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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- शिक्षा और उत्कृष्टता को अपना पथ-प्रदर्शक मानता है मीना समाज

मृत्यु भोज का विरोध, दहेज मुक्त और सादे विवाहों का समर्थन तथा सामूहिक विवाहों को प्रोत्साहन समाज की प्रशंसनीय पहल मैधावी विद्यार्थियों, युवाओं और सामाजिक गतिविधियों में योगदान देने वाले वरिष्ठ जन को किया सम्मानित मुख्यमंत्री रवीन्द्र भवन में आयोजित मीना समाज के सम्मेलन में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मीना समाज ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समाज बंधु अपने सामाजिक दायित्वों का भी बख़ूबी निर्वहन कर रहे हैं। शिक्षा, सामाजिक उन्नति का सबसे मजबूत आधार है। पिछले वर्षों में लगभग 550 प्रतिभाओं का सम्मान इस बात का प्रमाण है कि मीना समाज, शिक्षा और उत्कृष्टता को अपना पथ-प्रदर्शक मानता है। मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं का विरोध, दहेज मुक्त और सादे विवाहों का समर्थन एवं सामूहिक विवाह सम्मेलनों को प्रोत्साहन देकर समाज ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध मजबूत संदेश दिया है। ऐसे प्रयास समाज को शिक्षित और कुरीतियों से मुक्त करते हुए समाज बंधुओं को प्रगति की राह पर अग्रसर करते हैं। यह प्रयास प्रदेश और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास को भी नई दिशा देते हैं। राज्य सरकार मीना समाज के इन प्रयासों में पूरी तरह साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में आयोजित मीना समाज सम्मेलन और मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मध्यप्रदेश मीना समाज सेवा संगठन की ओर से तीन बड़ी मालाऐं पहनाकर स्वागत अभिनंदन और साफा बांधकर अंग वस्त्रम भेंट कर सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के लिए पूर्व मंत्री श्री राम निवास रावत ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित, खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और पदक विजेयता एवं अन्य विधाओं में उपलब्धियां अर्जित करने वाले मीना समाज के 16 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामाजिक गतिविधियों के लिए दान देने तथा अन्य पहल करने वाले मीना समाज के वरिष्ठजन को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर विशेष रूप से उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मीना समाज पर श्री हरि की अत्यंत कृपा रही है, भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जुड़ी मीना समाज की उत्पत्ति जन सामान्य को जल और जीवन का महत्व बताती है।मीना समाज में बहुत प्रतिभाएं हैं, समाज नवरत्नों से परिपूर्ण है और युवा पीढ़ी तो पढ़ाई तथा खेल में अपना लोहा मनवा रही है। समाज के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतें, यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज ने हर परिस्थिति में संघर्ष किया और परिवारों के लिए प्रगति की राह प्रशस्त की। मीना समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक उत्थान के उद्देश्य से वर्ष 1980 में मीना समाज सेवा संगठन स्थापित किया गया था। संगठन के कार्यों के सकारात्मक परिणाम वर्तमान में दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों के जीवन को सरल बनाने के लिए व्यवस्थाओं में कई नवाचार किए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में ही प्रदेश में देश की पहली तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं का कार्य आरंभ हुआ है। इन परियोजनाओं से श्योपुर, गुना सहित चंबल और मालवा का क्षेत्र सिंचित होगा, जिसका मीना समाज को विशेष रूप से लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी की पहल पर जातिगत जनगणना का बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत इस वर्ष मकानों की गिनती होगी और आगामी कार्यवाही वर्ष 2027 में की जाएगी। जातिगत जनगणना से अतीत के कई उल्झे प्रश्नों का समाधान निकलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। समाज बंधु उद्योग धंधे लगाने और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें, राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रयासों से ही भगवान श्रीराम अयोध्या में मुस्कुरा रहे हैं। भगवान श्रीराम की तरह भगवान श्रीकृष्ण भी भगवान विष्णु के अवतार हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार मीनेष बोर्ड के गठन पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज की धर्मशाला के निर्माण में राज्य शासन की ओर से सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि मीना समाज शिक्षा, संस्कार और संगठन के बल पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा और प्रदेश एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

किडनी ट्रांसप्लांट के लिए रांची के 2 अस्पतालों को लाइसेंस देने की तैयारी

रांची. झारखंड के मरीजों को आने वाले दिनों में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। रांची के 2 अस्पतालों में यह सुविधा शुरू होने की संभावना है। सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है। 9 जनवरी को एडवाइजरी कमिटी की बैठक बुलाई गई है। साथ ही राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इस योजना पर काम किया जा रहा है। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। इसके साथ ही राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी चरणबद्ध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस पहल से झारखंड के किडनी रोगियों को इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद है। 9 जनवरी को बुलाई गई बैठक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के उप सचिव ध्रुव प्रसाद की ओर से इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। पत्र के अनुसार 9 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 11:30 बजे एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी कमिटी की बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह के कार्यालय कक्ष में होगी। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव करेंगे। 2 अस्पतालों को लाइसेंस देने पर विचार बैठक में फिलहाल रांची के दो अस्पतालों-राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) और राज हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लाइसेंस दिए जाने पर विचार किया जाएगा। इन अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और निर्धारित मानकों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। निरीक्षण के बाद समिति देगी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति से पहले निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति का गठन किया जाता है। यह समिति संबंधित अस्पताल का स्थल निरीक्षण कर वहां उपलब्ध बुनियादी ढांचे, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, नेफ्रोलॉजी एवं यूरोलॉजी सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, ब्लड बैंक और अन्य आवश्यक संसाधनों का विस्तृत आकलन करती है। निरीक्षण के बाद समिति अपनी रिपोर्ट पेश करती है। एडवाइजरी कमिटी लेगी फैसला तकनीकी समिति की रिपोर्ट के आधार पर एडवाइजरी कमिटी यह निर्णय लेती है कि संबंधित अस्पताल किडनी ट्रांसप्लांट के लिए निर्धारित सभी मानकों और अर्हताओं को पूरा करता है या नहीं। सभी शर्तें पूरी होने की स्थिति में अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में अंतिम निर्णय लिया जाता है और अस्पताल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस जारी किया जाता है।

सर्दी का कहर: उत्तर भारत ठंड की गिरफ्त में, एक हफ्ते तक कोहरे का अलर्ट; जानें शीतलहर की स्थिति

 नई दिल्ली उत्तर भारत में अगले सात दिनों तक सुबह और शाम के समय बहुत घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी मध्य प्रदेश, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पू्र्वी राजस्थान में चार जनवरी को शीतलहर की चेतावनी है। इसके अलावा, पांच से आठ जनवरी के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ के कुछ इलाकों, पांच से नौ जनवरी के दौरान पश्चिमी राजस्थान, पांच से 10 जनवरी के दौरान पूर्वी राजस्थान में और छह व सात जनवरी के दौरान झारखंड में शीतलहर चलने की पूरी संभावना है।   मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों के दौरान, उत्तर पश्चिम भारत में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद इसमें दो दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखने को मिलेगी। अगले तीन दिनों के दौरान, मध्य और पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। अगले दो दिनों में महाराष्ट्र में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभवना नहीं है। इसके बाद इसमें चार दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। जम्मू कश्मीर में पारा हिमांक के नीचे लुढ़का वहीं, उत्तर भारत शनिवार को भयंकर ठंड की चपेट में रहा तथा जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में पारा हिमांक बिंदु से नीचे चला गया। मैदानी क्षेत्रों में भी ठंड का प्रकोप रहा और सुबह के शुरुआती घंटों में घना कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान लगाया है कि चार से सात जनवरी तक राष्ट्रीय राजधानी में अलग-थलग स्थानों पर शीतलहर चलने की संभावना है। विभाग ने रविवार को यहां घना कोहरा छाये रहने का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। जब न्यूनतम तापमान मौसमी औसत से 4.5 से 6.5 डिग्री नीचे गिर जाता है, तब शीतलहर घोषित की जाती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मौसमी औसत से 1.2 डिग्री अधिक था। यहां अधिकतम तापमान 17.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से दो डिग्री कम था। यहां आयानगर में सबसे कम न्यूनतम तापमान 6.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लोधी रोड पर सबसे अधिक अधिकतम तापमान 17.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश बोले शकुनी चौधरी से- ‘आपका बेटा सम्राट बहुत आगे जाएगा’

पटना. डिप्टी CM सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी का आज अपना 90वां जन्मदिन है। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके आवास पहुंचे और जन्मदिन की बधाई दी। इस मुलाकात का वीडियो भी सामने आया है। जिसमें सीएम ने पहले शकुनी चौधरी को बधाई दी। फिर सम्राट चौधरी की तारीफ करते हुए कहा कि, 'आपका बेटा बहुत आगे जाएगा। मैं हमेशा उसके साथ।' इस दौरान मंत्री विजय चौधरी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव भी नजर आए। सम्राट चौधरी ने सीएम नीतीश के साथ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर की है।

छत्तीसगढ़ के केशकाल के दरबार मेले में देवी आने पर झूमे बीजेपी सांसद

केशकाल. भंगाराम माईं के दरबार में मेला का शनिवार देर शाम आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के सभी देवी-देवताओं की उपस्थिति रही। भंगाराम मेला के बाद से बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में मेले की शुरुआत होती है। आज कांकेर में भी मेला आयोजित किया गया है। मेले में आप देख सकते हैं कि किस प्रकार से ग्रामीण क्षेत्रों में आँगा देव की पूजा की जाती है। छोटे-छोटे बच्चे आँगा देव को पकड़े हुए होते हैं, और अचानक उन पर शक्ति का संचार होता है। इस दौरान बच्चे और आँगा देव दोनों एक साथ खेलते और कूदते दिखाई देते हैं। इस अवसर पर कांकेर के सांसद भोजराज नाग भी भंगाराम माईं के मेले में शामिल हुए। उन्हें भी देव का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, और वे सभी देवी-देवताओं के साथ मेले का परिक्रमा करते नजर आए। आपको बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में मेला का बेसब्री से इंतजार किया जाता है। जब देवी-देवताओं का आगमन होता है, तो ग्रामीण उन्हें विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद मेला की शुरुआत करते हैं।

भोपाल में मेट्रो को यात्री न मिलने से 14 दिन बाद ही घटाया समय और ट्रिप

भोपाल. भोपाल मेट्रो को अब एक चौथाई पैसेंजर भी नहीं मिल रहे हैं। यही कारण है कि मेट्रो कॉर्पोरेशन ने शुरुआत के सिर्फ 14 दिन बाद ही मेट्रो की टाइमिंग में बदलाव करने के साथ ही ट्रिप भी घटा दी है। अब मेट्रो एम्स स्टेशन से सुबह नौ बजे की बजाय तीन घंटे की देरी से दोपहर 12 बजे शुरू होगी, जबकि यही से शाम साढ़े सात बजे आखिरी ट्रिप चलेगी। नया शेड्यूल पांच जनवरी से लागू होगा। भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल ने किया था। इसके अगले दिन यानी 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू हो गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे। ऐसे में कमर्शियल रन के पहले दिन मेट्रो में सफर करने को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला था। इस दौरान 6568 पैसेंजर सवार हुए थे। अब करीब एक हजार यात्री मेट्रो में हो रहे सवार वहीं, अब एक हजार के आसपास ही यात्री मेट्रो में सवार हो रहे हैं। इस वजह से मेट्रो कॉर्पोरेशन ने टाइमिंग और ट्रिप दोनों में बदलाव कर दिया है। ऐसा रहेगा नया शेड्यूल मेट्रो अब तीन घंटे देरी से दोपहर 12 बजे शुरू होगी, जबकि रात 7:55 बजे तक यह चलेगी। शाम 7:30 बजे एम्स से सुभाष नगर के बीच आखिरी मेट्रो दौड़ेगी, जो 25 मिनट में सुभाष नगर स्टेशन पहुंचेंगी। पहले की तरह 75 मिनट के अंतराल में मेट्रो मिलेगी। यानी, एक गाड़ी छूटने के बाद दूसरी गाड़ी सवा घंटे बाद ही मिल सकेगी। पहले दोनों ओर कुल 17 ट्रिप लगाई जा रही थी, जो घटाकर 13 कर दी गई है। एम्स से सुभाषनगर के बीच सात और सुभाषनगर से एम्स के बीच छह ट्रिप लगेगी। अब ये रहेगी टाइमिंग पहली मेट्रो दोपहर 12 बजे एम्स स्टेशन से शुरू होगी, जो दोपहर 12:40 बजे सुभाषनगर स्टेशन पहुंचेगी। आखिरी मेट्रो शाम 7:30 बजे एम्स से शुरू होकर 7:55 बजे सुभाषनगर स्टेशन पर पहुंचेगी। किस दिन कितने पैसेंजर मिले 21 दिसंबरः 6,568 पैसेंजर 22 दिसंबरः 2,896 पैसेंजर 23 दिसंबरः 2,163 पैसेंजर 24 दिसंबरः 1,787 पैसेंजर 25 दिसंबरः 4,264 पैसेंजर 26 दिसंबरः 1,473 पैसेंजर 27 दिसंबरः 1,200 पैसेंजर 28 दिसंबरः 2,349 पैसेंजर 29 दिसंबरः 1,100 पैसेंजर 30 दिसंबरः 9,67 पैसेंजर 31 दिसंबरः 1113 पैसेंजर 01 जनवरीः 2,023 पैसेंजर 02 जनवरीः 1,065 पैसेंजर

RSS चीफ मोहन भागवत की नसीहत- ‘घर से ही लव जिहाद रोकना शुरू करें’

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख ने शनिवार को कहा कि ‘लव जिहाद’ को रोकने के प्रयास परिवार से ही शुरू होने चाहिए। उन्होंने इसके लिए परिवारों में संवाद, महिलाओं में जागरूकता और सामूहिक सामाजिक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया। आरएसएस की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि संगठन की ओर से यहां आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने महिलाओं की सामाजिक भूमिका पर चर्चा के दौरान ‘लव जिहाद’ के मुद्दे का उल्लेख किया। ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी संगठन मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू महिलाओं का कथित तौर पर प्रेम संबंध या शादी के जाल में फंसाकर इस्लाम धर्म में धर्मांतरण कराने के संदर्भ में करते हैं। भागवत ने कहा कि परिवारों को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि किसी परिवार की लड़की किसी अजनबी के प्रभाव में कैसे आ जाती है। उन्होंने इसे परिवारों में संवाद की कमी का परिणाम बताया। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इस दिशा में तीन स्तरों पर प्रयास जरूरी हैं, जिनमें परिवारों के भीतर निरंतर संवाद, लड़कियों में जागरूकता पैदा करना और स्वयं की रक्षा के लिए उन्हें सक्षम बनाना तथा ऐसे अपराध करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई शामिल है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों को भी सतर्क रहना चाहिए और समाज को सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए, ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। भागवत ने कहा कि धर्म, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण सुरक्षित है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण, वैचारिक दिशा और पारिवारिक व सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘वह समय बीत चुका है जब सुरक्षा के नाम पर महिलाओं को घरों तक सीमित रखा जाता था।’ उन्होंने कहा कि परिवार और समाज पुरुषों और महिलाओं के संयुक्त प्रयासों से आगे बढ़ते हैं, इसलिए दोनों का ‘प्रबोधन’ आवश्यक है। कार्यक्रम में आरएसएस के मध्य भारत प्रांत के प्रांत संघचालक अशोक पांडे और विभाग संघचालक सोमकांत उमलाकर भी मंच पर मौजूद थे। भागवत ने कहा कि महिलाएं परिवार में देखभाल करने वाली की केंद्रीय भूमिका निभाती हैं और संतुलन, संवेदनशीलता एवं व्यवस्था बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश की आबादी में महिलाओं की संख्या लगभग आधी है और सामाजिक तथा राष्ट्रीय कार्यों में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है। मानसिक स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि यह जरूरी है कि परिवार में कोई भी स्वयं को अकेला महसूस न करे। उन्होंने बच्चों पर वास्तविकता से परे अपेक्षाएं थोपने से बचने की सलाह दी और कहा कि सफलता से अधिक महत्वपूर्ण जीवन का अर्थ है। भागवत ने कहा कि भारत ‘मानसिक गुलामी’ से बाहर निकल रहा है और दुनिया उम्मीदों के साथ देश की ओर देख रही है।

AIIMS ने किया शोध- बुध-गुरु को अचानक हो रहीं सबसे ज्यादा मौतें

नई दिल्ली. नाचते हुए मौत, खेलते हुए दम तोड़ा, बैठे-बैठे अचानक चली गई जान… पिछले कुछ सालों में आपने ऐसी कई खबरें पढ़ी होंगी, सीसीटीवी वीडियो देखे होंगे और कई तरह की चर्चाएं भी सुनी होंगी। कई बार इसे कोविड वैक्सीन से भी जोड़ने की कोशिश हुई। अब इस तरह की मौतों पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्टडी सामने आई है जिसमें अचानक होने वाली मौतों के पैटर्न को समझने की कोशिश की गई है। आयु, लिंग, स्थान, दिन आदि के आधार पर समझने की कोशिश की गई है कि कौन और कब लोग इसकी जद में आ रहे हैं। एक साल तक चली स्टडी को हाल ही में इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। मेडिकल टर्म में 'सडन डेथ' (अचानक मौत) ऐसे मामलों को माना गया है जिसमें लक्षण दिखने के एक घंटे भीतर मौत हो गई या जिन्हें मरते हुए किसी ने नहीं देखा पर 24 घंटे पहले एकदम स्वस्थ दिखे थे। मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच डॉक्टरों ने कुल 2214 पोस्टमॉर्टम में 180 केसों (8.1 फीसदी) को अचानक मौतों की श्रेणी में पाया। इनमें से 103 ( 57.2 फीसदी) की उम्र 18 से 45 के बीच की थी, जबकि 77 की उम्र 46 से 65 के बीच की थी। सडन डेथ वाले अधिकांश पुरुष एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अचानक हुई मौतों के मामले में पुरुषों और महिलाओं के बीच बहुत बड़ा अंतर है। पुरुष महिला का अनुपात 4.5:1 का है। कम आयु वाले समूह में मरने वाले 77 पुरुष थे तो 17 महिलाएं। वहीं, अधिक उम्र वालों में यह अनुपात 64:4 का है। दिल ने दिया धोखा एक निष्कर्ष यह निकला कि अचानक हुई मौतों के मामले में दिल का धोखा अहम कारण है। 42.6 प्रतिशत मामले हृदय संबंधी कारणों से जुड़े पाए गए। उम्र के तीसरे दशक में प्रवेश करने वाले युवाओं में भी हृदय से जुड़ी समस्याएं पाईं गईं। अधिकांश मौतें कोरोनरी आर्टरी डिजीज से संबंधित थीं- यानी हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में गंभीर संकुचन। 70 प्रतिशत से अधिक ब्लॉकेज को गंभीर माना जाता है। जांच में यह पाया गया कि जिन युवा वयस्कों की मौत हुई, उनमें से कई में धमनियों की रुकावट इस स्तर तक या उससे भी अधिक थी। फेफड़ों या सांस से जुड़ी समस्याएं मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण सामने आया। 21.3 फीसदी मृतक इन समस्याओं से ग्रसित थे। ध्रूम्रपान और शराब कितना बड़ा फैक्टर अचानक मृत्यु का शिकार हुए आधेक से अधिक (57.4 फीसदी) युवा धूम्रपान की आदत रखते थे, जबकि 52 फीसदी कभी-कभी या नियमित शराब का सेवन करते थे। हर मौसम में ऐसी मौतें, सप्ताह के बीच ज्यादा कहर अचानक होने वाली मौतें सभी मौसम के दौरान करीब समान रूप से पाईं गईं। 20.9 फीसदी मौतें (मई से जुलाई), 31 फीसदी अगस्त से अक्टूबर के बीच और 27.8 फीसदी सर्दियों में नवंबर से जनवरी के बीच और 19.1 फीसदी फरवरी से अप्रैल के बीच बसंत के दौरान हुईं। 40.1 फीसदी की मौत रात या सुबह जल्दी हुई, जबकि 30.2 फीसदी सुबह और अन्य दोपहर में हुई। दिनों के लिहाज से देखें तो अधिकतर मौतें गुरुवार और बुधवार को हुईं। 55 फीसदी की मौत घर पर, 30.2 की यात्रा के दौरान और 14.8 फीसदी की कार्यस्थल या या बाहर हुईं। अचानक मौतों से पहले कैसे लक्षण दिखे जांच में सामने आया है कि अचानक हुई मौतों के ज्यादातर मामलों में लोगों को पहले अचानक बेहोशी आ गई थी। कुछ लोगों ने मौत से पहले सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, पेट दर्द, उल्टी या बुखार की शिकायत की थी। चिंता की बात यह है कि युवाओं में भी दिल की बीमारी बड़ी वजह बनकर सामने आई है, जबकि उनमें से अधिकतर को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। वहीं बुजुर्गों में मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियां ज्यादा देखने को मिलीं। यह रिपोर्ट बताती है कि दिल से जुड़ी बीमारियां अब कम उम्र के लोगों के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दावा: खनन क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों से मध्यप्रदेश बना देश में अग्रणी

खनन क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों से मध्यप्रदेश बना देश में अग्रणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार ने खनन एवं खनिज क्षेत्र में जो व्यापक और दूरदर्शी सुधार किये हैं, उनका लाभ लेकर मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने कहा कि वर्ष-2025 में मध्यप्रदेश 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी करा कर देश में अव्वल रहा है। केन्द्र सरकार के संशोधित कानून के तहत राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास का विस्तार कर राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास (एनएमईडीटी) बनाया गया है। इससे खनिज अन्वेषण एवं विकास के लिए संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे और मध्यप्रदेश जैसे खनिज-समृद्ध राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार आधारित खनन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में किए गए ये सुधार मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, औद्योगिक रूप से सशक्त और विकसित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे और विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खनिज नीलामी में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी खनिज नीलामी में वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज ब्लॉकों में से 32खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की पारदर्शी नीतियों, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। चूना पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को मजबूती मिली है। जिला खनिज फाउंडेशन से खनन प्रभावित क्षेत्रों का कायाकल्प देशभर में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के अंतर्गत अब तक 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की गई है। देश में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। इस निधि से प्रदेश के खनन प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक जनकल्याण कार्य किए जा रहे हैं। डीएमएफ निधि से प्रदेश के खनन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, स्कूलों और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना, पेयजल एवं स्वच्छता, सड़क एवं अन्य आधारभूत संरचना तथा आजीविका संवर्धन से जुड़े हजारों कार्य किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन से नए अवसर राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमम) के माध्यम से महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इस मिशन से मध्यप्रदेश में अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह मिशन इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के क्षेत्रों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेश, रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा खनन नियमों के सरलीकरण, खनिज एक्सचेंज की व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया को तेज़ किए जाने से मध्यप्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहन मिला है। इससे राज्य के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो रहे हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  

निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का स्टॉपेज जल्द, भोपाल में चौथे स्टेशन पर तैयारियां पूरी

भोपाल  भोपाल में लगभग 500 करोड़ की लागत से बने निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के रुकने का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है. कुछ कागजी अनुमतियों मिलते ही यहां ट्रेनों का स्टॉपेज शुरू हो जाएगा. इस रेलवे स्टेशन पर सारी तैयारियां हो चुकी हैं. यात्री सुविधाओं को देखते हुए यहां एफओबी, लिफ्ट, यात्री प्रतीक्षालय, पेयजल व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेड जैसे काम पूरे हो चुके हैं. यात्रियों को दो साल से इंतजार निऱातपुरा रेलवे स्टेशन दो वर्ष पहले बनकर तैयार हो चुका था. तभी से निशातपुरा इलाके के लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें भोपाल स्टेशन नहीं जाना पड़ेगा. यह स्टेशन सभी आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण होने के बावजूद रेलवे से विभिन्न प्रकार की अनुमतियां नहीं मिलने के कारण सूना पड़ा है. अब यहां का सन्नाटा खत्म होने वाला है. निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के रुकने का इंतजार  निशातपुरा स्टेशन शुरू होने से इस इलाके के यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी. छोला, विश्वकर्मा नगर, नीलकंठ कॉलोनी, हनीफ कॉलोनी सहित कई घनी आबादी वाले क्षेत्र निशातपुरा के तहत आते हैं. इन इलाकों के लोगों को ट्रेन से यात्रा करने के लिए मजबूरी में दूर स्थित भोपाल रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है. रेलवे स्टेशन चालू होने से व्यापार बढ़ेगा छोला के रहने वाले राजेंद्र राय का कहना है "निशातपुरा रेलवे स्टेशन के चालू हो जाने से हमें बहुत फायदा होगा. हमारा व्यापार बढ़ेगा." हरिनारायण चक्रवर्ती का कहना है "निशातपुरा रेलवे स्टेशन को बने 2 वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं. यहां का काम बहुत धीरे चल रहा है. यदि यह स्टेशन चालू होता है तो हम लोगों को तो फायदा होगा." दो ट्रेनों के रुकने का नोटिफिकेशन मिला प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी रेलवे भोपाल नवल अग्रवाल ने बताया "निशातपुरा रेलवे स्टेशन के लिए बोर्ड के नए नियमों के अनुसार नए स्टेशन की कैटेगरी अपडेट की गई है, जिसमें और सुविधाएं अपडेट की जा रही हैं. उम्मीद है कि जल्द ही स्टेशन शुरू किया जाएगा. स्टेशन पर सबसे पहले दो गाड़ियों के रुकने का नोटिफिकेशन आया है, जिसमें मालवा एक्सप्रेस और सोमनाथ एक्सप्रेस शामिल हैं."  रेलवे अधिकारियों के अनुसार अगर भोपाल स्टेशन पर समाप्त होने वाली कुछ ट्रेनों का टर्मिनेशन निशातपुरा तक बढ़ाया जाता है तो इंजन की दिशा बदलने की जरूरत खत्म हो जाएगी। अभी भोपाल स्टेशन पर इंजन की दिशा बदलने में 30 से 45 मिनट तक का समय लग जाता है, जिससे ट्रेनें लेट हो जाती हैं। निशातपुरा से ट्रेनों को सीधे इंदौर, उज्जैन और रतलाम की ओर रवाना करना आसान होगा। बता दें कि लगभग एक साल पहले निशातपुरा रेलवे स्टेशन बनकर तैयार हो चुका है। इसका औपचारिक उद्घाटन अब तक नहीं होने से इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्टेशन पर सभी सुविधाएं मौजूद रेलवे विभाग ने स्टेशन परिसर में प्लेटफार्म विस्तार के साथ टिकट घर, यात्री प्रतीक्षालय, पार्किंग, सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं दी हैं। अब फिर इन्हें दोबारा परीक्षण कर कार्य किया जा रहा है, जो अंतिम चरण में है।