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प्रयागराज में माघ मेले की पौष पूर्णिमा पर 21 लाख श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान

प्रयागराज प्रयागराज महाकुंभ के बाद पहला माघ मेला आज से शुरू हो गया है। पहले दिन पौष पूर्णिमा पर अब तक 21 लाख से ज्यादा श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालु स्नान-दान के बाद लेटे हनुमानजी के दर्शन कर रहे हैं। मेला प्राधिकरण का अनुमान है।  इधर, पुलिस ने दो फर्जी बाबा पकड़े हैं। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड और नकली नोट मिले हैं। महाकुंभ में ‘दातून बॉय’ के नाम से मशहूर हुए आकाश थार से प्रयागराज पहुंचे हैं। उन्होंने मेले में दातून का कैंप लगाने का ऐलान किया है। इस बीच सपा कार्यकर्ता ने दिवंगत मुलायम सिंह यादव की तस्वीर के साथ गंगा में डुबकी लगाई। माघ मेला 2026 का शुभारंभ आस्था, श्रद्धा और भक्ति के सैलाब के साथ हुआ। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम की ओर उमड़ पड़े। पुण्य की कामना के साथ पवित्र स्नान किया। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर हर-हर गंगे के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए शहर से संगम तक फोर्स तैनात दिखी। व्यापक पुलिस बल, एनडीआरएफ, जल पुलिस, ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी के जरिए पल-पल की निगरानी की गई। माघ मेले की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है, जहां आस्था और व्यवस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।  सीएम योगी ने अफसरों को फील्ड में उतरने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा नहीं होनी चाहिए और लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा के लिए 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मेले की निगरानी AI तकनीक से लैस CCTV कैमरों से की जा रही है। ATS-NIA के कमांडो भी तैनात हैं। योगी सरकार माघ मेले को मिनी कुंभ के रूप में आयोजित कर रही है। मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और 15 फरवरी तक चलेगा। मेले को 7 सेक्टरों में बांटा गया है। 8 किलोमीटर लंबे स्नान घाट बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। 2 जनवरी की रात 8 बजे से मेले में वाहनों की एंट्री बंद कर दी गई है। संगम नोज पर सिर्फ प्रशासकीय और चिकित्सीय वाहनों को ही जाने की अनुमति है। यह व्यवस्था 4 जनवरी की सुबह तक लागू रहेगी। आज से कल्पवास भी शुरू हो गया है। कल्पवासी 45 दिनों तक गंगा तट पर रहकर पूजा-अर्चना करेंगे। माघ मेला होने के कारण इसमें अखाड़े शामिल नहीं होते और न ही पेशवाई निकाली जाती है। पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 का औपचारिक शुभारंभ हो गया। पहले स्नान पर्व पर देश के कोने-कोने आए लाखों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। आधी रात के बाद से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड और ठिठुरन के बावजूद आस्था का उत्साह कम नहीं हुआ। साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन के बीच स्नान किया। प्रशासन ने इस बड़े आयोजन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए थे। संगम क्षेत्र को कई जोन और सेक्टर में बांटा गया। प्रमुख स्नान घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। भीड़ प्रबंधन के लिए वन-वे ट्रैफिक प्लान लागू किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें नावों के जरिए लगातार गश्त करती रहीं। ड्रोन से की जाती रही निगरानी पौष पूर्णिमा पर सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक बंदोबस्त रहा। पुलिस और फोर्स की निगरानी चप्पे-चप्पे  पर दिखी। मेले में दोपहिया वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया। ड्रोन कैमरे से पूरे माघ मेला और घाटों की निगरानी की जाती रही। संगम पर बने वॉच टॉवर के माध्यम से पुलिस संगम नोज और सभी घाटों पर नजर बनाए रखी।  स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन सतर्क रहा। संगम क्षेत्र और मेला परिसर में अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीमें तैनात की गईं। ठंड को देखते हुए अलाव, गर्म पानी और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई। नगर निगम और स्वच्छता कर्मियों ने सुबह से ही सफाई अभियान चलाया ताकि घाटों पर स्वच्छता बनी रहे। 

बांग्लादेश में खोकन दास की अस्पताल में मौत, तालाब में कूदकर भी नहीं बची जान, क्रूरता का शिकार हुआ युवक

ढाका  बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे बर्बर हमलों ने एक और जान ले ली है. ढाका से लगभग 150 किलोमीटर दूर अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाने वाले खोकन चंद्र दास पर बुधवार रात इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमला किया था. हमलावरों ने न केवल उन पर धारदार हथियारों से वार किया, बल्कि उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश भी की थी. खोकन चंद्र दास के परिवार ने बताया कि वह बुधवार रात दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया. हमले में गंभीर रूप से झुलसे खोकोन दास किसी तरह पास के तालाब में कूद गए, जिससे आग बुझ सकी, लेकिन उनका चेहरा और सिर बुरी तरह झुलस गया था. स्थानीय लोगों ने उन्हें पहले नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, बाद में हालत बिगड़ने पर ढाका रेफर किया गया, जहां शुक्रवार तड़के उनकी मौत हो गई. खोकन दास अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का छोटा कारोबार चलाते थे. यह गांव ढाका से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित है. घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए. इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने इसे धार्मिक आधार पर हो रही हिंसा बताते हुए कहा कि यह सिलसिला बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल दोनों जगह चिंताजनक रूप से जारी है. पार्टी ने पिछले साल मुर्शिदाबाद में हुई हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि बंगाली हिंदुओं पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे. लगातार हो रहे हैं हमले खोकन दास का नाम अब उन हिंदुओं की बढ़ती सूची में जुड़ गया है, जिन पर मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में कथित तौर पर धार्मिक कारणों से जानलेवा हमले हुए हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में अल्पसंख्यकों पर हिंसा के मामलों में इजाफे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है. बांग्लादेश में हिंसा की यह कड़ी नई नहीं है. इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि पहले उन्हें मार डाला गया और फिर शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया. उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. इसके बाद 25 दिसंबर को अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. हालांकि अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच बांग्लादेश सरकार ने दावा किया कि अमृत मंडल एक आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति था और उगाही के विवाद में भीड़ ने उसे निशाना बनाया. वहीं 29 दिसंबर को मेहराबारी इलाके में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान बजेंद्र बिस्वास (42) की गोली लगने से मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी नोमान मिया (29) को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में दावा किया कि गोली “मजाक में” चली थी. भारत ने भी कई बार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ “लगातार शत्रुता” पर गंभीर चिंता जताते हुए हालात पर करीबी नजर रखने की बात कही है. वहीं बांग्लादेश सरकार का कहना है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि जमीनी हालात कुछ और कहानी बयां करते हैं.

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा का संबल, 27 लाख बेटियों का भविष्य हुआ सशक्त

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा का संबल सरकार की इस पहल से 27 लाख बेटियों का भविष्य हो रहा सशक्त  आर्थिक सहायता से बदली सामाजिक सोच, लाखों परिवारों का सरकार पर बढ़ा भरोसा लखनऊ उत्तर प्रदेश में बालिकाओं के कल्याण और सशक्तिकरण को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि समाज की ताकत हैं। इस योजना के द्वारा लगभग 27 लाख बेटियों का भविष्य सशक्त हो रहा है। योजना का उद्देश्य प्रदेश में लैंगिक समानता स्थापित करना, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना और बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना है। लाखों बालिकाओं तक पहुंची योजना मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 27 लाख पात्र बालिकाओं को लाभान्वित किया जा चुका है। इस पर राज्य सरकार द्वारा कुल 647.21 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि योजना केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों तक सहायता पहुंचना सरकार की प्रशासनिक प्रतिबद्धता और पारदर्शी व्यवस्था को दर्शाता है।  बालिकाओं का कल्याण सरकार की प्राथमिकता सरकार ने योजना के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया है। इस वर्ष 3.28 लाख लाभार्थियों को 130.03 करोड़ रुपये की धनराशि योजना के अंतर्गत दी गई है। यह दर्शाता है कि योगी सरकार बालिकाओं के कल्याण को दीर्घकालिक नीति के रूप में आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आज प्रदेश में बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और शैक्षिक सशक्तिकरण की पहचान बन चुकी है और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लैंगिक समानता की दिशा में सरकार का ठोस कदम वर्ष 2019 में शुरू की गई मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत ऐसे परिवारों की बालिकाओं को लाभ दिया जा रहा है, जिनके परिवार उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं। पात्रता की शर्तों के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 3.00 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए और परिवार में अधिकतम 2 बच्चे होने चाहिए। योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कारणों से किसी भी बालिका की शिक्षा या विकास बाधित न हो और परिवारों को बेटियों के पालन पोषण में सहयोग मिल सके। सहायता राशि में बढ़ोतरी से मजबूत हुआ भरोसा वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार ने योजना के अंतर्गत दी जाने वाली कुल सहायता राशि को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया। यह सहायता 6 चरणों में प्रदान की जाती है। जन्म के समय 5,000 रुपये, 2 वर्ष की आयु पर टीकाकरण पूर्ण होने पर 2,000 रुपये, कक्षा 1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा 6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा 9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये तथा कक्षा 10 या 12 की परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्लोमा या स्नातक अथवा उससे अधिक अवधि के डिग्री कोर्स में प्रवेश लेने पर 7,000 रुपये की सहायता दी जाती है। यह व्यवस्था बालिकाओं को हर शैक्षिक पड़ाव पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।

ड्रोन-आधारित भू-स्थानिक इंटेलिजेंस से डिजिटल गवर्नेंस होगा पारदर्शी, सक्षम और फ्यूचर-रेडी

ड्रोन एवं जियोस्पेशियल इकोसिस्टम में मध्यप्रदेश बना अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ड्रोन-आधारित भू-स्थानिक इंटेलिजेंस से डिजिटल गवर्नेंस होगा पारदर्शी, सक्षम और फ्यूचर-रेडी प्रदेश में हुआ देश की राज्य स्तरीय ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में देश की पहली राज्य-स्तरीय ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी (डीडीआर) शुरू की गई है। इससे मध्यप्रदेश भारत के ड्रोन एवं भू-स्थानिक इकोसिस्टम में अग्रणी राज्य बन गया है। यह पहल प्रदेश में गवर्नेंस को पूर्णतः डिजिटल बनाने की राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह तकनीक शासन की प्रक्रियाओं को सुगम, सुदृढ़ और पारदर्शी बनाती है। विभागों के बीच ड्रोन-आधारित इंटेलिजेंस को संस्थागत रूप देकर प्रदेश एक अधिक कनेक्टेड, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार प्रशासनिक ढांचे की ओर तेजी से अग्रसर है। डीडीआर का शुभारंभ ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0’ के अवसर पर किया गया था। इसे राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 तथा डीजीसीए के यूएएस नियम 2021 के अनुरूप विकसित किया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा विकसित यह रिपोज़िटरी फ्यूचर-रेडी डिजिटल गवर्नेस की एक सुदृढ़ आधारशिला सिद्ध होगी। मध्यप्रदेश में ड्रोन तकनीक का प्रभावी एवं व्यापक उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में भूमि सर्वेक्षण, कृषि प्रबंधन, सिंचाई परियोजनाओं, खनन पट्टों की निगरानी, आधारभूत संरचना निर्माण, पर्यावरणीय मूल्यांकन, नगरीय नियोजन तथा आपदा प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में उच्च-रिज़ॉल्यूशन ड्रोन सर्वेक्षण किए जा रहे हैं।अब तक ड्रोन सर्वेक्षणों से प्राप्त डेटा विभिन्न विभागों में अलग-अलग संकलित होता रहा, जिससे कई स्थानों पर सर्वेक्षणों की पुनरावृत्ति,अपूर्ण डेटा एकत्र होने और कई महत्वपूर्ण इमेजरी व भू-स्थानिक जानकारियों को सुरक्षित रखने की चुनौती सामने आई। ड्रोन डेटा रिपोज़िटरीः एकीकृत, सुरक्षित और पारस्परिक रूप से सक्षम भू-स्थानिक प्लेटफॉर्म डीडीआर एक केंद्रीकृत, क्लाउड-आधारित, सुरक्षित और इंटर-ऑपरेबल डिजिटल अवसंरचना है। इससे भू-स्थानिक प्रशासन के भविष्य का आधार तैयार होता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले ड्रोन डेटा संग्रहित किए जा रहे हैं। इस डेटाबेस में उच्च-रिज़ॉल्यूशन ऑर्थोमोज़ाइक, 3D टेरेन मॉडल, लिडार स्कैन, वीडियो इमेजरी, लिगेसी बेसलाइन डेटा और बहु-विभागीय सर्वेक्षण रिकॉर्ड शामिल किये जाते हैं। हर डेटा फ़ाइल को सटीक लैटिट्यूड-लाँगीट्यूड मेटाडाटा, सर्चेबल की-वर्ड, मानकीकृत तकनीकी फॉर्मेट और स्वचालित वर्गीकरण के साथ रिपोज़िटरी में संरक्षित किया जाता है। इस डेटा से सभी अधिकारी खोज, तुलना और विश्लेषण कर सकते हैं। डेटा दोहराव में कमी और दक्षता में वृद्धि प्रदेश में पहली बार सभी विभागों के ड्रोन सर्वे डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर समेकित किया है। इसके परिणामस्वरूप ड्रोन सर्वेक्षणों के दोहराव में 30-50% तक कमी आई है। डेटा पारदर्शिता में वृद्धि, विभागीय सहयोग में सुधार,फील्ड-वेरिफिकेशन में सटीकता और निर्णय लेने की गति में अत्यधिक बढ़ोतरी संभव हुई है। अब विभाग स्थान, परियोजना, मेटाडाटा, विषय या उद्देश्य के आधार पर आसानी से आवश्यक भू- स्थानिक डेटा खोज सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण डीडीआर की तकनीकी संरचना अत्याधुनिक है। इससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग, लिगेसी डेटा की तुलनात्मक समीक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण, स्वचालित कैटलॉगिंग, टाइम-लैप्स परियोजना निगरानी, भविष्य-अनुमान मॉडलिंग और मल्टी-डिपार्टमेंट डेटा इंटीग्रेशन सुगम हुआ है। परिणामस्वरूप डेटा अधिग्रहण का समय सप्ताह से घटकर दिनों में आ गया है। योजनाओं का मूल्यांकन अधिक विश्वसनीय और नीति-निर्माण अधिक तथ्य परक, त्वरित और प्रभावी हुआ है। डीडीआर से व्यापक लाभ भू-अभिलेख एवं राजस्व विभाग में भूखंड सीमांकन में उच्च सटीकता, किरायेदारी एवं कब्जा सत्यापन, अतिक्रमण की पहचान और भूमि विवादों का त्वरित निराकरण संभव हुआ है। आधारभूत संरचना एवं निर्माण परियोजनाओं-सड़कों, पुलों, नहरों, सोलर पार्कस एवं सार्वजनिक निर्माण कार्यों की टाइम-लैप्स निगरानी होने लगी है और परियोजनाओं की प्रगति का वैज्ञानिक मूल्यांकन आसान हुआ है। नगरीय प्रशासन एवं शहरी नियोजन के क्षेत्र में उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D मॉडल आधारित ज़ोनिंग, जल, सीवर, परिवहन और उपयोगिता सेवाओं की कुशल योजना बनाने में डीडीआर का उपयोग प्रभावी सिद्ध हुआ है। आपदा प्रबंधन जैसे बाढ़, आग, भू-स्खलन के बाद त्वरित नुकसान आकलन और लिगेसी बेसलाइन डेटा के आधार पर राहत और पुनर्वास की रणनीति बनाना आसान हुआ है। कृषि, सिंचाई, वन एवं पर्यावरण विभाग डीडीआर का उपयोग फसल स्थिति विश्लेषण, कीट-प्रभाव पहचान, माइक्रो- सिंचाई आवश्यकताओं का निर्धारण, वन संरक्षण एवं अवैध कटाई की निगरानी और पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन में डीडीआर का उपयोग किया जा रहा है। डीडीआर को राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में कदम प्रदेश सरकार आगामी समय में इस ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी को एक राष्ट्रीय रूप से सुलभ भू-स्थानिक ढांचे में विकसित करेगी।इसके लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अनुसंधान संस्थानों, GIS विशेषज्ञों, स्टार्ट-अप्स और निजी उ‌द्योग सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाने की योजना है। राज्य का लक्ष्य है कि डीडीआर अनावश्यक ड्रोन सर्वेक्षण को कम करे, अंतर्राज्यीय आपदा प्रबंधन सहयोग को मजबूत बनाए और उच्च-गुणवत्ता वाले भू-स्थानिक डेटा आधारित नीति-निर्माण को सक्षम करे। ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी मध्यप्रदेश की डेटा-आधारित गवर्नेस यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम है, इसमें नवाचार, पारदर्शिता और भू-स्थानिक इंटेलिजेंस शासन का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं। एकीकृत और इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डेटा डुप्लिकेशन समाप्त होगा। इससे स्मार्ट गवर्नेंस की मजबूत नींव स्थापित होगी।  

हरियाणा में फसल खरीद में लापरवाही पर सैनी सरकार करेगी सख्त कार्रवाई

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फसल खरीद व्यवस्था में आई अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक किसान की फसल का एक एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, वहीं गलत खरीद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सैनी फसल खरीद प्रणाली को और अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल तथा खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री राजेश नागर भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने संबंधित खरीद एजेंसियों के अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि आगामी खरीद सीजन के दौरान फील्ड में नियमित और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि किसान की सही उपज बिना किसी बाधा के एम.एस.पी. पर खरीदी जा सके। उन्होंने कहा कि फसल खरीद में पूर्व में उजागर हुई अनियमितताओं एजेंसियों और सिस्टम के साथ बड़ा धोखा है। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। करनाल धान घोटाला न सिर्फ जिले बल्कि पूरे प्रदेश की खरीद को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी खरीद सीजन में इस प्रकार की कोई भी समस्या दोबारा नहीं आनी चाहिए। साथ ही, उन्होंन स्पष्ट किया कि फसल खरीद में संलिप्त पाए किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई तुरंत अमल में लाई जाए। इससे फील्ड स्तर पर यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि गलत कार्य करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। शैलरों की जांच के लिए संबंधित विभाग की समिति ही जाए: मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी शेलर या आड़ती द्वारा मिलीभगत कर भारी अनियमितताएं पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ भारी पैनल्टी भी लगाई जाए। उन्होंने कहा कि शेलरों की जांच के लिए संबंधित विभाग की समिति ही जाए, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से जांच पर न जाए। यदि ऐसा पाया गया तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। प्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के अगले चरण में और कौन-कौन से बड़े चेहरे बेनकाब होते हैं।

उद्योग जगत बोला, सीएम योगी के नेतृत्व में बदला प्रदेश का सिस्टम, निवेश के लिए बना भरोसेमंद मॉडल

मुख्यमंत्री योगी से मिले सीआईआई के प्रतिनिधि, राज्य में व्यापार और निवेश का बन रहा बेहतर माहौल उद्योग जगत बोला, सीएम योगी के नेतृत्व में बदला प्रदेश का सिस्टम, निवेश के लिए बना भरोसेमंद मॉडल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के कारण देशभर के उद्योगपतियों का रुख उत्तर प्रदेश की ओर बेहतर कानून व्यवस्था से यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद उद्योग स्थापना को लेकर सीएम योगी के साथ उद्योगपतियों ने किया महत्वपूर्ण विचार-विमर्श उद्योगपतियों को इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में हरसंभव मदद करेगी योगी सरकार यूपी में जमीन पर काम करना अब पहले से काफी आसान, प्रोजेक्ट लगाने को लेकर देश की इंडस्ट्री उत्साहित लखनऊ  बेहतर कानून व्यवस्था और स्थिर प्रशासनिक माहौल के चलते उत्तर प्रदेश अब देशभर के उद्योग जगत की पहली पसंद बनता जा रहा है। सुरक्षा, अनुशासन और निष्पक्ष शासन ने निवेशकों का भरोसा प्रदेश में मजबूत किया है। इसके परिणामस्वरूप बड़े, मध्यम और छोटे तीनों सेगमेंट के उद्योग तेजी से उत्तर प्रदेश की ओर रुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री से भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष श्री राजीव मेमानी, नई दिल्ली,  श्री उमाशंकर भरतिया, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, इण्डिया ग्लाइको लि०, दिल्ली / नोएडा व श्री सुनील मिश्रा ने मुलाकात कर निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विस्तार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश का सिस्टम और गवर्नेंस मॉडल पूरी तरह बदला है। अब जमीन पर काम करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हुआ है और परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के विजन में उद्यमी सहयोग करना चाह रहे हैं। सीएम योगी के साथ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बढ़ाने के लिए भी विचार विमर्श किया गया। उत्तर प्रदेश में डिक्रिमिनलाइजेशन विधेयक लागू होने के बाद इंडस्ट्री का भरोसा और बढ़ा है। इसके साथ ही प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों और प्रोत्साहन के कारण ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है। एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब से औद्योगिक इकोसिस्टम को मिली मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर प्रतिनिधिमंड ने स्पष्ट रूप से कहा कि सख्त कानून-व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश का औद्योगिक वातावरण पूरी तरह बदल दिया है। निवेश निर्णयों के लिए आवश्यक सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स हब तथा बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के तेज विकास ने राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम को नई मजबूती प्रदान की है। सिंगल-विंडो सिस्टम और डिजिटल प्रक्रियाओं से उद्योग स्थापना हुई आसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुए विचार-विमर्श में यह भी सामने आया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अब केवल नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो रहा है। प्रदेश सरकार की सिंगल-विंडो सिस्टम सेवा निवेश मित्र जहां वर्तमान में 43 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं उपलब्ध है, जहा भौतिक हस्तक्षेप के बिना समयबद्ध डिजिटल स्वीकृतियों के चलते प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। राज्य सरकार की प्रो-इंडस्ट्री नीति और त्वरित निर्णय क्षमता निवेश को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में उच्चीकृत निवेश मित्र 3.0 को जल्द लांच किया जायेगा जिसमें एआई व चैटबाट जैसी सुविधाओं से निवेशकों की निवेश यात्रा और आसान होगी ।    यूपी में नए निवेश और विस्तार योजनाओं को लेकर उद्यमी उत्साहित प्रतिनिधियों ने कहा कि समग्र रूप से बेहतर कानून व्यवस्था, सशक्त इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी प्रशासन और उद्योगों को मिल रहे सहयोग के चलते उत्तर प्रदेश एक विश्वसनीय और स्थिर निवेश राज्य के रूप में उभर रहा है। यही कारण है कि देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगपति आने वाले समय में यूपी में नए निवेश और विस्तार योजनाओं को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि तय मानी जा रही है।

झारखंड में आभा नंबर के जरिए मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री होगी ऑनलाइन

रांची. झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में इलाज कराने वाले हर मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री अब ऑनलाइन दर्ज होगी, जिसे किसी भी अस्पताल के डॉक्टर आसानी से एक्सेस कर देख सकेंगे। मरीज को पहले कौन-सी बीमारी थी, कहां और कब इलाज हुआ, कौन-सी दवाएं चल रही हैं या पहले दी गई थीं। ब्लड, यूरिन, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच की पूरी जानकारी सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। यह पूरी व्यवस्था आभा आईडी के माध्यम से संचालित की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग इसे जल्द ही राज्य के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में लागू करने की तैयारी में है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले एक साल से सभी सरकारी अस्पतालों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके बाद अबतक राज्य भर में 50 लाख से ज्यादा लोगों का आभा नंबर जेनरेट हो चुका है। बीते करीब एक साल से सरकारी अस्पतालों में मरीज आभा ऐप और ड्रिफकेस ऐप के जरिए खुद ही अपना रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। आने वाले समय में शेष मरीजों को भी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। यह सिस्टम कैसे करेगा काम आभा आईडी मरीज की डिजिटल हेल्थ पहचान होगी। यह आधार से वेरिफाइड होगी। अस्पतालों में ई-सुश्रुत पोर्टल पर डॉक्टर मरीज का पूरा डेटा दर्ज करेंगे। मेडिकल हिस्ट्री, ट्रीटमेंट और सभी रिपोर्ट्स अपलोड की जाएंगी। यह डेटा आभा पोर्टल से लिंक रहेगा। देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर इसे एक्सेस कर सकेंगे। इस नई डिजिटल व्यवस्था से मरीजों को बार-बार पुरानी रिपोर्ट साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी। इमरजेंसी में डॉक्टर तुरंत मरीज की बीमारी की पूरी जानकारी देख सकेंगे। मरीज जहां चाहे, वहां इलाज करा सकेंगे। सदर अस्पताल रांची में लागू रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में यह व्यवस्था पहले से लागू कर दी गई है। यहां पिछले कई महीनों से मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में इलाज करा चुके किसी भी मरीज की आभा आईडी यदि देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर एक्सेस करेंगे, तो मरीज की पूरी रिपोर्ट, इलाज का विवरण और मेडिकल हिस्ट्री स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी। मरीज खुद कैसे बनवा सकेंगे आभा आईडी मरीज आसानी से अपना आभा आईडी बना सकते हैं। मोबाइल में आभा या ड्रिफकेस ऐप डाउनलोड करें। आधार नंबर या मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें। ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद आईडी जनरेट होगी। यह आईडी आजीवन मान्य रहेगी।

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुवाद पर चर्चा, रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग उठाई

जबलपुर : वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में  जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जबलपुर पहुंचे. इस मौके पर संत रामभद्राचार्य महाराज ने मांग की है कि रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए. वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि रामायण एक ऐसा ग्रंथ है जिसे दुनिया के कई देशों में पढ़ा और सुना जाता है. यह हमें प्रेम का पाठ भी सिखाती है. राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित हो रामायण मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, '' रामायण एक ऐसा ग्रंथ है, जिसे दुनिया के कई देशों में पढ़ा और सुना जाता है. जकार्ता, इंडोनेशिया, थाईलैंड जैसे देशों के अलावा जापान जैसे देश में भी रामायण और रामायण के चित्रों को लेकर चर्चा होती है.'' मोहन यादव ने कहा कि भगवान राम के संबंध अपने शत्रुओं से भी मर्यादा के थे. इस मौके पर संत रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए. उन्होंने ने बताया कि गांधी जी का प्रसिद्ध भजन रघुपति राघव राजा राम के सभी शब्द रामचरितमानस से ही लिए गए हैं. जबलपुर के साथ दिल्ली में हो वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, '' वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस एक शानदार आयोजन है. इसमें भगवान राम के चरित्र को लेकर दुनिया भर में जो काम हो रहा है, उस पर चर्चा होती है लेकिन यह आयोजन केवल जबलपुर तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि इसे जबलपुर के बाहर भी किया जाना चाहिए.'' उन्होंने वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के आयोजक अजय बिश्नोई और अखिलेश गुमास्ता से कहा कि इस आयोजन को अब दिल्ली में भी किया जाए. हिंदू धर्म ग्रंथों को ट्रांसलेट कर रहे अन्य देश कार्यक्रम में शामिल होने आए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को जबलपुर में गीता भवन का लोकार्पण भी किया. वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस की आयोजन समिति के सदस्य मध्य प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री अजय बिश्नोई ने कहा, '' वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का यह चौथा साल है और अब इसके प्रयासों का असर भी दिखने लगा है. दुनिया के कई देशों में रामायण पर शोध कार्य चल रहे हैं. कई देशों में रामायण और हिंदू धर्म के ग्रंथ ट्रांसलेट किए जा रहे हैं.'' इस कार्यक्रम की तस्वीरें मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा, '' संस्कारधानी जबलपुर में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के सान्निध्य में आयोजित चौथी वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में आज केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी के साथ सहभागिता की. भगवान श्रीराम की पावन गाथाएं युगों-युगों तक मानवता को कर्तव्य, मर्यादा और लोककल्याण के मार्ग पर अग्रसर करने वाली दिव्य प्रेरणा हैं.''

अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला: काराकस समेत 4 शहरों में बमबारी, मादुरो ने नेशनल इमरजेंसी की घोषणा

काराकस  अमेरिकी सेना ने आखिरकार वेनेजुएला पर हमला बोल दिया है। राजधानी काराकस में शनिवार सुबह तड़के तेज धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। काराकस में मौजूद CNN के पत्रकारों ने धमाकों की पुष्टि की है। पहला धमाका स्थानीय समयानुसार लगभग 1:50 बजे हुआ। शहर के कई इलाकों में बिजली गायब हो गई है। धमाकों के बाद वेनेजुएला की राजधानी में कम ऊंचाई पर उड़ते हुए विमानों की आवाजें सुनाई दी हैं। वहीं, वेनेजुएला के सूत्रों ने स्काई न्यूज अरबिया को बताया कि हवाई हमलों में देश के रक्षा मंत्री के घर और राजधानी काराकस में एक बंदरगाह को निशाना बनाया गया। वेनेजुएला में इन 5 प्रमुख ठिकानों को अमेरिका ने बनाया निशाना कोलंबिया के राष्ट्रपति ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में अमेरिकी वायु सेना द्वारा किए गए हमलों से प्रभावित ठिकानों की सूची प्रकाशित की है. इस सूची में सैन्य और सरकारी सुविधाओं के साथ-साथ देश के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज का मेमोरियल भी शामिल है. अमेरिका ने जिन ठिकानों को एयर स्ट्राइक के जरिए निशाना बनाया उनमें… फोर्ट ट्यूना – काराकस का मेन मिलिट्री बेस ला कार्लोटा – काराकस का मेन एयरबेस एल वोल्कान – मेन रडार स्टेशन ला गुएरा पोर्ट – वेनेजुएला का प्रमुख बंदरगा​ह  इगुएरोटे एयरपोर्ट – मिरांडा राज्य का हवाई अड्डा शामिल हैं.  अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत वेनेजुएला छोड़ने को कहा अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए वेनेजुएला की यात्रा नहीं करने की एडवाइजरी जारी की है. इसमें अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है, 'वेनेजुएला की यात्रा न करें और न ही वहां ठहरें, क्योंकि वहां आपको गलत तरीके से हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया जा सकता है. आपका अपहरण हो सकता है या स्थानीय कानूनों का आपके खिलाफ गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. इस समय वेनेजुएला में अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ अपराध, नागरिक अशांति और खराब स्वास्थ्य व्यवस्था का खतरा बहुत अधिक है. वेनेजुएला में रहने वाले सभी अमेरिकी नागरिकों और वैध स्थायी निवासियों को तुरंत वहां से निकलने की सलाह दी जाती है.'  अमेरिका ने कमर्शियल विमानों के वेनेजुएलन एयरस्पेस में जाने पर लगाया बैन एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में चल रही सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर अपने कमर्शियल विमानों के ऑपरेशन पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह प्रतिबंध वेनेजुएला की राजधानी काराकस में सिलसिलेवार धमाकों की खबरों से कुछ ही समय पहले लगाया गया.  अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला में नेशनल इमरजेंसी लागू वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य हमारे देश के रणनीतिक संसाधनों, खासकर तेल और खनिजों पर कब्जा करना और राजनीतिक स्वतंत्रता को बलपूर्वक तोड़ना है. उन्होंने देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है. मादुरो ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी नेशनल डिफेंस प्लान को उचित समय और उपयुक्त परिस्थितियों में लागू किया जाए. साथ ही, उन्होंने देश की सभी सामाजिक और राजनीतिक शक्तियों से इस साम्राज्यवादी हमले के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपील की है. मादुरो के खिलाफ क्यों हैं ट्रंप? ऐसे में आइए समझते हैं कि अमेरिका के वेनेजुएला पर सीधा हमला करने के पीछे की वजह क्या है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बनाए हुए हैं। अमेरिकी युद्धपोतों को इस दक्षिण अमेरिकी देश के पास तैनात किया गया है, जिसे ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कहा है। इसके पहले 29 दिसम्बर को ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की ड्रग्स वाली नावों के लिए एक डॉकिंग एरिया पर हमला किया था, लेकिन उन्होंने हमले की जगह नहीं बताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार चेतावनी देते रहे हैं कि अमेरिका वेनेजुएला में कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है और जमीन पर जल्द ही हमले शुरू होंगे। अक्टूबर में ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने CIA को वेनेजुएला के अंदर काम करने की इजाजत दी है, ताकि इस दक्षिण अमेरिकी देश से आने वाले अवैध प्रवासियों और ड्रग्स की बाढ़ पर रोक लगाई जा सके। क्या है वेनेजुएला और अमेरिका के बीच विवाद? वेनेजुएला अब तक की सबसे बड़ी नौसैनिक घेराबंदी का सामना कर रहा है. अमेरिका पिछले कई महीनों से कैरिबियन क्षेत्र में अपनी सेना को जमा कर रहा है. USS गेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर भी इस अभियान में शामिल है. दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य जड़ तेल और गैस से जुड़ी है. हालांकि अमेरिका का ये भी आरोप है कि वेनेजुएला की सरकार अवैध ड्रग्स के कारोबार में लिप्त है जिसका बुरा प्रभाव अमेरिकी लोगों पर पड़ रहा है. अमेरिका ने 2025 में ऑपरेशन सदर्न स्पीयर चलाकर कैरिबियन सागर में वेनेजुएला से जुड़े कथित ड्रग तस्करी वाले जहाजों पर हवाई हमले भी किए. अमेरिकी नौसेना के विमान अब तक कम से कम 25 टैंकरों पर हमले कर चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का सीधा आरोप है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो खुद नशीली दवाओं की तस्करी के अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं. अमेरिका का दावा है कि मादुरो “नार्को-टेररिस्ट” संगठन चला रहे हैं और अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी कर रहे हैं. वेनेजुएला से आने वाली नावों को रोकने के लिए अमेरिका ने नौसैनिक नाकाबंदी लगाई है. अमेरिका ने वेनेजुएला के कई तेल टैंकरों को जब्त किया है और कुछ पर हमला भी किया है. निकोलस मादुरो साल 2023 से ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद पर काबिज हैं. मादुरो अमेरिका और ट्रंप के विरोधी माने जाते हैं. अमेरिका का ये भी कहना है कि अमेरिका का ये भी कहना है कि वेनेजुएला का तेल असल में अमेरिका का है और वहां तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण चोरी था. अमेरिका का कहना है कि उनकी तकनीक और पूंजी से वेनेजुएला में तेल उद्योग खड़ा हुआ लेकिन सत्ता में आने के बाद निकोलस मादुरो ने इसे जबरन अपने कब्जे में ले लिया. डोनाल्ट ड्रंप खुद ये कह चुके हैं कि वेनेजुएला को वह सारा तेल, जमीन और अन्य संपत्ति वापस करनी होगी जो पहले हमसे चुराई गई थी. वेनेजुएला का क्या कहना है? वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने आरोप लगाया है कि अमेरिका उसके तेल, सोना और अन्य संसाधनों पर कब्जा करने की … Read more

मध्य प्रदेश में दूषित पानी की समस्या को लेकर नया कदम, मोहन यादव ने लागू की वाटर सीवर गाइडलाइन

इंदौर  भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद राज्य सरकार ने सभी नगर निगम और नगर पालिका के लिए वाटर सीवर गाइडलाइन लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत शहरी क्षेत्र में पानी की आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी. सीएम मोहन यादव ने किया गाइडलाइन जारी इंदौर में बीते दिनों दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के नगर निगम और नगरीय निकायों के कार्यक्रम के दौरान एक गाइडलाइन जारी किया. केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियंत्रण संगठन (CPHEEO) द्वारा जारी जल आपूर्ति और उपचार नियमावली पर आधारित इस गाइडलाइन का अब शहरी और स्थानीय निकायों को पालन करना होगा. लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई अपर मुख्य सचिव नगरी प्रशासन संजय दुबे द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, अब पाइपलाइन रिसाव की पहचान और जल वितरण प्रणाली को 7 दिनों में सर्वे कर चिन्हांकन किया जाएगा. इसके अलावा पुराने एवं बार-बार लीकेज होने वाली पाइपलाइन और नाली-सीवर के नीचे से गुजरने वाली पाइपलाइनों की पहचान कर 48 घंटे के भीतर मरम्‍मत करना जरूरी होगी. इसके साथ ही जल शोधन संयंत्र (WTP) तथा उच्‍च स्‍तरीय टंकियां की साफ-सफाई का 7 दिवस के अंदर निरीक्षण करना जरूरी होगा. वहीं सभी जल शोधन संयंत्रों, प्रमुख जल स्रोतों तथा उच्‍च स्‍तरीय टंकियों का तत्काल जल नमूना लेकर प्रशिक्षण कराया जाएगा. गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर सख्त एक्शन की चेतावनी वहीं प्लांट अथवा जलप्रपात क्षेत्र में संबंधित अधिकारियों से संपर्क के लिए सूचना पटल और सार्वजनिक बोर्ड प्रदर्शित करने होंगे. जिस पर सभी अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर मौजूद रहेगा. इसके अलावा जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों को इमरजेंसी श्रेणी में रखा जाएगा. जिसका निराकरण 24 से 48 घंटे में किया जाएगा. इसके साथ ही सी.एम हेल्‍पलाईन में गंदा/दूषित पेयजल तथा सीवेज से संबंधित प्राप्‍त शिकायतों के निराकरण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जाएगी. इस मामले में नगरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि "इंदौर के अलावा प्रदेश भर में साफ-सुथरा पानी मुहैया कराया जा सके. इसके लिए गाइडलाइन तय की गई है. जिसका पालन सभी शहरी नगर निगम और नगर पालिका को करना होगा. गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही होगी."