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PAK सेना का सीमा पार हमला, अफगानिस्तान में 11 मासूम बच्चों सहित 13 की जान गई

काबुल  अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर गहरा गया है. बीती रात पाकिस्तानी सेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया. पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में स्थित आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है।  इस हवाई हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिक हताहत हुए हैं. अफगान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, पाकिस्तानी हमलावर सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुलेआम उल्लंघन किया।  जबीउल्लाह ने आगे बताया कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के तीन प्रमुख प्रांतों- कुनार, खोस्त और पक्तिका में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. इन इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के घरों पर अंधाधुंध बमबारी की गई, जिससे कई घर पूरी तरह तबाह हो गए।  हमले में बच्चों-महिलाओं समेत 13 की मौत इस हमले में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. बमबारी में कुल 13 लोग मारे गए हैं, जिन्हें अफगान प्रशासन ने शहीद घोषित किया है. मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या मासूम बच्चों की है. इस हमले में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई. इसके अलावा हमले में 14 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।  घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कइयों की हालत नाजुक बनी हुई है. सोशल मीडिया पर इस हमले के बाद की कुछ दर्दनाक तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें पीड़ित बच्चों की स्थिति देखी जा सकती है।  अफगानिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति इस हमले के बाद अफगान सरकार का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अपने बयान में इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कहा, 'हम इस अमानवीय अपराध और हमले की कड़े से कड़े शब्दों में पुरजोर निंदा करते हैं.' अफगानिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और आम नागरिकों के खिलाफ एक क्रूर अपराध बताया है।  अफगानिस्तान के पूर्व प्रेसिडेंट हामिद करजई ने इस हमले की निंदा की है. उन्होंने शहीदों के परिवारों के साथ गहरा दुख और एकजुटता दिखाते हुए, एक बार फिर कहा कि पाकिस्तान इस इलाके में अपनी गलत नीतियों और दुश्मनी भरी कार्रवाइयों के नतीजों से जूझ रहा है. उसे ये समझना चाहिए कि वो उन नीतियों पर कायम रहकर और उन्हें आगे बढ़ाकर अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगा।  करजई के मुताबिक पाकिस्तान की भलाई अफगानिस्तान के प्रति युद्ध और तबाही की अपनी नीति को छोड़ने और इसके बजाय अच्छे पड़ोसी और सभ्य रिश्ते चुनने में है। 

पाक सेना का दावा: बलूचिस्तान ऑपरेशन में 216 आतंकवादी ढेर, कई जानें गईं

पेशावर  पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में हुए आतंकी हमलों के जवाब में कई दिनों तक चले अभियान में कम से कम 216 आतंकवादी, 36 नागरिक और 22 जवान मारे गए हैं। सेना ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा 'इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस' (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा कि उसने 26 जनवरी को शुरू किया गया अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि विश्वसनीय और खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकवादियों की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद पंजगुर और हरनाई जिले के बाहरी इलाकों में अभियान शुरू किए गए। इसने बताया कि कई दिन चले अभियान में 216 आतंकवादियों को मार गिराया गया।  आईएसपीआर ने बताया कि अभियान के दौरान महिलाओं और बच्चों सहित 36 आम नागरिक तथा सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 22 कर्मी मारे गए। भारत ने बलूचिस्तान में शांति भंग करने की कोशिशों में उसकी संलिप्तता के पाकिस्तान के आरोपों को लगातार सिरे से खारिज किया है और कहा है कि यह इस्लामाबाद की अपनी ''आंतरिक विफलताओं'' से ध्यान भटकाने की रणनीति का हिस्सा है।

BLA के हमलों से डगमगाया पाक सेना का भरोसा, क्या मुनीर की आर्मी हालात संभाल पाएगी?

लाहौर  बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां सालों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है. बलूच लोग खुद को पाकिस्तानी सरकार से अलग मानते हैं. अपने संसाधनों पर ज्यादा हक मांगते हैं. इस आंदोलन की मुख्य ताकत है बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), जो पाक सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रही है. बीएलए को पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है, लेकिन बलूच इसे आजादी की लड़ाई बताते हैं.  बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) क्या है? बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक बलूच राष्ट्रवादी सशस्त्र संगठन है, जो बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करने के लिए लड़ रहा है. बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला और अविकसित प्रांत है, प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, खनिज और तटीय संपत्तियों से समृद्ध है. BLA और स्थानीय लोग दावा करते हैं कि पाकिस्तान सरकार इन संसाधनों का शोषण करती है, जिसका फायदा स्थानीय बलूच लोगों को नहीं मिलता. BLA का कहना है कि बलूचों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित किया जा रहा है. वे इसके खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं. पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने BLA को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जबकि BLA खुद को बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाला संगठन मानता है. बलूचों के पास कितने लड़ाके हैं? बलूच अलगाववादियों की कुल संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि ये संगठन गुप्त रूप से काम करती है. पहाड़ी इलाकों में छिपे रहते हैं. बलूचिस्तान में कई समूह सक्रिय हैं, जैसे बीएलए, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF), बलूच राष्ट्रीय सेना (BNA) और यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA). इनमें से बीएलए सबसे बड़ा और सक्रिय है. बीएलए के लड़ाकों की अनुमानित संख्या: 2020 में बीएलए के करीब 600 सक्रिय लड़ाके बताए जाते थे. लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3000 हो गई है. बीएलए के कुल सदस्य कई हजार हैं, जिसमें लड़ाके, समर्थक और भर्ती करने वाले लोग शामिल हैं. ऑपरेशन हेरोफ में 3000 से ज्यादा बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं.  अन्य बलूच समूहों के लड़ाके: बीएलएफ ने 2025 में दावा किया कि उसके 42 लड़ाके मारे गए, लेकिन कुल संख्या का अनुमान नहीं है. जेयश अल-अदल जैसे अन्य समूहों के 500-600 लड़ाके हैं. सभी बलूच अलगाववादी समूहों के लड़ाकों की संख्या 5000 से 10000 के बीच हो सकती है, लेकिन यह बदलती रहती है क्योंकि भर्ती और नुकसान दोनों होते हैं. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने 2025-2026 में 100 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया है.  सही संख्या ज्यादा या कम हो सकती है क्योंकि ये छिपकर काम करते हैं. बलूच युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए भर्ती किया जाता है, जहां वे राष्ट्रवाद और पाकिस्तान सरकार की ज्यादतियों की कहानियां सुनाते हैं. BLA की चोट के बाद पाकिस्तानियों का उठ गया भरोसा  पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तानी सेना के बीच जारी हिंसक टकराव के बीच अब देश के भीतर से ही सेना और सरकार की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. पाकिस्तानी पत्रकार ओसामा बिन जावेद ने अपने लेख में साफ कहा है कि पाकिस्तान की सेना अकेले बलूचिस्तान के लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर सकती. पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान के कई इलाकों में BLA के कोऑर्डिनेटेड हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए. पाकिस्तानी सेना के मुताबिक इन झड़पों में करीब 200 लोग मारे गए, जिनमें 31 आम नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और 145 BLA लड़ाके शामिल हैं. इनमें से 100 से ज्यादा लड़ाके सिर्फ एक दिन में मारे जाने का दावा किया गया. हालांकि, सेना ने BLA के उस दावे को खारिज किया है जिसमें 84 सुरक्षाकर्मियों की मौत की बात कही गई थी. ओसामा बिन जावेद लिखते हैं कि बलूचिस्तान की पहाड़ियों में लड़ी गई यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही नाराजगी, राजनीतिक भेदभाव और आर्थिक अन्याय की कहानी है. उन्होंने किसी सूत्र के हवाले से कहा है, "एक मिलिट्री एक मिलिटेंट को खत्म कर सकती है, लेकिन किसी शिकायत को खत्म नहीं कर सकती." BLA पाकिस्तान सरकार के लिए आतंकी नेटवर्क पाकिस्तानी पत्रकार का कहना है कि सरकार जहां BLA को सिर्फ एक आतंकी नेटवर्क के तौर पर देखती है, वहीं बलूच समाज के कई लोग इन्हें अपने बेटे और भाई मानते हैं जिन्होंने हथियार उठा लिए हैं. पत्रकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि हालिया हिंसा में आम लोगों की मौत इस विद्रोह की सबसे दुखद सच्चाई को उजागर करती है, क्योंकि यह लड़ाई उन्हीं लोगों को नुकसान पहुंचा रही है जिनके नाम पर इसे लड़ा जा रहा है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार की उस रणनीति की भी आलोचना की, जिसमें हर हमले के पीछे "विदेशी साजिश" और "भारत के उकसावे" की बात कही जाती है. ओसामा के मुताबिक, इस नैरेटिव से असली मुद्दे राजनीतिक हाशिए पर डालना, गरीबी और संसाधनों की लूट दब जाते हैं. चाय की दुकानों पर होती है गरीबी की चर्चा लेख में यह भी कहा गया है कि बलूचिस्तान जैसे खनिज संपन्न प्रांत में आज भी गरीबी क्यों है, यह सवाल आम लोग चाय की दुकानों पर फुसफुसाकर पूछते हैं. ग्वादर पोर्ट और 46 अरब डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को भी कई स्थानीय लोग विकास का वरदान नहीं, बल्कि इस्लामाबाद और बीजिंग के फायदे का सौदा मानते हैं. पाकिस्तानी सेना के खिलाफ BLA की रणनीति क्या है? बीएलए पाकिस्तानी सेना से सीधे टकराव से बचती है क्योंकि सेना की ताकत ज्यादा है. यह एसिमेट्रिक वॉरफेयर की रणनीति अपनाती है, जिसमें छोटे-छोटे हमले करके दुश्मन को थकाया जाता है. यह रणनीति अफगानिस्तान में तालिबान की तरह है, जहां हिट-एंड-रन का इस्तेमाल होता है. बीएलए की रणनीति समय के साथ विकसित हुई है.  गुरिल्ला युद्ध की मुख्य रणनीतियां हिट-एंड-रन हमले और घात: बीएलए लड़ाके पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर सेना की चौकियों, गश्ती दलों और काफिलों पर अचानक हमला करते हैं. वे IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) यानी घरेलू बम, रॉकेट और छोटे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं. फिर जल्दी भाग जाते हैं ताकि सेना जवाब न दे सके. आत्मघाती हमले: मजीद ब्रिगेड आत्मघाती बम हमले करती है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं. ये हमले सेना के कैंपों, चेकपोस्टों और महत्वपूर्ण … Read more

PAK आर्मी पर भारी दबाव: बलूचिस्तान में 12 शहरों में हमले, कई थानों पर बागियों का कब्जा

क्वेटा पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलोच विद्रोहियों ने कोहराम मचा दिया है. बलोच लिब्रेशन आर्मी ने बलूचिस्तान प्रांत के कई शहरों में एक साथ हमला कर कई थानों और सरकारी भवनों पर कब्जा कर लिया है. शनिवार को को बलूचिस्तान में बलोच विद्रोहियों, विशेष रूप से बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) के जेयंद गुट ने "ऑपरेशन हेरॉफ" के फेज 2 के तहत बड़े पैमाने पर हमले किए हैं. बागी बलोचों ने कई पुलिस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है. बलोच विद्रोहियों के अचानक हमले से बैकफुट पर आई पाकिस्तान फौज को अपने पोस्ट छोड़कर भागना पड़ रहा है. पाकिस्तान के जियो न्यूज के अनुसार इस हमले में अबतक 10 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है, जबकि पाकिस्तान सरकार का दावा है कि 58 आतंकी मारे गए हैं. यह हमले पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, सरकारी सुविधाओं और अन्य टारगेट पर केंद्रित थे. इन हमलों को काफी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि 12 से अधिक स्थानों पर एक साथ रिपोर्ट किए गए हैं.  समाचार एजेंसियों के अनुसार विद्रोहियों ने शनिवार सुबह ही राजधानी क्वेटा में हमले सुबह करीब 6 बजे एक जबरदस्त धमाके के साथ अटैक शुरू किया जिसके बाद दो घंटे तक ज़ोरदार गोलीबारी हुई और कई धमाके भी हुए.  सड़क पर निकले बागी, कई शहरों पर कब्जा बलोच बागियों ने क्वेटा के अलावा पसनी, मस्तंग, नुश्की और ग्वादर जिलों में एक साथ हमले किए हैं. बागी बंदूकों से हमले कर रहे हैं और कई स्थानों पर आत्मघाती हमले कर रहे हैं.  सोशल मीडिया पर स्थानीय पत्रकार इस हमले के बारे में कई दावे कर रहे हैं. एक पत्रकार के अनुसार बलूचिस्तान के कई शहरों में हथियारबंद लोगों ने कई शहरों पर कब्ज़ा कर लिया है. मस्तुंग में विद्रोहियों ने पुलिस स्टेशन और शहर पर कब्जा कर लिया है. 30 से ज़्यादा कैदी फरार हैं.  क्वेटा में हथियारबंद लोगों ने कई इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया है. ग्वादर में हमले की खबर है. कलात में भी झड़पें जारी हैं.  एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर अरब न्यूज़ को बताया कि बागियों ने शहर में घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस और दूसरी कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने उन्हें रोक दिया.  उन्होंने कहा, "बागियों ने सरयाब रोड पर एक पुलिस मोबाइल पर हमला किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए." "पुलिस और दूसरी  एजेंसियों ने क्वेटा शहर में विद्रोहियों से लड़ाई जारी रखे हुए है, अभी भी एक क्लीयरेंस ऑपरेशन चल रहा है.  पाकिस्तान के अखबार डॉन के एक रिपोर्टर के मुताबिक हमले के बाद क्वेटा, सिबी और चमन में मोबाइल फोन सर्विस तो काम कर रही थीं, लेकिन डेटा सर्विस बंद कर दी गई है.  स्वास्थ्य मंत्री बख्त मुहम्मद काकर और स्वास्थ्य सचिव मुजीबुर रहमान के निर्देशों पर पूरे प्रांत के सभी सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी लगा दी गई. द बलूचिस्तान पोस्ट ने यहां हुए हमलों की विस्तार से जानकारी दी है.  दस शहरों में एक साथ हमले द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार बलूच लिबरेशन आर्मी ने शनिवार को अपने कमांडर-इन-चीफ बशीर ज़ेब बलूच का एक वीडियो मैसेज जारी किया है. इसमें उन्होंने बलूच लोगों से 'अपने घरों से बाहर निकलने' और पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ़ सशस्त्र संघर्ष के उस निर्णायक दौर में शामिल होने की अपील की है. इस हमले को उन्होंने निर्णायक दौर बताया है.  उन्होंने यह घोषणा भी की कि "ऑपरेशन हेरोफ़" के दूसरे चरण के तहत बलूचिस्तान के "दस शहरों में एक साथ हमले" शुरू किए गए हैं. वीडियो में बशीर जेब बलूच हथियारबंद लड़ाकों के साथ दिखाई देते हैं और अपना संदेश ब्राहुई और बलूची दोनों भाषाओं में दे रहे हैं.  BLA चीफ ने चेतावनी दी कि अगर लोग आज बाहर नहीं आए और ऑपरेशन हेरोफ़ में हिस्सा ले रहे भाइयों और बहनों के साथ खड़े नहीं हुए, तो इतिहास उनकी हार दर्ज करेगा. उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जान देते हैं और जो लोग जान लेते हैं, वे ही इतिहास लिखते हैं." उन्होंने कहा, "हम चरमपंथी नहीं हैं. लेकिन जब बात हमारी जमीन और हमारे देश की आती है, तो हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. हमने किसी दूसरे देश पर कब्ज़ा नहीं किया है; बल्कि हम पर कब्ज़ा किया गया है. हमारी लड़ाई न्याय के लिए लड़ाई है." 48 घंटे में 70 विद्रोहियों को मारने का दावा  बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के राजनीतिक और मीडिया मामलों के विशेष सलाहकार शाहिद रिंद ने एक्स पर कहा कि पिछले दो दिनों में प्रांत भर में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग जगहों पर 70 से ज़्यादा विद्रोहियों को मार गिराया है.  रेलवे ट्रैक मिली IED, एंटी टैंक माइन और विस्फोटक बरामद पुलिस ने बताया कि बलूचिस्तान के नसीराबाद ज़िले में एक रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिली है. नसीराबाद के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस असदुल्लाह नासिर ने एक बयान में कहा, "रबी पुल के पास रेलवे लाइन पर एक एंटी-टैंक माइन और विस्फोटक सामग्री मिली है." उन्होंने आगे कहा, "पुलिस, FC और स्पेशल ब्रांच ने समय पर कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध IED को निष्क्रिय कर दिया है." SSP नासिर के अनुसार बरामद चीज़ों में आधा किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, पेट्रोल और एक लोहे की रॉड शामिल थी.  हालात तनावपूर्ण स्थानीय लोगों और लोकल सोर्स ने क्वेटा, नुश्की, कलात, मस्तंग, दलबांदिन, खारान, ग्वादर, पसनी, टंप, बुलेदा और धदार में सुरक्षा हालात को बहुत तनावपूर्ण बताया है. यहां भारी गोलीबारी, धमाकों और पुलिस और मिलिट्री ठिकानों पर हमलों की खबरें मिलीं हैं. क्वेटा में रहने वालों ने कई इलाकों में गोलीबारी और धमाकों की सूचना दी, जिसमें बहुत संवेदनशील रेड ज़ोन भी शामिल हैं.  द बलूचिस्तान पोस्ट ने बताया है कि सरयाब रोड पर हथियारबंद लोगों ने एक पुलिस मोबाइल पर हमला किया जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और गाड़ी में आग लगा दी गई.   

पाकिस्तानी सेना पर TTP का हमला तेज, बम धमाके के बाद ताबड़तोड़ फायरिंग, 2 अफसर भी ढेर

इस्लामाबाद पाकिस्तान के अफगानिस्तान सीमा के पास बुधवार को उग्रवादियों ने एक सैन्य काफिले पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें नौ पैरामिलिट्री सैनिक और दो अधिकारी मारे गए. इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी तालिबान ने ली है. पाकिस्तान सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि काफिले पर सड़क किनारे बम लगाए गए थे और उसके बाद काफिले पर गोलीबारी की गई. यह हमला उत्तर-पश्चिमी जिले कुर्रम में हुआ. पाकिस्तानी तालिबान, जिन्हें तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) कहा जाता है, हाल के महीनों में पाकिस्तान के सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों को तेज कर चुके हैं. ये समूह सरकार को उखाड़ फेंककर कड़े इस्लामी शासन की स्थापना चाहता है. अफगानिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आते हैं मिलिटेंट इस्लामाबाद का आरोप है कि तालिबान के मिलिटेंट अफगानिस्तान की सीमापार से अपनी ट्रेनिंग लेते हैं और पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की योजना बनाते हैं. हालांकि, काबुल यह आरोप झूठा मानता है. सुरक्षा स्थिति बिगड़ी, हिंसा में बढ़ोतरी इस्लामाबाद में सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (CRSS) ने सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें पिछले तीन महीनों में पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों और सैन्य कार्रवाई में हुई हताहतों के आंकड़े बताए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन महीनों में कम से कम 901 लोग मारे गए और 599 घायल हुए. यह कुल 329 हिंसक घटनाओं में हुआ, जिसमें आतंकवादी हमले और सेना के ऑपरेशन शामिल थे. यह पिछली तिमाही की तुलना में हिंसा में 46 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है.