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मोहन यादव सरकार ने लिया बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों के लिए दो बच्चों की शर्त को समाप्त करने की दिशा में कदम

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त हटाने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से सलाह के बाद इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस बदलाव से उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो इस नियम के कारण नौकरी के लिए अपात्र हो गए थे या जिनकी सेवाएं समाप्त हो गई थीं। 2001 से लागू था नियम यह नियम 26 जनवरी, 2001 से लागू था, जिसके तहत तीसरा बच्चा होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलती थी और नौकरी में रहते हुए तीसरा बच्चा होने पर सेवा समाप्त कर दी जाती थी। यह नियम तब बनाया गया था जब प्रदेश में प्रजनन दर अधिक थी। हालांकि, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन 2023 के अनुसार, मध्य प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.4 है, जो भारत की टीएफआर 1.9 से अधिक है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.6 है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य पहले ही इस तरह के नियमों को संशोधित कर चुके हैं। इन कर्मचारियों को होगा लाभ इस नए नियम से स्कूल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और अन्य विभागों के कर्मचारियों को लाभ होगा। हालांकि, जिन कर्मचारियों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें इस नए नियम से कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। परिवीक्षा अवधि में भी संशोधन इसके साथ ही, परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि को लेकर भी नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब कर्मचारी परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर नियमित कर दिए जाएंगे, जिससे उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर पड़ने वाले असर को रोका जा सकेगा। परिवीक्षा अवधि के नियम में भी सरकार संशोधन कर रही है। अब नियुक्ति के बाद दो या तीन साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। अभी इसमें देरी होने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान होता है, क्योंकि उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर इसका असर पड़ता है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ लगातार इस बात को उठा रहा था कि परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के लिए समितियों की बैठकें नियमित रूप से होनी चाहिए।

ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2: 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा, बाघों के शिकार पर होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 56 बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने शिकार और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी टाइगर रिजर्व, वन मंडल और वन विकास मंडलों में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ चलाया जाएगा। इस विशेष अभियान के दौरान फील्ड स्तर पर सघन गश्त अनिवार्य होगी और शिकार की किसी भी घटना पर तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा इसको लेकर जारी निर्देश में कहा गया है कि हर वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में एक उपवन मंडल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को जानकारी भेजेगा। ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप एक माह पांच दिन तक चलेगा। इस दौरान सभी वन मंडल इकाइयों में सघन गश्ती दिन और रात्रि में की जाएगी। सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ अधिकारी गश्त करेंगे। साथ ही हफ्ते में दो दिन वन मंडल अधिकारी और उप वन मंडल अधिकारी वहीं एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक गश्त करेंगे। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ठंड के मौसम में शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। फंदे और विद्युत करंट का उपयोग कर किए जाने वाले अवैध शिकार में बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य संरक्षित वन्य प्राणी भी फंस जाते हैं। बीते वर्ष बाघों की मौत के मामलों में शिकार की आशंका लगातार सामने आने के बाद विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ पूरे प्रदेश में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल शामिल होंगे। अभियान की अवधि में दिन और रात दोनों समय गश्त की जाएगी। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक वन मंडल, टाइगर रिजर्व और वन विकास मंडल में उपवन मंडल स्तर का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगा। गश्त के दौरान सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी और अधीनस्थ अधिकारी क्षेत्र में रहेंगे। दो दिन वन मंडल अधिकारी और उपवन मंडल अधिकारी, जबकि एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक द्वारा अनिवार्य निरीक्षण किया जाएगा। अभियान में प्रदेश के 9 डॉग स्क्वाड, 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड और एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड को सक्रिय रूप से लगाया जाएगा। संवेदनशील इलाकों, शिकारी और घुमक्कड़ समुदायों के डेरों, वन सीमा से सटे क्षेत्रों और विद्युत लाइनों के आसपास सघन सर्चिंग की जाएगी। मेटल डिटेक्टर उपकरणों का भी उपयोग किया जाएगा। यदि शिकार के फंदे में कोई वन्य प्राणी फंसा मिलता है, तो तत्काल रेस्क्यू कर उपचार की व्यवस्था और अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश हैं। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच फंदे और विद्युत करंट से शिकार के 933 मामले दर्ज हुए। इनमें 39 बाघ, 101 तेंदुए, 36 भालू और 17 राष्ट्रीय पक्षी मोर शामिल हैं। सिर्फ वर्ष 2025 में ही 56 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 36 मामलों में शिकार की आशंका जताई गई है। अभियान के दौरान रोजाना स्तर पर वन मंडल अधिकारी समीक्षा करेंगे, जबकि साप्ताहिक समीक्षा मुख्य वन संरक्षक और क्षेत्र संचालकों द्वारा की जाएगी। वन विभाग का कहना है कि ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ का उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि शिकार की घटनाओं को रोकना और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गश्त को लेकर जारी निर्देश     प्रदेश में वर्तमान में 9 डॉग स्क्वाड हैं। इसका भी प्रयोग इस दौरान किया जाएगा।     गश्त के दौरान संवेदनशील क्षेत्र एवं शिकारी व घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की चेकिंग, सर्चिंग कार्यवाही की जाएगी।     सर्चिंग के दौरान निकटतम डॉग स्क्वाड को साथ रखा जाएगा और मेटल डिटेक्टर उपकरण भी उपयोग में लाए जाएंगे।     गश्त के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र और बागड़, फेंसिंग में सर्चिंग की जाएगी।     प्रदेश में वर्तमान में 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड काम कर रहा है, इसको भी उपयोग में लाया जाएगा। गश्त के दौरान शिकार के लिए प्रयुक्त फंदे में वन्य प्राणी फंसा पाए जाने की स्थिति में तत्काल निकटतम रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन्य प्राणी के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी। अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। ऐसे मामले में अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाएगी।     वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र से जाने वाले विद्युत लाइन के नीचे और उसके आसपास गश्ती करने के लिए भी कहा गया है और आवश्यकता अनुसार विद्युत अमले को भी साथ रखने के लिए कहा गया है।     गश्त के दौरान शिकार के लिए लगाए गए फंदे में फैलाया गया विद्युत करंट, वायर वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र में पाए जाने पर प्रकरण में मिले साक्ष्य के आधार पर जब्त कर अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा और अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर कार्यवाही की जाएगी।     गांव और शहर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी निगरानी पंजी में भी दर्ज की जाएगी।     ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप के अंतर्गत वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में की जा रही कार्यवाही की समीक्षा रोज वन मंडल अधिकारी करेंगे और हर सप्ताह संबंधित मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक, क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक के द्वारा भी इसकी समीक्षा की जाएगी। प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 11 परियोजना मंडल सभी मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, क्षेत्रीय क्षेत्र संचालक, संचालक टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक वन विकास निगम, वन मंडल अधिकारी तथा संभागीय प्रबंधक वन विकास निगम को जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल हैं। ऐसे इलाकों में शिकारी और मांस के शौकीन लोगों द्वारा शिकार के जो तरीके अपनाए जाते हैं उससे बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू आदि भी शिकार हो जाते हैं। विभागीय पोर्टल में दर्ज शिकार के प्रकरणों का विश्लेषण करने पर पाया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 तक फंदे एवं विद्युत लाइन में तार फंसाकर शिकार से संबंधित कुल 933 प्रकरण … Read more

15 अगस्त 2027 से भारत में शुरू होगी पहली बुलेट ट्रेन, सूरत–वापी से होगी शुरुआत

 सूरत देश की बहुप्रतिक्षित बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को इसके बारे में संकेत दिया था. उन्होंने कहा था कि, 15 अगस्त, 2027 को पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है.  भारत में बुलेट ट्रेन का सपना अब साकार होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। नए साल के मौके पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देशवासियों को बड़ी सौगात देते हुए बताया कि 15 अगस्त 2027 से देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी। रेल मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अगले स्वतंत्रता दिवस के लिए लोग अभी से बुलेट ट्रेन की यात्रा का मन बना सकते हैं। पहले चरण में यह हाई-स्पीड ट्रेन सूरत से वापी के बीच लगभग 100 किलोमीटर के हिस्से में चलाई जाएगी। अहमदाबाद से मुंबई के बीच प्रस्तावित देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अहमदाबाद से मुंबई के बीच प्रस्तावित है। इसके पूरा होने के बाद दोनों महानगरों के बीच 508 किलोमीटर की दूरी मात्र 2 घंटे 17 मिनट में तय की जा सकेगी। फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना का करीब 55 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरत में परियोजना की प्रगति की समीक्षा भी की थी। पूरे रूट में से 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा-नगर हवेली में जबकि 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में आता है। यह परियोजना नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा जापान के सहयोग से तैयार की जा रही है। जापान के तकनीक पर आधारित होगी यह ट्रेन जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन तकनीक पर आधारित होगी, जिसकी अधिकतम गति 320 किमी प्रति घंटा होगी। पूरे मार्ग पर कुल 12 स्टेशन होंगे, जिनमें अहमदाबाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, वापी, ठाणे और मुंबई शामिल हैं। परियोजना का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा एलिवेटेड ट्रैक पर है, जिसमें से 326 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। दुनिया में हाई-स्पीड ट्रेनों की बात करें तो चीन के पास सबसे बड़ा नेटवर्क है, जबकि जापान ने 1964 में सबसे पहले बुलेट ट्रेन शुरू की थी। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, दक्षिण कोरिया और ताइवान भी इस क्षेत्र में आगे हैं। अमेरिका, इंडोनेशिया और मोरक्को में भी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, बुलेट ट्रेनें 2027 तक पटरी पर आ जाएंगी. इसका पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक चालू किया जाएगा. दूसरा सेक्शन वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, फिर ठाणे से अहमदाबाद और आखिर में मुंबई से अहमदाबाद में शुरू होगा. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए वैष्णव ने आगे कहा कि, पोल लगाने के लिए एक नई तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें पोल ​​को ज़मीन से उठाकर वायडक्ट तक ले जाया जाता है. यह टेक्नोलॉजी भारत में डेवलप की गई है. अब जापान भी अपने प्रोजेक्ट्स में इसका इस्तेमाल करेगा. केंद्रीय मंत्री ने ट्रैक सिस्टम की नई टेक्नोलॉजी के बारे में आगे बताया कि, उन्हें J-Slab के लिए एक बहुत अच्छा इनोवेशन मिला है. यह वह स्ट्रक्चर है जिस पर ट्रैक बिछाया जाता है. वैष्णव ने कहा कि, यह स्लैब फैक्ट्री में तैयार किया जाता है, साइट पर लाया जाता है, और फिर मशीनों का इस्तेमाल करके एक-एक करके बिछाया जाता है. बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशन हैं, महाराष्ट्र में मुंबई, थाने, विरार और बोइसर. गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती. हालांकि, साबरमती और मुंबई टर्मिनल स्टेशन हैं. मुंबई स्टेशन BKC (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) में है, और तीन डिपो बनाए गए हैं. महाराष्ट्र में दूसरी टनल का निर्माण पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में से एक, 1.5 किलोमीटर की पहाड़ी सुरंग, विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच है. ठाणे और BKC के बीच पहली 5 किलोमीटर की अंडरग्राउंड सुरंग पिछले साल सितंबर में पूरी हुई थी. प्रोजेक्ट की कुल लंबाई प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 508 किलोमीटर और टनल की लंबाई 27.4 किलोमीटर है. इसमें से 21 किलोमीटर अंडरग्राउंड टनल और 6.4 किलोमीटर सरफेस टनल है. कुल 8 माउंटेन टनल हैं. जिसमें से 7 महाराष्ट्र में 6.05 किलोमटर और एक गुजरात में 350 मीटर टनल है. ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप घनी आबादी वाले शहरों, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और सुरक्षित वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी से अपना रास्ता बनाते हुए, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट देश में अब तक की सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग चुनौतियों का सामना कर रहा है. फिर भी, हर माइलस्टोन हासिल करने के साथ, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर असलियत के करीब आता जा रहा है, एक बार पूरा होने के बाद, यह प्रोजेक्ट भारत के ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप में एक बड़ा बदलाव लाने वाला अध्याय होगा. पूरे कॉरिडोर में कंस्ट्रक्शन का काम तेजी पकड़ रहा है. जियोटेक्निकल जांच पूरी होने वाली है, रणनीतिक तौर पर ज़रूरी पहाड़ी सुरंगों पर काम शुरू हो गया है, और लगभग 11 किलोमीटर तक पियर बनाने के लिए ओपन फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है. नॉइज बैरियर जैसे-जैसे कॉरिडोर बन रहा है, इसके रास्ते में रहने वाले समुदायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा कि, ट्रेन के चलने से होने वाले शोर को कम करने के लिए, हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन ने वायडक्ट के दोनों तरफ नॉइज बैरियर लगाना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि, शिंकानसेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, इन नॉइज बैरियर में खास तौर पर इंजीनियर्ड कंक्रीट पैनल होते हैं जो आवाज को सोखने और मोड़ने के लिए डिजाइन किए गए हैं. हर पैनल रेल लेवल से दो मीटर ऊपर उठता है और एक मीटर चौड़ा होता है, जो एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ एक लगातार अकूस्टिक शील्ड बनाता है. एक बार लग जाने पर, इन बैरियर से ट्रेनों और सपोर्टिंग सिविल स्ट्रक्चर दोनों से होने वाले ऑपरेशनल शोर में काफी कमी आने की उम्मीद है, जिससे आस-पास के निवासियों के लिए शांत माहौल पक्का करने में मदद मिलेगी. गुवाहाटी–कोलकाता के बीच चलेगी स्लीपर वंदे भारत रेल मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि देश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह ट्रेन 18–19 जनवरी से गुवाहाटी और कोलकाता (हावड़ा) के बीच शुरू की जा सकती है। ट्रायल के दौरान 16 कोच वाली इस ट्रेन ने 182 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र … Read more

क्या कंडोम महंगे करने से जनसंख्या बढ़ेगी? तीसरे साल से डरा हुआ चीन, भारत के लिए यह क्या अवसर ला सकता है?

बीजिंग बीते तीन सालों से चीन एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा है, जिसमें न तो तोपें चल रही हैं और न ही मिसाइलें। यह लड़ाई है- जनसंख्या बचाने की। एक देश जो कभी दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला था, वह अब अपनी आबादी घटने से परेशान है। चीन लंबे समय तक 'वन चाइल्ड पॉलिसी' से जनसंख्या नियंत्रित करता रहा, अब इसके उलटा हो गया है। चीन से आए ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2025 में लगातार तीसरे साल उसकी आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चीन की सरकार अब बच्चों को बढ़ाने की हर कोशिश कर रही है- यहां तक कि कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियां महंगे कर दिए। सवाल यह है: क्या कंडोम महंगे करने से जनसंख्या बढ़ जाएगी? और यह संकट ग्लोबल सप्लाई चेन, आपके फोन-गैजेट्स की कीमतों और भारत जैसे युवा देशों पर कैसे असर डालेगा? आइए समझते हैं। चीन का डर: बूढ़ा होता ड्रैगन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा कोई विदेशी दुश्मन नहीं, बल्कि उसकी अपनी जनसांख्यिकी है। 2025 के आंकड़े बताते हैं कि मरने वालों की संख्या पैदा होने वाले बच्चों से कहीं ज्यादा है। चीन ने एक बच्चा नीति को सख्ती से लागू किया था। आज वही नीति उसके गले की फांस बन गई है। उस वक्त जो बच्चे पैदा नहीं हुए, आज वो 'युवा वर्कफोर्स' (काम करने वाले लोग) के रूप में मौजूद नहीं हैं। चीन की चुनौती सिर्फ कम जन्मों तक सीमित नहीं है; तेजी से बढ़ती उम्रदराज आबादी भी उतनी ही बड़ी समस्या है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग अब कुल आबादी के 20% से अधिक हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान बताते हैं कि 2100 तक यह अनुपात 50% तक पहुंच सकता है। इसके नतीजे दूरगामी हैं- कामकाजी आबादी सिकुड़ेगी, आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ेगा और स्वास्थ्य व पेंशन पर सरकारी खर्च तेजी से ऊपर जाएगा। क्यों घट रही है चीन की जनसंख्या? चीन की यह समस्या नई नहीं। 1980 से 2015 तक 'वन चाइल्ड पॉलिसी' चली, जिसमें ज्यादातर परिवारों को सिर्फ एक बच्चा करने की इजाजत थी। इसका मकसद तेजी से बढ़ती आबादी को काबू करना था। नतीजा? जन्म दर तेजी से घटी। 2016 में दो बच्चे, 2021 में तीन बच्चों की इजाजत दी गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आज युवा कपल बच्चे नहीं चाहते। कारण साफ हैं: बच्चा पालना बहुत महंगा: एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में एक बच्चे को 18 साल तक पालने का खर्च करीब 5.38 लाख युआन (लगभग 76 हजार डॉलर) है। शहरों में तो एक करोड़ युआन से ज्यादा।     नौकरी का दबाव, हाउसिंग महंगी, शिक्षा और हेल्थकेयर का बोझ।     महिलाओं पर घर और करियर दोनों का भार।     शादियां भी कम हो रही हैं- 2025 में रिकॉर्ड कम शादियां हुईं। 2024 में जन्म थोड़े बढ़े क्योंकि 'ड्रैगन ईयर' था (चीनी संस्कृति में शुभ माना जाता है) और कोविड के बाद देरी से शादियां हुईं। लेकिन 2025 में फिर जन्मदर घट गई। संयुक्त राष्ट्र की भविष्यवाणी कहती है कि 2050 तक चीन की आबादी 200 मिलियन कम हो सकती है और बुजुर्गों की तादाद दोगुनी होगी। चीन की जनसांख्यिकीय पहेली: नीति खत्म हुए दस साल, लेकिन आबादी संकट गहराता हुआ 1 जनवरी 2026 को उस फैसले को दस साल पूरे हो गए, जब चीन ने औपचारिक रूप से अपनी कुख्यात एक-बच्चा नीति को खत्म किया था। यह नीति तीन दशकों से भी अधिक समय तक चीन के पारिवारिक जीवन और सामाजिक संरचना को आकार देती रही। वर्ष 2016 में इसे समाप्त करने का निर्णय एक कठोर हकीकत से उपजा था- जन्म दर इतनी तेजी से गिर रही थी कि वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक ऊर्जा और स्थिरता के लिए खतरा बन गई थी। लेकिन एक दशक बाद, तमाम नीतिगत बदलावों और प्रोत्साहनों के बावजूद, बीजिंग जनसंख्या में आ रही ऐतिहासिक गिरावट को रोकने में नाकाम दिख रहा है। चीन की कुल जनसंख्या 2022 में पहली बार 60 से अधिक वर्षों में घटनी शुरू हुई। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2022 में आबादी घटकर 1.411 अरब रह गई- एक साल पहले के मुकाबले करीब 8.5 लाख कम। इसकी घोषणा 2023 में की गई थी। विश्लेषकों ने इसे 1961 के बाद पहली जनसंख्या गिरावट बताया, जब माओ त्से तुंग की ग्रेट लीप फॉरवर्ड नीति से उपजे भीषण अकाल ने देश को झकझोर दिया था। 2023 और 2024 में भी यह संकुचन जारी रहा। 2024 में जन्मों में मामूली बढ़त के बावजूद, मौतों की संख्या अधिक रहने से कुल आबादी घटती रही और विशेषज्ञ इस उछाल को स्थायी मोड़ मानने से इनकार कर रहे हैं। जन्मों में तेज गिरावट आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में चीन में लगभग 95 लाख बच्चों का जन्म हुआ- जो 2019 के 1.47 करोड़ जन्मों से बहुत कम है। यह गिरावट ड्रैगन वर्ष जैसी सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़े अस्थायी उछाल के बावजूद दर्ज हुई। वास्तविक तस्वीर यह है कि युवा पीढ़ी बढ़ती महंगाई, आवास लागत, शिक्षा खर्च, असुरक्षित नौकरियों और कार्य-जीवन असंतुलन जैसी चिंताओं से जूझ रही है, जिससे परिवार बढ़ाने का फैसला और कठिन हो गया है। 2025 का अनुमान है कि चीन में लगभग 87 लाख बच्चे पैदा हुए होंगे, जो भारत के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है। हालांकि कुछ एनालिसिस में यह संख्या 73 से 78 लाख के बीच रहने का अनुमान है। यह सरकारी कोशिशों के बावजूद कम फर्टिलिटी रेट, लाइफस्टाइल में बदलाव और डेमोग्राफिक बदलावों के कारण लगातार गिरावट को दिखाता है। यह संख्या पिछले सालों की तुलना में काफी कम है। 2026 का विवादित कदम सबसे हालिया और विवादित फैसला, 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ है। इसके तहत सरकार ने गर्भनिरोधकों पर 13% वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) लगाना शुरू किया है, जबकि चाइल्डकेयर सेवाओं, विवाह-संबंधी सेवाओं और वरिष्ठ नागरिक देखभाल को कर-मुक्त रखा गया है। पहले 1994 से ये टैक्स-फ्री थे, क्योंकि तब जनसंख्या नियंत्रण नीति थी। अब नीति उलटी है- बच्चे पैदा करो! सरकार का तर्क है कि इससे जन्मोत्साहन और पारिवारिक समर्थन सेवाएं मजबूत होंगी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि गर्भनिरोधकों पर कर महिलाओं के प्रजनन अधिकारों और स्वास्थ्य विकल्पों … Read more

केंद्र सरकार का नया फैसला: 10 रुपये वाली सिगरेट की कीमत में हो सकती है बढ़ोतरी, जानें क्यों

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने तंबाकू और तंबाकू से बने उत्‍पाद पर एक्‍साइज ड्यूटी लगाने का ऐलान किया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होंगे. ऐसे में अगर आप सिगरेट पीते हैं तो अब आपको ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है.आपको कितना ज्‍यादा भुगतान करना होगा, यह स‍िगरेट ब्रांड के आधार पर ही नहीं, बल्कि सिगरेट की लंबाई पर भी निर्भर करेगा.  साल 2017 में GST लागू होने के बाद स‍िगरेट पर यह सबसे ज्‍यादा कर  है. सिगरेट पर 40% जीएसटी के ऊपर एक्‍साइज टैक्‍स को लगाया जाएगा, जो सिगरेट की लंबाई और फिल्‍टर है या नहीं, इस हिसाब से तय होगा. जितनी लंबी सिगरेट होगी, उतना ज्‍यादा भुगतान करना होगा.  क्‍या है नए टैक्‍स रेट्स?      1 फरवरी से लागू होने टैक्‍स नियम के अनुसार, एक्‍साइस ड्यूटी प्रति 1000 सिगरेट के हिसाब से लागू होगा. यह कितना लगेगा यह उस सिगरेट की लेंथ पर निर्भर होगा.       नॉन फिल्‍टर सिगरेट,  लंबाई 65 मिमी तक ₹2,050 प्रति हजार होगा      नॉन-फिल्टर सिगरेट, लंबाई 65 मिमी से अधिक और 70 मिमी तक ₹3,600 प्रति हजार लगेगा.      फिल्टर सिगरेट, लंबाई (फिल्टर मिलाकर) 65 मिमी तक ₹2,100 प्रति हजार लगेगा.     फिल्‍टर सिगरेट, लंबाई (फिल्टर के साथ) 65 मिमी से अधिक और 70 मिमी तक ₹4,000 प्रति हजार लगेगा.      फिल्टर सिगरेट, लंबाई (फिल्टर के साथ) 70 मिमी से अधिक और 75 मिमी तक ₹5,400 प्रति हजार लगेगा.  अन्य सिगरेट पर ₹8,500 प्रति हजार तक एक्‍साइज लागू होगा. तंबाकू ऑप्‍शनल वाले सिगरेट पर एक्‍साइज ड्यूटी ₹4,006 प्रति हजार लागू होगा. इसी तरह, तंबाकू विकल्पों के सिगारिलो 12.5% या ₹4,006 प्रति हजार, जो भी अधिक हो, वह लागू होगा. अन्य 12.5% या ₹4,006 प्रति हजार, जो भी ज्‍यादा होगा, वह लगेगा.  हर सिगरेट पर कितने बढ़ेंगे दाम? एक्‍साइज ड्यूटी के हिसाब से कैलकुलेशन करें तो नॉन फिल्‍टर वाली छोटी सिगरेट (65 मिमी तक) पर 2.05 रुपये की बढ़ोतरी होगी.  फिल्‍टर वाली छोटी सिगरेट (65 मिमी तक) के दाम 2.10 रुपये  बढ़ जाएंगे. 65-70 मिमी तक वाली सिगरेट के दाम में  3 से 4 रुपये तक का इजाफा होगा. प्रीमियम सिगरेट (70-75 मिमी) में करीब 5 रुपये तक का इजाफा हो सकता है.  10 रुपये का सिगरेट अब कितने का?  वहीं एक्‍सपर्ट की बात माने तो, उनका कहना है कि सरकार के इस फैसले से सिगरेट के दाम में 20 से लेकर 50 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है. अगर छोटी  सिगरेट है तो उसपर 20 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है और मध्‍यम वाले सिगरेट पर 30 फीसदी का इजाफा हो सकता है. वहीं प्रीमियम सिगरेट पर 50 फीसदी का इजाफा हो सकता है.  इस हिसाब से देखा जाए तो 10 रुपये वाली सिगरेट पर 2 रुपये का इजाफा हो सकता है, जिस कारण यह सिगरेट 12 रुपये की मिल सकती है. वहीं अगर 15 रुपये की सिगरेट है तो यह 18 रुपये या 19 रुपये में मिल सकती है. 20 रुपये वाली सिगरेट के दाम 23 से 25 रुपये तक हो सकते हैं.    किन सिगरेट पर ज्‍यादा होगा असर?  एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ने का पूरा भार कंपनियां ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिस कारण कस्‍टमर्स को सिगरेट पीने पर ज्‍यादा भुगतान करना होगा. इस बढ़ोतरी का ज्‍यादा असर प्रीमियम, लंबी और फ्लेवर एड वाले सिगरेट पर पड़ सकता है. सरकार का उद्देश्‍य सिगरेट पर एक्‍स्‍ट्रा ड्यूटी लगाकर तंबाकू मार्केट में टैक्‍स चोरी को रोकना और सरकार की आय बढ़ाना है. 

एआई विजन से 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर मजबूती से बढ़ेंगे कदम

लखनऊ में एआई  सिटी उत्तर प्रदेश को बनाएगी वैश्विक टेक हब एआई सिटी  दो हिस्सों में होगी विकसित, लगभग 60  प्रतिशत क्षेत्र को कोर जोन के रूप में किया जायेगा विकसित एआई विजन से 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर मजबूती से बढ़ेंगे कदम  प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार और निवेश के नए अवसर खोलेगी एआई सिटी लखनऊ   उत्तर प्रदेश देश के बड़े तकनीकी और डिजिटल केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा जिस दूरदर्शी विकास मॉडल को अपनाया गया है उसका अगला बड़ा गंतव्य लखनऊ में प्रस्तावित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) सिटी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता के नाम अपने पत्र में भी एआई सिटी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया था। यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश की आर्थिक दिशा को नई गति देने के साथ-साथ प्रदेश को वैश्विक टेक मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाने का भी काम करेगा। एआई सिटी को दो हिस्सों में विकसित किया जाएगा। लगभग 60  प्रतिशत क्षेत्र को कोर जोन के रूप में विकसित किया जाएगा जहां एआई इनोवेशन सेंटर, टेक पार्क और रिसर्च सुविधाएं होंगी। शेष 40 प्रतिशत क्षेत्र में रेजिडेंशियल, कमर्शियल और सामाजिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।  योगी सरकार का लक्ष्य, अगले पांच  सालों में उत्तर प्रदेश को एक  ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए आईटी-आईटीईएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर को ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित और स्थापित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इसी सोच के अंतर्गत लखनऊ में एआई सिटी को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और सरकारी सहयोग का संतुलित ढांचा तैयार हो सके। लखनऊ की एआई सिटी को एक समर्पित व आत्मनिर्भर टेक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पर अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई रिसर्च लैब्स, स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर और ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए आधुनिक वर्क प्लेस उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य भारतीय और वैश्विक एआई कंपनियों को एक ही स्थान पर विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है, जिससे कि वे त्वरित गति से अपनी परियोजनाओं को विकसित और विस्तारित कर सकें। यह परियोजना लखनऊ को टॉप-20 ग्लोबल एआई हब्स में शामिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। राजधानी होने के साथ-साथ लखनऊ की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमता इस दिशा में एक बड़ी ताकत है। आईआईएम लखनऊ और आईआईआईटी लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान पहले से ही यहां मौजूद हैं, जो रिसर्च, इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट में विशेष भूमिका निभाने का काम कर रहे हैं। आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिटी इन संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार करेगी। एआई सिटी के माध्यम से रोजगार के हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन के अवसर बनेंगे। आईटी प्रोफेशनल्स, डेटा साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स, रिसर्चर्स और स्टार्टअप उद्यमियों के लिए यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनेगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को जॉब के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें यहीं पर उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के मार्ग खुलेंगे। एआई सिटी ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

बस्तर आ रहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और गृहमंत्री अमित शाह

बस्तर. बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन इस साल भी किया जा रहा है। कार्यक्रम 10 जनवरी से 5 फरवरी तक प्रस्तावित है।बस्तर पंडुम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और गृहमंत्री अमित शाह भी शिरकत करेंगे। वहीं एक दिन पहले 2 जनवरी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दंतेवाड़ा में बस्तर पंडुम का लोगो और थीम गीत लॉन्च किया है। दरअसल, बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम और 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। संभाग स्तरीय कार्यक्रम में ही राष्ट्रपति और गृहमंत्री शिरकत करेंगे। इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत के अलग-अलग देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक, उनके साथ बेटी, भाई और भाभी भी मौजूद रहेंगे। वहीं, उनकी सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन और रेलवे ने कमर कस ली है। सुरक्षा प्रोटोकाल के तहत राष्ट्रपति के करनडीह आने-जाने के दौरान जुगसलाई अंडरब्रिज के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह रोक दिया जाएगा। राष्ट्रपति के साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू साये की तरह मौजूद रहेंगी। इतिश्री एक बैंक अधिकारी हैं और मां के साथ अक्सर महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में नजर आती हैं। इसके अलावा, ओडिशा के मयूरभंज से राष्ट्रपति के छोटे भाई तारिणीसेन टुडू और उनकी पत्नी चुडा सकरा टुडू (सकरमणि टुडू) भी इस यात्रा का हिस्सा होंगे। मायके और ससुराल पक्ष के लोगों के साथ राष्ट्रपति का यह आगमन लौहनगरी के लोगों के लिए भी उत्साह का विषय है। 7 से बढ़कर होगी 12 विधा इस साल बस्तर पंडुम में विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जा रही है। जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएं होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि प्रमुख हैं। 3 चरणों में किया जा रहा आयोजन इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं, शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा। CM बोले- बस्तर पंडुम है बस्तर की आत्मा मुख्यमंत्री ने कहा कि, बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच है। आज मां दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहां बस्तर पंडुम-2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया है। बस्तर पंडुम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक-परंपराओं, कला और विरासत का मंच है। छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुड़ियों के जरिए इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। उन्होंने कहा कि, पिछले साल हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी, तब समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस बार हम राष्ट्रपति, केंद्रीय गृहमंत्री और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री समेत भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर हमारे बस्तरवासियों का जोश, उत्साह खूब देखने को मिला। इस बार हम इसे और भव्य बना रहे हैं ताकि यहां की धरोहर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान बना पाए। इस बार बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धा में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर 12 की गई है। इसमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति तो होगी ही, इसके साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को शामिल किया गया है।  

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार किया, ट्रंप के बयान के बाद वेनेजुएला उपराष्ट्रपति का जवाब

काराकस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए घोषणा की है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को हिरासत में ले लिया है. यह घटनाक्रम वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुए उन संदिग्ध हवाई हमलों और धमाकों के बाद आया है, जिसकी खबरें पिछले कुछ घंटों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई थीं. लैटिन अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य और राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए दावा किया अमेरिकी सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान के तहत वेनेजुएला के विवादित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया है. इससे पहले शनिवार को काराकस में कई बड़े धमाके सुने गए थे और सरकारी इमारतों के ऊपर काला धुआं उठता देखा गया था. माना जा रहा है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने मादुरो के सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद विशेष बलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मादुरो को वेनेजुएला में ही किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है या उन्हें अमेरिका ले जाया जा रहा है. वेनेजुएला के रक्षामंत्री बोले- सरेंडर नहीं करेंगे वेनेजुएला पर हमला: वेनेजुएला के रक्षा मंत्री के जीवित होने और बयान जारी करने की पुष्टि हुई है. इससे पहले खबरें आई थीं कि बमबारी में उनके आवास को निशाना बनाया गया है. रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा, ‘हम न बातचीत करेंगे, न आत्मसमर्पण करेंगे और अंत में जीत हमारी होगी.’ वहीं, इस बीच CBS News ने दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना की एलीट स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट डेल्टा फोर्स ने हिरासत में लिया है. हालांकि वेनेजुएला सरकार की ओर से मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है. ट्रंप बोले- यह शानदार ऑपरेशन था वेनेजुएला पर हमला: न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला में की गई कार्रवाई बेहद सोच समझकर की गई थी और इसमें बेहतरीन योजना तथा शानदार सैनिकों की भूमिका रही. ट्रंप ने इसे “वास्तव में एक शानदार ऑपरेशन” बताया. इसी बीच अमेरिका की ओर से वेनेजुएला में निशाना बनाए गए ठिकानों की पुष्टि भी की गई है. इन लक्ष्यों में कराकस स्थित मुख्य सैन्य अड्डा फुएर्ते तिउना, राजधानी का प्रमुख एयरबेस ला कार्लोटा, संचार और सिग्नल से जुड़ा अहम केंद्र एल वोल्कान, देश का सबसे बड़ा बंदरगाह ला ग्वायरा पोर्ट और मिरांडा प्रांत में स्थित हिगुएरोटे एयरपोर्ट शामिल हैं. इन ठिकानों पर हमले के बाद वेनेजुएला में सैन्य और प्रशासनिक ढांचे को बड़ा झटका लगने की बात कही जा रही है. हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. ट्रंप का बड़ा दावा- मादुरो को गिरफ्तार करके देश से बाहर ले जाया गया वेनेजुएला पर हमला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमला सफलतापूर्वक किया है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया है. ट्रंप के मुताबिक यह ऑपरेशन अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से जुड़े और विवरण जल्द साझा किए जाएंगे. ट्रंप ने यह भी बताया कि इस मामले पर आज सुबह 11 बजे मार ए लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. फिलहाल वेनेजुएला सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.  कराकस के ऊपर ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर, वेनेजुएलाई सेना के पास ऐसे विमान नहीं वेनेजुएला पर हमला: कराकस में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच सामने आए वीडियो फुटेज ने हालात को और गंभीर बना दिया है. CNN ने बताया कि राजधानी कराकस के ऊपर धुएं के गुबार उठते दिख रहे हैं और उसी इलाके में कई ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर उड़ते नजर आ रहे हैं. अहम बात यह है कि एविएशन जर्नल फ्लाइटग्लोबल के मुताबिक वेनेजुएला की सेना के पास किसी भी तरह के ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर नहीं हैं. इससे यह संकेत और मजबूत हो गए हैं कि कराकस के ऊपर दिखाई दे रहे ये हेलिकॉप्टर विदेशी सैन्य ताकत से जुड़े हो सकते हैं.  ईरान का बयान- अमेरिका का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन वेनेजुएला पर हमला: ईरान के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है. जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिका की ओर से किया गया हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है. ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है. ईरान के इस बयान से साफ है कि वेनेजुएला पर हमले को लेकर अब पश्चिम एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक विरोध की आवाजें तेज होती जा रही हैं.

केंद्र व राज्य की 98 जनकल्याणकारी योजनाएं फैमिली आईडी से जुड़ीं

व्यवस्था और पारदर्शी, फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाएगी फैमिली आईडी केंद्र व राज्य की 98 जनकल्याणकारी योजनाएं फैमिली आईडी से जुड़ीं 15.07 करोड़ लाभार्थियों को मिल रहीं सुविधाएं, 44 लाख लोगों ने किया आवेदन अब तक 19 लाख से अधिक फैमिली आईडी कार्ड किया गया वितरित लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इसी दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा फैमिली आईडी कार्ड के माध्यम से डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभार्थियों को जोड़ने का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। इससे व्यवस्था न सिर्फ और पारदर्शी हुई है, बल्कि फर्जी लाभार्थियों पर भी रोक लगाई जा सकेगी।  98 योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ा गया प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 जनकल्याणकारी योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ा जा चुका है। इसका सीधा लाभ प्रदेश के 15 करोड़ 7 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिल रहा है। फैमिली आईडी पोर्टल पर 44 लाख नागरिकों ने अब तक आवेदन किया है। शहरी क्षेत्र में लेखपाल और ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से बनाया जाता है। इस फैमिली आईडी प्रणाली के तहत एक ही पहचान संख्या से पूरे परिवार का विवरण उपलब्ध रहता है, जिससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी और त्वरित तरीके से पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है। 12 अंकों की फैमिली आईडी बनेगी योजनाओं की चाबी फैमिली आईडी कार्ड 12 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर होता है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी दर्ज होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इस व्यवस्था का उद्देश्य “एक परिवार–एक पहचान” के सिद्धांत को लागू करना है, ताकि पात्रता के आधार पर योजनाओं का स्वतः चयन हो सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या दोहराव से बचा जा सके। भागदौड़ से मिल रही राहत फैमिली आईडी कार्ड लागू होने से नागरिकों को आय, जाति, निवास सहित अन्य प्रमाण पत्रों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। एक बार फैमिली आईडी पंजीकरण होने के बाद, विभिन्न योजनाओं के लिए आवश्यक जानकारियां इसी डेटाबेस से स्वतः उपलब्ध हो जा रही हैं। इससे समय, धन और श्रम—तीनों की बचत हो रही है। राशन कार्ड से वंचित परिवारों को भी मिलेगा लाभ योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जो परिवार किसी कारणवश राशन कार्ड से वंचित हैं, वे भी फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें। इसके लिए विशेष पंजीकरण व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी पात्र परिवार सरकारी सहायता से बाहर न रहे। आधार और मोबाइल लिंक अनिवार्य फैमिली आईडी के लिए परिवार के सभी सदस्यों का आधार नंबर होना अनिवार्य है। साथ ही आधार का मोबाइल नंबर से लिंक होना भी जरूरी है, ताकि ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जा सके। यदि किसी लाभार्थी का मोबाइल नंबर बदल गया है, तो उसे आधार से नया और सही नंबर लिंक कराना आवश्यक होगा। गरीब, वंचित और जरूरतमंदों तक सीधी पहुंच योगी सरकार का लक्ष्य है कि हर गरीब, श्रमिक, किसान, महिला, बुजुर्ग और दिव्यांग को उसका हक समय पर मिले। फैमिली आईडी के माध्यम से सरकार की योजनाएं अब सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंच रही हैं, जिससे सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिली है। फैमिली आईडी: एक नजर में ▪️फैमिली आईडी प्रणाली के तहत नागरिक आधार आधारित लॉगिन और ई-केवाईसी के माध्यम से स्व-पंजीकरण कर सकते हैं, जिसमें यूआईडीएआई से परिवार के सदस्यों का विवरण स्वतः प्राप्त होता है। ▪️आवेदक को परिवार के सदस्यों को जोड़ने की सुविधा दी गई है, जबकि लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाता है।  ▪️फैमिली आईडी DigiLocker पर उपलब्ध कराई जा रही है और अब तक 19 लाख से अधिक भौतिक फैमिली आईडी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।  ▪️यह कार्ड पूरी तरह निःशुल्क है, जिस पर प्रति कार्ड लगभग 8 रुपये का खर्च सरकार स्वयं वहन कर रही है।  ▪️वर्तमान में फैमिली आईडी से कुल 98 योजनाएं जोड़ी जा चुकी हैं, जिनमें केंद्र सरकार की 13 और उत्तर प्रदेश सरकार की 85 योजनाएं शामिल हैं।  ▪️फैमिली आईडी डाटाबेस में अब तक 15.7 करोड़ से अधिक नागरिक पंजीकृत हैं, जिनमें 14.7 करोड़ राशन कार्ड आधारित और 1.03 करोड़ स्व-पंजीकरण के माध्यम से जुड़े हैं।  ▪️डाटाबेस में कुल फील्ड सैचुरेशन 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिसमें पता विवरण 100 प्रतिशत, मोबाइल नंबर 85 प्रतिशत, वैवाहिक स्थिति 54 प्रतिशत दर्ज किया गया है। ▪️फैमिली आईडी को योजनाओं से जोड़ने के लिए पांच-स्तरीय तकनीकी प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसके अंतर्गत आधार अधिसूचना, डाटाबेस डिजिटलीकरण, आधार प्रमाणीकरण, योजना पोर्टल पर फैमिली आईडी फील्ड निर्माण और विभागीय डाटाबेस का एकीकरण शामिल है, जिससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सुगम तरीके से पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से चंबल क्षेत्र में तेज़ी से होगा विकास

अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से चंबल क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परियोजना के संबंध में दिए दिशा-निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्षेत्रीय विकास में सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से प्रदेश के चंबल क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। इस मार्ग से मुरैना, श्योपुर और भिंड जिले, राजस्थान से निकल रहे दिल्ली-वड़ोदरा एक्सप्रेस-वे और उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ हाईवे से जुड़ेंगे। इससे क्षेत्र की कोटा, मुंबई, कानपुर, लखनऊ, आगरा और दिल्ली से कनेक्टिविटी बढ़ेगी तथा यात्रा का समय कम होगा। परिणामस्वरूप क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार-व्यवसाय, पर्यटन और आवागमन को प्रोत्साहन मिलेगा। किसानों और क्षेत्रीय निवासियों की सहमति और संतुष्टि अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कर परियोजना को जल्द से जल्द पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना की मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेंच राष्ट्रीय उद्यान-कान्हा टाइगर रिजर्व-बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को जोड़ने वाले मार्ग को टाइगर टूरिज्म कॉरीडोर के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 625 कि.मी. लंबे इस मार्ग से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुसार वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। बैठक में अटल एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित दो प्लान का तुलनात्मक प्रस्तुतिकरण किया गया। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह उपस्थित थे।