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तीन दिवसीय आवास मेला में 188 करोड़ रूपये की 879 आवासों की हुई बुकिंग

रायपुर : राज्य स्तरीय आवास मेला–2025 में बंपर हुई बुकिंग तीन दिवसीय आवास मेला में 188 करोड़ रूपये की 879 आवासों की हुई बुकिंग 1% बुकिंग ऑफर अब 30 नवंबर तक, 26 नवंबर को भी जारी रहेगी स्पॉट बुकिंग सुविधा रायपुर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय आवास मेला 2025 नागरिकों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम साबित नहीं हुआ। इस आवास मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने गत दिवस किया था। इस दौरान उन्होंने कहा  था कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा राज्यभर के विभिन्न आवासीय विकल्पों को एक छत के नीचे उपलब्ध कराना ऐतिहासिक कदम है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इसे मुख्यमंत्री की ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि भविष्य में उन्हें “आवास वाले बाबा” के नाम से जाना जाएगा। पिछले एक वर्ष में ऐतिहासिक बिक्री—आवास मंत्री ओ.पी. चौधरी आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने बताया कि शासन के नीतिगत निर्णयों के कारण हाउसिंग बोर्ड ने केवल एक वर्ष में 700 करोड़ रुपये की संपत्ति बेचकर इतिहास रच दिया है, जो पिछले पाँच वर्षों के मुकाबले कई गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत प्रोजेक्ट तभी शुरू होंगे जब तीन माह में 10 प्रतिशत बुकिंग या एकमुश्त 60 प्रतिशत बुकिंग प्राप्त होगी। मेला परिसर पहले दिन से ही हजारों लोगों की भीड़ से गुलजार रहा। विभिन्न जिलों के किफायती और प्रीमियम आवासीय परियोजनाओं की जानकारी लेने और ऑन-द-स्पॉट बुकिंग कराने लोगों का उत्साह लगातार बना रहा। मेले की सबसे बड़ी आकर्षण रही केवल 1% राशि पर बुकिंग करने की सुविधा, तत्काल बैंक लोन उपलब्धता और प्रतिदिन आयोजित होने वाले लकी ड्रॉ। इन आकर्षक ऑफर्स ने न सिर्फ खरीदारों में उत्साह बढ़ाया बल्कि बुकिंग के रिकॉर्ड भी तोड़ दिए। तीन दिनों में 879 आवासों की बंपर बुकिंग तीन दिवसीय मेले में 188 करोड़ रुपये के 879 आवासों की ऑन-द-स्पॉट बुकिंग हुई, जो हाउसिंग बोर्ड की अब तक की सबसे सफल उपलब्धियों में से एक है। तीसरे दिन 25 नवंबर को तो मेला अपने चरम पर पहुंच गया। रायगढ़, जशपुर, कोरबा, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और जगदलपुर जैसी जगहों के प्रोजेक्ट्स में भारी बुकिंग दर्ज की गई। रायपुर और नवा रायपुर के प्रमुख प्रोजेक्ट—कबीर नगर, भुरकोनी, बोरियाकला, पिरदा, सेजबहार, नरदहा और अटल नगर सेक्टर-12 फेस-2 सहित मुख्यमंत्री–प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों में भी जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। समापन अवसर पर कृषि मंत्री ने की सराहना मेले के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कृषि मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड का यह प्रयास नागरिकों के सपनों को साकार करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। मंडल अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड की 2060 करोड़ रुपये की नई आवासीय परियोजनाएँ राज्य में आवास विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर को भी मेला स्थल पर संपत्तियों की जानकारी और स्पॉट बुकिंग सुविधा जारी रहेगी। साथ ही गोंडवाना राष्ट्रीय आजीविका एवं सांस्कृतिक कला महोत्सव 2025 (बीटीआई ग्राउंड, रायपुर) में भी 14 दिसंबर तक हाउसिंग बोर्ड का विशेष स्टॉल संचालित होगा l उन्होंने यह भी घोषणा की कि भारी मांग को देखते हुए 1% बुकिंग ऑफर को 30 नवंबर तक बढ़ा दिया गया है। हाउसिंग बोर्ड आयुक्त  अवनीश कुमार शरण ने बताया कि आवंटी पोर्टल और चैटबॉट के माध्यम से प्रक्रियाओं को और पारदर्शी, सरल एवं तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में 26 जिलों में 55 नई परियोजनाएं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरी की जाएंगी,जिससे राज्य में आवास उपलब्धता और बढ़ेगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां मेले के तीसरे दिन इंडियन रोलर बैंड और गायक–अभिनेता सुनील तिवारी की मंच प्रस्तुति ने दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। दूसरे दिन कलिंगा बैंड और लोकगायिका आरू साहू की प्रस्तुति ने आकर्षण बढ़ाया। उद्घाटन दिवस पर खैरागढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों और बॉलीवुड गायक विनोद राठौर की परफॉरमेंस ने उद्घाटन समारोह को यादगार बना दिया। लकी ड्रॉ ने बढ़ाया उत्साह मेले में प्रतिदिन टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, मिक्सर–ग्राइंडर, प्रेस जैसे पुरस्कार प्रदान किए गए। जबकि बंपर पुरस्कार में मारुति स्विफ्ट कार, होंडा शाइन बाइक एवं होंडा एक्टिवा शामिल रहे। पहले दिन 55 नई परियोजनाओं का शुभारंभ प्रदेश के 22 जिलों में 2060 करोड़ रुपये की 55 नई परियोजनाओं का शुभारंभ, आवंटी पोर्टल एवं व्हाट्सएप चैटबॉट का लॉन्च, लाभार्थियों को मकानों की चाबियों एवं फ्रीहोल्ड सर्टिफिकेट वितरण जैसे कार्यक्रमों ने पहले दिन ही मेले को खास बना दिया।

छात्रों का गुस्सा, सीहोर वीआईटी कॉलेज में खाने-पानी और अन्य समस्याओं को लेकर हंगामा

सीहोर मध्य प्रदेश के सीहोर में देर रात वीआईटी कॉलेज में छात्रों द्वारा भोजन एवं पानी की गुणवत्ता सहित अन्य समस्याओं को लेकर जमकर बवाल हुआ। बवाल ओर विरोध के दौरान छात्रों की ओर से कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ एवं आगजनी भी की गई। इस दौरान हज़ारों छात्रों ने जमकर हंगामा मचाया। और कॉलेज परिसर में बस और कारों में आग लगा दी। वहां खड़ी एम्बुलेंस में भी तोड़फोड़ की। हालात बिगड़ने पर 5 थानों से पुलिस बल को बुलाना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, आष्टा, एसडीओपी आष्टा, तथा आष्टा, जावर, पार्वती, कोतवाली सहित अन्य थानों से पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंच गया। अधिकारियों की ओर से छात्रों से विस्तृत चर्चा करते हुए उनके मुद्दे सुने गए तथा समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया गया। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं। सीहोर जिले के आष्टा के ग्राम कोठरी में स्थित वीआईटी कॉलेज में 4 हजार छात्रों ने हंगामा कर दिया। छात्रों का आरोप प्रदर्शन भोजन और पानी की खराब गुणवत्ता को लेकर है। उनका कहना है कि कॉलेज में घटिया पानी और खाने के कारण कई छात्रों को पीलिया हो गया है। कुछ की तो मौत हो गई। आरोप है कि 100 से अधिक छात्र आष्टा, सीहोर और भोपाल के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। जब छात्रों ने आवाज उठाई तो गार्ड ने छात्रों से पिटाई कर दी,गार्ड ओर छात्रों की बीच हुई मारपीट के बाद हालात बिगड़ गए। छात्रों का आरोप है कि घटिया पेयजल और भोजन के कारण पीलिया से पीड़ित हो रहे हैं। हालांकि कॉलेज प्रबंधन ने 30 नवंबर तक अवकाश घोषित कर दिया है। भोपाल वीआईटी यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार केके नायर ने वीडियो जारी कर खबरों को भ्रामक बताया है और कहा है कि विश्वविद्यालय में पीलिया से मौतों की अफवाहें पूरी तरह निराधार और गलत हैं। किसी भी छात्र की मौत नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार छात्रों ने शिकायत की है कि जब उन्होंने अव्यवस्थाओं के खिलाफ विरोध किया, तो हॉस्टल के वार्डन और गार्ड्स ने उनके साथ मारपीट की। चुप रहने के लिए दबाव बनाया। यूनिवर्सिटी में बात करने पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिससे छात्रों का गुस्सा भड़क गया। इस मामले में कॉलेज प्रबंधन कुछ भी नहीं बोल रहा है, लेकिन जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार कई विद्यार्थी पीलिया रोग से पीड़ित हो गए थे जिन्हें चुपचाप कॉलेज प्रबंधन ने भोपाल के चिरायु अस्पताल में भर्ती कर दिया था। कॉलेज के विद्यार्थियों ने प्रबंधन पर आरोप लगाया है की घटिया पेयजल और भोजन के कारण विद्यार्थी बीमार हो रहे हैं मैनेजमेंट ध्यान नहीं दे रहा है मिली जानकारी के अनुसार वीआईटी कॉलेज परिसर में लगभग 4000 छात्रों द्वारा भोजन एवं पानी की गुणवत्ता को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने यह भी शिकायत की कि कॉलेज मैनेजमेंट/हॉस्टल प्रबंधन द्वारा उनके साथ अनुचित व्यवहार कर मारपीट की गई है। विरोध के दौरान परिसर में व्यापक तोड़फोड़ की गई, जिसमें एक बस, दो चारपहिया वाहन, एक एम्बुलेंस, हॉस्टल के खिड़कियों के शीशे, एक आरओ प्लांट, तथा परिसर के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचाया गया। सूचना मिलते ही कोतवाली, मंडी तथा अन्य थानों से पर्याप्त पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से छात्रों से संवाद कर उन्हें शांत किया गया तथा उनकी शिकायतों के समाधान हेतु प्रबंधन से चर्चा कराए जाने का आश्वासन दिया गया। परिसर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात है और स्थिति पूर्णतः नियंत्रण में है। आष्टा के एसडीओपी आकाश अमलकर ने बताया कि वर्तमान में कॉलेज एवं हॉस्टल परिसर की स्थिति पूर्णतः सामान्य एवं नियंत्रण में है। परिसर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात है तथा स्थिति पर सतत् निगरानी रखी जा रही है। बुधवार छात्रों एवं कॉलेज प्रबंधन के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। कॉलेज प्रबंधन द्वारा छुट्टी घोषित की गई है। एसपी दीपक शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में स्थिति सामान्य है। वीआईटी में 30 नवंबर तक अवकाश किया है। कुछ बच्चे अपने घर जा रहे हैं। वीआईटी में सभी हॉस्टल के बच्चों से अपनी समस्याओं का आवेदन एवं बीमार बच्चों की जानकारी एसडीएम एवं एसडीओपी आष्टा की ओर से ली जाएगी।

CM डॉ. यादव के निर्देश पर रायसेन SP को पुलिस मुख्यालय में किया गया अटैच

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर एसपी रायसेन को किया पुलिस मुख्यालय अटैच मुख्यमंत्री ने पुलिस हैडक्वार्टर पहुँचकर वरिष्ठ अधिकारियों की ली बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार की शाम पुलिस मुख्यालय पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर हुई आपराधिक घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की और किसी भी आपराधिक तत्व को न छोड़ने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रायसेन जिले में हुई अपराधिक घटना के मामले में गिरफ़्तारी की कार्यवाही न होने पर अप्रसन्नता ज़ाहिर की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंडीदीप में चक्का जाम पर पुलिस की कार्रवाई पर नाराज़गी ज़ाहिर की। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधीक्षक रायसेन को मुख्यालय अटैच करने के निर्देश और मिसरोद थाना प्रभारी को हटाने के निर्देश दिये। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की तलाश जारी है और शीघ्र उसे गिरफ्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश     पुलिस सड़कों पर उतरे।     किसी अपराधी को छोड़े नहीं, कठोर कार्रवाई करें।     नियमित गश्त और पेट्रोलिंग बढ़ायें।     अपराधियों के प्रति ढिलाई किसी हालत में बर्दाश्त नहीं होगी।     निरीक्षण करें, लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ करें कारवाई। बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन और पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना सहित एडीजी इन्टेलीजेंस, पुलिस कमिश्नर भोपाल और अधिकारी उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए खुशखबरी! छुट्टियों में 10 दिन का इजाफा, नए नियम नए साल से प्रभावी

भोपाल प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हित में जल्द ही तीन बड़े कदम उठाने जा रही है। साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षकों को वर्ष में दस दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। वहीं, सेवानिवृत्ति के बाद शत-प्रतिशत अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी मिलेगी। सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त भी हटाई जा रही है। जनवरी 2026 से यह प्रविधान लागू हो जाएंगे। सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को अभी अर्जित अवकाश की सुविधा नहीं मिलती है। एक वर्ष में 10 दिवस के अर्जित अवकाश ग्रीष्मावकाश मिलने के कारण यह प्रविधान रखा गया था। धीरे-धीरे ग्रीष्मावकाश कम होते गए और अब ये दो माह से घटकर 20-22 दिन ही रह गए हैं। शिक्षक लंबे समय से अर्जित अवकाश का लाभ देने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 के स्थान पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2025 तैयार किए हैं। इसमें शैक्षणिक संवर्ग को एक वर्ष में 10 दिवस के अर्जित अवकाश की पात्रता दी गई है।   स्वेच्छिक और साप्ताहिक अवकाश के नियम में भी संशोधन इसके साथ ही यह प्रविधान भी किया जा रहा है कि सेवानिवृत्ति के बाद जितने अर्जित अवकाश शेष होंगे, उनका भी नकदीकरण किया जाएगा। पूरे सेवाकाल में पहले 240 दिन के नकदीकरण की सुविधा थी, जिसे बढ़ाकर 300 दिन किया गया है। जटिल प्रक्रिया होने के कारण इसका पूरा लाभ ही नहीं मिल पाता था। उधर, स्वेच्छिक अवकाश और साप्ताहिक अवकाश के नियम में भी संशोधन प्रस्तावित है। अभी शासकीय कार्यालय पांच दिन लगते हैं। शनिवार को अवकाश रहता है। कोरोनाकाल में प्रारंभ हुई इस व्यवस्था के स्थान पर दूसरे और तीसरे शनिवार को कार्यालय लगाने का प्रविधान बहाल किया जा सकता है। 24 साल बाद दो बच्चे की पाबंदी हटेगी उधर, सरकार एक और बड़ा निर्णय यह करने जा रही है कि यदि नौकरी कर रहे किसी अधिकारी-कर्मचारी का तीसरा बच्चा होता है तो उसे अपात्र मानकर सेवा से हटाया नहीं जाएगा। 26 जनवरी 2001 में तीसरा बच्चा होने पर अपात्र मान लेने की शर्त लागू की गई थी। दरअसल, छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित अन्य राज्य इस तरह की शर्त को हटा चुके हैं। इस निर्णय से स्कूल, उच्च, चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों को लाभ होगा। जिन पर कार्रवाई हो चुकी, उन्हें राहत नहीं मिलेगी हालांकि जिन पर कार्रवाई हो चुकी है, उन प्रकरणों में कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि निर्णय को भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है, जिस पर जल्द अंतिम निर्णय होने की संभावना है।

धीरेंद्र शास्त्री की पहल: 300 लड़कियों के विवाह के लिए 1 दिसंबर से रजिस्ट्रेशन, 15 फरवरी को होगा महोत्सव

छतरपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. वे अपनी कथाओं, बयानों, यात्रा सहित हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर चर्चा में रहते हैं. इस बार धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर एक अच्छी खबर दी है. जहां उन्होंने गरीब बेटियों की शादी कराने की घोषणा करते हुए रजिस्ट्रेशन की तारीख बताई. बागेश्वर् बाबा ने इस आयोजन में जुड़ने की सभी से अपील की. धीरेंद्र शास्त्री कराएंगे 300 बेटियों का विवाह सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम में हर साल शिवरात्रि के दिन सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का आयोजन किया जाता है. इस महोत्सव के माध्यम से उन गरीब बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा जाता है, जो बेसहारा, मातृ पितृहीन, अर्थहीन हैं. 15 फरवरी 2026 को होने वाले इस महोत्सव में 300 बेटियों को वैवाहिक बंधन में बांधा जाएगा. 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच बेटियों के रजिस्ट्रेशन होंगे. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव के संबंध में बताया कि "इस साल 300 बेटियों का विवाह करने का निर्णय लिया गया है. विवाह के लिए 1 दिसंबर से शुरु है रजिस्ट्रेशन 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच धाम के कार्यालय नंबर-5 में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चलेगी. इस महोत्सव में उन बेटियों के विवाह किए जाते हैं, जो बेसहारा, अत्यंत निर्धन परिवार, मातृ-पितृ हीन हैं. उन्होंने बताया कि बागेश्वर धाम में आने वाले दान से बेटियों का विवाह किया जाएगा. बागेश्वर बाबा ने कहा कि अगर देशभर के मंदिरों की दान पेटियों से बेटियों का घर बसने लगेगा, तो मानस मंदिर भी घर-घर बनने लगेगा है. इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से इस आयोजन से जुड़ने की अपील की. लोगों से सही डॉक्यूमेंट्स लाने की अपील उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जो भी रजिस्ट्रेशन कराने आएगा, वह पूरी तरह से सही दस्तावेज लेकर आए. बागेश्वर धाम की टीम घर-घर जाकर उनकी जांच करेगी. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा जितने ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी बात पहुंचेगी, उतने ही जरुरतमंद की मदद होगी. 15 फरवरी को बागेश्वर धाम में बड़ा महोत्सव होगा. जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होने पहुंचेंगे.

लेबर कोड से रोजगार और उपभोग में बड़ा लाभ, SBI रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली एसबीआई की  आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के नए लेबर कोड एक छोटे ट्रांजीशन चरण के बाद मीडियम टर्म में बेरोजगारी को 1.3 प्रतिशत तक कम करने में प्रभावी साबित होंगे। हालांकि, नए लेबर कोड का यह प्रभाव सुधारों के लागू होने, फर्म-लेवल पर एडजस्टमेंट लागत और कॉम्प्लीमेंट्री राज्य-स्तरीय नियमों जैसे कारकों पर निर्भर करेंगे। इसका मतलब होगा कि वर्तमान लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 60.1 प्रतिशत और शहरी और ग्रामीण वर्कफोर्स में 70.7 प्रतिशत एवरेज वर्किंग एज पॉपुलेशन के आधार पर इस कदम के साथ 77 लाख लोगों के लिए अतिरिक्त रोजगार का सृजन होगा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर, डॉ. सौम्या कांति घोष ने कहा, "लगभग 30 प्रतिशत के सेविंग रेट के साथ नए नियमों के लागू होने से 66 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति दिन खपत बढ़ेगी। इससे 75,000 करोड़ रुपए का उपभोग बढ़ेगा। इसलिए लेबर कोड को उपभोग बढ़ाने में एक अहम योगदाकर्ता माना जा रहा है।" रिपोर्ट में कहा गया है कि नए लेबर कोड के लागू होने से कर्मचारी और उद्यम दोनों सशक्त बनेंगे और ऐसे वर्कफोर्स का निर्माण होगा, जिससे भारत के लिए एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी आत्मनिर्भर राष्ट्र की राह बनेगी। भारत में 44 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में काम कर हैं। जिसमें से 31 करोड़ ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं। अगर अनुमान लगाते हैं कि 20 प्रतिशत लोग इनफोर्मल पे रोल से फॉर्मल पे रोल में शिफ्ट होते हैं तो इससे करीब 10 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। जिसके साथ हमारा मानना है कि अगले 2-3 वर्षों में भारत की सोशल सिक्योरिटी कवरेज की पहुंच 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएलएफएस डेटासेट के अनुसार, भारत में फॉर्मल वर्कर्स की भागीदारी 60.4 प्रतिशत है। हमारा मानना है कि नए लेबर कोड लागू होने के बाद फॉर्मलाइजेशन रेट 15.1 प्रतिशत बढ़ जाएगा, जिससे लेबर मार्केट फॉर्मलाइजेशन 75.5 प्रतिशत हो जाएगा।

RSS नेता के बयान के बाद MP में 2 बच्चे की नीति पर उठा सवाल, कानून में बदलाव की संभावना

भोपाल  बच्चे तीन भी अच्छे… राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान मध्यप्रदेश के 400 से अधिक सरकारी सेवकों के लिए संजीवनी लेकर आने वाला है। ये वे शासकीय सेवक हैं, जिनके घरों में कई कारणों से तीन संतानें पैदा हुईं। तब से उन्हें नौकरी जाने का खतरा सता रहा है। कई की तो विभाीय जांच भी चल रही है। कुछ को बड़े अफसर या विरोधी बार-बार धमका रहे हैं। संघ प्रमुख के बयान के बाद अफसर-कर्मचारी दो बच्चों(Two child law) से ज्यादा पैदा नहीं करने वाली सरकारी बंदिश हटाने की गुहार लगा रहे हैं। सरकार ने इस आधार पर प्रस्ताव तैयार किया है। एक दौर की चर्चा के बाद ये बंदिश हटाई जा सकती है। इसके बाद इन 400 से अधिक शासकीय सेवकों की नौकरी से संकट टल जाएगा। राज्य के 12 लाख शासकीय, संविदाकर्मी और विभिन्न सेवाओं के शासकीय सेवक बड़ा परिवार करना चाहेगा, वे भी कानूनी पेंच से बच जाएंगे।  मोहन भागवत का बयान देश की जनसंख्या नीति 2:1 बच्चों की है। एक परिवार में 3 बच्चे होने चाहिए। हर नागरिक को सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके परिवार में 3 बच्चे हों। (संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 28 अगस्त को आरएसएस के शताब्दी समारोह में कहा था।) दिग्विजय सरकार में लागू हुआ था दो बच्चों वाला नियम 24 साल पहले जनसंख्या नियंत्रण की चुनौतियां देख कांग्रेस की तत्कालीन दिग्विजय सिंह की सरकार ने 2001 में मप्र सेवा भर्ती सामान्य शर्ते नियम 1961 के नियम में बदलाव किया था। इसके तहत शासकीय सेवकों के लिए दो(Two child law) से ज्यादा बच्चों पर बंदिशें लगा दी थी। नियमों के बाद भी इसलिए हुए 3 बच्चे एक शासकीय सेवक ने बताया, वह 2005 में सेवा में आया। उन्हें 2001 के नियम की जानकारी नहीं थी। जब तक पता चला, ३ बच्चों के पिता बन गए। बाद में कुछ विरोधियों ने शिकायतें कीं। शासकीय सेवक, इसलिए भी पशोपेश में     कुछ कर्मचारी दंपती की दो संतानें थीं। दोनों रिकॉर्ड में आ गए, लेकिन बाद में इनमें से एक की मौत हो गई। वे दूसरी संतान चाहते हैं, पर नियम नियम आड़े आ रहा है।     कोरोनाकाल में ऐसे कई प्रकरण हुए हैं, लेकिन ऐसे मामलों में किसी तरह की कोई छूट नहीं है। खतरे की घंटी… विदेशों की तरह मप्र में एक संतान का चलन बढ़ रहा विदेशों की तरह मध्यप्रदेश के शहरी क्षेत्रों में भी एक संतान का चलन जोर पकड़ने लगा है। कई परिवार ऐसे हैं, जो एक ही संतान पैदा कर रहे हैं। ऐसे ही दंपत्ति ने पत्रिका को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले की तुलना में चुनौतियां बहुत बढ़ गई हैं, इसलिए एक ही बच्चे को जन्म दिया है। उसकी बेहतर परवरिश करने का प्रयास कर रहे हैं। विदेश से जुड़े मामलों के जानकार एवं पूर्व वन अधिकारी आरके दीक्षित का कहना है कि कई देशों में भी यह चलन तेजी से बढ़ा है, वहां भी सरकारों को जनसंख्या बढ़ोतरी के लिए प्रोत्साहन तक देना पड़ रहा है। विशेष कर इटली और जापान की आबादी बड़ी तेजी से घट रही है। यहां भी इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब की सुविधा, छत्तीसगढ़ में नई पहल

रायपुर  प्रदेश के 13 हजार से अधिक माध्यमिक और हाई स्कूलों में अब स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था को आने वाले शैक्षणिक सत्र से ही लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। इसके बाद बच्चों को पढ़ाई के लिए डिजिटल माध्यम, ऑडियो-वीडियो कंटेंट और ऑनलाइन शिक्षण का लाभ पहले से कहीं अधिक सुगमता से मिलेगा। प्रदेश में फिलहाल 1,388 स्कूलों में कंप्यूटर लैब और 5,857 स्कूलों में स्मार्ट क्लास संचालित हैं। स्कूलों की संख्या को देखते हुए यह सुविधा अभी भी सीमित दायरे में थी। अब शिक्षा विभाग ने स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के दायरे को बढ़ाकर हर जिले, हर विकासखंड और हर ब्लाक के स्कूलों तक पहुंचाने की योजना बनाई है। संबंधित जिलों के अधिकारियों को स्कूलों की भौगोलिक स्थिति और छात्र संख्या के आधार पर प्राथमिकता तय करने के निर्देश भी भेज दिए गए हैं। दो मॉडल पर काम केंद्र प्रायोजित आइसीटी (इन्फार्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलाजी) योजना के तहत दो मॉडल पर काम चल रहा है। पहला मॉडल आइसीटी लैब का है, जिसमें कंप्यूटर सिस्टम स्थापित किए जाते हैं। यह लैब शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों के उपयोग के लिए होती है। इसका उद्देश्य छात्रों को टेक्नोलाजी के माध्यम से पढ़ाई, ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अन्य शिक्षण गतिविधियों से जोड़ना है। एआई आधारित लर्निंग, भाषा सुधारक टूल, वीडियो लेक्चर और वर्चुअल कान्सेप्ट क्लास जैसे साधनों का भी उपयोग किया जाएगा। योजना का दूसरा हिस्सा स्मार्ट क्लासरूम है। इसमें बड़ी स्क्रीन, प्रोजेक्टर, ऑडियो सिस्टम और डिजिटल माड्यूल के माध्यम से स्कूलों में पढ़ाई कराई जाएगी। एक-एक स्कूल में बच्चों की संख्या के आधार पर एक से चार तक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जाएंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे पढ़ाई अधिक रोचक होने के साथ-साथ कठिन विषयों को भी बच्चों को सरलता से समझाया जा सकेगा, जिससे सीखने की गति और परिणाम दोनों में सुधार आएगा। ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच कम होगा अंतर प्रदेश में वर्तमान में कुल 56,895 स्कूल हैं। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, स्मार्ट क्लास प्रणाली से ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच शिक्षा के स्तर का अंतर कम होगा। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा की वही सुविधाएं मिलेंगी जो बड़े शहरों में उपलब्ध हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जल्द ही शिक्षकों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, ताकि वे डिजिटल संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सकें। इस दिशा में चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा और हर जिले में मानिटरिंग सेल भी बनाई जाएगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले—नौसेना के जहाज पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड्स में तैयार

नई दिल्ली   भारतीय नौसेना के 262 विभिन्न प्रोजेक्ट डिजाइन एवं विकास परियोजनाएं उन्नत चरणों में पहुंच चुकी हैं। खास बात यह है कि जहाज निर्माण व नौसेना की यह अन्य सभी परियोजनाएं स्वदेशी रूप से विकसित की गई हैं। यह बदलाव भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण हैं। नौसैनिक क्षमता व स्वदेशीकरण की यह जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी। वह  नई दिल्ली में आयोजित ‘समुद्र उत्कर्ष’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। यहां उन्होंने समुद्री विरासत पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। ‘समुद्र उत्कर्ष’ सेमिनार के आयोजन का उद्देश्य भारत की उभरती हुई जहाज निर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करना है। इस कार्यक्रम में स्वदेशी शिपबिल्डिंग, नौसैनिक आधुनिकीकरण और समुद्री आत्मनिर्भरता पर विस्तृत चर्चा हुई। यहां रक्षामंत्री ने बताया कि कई भारतीय शिपयार्ड इस दशक के भीतर अपनी परियोजनाओं में 100 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री उपयोग करने की ओर अग्रसर हैं। इसका अर्थ है कि भारत से निर्मित किसी भी नौसैनिक प्लेटफॉर्म पर वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों का न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें गर्व है कि भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के सभी निर्माणाधीन जहाज भारतीय शिपयार्ड्स में ही तैयार हो रहे हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का प्रत्यक्ष परिचायक है। उन्होंने कहा कि विश्व के समुद्री इतिहास पर भारत की गहरी छाप है। हमारे पूर्वजों ने समुद्रों को बाधा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक संवाद के सेतु के रूप में इस्तेमाल किया। आज इस विरासत का सम्मान करते हुए भारत आगे बढ़ने के संकल्प के साथ कार्य कर रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों समुद्री तटों पर स्थित भारतीय शिपयार्ड अब आधुनिक फैब्रिकेशन लाइन्स, उन्नत मैटेरियल-हैंडलिंग सिस्टम्स, ऑटोमेटेड डिजाइन टूल्स, मॉडल टेस्टिंग सुविधाओं और डिजिटल शिपयार्ड तकनीकों से लैस हैं, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं। उन्होंने भारत की समुद्री यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि लोथल के प्राचीन बंदरगाहों से लेकर मुंबई, गोवा, विशाखापत्तनम, कोलकाता और कोचीन के आधुनिक शिपयार्डों तक का सफर भारत की तकनीकी प्रगति और धैर्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री निर्भरता अत्यधिक है। देश के 95 प्रतिशत व्यापार (वॉल्यूम) और लगभग 70 प्रतिशत व्यापार (वैल्यू) समुद्री मार्गों से ही होता है। हिंद महासागर में भारत की सामरिक स्थिति और 7,500 किमी की विस्तृत तटरेखा इसे वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनाती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके इंटीग्रेटेड, एंड-टू-एंड शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम में निहित है, जहां डिजाइन, मॉड्यूलर निर्माण, फिटिंग, मरम्मत और जीवन-चक्र समर्थन तक हर प्रक्रिया स्वदेशी तकनीक से संचालित है। हजारों एमएसएमई के सहयोग से भारत ने स्टील, प्रणोदन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और एडवांस्ड कॉम्बैट सिस्टम्स तक फैली मजबूत आपूर्ति-श्रृंखला विकसित की है। उन्होंने भारतीय निर्मित सैन्य प्लेटफॉर्मों के मानवीय मिशनों में योगदान का उल्लेख किया। 2015 का ऑपरेशन राहत (यमन), महामारी के दौरान ऑपरेशन समुद्र सेतु, और 2025 में म्यांमार भूकंप के समय चलाया गया ऑपरेशन ब्रह्मा, जिसमें आईएनएस सतपुड़ा, सवित्री, घड़ियाल, कर्मुक और एलसीयू 52 ने बड़े पैमाने पर राहत सामग्री पहुंचाई थी। जल के नीचे की क्षमताओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कलवरी क्लास पनडुब्बियां, जिन्हें बढ़ती स्वदेशीकरण दर के साथ एमडीएल में बनाया जा रहा है, भारत की अंडरवाटर वारफेयर क्षमता और डिजाइनिंग दक्षता का उदाहरण हैं। अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ‘केवल जहाज नहीं, बल्कि विश्वास’ और ‘केवल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि साझेदारी’ बनाने में विश्वास रखता है। उन्होंने विश्व समुदाय से मिलकर एक सुरक्षित, समृद्ध और सतत समुद्री भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

अधिभार के कारण पाकिस्तान के सामने संकट, आबादी बढ़ोतरी से संभावित चुनौतियां

इस्लामाबाद दुनिया के कई देश घटती आबादी के संकट से परेशान हैं। इटली, जापान, रूस, साउथ कोरिया जैसे देशों में तेजी से आबादी कम हो रही है और हालात ऐसे हैं कि अस्तित्व के संकट तक की बात हो रही है। यहां तक कि भारत जैसे देश में भी अब प्रजनन दर तेजी से कम हो रही है। प्रति महिला जन्मदर अब भारत में 1.9 ही रह गई है, लेकिन पाकिस्तान की आबादी में तेजी से विस्फोट हो रहा है। बदलते दौर में भी पाकिस्तान की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है, उससे देश के आगे संकट पैदा हो सकता है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने ही अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में पाकिस्तान की पूरी व्यवस्था ही चरमराने का अनुमान जताया है। पाकिस्तान की बढ़ती आबादी और उसके संसाधनों में असंतुलन का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का 33वां देश है। लेकिन आबादी के मामले में वह 5वें नंबर पर पहुंच गया है। कराची, लाहौर, पेशावर, रावलपिंडी, क्वेटा समेत तमाम शहरों की हालत यह है कि जरा सी बारिश भी बाढ़ जैसे हालात पैदा कर देती है। भारी आबादी के चलते कहीं भी रिहायश की सही व्यवस्था नहीं है और खेती का रकबा भी लगातार कम हो रहा है। क्लाइमेट चेंज और आर्थिक संकट जैसी समस्याएं अलग से घर रही हैं। फिलहाल पाकिस्तान की आबादी 241.5 मिलियन पर है। अब यह अगले 5 सालों में 300 मिलियन यानी 30 करोड़ तक पहुंच गई है। यही नहीं 2050 में तो यह 40 करोड़ हो जाएगी। छोटे से देश की इतनी भीषण आबादी बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। ऐसी स्थिति इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान में प्रजनन दर 3.6 है। यह भारत के मुकाबले लगभग दोगुनी है। साउथ एशिया के देशों में किसी भी मुल्क की आबादी बढ़ने की ग्रोथ इतनी अधिक नहीं है। पाकिस्तान के बाद अफ्रीका के मुल्कों में ही आबादी बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज देखी जा रही है। डॉन के मुताबिक इतनी भारी आबादी का असर हर सेक्टर पर दिख रहा है। एक तरफ बच्चे कुपोषित हैं तो वहीं उनके बड़े होने पर बेरोजगारी का संकट है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर जैसी समस्याएं भी पैदा हो रही है। पाकिस्तान की बढ़ती आबादी के चलते हालात यह हैं कि 5 साल से कम आयु के 40 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। इसके अलावा बच्चों को जन्म देने के दौरान ही 11 हजार माताओं की हर साल मौत हो जाती है। पाकिस्तान में गर्भ निरोधक उपायों के इस्तेमाल में कमी के चलते भी ऐसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसकी वजह कुछ लोगों की कट्टरता है और वे गर्भनिरोध का इस्तेमाल नहीं करते। यही नहीं यह कट्टरता बढ़ती आबादी में एक और तरीके से खाज का काम करती है। पोलियो की दवा का विरोध किया जाता है और इसके चलते अकसर पाकिस्तान में पोलियो के केस मिल जाते हैं।