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मुख्यमंत्री साय ने भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया, छत्तीसगढ़ की धरोहर को मिलेगा नया जीवन

रायपुर : भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2026 की शुभ शुरुआत: छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय   रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ  दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया। भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं।  केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा … Read more

भोपाल में संघ प्रमुख मोहन भागवत, दो दिनों में चार प्रमुख कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा

 भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत 2 और 3 जनवरी को अपनी दो दिन की यात्रा के दौरान भोपाल में प्रमुख नागरिकों, सामाजिक और धार्मिक नेताओं, युवाओं और महिलाओं के साथ बातचीत करेंगे. संघ की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, पिछले 10 महीनों में यह भागवत की मध्य प्रदेश की पांचवीं यात्रा होगी. RSS प्रमुख 2 जनवरी को 'युवा संवाद' और 'प्रमुखजन गोष्ठी' (प्रमुख नागरिकों के साथ बातचीत) में हिस्सा लेंगे, इसके बाद 3 जनवरी को 'सामाजिक सद्भाव बैठक' और 'शक्ति संवाद' (महिलाओं के साथ बातचीत) होगी. एक न्यूज एजेंसी ने आरएसएस पदाधिकारी के हवाले से बताया कि भागवत इन कार्यक्रमों के दौरान संगठन की 100 साल की यात्रा का जिक्र करेंगे और समकालीन मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे. उन्होंने बताया कि RSS प्रमुख 2 जनवरी को मध्य प्रदेश की राजधानी में कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में प्रांत-स्तरीय 'युवा संवाद' को संबोधित करेंगे. यह कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा। ये आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में होंगे। दूसरा आयोजन प्रमुख जन सम्मेलन होगा, जिसमें भोपाल विभाग के 1500 प्रमुख जन सम्मिलित होंगे। यहां डा. मोहन भागवत का व्याख्यान होगा। प्रश्नोत्तर का सत्र नहीं रखा गया है। इसमें विभिन्न क्षेत्र में काम करने वाले संस्था प्रमुख सम्मिलित होंगे। प्रमुखजन गोष्ठी: समाज के प्रभावशाली लोगों से विमर्श आज यानी शुक्रवार शाम 5:30 बजे रविन्द्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में प्रमुखजन गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसमें भोपाल विभाग के सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, व्यवसायिक और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय प्रमुख व्यक्तित्वों को आमंत्रित किया गया है। गोष्ठी में संघ की शताब्दी यात्रा, सामाजिक समरसता और वर्तमान समय की चुनौतियों पर संवाद होगा। सामाजिक सद्भाव बैठक: सभी समाजों के प्रतिनिधि होंगे शामिल कल 3 जनवरी को सुबह 9:30 बजे कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें प्रांत के सभी जिलों से विभिन्न समाजों के प्रमुख प्रतिनिधि भोपाल पहुंचेंगे। बैठक का उद्देश्य सामाजिक एकता, समरसता और पारस्परिक सहयोग को मजबूत करना है। सरसंघचालक इस मंच से समाज को जोड़ने वाले विचारों और साझा जिम्मेदारियों पर मार्गदर्शन देंगे। शक्ति संवाद: मातृशक्ति से सीधा संवाद कल 3 जनवरी को शाम 5 बजे भोपाल की प्रमुख मातृ शक्ति के साथ शक्ति संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा। इस संवाद में समाज, परिवार और राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। यह कार्यक्रम महिला सहभागिता और सामाजिक नेतृत्व के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शताब्दी वर्ष में बढ़ी संघ को जानने की जिज्ञासा संघ के शताब्दी वर्ष के चलते समाज के विभिन्न वर्गों में आरएसएस को लेकर जिज्ञासा और रुचि बढ़ी है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के इस प्रवास के माध्यम से लोगों को संघ के बारे में तथ्यात्मक और वास्तविक जानकारी मिलेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि देश और समाज के निर्माण में नागरिक किस प्रकार सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। यह प्रवास संघ के शताब्दी वर्ष में भोपाल के लिए एक महत्वपूर्ण वैचारिक और सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। अगले दिन यानी शनिवार सुबह 9:30 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सामाजिक सद्भाव सम्मेलन होगा, जिसमें विभिन्न समाज के लोग रहेंगे। वह शाम को भोपाल स्टेशन के पास केशव निडम में शक्ति सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसमें भोपाल की महिलाएं सम्मिलित होंगी। इन आयोजनों में दो बड़ी बातें हैं। एक तो यह कि उन्हें बुलाया गया है जो आरएसएस के कार्यकर्ता या स्वयंसेवक नहीं हैं। दूसरा, शक्ति सम्मेलन में 40 वर्ष से कम आयु की महिलाओं को आमंत्रित किया गया है। प्रांत के सभी 31 जिलों (प्रशासनिक ढांचे के अनुसार 16 जिले) के युवा, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है और पहचान बनाई है, इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. उन्होंने बताया कि प्रमुख नागरिकों के साथ बातचीत रवींद्र भवन के एक ऑडिटोरियम में होगी, जिसमें भोपाल संभाग के विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है. बयान के अनुसार, 3 जनवरी को कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में 'सामाजिक सद्भाव बैठक' का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न समुदायों के प्रमुख सदस्य हिस्सा लेंगे. इसमें कहा गया है कि उसी शाम भोपाल की प्रमुख महिला प्रतिनिधियों के साथ 'शक्ति संवाद' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. बयान में कहा गया है, "भागवत की यात्रा लोगों को RSS के बारे में तथ्यात्मक और प्रामाणिक जानकारी देगी. यह राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में व्यक्ति क्या भूमिका निभा सकते हैं, इस बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान करेगी."

इंदौर में 1400 लोग हुए शिकार, शौचालय से घुला दूषित पानी; 32 मरीज ICU में भर्ती

इंदौर      देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की साख पर 'जहरीले' पानी का गहरा दाग लग गया है. एक ताजा लैब टेस्ट से इस बात की पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा में मची तबाही का कारण दूषित पेयजल ही था. इंदौर में डायरिया फैलने से कम से कम चार मरीजों की मौत हो गई और 1400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. टेस्ट के नतीजों से यह साबित हुआ कि मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी के कुछ हिस्सों में जानलेवा पीने के पानी की सप्लाई सिस्टम है, जिसे पिछले आठ सालों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता रहा है. इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार की गई लैब रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा इलाके में एक पाइपलाइन में लीकेज के कारण पीने का पानी दूषित हो गया था, जहां से यह बीमारी फैलने की खबर आई है. उन्होंने टेस्ट रिपोर्ट के विस्तृत नतीजे शेयर नहीं किए. भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन में एक ऐसी जगह पर लीकेज पाया गया, जहां एक शौचालय बना हुआ है. उन्होंने दावा किया कि इस लीकेज के कारण इलाके में पानी की सप्लाई दूषित हो गई. अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने न्यूज एजेंसी को बताया, "हम भागीरथपुरा में पूरी पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि कहीं और कोई लीकेज तो नहीं है." उन्होंने कहा कि जांच के बाद गुरुवार को भागीरथपुरा के घरों में पाइपलाइन के जरिए साफ पानी की सप्लाई की गई, हालांकि एहतियात के तौर पर लोगों को सलाह दी गई है कि वे पानी को उबालकर ही पिएं. दुबे ने कहा, "हमने इस पानी के सैंपल भी लिए हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा है." अब पूरे MP के लिए बनेगी SOP भागीरथपुरा में पानी की त्रासदी से सबक लेते हुए सीनियर अफसर ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे राज्य के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया जाएगा. उधर, मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर दुबे ने स्थिति का जायजा लेने के लिए भागीरथपुरा का दौरा किया. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भागीरथपुरा में 1714 घरों के सर्वे के दौरान 8571 लोगों की जांच की गई. उनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण दिखे, जिन्हें उनके घरों पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया. उन्होंने बताया कि बीमारी फैलने के आठ दिनों में 272 मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को अब तक डिस्चार्ज किया जा चुका है. अ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 32 इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में हैं.

देश के पर्यटन मानचित्र पर सबसे तेजी से उभरता छत्तीसगढ़ : शेखावत

रायपुर : भारत के विकास का ग्रोथ इंजन बना छत्तीसगढ़ : गजेंद्र सिंह शेखावत देश के पर्यटन मानचित्र पर सबसे तेजी से उभरता छत्तीसगढ़ : शेखावत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया भूमिपूजन स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत 146 करोड़ रूपए की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर होगा निर्माण कॉरिडोर निर्माण से भोरमदेव बनेगा पर्यटन का केंद्र बोड़ला से भोरमदेव तक सड़क उन्नयन हेतु मुख्यमंत्री ने की घोषणा रायपुर केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत के विकास का ग्रोथ इंजन छत्तीसगढ़ बनता जा रहा है छत्तीसगढ़ इस संकल्प के साथ में हम सब लोग काम करेंगे ऐसा भरोसा और विश्वास आप सबको दिलाते हुए आप सबको बहुत सारी बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सतत आगे बढ़े और छत्तीसगढ़ का पर्यटन विकसित हो छत्तीसगढ़ की संस्कृति सुरक्षित और संरक्षित हो जिससे छत्तीसगढ़ की एक अलग पहचान बने। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपये की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन सम्पन्न किया गया। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव मंदिर परिसर से मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ एवं सरोदा जलाशय तक एक सुव्यवस्थित एवं समग्र पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के निर्माण होने से जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थलों को एक सशक्त पर्यटन श्रृंखला में जोड़ते हुए भोरमदेव को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी। उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर भोरमदेव कॉरिडोर का विकास किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, उपमुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने नववर्ष के अवसर पर कबीरधाम जिले को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के आग्रह पर भोरमदेव से बोड़ला तक सड़क चैड़ीकरण एवं नवीनीकरण कार्य की भी घोषणा की।  केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, पेयजल, बिजली, डीबीटी के माध्यम से राशि का अंतरण और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में सकारात्मक बदलाव करते हुए अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार प्रदान किया जा रहा है। साथ ही रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में हर्जाने की गारंटी भी इस योजना में शामिल की गई है। उन्होंने इसे ‘मोदी की गारंटी’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों एवं अधिकारियों से आग्रह किया कि 146 करोड़ रुपये की इस परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए, क्योंकि यह कार्य धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नागरिक उपस्थित रहे।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि एक हजार साल पुराने बाबा भोरमदेव के मंदिर विकास हेतु आज भूमिपूजन हुआ है जो बहुत ही हर्ष की बात है। सावन के महीने में यहां हजारों की संख्या श्रद्धालु कावड़िये अमरकंटक से माता नर्मदा का जल लेकर बाबा भोरमदेव का जलाभिषेक करते हैं जिनका स्वागत करने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ मैं भी आया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन ने हर वर्ग के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। कवर्धा के जंगलों में वास करने वाले राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के बैगा जैसे प्रदेश की पिछड़ी जनजातियों के लिए शासन द्वारा पीएम जनमन योजना प्रारम्भ की गई है, जिससे अब गांव-गांव तक पक्की सड़कें, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे अनेक योजनाओं का लाभ यहां के लोगों को मिल रहा है। वहीं उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारम्भ किए गए हैं, जिनमें एंबुलेंस के साथ में डॉक्टर एवं नर्स सहित पूरा तकनीकी स्टाफ भी उपलब्ध रहेगा जो घर घर जाकर लोगों का उपचार करेगा। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता से प्रधानमंत्री मोदी ने वादे किए थे जिन्हें पूरा करने का कार्य शासन द्वारा किया जा रहा है। मोदी की गारंटी को काम पूरा होने की गारंटी बताते हुए उन्होंने कहा हमारी सरकार बनते ही 18 लाख आवास से वंचित लोगों को आवास का अधिकार दिलाया, 70 लाख महिलाओं के खाते में हर महीने एक हजार रुपए पहुंच रहे है इसी तरह छत्तीसगढ़ के हजारों लोगों में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का भी लाभ लिया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए … Read more

युवाओं को किताबी ज्ञान से ज्यादा जरूरी व्यवहारिक और वास्तविक ज्ञान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

परमार्थ और देशभक्ति का भाव हो हम सभी में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को किताबी ज्ञान से ज्यादा जरूरी व्यवहारिक और वास्तविक ज्ञान स्वामी जी ने दी है हम सबको नई जीवन दृष्टि राष्ट्रकथा शिविर में विभिन्न प्रांतों से आए युवाओं को किया संबोधित मुख्यमंत्री ने राजकोट के उपलेटा में वैदिक मिशन ट्रस्ट के कार्यक्रम में की सहभागिता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीव मात्र का समग्र कल्याण ही मानवता का पहला लक्ष्य है। जियो और जीने दो हमारे जीवन का शाश्वत दर्शन है। हमारे यहां नैतिक शिक्षा, राष्ट्रभक्ति और संस्कारयुक्त जीवन पद्धति की एक लंबी परम्परा रही है। यह हम भारतीयों का स्व-अनुशासन ही है, जिससे भारत आज विश्व की महाशक्ति के रूप में तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब उस भारतीय मातृ सत्तात्मक संस्कृति के संवाहक है, जहां माताओं और बहनों को देवी के रूप में पूजा जाता है। हमारे यहां बच्चा-बच्चा भी भारत माता की जय बोलकर राष्ट्रमाता को सम्मान देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को गुजरात के राजकोट जिले के प्रांसला के समीप उपलेटा में वैदिक मिशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित 26वें 'राष्ट्रकथा शिविर' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिविर में सहभागिता कर ट्रस्ट के गुजरात के प्रमुख व महान विचारक स्वामी धर्मबंधु जी महाराज का आशीर्वाद लिया और कहा कि हम सभी को अपने जीवन में हमेशा अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। पूज्य स्वामी जी ने हम सबको नई जीवन दृष्टि दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किताबी ज्ञान से व्यवहारिक और वास्तविक ज्ञान बेहतर है और हमारी युवा पीढ़ी को उनकी असीम शक्तियों का भान कराना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नेकी, परमार्थ और राष्ट्रभक्ति का सहज भाव शरीर में रक्त की तरह हम सभी में प्रवाहमान होना चाहिए। 'वसुधैव कुटुम्बकम' हमारी संस्कृति का जीवोमूल लक्ष्य है और हमें इसी दिशा में और भी मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ धाम भी शामिल है। देश में सनातन संस्कृति की धारा सभी क्षेत्रों में बह रही है। राष्ट्रकथा शिविर में स्वामीजी ने देश के विभिन्न प्रांतों से शामिल हुई युवा शक्ति को राष्ट्र के विकास के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश फिर से विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गुरु की महिमा को देखेंगे तो गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। भारत ने हजारों वर्षों से दुनिया को विश्व बंधुत्व का संदेश दिया है। भारतीय परिवारों में मां का अपना अलग ही स्थान होता है। मां ही हम सभी की पहली गुरु होती हैं। दुनिया में सभी देश अपनी गौरवशाली संस्कृति पर गर्व करते हैं, लेकिन अन्य किसी भी देश में मातृ संस्कृति का आधार देखने को नहीं मिलता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कोविड के समय जब दुनिया की जनता त्राहिमाम कर रही थी, तब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी संकल्प शक्ति के बल पर कठिन समय में महामारी का सामना किया। हमने स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए संयमित जीवन शैली अपनाई और गांव, गली, मोहल्लों, कस्बों को भी सुरक्षित रखते हुए पूरी दुनिया को भी इस इससे उबारा। कोविड वैक्सीन बनाकर भारत ने 40 से अधिक देशों को यह वैक्सीन भेजी और वहां के लोगों की जान भी बचाई। हमें अपनी इसी परोपकारी संस्कृति पर गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत आज हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। यह सही है कि किताबी ज्ञान से अंकसूची और मेरिट लिस्ट में पहचान बन सकती है, लेकिन केवल कागजी डिग्री से काम नहीं चलता है। हमारे लिए पढ़ाई केवल नौकरी पाना नहीं है, बल्कि इससे इतर बच्चों का नैतिक और संस्कारयुक्त समग्र विकास करना है। हमारे नागरिकों में स्वाभाविक रूप से स्व-अनुशासन का भाव है। दुनिया के कई देशों में लोगों को नियंत्रित करने के लिए केवल दंड व्यवस्था है, जहां हर 10 में से एक सैनिक या पुलिसकर्मी समाज को कंट्रोल करता है, लेकिन हम ऐसे समाज के लोग हैं कि जहां पुलिस का काम नहीं पड़ता है और 100-100 गांवों को एक ही पुलिसकर्मी संभालता है। उन्होंने कहा कि 145 करोड़ आबादी के इस देश में तीनों सेना और पुलिस मिलाकर सुरक्षाकर्मियों की संख्या मात्र 40 लाख है। हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्रों में से एक हैं। हमारे सैनिक मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में जान की बाजी लगाकर देश और देशवासियों की रक्षा करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बाद अब भारत ही दुनिया का वह तीसरा देश है, जो हर तरीके से अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता रखता है। इस शिविर के जरिए भारतीय युवाओं में देशभक्ति का भाव जगाने का जो पुनीत काम किया जा रहा है, जो नि:संदेह स्वागत योग्य और अभिनंदनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर साल का पहला दिन है। हमारा नया साल तो गुड़ी पड़वा से शुरू होता है। उन्होंने कहा कि हर जीवित व्यक्ति 24 घंटे में 21 हजार 500 बार सांस लेता है और 1 लाख कोशिकाओं के मरने पर एक दिन का जीवन मिलता है। ऐसे में बाबा महाकाल ने सबको जो जीवन दिया है, वह हमें परमार्थ और मानवता की सेवा में समर्पित करना चाहिए। गुजरात सरकार के उच्च और तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री त्रिकमभाई बिजलभाई छंगा ने कहा कि स्वामीजी का प्रयास हम सबको गर्व से भर देता है। मनुष्य की सेवा ही परम पिता परमेश्वर की सेवा है। ऐसे सभी प्राणी, जिनमें जीवन है, हमें अपनी करूणा, दया, स्नेह, अपनत्व, देखभाल और कल्याण भाव से उनकी सेवा करनी चाहिए। स्वामी जी ने विभिन्न प्रांतों से आए युवाओं को राष्ट्र सेवा की ओर प्रवृत्त किया है। यही सच्ची राष्ट्रसेवा और सच्ची राष्ट्रभक्ति है। कार्यक्रम के आरंभ में पूज्य स्वामीजी द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य सभी अतिथियों का गुजराती पगड़ी (साफा) पहनाकर एवं अंगवस्त्रम ओढ़ाकर आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राष्ट्रकथा शिविर में पुस्तक भी भेंट की गई। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजकोट के उपलेटा में 26वें राष्ट्र कथा शिविर में तटरक्षक बल की प्रदर्शनी … Read more

डॉ. यादव विश्व आर्थिक फोरम में करेंगे निवेश संवाद में भागीदारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव दावोस में करेंगे वैश्विक निवेश संवाद विश्व आर्थिक फोरम की वार्षिक बैठक में होंगे शामिल भोपाल विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 18 से 23 जनवरी 2026 में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित की जा रही है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों की जानकारी देंगे। विश्व आर्थिक मंच 2026 का विषय “ए स्पिरिट ऑफ डायलॉग” और "अनलॉकिंग न्यू सोर्सेस ऑफ ग्रोथ" रखा गया है, जिसके अंतर्गत वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दावोस यात्रा का उद्देश्य मध्यप्रदेश को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करना, वैश्विक उद्योग जगत के शीर्ष नेतृत्व के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना और राज्य के प्राथमिक क्षेत्रों में निवेश के नए अवसरों को आगे बढ़ाना है। इस दौरान बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ निवेश के आशय प्रस्तावों पर चर्चा, वैश्विक नीति निर्माताओं के साथ संस्थागत संबंधों को मजबूत करने तथा राज्य की ब्रांड छवि को फ्यूचर रेडी स्टेट के रूप में सुदृढ़ करने पर विशेष फोकस रहेगा। विश्व आर्थिक मंच में मध्यप्रदेश ऑटोमोटिव एवं न्यू मोबिलिटी, अक्षय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन, आईटी, ईएसडीएम एवं ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं और नीतिगत सहयोग को प्रस्तुत करेगा। ऑटोमोटिव सेक्टर में ईवी मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी स्टोरेज और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए उपलब्ध मजबूत इको सिस्टम को रेखांकित किया जाएगा। प्रदेश के पीथमपुर जैसे ऑटो क्लस्टर्स की औद्योगिक उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्रोजेक्ट से राज्य की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता को प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन नीति के अंतर्गत उभरते निवेश अवसरों को भी अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष रखा जाएगा। आईटी और ईएसडीएम सेक्टर में इंदौर और भोपाल को उभरते हुए आईटी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के रूप में प्रस्तुत करते हुए राज्य की आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम नीति 2023 के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहनों पर जोर दिया जाएगा। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मध्यप्रदेश को फूड बॉस्केट ऑफ इण्डिया के रूप में स्थापित करते हुए मेगा फूड पार्कों और कृषि आधारित मूल्य संवर्धन श्रृंखला में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दावोस प्रवास के दौरान फॉर्च्यून 500 कंपनियों के सीईओ और वैश्विक उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकों में भाग लेंगे। साथ ही ऑटोमोटिव एवं न्यू मोबिलिटी, एनर्जी तथा आईटी, हेल्थकेयर और फूड प्रोसेसिंग पर केंद्रित सेक्टोरल राउंडटेबल मीटिंग में राज्य के मौजूदा निवेशक अपने अनुभव साझा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहभागिता विश्व आर्थिक मंच के विभिन्न सत्रों में भी रहेगी, जिनमें श्रम, ऊर्जा सुरक्षा, नवकरणीय ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे विषय शामिल रहेंगे।  

साल 2026 में भारत का गगनयान मिशन, ISRO की मानव अंतरिक्ष उड़ान से अंतरिक्ष में होगी धाक

नई दिल्ली यह नया साल 2026 अंतरिक्ष में मानव की उड़ान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रहा है. इस वर्ष भारत और अमेरिका दो अलग-अलग लेकिन समान रूप से ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में हैं. भारत का गगनयान कार्यक्रम जहां देश को स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता की श्रेणी में ले जाएगा, वहीं अमेरिका का आर्टेमिस-II मिशन मानव जाति को पांच दशक बाद एक बार फिर गहरे अंतरिक्ष यानी चंद्रमा से आगे की यात्रा पर ले जाने वाला है. इन दोनों मिशनों का संयुक्त प्रभाव यह संकेत देता है कि अब मानव अंतरिक्ष उड़ान केवल कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक बहुध्रुवीय (Multipolar) अंतरिक्ष युग की ओर बढ़ रही है. साल 2026 केवल 2 स्पेस मिशनों का ही साल नहीं होगा, बल्कि यह मानव जाति के अंतरिक्ष भविष्य की दिशा बदलने वाला साल साबित हो सकता है. भारत का गगनयान: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम के तहत पहला बिना मानव वाला ऑर्बिटल टेस्ट मिशन G1 वर्ष 2026 के मार्च महीने के आसपास करने का लक्ष्य तय किया है. यह मिशन मानव-रेटेड LVM3 (Gaganyaan-Mk3) रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा. 2026 में पहला बड़ा ऑर्बिटल टेस्ट साबित होगा. इसमें व्योममित्रा नामक एक मानवरूपी (Humanoid) रोबोट को भेजा जाएगा, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह अंतरिक्ष यात्रियों जैसी गतिविधियों और प्रतिक्रियाओं का अनुकरण कर सके. G1 मिशन के दौरान गगनयान को लगभग 300 से 400 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में संचालित किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य मानव मिशन से पहले सभी महत्वपूर्ण प्रणालियों की कठोर परीक्षा करना है. गगनयान क्यों है भारत के लिए ऐतिहासिक? गगनयान भारत के लिए केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि पूर्णतः स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रमाण है. इस मिशन के तहत कई अहम प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा, इसमें जीवन-रक्षा प्रणाली के साथ ही क्रू मॉड्यूल का सुरक्षित वायुमंडलीय पुनः प्रवेश, पैराशूट आधारित समुद्री रिकवरी, मिशन नियंत्रण और संचार व्यवस्था शामिल है. अंतरिक्ष की उड़ान में अहम पड़ाव   यदि G1 और इसके बाद के परीक्षण सफल रहते हैं, तो भारत उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने और सुरक्षित वापस लाने की क्षमता रखते हैं. इससे भविष्य में भारतीय स्पेस स्टेशन, निजी मानव अंतरिक्ष सेवाओं और व्यावसायिक मिशनों के रास्ते खुलेंगे, साथ ही विदेशी साझेदारों पर निर्भरता भी कम होगी. अमेरिका का आर्टेमिस-II: इंसानों की 50 साल बाद गहरे अंतरिक्ष में वापसी होगी. दूसरी ओर, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस-II मिशन की तैयारी में है, जिसे अब 5 फरवरी 2026 से पहले नहीं लॉन्च किए जाने की योजना है. यह मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर लगभग 10 दिनों की यात्रा पर जाएगा, जिसमें वे चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे. यह 1972 में अपोलो-17 के बाद पहली बार होगा जब इंसान निम्न पृथ्वी कक्षा से बाहर जाएगा. आर्टेमिस-II का महत्व क्या है? आर्टेमिस-II, नासा के स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान के लिए एक निर्णायक परीक्षण उड़ान है. इस मिशन में कुछ अहम पहलुओं की जांच की जाएगी, जिसमें गहरे अंतरिक्ष में नेविगेशन और संचार, अंतरिक्ष रेडिएशन से सुरक्षा, दीर्घकालिक जीवन-रक्षा प्रणालियां और पृथ्वी से बहुत दूर मिशन संचालन शामिल होगा. यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा से कम से कम 5,000 नॉटिकल मील आगे तक जाएंगे, जो मानव इतिहास की अब तक की सबसे दूर की मानव उड़ान होगी. यह मिशन भविष्य में चंद्र सतह पर लैंडिंग, स्थायी चंद्र अड्डों और अंततः मंगल मिशन की नींव रखेगा. मानव अंतरिक्ष उड़ान का बहुध्रुवीय भविष्य गगनयान और आर्टेमिस-II मिलकर यह स्पष्ट करते हैं कि 2030 के दशक में मानव अंतरिक्ष उड़ान एक नए चरण में प्रवेश करने जा रही है, जहां भारत निम्न पृथ्वी कक्षा तक पहुंच को मजबूत कर रहा है. वहीं अमेरिका अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ गहरे अंतरिक्ष में वापसी कर रहा है. इन मिशनों से विकसित होने वाली तकनीकें- चालक दल की सुरक्षा, अंतरिक्ष यान प्रणालियां, मिशन प्रबंधन और दीर्घकालिक जीवन समर्थन- आने वाले वर्षों में व्यावसायिक स्पेसफ्लाइट, राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन और डीप-स्पेस अन्वेषण की दिशा और गति तय करेंगी.  

इंदौर में 2026 में मेट्रो ट्रेन विस्तार और ब्रिजों का होगा निर्माण

 इंदौर  इंदौर के लिए वर्ष 2026 कई सौगातें लेकर आएगा। सबसे महत्वपूर्ण सौगात मेट्रो ट्रेन के विस्तार की होगी। इसके अलावा प्रदेश का पहला डबल डेकर ब्रिज भी बनकर इस साल तैयार हो जाएगा। कई अन्य विकास कार्य भी इंदौर के हिस्से आएंगे। बीते साल में इंदौर में कई विकास के काम शुरू हुए, लेकिन वे अंजाम तक नहीं पहुंच सके, लेकिन नए साल में जनता के लिए वे उपयोगी साबित होंगे। मेट्रो चलेगी रेडिसन चौराहा तक मेट्रो फिलहाल छह किलोमीटर के हिस्से में चल रही है, लेकिन वहां मेट्रो को यात्री नहीं मिल रहे हैं। मार्च माह तक मेट्रो का संचालन गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक होगा। इसके बाद मेट्रो ट्रेन में यात्री संख्या बढ़ सकती है। 17 किलोमीटर लंबाई के लिए ट्रायल रन हो चुका है। अब इसकी मंजूरी जल्दी ही मिलने वाली है। पांच स्टेशनों का काम भी पूर्णता की ओर है। इस साल मध्य हिस्से का काम भी शुरू होना है। ब्रिजों का काम होगा पूरा शहर में सात स्थानों पर ब्रिजों का निर्माण जारी है। इस साल एमआर 10 जंक्शन पर बनने वाले ब्रिज का काम पूरा हो जाएगा। अभी इंदौर शहर में एंट्री के लिए काफी परेशानी आती है। इसके अलावा लवकुश चौराहे पर बन रहे डबल डेकर ब्रिज की सौगात भी इस साल मिलेगी। ब्रिज का काम दो साल से चल रहा है। निरंजनपुर चौराहे पर बनने वाले ब्रिज का काम भी नए साल में पूरा हो जाएगा। होगी बिजली की बचत नगर निगम जलूद में 60 मेगावाट का सोलर प्लांट तैयार करवा रहा है। यह काम पूरा हो चुका है और लाइनों को शिफ्ट करने का काम जारी है। हर माह 20 करोड़ रुपये निगम को जलूद से इंदौर तक पानी लाने के लिए खर्च करने पड़ते हैं। सोलर प्लांट के शुरू होने से हर माह चार से पांच करोड़ रुपये की बिजली बचेगी। 200 एकड़ में यह प्लांट बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम ने ग्रीन बांड जारी कर ढाई सौ करोड़ रुपये की राशि जुटाई है।   छह लेन सड़क बनकर होगी तैयार   इंदौर-उज्जैन रोड का काम भी इस साल तक पूरा होने की उम्मीद है। काम तेजी से चल रहा है। सिंहस्थ को देखते हुए छह लेन सड़क बनाई जा रही है। इसके अलावा एमआर 12 सड़क भी बनकर तैयार हो जाएगी। शहर में मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम शुरू हुआ है। इस साल सात सड़कें बनकर तैयार हो जाएंगी।   इंदौर में 20 नए आधुनिक बस स्टॉपों की सौगात इंदौर में नगर निगम ने 20 नए बस स्टॉपों का निर्माण शुरू किया है। पुराने बस स्टॉप पर लोगों को बैठने, रुकने और जानकारी प्राप्त करने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, वहीं अब इन नए बस स्टॉप पर अत्याधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। आने वाले समय में शहर के अन्य मार्गों पर भी पुराने बस स्टॉपों के स्थान पर नए बस स्टॉप बनाए जाएंगे। इंदौर में सिटी बसों के संचालन के समय 20 वर्ष पहले बस स्टॉपों का निर्माण किया गया था। शहर में लगभग 350 सिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। एक वर्ष में 200 नवीन सिटी बस स्टॉप तैयार किए जाने का लक्ष्य है। नए बस स्टॉपों में पैसेंजर इनफॉर्मेशन सिस्टम (PIS) रहेगा। इससे रूट मैप की जानकारी रहेगी और इमरजेंसी कांटेक्ट नंबर भी डिस्प्ले होते रहेंगे। स्टॉपों पर सीसीटीवी कैमरे रहेंगे। इसके अलावा यात्री अपने मोबाइल भी चार्ज कर सकेंगे। हर स्टॉप पर दो मोबाइल चार्जिंग पॉइंट रहेंगे। इसके अलावा आरामदायक सीटें रहेंगी। बारिश के समय भी बस स्टॉप मददगार होंगे।  

सिगरेट-तंबाकू होंगे और महंगे, केंद्र सरकार ने 40% GST के ऊपर नया एक्‍साइज ड्यूटी लागू किया

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने तंबाकू प्रोडक्‍ट्स पर एक्‍स्‍ट्रा एक्‍साइज ड्यूटी लगाने का ऐलान किया है, जो देशभर में 1 फरवरी 2026 से लागू हो जाएंगे. यह लागू होते ही सिगरेट, तंबाकू और इससे जुड़े प्रोडक्‍ट्स महंगे हो जाएंगे. वित्त मंत्रालय ने तंबाकू,  सिगरेट, पान-मसाला के इस नए नियम को 31 दिसंबर की देर रात नोटिफाई कर दिया.  यह एक्‍स्‍ट्रा एक्‍साइज ड्यूटी 40% GST दर के ऊपर है. पान-मसाले पर केंद्र सरकार ने सेस भी लगाया है. यह भी 40 फीसदी जीएसटी दर से ऊपर है. नए नियमों के तहत, सरकार ने पैकिंग मशीनों की सहायता से निर्मित और पाउच में पैक किए गए चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा को केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 3A के तहत नोटिफाई किया है.  सिगरेट पर इतनी ड्यूटी नए नियम के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर हर 1000 स्टिक्‍स पर 2050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक की एक्‍साइड ड्यूटी लागू होगी. इसके ऊपर 40 फीसदी जीएसटी भी लागू किया जाएगा यानी इनकी कीमत दोगुना बढ़ेगी. इस बदलाव के साथ सरकार का उद्देश्‍य तंबाकू प्रोडक्‍ट्स पर टैक्‍स व्‍यवस्‍था को और ज्‍यादा मुश्किल करना है.  बीड़ी पर 18 फीसदी टैक्‍स  जहां सिगरेट और पान मसाला पर 40 फीसदी GST लगेगा, वहीं बीड़ी पर टैक्‍स 18 फीसदी ही रखा गया है. इसके अलावा, पान मसाला मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट्स पर नया हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लागू किया जाएगा. यह सेस मशीनों की क्षमता के आधार पर वसूल किया जाएगा. यह फैसला टैक्‍स चोरी को रोकने के लिए लिया गया है.  40 फीसदी जीएसटी के ऊपर नया सेस और ड्यूटी केंद्र सरकार ने सिन गुड्स पर 40 फीसदी का टैक्‍स लागू कर दिया है. लेकिन अब इसके ऊपर लगने वाले पुराने कंम्‍पसेशन सेस को खत्‍म करने जा रह है. हालांकि इसकी जगह पर नया सेस लागू होगा, जो 'हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस' और 'एडिशनल एक्साइज ड्यूटी' होगा. यह 1 फरवरी 2026 से लागू होगा. दिसंबर 2025 में ही इन दो बिलों की मंजूरी मिल चुकी थी और संसद में बिल पास किया गया था.  शेयरों में बड़ी गिरावट इस खबर के आने के बाद  सिगरेट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. गोल्ड फ्लेक और क्लासिक जैसे ब्रांड बनाने वाली मार्केट लीडर कंपनी ITC का शेयर 8.62% गिरकर 402 रुपए से 368 रुपये पर आ गया. वहीं गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयरों में 12% की गिरावट आई है. FMCG इंडेक्स में भी इसका असर दिख रहा है और यह 3 फीसदी तक टूट चुका है. 

वंदे भारत स्लीपर और बुलेट ट्रेन का इंतजार खत्म, गुवाहाटी-कोलकाता होगा पहला रूट, अश्विनी वैष्णव ने किया एलान

नई दिल्ली   भारतीय रेलवे के इतिहास में जल्द ही एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को यह जानकारी दी। रेल मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि 15 अगस्त 2027 को देश को पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। अश्विनी वैष्णव ने मजाकिया लहजे में कहा कि आप अभी से बुलेट ट्रेन की टिकट खरीद लीजिए, अगले साल बुलेट ट्रेन भी आ जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पूरी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन पूरा हो गया है। इसका पहला रूट गुवाहाटी-कोलकाता प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले दिनों में इस रूट पर पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह रेलवे के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। वैष्णव ने आगे कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रियों को लंबी दूरी की रात की यात्राओं पर वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं, सुरक्षा और एक आधुनिक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। पिछले साल नवंबर में ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गुजरात दौरे के दौरान मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की प्रगति का भी जायजा लिया था। इसके लिए पीएम मोदी सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने काम में लगे इंजीनियरों और कर्मचारियों से बातचीत भी की थी। रात के सफर में मिलेगी वर्ल्ड-क्लास सुविधा रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी की रात की यात्राओं के लिए डिजाइन की गई है। यह ट्रेन यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं, बेहतर सुरक्षा और एक आधुनिक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। इसे भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, जो प्रीमियम यात्रा को और सुगम बनाएगी। 15 अगस्त 2027 को चलेगी पहली बुलेट ट्रेन वंदे भारत के साथ-साथ रेल मंत्री ने देश की पहली बुलेट ट्रेन को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2027 को भारत को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। वैष्णव ने मजाकिया अंदाज में कहा, "आप अभी से बुलेट ट्रेन की टिकट खरीद लीजिए, अगले साल बुलेट ट्रेन भी आ जाएगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए पूरी गंभीरता से जुटी हुई है। पीएम मोदी ने लिया तैयारियों का जायजा प्रोजेक्ट की प्रगति को लेकर रेल मंत्री ने बताया कि पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद गुजरात दौरे के दौरान मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निरीक्षण किया था। पीएम मोदी सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन पहुंचे थे, जहां उन्होंने काम की बारीकी से जांच की और वहां मौजूद इंजीनियरों व कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कर्मचारियों से बातचीत करते हुए कहा था कि यह प्रोजेक्ट न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के गर्व का विषय है। यह हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी, जिससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर का लाभ मिलेगा।  इससे जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें पीएम मोदी सूरत स्टेशन पर काम की बारीकी से जांच करते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने इंजीनियरों और कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि काम में किसी तरह की परेशानी तो नहीं आ रही है और प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए किस तरह से काम किए जा रहे हैं? इस दौरान कर्मचारियों ने बताया कि हर स्तर पर पूरी मेहनत और बारीकी के साथ काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कर्मचारियों की मेहनत की सराहना की और कहा कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने में एक अहम कदम है और इससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर मिलेगा।