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दक्षिण की रणनीति: 2026 की संभावनाएँ, केरल पर फोकस और तमिलनाडु से कनेक्ट की कवायद

नई दिल्ली वर्तमान में देश के 21 राज्यों में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हौसले भविष्य के लिए बुलंद हैं। साल 2025 में हवा का रुख बदला तो दशकों बाद दिल्ली भाजपा की हो गई। कुछ महीनों में भाजपा ने बिहार को भी मजबूत कर लिया और फिर साल बीतते-बीतते केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम भाजपा के रंग में रंग गई। यह जीत सिर्फ एक राज्य या शहर तक सीमित नहीं, बल्कि 2026 में दक्षिण भारत की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट मानी जा रही है। पश्चिम बंगाल के अलावा दक्षिण भारत के राज्यों केरल और तमिलनाडु में साल 2026 में चुनाव हैं। उत्तर भारत में भाजपा का परचम पहले से ही लहरा रहा है, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और झारखंड को छोड़ दें तो पार्टी की पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब पार्टी की नजरें दक्षिण भारत पर टिकी हैं, वह क्षेत्र जहां कर्नाटक को छोड़कर अब तक सत्ता का स्वाद नहीं मिला। बिहार जीतते ही प्रधानमंत्री मोदी ऐलान कर चुके हैं कि अगला मिशन पश्चिम बंगाल है, लेकिन तमिलनाडु और खासकर केरल में भाजपा की जमीनी तैयारियां काफी कुछ बयां करती हैं। तिरुवनंतपुरम की जीत इसका ताजा उदाहरण है। पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु तीनों विधानसभाओं का कार्यकाल मई में पूरा होगा। 7 मई वर्तमान पश्चिम बंगाल विधानसभा के कार्यकाल का आखिरी दिन होगा, जबकि तमिलनाडु विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 10 मई और केरल विधानसभा का 23 मई है। लिहाजा, इससे पहले नई विधानसभा चुनी जानी है। चुनावों के मद्देनजर पश्चिम बंगाल में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दौरे शुरू हो चुके हैं, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया यात्रा भी शामिल है। 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने 'तमिल भाषा' का जिक्र करके तमिलनाडु को कनेक्ट किया। उन्होंने 28 दिसंबर को 'मन की बात' कार्यक्रम में काशी के स्कूलों में तमिल भाषा सिखाने के लिए चलाए जा रहे अभियान की बात की। वहीं, तिरुवनंतपुरम की जीत को भाजपा की 'दक्षिणी दस्तक' के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।

रायपुर: यूनेस्को की दहलीज पर सिरपुर, छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत बनेगी विश्व धरोहर – मंत्री शेखावत

रायपुर : यूनेस्को की दहलीज पर सिरपुर, छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत बनेगी विश्व धरोहर केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने नामांकन प्रक्रिया को दी गति केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के सिरपुर दौरे से मजबूत हुआ राज्य सरकार का दावा रायपुर छत्तीसगढ़ का प्राचीन रत्न सिरपुर यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में प्रवेश करने को तैयार है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने नामांकन प्रक्रिया को रफ्तार दी है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के दौरे ने इसे केंद्र स्तर पर अपरिहार्य बना दिया है। नए वर्ष में अंतिम स्वीकृति की मजबूत संभावना है, जो राज्य को पहला विश्व धरोहर स्थल प्रदान करेगा। छठी शताब्दी से बहुधार्मिक शहरी केंद्र के रूप में प्रसिद्ध सिरपुर में बौद्ध, जैन, हिंदू और शैव-वैष्णव परंपराएं एक साथ विकसित हुईं। यहां लक्ष्मण मंदिर, बुद्ध विहार, प्राचीन आवासीय परिसर, बाजार और नदी घाटों सहित 125 से अधिक खुदाई स्थल मौजूद हैं, जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य पुरातत्व विभाग ने संयुक्त रूप से दस्तावेजित किया है। यूनेस्को टैग के लिए आवश्यक अंर्तराष्ट्रीय मानकों सुरक्षा, प्रस्तुति और आगंतुक प्रबंधन को पूरा करने हेतु भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य पर्यटन एजेंसियों ने सिरपुर का विस्तृत निरीक्षण पूरा कर लिया है। यह रिपोर्ट केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को प्रस्ताव को मजबूत बनाने के लिए भेजा गया है, जिसमें नवंबर 2025 तक सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण की रिपोर्ट शामिल है।  01 जनवरी 2026 को शेखावत ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के साथ सिरपुर का दौरा किया। उन्होने लक्ष्मण देवालय, आनंद प्रभु कुटी विहार, तीवरदेव विहार, सुरंग टीला और हाट बाजार का निरीक्षण कर निर्देश दिए कि मूल संरचना सुरक्षित रखें और कनेक्टिविटी बढ़ाएं। शेखावत ने कहा कि सिरपुर को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल करने का प्रयास जारी है।  उन्होने आगे कहा कि सिरपुर एक ऐतिहासिक नगर है, जो कभी इस प्रदेश की राजधानी हुआ करती थी, सिरपुर में आकर यहां की पुरासंपदा को देखना, एक हजार साल की यहां की विकास यात्रा को देखना समझना और इस गौरवशाली अतीत को अनुभव करना निश्चित रूप से मन मे, शरीर में एक स्पंदन पैदा करता है। यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि इन सब का दर्शन करने का, अपने पुरखों के इतिहास और उनके गौरव को देखने और समझने का अवसर मिला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का यह स्थान देश में स्थित 140 केन्द्रीय रूप से संरक्षित स्मारकों में से एक है, जिसके संरक्षण के लिए यहां के पुरासंपदा का रखरखाव हो सके इसके लिए भारत सरकार व राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। इस क्षेत्र की और इस जगह की जितनी महत्ता है, उसके अनुरूप अभी यहां पर्यटन विकास की बहुत अधिक संभावनाएं हैं। मैं पर्यटन मंत्री होने के नाते कह सकता हंू कि इस जगह को यदि ठीक से कनेक्टिविटी दी जाए और ठीक से यहां पर्यटन की मूलभूत सुविधाएं का विकास किया जाए तो निश्चित रूप से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ पर्यटन की दृष्टि से एक नया स्वरूप प्राप्त करेगा। छत्तीसगढ़ की पहचान एक समृद्ध, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक संपदा वाले प्रदेश के रूप में बन रही है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ पर्यटन गतिविधियों का केन्द्र बने इस दृष्टिकोण से सिरपुर बहुत महत्वपूर्ण है। केन्द्रीय पर्यटन मंत्री का यह दौरा राज्य सरकार की रिपोर्ट को मजबूत करता है, क्योंकि सिरपुर 140 संरक्षित स्मारकों में शुमार है।   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सिरपुर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा है। यूनेस्को मान्यता से वैश्विक पहचान मिलेगी, पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए हजारों रोजगार सृजित होंगे। उनके निर्देश पर सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ 125 खुदाई स्थलों का मास्टर प्लान तैयार किया। इसमें लक्ष्मण मंदिर, आनंद प्रभु कुटी विहार, तीवरदेव विहार, सुरंग टीला, गंधेश्वर मंदिर सहित प्रमुख साइटें शामिल हैं। नवंबर 2025 की रिपोर्ट केंद्रीय मंत्रालय पहुंच चुकी है, दिसंबर में अंतिम समीक्षा हुई।  वहीं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा की सिरपुर को वैश्विक पर्यटन हब बनाएंगे। बैटरी ई-कार्ट, 3डी इंटरप्रेटेशन सेंटर, होमस्टे क्लस्टर, हेरिटेज शटल और गाइडेड वॉक शुरू हो रहे हैं। चार हेरिटेज सर्किट, बौद्ध विहारों से लक्ष्मण मंदिर तक जोड़ेंगे। सड़क उन्नयन, डिजिटल साइनेज, स्वच्छता और सर्किट मैनेजमेंट पर कार्य किया जा रहा है । स्थानीय लाभ के लिए गाइड ट्रेनिंग, हस्तशिल्प बाजार और ईको-फ्रेंडली स्टे पर जोर दिया जाएगा।  उल्लेखनीय है कि सिरपुर दक्षिण कोसल की राजधानी थी। लक्ष्मण मंदिर सिरपुर का सबसे प्रसिद्ध और पुरातन हिंदू मंदिर है, जो 6वीं-7वीं सदी में बनाया गया था। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और प्रमुख रूप से लाल ईंटों से निर्मित है। रानी वासटादेवी ने इसे अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में बनवाया था इसे एक प्रेम कथा का प्रतीक भी माना जाता है। तिवरदेव विहार एक प्राचीन बौद्ध विहार है, जो 7वीं-8वीं सदी का बताया जाता है। यह बड़े पैमाने पर ईंटों का बना हुआ था और खुदाई में इसका अवशेष मिला है। बौद्ध संप्रदाय से जुड़ा यह विहार सिरपुर में बुद्ध के अनुयायियों द्वारा ध्यान, शिक्षा और धार्मिक क्रियाओं के लिए उपयोग में लाया गया था। आनंद प्रभु कुटी विहार सिरपुर का एक प्रमुख बौद्ध स्थल है, जिसे भिक्षु आनंद प्रभु द्वारा स्थापित किया गया था। यह विहार 14 कमरे वाला एक बड़ा बौद्ध मठ है, जिसमें एक मुख्य प्रवेश द्वार और सुंदर नक्काशीदार स्तंभ पाए गए हैं। यहां बुद्ध की एक विशाल मूर्ति और अन्य बौद्ध प्रतिमाएँ मिलती हैं। सुरंग टीला सिरपुर का एक अनोखा पुरातात्विक स्थल है, जिसमें प्राचीन काल के मंदिर के अवशेष मिले हैं। यह 7वीं सदी का मंदिर था, जिसमें 5 गर्भगृह पाए गए हैं। इन गर्भगृहों में शिवलिंग और गणेश की प्रतिमा स्थित है, जो इस धार्मिक स्थल की विविधता को दर्शाता है।  यह हिंदू-बौद्ध-जैन का दुर्लभ मिश्रण है जिसकी तुलना अंगकोरवाट या बोधगया से किया जा सकता है। संयुक्त सांस्कृतिक-प्राकृतिक श्रेणी में भारत के 44 विश्व धरोहरों में छत्तीसगढ़ का प्रवेश सिरपुर से होगा। यूनेस्को टैग से वैश्विक फंडिंग, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दस हजार से अधिक रोजगार और 500 करोड़ का … Read more

फ्लाइट से कम खर्च में लंबी दूरी का सफर! आ रही है पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन

नई दिल्ली रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि गुवाहाटी और कोलकाता के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का टिकट किराया हवाई यात्रा के मुकाबले काफी कम होगा। देश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के आखिर में करेंगे। वैष्णव ने गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "वंदे भारत स्लीपर में 3-AC का किराया लगभग ₹2,300, 2-AC का लगभग ₹3,000 और 1-AC का लगभग ₹3,600 होगा, जिसमें खाना भी शामिल होगा। किराया मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर तय किया गया है।" उन्होंने कहा कि ट्रेन अगले 15-20 दिनों में चलना शुरू हो जाएगी, शायद 18 जनवरी के आसपास, क्योंकि प्रधानमंत्री को इसके लिए अनुरोध भेजा गया है। वैष्णव ने कहा, "मैं अगले दो-तीन दिनों में सही तारीख की घोषणा करूंगा।'' उन्होंने इस डेवलपमेंट को देश के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया। खबर के मुताबिक, वैष्णव ने कहा कि गुवाहाटी और कोलकाता के बीच 16 कोच वाली ट्रेन की क्षमता 823 यात्रियों की है और इसकी डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा है। हालांकि, यह दोनों शहरों के बीच 120-130 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलेगी, जिसमें असम और पश्चिम बंगाल के खास जिले शामिल होंगे। ट्रेन के बारे में बताते हुए वैष्णव ने कहा कि गुवाहाटी-कोलकाता हवाई यात्रा का किराया लगभग ₹6,000 से ₹8,000 है। हालांकि, रेल मंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच नई वंदे भारत ट्रेन से लागत कम होगी क्योंकि प्रति किलोमीटर किराया 1 AC के लिए ₹3.8 प्रति किमी, 2AC के लिए ₹3.1 प्रति किमी और 3 AC के लिए ₹2.4 होगा। 16 कोच वाली ट्रेन में 11 3-AC कोच, चार 2-AC कोच और एक 1-AC कोच हैं। कुल 823 बर्थ में से 611 3-AC में, 188 2-AC में और 24 1-AC में हैं।  

रायपुर: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में चयनित खिलाड़ियों को दिए हॉकी किट

रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट के लिए चयनित खिलाड़ियों को दिए हॉकी किट राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में प्रशिक्षण ले रहे तीनों खिलाड़ी, असेसमेंट कैंप में भारतीय हॉकी कोच पी.आर. श्रीजेश परख रहे खिलाड़ियों को रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बेंग्लुरू स्थित साई (Sports Authority of India) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट के लिए चयनित खिलाड़ियों को हॉकी किट प्रदान किया। उन्होंने आज नवा रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास कार्यालय में गोलकीपर अल्फाज खान को गोलकीपिंग का संपूर्ण किट तथा फॉरवर्ड पोजिशन में खेलने वाली मधु सिदार और दामिनी खुसरो को हाकी स्टिक प्रदान किया। ये तीनों खिलाड़ी बिलासपुर स्थित स्वर्गीय बी.आर. यादव राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में पिछले तीन सालों से हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं।  उप मुख्यमंत्री श्री साव ने तीनों खिलाड़ियों के साई के परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में चयन पर खुशी जाहिर करते हुए बधाई दी। उन्होंने तीनों को भविष्य में अच्छे प्रदर्शन और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। जून-2022 से खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बहतराई के आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में 67 खिलाड़ी अभी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। राज्य शासन और प्रशिक्षकों के सहयोग से यहां से लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। हॉकी किट के वितरण के दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक श्री ए. एक्का और राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में हॉकी के वरिष्ठ कोच श्री राकेश टोप्पो भी मौजूद थे। रायपुर के अल्फाज खान हाल ही में 12 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक बेंग्लुरू के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में शामिल हुए थे। वहां भारतीय हॉकी कोच श्री पी.आर. श्रीजेश ने देशभर के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को परखा। जशपुर की मधु सिदार और बोड़ला (कबीरधाम) की दामिनी खुसरो इसी महीने 16 जनवरी से 23 जनवरी तक आयोजित परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में शामिल होंगी। इन तीनों खिलाड़ियों ने 15वीं हॉकी इण्डिया जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इसी आधार पर उनका चयन राष्ट्रीय स्तर पर परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप के लिए हुआ है। दामिनी खुसरो और मधु सिदार पिछले वर्ष  हुए वेस्ट जोन हॉकी चैम्पियनशिप में विजेता टीम का हिस्सा रही थी। इसमें मधु सिदार सर्वाधिक गोल कर टॉप स्कोरर रही थी।

बस्तर पंडुम हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच : मुख्यमंत्री साय

  रायपुर  बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की  सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का  सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा। उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है। प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन … Read more

सबकी समृद्धि और खुशहाली ही है सरकार का पारितोषिक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश के विकास की गति अब होगी और भी तेज : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सबकी समृद्धि और खुशहाली ही है सरकार का पारितोषिक वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप मनायेंगे खाचरौद को दी सांदीपनि विद्यालय और नवीन कृषि उपज मंडी की सौगात खाचरौद में बनेगा संयुक्त तहसील कार्यालय और जनपद पंचायत का नया भवन मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन खाचरौद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार प्रदेश के 'समग्र विकास' के संकल्प के साथ काम कर रही है। हमारा मध्यप्रदेश अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी वर्ग या व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। विकास की बात पर हम सबका सहयोग लेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में विकास की बयार है। विकास की यह गति अब और तेज होगी। आप सबके सेवक के रूप में वे खुद चौबीसों घंटे सातों दिन प्राण-प्रण से सेवा में जुटे हुए हैं। सबका कल्याण ही हमारा लक्ष्य है। नागरिकों की समृद्धि और खुशहाली ही हमारा पारितोषिक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन जिले के खाचरौद में विकास कार्यों के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाचरौद को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने यहां 78 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत वाले पूर्ण एवं प्रस्तावित 39 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इसमें 48 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत के 16 कार्यों का लोकार्पण एवं 30 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत वाले 23 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सभी कार्यों से खाचरौद के विकास को एक नई दिशा मिलेगी। यह विकास कार्य खाचरौद के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। सांदीपनि विद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर, बच्चों के बेहतर भविष्य की लिखेंगे नई इबारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाचरौद में 35 करोड़ 40 लाख की लागत से नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय भवन, 11 करोड़ 30 लाख की लागत से नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण सहित अन्य कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाचरौद का सांदीपनि विद्यालय आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का प्रतीक बनेगा और विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध करायेगा। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय प्रदेश में शिक्षा के पवित्र मंदिर के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। यह हमारे बच्चों के बेहतर और सुनहरे भविष्य की नई इबारत लिखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाचरौद के नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण में किसानों की सुविधा के लिए कृषक विश्राम भवन, भोजनालय, पानी की टंकी एवं प्याऊ भी बनाये गए हैं। मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 9 करोड़ 10 लाख रुपये लागत से बनने वाले संयुक्त तहसील कार्यालय के नवीन भवन, 5 करोड़ 25 लाख लागत से बनने वाले जनपद पंचायत भवन एवं 6 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम-2.0) सहित अन्य प्रस्तावित कार्यों का भूमिपूजन भी किया। मुख्यमंत्री ने राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा संचालित खाचरौद के माध्यमिक विद्यालय में 11 स्मार्ट क्लासेस का लोकार्पण भी इस मौके पर किया। खाचरौद में बनेगा फूड प्रोसेसिंग पार्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र में बहुतायत से होने वाली हरी मटर को देश-विदेश तक पहुंचाने और अन्य सभी फसलों को भी मार्केट लिंकेज दिलाने के लिए खाचरौद में फूड प्रोसेसिंग पार्क बनाने और खिलाड़ियों के लिए नया स्टेडियम बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खाचरौद से रतलाम को डायरेक्ट फोर लेन से जोड़ा जाएगा, जिससे खाचरौद को भी इन्दौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया की सीधी पहुंच मिल सके। 5 करोड़ की लागत से बनेगा फोरलेन हाई-वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा से खाचरौद से जावरा से उज्जैन होते हुए करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से नया फोरलेन हाई-वे बनाया जा रहा है। इससे पूरे क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना से मालवा-निमाड़ और चंबल का पूरा क्षेत्र भरपूर सिंचाई की स्थायी सुविधा से लाभान्वित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 5 सालों में हम प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर कृषि रकबे तक पहुंचा देंगे। किसान एवं कृषि से जुड़े उद्यामियों को देंगे नई दिशा और अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 किसानों के कल्याण का साल है। इस दौरान हमारा पूरा फोकस किसानों पर ही रहेगा। इस साल हम कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान देंगे, जिससे किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों को नई दिशा और अवसर मिलेंगे। गेहूं की खरीदी पर हम किसानों को 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रहे हैं। हम किसानों की आय बढ़ायेंगे। किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनायेंगे। इसके लिए प्रदेश के 32 लाख किसानों को सोलर पम्प उपलब्ध करायेंगे। हर साल 10 लाख किसानों को सोलर पम्प दिए जाएंगे। इससे उन्हें बिजली बिल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। किसान खुद बिजली उत्पन्न करके खेतों में सिंचाई, छोटा-मोटा व्यवसाय और निजी उपभोग भी कर सकेंगे। साथ ही सरप्लस बिजली बेचकर अतिरिक्त आयार्जन भी वे कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। गरीबों और निराश्रितों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और प्रदेश के हर जरूरतमंद को शासन की सेवाएं, सुविधाएं और संबल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि नागदा की विश्व में अपनी अलग ही पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में सांस्कृतिक धारा का अभ्युदय हो रहा है। सिंहस्थ 2028 के लिए हमारी तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में सबसे अच्छे स्कूल बन रहे हैं। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यही समय है, सही समय है। इसी क्रम में आज खाचरौद को भी नया सांदीपनि विद्यालय मिला है। हमारी सरकार विरासत के संरक्षण के मार्ग पर चलते हुए प्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय का निर्माण करा रही है। श्रीकृष्ण से जुड़े प्रत्येक स्थल को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। … Read more

मीर यार बलूच ने जयशंकर को चेतावनी दी, ‘बलूचिस्तान में चीन की सेना की घुसपैठ हो सकती है’

नई दिल्ली बलूचिस्तान के एक नेता ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है. इस चिट्ठी में बलूच नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन आने वाले महीनों में बलूचिस्तान में सैन्य बल तैनात कर सकता है, जिससे न केवल इस क्षेत्र में बल्कि भारत के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा होगा.  मीर यार बलूच ने जयशंकर को संबोधित करते हुए एक जनवरी 2026 को लिखे इस पत्र में खुद को बलूचिस्तान का प्रतिनिधि बताते हुए आगाह किया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन वहां अपने सैनिक तैनात कर सकता है. उन्होंने ऐसे किसी भी कदम को भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए खतरा बताया. पत्र में कहा गया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और उन्हें पुराने तौर-तरीकों के अनुसार अनदेखा किया जाता रहा, तो यह पूरी तरह संभव है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर दे. उन्होंने कहा कि छह करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान—दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी. उन्होंने  चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच रणनीतिक गठजोड़ अब CPEC के उस चरण में पहुंच चुका है, जिसे उन्होंने इसका अंतिम चरण बताया. उनके अनुसार, इससे हालात और अधिक खतरनाक हो गए हैं. उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच ठोस और पारस्परिक सहयोग की मांग करते हुए कहा कि दोनों को जिन खतरों का सामना करना पड़ रहा है, वे वास्तविक और तत्काल हैं. मीर यार बलूच ने भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थलों का हवाला देते हुए इन्हें साझा विरासत का प्रतीक बताया. इस चिट्ठी में उन्होंने मोदी सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाइयों की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि इस अभियान में किस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के ठिकानों को निशाना बनाया गया और यह पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति असाधारण साहस और दृढ़ प्रतिबद्धता का उदाहरण है. आखिरी में मीर यार बलूच ने हमारे दो महान राष्ट्रों के बीच और अधिक मजबूत सहयोग की उम्मीद जताई.

बीएमसी चुनाव में किरीट सोमैया के बेटे को मिला वॉकओवर, विपक्ष ने क्यों नहीं उतारे उम्मीदवार?

मुंबई  महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी के दिग्गज नेता किरीट सोमैया एक ऐसा नाम है, जिसे 'भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा' के तौर पर जाना जाता है. मुंबई विश्वविद्यालय से बिजनेस पॉलिसी और एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी कर किरीट सोमैया ने अपने राजनीति विरोधी नेताओं के द्वारा वित्तीय हेराफेरी की जांच करने पर केंद्रित अपनी सियासी शैली को चुना. सोमैया के सियासी खोजबीन से अजीत पवार, हसन मुश्रीफ, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, नारायण राणे और कृपाशंकर सिंह जैसे नेता नहीं बच सके. किरीट सोमैया मुंबई उत्तर पूर्व लोकसभा सीट से दो बार बीजेपी के सांसद रह चुके हैं, लेकिन पिछले काफी समय से पार्टी में साइड लाइन चल रहे थे. बीजेपी ने बीएमसी चुनाव में उनके बेटे नील सोमैया को मुंबई के वार्ड नंबर 107 से दूसरी बार उम्मीदवार बनाकर उतारा है. इस बार उनके बेटी की राह पूरी तरह से आसान हो गई है, क्योंकि विपक्ष की तरफ से कोई कैंडिडेट ही नहीं है. बीजेपी से कैंडिडेट होने के चलते नील सोमैया को एकनाथ शिंदे की शिवसेना का समर्थन हासिल है. नील सोमैया को विपक्षी दलों एक तरफ से वॉकओवर दे दिया है. किसी भी विपक्षी दल से कोई भी कैंडिडेट किरीट सोमैया के बेटे खिलाफ चुनाव में नहीं है. यह संयोग है या फिर कोई प्रयोग? नील सोमैया को विपक्ष का वॉकओवर मुंबई के मुलुंड इलाके की वार्ड नंबर 107 से बीजेपी प्रत्याशी नील सोमैया के खिलाफ राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गठबंधन ने कोई उम्मीदवार नहीं दिया. ठाकरे ब्रदर्स ही नहीं एनसीपी और कांग्रेस पार्टी से भी किरीट सोमैया के बेटे खिलाफ कोई कैंडिडेट मैदान में नहीं है. एक तरह से विपक्ष ने पूरी तरह से किरीट सोमैया के बेटे को एक तरह से वॉकओवर दे दिया है. इसके चलते नील सोमैया के जीत की राह आसान हो गई है. किरीट सोमैया ने कहा- गॉड इज ग्रेट मुंबई के वार्ड 107 में नील सोमैया की सियासी राह को आसान होती देख किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कहा- गॉड इज ग्रेट. आगे कहा कि नील सोमैया वार्ड नंबर 107 से चुनाव लड़ रहे हैं. इस वार्ड में ठाकरे ग्रुप, MNS, कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी कोई भी कैंडिडेट मैदान में नहीं बचा है. किरीट सोमैया ने कहा कि मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, सिर्फ इतना ही नहीं कहूंगा कि ठाकरे ब्रदर्स और कांग्रेस के साथ एनसीपी प्रत्याशी उतारने में असफल रहे. भगवान की लीला अनोखी है. इस तरह से उन्होंने अपने बेटी के खिलाफ विपक्ष की तरफ से कैंडिडिट ना होने के लिए भगवान को श्रेय दिया है. समझें, विपक्ष ने क्यों दिया वॉकओवर किरीट सोमैया के बेटे नील सोमैया पहली बार 2017 में मुलुंड के वार्ड नंबर 107 से पार्षद चुने गए थे. अब दूसरी बार फिर से उसी वार्ड से बीजेपी के टिकट पर नील सोमैया चुनावी मैदान में है. विपक्ष की तरफ से कोई भी कैंडिडेट मैदान में नहीं है. मुंबई के मुलुंड विधानसभा क्षेत्र के तहत छह बीएमसी सीटें आती हैं, इन सभी के बाकी पांच वार्ड में इन सभी पार्टियों के कैंडिडेट मैदान में हैं, सिर्फ 107 वार्ड छोड़कर. राज ठाकरे-उद्धव ठाकरे ने कोई प्रत्याशी ही 107 वार्ड से नहीं उतारा, क्योंकि यह सीट उन्होंने शरद पवार की पार्टी के लिए छोड़ दी थी. मुंबई में ठाकरे ब्रदर्स के साथ शरद पवार की पार्टी का गठबंधन है. ऐसे में शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने हंसराज दानानी को वार्ड नंबर 107 से प्रत्याशी बनाया था, दानानी ने अपना नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन उनका पर्चा खारिज हो गया. एनसीपी प्रत्याशी का पर्चा इसीलिए निरस्त हो गया, क्योंकि नामांकन पत्र के साथ हलफनामा नहीं लगाया था. ऐसे में किरीट सोमैया के बेटे की जीत अब तय मानी जा रही है. नील सोमैया को फिर करना होगा मुकाबला शिवसेना (यूबीटी), राज ठाकरे की मनसे और शरद पवार की एनसीपी के उम्मीदवार ना होने के बाद भी नील सोमैया को चुनाव में दो-दो हाथ करना होगा. कांग्रेस ने इस इस सीट पर अपना उम्मीदवार इसीलिए नहीं दे सकी, क्योंकि यह सीट वंचित बहुजन अघाड़ी के लिए छोड़ी है. मुंबई में कांग्रेस और वीबीए का गठबंधन है. ऐसे में वंचिक बहुजन अघाड़ी सहित 9 निर्दलीय उम्मीदवार अभी भी वार्ड 107 से चुनावी मैदान में हैं. ऐसे में नील सोमैया की भले ही राह आसान दिख रही हो, लेकिन जीत के लिए उन्हें संघर्ष करना होगा. वार्ड नंबर 107 में नील सोमैया के खिलाफ वंचित बहुजन अघाड़ी के उम्मीदवार को कांग्रेस का समर्थन है. शरद पवार की पार्टी का पर्चा खारिज होने के बाद ठाकरे ब्रदर्स यहां पर किसी निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं. हालांकि, यह इलाका बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, यहां पर गुजराती और मारवाड़ी समाज के अच्छी खासी संख्या है. ऐसे में देखना है कि विपक्ष नील सोमैया की राह में कैसे बाधा बनते हैं?

मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट और इकोसिस्टम अवार्ड्स 11-12 जनवरी को, वैश्विक स्टार्टअप डेस्टीनेशन बनने की पहल

मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट एवं इकोसिस्टम अवार्ड्स 11 और 12 जनवरी को मध्यप्रदेश को वैश्विक स्टार्टअप डेस्टीनेशन बनाने की पहल भोपाल मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट एवं इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 का आयोजन 11 और 12 जनवरी 2026 को रवीन्द्र भवन भोपाल में होगा। यह आयोजन प्रदेश में स्टार्टअप एवं नवाचार इकोसिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय पहल के रूप में होगा। इस समिट का आयोजन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग द्वारा किया जा रहा है। इससे राज्य में उद्यमिता, नवाचार एवं समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। समिट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। इस आयोजन की परिकल्पना मध्यप्रदेश को एक वैश्विक स्टार्टअप गंतव्य के रूप में स्थापित करने के महत्वपूर्ण कदम के रूप में की गई है। समिट का उद्देश्य एवं महत्व समिट का उद्देश्य स्टार्टअप्स, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स, उद्योग जगत के लीडर, शैक्षणिक और वित्तीय संस्थानों तथा शासकीय विभागों के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है जिससे नवाचार आधारित उद्यमशील विकास को गति दी जा सके। वर्तमान में मध्यप्रदेश में एक सशक्त एवं समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम विद्यमान है, जिसमें लगभग 6,344 DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स शामिल हैं। इनमें लगभग 3,023 स्टार्टअप्स महिलाओं के नेतृत्व वाले हैं। यह इकोसिस्टम 100 से अधिक इनक्यूबेटर्स के मजबूत संस्थागत ढांचे द्वारा समर्थित है। आयोजन एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियों को प्रस्तुत करेगा, संरचित नीतिगत विमर्श एवं स्टार्टअप–निवेशक संवाद को सक्षम बनाएगा तथा एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 के माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करेगा। उद्घाटन सत्र के दौरान “स्टार्टअप सक्सेस स्टोरीज़ कंपेंडियम” का विमोचन भी किया जाएगा, जिसमें राज्य के उल्लेखनीय स्टार्टअप्स की सफल कहानियाँ सम्मिलित होंगी और यह भावी उद्यमियों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में कार्य करेगा। पहले दिन की गतिविधियां एमपी स्टार्टअप समिट 2026 के दो दिवसीय आयोजन के रूप में नियोजित किया गया है, ताकि सभी इकोसिस्टम हितधारकों की सार्थक एवं परिणामोन्मुखी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। पहला दिन 11 जनवरी 2026 को इकोसिस्टम सुदृढ़ीकरण एवं प्रारंभिक चरण के निवेश संवाद पर केंद्रित होगा। इसमें इनक्यूबेटर सस्टेनेबिलिटी पर मास्टरक्लास, एग्री एफपीओ को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने पर विषयगत चर्चा, स्टार्टअप पिचिंग का क्वालिफायर राउंड तथा निवेशकों एवं इकोसिस्टम लीडर्स के साथ क्लोज्ड-डोर नेटवर्किंग डिनर होगा। समापन 12 जनवरी को होगा दूसरा दिन 12 जनवरी 2026 को रणनीतिक सहभागिता, मान्यता एवं सेक्टर-विशिष्ट ज्ञान साझा करने पर केंद्रित रहेगा। इसमें स्टार्टअप पिचिंग के फाइनल राउंड, मुख्यमंत्री, डॉ. यादव द्वारा उद्घाटन एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ, स्टार्टअप सक्सेस स्टोरीज़ कंपेंडियम का विमोचन, एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स-2026 का वितरण तथा प्राथमिकता वाले विषयों पर सेक्टर-विशिष्ट सत्र शामिल होंगे। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप राज्य में स्टार्टअप विकास हेतु नीतिगत पहलों एवं भविष्य की रूपरेखा को प्रस्तुत करेंगे। एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026, समिट की एक प्रमुख गतिविधि होगी। छह स्टार्टअप श्रेणियों—श्रेष्ठ महिला उद्यमी, श्रेष्ठ युवा उद्यमी, सर्वाधिक नवोन्मेषी स्टार्टअप, श्रेष्ठ प्रारंभिक चरण स्टार्टअप, श्रेष्ठ ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप और प्राथमिकता क्षेत्रों में श्रेष्ठ स्टार्टअप के अंतर्गत नामांकन प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त इनक्यूबेटर्स जैसे प्रमुख इकोसिस्टम योगदानकर्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा। उद्योग जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, वेंचर कैपिटलिस्ट्स एवं वरिष्ठ इकोसिस्टम प्रतिनिधियों से युक्त एक जूरी का गठन किया गया है, जो पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से आवेदनों का आकंलन कर पुरस्कार विजेताओं की संस्तुति करेगी। प्रदर्शनी एवं सहभागिता इस समिट में लगभग 3 हजार प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, एक्सेलेरेटर्स, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान, शैक्षणिक प्रतिनिधि, छात्र, शासकीय अधिकारी एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। प्रदर्शनी में 60 से अधिक स्टॉल्स लगेंगे, जिसमें स्टार्टअप्स के साथ इनक्यूबेटर्स, फंड्स एवं बैंक, एक जिला एक उत्पाद पहल तथा शासकीय विभागों के लिए स्टॉल्स आरक्षित किए जाएंगे। यह प्रदर्शनी स्टार्टअप्स को अपने नवाचार प्रदर्शित करने, निवेशकों से जुड़ने और नीति निर्माताओं एवं उद्योग हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगी। उभरता हुआ स्टार्टअप नवाचार केंद्र मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व एवं एमएसएमई मंत्री के नीतिगत मार्गदर्शन के अनुरूप एक रणनीतिक एवं उच्च प्रभाव वाली पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसका उद्देश्य मध्यप्रदेश को एक उभरते हुए स्टार्टअप एवं नवाचार केंद्र के रूप में सशक्त करना है। यह समिट इकोसिस्टम सहयोग को गहराई प्रदान करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और राज्य में सतत उद्यमशील विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

जयशंकर का पाकिस्तान को चेतावनी, “आतंकवाद फैलाने पर भारत चुप नहीं रहेगा

 चेन्नई विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद बढ़ावा देने वाला खराब पड़ोसी बताया है और कहा है कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए पूरा अधिकार है. आईआईटी मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा और आतंकवाद से निपटने के तरीके पर किसी बाहरी दबाव या सलाह को स्वीकार नहीं करेगा. विदेश मंत्री ने कहा कि जब कोई पड़ोसी देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा हक है. हम जो जरूरी होगा, वही करेंगे. आप हमसे ये उम्मीद नहीं कर सकते कि हम आपके साथ पानी साझा करें और आप हमारे देश में आतंकवाद फैलाते रहें. विदेश मंत्री ने साफ कहा कि आतंकवाद पर भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी, ये फैसला सिर्फ भारत करेगा. उन्होने आगे कहा कि हम अपने अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, ये हमारा फैसला है. कोई हमें ये नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं. अपनी सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा, हम करेंगे. पाकिस्तान का नाम लिए बिना एस. जयशंकर ने कहा कि कई देशों को मुश्किल पड़ोसियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन भारत की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि आतंकवाद को वहां राज्य की नीति की तरह इस्तेमाल किया गया है. अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो हमारे पास अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को पानी के बंटवारे जैसे समझौतों से भी जोड़ा. जयशंकर ने कहा कि भारत ने दशकों पहले पानी साझा करने का समझौता किया था लेकिन ऐसे समझौते अच्छे पड़ोसी संबंधों पर टिके होते हैं. उन्होंने कहा कि अगर दशकों तक आतंकवाद चलता रहा, तो अच्छे पड़ोसी वाले रिश्ते नहीं रह सकते. और अगर अच्छे रिश्ते नहीं होंगे, तो उनके फायदे भी नहीं मिल सकते. आप ये नहीं कह सकते कि ‘हमसे पानी भी साझा करो और हम आतंकवाद भी करते रहेंगे.’ ये दोनों बातें साथ नहीं चल सकतीं. गौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान के रिश्ते अप्रैल 2025 में उस वक्त और बिगड़ गए, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में कई पर्यटकों की हत्या कर दी थी.