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पाकिस्तान के क्वेटा में ट्रेन ब्लास्ट से हड़कंप, रेलवे ट्रैक पर विस्फोट से तबाही

 बलोचिस्तान पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को बड़ा विस्फोट हुआ, जिसके बाद एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में कम से कम 7 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए. घटना दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान के क्वेटा शहर में हुई, जो बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है. रिपोर्ट्स के अनुसार धमाका रेलवे ट्रैक पर किया गया था और निशाना उस मालगाड़ी को बनाया गया, जो क्वेटा के कैंटोनमेंट इलाके की तरफ जा रही थी. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि पास खड़ी एक ट्रेन की तीन बोगियां पटरी से उतर गईं, जबकि दो डब्बे पलट गए. रेल ट्रैक के पास खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा और पास के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए. यह हादसा क्वेटा स्टेशन के चमन फाटक के पास हुआ. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के बाद इलाके में फायरिंग की भी आवाज सुनी गई. हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में यह साफ नहीं हो पाया कि फायरिंग किसने की और उसका धमाके से सीधा संबंध था या नहीं सोशल मीडिया में इस घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें देखा जा सकता है कि एक ट्रेन में आग लगी हुई है और धुएं का गुबार ऊपर तक उठ रहा है. आप भी देखें- राहत बचाव के साथ-साथ जांच में जुटीं एजेंसियां स्थिति को देखते हुए अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई, ताकि घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके. बलूचिस्तान के गृह विभाग के विशेष सहायक बाबर यूसुफजई ने पत्रकारों को बताया कि धमाके की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और रेस्क्यू टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं. उन्होंने कहा कि पुलिस फिलहाल विस्फोट की प्रकृति और उसके पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी हुई है. सेना और पुलिस बल मामले की छानबीन कर रहे हैं. हालांकि, अधिकारियों ने हादसे की वजह और धमाके की वजह से हुए जानमाल के नुकसान के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है. क्यों संवेदनशील माना जाता है बलूचिस्तान? घटना के कई घंटे बाद तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी। हालांकि बलूचिस्तान लंबे समय से उग्रवाद और अलगाववादी हिंसा से प्रभावित रहा है. यहां कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जो प्रांत की आजादी की मांग करते रहे हैं. इससे पहले भी पाकिस्तान के इस इलाके में जाफर एक्सप्रेस नाम की ट्रेन को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है. बलूचिस्तान पाकिस्तान का खनिज संपदा से भरपूर इलाका माना जाता है. यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी चीन पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का अहम मार्ग भी है. अरबों डॉलर की इस परियोजना को चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी वजह से इस इलाके में सुरक्षा चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं. सीपीईसी के लिए बातचीत करने चीन में हैं पाक पीएम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों चीन के दौरे पर हैं. अपने भारी-भरकम डेलिगेशन के साथ बीजिंग की यात्रा पर निकले शरीफ चीन के साथ इस कॉरिडोर के दूसरे चरण की फंडिंग की बात करने वाले हैं. हालांकि, सुरक्षा के लिए चुनौती बने इस अशांत क्षेत्र में चीन कितना निवेश करेगा, यह जल्द ही सामने आ जाएगा. हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने यहां का दौरा किया था. उन्होंने इस क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मियों से बात की थी. आए दिन पाकिस्तान आर्मी की ओर से इस जगह पर कंट्रोल करने के लिए ऑपरेशन किए जाते हैं, लेकिन अपनी आजादी के लिए जान को जोखिम में डालने वाले बलोच विद्रोही इसका बखूबी जवाब देते रहे हैं.

पाक सेना का दावा: बलूचिस्तान ऑपरेशन में 216 आतंकवादी ढेर, कई जानें गईं

पेशावर  पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में हुए आतंकी हमलों के जवाब में कई दिनों तक चले अभियान में कम से कम 216 आतंकवादी, 36 नागरिक और 22 जवान मारे गए हैं। सेना ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा 'इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस' (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा कि उसने 26 जनवरी को शुरू किया गया अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि विश्वसनीय और खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकवादियों की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद पंजगुर और हरनाई जिले के बाहरी इलाकों में अभियान शुरू किए गए। इसने बताया कि कई दिन चले अभियान में 216 आतंकवादियों को मार गिराया गया।  आईएसपीआर ने बताया कि अभियान के दौरान महिलाओं और बच्चों सहित 36 आम नागरिक तथा सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 22 कर्मी मारे गए। भारत ने बलूचिस्तान में शांति भंग करने की कोशिशों में उसकी संलिप्तता के पाकिस्तान के आरोपों को लगातार सिरे से खारिज किया है और कहा है कि यह इस्लामाबाद की अपनी ''आंतरिक विफलताओं'' से ध्यान भटकाने की रणनीति का हिस्सा है।

पाकिस्तान में बड़ा सुरक्षा संकट! बलूचिस्तान में BLA का हमला, फेज-2 में 200 सैनिक ढेर करने का दावा

इस्लामबाद  बलूच विद्रोही संगठन Balochistan Liberation Army (बीएलए) ने दावा किया है कि उसका ऑपरेशन हेरोफ फेज-2 बलूचिस्तान के कई जिलों में लगातार जारी है। संगठन के मुताबिक, इस अभियान को शुरू हुए 40 घंटे से अधिक हो चुके हैं और इस दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच की ओर से जारी बयानों में कहा गया है कि खारान, मस्तुंग, टुम्प और पसनी जैसे इलाकों में ऑपरेशन पूरे किए जा चुके हैं। संगठन ने यह भी दावा किया कि उसके लड़ाके क्वेटा और नोशकी के कुछ हिस्सों में मौजूद रहे और वहां से पाकिस्तानी सैन्य दबाव को पीछे हटाया गया। 200 से अधिक पाक जवानों को मारने का दावा बीएलए का कहना है कि पाकिस्तान सेना, पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स के 200 से ज्यादा जवान मारे गए हैं और कम से कम 17 लोगों को पकड़ा गया है। संगठन ने इन आंकड़ों को शुरुआती आकलन बताया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के अनुसार, हिंसा में 17 कानून प्रवर्तन कर्मी और 31 नागरिकों की मौत हुई है। वहीं बीएलए ने चेतावनी दी है कि सेना का साथ देने वाले स्थानीय अधिकारी और पुलिसकर्मी उसके निशाने पर होंगे। दोनों पक्षों को नुकसान पाकिस्तान सेना के अनुसार, शनिवार को 92 और शुक्रवार को 41 अलगाववादी मारे गए। वहीं बीएलए ने भी स्वीकार किया है कि ऑपरेशन के दौरान उसके 18 लड़ाके मारे गए, जिनमें मजीद ब्रिगेड, फतेह स्क्वाड और STOS यूनिट के सदस्य शामिल हैं। संगठन ने यह भी माना कि हमलों में एक महिला हमलावर की भूमिका रही।  

मीर यार बलूच ने जयशंकर को चेतावनी दी, ‘बलूचिस्तान में चीन की सेना की घुसपैठ हो सकती है’

नई दिल्ली बलूचिस्तान के एक नेता ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है. इस चिट्ठी में बलूच नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन आने वाले महीनों में बलूचिस्तान में सैन्य बल तैनात कर सकता है, जिससे न केवल इस क्षेत्र में बल्कि भारत के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा होगा.  मीर यार बलूच ने जयशंकर को संबोधित करते हुए एक जनवरी 2026 को लिखे इस पत्र में खुद को बलूचिस्तान का प्रतिनिधि बताते हुए आगाह किया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन वहां अपने सैनिक तैनात कर सकता है. उन्होंने ऐसे किसी भी कदम को भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए खतरा बताया. पत्र में कहा गया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और उन्हें पुराने तौर-तरीकों के अनुसार अनदेखा किया जाता रहा, तो यह पूरी तरह संभव है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर दे. उन्होंने कहा कि छह करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान—दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी. उन्होंने  चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच रणनीतिक गठजोड़ अब CPEC के उस चरण में पहुंच चुका है, जिसे उन्होंने इसका अंतिम चरण बताया. उनके अनुसार, इससे हालात और अधिक खतरनाक हो गए हैं. उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच ठोस और पारस्परिक सहयोग की मांग करते हुए कहा कि दोनों को जिन खतरों का सामना करना पड़ रहा है, वे वास्तविक और तत्काल हैं. मीर यार बलूच ने भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थलों का हवाला देते हुए इन्हें साझा विरासत का प्रतीक बताया. इस चिट्ठी में उन्होंने मोदी सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाइयों की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि इस अभियान में किस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के ठिकानों को निशाना बनाया गया और यह पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति असाधारण साहस और दृढ़ प्रतिबद्धता का उदाहरण है. आखिरी में मीर यार बलूच ने हमारे दो महान राष्ट्रों के बीच और अधिक मजबूत सहयोग की उम्मीद जताई.

लश्कर-ए-तैयबा और ISIS-K का बलूचिस्तान में खतरनाक मेल, नई तस्वीरों ने उजागर किया सच

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की सेना और आईएसआई लंबे समय से आतंकी गुटों को हथियार बनाकर क्षेत्रीय खेल खेल रही है. अब बलूचिस्तान में एक नया खतरा उभरा है – लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (आईएसके) का गठबंधन. आईएसआई की मदद से ये दोनों आतंकी संगठन मिलकर बलूच विद्रोहियों और अफगान तालिबान के कुछ गुटों पर हमला कर रहे हैं. आईएसके की मैगजीन 'यलगार' में भारत के कश्मीर में हमलों की योजना का जिक्र भी है. हाल ही में आईएसके के समन्वयक मीर शफीक मेंगल की एक फोटो सामने आई, जिसमें वे लश्कर के वरिष्ठ कमांडर राणा मोहम्मद अशफाक को पिस्तौल दे रहे हैं. यह फोटो पाकिस्तान की आतंक प्रायोजित गतिविधियों को बेनकाब करती है.  हाल ही में लीक हुई फोटो में आईएसके के बलूचिस्तान समन्वयक मीर शफीक मेंगल लश्कर के नजीम-ए-आला (मुख्य कमांडर) राणा मोहम्मद अशफाक को पिस्तौल भेंट कर रहे हैं. यह तस्वीर आईएसआई की सीधी संरक्षण वाली साजिश को दिखाती है. राणा अशफाक लश्कर को पाकिस्तान भर में फैला रहा है – नए मर्कज (ट्रेनिंग सेंटर) खोल रहा है. दूसरे आतंकी गुटों से संपर्क बढ़ा रहा है.  मीर शफीक मेंगल पूर्व बलूचिस्तान के केयरटेकर मुख्यमंत्री नासिर मेंगल का बेटा है. वो आईएसआई का पुराना एजेंट है. 2010 से वो एक निजी किलर स्क्वॉड चला रहा है, जो बलूच राष्ट्रवादियों को मारता है. 2015 से वो आईएसके के लिए सुरक्षित घर, फंडिंग और हथियार मुहैया करा रहा है. पाकिस्तान की 2015 की जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) रिपोर्ट में भी उसका नाम आया है. आईएसके के कैंप: आईएसआई की फैक्ट्री 2018 तक आईएसआई ने आईएसके को फंडिंग और लॉजिस्टिक्स देकर बलूचिस्तान में दो मुख्य कैंप बनवाए – मस्तुंग और खुजदार जिले में. मेंगल इन कैंपों का इंचार्ज था. मस्तुंग कैंप बलूच विद्रोहियों पर हमलों के लिए, खुजदार अफगानिस्तान में क्रॉस-बॉर्डर मिशनों के लिए. आईएसआई के बीच से हथियार और पैसे आते थे. 2023 में अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में आया, तो आईएसआई ने आईएसके को नया रूप दिया. मस्तुंग कैंप बलूचों पर, खुजदार अफगानिस्तान पर फोकस. मेंगल का किलर स्क्वॉड आईएसआई के आदेश पर बलूच विद्रोहियों को मारता रहा. मेंगल की राजनीतिक पहुंच मजबूत है – 2023 की एक फोटो में वे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ दिखे. मार्च 2025 का हमला: गठबंधन का जन्म मार्च 2025 में बलूच लड़ाकों ने मस्तुंग कैंप पर बड़ा हमला किया, 30 आतंकी मारे गए. आईएसआई ने जवाब में लश्कर को बुलाया. जून 2025 में राणा अशफाक बलूचिस्तान पहुंचे. लश्कर के डिप्टी सैफुल्लाह कसूरी ने 'जिरगा' (बैठक) बुलाई, जिसमें बलूच अलगाववादियों के खिलाफ जिहाद की कसम खाई. मेंगल और अशफाक की फोटो इस गठबंधन की पुष्टि करती है. विश्लेषकों का कहना है कि आईएसआई बलूच विद्रोहियों और अफगान तालिबान के उन गुटों पर हमला करवाना चाहता है, जो इस्लामाबाद के कंट्रोल में नहीं हैं. यह प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) का हिस्सा है. लश्कर की पुरानी जड़ें बलूचिस्तान में लश्कर बलूचिस्तान में नया नहीं. क्वेट्टा में 'मर्कज ताकवा' कैंप है, जिसकी कमान अफगान युद्ध के वेटरन मियां सकीब हुसैन के पास है। 2002-2009 में लश्कर ने यहां ट्रेनिंग कैंप चलाया। 2006 में इंडियन मुजाहिदीन के सह-संस्थापक यासीन भटकल को यहीं हथियार ट्रेनिंग मिली. अब लगता है कि लश्कर आईएसके के साथ मिलकर बलूच विद्रोहियों पर हमले करेगा, जैसे अफगान जिहाद में अल-कायदा के साथ किया था. आईएसआई की निगरानी में यह गठबंधन पाकिस्तान के आतंक तंत्र को बदल रहा है – अलग विचारधारा वाले गुट एक हो रहे हैं, दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैलाने के लिए. क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा यह गठबंधन अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और कश्मीर के लिए बड़ा खतरा है. पाकिस्तान आईएसके को 'दाएश' कहकर दुनिया को बेवकूफ बनाता है, लेकिन खुद इस्तेमाल कर रहा है. आईएसआई की यह साजिश 'प्लॉजिबल डिनायबिलिटी' (इनकार करने लायक) के तहत चल रही है. भारत और अफगानिस्तान को सतर्क रहना होगा.