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लश्कर के नंबर 2 आतंकी ने पाकिस्तान के स्कूल में भाषण देकर करवाई थू-थू

इस्लामाबाद. लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह पाकिस्तानी सेना के साथ अपने संगठन के गहरे संबंधों को खुलासा कर रहा है। कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने सैनिकों की अंतिम यात्रा में जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए आमंत्रित करती है। यह वीडियो किस समय का है, तारीख अभी मालूम नहीं चली। इसमें वह स्कूल के बच्चों को भाषण देता नजर आ रहा है। हालांकि, खुफिया स्रोतों ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि कर दी है। सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया, 'पाकिस्तान की सेना मुझे जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए बुलाती है। क्या तुम्हें पता है कि भारत भी मुझसे डरता है?' यह खुलासा पाकिस्तान की ओर से राज्य प्रायोजित आतंकवाद के भारत के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों को मजबूती देता है। यह घटना किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है कि एक आतंकी संगठन का दूसरा सबसे बड़ा नेता बच्चों के स्कूल में जाकर युवा दिमागों को प्रभावित करे। पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लश्कर ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर काम किया, जैसा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भी देखा गया था। आतंक का निर्यात करने में जुटा पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद पाकिस्तान समर्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर में नए हमलों की तैयारी की थी, जिसे नई दिल्ली ने गंभीर चेतावनी करार दिया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह बताया गया है। ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुआ था, जो आतंकी ढांचे को नष्ट करने का भारतीय अभियान था। अगर इसी तरह पाकिस्तान की ओर से आतंक का निर्यात जारी रहा तो इसकी नई फेज शुरू हो सकती है। यह भारत ही नहीं, दुनिया भर के लिए चिंता की बात है। ताजा वीडियो से पाकिस्तान की थू-थू हो रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसके खिलाफ सख्त ऐक्शन लेना होगा।

लश्कर-ए-तैयबा और ISIS-K का बलूचिस्तान में खतरनाक मेल, नई तस्वीरों ने उजागर किया सच

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की सेना और आईएसआई लंबे समय से आतंकी गुटों को हथियार बनाकर क्षेत्रीय खेल खेल रही है. अब बलूचिस्तान में एक नया खतरा उभरा है – लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (आईएसके) का गठबंधन. आईएसआई की मदद से ये दोनों आतंकी संगठन मिलकर बलूच विद्रोहियों और अफगान तालिबान के कुछ गुटों पर हमला कर रहे हैं. आईएसके की मैगजीन 'यलगार' में भारत के कश्मीर में हमलों की योजना का जिक्र भी है. हाल ही में आईएसके के समन्वयक मीर शफीक मेंगल की एक फोटो सामने आई, जिसमें वे लश्कर के वरिष्ठ कमांडर राणा मोहम्मद अशफाक को पिस्तौल दे रहे हैं. यह फोटो पाकिस्तान की आतंक प्रायोजित गतिविधियों को बेनकाब करती है.  हाल ही में लीक हुई फोटो में आईएसके के बलूचिस्तान समन्वयक मीर शफीक मेंगल लश्कर के नजीम-ए-आला (मुख्य कमांडर) राणा मोहम्मद अशफाक को पिस्तौल भेंट कर रहे हैं. यह तस्वीर आईएसआई की सीधी संरक्षण वाली साजिश को दिखाती है. राणा अशफाक लश्कर को पाकिस्तान भर में फैला रहा है – नए मर्कज (ट्रेनिंग सेंटर) खोल रहा है. दूसरे आतंकी गुटों से संपर्क बढ़ा रहा है.  मीर शफीक मेंगल पूर्व बलूचिस्तान के केयरटेकर मुख्यमंत्री नासिर मेंगल का बेटा है. वो आईएसआई का पुराना एजेंट है. 2010 से वो एक निजी किलर स्क्वॉड चला रहा है, जो बलूच राष्ट्रवादियों को मारता है. 2015 से वो आईएसके के लिए सुरक्षित घर, फंडिंग और हथियार मुहैया करा रहा है. पाकिस्तान की 2015 की जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) रिपोर्ट में भी उसका नाम आया है. आईएसके के कैंप: आईएसआई की फैक्ट्री 2018 तक आईएसआई ने आईएसके को फंडिंग और लॉजिस्टिक्स देकर बलूचिस्तान में दो मुख्य कैंप बनवाए – मस्तुंग और खुजदार जिले में. मेंगल इन कैंपों का इंचार्ज था. मस्तुंग कैंप बलूच विद्रोहियों पर हमलों के लिए, खुजदार अफगानिस्तान में क्रॉस-बॉर्डर मिशनों के लिए. आईएसआई के बीच से हथियार और पैसे आते थे. 2023 में अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में आया, तो आईएसआई ने आईएसके को नया रूप दिया. मस्तुंग कैंप बलूचों पर, खुजदार अफगानिस्तान पर फोकस. मेंगल का किलर स्क्वॉड आईएसआई के आदेश पर बलूच विद्रोहियों को मारता रहा. मेंगल की राजनीतिक पहुंच मजबूत है – 2023 की एक फोटो में वे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ दिखे. मार्च 2025 का हमला: गठबंधन का जन्म मार्च 2025 में बलूच लड़ाकों ने मस्तुंग कैंप पर बड़ा हमला किया, 30 आतंकी मारे गए. आईएसआई ने जवाब में लश्कर को बुलाया. जून 2025 में राणा अशफाक बलूचिस्तान पहुंचे. लश्कर के डिप्टी सैफुल्लाह कसूरी ने 'जिरगा' (बैठक) बुलाई, जिसमें बलूच अलगाववादियों के खिलाफ जिहाद की कसम खाई. मेंगल और अशफाक की फोटो इस गठबंधन की पुष्टि करती है. विश्लेषकों का कहना है कि आईएसआई बलूच विद्रोहियों और अफगान तालिबान के उन गुटों पर हमला करवाना चाहता है, जो इस्लामाबाद के कंट्रोल में नहीं हैं. यह प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) का हिस्सा है. लश्कर की पुरानी जड़ें बलूचिस्तान में लश्कर बलूचिस्तान में नया नहीं. क्वेट्टा में 'मर्कज ताकवा' कैंप है, जिसकी कमान अफगान युद्ध के वेटरन मियां सकीब हुसैन के पास है। 2002-2009 में लश्कर ने यहां ट्रेनिंग कैंप चलाया। 2006 में इंडियन मुजाहिदीन के सह-संस्थापक यासीन भटकल को यहीं हथियार ट्रेनिंग मिली. अब लगता है कि लश्कर आईएसके के साथ मिलकर बलूच विद्रोहियों पर हमले करेगा, जैसे अफगान जिहाद में अल-कायदा के साथ किया था. आईएसआई की निगरानी में यह गठबंधन पाकिस्तान के आतंक तंत्र को बदल रहा है – अलग विचारधारा वाले गुट एक हो रहे हैं, दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैलाने के लिए. क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा यह गठबंधन अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और कश्मीर के लिए बड़ा खतरा है. पाकिस्तान आईएसके को 'दाएश' कहकर दुनिया को बेवकूफ बनाता है, लेकिन खुद इस्तेमाल कर रहा है. आईएसआई की यह साजिश 'प्लॉजिबल डिनायबिलिटी' (इनकार करने लायक) के तहत चल रही है. भारत और अफगानिस्तान को सतर्क रहना होगा. 

ऑपरेशन सिंदूर से घबराया पाकिस्तान, लश्कर का ट्रेनिंग कैंप अफगान सीमा पर पहुंचाया

खैबर पख्तूनख्वा  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का नया ट्रेनिंग सेंटर बन रहा है. यह खबर पूरे इलाके की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. यह सेंटर आतंकवाद को बढ़ावा दे सकता है. नया ट्रेनिंग सेंटर: मरकज जिहाद-ए-अकसा यह सेंटर लोअर डिर जिले के कुम्बन मैदान इलाके में बनाया जा रहा है. यह अफगान सीमा से करीब 47 किलोमीटर दूर है. 4643 वर्ग फुट के प्लॉट पर यह बन रहा है, जो LeT के हाल ही में बने जामिया अहले सुन्नाह मस्जिद के बगल में है.  निर्माण जुलाई 2025 में शुरू हुआ, जो ऑपरेशन सिंदूर के दो महीने बाद था. यह दिसंबर 2025 तक पूरा हो जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर भारत की तरफ से था, जिसमें LeT के कई ठिकाने तबाह हो गए थे. मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य     ट्रेनिंग प्रोग्राम: यहां दो मुख्य कोर्स चलेंगे – दौरा-ए-खास और दौरा-ए-लश्कर. ये आतंकियों को हथियार चलाना, हमले करना और जिहाद की ट्रेनिंग देंगे.     पुराने सेंटर की जगह: यह LeT के जान-ए-फिदाई फिदायीन यूनिट की जगह लेगा. यह यूनिट पहले भींबर-बरनाला के मरकज अहले हदीस में था, जो ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने नष्ट कर दिया था.     भर्ती और कट्टरवाद: यहां नए लोगों की भर्ती होगी, उन्हें कट्टर बनाया जाएगा. बड़े ग्रुप में ट्रेनिंग दी जाएगी. नेतृत्व और संचालन     कमांड: नसर जावेद को कमान सौंपी गई है. वह 2006 के हैदराबाद बम धमाके का सह-मास्टरमाइंड था. 2004 से 2015 तक वह PoK के दुलाई कैंप चला चुका है.     जिहाद की शिक्षा: मुहम्मद यासिन (उर्फ बिलाल भाई) जिहाद की धार्मिक शिक्षा देगा.     हथियार ट्रेनिंग: अनस उल्लाह खान हथियारों की ऑपरेशनल ट्रेनिंग संभालेगा. उसने 2016 में LeT के गढ़ी हबीबुल्लाह कैंप में ट्रेनिंग ली थी. रणनीतिक महत्व     स्थान बदलना: LeT ने PoK और पंजाब के पुराने ठिकानों को छोड़कर खैबर पख्तूनख्वा में शिफ्ट किया है. इसका मकसद भविष्य में भारतीय हमलों से बचना है.     दूसरे ग्रुप्स से तालमेल: यह सेंटर हिजबुल मुजाहिदीन के HM-313 कैंप से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर है. इससे दोनों ग्रुप्स के बीच समन्वय या रणनीतिक सहयोग की आशंका है.     पाकिस्तानी सेना की भूमिका: जून 2025 में पाकिस्तानी सेना ने क्लीनअप ड्राइव चलाई, जिसमें 2 दर्जन से ज्यादा TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के सदस्य मारे गए. इससे इलाके को LeT के लिए साफ कर दिया गया लगता है. इलाके की सुरक्षा चिंताएं     आतंकी गतिविधियां: यह इलाका हमेशा से भारत-विरोधी आतंकवाद का केंद्र रहा है. यहां अल बद्र और TTP जैसे ग्रुप्स सक्रिय हैं.     नागरिकों की हानि: जून 2025 से पाकिस्तानी सेना और एयर फोर्स के हवाई हमलों में 40 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं. इससे काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं.     पाकिस्तान की रणनीति: पाकिस्तान अच्छे आतंकवाद को बढ़ावा देता है और बुरे आतंकवाद को खत्म करता है. यह बात मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर ने खुद स्वीकार की है. इससे पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता पर शक होता है. यह नया सेंटर भारत और पूरे क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है. LeT जैसे ग्रुप्स की गतिविधियां बढ़ने से शांति भंग हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर नजर रखनी चाहिए. भारत को अपनी सुरक्षा मजबूत करनी होगी ताकि ऐसे हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके.