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MP में सरकारी बसों का शुभारंभ, 20 से ज्यादा शहर जुड़ेंगे नए साल पर ‘सुगम परिवहन’ सेवा से

भोपाल मध्य प्रदेश में जल्द ही 'सरकारी बस' सड़कों पर एक बार फिर दौड़ते नजर आएंगी। मोहन सरकार जल्द ही 'राज्य परिवहन निगम' की तर्ज पर नए सिरे से बस सेवा प्रारंभ करने वाली है। नए साल में प्रदेश की जनता को यह सौगात मिलने वाली है। बता दें कि इसका नया नाम 'सुगम लोक परिवहन सेवा' होगा जो पीपीपी मॉडल पर संचालित होगी। जानकारी अनुसार प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने 'सुगम लोक परिवहन सेवा' के जरिए एमपी में सरकारी बसों की वापसी करने जा रहे हैं। सेवा चाहू होने के बाद दूरस्थ्य गांव तक तक सस्ती और लग्जरी यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। कैबिनेट में इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार ने इसके लिए 101 करोड़ की अंशपूंजी को बजट को स्वीकृति दी है। बता दें कि वर्तमान में मध्यप्रदेश के 20 शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए गठित SPVs में से 16 कंपनियां कार्यरत हैं, जिन्हें अब संभागीय कंपनियों में मर्ज करने का निर्णय लिया गया है। कंपनियों पर नियंत्रण के लिए 'होल्डिंग कंपनी' का गठन प्रदेश में बसों के परिवहन सेवा और व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा इसके एकीकृत संचालन के लिए 7 कंपनियों पर दारोमदार होगा। इन सातों कंपनियों पर नियंत्रण के लिए स्टेट लेवल पर 'होल्डिंग कंपनी' का गठन किया जाएगा। यह कंपनी कंपनीज एक्ट—2013 के तहत गठित की जाएगी, साथ ही जिला स्तर पर यात्री परिवहन समितियों के गठन को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली है। बस टर्मिनल व अन्य स्ट्रक्चर PPP मॉडल पर होंगे बता दें कि एमपी में सीएम सुगम लोक परिवहन सेवा के तहत बस स्टेंड, टर्मिनल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। बस संचालन और संधारण भी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निजी बस ऑपरेटर्स के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि इन सब पर पूरा नियंत्रण सरकारी कंपनी का रहेगा। 

भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र शेखावत एवं मुख्यमंत्री साय ने किया भूमिपूजन

देश के पर्यटन मानचित्र पर सबसे तेजी से उभरता छत्तीसगढ़ : शेखावत रायपुर, केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत के विकास का ग्रोथ इंजन छत्तीसगढ़ बनता जा रहा है छत्तीसगढ़ इस संकल्प के साथ में हम सब लोग काम करेंगे ऐसा भरोसा और विश्वास आप सबको दिलाते हुए आप सबको बहुत सारी बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सतत आगे बढ़े और छत्तीसगढ़ का पर्यटन विकसित हो छत्तीसगढ़ की संस्कृति सुरक्षित और संरक्षित हो जिससे छत्तीसगढ़ की एक अलग पहचान बने। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपये की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन सम्पन्न किया गया। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव मंदिर परिसर से मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ एवं सरोदा जलाशय तक एक सुव्यवस्थित एवं समग्र पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के निर्माण होने से जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थलों को एक सशक्त पर्यटन श्रृंखला में जोड़ते हुए भोरमदेव को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी। उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर भोरमदेव कॉरिडोर का विकास किया जाएगा।     छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, उपमुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने नववर्ष के अवसर पर कबीरधाम जिले को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के आग्रह पर भोरमदेव से बोड़ला तक सड़क चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण कार्य की भी घोषणा की। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर कॉरिडोर के भूमिपूजन के बाद कल सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, पेयजल, बिजली, डीबीटी के माध्यम से राशि का अंतरण और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में सकारात्मक बदलाव करते हुए अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार प्रदान किया जा रहा है। साथ ही रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में हर्जाने की गारंटी भी इस योजना में शामिल की गई है। उन्होंने इसे ‘मोदी की गारंटी’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों एवं अधिकारियों से आग्रह किया कि 146 करोड़ रुपये की इस परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए, क्योंकि यह कार्य धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है।     कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नागरिक उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि एक हजार साल पुराने बाबा भोरमदेव के मंदिर विकास हेतु आज भूमिपूजन हुआ है जो बहुत ही हर्ष की बात है। सावन के महीने में यहां हजारों की संख्या श्रद्धालु कावड़िये अमरकंटक से माता नर्मदा का जल लेकर बाबा भोरमदेव का जलाभिषेक करते हैं जिनका स्वागत करने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ मैं भी आया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन ने हर वर्ग के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। कवर्धा के जंगलों में वास करने वाले राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के बैगा जैसे प्रदेश की पिछड़ी जनजातियों के लिए शासन द्वारा पीएम जनमन योजना प्रारम्भ की गई है, जिससे अब गांव-गांव तक पक्की सड़कें, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे अनेक योजनाओं का लाभ यहां के लोगों को मिल रहा है। वहीं उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारम्भ किए गए हैं, जिनमें एंबुलेंस के साथ में डॉक्टर एवं नर्स सहित पूरा तकनीकी स्टाफ भी उपलब्ध रहेगा जो घर घर जाकर लोगों का उपचार करेगा। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता से प्रधानमंत्री मोदी ने वादे किए थे जिन्हें पूरा करने का कार्य शासन द्वारा किया जा रहा है। मोदी की गारंटी को काम पूरा होने की गारंटी बताते हुए उन्होंने कहा हमारी सरकार बनते ही 18 लाख आवास से वंचित लोगों को आवास का अधिकार दिलाया, 70 लाख महिलाओं के खाते में हर महीने एक हजार रुपए पहुंच रहे है इसी तरह छत्तीसगढ़ के हजारों लोगों में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का भी लाभ लिया है।     उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चौत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है। पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन ही हमें भोरमदेव कॉरिडोर की स्वीकृति प्राप्त हुई थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने … Read more

इंदौर दूषित पानी मामले में CM मोहन यादव ने लिया बड़ा एक्शन, निगम कमिश्नर को नोटिस, कई अधिकारियों पर कार्रवाई

 इंदौर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से उपजी त्रासदी पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. शुक्रवार सुबह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम ने प्रशासनिक सर्जरी करते हुए कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिराई है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने, अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए हैं.  इसके अलावा, प्रदेश के मुखिया ने इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ति करने के निर्देश भी दिए हैं. इससे पहले मुख्यमंत्री ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से नागरिकों के संक्रमित होने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधित जोनल अधिकारी जोन क्रमांक 4, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री PHE को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड और प्रभारी उपयंत्री PHE को तत्काल प्रभाव से सेवा से बाहर कर दिया था. घटना की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जांच समिति गठित की गई है. मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासन ने प्रभावित इलाके में युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू किया है. क्षेत्र के 40 हजार से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा चुकी है. अब तक कुल 272 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 71 को छुट्टी मिल गई है. वर्तमान में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 32 ICU में हैं. MY अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. मौत के आंकड़ों पर 'सस्पेंस' मुख्यमंत्री और प्रशासन सख्त कदम उठा रहे हैं, वहीं मौतों की संख्या को लेकर असमंजस अभी भी बना हुआ है. प्रशासन ने केवल 4 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 मौतों की जानकारी होने की बात स्वीकार की है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक 6 महीने के बच्चे समेत 14 लोगों की जान जा चुकी है. पाइपलाइन में लीकेज, पानी दूषित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब टेस्ट रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि इलाके में पीने का पानी एक पाइपलाइन में लीकेज के कारण दूषित हो गया था. हालांकि, CMHO ने रिपोर्ट के विस्तृत नतीजे साझा नहीं किए. प्रशासनिक अधिकारी भी इस बारे में साफ जानकारी देने से बच रहे हैं. भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज मिला, जिस जगह पर एक शौचालय बना हुआ हैण् उन्होंने दावा किया कि लीकेज के कारण पानी की सप्लाई दूषित हो गई. पिछले नौ दिनों में भागीरथपुरा में 1400 से ज्यादा लोग उल्टी और डायरिया से प्रभावित हुए हैं.

कांग्रेस का सर्वे: राहुल के दावे पर सवाल, EVM पर जनता का विश्वास मजबूत

बेंगलुरु  कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए एक आधिकारिक सर्वे के नतीजों ने देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता पर चल रही बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। सर्वे के अनुसार, कर्नाटक की जनता का एक बड़ा हिस्सा EVM को सुरक्षित और सटीक मानता है। इन नतीजों के सामने आने के बाद भाजपा ने राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले आरोपों को लेकर कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। इस सर्वे को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अनबुकुमार के माध्यम से कराया गया था। इसमें 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों की राय ली गई। सर्वे में शामिल कुल 83.61% लोगों ने कहा कि वे EVM को भरोसेमंद मानते हैं। 69.39% लोग इस बात से सहमत थे कि EVM सटीक परिणाम देती है, जबकि 14.22% ने इस पर अपनी 'पूर्ण सहमति' जताई। ईवीएम को लेक कलबुर्गी में सबसे ज्यादा भरोसा देखा गया, जहां 94.48 लोग वोटिंग मशीन के पक्ष में थे। मैसूर में 88.59% लोगों ने इसकी विश्वसनीयता पर मुहर लगाई। बेंगलुरु में भी 63.67% लोग इससे सहमत थे। भाजपा का पलटवार सर्वे के नतीजे सार्वजनिक होते ही भाजपा ने इसे कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का विषय बताया। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "सालों से राहुल गांधी देश भर में एक ही कहानी सुना रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है और EVM अविश्वसनीय हैं। लेकिन खुद कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के सर्वे ने एक अलग कहानी बयां की है। यह कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है।" भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाती है और जीतने पर उसी सिस्टम का जश्न मनाती है। उन्होंने इसे सुविधा की राजनीति करार दिया। यह सर्वे ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने का प्रस्ताव दिया है। सरकार का तर्क है कि जनता का EVM से भरोसा कम हो रहा है। भाजपा ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि जब उनका अपना सर्वे जनता का भारी भरोसा दिखा रहा है, तो सरकार राज्य को पीछे की ओर क्यों ले जा रही है? भाजपा के अनुसार, बैलेट पेपर की वापसी चुनाव में हेरफेर और देरी की कोशिश है। क्या है राहुल गांधी का रुख? कांग्रेस नेता राहुल गांधी बीते काफी समय से EVM की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भी उन्होंने 'ब्लैक बॉक्स' और 'वोट चोरी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की थी। हालांकि, उनकी अपनी ही राज्य सरकार के इस सर्वे ने अब कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।

जसदेव सिंह जब्बल बने बिजली निर्माता, पीएम सूर्य घर योजना से मिली ₹1.08 लाख की सब्सिडी, अब जीरो आता है बिजली बिल

बिजली उपभोक्ता से बिजली निर्माता बने जसदेव सिंह जब्बल पीएम सूर्य घर योजना ने बदली जसदेव सिंह की जिंदगी, ₹1.08 लाख की मिली सब्सिडी, अब जीरो आता है बिजली बिल दुर्ग आधुनिक जीवन शैली में बिजली की बढ़ती मांग की वजह से बढ़ते बिजली बिलों से परेशान आम आदमी के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना किसी वरदान से कम नहीं है। इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है श्री जसदेव सिंह जब्बल ने, जिन्होंने न केवल अपने घर को सौर ऊर्जा से रोशन किया है, बल्कि वे अब खुद बिजली निर्माता बन चुके हैं। जसदेव सिंह बताते हैं कि उनके घर में चार किलोवॉट का सोलर पैनल लगे लगभग तीन से चार महीने हो चुके हैं और इसके परिणाम बेहद सुखद हैं। वे कहते हैं, पहले हम बिजली का बिल भरने की चिंता में रहते थे, लेकिन आज हम खुद बिजली बना रहे हैं। मेरे घर की जितनी खपत है, उसे मेरा सोलर प्लांट अच्छी तरह से पूरा कर रहा है। अब मुझे बिजली बिल भरने की जरूरत नहीं पड़ती, जो पैसा पहले बिल में जाता था, वह अब मेरी शुद्ध बचत और एक तरह से अतिरिक्त आय है।   योजना के आर्थिक लाभों पर चर्चा करते हुए श्री जसदेव ने बताया कि उन्हें कुल 01 लाख 08 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई है। इसमें 78,000 रुपये केंद्र सरकार द्वारा और 30,000 रुपये राज्य सरकार द्वारा दिए गए हैं। जसदेव जी ने सरकार की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि सब्सिडी के लिए उन्हें कहीं भटकना नहीं पड़ा। आवेदन के महज एक महीने के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में क्रेडिट हो गई। जसदेव सिंह इस योजना को केवल पैसों की बचत तक सीमित नहीं मानते। उनका मानना है कि यह पर्यावरण को बचाने की एक बड़ी मुहिम है। वे कहते हैं कि जीवाश्म ईंधन सीमित हैं और पर्यावरण के लिए खतरनाक भी। अगर हम आज जागरूक नहीं हुए और रिन्यूएबल सोर्सेस (अक्षय ऊर्जा) को नहीं अपनाया, तो भविष्य मुश्किल भरा होगा। सोलर पैनल लगाकर हम अपनी निर्भरता खत्म कर रहे हैं और कल को सुरक्षित कर रहे हैं। अपनी सफलता से उत्साहित होकर जसदेव सिंह जब्बल अन्य नागरिकों को भी प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार इस योजना में बहुत बड़ा आर्थिक सहयोग दे रही है, इसलिए हर घर को इस योजना का लाभ उठाना चाहिए। यह न केवल हमारी आर्थिक स्थिति के लिए अच्छा है, बल्कि हमारे देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।   छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, दुर्ग क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री संजय खंडेलवाल ने कहा कि हम आज जागरूक होंगे, तो ही हम अपने कल को बचा पाएंगे। सोलर अपनाएं, आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कहा कि श्री जसदेव सिंह ने न केवल अपने घर का बिजली बिल शून्य किया है, बल्कि पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाकर समाज के लिए एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया है।

तमनार हिंसा: महिला आरक्षक को अर्धनग्न कर घसीटा, भीड़ ने दौड़ाया, वीडियो में रोते हुए बोली- भाई छोड़ दो

तमनार  रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में  उद्योग को आबंटित गारे पेलमा सेक्टर वन कोयला खदान के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान हिंसा की एक शर्मनाक घटना सामने आई है. प्रदर्शन के दौरान एक महिला आरक्षक के साथ मारपीट की गई. प्रदर्शनकारियों ने उसे लगभग आधा किलोमीटर तक दौड़ाया और जब वह खेत में गिर गई, तो उसकी वर्दी फाड़ दी गई, जिससे वह अर्धनग्न हो गई.  यह घटना 27 दिसंबर की है, जब आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था. जानकारी के अनुसार,  उद्योग की कोल ब्लाक जनसुनवाई को पहले प्रस्तावित स्थल से दूसरी जगह कराए जाने के बाद भी आंदोलन शांत नहीं हुआ. 12 दिसंबर से चल रहे आंदोलन के बीच 27 दिसंबर को एक सड़क दुर्घटना के बाद विवाद इतना बढ़ा कि पथराव, आगजनी और पुलिस पर सीधा हमला किया गया. मिन्नतें करती रही महिला आरक्षक  तमिनार ब्लॉक में महिला आरक्षक के साथ हुई अमानवीय व्यवहार का वीडियो भी वायरल हो रहा है. करीब 40 सेकंड की इस वीडियो में एक महिला आरक्षक रोती हुई और प्रदर्शनकारियों से मिन्नतें करती हुई दिख रही है. महिला आरक्षक प्रदर्शनकारियों से कह रही है, 'भाई मुझे माफ कर दो, मुझे जाने दो.' वीडियो में प्रदर्शनकारी महिला पुलिस कर्म से पूछते हैं, 'तुम यहां क्या कर रही थी? तुम्हें चप्पल से मारूं? यहां से चली जाओ.' फिर वे उसे अकेला छोड़ देते हैं. इससे पहले महिला आरक्षक को भीड़ ने करीब आधा किलोमीटर तक दौड़ाया और जब वह खेत में गिर गई, तो उसकी वर्दी फाड़-फाड़कर उसे अर्धनग्न कर दिया गया. यह घटना 27 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है. बता दें इस घटना से पहले एक हिंसक झड़प के दौरान एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर को लात मारे जाने का वीडियो भी सामने आया था.  हिंसा का शर्मनाक वीडियो वायरल  सबसे गंभीर और शर्मनाक वीडियो में एक महिला आरक्षक के साथ बर्बरता दिखाई दे रही है. वीडियो में आंदोलनकारी महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ते हुए नजर आ रहे हैं. महिला आरक्षक हाथ जोड़कर रहम की गुहार लगाती दिखाई देती है. करीब 20 सेकंड का यह वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि आंदोलन प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के बाद समाप्त हो गया है और जनसुनवाई निरस्त करने का भरोसा दिया गया है, लेकिन 27 दिसंबर की इस घटना को लेकर पुलिस अधिकारियों की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है. क्या है पूरा मामला? सूत्रों के मुताबिक, तमनार पुलिस स्टेशन में अलग-अलग FIR में 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों पर गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जबकि कुछ को गिरफ्तार भी किया गया है. बता दें कि यह घटना 8 दिसंबर 2025 को धौरभाठा में हुई जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है. JPL कोल माइन सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के लोग 12 दिसंबर से धरना प्रदर्शन कर रहे थे. 27 दिसंबर की सुबह करीब 9:00 बजे लगभग 300 ग्रामीण लिबारा चौक पर इकट्ठा हुए और सड़क पर बैठकर ट्रैफिक जाम कर दिया. हालात बिगड़ता देख पुलिस के बड़े अधिकारी करीब 10:00 बजे मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने ग्रामीणों से बात की और उन्हें लौटने के लिए मनाया. कुछ देर के लिए स्थिति शांत रही, लेकिन बाद में तनाव बड़ गया.   सूत्रों के मुताबिक तमनार थाने में अलग-अलग एफआईआर के तहत सौ से अधिक आंदोलनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं. कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है. अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है इस मामले में बिलासपुर संभाग के आईजी संजीव शुक्ला ने बताया कि दोषियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया जा चुका है. अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है. पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जल्द अन्य आरोपियों को भी पकड़ा जाएगा.

इंदौर में इलाज के दौरान 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत, मरने वालों की संख्या 15 तक पहुंची

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से शुक्रवार को एक और बुजुर्ग महिला की मौत की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही दूषित पानी से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 15 पर पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग महिला का अरविंदो अस्पताल में इलाज चल रहा था। गुरुवार को कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता मरीजों से मिलेंगे और उन्हें नारियल व अन्य जरूरत का सामान भी देंगे, लेकिन दूसरी ओर उन्हीं के समर्थक भागीरथपुरा में रहवासियों को समस्या बताने से भी रोक रहे हैं। मीडिया से बात करने पर उन्हें धमका रहे हैं कि समस्या का निराकरण हमसे चाहते हो या नहीं। गुरुवार को आकाश विजयवर्गीय पार्षद कमल वाघेला के कार्यालय पर पहुंचे। इस दौरान 25 दिसंबर को दूषित पानी के कारण मौत का शिकार हुए संतोष बिगोलिया के स्वजन उनसे मुलाकात करने के लिए पहुंचे। उन्होंने नईदुनिया अखबार की प्रति दिखाते हुए कहा कि हमारे परिवार के सदस्य की मौत दूषित पानी के कारण हुई है, लेकिन कोई मान नहीं रही है। इस पर उन्होंने प्रशासन की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता की मांग की। इसके बाद जब मीडिया मृतक के बेटे शुभम और बहू से चर्चा कर रही थी। 'आपकी समस्या का निराकरण हमसे चाहते हैं या मीडिया से' तभी भाजपा कार्यकर्ता चंदन सिंह बैस वहां आया और परिवार को कहने लगा कि आपकी समस्या का निराकरण हमसे चाहते हो या फिर मीडिया से। इसके अलावा कई ओर परिवार भी है, जिन्हें इसी प्रकार कहा जा रहा है। इससे साफ लगता है कि मामले को दबाने के लिए लोगों को बात करने से रोका जा रहा है। यह मामला चर्चाओं में बना हुआ है। छह माह के अव्यान के माता-पिता ने आर्थिक मदद लेने से इंकार किया भागीरथपुरा में गुरुवार को मंत्री विजयवर्गीय जब मृतकों के स्वजन से मिलने पहुंचे तो उन्हें रहवासियों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। मंत्री के अलावा उनके समर्थक जब आठ मृतकों के स्वजन को आर्थिक मदद के चेक देने पहुंचे तो छह माह के अव्यान के माता-पिता ने मदद लेने से इंकार कर दिया। अव्यान के गमगीन माता-पिता बोले कि हमारा बच्चा दस साल की मन्नत के बाद जन्मा था। अब हमें कोई आर्थिक मदद नहीं चाहिए। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री मृतिका उर्मिला यादव के घर पहुंचे तो उन्होंने सहायता राशि लेने से मना कर दिया और कहा कि नहीं चाहिए हमें कोई राशि। बाद में समझाइश के बाद उन्होंने ले ली। स्वजन ने बताया कि मृतिका के बेटे और बहू दोनों अभी अस्पताल में भर्ती है। वहीं, निधि यादव गोद में बच्चा लेकर पहुंची। उसने कहा कि मेरी 70 साल की सास सात दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी किडनी फेल हो गई है। उनको कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा? अस्पताल वाले स्लिप देकर पैसे मांग रहे हैं। हमारे पेट में दर्द है, फिर भी बच्चे लेकर दौड़ रहे हैं। मंत्री से मिलने गए तो उनके लोगों ने मिलने भी नहीं दिया। महिला को मंत्री से मिलने नहीं दिया।

मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न विभागों को जारी बजट के व्यय को लेकर वित्त विभाग की समीक्षा की

मुख्यमंत्री जी ने वित्त विभाग की समीक्षा की, सभी विभागों को बजट खर्च में तेजी लाने के दिये निर्देश   मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न विभागों को जारी बजट के व्यय को लेकर वित्त विभाग की समीक्षा की   मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिये कि सभी विभाग समय से आवंटन बजट का करें इस्तेमाल, न हो कोई लापरवाही  – बोले, समय से बजट व्यय के लिए हर स्तर पर एक-एक अधिकारी की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय हो – मुख्यमंत्री जी ने वित्त विभाग को निर्देश दिये कि अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की नई कार्ययोजना पर अभी से शुरू कर दें तैयारियां लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्रवार सुबह वित्तीय वर्ष 2025-26 में शासन द्वारा विभिन्न विभागों काे जारी बजट के व्यय काे लेकर वित्त विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में वर्तमान वित्तीय वर्ष में विभागाें के बजट प्राविधान के सापेक्ष शासन द्वारा जारी स्वीकृतियों, विभागाध्यक्ष द्वारा आवंटन, व्यय आदि की अद्धयावधिक प्रगति पर अधिक बजट प्राविधान वाले प्रमुख 20 विभागों का प्रस्तुतिकरण किया गया।  जिन विभागों में बजट व्यय में प्रगति धीमी, वे लाएं तेजी, हर अधिकारी की तय हो जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रमुख 20 विभागों के प्रस्तुतिकरण की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री जी ने सभी प्रमुख विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी विभाग समय से आवंटन बजट का इस्तेमाल करें ताकि परियोजनाएं और योजनाएं समय से पूरी हो सकें और प्रदेशवासी इन योजनाअों लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बजट को समय से खर्च करने के लिए अधिकारी निर्णय लेने का सामथ्र्य विकसित करें। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है, वह इसमें तेजी लाएं। साथ ही बजट को समय से खर्च करने के लिए हर स्तर पर एक-एक अधिकारी की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय हो। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सभी विभाग के अधिकारी तुंरत निर्णय लें। उन्हाेंने कहा कि निर्णय लेने में देरी से समय से बजट व्यय नहीं हो पाता है। ऐसे में निर्णय लेने में तेजी दिखाएं।  विभाग मंत्री, एसीएस और प्रमुख सचिव केंद्र सरकार से बजट जारी करने के लिए दिल्ली जाएं और पैरवी करें मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कुछ विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है। इसमें तेजी लाने के लिए विभागीय मंत्री और अधिकारी आपस में समन्वय बनाकर हर माह बैठक करें। वहीं मुख्यमंत्री जी ने वित्त विभाग को निर्देश दिये कि जिन विभागों के आवंटन बजट के कुछ अंश को अभी तक किंहीं कारणों से जारी नहीं किया गया है, उन विभागों को तत्काल बजट आवंटित करें। उन्होंने सभी प्रमुख 20 विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन विभागों को विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से बजट जारी किया जाता है। इसके लिए विभाग के मंत्री, अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से बजट जारी करने के लिए पैरवी करें। इसके साथ ही केंद्र सरकार को पत्र लिखें और फोन से फालोअप करें। इसको लेकर मुख्य सचिव भी इनोसेटिव लें। मुख्यमंत्री जी ने अपने कार्यालय को निर्देश दिये कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है, उनको चिन्हित करें और उनके विभाग के मंत्रियों को मुख्यमंत्री कार्यालय की आेर से पत्र जारी करें।  अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की नई कार्ययोजना पर अभी से शुरू कर दें तैयारियां मुख्यमंत्री जी ने बैठक में वित्त विभाग को निर्देश दिये कि आगामी अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर अभी से सभी विभागों के साथ बैठक कर बजट मांग की समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि आगामी बजट को विभाग आवंटित करने से पहले उनके पिछले पांच वर्ष के खर्च के आकंलन की समीक्षा करें। उन्होंने निर्देश दिये कि वित्त विभाग नई कार्ययोजना को लेकर अभी से तैयारी शुरू कर दे। वहीं केंद्र सरकार से आगामी बजट आवंटन को लेकर बेहतर समन्वय बनाएं ताकि समय से केंद्र सरकार से बजट मिल सके।

Gig Workers के लिए बड़ी खुशखबरी, Swiggy-Zomato डिलीवरी बॉय को मिलेगा सोशल सिक्योरिटी कवर और सरकारी सुविधाएं

मुंबई  भारत में तेजी से बढ़ती ‘गिग इकोनॉमी’ को अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. नए सोशल सिक्योरिटी कोड में जोमैटो, स्विगी, और ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर आदि को भी सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में लाया गया है. इसके लिए सरकार ने ड्रॉफ्ट नियम जारी कर दिए हैं. इन ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा का लाभ पाने के लिए किसी एक ही कंपनी (एग्रीगेटर) से जुड़े वर्कर को एक साल में कम से कम 90 दिन उसी कंपनी के साथ काम करना अनिवार्य होगा. वहीं, जो लोग एक से ज्यादा प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन तय की गई है. अगर कोई व्‍यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करते हैं, तो उसे तीन दिन गिना जाएगा, जिससे 120 दिन का कोटा पूरा करना आसान हो जाएगा. नए साल के मौके पर गिग वर्कर्स की हड़ताल के चलते जहां स्विगी और जोमैटो ने पीक ऑवर्स और साल के आखिरी दिनों में इंसेंटिव देने का ऐलान किया है। वहीं, सरकार से भी उनके लिए अच्छी खबर आई है। सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी कवर देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस संबंध में नियमों का एक ड्राफ्ट जारी किया गया है। कौन होगा पात्र? सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए नए नियमों का एक ड्राफ्ट जारी करके उस पर सार्वजनिक सुझाव मांगे हैं। TOI की रिपोर्ट के अनुसार, इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि अगर कोई गिग वर्कर किसी एक कंपनी या ऐप के साथ एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिन काम करता है, तो वह सोशल सिक्योरिटी का लाभ उठाने का पात्र होगा। जबकि एक से ज्यादा एग्रीगेटर्स के साथ जुड़े वर्कर्स के लिए यह अवधि 120 दिन होगी। कंपनियों की होगी रजिस्‍ट्रेशन की जिम्‍मेदारी कंपनियों (एग्रीगेटर्स) की यह जिम्मेदारी होगी कि वे अपने साथ काम करने वाले हर छोटे-बड़े वर्कर का विवरण सरकारी पोर्टल पर अपडेट करें. इसमें वे वर्कर्स भी शामिल होंगे जो किसी थर्ड-पार्टी एजेंसी या सहयोगी कंपनी के जरिए काम पर लगे हैं. क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? नए नियमों का उद्देश्य गिग वर्कर्स को वह सुरक्षा देना है जो अब तक केवल सरकारी या बड़ी निजी कंपनियों के कर्मचारियों को मिलती थी. इसके तहत निम्नलिखित लाभ प्रस्तावित हैं:     स्वास्थ्य और जीवन बीमा: वर्कर्स को मुफ्त या रियायती दरों पर स्वास्थ्य बीमा मिलेगा.     दुर्घटना कवर: काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की व्यवस्था होगी.     आयुष्मान भारत: श्रम मंत्रालय ने इन वर्कर्स को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा.     पेंशन की सुविधा: भविष्य में सरकार ऐसी योजना ला सकती है जिसमें वर्कर और कंपनी दोनों मिलकर योगदान देंगे, ताकि रिटायरमेंट के बाद वर्कर को पेंशन मिल सके. कौन-कौन होंगे पात्र योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ सीमाएं भी तय की गई हैं. ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, गिग वर्कर जैसे ही अपनी 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेगा, वह इन सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए अयोग्य हो जाएगा. यानी यह सुरक्षा मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों के लिए है. इसके अलावा, लाभ बरकरार रखने के लिए हर साल काम के न्यूनतम दिनों (90 या 120 दिन) की शर्त पूरी करनी होगी. यदि कोई वर्कर एक वित्तीय वर्ष में पर्याप्त काम नहीं करता है, तो अगले साल वह इन सुविधाओं से वंचित रह सकता है. निगरानी के लिए बनेगा नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड इन सभी नियमों को जमीन पर उतारने और वर्कर्स की समस्याओं को सुनने के लिए एक ‘राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ बनाने का प्रस्ताव है. यह बोर्ड केवल कागजी काम नहीं करेगा, बल्कि इसकी जिम्मेदारी होगी कि वह देश में गिग वर्कर्स की सही संख्या का पता लगाए और बदलती अर्थव्यवस्था के हिसाब से नई कल्याणकारी नीतियां बनाए. इस बोर्ड में सरकार के साथ-साथ श्रमिक संगठनों और कंपनियों के 5-5 प्रतिनिधि शामिल होंगे, ताकि दोनों पक्षों की बात सुनी जा सके. कैसे होगी दिनों की गिनती? ड्राफ्ट के अनुसार, गिग कर्मचारियों के दिनों की गिनती अलग-अलग की जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वर्कर एक ही दिन में स्विगी और जोमैटो दोनों के लिए काम करता है, तो उसे दो दिन माना जाएगा। काम की गिनती उसी दिन से शुरू हो जाएगी जब वर्कर ने प्लेटफॉर्म से पैसे कमाए, कितने कमाए इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि 16 साल से अधिक उम्र के प्रत्येक गिग वर्कर्स के पास आधार से लिंक रज‍िस्‍ट्रेशन होना अनिवार्य है। इन शर्तों का पालन जरूरी सरकार की तरफ से कहा गया है कि प्रत्येक कंपनी या एग्रीगेटर को अपने गिग वर्कर्स से जुड़ी जानकारी केंद्र के पोर्टल पर देनी होगी, ताकि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर बनाया जा सके। हर पंजीकृत गिग वर्कर को डिजिटल या फिजिकल आईडी कार्ड जारी किया जाएगा। ड्राफ्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि 60 साल की उम्र होने या पिछले वित्त वर्ष में 90/120 दिनों के काम की शर्त पूरी न करने की स्थिति में सोशल सिक्योरिटी के फायदे मिलना बंद हो जाएंगे। क्या मिलेंगी सुविधाएं? सोशल सिक्योरिटी के तहत गिग वर्कर्स को कई तरह के फायदे मिलेंगे। उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। गिग वर्कर्स आयुष्मान भारत का भी हिस्सा बनेंगे। इसके अलावा, बाद में वे प्लेटफॉर्म और गिग वर्कर्स, दोनों के योगदान के आधार पर पेंशन के लिए योग्य होंगे। श्रम मंत्रालय ने पहले ही 'ई-श्रम' पोर्टल पर गिग वर्कर्स का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है।

वाटर सप्लाई की निगरानी को लेकर CM डॉ. मोहन की सख्ती, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं सैंकड़ों लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इस बीच पूरे प्रदेश में पानी वितरण की मॉनिटरिंग को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सख्त हो गए हैं। सीएम ने सभी नगरीय निकायों में जांच के निर्देश दिए हैं।   हर हाल में भेजनी होगी हर महीने रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रदाय के तहत पानी के शुद्धिकरण की जांच की जाए। लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अफसरों को हर महीने की सैंपल रिपोर्ट हर हाल में स्थानीय निकाय को भेजनी होगी। सीएम ने नगरीय प्रशासन विभाग को ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं।  मौत का आंकड़ा बढ़कर 14, सरकारी आंकड़ों में 4 मौतें दर्ज  गौरतलब है कि इंदौर में दूषित पानी से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, सरकारी आंकड़ों में अभी भी मौत के आंकड़े 4 हैं। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया था कि चार लोगों की मौत की सरकारी आंकड़े में पुष्टि हुई है। लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।  दूषित पानी में मिला हैजा फैलाने वाला जीवाणु दूषित पानी की रिपोर्ट में हैजा फैलाने वाला घातक जीवाणु मिला है। मरीजों की कल्चर रिपोर्ट में हैजे की आशंका जताई जा रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को हैजे के इलाज के लिए दी जाने वाली डॉक्सीसाइक्लिन नामक दवा दी जा रही है।