उन टॉप नक्सलियों के बारे में जिनकी पुलिस को तलाश है… 1 – थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (61)- देवजी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू के एनकाउंटर के बाद नक्सल संगठन ने थिप्परी तिरुपति को नक्सल संगठन का महासचिव बनाया है। ये नक्सल संगठन में पोलित ब्यूरो मेंबर भी है। वर्तमान में नक्सल संगठन का सबसे टॉप लीडर यही है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की पुलिस इसकी तलाश में जुटी हुई है। इसपर सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है। 2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (74)- गणपति भी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू से पहले ये ही नक्सल संगठन का महासचिव था। हालांकि, बीमारी और बढ़ती उम्र के चलते इसने करीब 4-5 साल पहले ही संगठन के इस सबसे बड़े पद को छोड़ दिया था। जिसके बाद बसवाराजू को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। इसपर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है। 3. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर (62)- भास्कर झारखंड का रहने वाला है। वर्तमान में नक्सलियों का पोलित ब्यूरो मेंबर है। साथ ही ERB का इंचार्ज है। इसपर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है। 4. पापा राव उर्फ मंगू (56)- पापाराव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। पापाराव अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है, इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है। इसी इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी। 5. देवा बारसे उर्फ सुक्का (48)- देवा सुकमा जिले का पूवर्ती का रहने वाला है। वर्तमान में SZCM कैडर का है। साथ ही नक्सलियों की सबसे खतरनाक टीम बटालियन नंबर 1 प्रभारी है। ये माड़वी हिड़मा का सबसे करीबी साथी रहा है। पुलिस को इसकी तलाश है। अगर पापा राव और देवा दोनों पकड़े या मारे जाते हैं तो दक्षिण बस्तर का इलाका भी शांत हो जाएगा। IG बोले- निर्णायक साल रहा बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि साल 2025 बस्तर पुलिस के लिए नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में काफी निर्णायक साल रहा है। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर बड़े लीडरों को मुठभेड़ में ढेर किया गया है। मारे गए माओवादियों के पास से LMG, AK-47, इंसास, SLR जैसे ऑटोमैटिक हथियार बरामद किया गया है। 2 सालों में ऐसे बदल गई परिस्थितियां? 2023 तक बस्तर में नक्सली फोर्स पर हावी थे। कई बड़े हमले किए गए। जवानों की कैजुअल्टी ज्यादा होती थी। लेकिन डेढ़ साल पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे के दौरान नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन जारी की थी। उन्होंने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक देशभर से नक्सलवाद का सफाया हो जाएगा। साथ ही छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के पुलिस अधिकारियों की बैठक ली। नई स्ट्रेटजी के तहत काम किया। नक्सल ऑपरेशन पर एक-दूसरे राज्य के साथ कॉर्डिनेशन स्थापित करने निर्देश दिए थे। वहीं राज्य में भी पड़ोसी जिलों की पुलिस फोर्स का संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया गया। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर जवान नक्सलियों को घेरकर मारने लगे। यही वजह थी कि नक्सलियों को ज्यादा नुकसान हुआ है। हर 5 से 10 किमी के दायरे में कैंप खोले गए। सड़कें बनीं, इंद्रावती नदी पर पुल बनने से इसका सीधा फायदा पहुंचा और मानसून में भी जवानों का ऑपरेशन जारी रहा।  

मोहन सरकार का बड़ा फैसला, गेहूं की MSP 2600 रुपये, किसानों को सिर्फ 15 रुपये बोनस

भोपाल  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गेहूं उपार्जन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप इस साल भी किसानों से 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई बढ़ोतरी के कारण राज्य सरकार पर बोनस का आर्थिक बोझ काफी कम हो गया है। इस बार किसानों को बोनस के रूप में केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे। बोनस के गणित से समझिए सरकार को राहत पिछले साल गेहूं का समर्थन मूल्य 2,275 रुपये था, जिस पर राज्य सरकार ने 125 रुपये का बोनस देकर 2,400 रुपये में खरीदी की थी। बाद में इसे बढ़ाकर 2,600 रुपये करने का निर्णय लिया गया था, जिससे सरकार पर 175 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भार आया था। लेकिन इस साल केंद्र सरकार ने MSP बढ़ाकर 2,585 रुपये कर दी है। ऐसे में मुख्यमंत्री की 2,600 रुपये की घोषणा को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को अब अपनी जेब से केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलाने होंगे। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को भेज दिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है। फरवरी से पंजीयन और मार्च में खरीदी शुरू प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। फरवरी माह से किसानों का पंजीयन शुरू किया जाएगा और मार्च से खरीदी प्रक्रिया प्रारंभ होगी। पिछले वर्ष करीब 9 लाख किसानों से 77 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदा गया था, और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद में सरकार ने व्यवस्थाएं बनाना शुरू कर दिया है। वित्तीय संकट के बीच राज्य की एजेंसियां ही करेंगी खरीदी नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड वर्तमान में लगभग 72 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबे हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से सीधी खरीदी का प्रस्ताव दिया था ताकि ब्याज का बोझ कम हो सके, लेकिन केंद्र से अभी तक सहमति नहीं मिली है। ऐसे में पुरानी व्यवस्था के तहत ही राज्य की एजेंसियां गेहूं का उपार्जन करेंगी।  

भारत टैक्सी ने ओला-उबर को दी चुनौती, दिल्ली में रोजाना 5,500 राइड्स, जानें आपके शहर में कब आएगी

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में नई सरकारी कैब सर्विस Bharat Taxi की शुरुआत हो चुकी है. कोऑपरेटिव मॉडल पर बेस्ड भारत टैक्सी ने अपने सॉफ्ट लॉन्च में ही लोगों और ड्राइवरों का भरोसा जीत लिया है. अब इस सरकारी टैक्सी सर्विस को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की तैयारी हो रही है. ताकि देश के अन्य राज्यों में भी लोगों को किफायती राइड की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके. सहकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत टैक्सी को जनवरी के अंत तक दिल्ली और अन्य शहरों में आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया जाएगा. दिसंबर की शुरुआत में हुए पायलट प्रोजेक्ट के दौरान इस सेवा को काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. इसी उत्साह को देखते हुए सरकार ने अब इसके फुल लॉन्च का फैसला लिया है. इसके बाद इसे अन्य शहरों में भी शुरू करने की योजना है. हर रोज 5,500 राइड भारत टैक्सी को 2 दिसंबर 2024 को दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था. सहकारिता मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी पंकज कुमार बंसल ने पीटीआई को दिए अपने बयान में बताया कि, "सॉफ्ट लॉन्च के दौरान इस सेवा को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. हर दिन औसतन करीब 5,500 राइड्स दर्ज की जा रही हैं, जिनमें से लगभग 4,000 राइड्स एयरपोर्ट से और 1,500 राइड्स शहर के अन्य इलाकों से होती हैं. इसमें कैब, ऑटो और बाइक तीनों सेवाएं शामिल हैं." 1.4 लाख से ज्यादा ड्राइवर रजिस्टर्ड भारत टैक्सी ऐप पर अब तक 1.4 लाख से ज्यादा ड्राइवर रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं. यह आंकड़ा बताता है कि ड्राइवर इस सहकारी मॉडल को पसंद कर रहे हैं. खास बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म पर ड्राइवरों को किसी तरह का कमीशन नहीं देना होता है. सरकार ने पहले ही कहा था कि, इस कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विस में ड्राइवरों को उनके हक का पूरा पैसा मिलेगा. 8 सरकारी संस्थाओं का साथ सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड को देश की 8 बड़ी सहकारी संस्थाओं के सहयोग से ऑपरेट किया जा रहा है. इनमें अमूल, इफको, कृभको, नाफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल, एनसीडीसी और नाबार्ड शामिल हैं. कंपनी के बोर्ड में ड्राइवरों के दो निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जिससे ड्राइवरों के जरूरत की बातें या उनकी डिमांड सीधे सरकार तक पहुंचती है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मार्च 2024 में संसद में इस सहकारी टैक्सी सेवा की घोषणा की थी. इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि कमर्शियल वाहन ड्राइवरों की निजी कंपनियों पर निर्भरता कम हो और उन्हें उनकी मेहनत की पूरी कमाई मिले. उस वक्त अमित शाह ने कहा था कि, "इस सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म से होने वाला मुनाफा किसी धन्नासेठ के पास नहीं जाएगा. ये मुनाफा टैक्सी ड्राइवर के पास जाएगा." भारत टैक्सी ऐप में मोबाइल से राइड बुकिंग, ट्रांसपैरेंट फेयर, रियल टाइम व्हीकल ट्रैकिंग, मल्टी लैंग्वेज सपोर्ट और 24 घंटे कस्टमर केयर जैसी सुविधाएं दी गई हैं. जीरो कमीशन मॉडल के तहत ड्राइवर अपनी पूरी कमाई अपने पास रख सकते हैं और सहकारी मुनाफा सीधे ड्राइवरों में बांटा जाता है. यह प्लेटफॉर्म मेट्रो रेल जैसी ट्रांजिट सेवाओं से भी जुड़ा हुआ है, जिससे यूजर एक ही ऐप पर कई तरह के सफर बुक कर सकते हैं. यात्रियों और ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के साथ भी साझेदारी की गई है. कैसे डाउनलोड करें Bharat Taxi ऐप भारत टैक्सी मोबाइल ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों यूजर्स के लिए उपलब्ध है. इसके आधिकारिक मोबाइल ऐप को यूजर गूगल प्ले स्टोर और आईफोन ऐप स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि, भारत टैक्सी का वही ऐप डाउनलोड करें जो सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है. Bharat Taxi के नाम से ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर कुछ और कैब सर्विस एप्लीकेशन मौजूद हैं. सही ऐप चुनने के लिए आप उपर दिखाए गए तस्वीर से मोबाइल ऐप के लोगो को मैच करवा सकते हैं. कैसे होगी बुकिंग कैब बुकिंग की प्रक्रिया भी अन्य राइड-हेलिंग सर्विस प्रोवाइर्ड की ही तरह आसान है. यूजर को ऐप डाउनलोड करने के बाद अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा. इसके बाद बताए गए निर्देशों का पालन करते हुए आगे बढ़िए, इसके बाद एक ओटीपी आएगा जिसे दर्ज करने के बाद आप भारत टैक्सी ऐप सेवा का लाभ उठा सकेंगे. इसमें मेट्रो, रेंटल और इंटरसिटी राइड की भी सुविधा दी जा रही है. इसके अलावा यूजर को नॉन-एसी कैब, एसी कैब, बाइक टैक्सी, एस्ट्रा लार्ज (XL) कैब, भारत ट्रांजिट या इनमें से किसी भी सेवा को चुनने की आजादी है. हालांकि सरकार का दावा है कि, ये सबसे किफायती राइड्स उपलब्ध कराएगी, लेकिन पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किए जाने के बाद कुछ यूजर्स ने शिकायत की थी कि, ओला-उबर के मुकाबले भारत टैक्सी में राइड्स थोड़ी महंगी हैं.   

छत्तीसगढ़ में 2026 में 12,000 से ज्यादा सरकारी पदों पर होगी भर्ती परीक्षा, युवाओं को मिलेगा सुनहरा मौका

रायपुर  प्रदेश के युवाओं के लिए वर्ष 2026 सरकारी नौकरी (CG Government Jobs 2026) की नई उम्मीदें लेकर आया है। व्यापमं ने इस वर्ष के लिए अपनी तैयारी पूरी करते हुए परीक्षाओं का विस्तृत कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर के अनुसार, वर्ष 2026 में शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य और तकनीकी विभागों सहित विभिन्न सरकारी महकमों में कुल 12 हजार पदों पर भर्ती (CG Government Job vacancies) की जानी है। व्यापमं (CG Vyapam Jobs) द्वारा जारी समय-सारणी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में नया उत्साह भर दिया है। इस साल की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित भर्ती शिक्षा विभाग में होने जा रही है। प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने अक्टूबर 2025 में ही 5000 नए शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी, जिसे वित्त विभाग से भी मंजूरी मिल चुकी है। अब इस प्रक्रिया को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। इन भर्तियों में स्थानीय लोगों को ही अवसर मिलेंगे। फरवरी में शिक्षक पात्रता परीक्षा व्यापम द्वारा जारी कैलेंडर (CG Vyapam Job calender) के अनुसार एक फरवरी 2026 को राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीइआरटी) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (CG TET) का आयोजन किया जाएगा। टीईटी का यह आयोजन उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश द्वार साबित होगा जो लंबे समय से शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं। टीईटी के परिणाम आने के बाद मुख्य शिक्षक भर्ती परीक्षा का रास्ता साफ हो जाएगा, जिसके माध्यम से लगभग 5000 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। जनवरी से मार्च: तकनीकी और स्वास्थ्य पदों पर फोकस     व्यापम का वर्ष 2026 का कैलेंडर (CG Vyapam Job calander 2026) जनवरी माह से ही सक्रिय हो जाएगा। साल की शुरुआत छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल में भर्ती से होगी।     11 जनवरी 2026 को मंडल में रसायनज्ञ के पदों के लिए परीक्षा आयोजित की जाएगी।     फरवरी माह में टीईटी के अलावा 08 फरवरी को एनआरडीए में उप अभियंता (सिविल) के पदों पर भर्ती परीक्षा होगी।     मार्च का महीना मुद्रण और जल संसाधन विभाग के नाम रहेगा। एक मार्च 2026 को मुद्रण तथा लेखन सामग्री विभाग में डीटीपी आपरेटर और अन्य (समूह तीन) पदों के लिए परीक्षा होगी।     इसके ठीक बाद 08 मार्च को इसी विभाग में मेकेनिक कम इलेक्ट्रिशियन और अन्य तकनीकी पदों (समूह 2) के लिए अभ्यर्थी परीक्षा देंगे।     जल संसाधन विभाग में सहायक मानचित्रकार (सिविल) के लिए 15 मार्च 2026 की तारीख तय की गई है, जबकि 22 मार्च 2026 को पर्यावरण संरक्षण मंडल में प्रयोगशाला सहायक ग्रेड-2 की परीक्षा होगी। अप्रैल से जून: पुलिस और न्यायालय में अवसर     साल की दूसरी तिमाही में भर्तियों की रफ्तार और तेज होगी। 12 अप्रैल 2026 को स्वास्थ्य संचालनालय के अंतर्गत फार्मासिस्ट ग्रेड-2 की परीक्षा होगी।     परिवहन विभाग में जाने के इच्छुक युवाओं के लिए 19 अप्रैल 2026 का दिन अहम है, जब परिवहन आरक्षक के पदों पर परीक्षा होगी।     कृषि उपज मंडियों को सुदृढ़ करने के लिए 26 अप्रैल 2026 को मंडी बोर्ड में उप निरीक्षक के पदों पर भर्ती की जाएगी।     मई और जून का महीना मुख्य रूप से प्रवेश परीक्षाओं और कुछ अहम भर्तियों के नाम रहेगा।     28 जून 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में डाटा एंट्री आपरेटर की महत्वपूर्ण परीक्षा आयोजित होगी, जिसका इंतजार बहुत से अभ्यर्थी कर रहे हैं। जुलाई से दिसंबर: गृह विभाग और संयुक्त भर्तियां     साल का उत्तरार्द्ध पुलिस और मंत्रालय में लिपिकीय पदों की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए खास रहेगा।     पांच जुलाई 2026 को सहकारिता विभाग में उप अंकेक्षक की परीक्षा होगी।     गृह (पुलिस) विभाग में सहायक उप निरीक्षक (एम) के लिए 12 जुलाई 2026 को परीक्षा ली जाएगी।     नगर सेना में फायरमैन के पदों पर 19 जुलाई 2026 को भर्ती परीक्षा प्रस्तावित है।     उच्च शिक्षा में करियर बनाने वालों के लिए चार अक्टूबर 2026 को राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) का आयोजन किया जाएगा।     वर्ष का समापन बंपर लिपिकीय भर्तियों के साथ होगा। दिसंबर में संयुक्त भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।     13 दिसंबर 2026 को विभिन्न विभागों के लिए स्टेनोग्राफर की परीक्षा होगी।     साल की आखिरी परीक्षा 30 दिसंबर 2026 को सहायक ग्रेड-3 के पदों के लिए होगी, जिसमें बड़ी संख्या में आवेदन आने की संभावना है।  

भोपाल मंडल की ट्रेनों में नया सुरक्षा मॉडल, सादे कपड़ों में जवान करेंगे गश्त

भोपाल  भोपाल से हर दिन हजारों यात्री लंबी दूरी और लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। यात्रियों की इसी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने वर्ष 2025 में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। पिछले साल सामने आई चोरी और असुरक्षा की घटनाओं से सबक लेते हुए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और जीआरपी ने मिलकर नया सुरक्षा मॉडल लागू किया है। अब ट्रेनों में लगातार गश्त, सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती और तकनीकी निगरानी बढ़ा दी गई है। भोपाल मंडल से गुजरने वाली प्रमुख एक्सप्रेस और भीड़भाड़ वाली ट्रेनों पर खास नजर रखी जा रही है। रात के समय यात्रा करने वाले कोच और संवेदनशील ट्रेनों में चेकिंग तेज की गई है। वर्ष 2025 में आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त कार्रवाई में 160 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 125 मामलों में चोरी गया सामान बरामद किया गया। करीब 33 लाख रुपये की रिकवरी हुई है। राहत की बात यह है कि चोरी हुए मोबाइल फोन में से लगभग आधे यात्रियों को वापस मिल चुके हैं। सीसीटीवी कैमरे लगाए गए बिलासपुर एक्सप्रेस और इंदौर एक्सप्रेस में चोरी की शिकायतें ज्यादा मिलने के बाद इन ट्रेनों को विशेष निगरानी में रखा गया है। साथ ही इटारसी से रानी कमलापति स्टेशन के बीच के हिस्से को सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। यहां अतिरिक्त पेट्रोलिंग और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने जीरो टालरेंस नीति अपनाई है। छेड़छाड़ के मामलों में तुरंत कार्रवाई की जा रही है। पहले जहां मामलों के निपटारे में महीनों लग जाते थे, अब औसतन दो महीने में ही केस सुलझाए जा रहे हैं। ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता     भोपाल से गुजरने वाली और यहां से चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगातार गश्त, सादे कपड़ों में तैनाती और तकनीकी निगरानी के जरिए ट्रेनों के अंदर होने वाली घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा रहा है। – एमएस सोमवंशी, थाना प्रभारी, आरकेएमपी  

कवर्धा में 146 करोड़ की लागत से बनेगा भोरमदेव कॉरिडोर, काशी और उज्जैन की तर्ज पर होगा निर्माण

कबीरधाम  केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के नए पर्यटन का केन्द्र बनेगा। प्रदेश में लगातार विकास हो रहा है। डबल इंजन की सरकार में ये सब काम हो रहें है। वे भोरमदेव कॉरीडोर के भूमिपूजन के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री विष्णु देवसाय ने 146 करोड़ के भोरमदेव कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए भूमिपूजन किया।नए वर्ष के पहले दिन कबीरधाम जिले को बड़ी सौगात मिली है। करीब 146 करोड़ रुपए के भोरमदेव कॉरिडोर प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया गया। भोरमदेव में आयोजित इस कार्यक्रम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत उपस्थित थे। इस मौके पर सीएम विष्णु देव साय ने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कबीरधाम जिले को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव मंदिर परिसर से मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ एवं सरोदा जलाशय तक एक सुव्यवस्थित एवं समग्र पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के निर्माण होने से जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थलों को एक सशक्त पर्यटन श्रृंखला में जोड़ते हुए भोरमदेव को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी। उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर भोरमदेव कॉरिडोर का विकास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने की बोड़ला–भोरमदेव सड़क उन्नयन की घोषणा इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के आग्रह पर बोड़ला से भोरमदेव तक सड़क चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक हजार वर्ष पुराने बाबा भोरमदेव मंदिर का विकास पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। सावन माह में यहां हजारों श्रद्धालु अमरकंटक से नर्मदा जल लाकर जलाभिषेक करते हैं, ऐसे में बेहतर सड़क और सुविधाएं श्रद्धालुओं की आस्था को और मजबूत करेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन द्वारा हर वर्ग के विकास के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बैगा समुदाय के लिए पीएम जनमन योजना के माध्यम से पक्की सड़कें, आवास और बुनियादी सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की गई हैं, जिनमें डॉक्टर, नर्स और आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं। भोरमदेव कॉरिडोर से जुड़ेगा विकास, रोजगार और संस्कृति भोरमदेव कॉरिडोर (Bhoramdev Tourism Corridor) के निर्माण से क्षेत्र में होटल, गाइड, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। परियोजना से धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल कबीरधाम जिला बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की पर्यटन अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। कवर्धा विधायक व डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बताया कि भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 146 करोड़ रुपए की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण होगा। यह कॉरिडोर उज्जैन व बनारस की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जिससे भोरमदेव मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण होने के साथ-साथ श्रद्धालुओं व पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी। केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन हुआ है। यह जिलेवासियों के लिए गर्व का विषय है, जो कबीरधाम को धार्मिक व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगी। सीएम विष्णु देव साय, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना व आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, डिप्टी सीएम अरुण साव, विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक भावना बोहरा उपस्थित थे।

19 करोड़ की लागत से भीमबैटका में देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूज़ियम विकसित होगा

भोपाल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भीमबेटका में बनी 30 हजार साल पुरानी शैल-कलाएं अब पर्यटकों के लिए और अधिक सुलभ होने जा रही हैं। राज्य पर्यटन निगम यहां देश का पहला अस्थायी 'रॉक आर्ट ईको पार्क द्ब्रयूजियम' विकसित करेगा। 1.12 हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले इस संग्रहालय का उद्देश्य भीमबेटका के सातों पहाडिय़ों में फैले सभी 750 से अधिक शैल चित्रों का अनुभव पर्यटकों को एक ही स्थान पर कराना है। इसकी अनुमानित लागत 19 करोड़ रुपए है और इसे वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस द्ब्रयूजियम में पारंपरिक भवन या हॉल नहीं बनेंगे, बल्कि अस्थायी सामग्री से भीमबेटका के मूल परिवेश जैसा ही ईको पार्क विकसित होगा, जहां पर्यटक डिजिटली इन्हें देख सकेंगे। डिजिटल होगी जानकारी प्राचीन कलाओं का डिजिटली प्रजेंटेशन म्यूजियम में शैल चित्रों की विशेषताओं, महॠव और अध्ययन स्रोतों की जानकारी डिजिटल माध्यम से मिलेगी। प्रत्येक शैल चित्र की रोचक और सटीक सूचना, फोटो, लिखित विवरण, ऑडियोवीडियो, पुरातत्वविदों की कमेंट्री और प्रमाणित रिसर्च पेपर उपलह्ध होंगे। एआइ से इसे जीवंत व रचनात्मक बनाया जाएगा, ताकि पर्यटकों को अद्भुत अनुभव मिले।   देख सकेंगे 10 किमी में फैले शैलाश्रय भीमबेटका में शैल चित्रों के कई क्लस्टर हैं, जो लगभग 10 किमी के दायरे में फैले हुए हैं। यहां सात पहाडिय़ों में 750 से अधिक शैलाश्रय मौजूद हैं। इनमें से वर्तमान में केवल एक ही क्लस्टर पर्यटकों के लिए खुला है, जिसमें 'ऑडिटोरियम गुफा' और 'चिडिय़ाघर रॉक' जैसे प्रसिद्ध 15 शैलाश्रय शामिल हैं। दूर-दराज के और दुर्लभ जंगली क्षेत्रों में स्थित बाकी क्लस्टरों (जैसे जावरा, विनयका, भोंरावली और लाखा जुआर) तक पर्यटक पहुंच नहीं पाते। यह नया म्यूजियम इन सभी अनदेखे शैल चित्रों की रेप्लिका (हूबहू नकल) को उनके मूल स्वरूप में प्रदर्शित करेगा, जिससे पर्यटक एक ही स्थान पर पूरे भीमबेटका का अनुभव कर पाएंगे। यह डिजाइन न केवल पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है, बल्कि पर्यटकों को प्राचीन गुफाओं के वास्तविक अनुभव के करीब भी ले जाएगा।      

उत्तर प्रदेश में सर्दी से हालात बिगड़े, 5 जनवरी तक कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में ठंड और कोहरा का सितम जारी है। प्रदेश में शीत लहर चलने से शरीर कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। हालांकि गुरुवार को धूप निकलने से लोगों को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन शुक्रवार को फिर से दोपहर के समय भी धूप के दीदार नहीं हुए और बदली छाई रही। इस तरह प्रदेश में भीषण ठंड के प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कक्षा 12 तक के स्कूलों की छुट्टी बढ़ा दी है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दे दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीषण शीतलहर को लेकर 12 वीं तक के स्कूलों में छुट्टी बढ़ा दी है। सीएम योगी ने 5 जनवरी तक सभी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड और आईसीएससी बोर्ड के सभी स्कूलों को 5 जनवरी तक बंद करने के निर्देश दिए है। मैदान में उतरें अफसर, सुनिश्चित करें व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री ने शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं क्षेत्रों में भ्रमणशील रहकर जमीनी हकीकत का जायजा लें। सीएम ने कहा कि भीषण ठंड को देखते हुए हर जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 'कोई भी खुले में न सोए' शीलहर को देखते हुए सीएम योगी ने रैन बसेरों के संचालन को लेकर अधिकारियों को विशेष हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति कड़ाके की ठंड में खुले में सोने को मजबूर न हो। सभी रैन बसेरों में बिछौने, कंबल और साफ-सफाई समेत सभी आवश्यक सुविधाएं पुख्ता की जाएं। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों को समय पर राहत सामग्री और आश्रय प्राप्त हो। इसके अलावा अलाव की व्यवस्था की जाए। तीन डिग्री पर ठिठुरा बाराबंकी, मेरठ में सर्द दिन प्रदेश के कई जिलों में धूप निकली लेकिन सर्द हवाओं का सितम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 24 घंटों के दौरान बाराबंकी का तापमान 3 डिग्री दर्ज किया गया। यह प्रदेश का सबसे सर्द जिला रहा। सीजन में भी सबसे सर्द रहा। वहीं मेरठ में दिन का तापमान सबसे कम रहा। मेरठ में दिन का तापमान 14.9 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। मेरठ सहित वेस्ट यूपी में गुरुवार को दिनभर धूप गायब रही। अमौसी स्थित मौसम मुख्यालय के अनुसार बाराबंकी के अलावा गोरखपुर और हरदोई में भी गलन और ठिठुरन ने अपना असर दिखाया। गोरखपुर में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री रहा, जो सामान्य से 4.7 डिग्री कम है। वहीं, हरदोई में पारा 4.5 डिग्री, अयोध्या में 5.0 डिग्री, सुलतानपुर में 5.2 डिग्री और बरेली में 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कानपुर में भी रात का तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। वहीं, पछुआ हवा के चलते दिन में भी धूप बेअसर साबित हो रही है। बस्ती में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.6 डिग्री गिरकर 18.0 डिग्री पर आ गया। आगरा, अलीगढ़, इटावा और फतेहगढ़ जैसे शहरों में भी दिन का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे रहा। अभी तक कक्षा 12 तक के स्कूलों में 1 जनवरी तक छुट्टी घोषित थी। लेकिन अब इसे 5 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। भीषण ठंड के प्रकोप के चलते स्कूलों में छुट्टी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। वहीं कक्षा 8 तक के स्कूल 14 जनवरी तक बंद रहेंगे। इसके अलावा बढ़ती ठंड को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को भी जरूरी दिशा निर्देश दे दिए हैं। सीएम योगी ने कहा कि शीत लहर को लेकर सभी अधिकारी क्षेत्र में भ्रमण शील रहें। साथ ही सीएम योगी ने सभी जिलों में कंबल और अलाव की व्यवस्था करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए। साथ ही कहा कि अधिकारी सभी रैन बसेरों में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करे। बता दें, प्रदेश में दिन पर दिन ठंड बढ़ती जा रही है। कड़ाके की ठंड के साथ ही कोहरे का सितम भी जारी है।