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सीएम डॉ. मोहन यादव ने दो साल में किए गए कार्यों का विवरण दिया, नक्सलवाद खत्म कर सिस्टम को मजबूत किया

 भोपाल  मध्य प्रदेश में सीएम डॉ. मोहन यादव की सरकार को दो साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर भोपाल में आयोजित पत्रकारवार्ता में सीएम, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सरकार की उपलब्धियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री दो वर्ष की उपलब्धियों की पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि हमने दो साल की समीक्षा की और आगामी तीन वर्ष के कार्यों का लक्ष्य तय किया है। हमने तय किया कि मंत्री विभागवार प्रेजेंटेशन दे। लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी। 35 साल पुरानी माओवाद की चुनौती से निपटने का केंद्रीय गृह मंत्री ने लक्ष्य तय किया। इसके बाद मंडला, बालाघाट, डिंडोरी लाल आतंक से मुक्त होते गए। यहां तक कि एक मंत्री को घर से निकालकर थाने के पास कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। उस समय समानांतर थाने, समानांतर कोर्ट और समानांतर सत्ता चलने लगी थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में डेडलाइन तय की, तब सभी को लगा कि यह संभव होगा भी या नहीं। लेकिन कई पुलिस अधिकारी स्वयं आगे आए और बालाघाट में ड्यूटी की मांग की, जिससे नक्सलवाद खत्म करने में बड़ी मदद मिली। हमारे जवानों और नागरिकों को सलाम मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मंडला, बालाघाट और डिंडोरी में नक्सली समस्या खत्म करना प्रदेश के लिए एक बड़ा उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि “हमारे जवानों और आम नागरिकों ने इसकी बड़ी कीमत चुकाई है, मैं उन सभी को सलाम करता हूं।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब जरूरत है कि सिस्टम को इतना मजबूत बनाया जाए कि यह समस्या दोबारा सिर न उठा सके। नदी जोड़ो अभियान पर बोलते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। परस्पर सौहार्द के तहत राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदी का पानी पहुंचने से बड़ी राहत मिलेगी। सीएम ने कहा पार्वती कालीसिंध चंबल, केन बेतवा और ताप्ती नदी जोड़ो परियोजनाएं नए युग की शुरुआत है। 800 करोड़ की क्षिप्रा योजना से अब क्षिप्रा जल से ही स्नान होगा। गंभीर और खान नदी को जोड़कर परियोजना बनाई है। ऊपर खेती होगी और नदी का टनल बनकर सिंचाई का कार्य कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है यह दो वर्ष विकास और सेवा के रहे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा यह दो वर्ष विकास ओर सेवा के रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार विकसित भारत 2047 को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। लाड़ली बहनों को डेढ़ हजार रुपए की राशि दे रहे हैं। महिला उद्यमियों के लिए 275 करोड़ का प्रविधान किया। युवा रोजगार के लिए भी सरकार ने निर्णय लिए। पीएमसी एंबुलेंस जैसे नए प्रयोग किए। हर वर्ग के हर समाज के लिए काम करने का प्रयास किया गया। शिप्रा में स्नान हो सके, इसलिए बनाई 800 करोड़ की योजना सीएम यादव ने कहा कि उज्जैन की शिप्रा नदी में दो तरह की चुनौतियां थीं। पिछले सिंहस्थ में साधु-संतों ने गंभीर नदी के पानी से स्नान किया था। स्नान तो हुआ और सिंहस्थ संपन्न हुआ, लेकिन शिप्रा नदी का पानी उपलब्ध नहीं था। इस बार जल संसाधन विभाग ने व्यवस्था कर दी है कि सिंहस्थ में शिप्रा नदी के जल से स्नान हो सके। इसके लिए लगभग 800 करोड़ रुपए की योजना बनाई गई है। मध्यप्रदेश में एक राज्य के अंदर दो नदियों को जोड़ने का अभियान भी शुरू किया गया है। इसके तहत गंभीर और खान नदी को मिलाने के लिए टनल बनाकर नदी से नदी जोड़ने का काम किया गया है। ऊपर खेती होती है और नीचे नदी की धारा बहती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल में पहले जीआईएस सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसे उनकी सरकार ने लागू किया। इसके अलावा, सागर में खाद का कारखाना चालू होने से यूरिया और अन्य खाद की आपूर्ति में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने न केवल व्यवस्थाएं चलाईं, बल्कि दूरदर्शी सोच के साथ ऐसे प्रोजेक्ट भी पूरे किए जो सामान्यतः लंबा समय लेते। 'भोपाल गैस त्रासदी के कचरे का निष्पादन हमने किया' मुख्यमंत्री यादव ने इंदौर की हुकुम चंद मिल का जिक्र करते हुए कहा कि 300 से 400 करोड़ के बकाया में उलझी मिल का निराकरण होने के बाद अब 70 से 80 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट यहां लगने वाला है। उन्होंने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी के कचरे का निष्पादन करने का काम उनकी सरकार ने किया है। 'प्राइवेट से ज्यादा वेतन देंगे, ताकि एक्सपर्ट सरकारी सेवा में आएं' मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती डॉक्टरों की कमी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, तेज गति से मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं तो हमको उसके हिसाब से मैनपॉवर भी चाहिए। हेल्थ सेक्टर में एक्सपर्ट नहीं मिलने की चुनौती तो है, लेकिन हमने तय किया है कि हम प्राइवेट सेक्टर से ज्यादा वेतन देकर एक्सपर्ट डॉक्टरों को सरकारी सेवाओं में आगे लाएंगे। दो बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र सीएम यादव ने कहा कि, मध्यप्रदेश में शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025 को मंजूरी दी है। इसके तहत इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर को मेट्रोपॉलिटन सिटी घोषित किया है। पहला इंदौर-उज्जैन-देवास-धार और दूसरा भोपाल-सीहोर-रायसेन-विदिशा-ब्यावरा विकसित होंगे। एकीकृत टाउनशिप नीति-2025 को भी स्वीकृति दी गई है। मई 2025 में इंदौर मेट्रो और दिसंबर 2025 में भोपाल मेट्रो का परिचालन शुरू होगा। डिप्टी सीएम बोले- विकास और विरासत दोनों पर ध्यान कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का दो साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ मध्यप्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जा रहे हैं। इन दो वर्षों में विकास और विरासत दोनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि विकास और सेवा के ये दो वर्ष अच्छे शासन, पारदर्शिता और त्वरित निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। त्वरित कार्यवाही से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने … Read more

रायपुर: 02 सालों में छत्तीसगढ़ ने बनाई नई पहचान, अब भारत का ग्रोथ इंजन बन गया राज्य”

रायपुर : राज्य सरकार के 02 वर्ष पर विशेष : छत्तीसगढ़ बना भारत का ग्रोथ इंजन    रायपुर विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य अनुरूप छत्तीसगढ़ में न केवल तेजी से अधोसंरचनाएं विकसित हो रही है, बल्कि सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल के लक्ष्य को भी हासिल किया जा रहा है। विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ भारत के विकास इंजन के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति में डिफेंस, आईटी, एआई, ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों को विशेष पैकेज दिया जा रहा है। राज्य में अब तक 7.69 लाख रूपए के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। राज्य में विकास, विश्वास और सुरक्षा का नया वातावरण बना है। राज्य की प्रगति में माओवाद आतंक हमेशा से ही बाधक रही है। अब यह बाधा दूर होने जा रही है। माओवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं परिणाम आधारित बनाने के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया है। शासन व्यवस्था में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु 01 दिसम्बर 2025 से मंत्रालय महानदी भवन में अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर दी गई है, जिससे कार्य संस्कृति और जवाबदेही को नई पहचान मिल रही है। प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण जुड़ा है नवा रायपुर अटल नगर में छत्तीसगढ़ के नए भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया। यह विधानसभा भवन नई ऊर्जा, नई सोच और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प का प्रतीक है। पिछले 2 वर्षों में बस्तर और सरगुजा अंचल के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वहां सड़क, रेल, स्वास्थ्य और संचार सहित कई नई परियोजनाएं भी शुरू की गई। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा  दिया गया है। बस्तर में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास किए जा रह हैं। इसके लिए नई होम स्टे पॉलिसी और इको टूरिज्म के लिए विशेष प्रावधान रखे है। बस्तर और सरगुजा अंचल में उद्योगों की स्थापना पर विशेष सुविधाएं, छूट और रियायतें दी जा रही है। इसके अलावा उद्योगों को विशेष पैकेज के अंतर्गत सस्ती जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।  नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत माओवाद आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित 69 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से मूलभूत सुविधाओं के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। बस्तर की बदलती फिजा को सबके सामने लाने में बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे बड़े आयोजनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बस्तर के युवा अब विकास से जुड़ना चाहते है, इसकी बानगी यहां चलाए जा रहे हैं। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों में देखी जा सकती है। बस्तर की युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए पर्यटन ऑटोमोबाईल, पायलट, आईटी आदि क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  राज्य में सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल को हासिल करने के लिए सामाजिक, आर्थिक गतिशीलता के लिए शुरू की गई कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत 40 लाख घरों में पीने का स्वच्छ जल मुहैया कराया जा रहा है। इसी प्रकार 26 लाख से अधिक परिवारों के लिए पीएम आवास स्वीकृत किए गए हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने और समाज में उनकी भूमिका बढ़ाने के लिए महतारी वंदन योजना में 70 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खाते में एक-एक हजार रूपए की राशि दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 14 हजार करोड़ रूपए की राशि जारी की जा चुकी है। आयुष्मान भारत योजना के दायरे में राज्य की 98 प्रतिशत आबादी को लाया जा चुका है।  छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार और समर्थन मूल्य में खरीदी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मोदी की गारंटी के अंतर्गत किसानों को देश में सर्वाधिक धान का मूल्य दिया जा रहा है। राज्य के 2300 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों में सफलतापूर्वक धान की खरीदी की जा रही है। किसानों से धान प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से तथा 3100 रूपए प्रति क्विंटल की कीमत दी जा रही है। किसान हितैषी फैसलों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में किसानों के खाते में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। किसान इस राशि का खेती किसानी में भरपूर निवेश कर रहे हैं और इससे बाजार भी गुलजार हुए हैं जिससे शहरी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिख रहा है। ट्रैक्टर आदि की बिक्री ने रिकार्ड आंकड़ा छू लिया है।  छगन लोन्हारे उप संचालक (जनसंपर्क) 

MP को नक्सलमुक्त करने का दावा, CM मोहन यादव बोले- लाल सलाम को मिली आखिरी सलामी

 बालाघाट मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य को नक्सली खतरे से पूरी तरह मुक्त होने का दावा किया. यह घोषणा तब की गई जब बालाघाट जिले में दो इनामी नक्सलियों दीपक और रोहित ने सरेंडर कर दिया. उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने के पक्के इरादे की वजह से मुमकिन हुआ है. CM यादव भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बालाघाट में नक्सलियों के सरेंडर से जुड़े 'रिहैबिलिटेशन टू रिजुविनेशन' कैंपेन के तहत आयोजित एक प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे. मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नक्‍सलवाद मुक्‍त एमपी का ऐलान करने के साथ कहा कि यह सफलता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में तैयार रणनीति का परिणाम है. सीएम ने बताया क‍ि हमारी नीति स्पष्ट थी या तो नक्सलियों को आत्मसमर्पण करवाया जाएगा या उन्हें खत्म किया जाएगा. आज वही नीति सफल हुई.  नक्सली दीपक और रोहित ने दिन में बालाघाट जिले के बिरसा थाना इलाके के कोरका में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) कैंप में सरेंडर कर दिया. नक्सली दीपक बालाघाट व रोहित छत्तीसगढ़ का निवासी  11 द‍िसंबर 2025 को मध्‍य प्रदेश के बालाघाट पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में आईजी संजयकुमार, सीआरपीएफ आईजी नीतू भट्टाचार्य, कलेक्टर मृणाल मीना और एसपी आदित्य मिश्रा मौजूद रहे. आईजी संजय कुमार ने बताया कि नक्सली दीपक बालाघाट जिले के पालागोंदी का रहने वाला है  जबकि रोहित छत्तीसगढ़ का निवासी है. सरेंडर के समय दीपक ने कार्बाइन गन और कारतूस भी समर्पित किए हैं. बालाघाट ज‍िला कलेक्टर मृणाल मीना ने बताया कि बालाघाट जिले में नक्सल गतिविधियों के कारण लगभग सौ गांवों के आदिवासी ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने में दिक्कत आ रही थी. चूंकि अब जिला नक्सल मुक्त हो चुका है ऐसे में उपरोक्त प्रभावित गांवों में विकास की धारा बहेगी.  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दीपक और रोहित पर क्रम से 29 लाख रुपए और 14 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था, और दोनों ने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताते हुए सरेंडर कर दिया. बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा कि जिले में अब कोई हार्डकोर नक्सली एक्टिव नहीं है. उन्होंने कहा कि दीपक बालाघाट जिले के पलागांवडी का रहने वाला है और दोनों लंबे समय से इलाके में नक्सल गतिविधियों में एक्टिव थे. उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी एजेंसियां ​​लंबे समय से उनकी तलाश में थीं और यह एक बड़ी सफलता है. पुलिस अधिकारी ने कहा, "यह सरेंडर CRPF और लोकल पुलिस की जॉइंट कार्रवाई, लगातार दबाव और असरदार स्ट्रैटेजी की वजह से मुमकिन हुआ. इससे इलाके में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा." गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और जवानों की अदम्य हिम्मत और कुर्बानी की वजह से बालाघाट के लाल सलाम को आखिरी सलामी दी गई है. CM यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के गाइडेंस में आजादी के बाद पहली बार नक्सलियों के खिलाफ कोऑर्डिनेटेड तरीके से एक शानदार और ऐतिहासिक कैंपेन शुरू किया गया. उन्होंने एक ऑफिशियल बयान में कहा, "सेंट्रल लीडरशिप ने नक्सलवाद के खत्म होने के लिए 26 जनवरी 2026 की डेडलाइन घोषित की है." मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलियों के पास सिर्फ दो ऑप्शन हैं, नई जिंदगी का मौका या जिंदगी खत्म. उन्होंने आगे कहा, "सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज और मध्य प्रदेश पुलिस के बहादुर जवानों की मिली-जुली कोशिशों की वजह से 11 दिसंबर को आखिरी दो नक्सलियों के सरेंडर के साथ राज्य नक्सल-फ्री हो गया." CM यादव ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद के खत्म होने से मंडला, डिंडोरी और बालाघाट के विकास में आने वाली रुकावटें दूर हो गई हैं. उन्होंने कहा, "हम इस इलाके को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए सबके साथ मिलकर काम करेंगे. हम माओवाद को पनपने नहीं देंगे." साथ ही उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान कुर्बान करने वाले सभी शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी. 10 हार्डकोर नक्सलियों ने एक साथ डाले थे हथियार बता दें क‍ि मध्य प्रदेश के बालाघाट में 7 दिसंबर की अपराह्न साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने 10 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था. मध्य प्रदेश में "पुनर्वास से पुनर्जीवन" के तहत नक्सलियों का यह कोई साधारण सरेंडर नहीं था, क्योंकि इनमें से कई नक्‍सली कैडर KB और MMC ज़ोन में वर्षों तक खूनी वारदातों का हिस्सा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरेंडर करने वाले कैडर को राज्य की पॉलिसी के तहत नई जिंदगी दी जाएगी और सरकार उन्हें सुरक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: मोबिलिटी और नई तकनीक क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण

मोबिलिटी और नई तकनीक क्षेत्रीय विकास के लिए आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने उज्जैन के ग्राम नलवा में मोबिलिटी स्टेशन का भोपाल से वर्चुअली किया शुभारंभ  उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के ग्राम नलवा स्थित  गायत्री पेट्रोलियम- मोबिलिटी स्टेशन का मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली शुभारंभ किया। उन्होंने प्रतिष्ठान के संचालक  गोविंद सिंह आंजना को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष-2028 के सिहंस्थ और उज्जैन-इंदौर-देवास के सम्मिलित रूप से मेट्रोपॉलिटन एरिया के रूप में विकास से भविष्य का पश्चिमी मध्य प्रदेश आकर ले रहा है। क्षेत्र में रोड नेटवर्क और औद्योगिक गतिविधियों का तेजी से विकास और विस्तार हो रहा है। क्षेत्र की गतिशीलता को सुनिश्चित करने में फ्यूल और मोबिलिटी तथा नई तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि  गायत्री मोबिलिटी स्टेशन, गुणवत्ता और सेवा भाव के साथ क्षेत्र की प्रगति में योगदान देगा। ग्राम नलवा में हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय जन उपस्थित थे।  

डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा जताया, मीटिंग पर मीटिंग से झुंझलाए, रूस पर यूक्रेन का दबाव

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब रूस और यूक्रेन की शांति बातचीत से लगभग ऊब चुके हैं. कई दौर की मीटिंग चली, कई प्रस्ताव दिए गए, कई दखल भी हुए, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं हुआ. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार साफ शब्दों में कहा है कि वह ‘अब समय बर्बाद नहीं करना चाहते’.ट्रंप की नाराजगी सिर्फ रूस पर नहीं है. वह खुलकर यूरोपीय देशों और यूक्रेन से भी खफा दिखे. NBC की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप लंबे समय से ट्रंप के प्रस्तावों से बचने की कोशिश कर रहा है, खासकर उस मांग से जिसमें यूक्रेन को रूस को जमीन सौंपने की बात कही गई है. यूरोप ने कहा है कि यह प्लान अस्वीकार्य है, जबकि ट्रंप इसे ‘तुरंत लागू होने वाला समाधान’ बताते रहे हैं. वहीं ट्रंप ने रूस-यूक्रेन की लड़ाई को तीसरे विश्वयुद्ध तक पहुंचने की बात कही है. ट्रंप ने कहा, ‘मैंने उन्हें कुछ दिन पहले बताया था. मैंने कहा था कि अगर हर कोई इसी तरह के खेल खेलता रहा, तो अंततः तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा.’ यह उन सभी देशों को संदेश है जो या तो रूस या यूक्रेन के पक्ष में खड़े हैं. ट्रंप क्यों हुए परेशान? एक बिजनेस राउंडटेबल में ट्रंप ने कहा, ‘वे लोग चाहते हैं कि हम वीकेंड में यूरोप मीटिंग के लिए आएं. हम तभी आएंगे जब कुछ ठोस लेकर वापस आएंगे. हम समय बर्बाद करने नहीं बैठे.’ उन्होंने यहां तक कह दिया, ‘कई बार आपको लोगों को आपस में लड़ने देना पड़ता है, कई बार नहीं.’ यह बयान बताता है कि ट्रंप अब खुद को इस डिप्लोमेसी से दूर करने की तैयारी में हैं. उधर जेलेंस्की ने भी पहली बार माना कि अमेरिका उन पर ‘बड़े भूभाग छोड़ने’ का दबाव बना रहा है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खुलासा किया कि विवाद की सबसे बड़ी वजह डोनेत्स्क क्षेत्र और जापोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट पर नियंत्रण है. ज़ेलेंस्की ने कहा, ‘वे चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेत्स्क छोड़ दे और रूस वहां न घुसे. वे इसे फ्री इकोनॉमिक जोन कह रहे हैं.’ रूस में कहां हुआ हमला? इसी तनाव के बीच यूक्रेन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने रूस को पूरी तरह चौंका दिया है. यूक्रेन ने पहली बार कैस्पियन सागर में रूस के ऑफशोर तेल प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी के ड्रोन से वार किया है. यह मिशन पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुआ था. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस के सूत्रों ने बताया, ‘यह पहली बार है जब यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में रूस की तेल फैसिलिटी को निशाना बनाया है. जो भी यूनिट्स रूसी युद्ध मशीन को फंड करती हैं, वे सब वैध लक्ष्य हैं.’ यह हमला रूस की बड़ी ऊर्जा कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरी, तेल पाइपलाइन, टर्मिनल और यहां तक कि टैंकरों पर भी हमले तेज कर दिए हैं. सिर्फ अगस्त से नवंबर के बीच यूक्रेन ने रूस की 77 एनर्जी फैसिलिटी हिट की हैं, जो साल के पहले सात महीनों की तुलना में लगभग दोगुना है. बड़ी बात यह है कि अब यूक्रेन एक ही रिफाइनरी को बार-बार टारगेट कर रहा है ताकि वह कभी पूरी तरह चालू न हो सके. सारातोव रिफाइनरी को अगस्त से अब तक आठ बार निशाना बनाया जा चुका है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? विशेषज्ञों का कहना है कि रूस तेल की कमाई से सेना में भर्ती और वेतन बढ़ाकर अपना युद्ध तंत्र मजबूत कर रहा है. इसलिए यूक्रेन अब सीधा उस ‘एनर्जी ATM’ पर वार कर रहा है जिससे रूस को सबसे ज्यादा पैसा मिलता है. परिणाम साफ हैं कि रूस की मरम्मत की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है और कई जगहों पर लंबे समय तक भारी नुकसान हुआ है. दूसरी तरफ, मोर्चे पर रूस धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और बातचीत का हर दौर रूस की मांगों को और मजबूत कर रहा है.

डॉ. मोहन यादव का उभरता मध्यप्रदेश: नीतियों और निवेश से आकार ले रहा औद्योगिक नवयुग

मप्र के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ मोहन जी यादव की सरकार के दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं । भोपाल  किसी भी राज्य का विकास केवल परियोजनाओं और आंकड़ों से नहीं मापा जाता, बल्कि उस दृष्टि से पहचाना जाता है जो शासन को दिशा देती है। मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्ष इसी दृष्टि के सशक्त उदाहरण के रूप में उभरे हैं। यह कालखंड प्रशासनिक निरंतरता का नहीं, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, निवेश–मित्र वातावरण और संरचनात्मक सुधारों का काल रहा है। ‘उद्योग करना आसान’ जैसी अवधारणाओं को व्यवहार में उतारते हुए सरकार ने मध्यप्रदेश को निवेशक, विश्वास आधारित राज्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। नीति आधारित शासन और औद्योगिक स्पष्टता डॉ. मोहन यादव सरकार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने विकास को आकस्मिक निर्णयों पर नहीं, बल्कि सुस्पष्ट नीतिगत ढांचे पर आधारित किया। एक साथ 18 नीतियों को लागू करना केवल प्रशासनिक घोषणा नहीं, बल्कि यह संकेत है कि सरकार उद्योग, सेवा, कृषि, पर्यटन, तकनीक और ऊर्जा, सभी क्षेत्रों को एक साझा विकास दृष्टि से देख रही है। इन नीतियों के माध्यम से निवेशकों को यह भरोसा मिला कि राज्य में नियम अस्थिर नहीं हैं और प्रक्रियाएँ अनुमानित तथा पारदर्शी हैं। औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति, आईटी, आईटीईएस और इलेक्ट्रॉनिक्स निवेश नीति, स्टार्ट-अप नीति और लॉजिस्टिक्स नीति ने मध्यप्रदेश को पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नवीन और उभरते क्षेत्रों के लिए भी आकर्षक बनाया। डिजिटल स्टेट नीति और ड्रोन आधारित सेवाओं को प्रोत्साहन देने वाली नीति ने यह स्पष्ट किया कि सरकार केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयारी कर रही है। निवेशक–मित्र वातावरण और प्रशासनिक भरोसा इन दो वर्षों में राज्य सरकार ने निवेश को केवल आमंत्रण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि निवेशक के साथ खड़े रहने की नीति अपनाई। ‘निवेशक मित्र नीति’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने वाला व्यक्ति या संस्था अकेली नहीं है; सरकार उसकी प्रक्रियात्मक, संरचनात्मक और प्रशासनिक आवश्यकताओं में सहभागी है। सिंगल विंडो सिस्टम, समयबद्ध स्वीकृतियाँ और स्पष्ट उत्तरदायित्व ने प्रशासन को निवेश के लिए सहयोगी बनाया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 इस नीति का प्रत्यक्ष परिणाम रही, जहाँ ₹26 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आए। यह उपलब्धि केवल एक आयोजन की सफलता नहीं, बल्कि उस भरोसे का परिणाम है जो सरकार ने उद्योग जगत में निर्मित किया। इसी क्रम में सात रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और चौदह इंटरैक्टिव सेशन्स ने यह सुनिश्चित किया कि निवेश संवाद केवल राजधानी तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के विभिन्न अंचलों तक पहुँचे। रोजगार, कौशल और मानव संसाधन का पुनर्गठन मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में रोजगार को केवल सांख्यिकीय लक्ष्य के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण के माध्यम के रूप में देखा गया। 23 लाख से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन इस बात का प्रमाण है कि निवेश को कौशल और स्थानीय संसाधनों से जोड़ा गया। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग–शैक्षणिक समन्वय के प्रयासों ने रोजगार को अल्पकालिक नहीं, बल्कि स्थायी आर्थिक आधार प्रदान करने की दिशा में कार्य किया। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास नीति के माध्यम से युवाओं को आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया गया। इससे रोजगार केवल महानगरों तक सीमित न रहकर छोटे शहरों और औद्योगिक अंचलों तक पहुँचा। नवीकरणीय ऊर्जा और हरित विकास की दिशा विकास की आधुनिक अवधारणा पर्यावरणीय संतुलन के बिना अधूरी मानी जाती है। इस दृष्टि से मोहन यादव सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा नीति को विकास का अभिन्न अंग बनाया। 278 मेगावाट की सोलर परियोजनाएँ और सैकड़ों एकड़ में ऊर्जा आधारित निवेश यह दर्शाते हैं कि मध्यप्रदेश ने हरित विकास को विकल्प नहीं, अनिवार्यता के रूप में स्वीकार किया है। नवीकरणीय ऊर्जा नीति ने न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि राज्य को निवेशकों के लिए एक जिम्मेदार और दीर्घकालिक दृष्टि वाला गंतव्य भी बनाया। यह नीति आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को ऊर्जा आधारित उद्योगों का केंद्र बनाने की क्षमता रखती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स : औद्योगिक प्रवाह की रीढ़ औद्योगिक विकास का वास्तविक आधार मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। लॉजिस्टिक्स नीति, औद्योगिक कॉरिडोर और परिवहन नेटवर्क के विस्तार ने मध्यप्रदेश को कनेक्टिविटी आधारित राज्य के रूप में उभारा है। सड़क, एक्सप्रेस-वे और माल परिवहन की बेहतर व्यवस्था ने उद्योगों के लिए लागत घटाई और समयबद्ध आपूर्ति को संभव बनाया। यह इंफ्रास्ट्रक्चर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि, पर्यटन और सेवाक्षेत्र के विस्तार में भी सहायक बना। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बहुआयामी गति मिली। पर्यटन, संस्कृति और आर्थिक पुनर्जीवन डॉ. मोहन यादव सरकार की एक विशिष्ट पहचान यह रही कि उसने विकास को सांस्कृतिक जड़ों से अलग नहीं किया। पर्यटन नीति, फिल्म पर्यटन नीति और धार्मिक–सांस्कृतिक स्थलों के विकास ने यह स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश अपनी विरासत को केवल स्मृति नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में देखता है। महाकाल लोक, राम वन गमन पथ और अन्य धार्मिक–पर्यटन परियोजनाओं ने न केवल राज्य की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया, बल्कि स्थानीय रोजगार और सेवा क्षेत्र को भी नई ऊर्जा दी। यह मॉडल दर्शाता है कि संस्कृति और विकास एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। प्रशासनिक कार्यशैली : निर्णय, संवाद और मैदान में उपस्थिति मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली उनकी निरंतर सक्रियता में परिलक्षित होती है। वे केवल नीतियाँ घोषित करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके क्रियान्वयन की सतत समीक्षा भी करते रहे। उद्योगपतियों, अधिकारियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद ने प्रशासन को अधिक उत्तरदायी बनाया। यह कार्यशैली शासन को कागजी प्रक्रियाओं से निकालकर परिणाम आधारित प्रशासन की ओर ले जाती है, जहाँ निर्णय का मूल्यांकन उसके प्रभाव से होता है। निष्कर्ष : हम कह सकते है कि डॉ मोहन यादव की सरकार ने मप्र में एक नवयुग की ठोस आधारशिला रख दी है ,क्योंकि मोहन यादव सरकार के ये दो वर्ष मध्यप्रदेश के लिए परिवर्तन के संकेत नहीं, बल्कि परिवर्तन की ठोस आधारशिला हैं। नीतिगत स्पष्टता, निवेश–मित्र वातावरण, रोजगार सृजन, हरित ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक चेतना—इन सभी का समन्वय एक ऐसे विकास मॉडल की ओर संकेत करता है जो राज्य को केवल विकसित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाता है। यदि यही नीति–निरंतरता और प्रशासनिक सक्रियता बनी रहती है, तो आने वाले … Read more

मध्य प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप, इंदौर में 5.2 डिग्री, भोपाल और ग्वालियर में पारा गिरा; 5 जिलों में अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। प्रदेश का तापमान 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। शहडोल का कल्याणपुर एक बार फिर सबसे सर्द रहा। यहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री रहा। वहीं इंदौर में बीते 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। दरअसल, पचमढ़ी से भी ठंडी इंदौर की रात रही है। यहां रात का तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, बीती रात अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे ही रहा। राजगढ़ में 5.2 डिग्री, नौगांव में 6.4 डिग्री, उमरिया में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, मलाजखंड में 7.2 डिग्री, मंडला में 7.6 डिग्री, रायसेन, शिवपुरी-नरसिंहपुर में 8 डिग्री, बैतूल में 8.5 डिग्री, छिंदवाड़ा-खजुराहो में 9 डिग्री, सतना में 9.1 डिग्री, टीकमगढ़-रतलाम में 9.5 डिग्री, दमोह में 9.8 डिग्री और दतिया में 9.9 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हुई बर्फबारी से मध्य प्रदेश में कड़ाके की सर्दी देखने को मिल रही है। प्रदेश में आ रही उत्तरी हवाओं के चलते शीतलहर की स्थिति बनी है। आज शुक्रवार को पांच जिलों भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर और सीहोर में कोल्ड वेव का अलर्ट है। इससे पहले गुरुवार को भोपाल, इंदौर, राजगढ़, सीहोर और रायसेन में शीतलहर चली। वहीं शहडोल में कोल्ड डे यानी, शीतल दिन रहा। प्रदेश में पारा 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। शहडोल का कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा, यहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। इंदौर में 4.5 डिग्री, पचमढ़ी में 4.8 डिग्री, राजगढ़ में 5 डिग्री और शाजापुर के गिरवर में 5.2 डिग्री तापमान रहा। 204 किमी की रफ्तार से बह रही जेट स्ट्रीम मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर भी है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 204 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। इस कारण शुक्रवार को भी शीतलहर का अलर्ट है। क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इसकी रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा इस बार सर्दी बढ़ाएगी। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही होना है। उत्तर से बर्फीली हवाएं आ रही देश के उत्तरी हिस्से यानी, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी हुई है। इस वजह से हवा की रफ्तार उत्तरी हो गई हैं। बर्फीली हवा की वजह से ही प्रदेश में शीतलहर की स्थिति है। दिसंबर में भी रिकॉर्ड तोड़ रही सर्दी मौसम विभाग की माने तो इस बार सर्दी का असर तेज है। भोपाल में नवंबर की सर्दी का 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी है। ऐसी ही सर्दी दिसंबर में भी है। इंदौर में दिसंबर की सर्दी का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहेगी ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।     भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी। 20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की मानें तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है। इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का     मौसम केंद्र भोपाल के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे के अनुसार वैश्विक मौसम मॉडल (विश्व मौसम संगठन, भारत मौसम विज्ञान विभाग आदि) संकेत दे रहे थे कि इस बार ला नीना सक्रिय रहेगा। ला नीना का मतलब, प्रशांत महासागर का ठंडा होना। जैसे ही समुद्र ठंडा होता है, हवा और ज्यादा ठंडी होकर एशिया-भारत की ओर दबाव से धकेली जाती है। यह वही ठंड है जिसने नवंबर से … Read more

ED ने कफ सिरप घोटाले में की बड़ी छापेमारी, 3 राज्यों के 25 ठिकानों पर चली कार्रवाई

लखनऊ उत्तर प्रदेश में कोडीन आधारित कफ सिरप (CBCS) के अवैध उत्पादन, तस्करी और सीमापार सप्लाई से जुड़े बड़े रैकेट पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को सख्त कार्रवाई की. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के तहत उत्तर प्रदेश, झारखंड और गुजरात में कुल 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है. तीन राज्यों में ईडी की छापेमारी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्रवाई लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और सहारनपुर के अलावा रांची और अहमदाबाद में भी चल रही है. ED ने यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया है. मामला उस समय बड़ा बना जब यूपी सरकार ने राज्य में कोडीन आधारित कफ सिरप के दुरुपयोग, अवैध निर्माण और तस्करी के कई मामलों पर संज्ञान लिया था. ED अधिकारियों के अनुसार, लगभग 30 एफआईआर यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई थीं, जिनमें इस अवैध व्यापार का भंडाफोड़ हुआ था. जांच में सामने आया कि कफ सिरप को बड़े पैमाने पर गलत तरीके से तैयार किया जा रहा था और राज्य के बाहर ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश सीमा तक इसकी अवैध ढुलाई की जा रही थी. मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल देश छोड़कर फरार जांच में सामने आए मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के देश छोड़कर दुबई भागने की जानकारी भी मिली है. उसके पिता को यूपी पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था. वहीं आलोक सिंह, अमित सिंह और अन्य सहयोगियों के ठिकानों पर भी छापेमारी चल रही है. इसके साथ ही एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विष्णु अग्रवाल के परिसरों पर भी ED की कार्रवाई जारी है, जिन्हें रैकेट के वित्तीय लेनदेन में शामिल होने का आरोप है. ED अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में करीब 1,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का संदेह है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अलग-अलग खातों और संस्थाओं में घुमाया गया. यूपी पुलिस इस मामले में अब तक 32 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और SIT गठित कर विशेष जांच कर रही है.

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के दो वर्ष पूरे, आज सीएम डॉ. मोहन यादव देंगे सरकार की कामकाजी रिपोर्ट

भोपाल  मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के दो साल पूरे होने पर आज राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सरकार के काम और उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा पेश करेंगे। 13 दिसंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. यादव ने शासन में तेजी, पारदर्शिता और जनकल्याण पर विशेष जोर दिया। दो वर्षों में सरकार ने विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। किसानों, महिलाओं, युवाओं और उद्योगों पर केंद्रित योजनाओं ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में मदद की है। किसानों के लिए भावांतर योजना, पशुपालन प्रोत्साहन, खेतों में सौर संयंत्र लगाने की पहल और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह की बढ़ी हुई राशि, 35 प्रतिशत आरक्षण और नारी सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं ने उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है। युवाओं के लिए नई पुलिस भर्ती, स्वास्थ्य संस्थानों में बड़े पैमाने पर पदों का सृजन, सीएम राइज स्कूलों को सांदीपनि मॉडल में विकसित करना और साइबर तहसील, ई-चेक गेट व संपदा-2.0 जैसे डिजिटल सुधार सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। बुनियादी ढांचे में पीएम मित्र पार्क, मुरैना सोलर-स्टोरेज प्रोजेक्ट, केन-बेतवा लिंक, रेलवे कोच निर्माण, उज्जैन मेडिसिटी, एयर एम्बुलेंस सेवा, पांच नए एयरपोर्ट और इंदौर मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट प्रदेश को आधुनिक स्वरूप दे रहे हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में श्रीकृष्ण पाथेय, श्रीराम राजा लोक, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, प्रमुख शहरों में महानाट्य, डोंगला वैद्यशाला, तारामंडल और 19 क्षेत्रों में शराबबंदी जैसे निर्णय भी ऐतिहासिक रहे हैं। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री इन सभी पहल और प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी साझा करेंगे और आने वाले समय के लिए नई रूपरेखा भी प्रस्तुत करेंगे।  

बाबा रणजीत की प्रभातफेरी में 7 लाख श्रद्धालुओं का उमड़ा आस्था का सैलाब, 4.5 किमी का सफर 7 घंटे में पूरा

इंदौर  इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र से शुक्रवार सुबह चार बजे रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी निकली, जिसमें दो लाख से अधिक लोगों जुटे। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों की ऊर्जा कम होने का नाम नहीं ले रही थी। चारों तरफ भगवा पताकाएं, भजन गाती मंडलियां, भक्ति में डूबे लोगों का हुजूम सड़क पर नजर आया। रणजीत अष्टमी के मौके पर इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर से रणजीत बाबा की विशाल प्रभातफेरी निकाली गई। स्वर्ण रथ पर विराजित बाबा के दर्शन पाने के लिए 5.2 डिग्री सेल्सियस की ठंड में छह से सात लाख भक्त पहुंचे। इतनी भीड़ होने के कारण यात्रा को 4.5 किलोमीटर सफर में 7 घंटे का समय लगा।  रात से ही रणजीत हनुमान मार्ग पर प्रभातफेरी की तैयारियां शुरू हो गईं थीं। सुबह 32वें क्रम पर बाबा रणजीत का रथ था। रथ के आगे भजन मंडल, नृतक दल, नासिक ढोल पर कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। प्रभातफेरी को लेकर ट्रैफिक और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम नजर आए।सुबह चार बजे मंदिर परिसर से बाबा रणजीत अपने पारंपरिक रथ में सवार होकर निकले। इस दौरान भव्य आतिशबाजी हुई। प्रभातफेरी धीरे-धीरे महूनाका की तरफ बढ़ी। अन्नपूर्णा, दशहरा मैदान, नरेंद्र तिवारी मार्ग होते हुए प्रभातफेरी फिर मंदिर पहुंची।  प्रभातफेरी द्रविड़ नगर, महू नाका, दशहरा मैदान और अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए वापस मंदिर में संपन्न हुई। यात्रा की शुरुआत सुबह 5 बजे हुई थी, जो दोपहर करीब 12 बजे संपन्न हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दीपेश व्यास के मुताबिक, यात्रा में 3 झांकियां शामिल की गई थीं। एक में भक्तों को आशीर्वाद देते हुए राम दरबार, दूसरे में माता अंजनि की गोद में भगवान हनुमान लला और तीसरे में रणजीत लोक का प्रेजेंटेशन दिखाया गया। 71 भजन मंडली भी आई थीं। इनमें तीन महाकाल की मंडली थी। यात्रा के बाद सवा लाख रक्षा सूत्र बांटा जाना है। कुछ आज तो बाकी रोज बांटे जाएंगे। रामायण पर आधारित दो झांकियों का निर्माण कराया गया था। जिसे भक्तों ने खूब सराहा। इसके अलावा 20 से ज्यादा भजन मंडलियां भी प्रभातफेरी में चलीं। प्रभातफेरी में शामिल भक्त नंगे पैर चले। कुछ भक्त झाड़ू भी लगा रहे थे।  तीन मार्गों पर वाहन प्रतिबंधित थे प्रभात फेरी के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया था। शुक्रवार सुबह तीन बजे से फूटीकोठी, उषा नगर और अन्नपूर्णा मार्ग पर वाहन प्रतिबंधित रहे। इसके अलावा फूटी कोठी चौराहा से रणजीत हनुमान रोड होकर महुनाका चौराहा तक आवागमन बंद रहा।  पांच सौ पुलिस जवान रहे तैनात रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी में पांच सौ से ज्यादा पुलिस जवान तैनात रहे। इसके अलावा मार्ग के बड़े भवनों से भी पुलिस जवान निगरानी किए। ड्रोन के जरिए भी पुलिस संदिग्ध लोगों पर नजर रखी। रथ के आसपास भी पुलिस सुरक्षा का घेरा बना रहा। चार किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग से जुड़ी गलियों में भी पुलिस जवान तैनात रहे और गलियों में बैरिकेड लगाए गए थे।  आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड तैयार प्रभातफेरी में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 3 एम्बुलेंस नरेंद्र तिवारी मार्ग, महू नाका चौराहा और दशहरा मैदान पर तैयार रखी गई थीं। 3 फायर ब्रिगेड गाड़ियां भी तैनात थीं। मार्ग पर बने सभी मंच लेफ्ट साइड पर लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित न हो। प्रभातफेरी में सबसे आगे पुलिस बल, प्रचार वाहन, बैनर, बैंड, ध्वज वाहक, झांकियां, महाकाल मंडलियां, महिला मंडल, एलईडी झांकियां, अतिथि वाहन और अंत में रणजीत बाबा का स्वर्ण रथ था। इसके बाद सफाई टीम और एम्बुलेंस चल रही थी।