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मोहन सरकार ने महिलाओं को दी बड़ी राहत, लाडली बहना योजना की रकम बढ़ाई, आज खाते में आएंगे पैसे

भोपाल  अब लाड़ली बहनों के खाते में कितने पैसे आएंगे? यदि आप मध्य प्रदेश के निवासी हैं तो ये सवाल जरूर आपके मन में आ रहा होगा. तो बता दें कि मध्यप्रदेश सरकार ने लाडली बहना योजना की मासिक सहायता बढ़ा दी है. इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है. मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए नवंबर का महीना खास है, क्योंकि इस महीने से उन्हें बढ़ी हुई किस्त मिलेगी. यह योजना 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की थी. पहले महिलाओं के खाते में 1000 आते थे. अब हर महिला को सरकार की ओर से हर महीने 1500 रुपये मिलेंगे. नवंबर 2025 से यह दूसरी बार है जब बढ़ी हुई राशि दी जा रही है, जो आगे भी जारी रहेगी. मध्यप्रदेश सरकार ने सोमवार को लाडली बहना योजना के तहत मासिक मदद को 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये करने को मंजूरी दी है. 12 नवंबर को महिलाओं के खाते में आएगा पैसा एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना की 1.26 करोड़ से ज्यादा महिला लाभार्थियों को इस महीने से बढ़ी हुई राशि मिलनी शुरू होगी. इसके लिए सरकार को 1793.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा. अब 2025-26 में योजना का कुल अनुमानित व्यय बढ़कर 20,450.99 करोड़ रुपये हो गया है. मुख्यमंत्री यादव 12 नवंबर को सिवनी जिले में एक कार्यक्रम के दौरान बढ़ी हुई राशि का वितरण शुरू करेंगे. सरकारी बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में लाड़ली बहना योजना की मासिक सहायता 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये करने को मंजूरी दी गई. मुख्यमंत्री यादव ने 12 अक्टूबर को श्योपुर में एक कार्यक्रम में कहा था कि भाई दूज और दिवाली पर महिलाओं के लिए खुशखबरी आएगी, क्योंकि योजना की राशि बढ़ाई जाएगी. योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी इस योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान 10 जून, 2023 को हुई थी, तब इसके तहत सहायता राशि 1000 रुपये थी. सरकार ने सितंबर 2023 में ही इसे संशोधित कर 1,250 रुपये कर दिया था. इस योजना को मध्यप्रदेश में बीजेपी के लिए चुनावी बाजी पलटने वाला माना जाता है.

मध्यप्रदेश में नई पहल: टीचर अब डांस-ड्रामा के जरिए समझाएंगे कठिन विषय

 भोपाल  सरकारी स्कूलों में अब अगर नृत्य-नाटक करते शिक्षक दिखें तो यह मत सोचिएगा कि वे पढ़ाई छोड़कर मस्ती कर रहे हैं। दरअसल प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को प्रदर्शन कलाओं के जरिए पढ़ाने की तैयारी चल रही है। योजना है कि कठपुतली नृत्य, मुखौटा, मूर्तियों, कविता, गीत और चित्रों के जरिए गणित-विज्ञान के गूढ़ संदर्भों को समझाया जाए, ताकि कक्षा का वातावरण आनंददायक बना रहे और बच्चों को कठिन विषय आसानी से समझ आ जाए। इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) समृद्धि-2025 में शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रदेश के 30 जिलों के 65 शिक्षकों का चयन इसके लिए किया गया है। इनके बीच प्रतियोगिता भी कराई गई। ये शिक्षक अपने जिले में मुख्य प्रशिक्षक होंगे और अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। हर विषय को कला से जोड़ने का प्रयास स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम के तहत उच्च माध्यमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एनसीईआरटी की ओर से प्रशिक्षक शिक्षकों का प्रशिक्षित कर रहे हैं। स्कूलों में इसकी अधिकारी निगरानी भी करेंगे, ताकि हर विषय को कला से जोड़ते हुए पढ़ाया जा सके। इस विषय में ये गतिविधि जीव विज्ञान – सांदीपनि विद्यालय की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने पाचन तंत्र के ऊपर नुक्कड़ नाटक तैयार किया है। इसमें उन्होंन 35 बच्चों को लिया था और उन्हें भोजन और एंजाइम बनाया था। इसमें कुछ बच्चों ने मिट्टी से पाचनतंत्र के माडल बनाकर पूरी प्रक्रिया को समझाया था। गणित – शासकीय नवीन कन्या उमावि की शिक्षिका प्रेरणा बर्डे ने गणित के कठिन प्रमेय और सूत्र को आकृति बनाकर समझाया। इसमें वह सालिड व प्लेन आकृति को थ्रीडी माडल से समझा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने त्रिशंकु व गोला को भी आकृति के माध्यम से पढ़ा रही हैं। साथ ही त्रिकोणमिति के कठिन सूत्र को भी आसान तरीके से कविता के माध्यम से बता रही हैं। कठिन विषयों को पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा     एनसीईआरटी का आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को गीत-संगीत व कला के माध्यम से कठिन विषयों को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। – दिनेश शर्मा, नोडल अधिकारी, समृद्धि कार्यक्रम।  

हर नर्मदा परिक्रमावासी को मिलेगा सरकारी प्रमाणपत्र, परिक्रमा के दौरान आसान होगा प्रबंधन

भोपाल  प्रदेश में अब हर नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की जानकारी सरकार के पास होगी। इसके लिए राज्य सरकार ने नर्मदा नदी और नर्मदा परिक्रमा मार्ग से जुड़े जिलों की ग्राम पंचायतों को आदेश दिए हैं कि वे परिक्रमावासियों को प्रमाण पत्र जारी करें। इसके जरिये सरकार डेटा अपडेट करेगी।  सरकार ने पंचायतों से कहा है कि वे परिक्रमावासियों की समस्याओं का समाधान करने में मदद करें। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने जनपद पंचायतों से 31 अक्टूबर तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी तलब की है। प्रदेश में नर्मदा नदी को मां नर्मदा के रूप में पूजा जाता है। हर साल कई श्रद्धालु अमरकंटक से लेकर अरब सागर और फिर वापस अमरकंटक तक नर्मदा की परिक्रमा करते हैं। अब प्रमाण पत्र होने से ग्रामीण इलाकों में परिक्रमा करते समय परिक्रमावासियों को पहचान दिखाने में आसानी होगी। प्रमाण पत्र लेने वाले परिक्रमावासियों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं होना चाहिए। अब आपराधिक प्रकरण वाले लोग नर्मदा की परिक्रमा नहीं कर सकेंगे  प्रदेश के नर्मदा नदी वाले सोलह जिलों यथा अनूपपुर, डिण्डौरी, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बड़वानी, आलीराजपुर, धार, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, हरदा, देवास, खण्डवा एवं खरगौन से नर्मदा परिक्रमा की जाती है तथा अब यह परिक्रमा वही लोग कर पायेंगे जिनके विरुध्द कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा। परिक्रमा के दौरान पडने वाली ग्राम पंचायतों में प्रवेश के दौरान परिक्रमावासी को अपने नाम, पते एवं मोबाइन नंबर के साथ आवेदन देना होगा जिसमें उसे अण्डरटेकिंग देनी होगी कि उसके विरुध्द कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। इस आवेदन के साथ उआईडी यथा आधार या वोटर या समग्र आईडी लगाना होगी जिस पर संबंधित ग्राम पंचायत आवेदक को एक प्रमाण-पत्र जारी करेगी कि आवेदक जीवन दायिनी मांग नर्मदा की यात्रा कर रहा है। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने संबंधित कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को परिपत्र जारी कर दिया है। ग्राम पंचायत द्वारा जारी नर्मदा परिक्रमावासी होने का प्रमाण-पत्र पुलिस एवं प्रशासन भी पहचान के रुप में मान्य करेगी। ऐसे जारी होंगे प्रमाणपत्र     परिक्रमावासियों को ग्राम पंचायत को आवेदन देना होगा, जिसमें दो फोटो और एक पहचान पत्र लगाना होगा।     आवेदन मिलने पर ग्राम पंचायत तय फॉर्मेट में प्रमाण पत्र जारी करेगी।     ग्राम पंचायत को परिक्रमावासियों के लिए एक रजिस्टर बनाना होगा।     प्रमाण पत्र दिखाकर परिक्रमावासी नर्मदा परिक्रमा के दौरान किसी भी गांव में आसानी से प्रवेश कर सकेंगे।     स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी इस प्रमाण पत्र को परिक्रमावासी की पहचान के रूप में मानेंगे।     सभी ग्राम पंचायतें भविष्य में इसी आधार पर कार्य करेंगी।     अब तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी पंचायतें 15 दिन के भीतर संचालनालय को भेजेंगी। इस निर्णय से नर्मदा परिक्रमा वासियों को पहचान के लिए दस्तावेज की कमी से होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकेगा और उनकी यात्रा आसान होगी।    

भोपाल में इज्तिमा की बड़ी तैयारी, बुधवार को पहुंचेंगी जमाअतें, 600 एकड़ में हो रही तैयारी

भोपाल राजधानी भोपाल से करीब 15 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड स्थित घासीपुरा में 14 नवंबर से शुरू होने जा रहा 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा (Aalmi Tablighi Ijtema) पूरी तरह से तैयार है। चार दिवसीय यह धार्मिक आयोजन 17 नवंबर तक चलेगा। इस बार इज्तिमा कमेटी ने व्यवस्थाओं में कई बड़े बदलाव किए हैं, ताकि लाखों जायरीनों (Pilgrims) को किसी तरह की दिक्कत न हो।भोपाल स्टेशन परिसर में करीब 50 हजार लोगों के लिए खाना तैयार किया गया है। इज्तिमा कमेटी के सदस्यों ने बताया कि बुधवार से देश के अलग-अलग हिस्सों से जमाअतें भोपाल पहुंचना शुरू करेंगी। सबसे ज्यादा भीड़ शुक्रवार से रविवार के बीच रहने की संभावना है, जिसके लिए रेलवे और प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यवस्था मजबूत की है। इस बार कमेटी की अपनी 300 बसें इज्तिमा कमेटी के मीडिया प्रभारी उमर हफीज खान ने बताया कि इस वर्ष कमेटी ने पहली बार आरटीओ (RTO) से बसों की मांग नहीं की है। इसके बजाय समिति ने खुद की 300 बसों का प्रबंध कर लिया है। यह व्यवस्था खास तौर पर अंतिम दिन होने वाली सामूहिक दुआ (Mass Prayer) के लिए की गई है। पहले यात्रियों को बस न मिलने पर 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था, लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं रहेगी। इज्तिमा स्थल पर आने वाले सभी प्रवेश द्वारों (Entry Points) पर मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। चारों गेट्स पर 10 बेड वाले अस्थायी अस्पताल भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। 600 एकड़ में फैला इज्तिमागाह, 71 पार्किंग जोन तैयार इस बार इज्तिमा स्थल करीब 600 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें 300 एकड़ सिर्फ पार्किंग (Parking Zones) के लिए आरक्षित रखे गए हैं। 71 पार्किंग जोन बनाए गए हैं, जो पिछले साल से दो अधिक हैं। इन पार्किंग स्थलों में लगभग डेढ़ लाख दोपहिया वाहन, 50 हजार चारपहिया, 1000 बसें, 1000 ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और 1000 ऑटो खड़े हो सकेंगे। कमेटी ने बताया कि इस बार करीब 12 लाख जायरीनों के आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए सभी व्यवस्थाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं और तैयारियों का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।     बुधवार से देशभर से जमाअतें पहुंचना शुरू होंगी।     50 हजार लोगों का खाना तैयार।     भोपाल–इटारसी और भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस में एक्स्ट्रा कोच लग सकते हैं।     4 नए टिकट काउंटर और 6 एटीवीएम मशीनें।     स्टेशन पर सुरक्षा, मेडिकल और स्टाफ की अतिरिक्त व्यवस्था।     इज्तिमा की अवधि में प्लेटफॉर्म 6 की पार्किंग बंद रहेगी। रेलवे स्टेशन पर विशेष इंतजाम भोपाल रेलवे स्टेशन (Bhopal Railway Station) पर भी इज्तिमा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार स्टेशन परिसर में करीब 50 हजार लोगों के लिए खाना तैयार किया गया है। भीड़ को देखते हुए स्टेशन परिसर में अतिरिक्त टिकट काउंटर (Ticket Counters) भी खोले जाएंगे। 2 दिसंबर से चार नए टिकट काउंटर शुरू किए जाएंगे, जिनमें से दो प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर बने पंडाल में और दो स्टेशन परिसर में रहेंगे। इसके अलावा रेलवे दो ट्रेनों में एक्स्ट्रा कोच (Extra Coaches) जोड़ने की तैयारी कर रहा है- भोपाल–इटारसी एक्सप्रेस (Train No. 11272) और भोपाल–जोधपुर एक्सप्रेस (Train No. 14814)। जीआरपी और आरपीएफ की टीमें तैनात इज्तिमा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जीआरपी (GRP), आरपीएफ (RPF) और स्थानीय पुलिस बल को तैनात किया गया है। स्टेशन और इज्तिमा स्थल दोनों जगह निगरानी के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। भीड़ नियंत्रण (Crowd Control) के लिए दोनों फुटओवर ब्रिज (FOB) पर अलग-अलग रास्ते तय किए गए हैं ताकि आवाजाही व्यवस्थित ढंग से हो सके। ट्रैफिक विभाग और रेलवे ने किए इंतजाम इज्तिमा के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने 150 से अधिक ट्रेनों के कोच बंद रखने का निर्णय लिया है। बिना आरक्षण वाले यात्रियों के लिए मोबाइल टिकट वैन की व्यवस्था की गई है। मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा और आम नागरिकों के लिए वैकल्पिक रास्ते तय किए गए हैं, ताकि सामान्य यातायात बाधित न हो। फायर टीम और वालंटियर्स की तैनाती श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहायता के लिए दमकल विभाग की विशेष टीमों को इज्तिमा स्थल पर तैनात किया जा रहा है। इसके अलावा, प्रति शिफ्ट 500 वालंटियर्स ड्यूटी पर रहेंगे, जो आगंतुकों को दिशा-निर्देश देने और आपातकालीन सहायता प्रदान करने का काम करेंगे। प्रशासन ने 4,500 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग की है, जिन्हें ट्रैफिक, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा निगरानी में लगाया जाएगा। निगरानी और बैरिकेडिंग की पुख्ता व्यवस्था इज्तिमा स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे, चेकिंग प्वाइंट्स और बैरिकेडिंग की जा रही है। प्रशासन ने छह प्रमुख मार्गों को केवल इज्तिमा यातायात के लिए आरक्षित किया है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू बनी रहे।     आयोजन तिथि : 14 से 17 नवंबर 2025     स्थान : ईटखेड़ी (घासीपुरा), भोपाल     सुरक्षा बल : 850 पुलिसकर्मी + 4,500 अतिरिक्त जवान     फायर टीम : प्रति शिफ्ट 500 वालंटियर्स     रेलवे सुविधा : मोबाइल टिकट वैन, सीमित ट्रेन संचालन प्रशासन का उद्देश्य : श्रद्धा के साथ शांति और अनुशासन नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और रेलवे मिलकर अस्थायी शौचालय, पीने के पानी, मेडिकल सहायता और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रयास यही है कि भोपाल का यह इज्तिमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बने, बल्कि अनुशासन और प्रबंधन की मिसाल भी पेश करे। 120 एकड़ में विशाल पंडाल इज्तिमा स्थल पर 120 एकड़ में विशाल पंडाल तैयार किया जा रहा है। हजारों वॉलंटियर्स (Volunteers) खानपान, जलापूर्ति और प्रकाश व्यवस्था में जुटे हुए हैं। बुधवार से देश के अलग-अलग हिस्सों से जमाअतें (Delegations) भोपाल पहुंचना शुरू करेंगी। भीड़ सबसे ज्यादा शुक्रवार से रविवार के बीच रहने की उम्मीद है। 17 नवंबर को सामूहिक दुआ के साथ चार दिवसीय इज्तिमा का समापन होगा। 20% बढ़े इंतजाम, 350 एकड़ में पार्किंग पिछले वर्ष की तुलना में इस बार तैयारियों में 20% की वृद्धि की गई है। पार्किंग एरिया को बढ़ाकर 350 एकड़ तक किया गया है। पिछले साल जहां 66 पार्किंग जोन थे, वहीं इस बार 71 पार्किंग जोन … Read more

मध्यप्रदेश में खास खबर: एक्सपर्ट्स को उम्मीद, इंदौर जू में जन्मेगा दुर्लभ ब्लैक टाइगर

इंदौर दुनिया भर में रहस्य बने दुर्लभ ब्लैक टाइगर भविष्य में पूरी तरह काले नजर आ सकते हैं. जिनकी उत्पत्ति के लिए इंदौर में दुर्लभ काले और सफेद टाइगर के मेल से देश के पहले पूरी तरह काले दुर्लभ टाइगर की उत्पत्ति के लिए वंशावली खंगाली जा रही है. लंबे समय से ब्लैक टाइगर दुनिया भर के लिए रहस्य बने हुए हैं खास बात यह है कि अपने शरीर पर गहरे काले रंग की पट्टिका वाले ब्लैक मेलेनिस्टिक टाइगर सिर्फ भारत में ही पाए जाते हैं, जो फिलहाल नंदनकानन अभ्यारण के अलावा इंदौर के चिड़ियाघर में मौजूद हैं. टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में नए साल 2026 में एक नया मेहमान जन्म ले सकता है। प्रदेश के लिए यह पहला मौका होगा जब मेलानिस्टिक टाइगर (ब्लैकधारी वाला बाघ) का जन्म होगा। दरअसल इसके लिए इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में कुछ समय पहले मेलानिस्टिक टाइगर की व्हाइट फीमेल टाइगर से मेटिंग कराई है। इसके बाद एक्सपर्ट्स ने उम्मीद जताई है कि इंदौर जू में पूरी तरह काले रंग के टाइगर का जन्म हो सकता है। खास बात यह कि देश में संभवत: यह पशु मेटिंग में एक तरह अलग प्रयोग है। यह देश का एकमात्र ऐसा टाइगर हो सकता है जिसका रंग पूरी तरह से काला होगा। देश में उड़ीसा के नंदन कानन चिड़ियाघर के अलावा इंदौर जू में ऐसा दुर्लभ टाइगर मौजूद है, जिसकी धारियां काले रंग की है। जिसे मेलानिस्टिक टाइगर (काला बाघ) कहा जाता है। ब्लैक टाइगर की कोई विशिष्ट प्रजाति या भौगोलिक उप प्रजाति नहीं है, बल्कि यह दुर्लभ रंग वाला टाइगर होता है. जिनकी त्वचा बाल और फर आदि में गहरे काले पिगमेंट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे उसका रंग काला हो जाता है. प्राणी विज्ञान के अनुसार, मिलेनिज्म एक जेनेटिक म्यूटेशन है जो स्तनधारी सरीसृप और कीड़ों की अलग-अलग संततियों में देखने को मिलता है, लेकिन खास बात यह है कि दुनिया भर में सिर्फ भारत के टाइगर में ही इस तरह का म्यूटेशन दिखाई देता है. इंदौर ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश में अलग मामला जू प्रभारी डॉ.उत्तम यादव के मुताबिक यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ ही माह में इंदौर के चिड़ियाघर में देश का पहला काले रंग का बाघ जन्म ले। इन दोनों अलग-अलग प्रजातियों के टाइगर के बीच सितंबर में मेटिंग हुई थी। इसमें ब्लैक टाइगर का जीन डोमिनेटिंग जीन रहता है। इसमें गर्भकाल 300 से 310 दिनों के बीच का होता है। अभी मादा व्हाइट टाइगर की बदलती प्रकृति से पूरे संकेत हैं कि नया मेहमान कंसिव हो चुका है। अगर सबकुछ अच्छा रहा तो संभव है कि 2026 में मप्र में पहली बार मेलानिस्टिक टाइगर प्रजाति का नया मेहमान इंदौर में जन्म ले। यह सिर्फ इंदौर ही नहीं बल्कि मप्र में एक अलग मामला होगा। ऐसे होते हैं मेलानिस्टिक टाइगर मेलानिस्टिक टाइगर के शरीर पर चौड़ी और मोटी काली धारियां होती हैं। ये धारियां गहरी और फैली हुई होती हैं जिससे बाघ पूरी तरह ब्लैक नजर आता है। सामान्य रूप से टाइगर के शरीर पर येलो या चॉकलेटी रंग की धारियां नजर आती है। चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक मेलानिस्टिक टाइगर इंदौर जू में आकर्षण का केंद्र है जो अपनी खास कुदरती संरचना के चलते सभी का ध्यान आकर्षित करता है। वंशावली और हेटेरो जेनेसिस प्रक्रिया का पालन इंदौर प्राणी उद्यान के प्राणी विशेषज्ञ डॉ उत्तम यादव बताते हैं कि, ''देश के पहले पूरी तरह ब्लैक टाइगर की उत्पत्ति हो सके इसके लिए यहां पहली बार ब्लैक मेलोनेस्टिक टाइगर का व्हाइट टाइगर से क्रॉस कराया गया है. इसी तरह प्राणी उद्यान में मौजूद येलो टाइगर की भी क्रॉस ब्रीडिंग कराई गई है, जिससे कि दुर्लभ रंगों वाले शावकों को प्राप्त किया जा सके.'' फिलहाल यहां दुर्लभ प्रजाति के जो टाइगर मौजूद हैं जिनके बीच F1-f2 जेनरेशन के लिहाज से क्रॉस कराने के बाद 100 प्रतिशत काले ब्लैक मेलेनिस्टिक टाइगर की उत्पत्ति के प्रयास हो रहे हैं. माना जा रहा है कि अगले कुछ माह में यहां जो टाइगर जन्म लेंगे उनमें देश का पहला पूरी तरह से ब्लैक टाइगर भी जन्म ले सकता है. ब्लैक के अलावा व्हाइट और पीले रंग के शावकों का भी जन्म होगा. डॉ यादव के मुताबिक, ''इंदौर में जो ब्लैक टाइगर हैं वह फिलहाल 70% ब्लैक हैं लेकिन आने वाली जनरेशन में प्रयास किया जा रहे हैं कि जो भी ब्लैक टाइगर पैदा हों, उसका रंग 100 फीसदी काला हो, जो अपने आप में दुर्लभ होकर देश का पहले पूरी तरह ब्लैक टाइगर के रूप में जन्म ले सके. क्या होती है पेडिग्री शीट जिस प्रकार इंसानों में जेनेटिकली एकरूपता और एक दूसरे से अंतर होता है ठीक उसी प्रकार टाइगर में भी अलग-अलग जीन के मिलने से उन्नत प्रजाति विकसित होती है. जैसे परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच रिश्तों और वंश को अलग-अलग दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है. वंशावली के आधार पर ही संबंधित प्राणी के आनुवांशिक लक्षणों उनकी बीमारी और जीवन की स्थिति का आकलन किया जाता है. यही वजह है कि इंसानों में ब्लड ग्रुप गोत्र जैसी अन्य व्यवस्था की तरह ही टाइगर में भी उन्नत नस्ल प्राप्त करने के लिए उनकी क्रॉसिंग में वंशावली का ध्यान रखना जरूरी है. अलग-अलग वंशावली की क्रॉसिंग से उत्पन्न होने वाले टाइगर अपने खास गुण और रंग के अलावा स्वस्थ्य शरीर वाले होते हैं. जबकि एक ही जीन की क्रॉसिंग से उत्पन्न प्राणियों की प्रजाति के बीमार होने के अलावा विलुप्त होने की आशंका ज्यादा रहती है.  

प्रदेश में मखाना खेती को प्रोत्साहन, मंत्री कुशवाह ने की योजना की घोषणा

बिहार की तर्ज पर प्रदेश में मखाना खेती को किया जाएगा प्रोत्साहित : मंत्री  कुशवाह प्रदेश के चार जिलें में पायलट प्रोजेक्ट लागू भोपाल  उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश के 4 जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना खेती क्षेत्र विस्तार को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया जा रहा है। मंत्री  कुशवाह ने इन जिलों के किसानों को योजना से जुड़ने की अपील की है। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि मखाने का उत्पादन भी सिंघाड़ा की तरह छोटे-छोटे तालाबों में किया जाता है। बिहार में मखाना उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है मखाने के बीज को फल का स्वरूप प्रदान करने के लिए छोटी-छोटी उत्पादन ईकाइयाँ भी लगाई जाती है, मखाने की भारत सहित अरब और यूरोप के देशों में काफी मांग रहती है। उल्लेखनीय है कि मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार द्वारा मखाना बोर्ड का गठन भी किया गया है। मध्यप्रदेश की जलवायु भी मखाना के उत्पादन के लिए अनुकूल है। इसलिए प्रदेश के किसानों को इस ओर आकर्षित करने की आवश्यकता है। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण  अरविन्द दुबे ने बताया कि प्रदेश के 4 जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा एवं सिवनी जिले में 150 हैक्टेयर क्षेत्र में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर 45 लाख रूपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। मखाना उत्पादन करने वाले कृषकों को 75 हजार प्रति हैक्टेयर या लागत का 40 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत प्रदेश के 99 कृषकों ने ऑनलाइन आवदेन किया जा चुका है।  

सैन फ्रांसिस्को में भारतीय दूतावास ने मनाया छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस, NACHA बे एरिया चैप्टर भी शामिल

रायपुर : छत्तीसगढ़ की संस्कृति ने विदेश में बिखेरा रंग अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस समारोह में NACHA बे एरिया चैप्टर बना सहभागी प्रवासी छत्तीसगढ़वासी राज्य के सांस्कृतिक राजदूत, छत्तीसगढ़ की संस्कृति को विश्व में दे रहे पहचान – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय रायपुर अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय दूतावास में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और लोक-कला ने विदेश की भूमि पर अपनी विशेष छाप छोड़ी। इस कार्यक्रम में NACHA (North America Chhattisgarh Association) के बे एरिया चैप्टर ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ राज्य को समर्पित एक आकर्षक स्टॉल लगाया, जिसमें राज्य के विशिष्ट उत्पादों, हस्तशिल्प, लोककला और पारंपरिक आभूषणों का सुंदर प्रदर्शन किया गया। इस स्टॉल के माध्यम से छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और हस्तशिल्प की विविधता को प्रदर्शित किया गया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने अत्यंत सराहा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य का मनमोहक प्रदर्शन, जिसने वहां मौजूद भारतीय प्रवासी समुदाय और अन्य देशों के प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में प्रस्तुत यह लोकनृत्य न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि उसने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की आत्मा को भी सजीव कर दिया। छत्तीसगढ़ की संस्कृति ने विदेश में बिखेरा रंग NACHA के सदस्यों ने बताया कि उनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और लोक परंपरा को विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़वासी अपने मूल राज्य की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इस आयोजन ने उन्हें अपनी जड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ने का एक सशक्त अवसर प्रदान किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने NACHA बे एरिया चैप्टर के सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि उनका यह प्रयास छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपराओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़वासी राज्य के “सांस्कृतिक राजदूत” हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और मूल्यों को पूरी दुनिया में  स्थापित कर रहे हैं।

पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए मिलेंगे 50-50 हजार रुपए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जंबूरी मैदान में सरपंच संयुक्त मोर्चा सम्मेलन को किया संबोधित दिल्ली विस्फोट के मृतकों की आत्मा की शांति के लिए सम्मेलन में रखा गया दो मिनिट का मौन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि त्रिस्तरीय पंचायतराज व्यवस्था में सरपंच के पास पर्याप्त शक्तियां हैं। सरपंच अपनी पंचायत को नई ऊंचाइयों पर लेकर जा सकते हैं। सरपंचों के माध्यम से ही प्रदेश में ग्राम विकास का कारवां चल रहा है। ग्राम स्तर पर सभी कल्याणकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों का क्रियान्वयन पंचायतों के माध्यम से ही हो रहा है। पंचायत व्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से पंचायतों को 25 लाख रूपए तक के कार्य करने का अधिकार दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए 50-50 हजार रुपए की राशि अंतरित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नगरीय‍निकायों के समान पंचायतों में भी विकास योजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिये सक्षम बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि भोपाल में पंचायत प्रतिनिधियों की कॉन्फ्रेंस आगामी 24 से 26 नंवबर को होने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जंबूरी मैदान पर आयोजित सरपंच संयुक्त मोर्चा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम स्थल पर भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सरपंच संघों के प्रतिनिधियों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। देश को प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह की क्षमता पर है भरोसा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिल्ली में हुए कार विस्फोट को अत्यंत दु:खद बताया। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन धारण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की क्षमता पर भरोसा है। भारत सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद को समूल नष्ट करने के लिए अभियान छेड़ रखा है। पंचायतों को मिलेंगे कार्यालय और सामुदायिक भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने तीनों स्तर के पंचायत संस्थान के लिए कार्यालय और गांवों के लिए सामुदायिक भवन की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। इस अनुक्रम में प्रदेश की पंचायतों के लिए 2472 अटल पंचायत भवन, 1037 सामुदायिक भवन, 106 जनपद पंचायत भवन तथा 5 जिला पंचायत भवन स्वीकृत किए हैं। गांव के शांति धाम भी व्यवस्थित रूप से विकसित हों, इस उद्देश्य से दिसम्बर 2026 तक सभी शांति धाम अतिक्रमण से मुक्त कर उनके पहुंच मार्ग बनाने और आवश्यक फेंसिंग और पौधरोपण कार्य के निर्देश दिए गए हैं। सुदृढ़ पंचायत राजव्यवस्था के माध्यम से आत्मनिर्भर पंचायत व समृद्ध मध्यप्रदेश के पथ पर राज्य सरकार पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से अग्रसर है। युवाओं को उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं। वर्ष-2026 को कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में घोषित किया जाएगा।कृषि उत्पादों के निर्माण के लिए कृषि और खाद्यान्न आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पंचायतों के माध्यम से लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और रोजगार उद्योग स्थापित करने के लिए भी गतिविधियां जारी हैं। किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सब्जी और अन्य फसलों के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां खोली जा रही हैं। युवाओं को उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि किसानों को हर फसल का उचित दाम मिले। श्रीराम वन गमन पथ विकसित करने की प्रक्रिया में पंचायत प्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे पंचायत प्रतिनिधि भगवान श्रीराम से संबंधित प्रत्येक स्थान की जानकारी उपलब्ध कराएं। इन्हें श्रीराम वन गमन पथ विकसित करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भी राज्य सरकार तीर्थ के रूप में विकसित करेगी। पंचायतें अपने पारंपरिक कार्य करते हुए शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और उद्योग के कार्यों को भी प्रमुखता से करें। गांवों में किसानों को गोपालन और पशुपालन के लिए प्रेरित करें, जिससे मध्यप्रदेश को दूध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके। नदियों के उद्गम स्थलों का बेहतर रखरखाव करें पंचायत प्रतिनिधि – मंत्री श्री पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद पटेल ने पंचायत प्रतिनिधियों की मांग पर 25 लाख रूपए तक के कार्यों का अधिकार सरपंचों को देने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पंचायतें देश का सबसे अच्छा और सबसे बड़ा रिकॉर्ड रूम बन सकती हैं। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि जिन पंचायतों में नदियां के उद्गम स्थल मौजूद हैं, वहां के सरपंच अपनी कार्य योजना में उद्गम स्थल के बेहतर रखरखाव संबंधी कार्यों को शामिल करें। ऐसी पंचायतें जहाँ की आबादी 5000 से अधिक होगी, वहां 2 सामुदायिक भवन स्वीकृत किए जाएंगे। सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों के विभिन्न संगठनों के अध्यक्ष और प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

सरदार पटेल ने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आधुनिक भारत के निर्माण में लौह पुरुष सरदार पटेल की भूमिका रही सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरदार पटेल ने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर यूनिटी मार्च का किया शुभारंभ वल्लभ भवन के सरदार पटेल पार्क से आरंभ यूनिटी मार्च में बड़ी संख्या में युवा हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आधुनिक भारत के निर्माण में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही। सरदार पटेल ने अनेकों रियासतों  को एक करते हुए अखंड भारत की नींव रखी। उन्होंने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया। आजादी के समय सरदार पटेल ने पाकिस्तान की घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए देश को सुरक्षित रखा। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया के सामने जिस मजबूती के साथ खड़ा है, उसमें सबसे बड़ी भूमिका सरदार पटेल की रही है। सरदार पटेल की 150वीं जयंती से उनके गौरवशाली कार्यों का स्मरण करने के लिए प्रदेश में यूनिटी मार्च का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती पर "एक भारत-आत्मनिर्भर भारत" के लक्ष्य के साथ भोपाल- सीहोर लोकसभा क्षेत्र में निकाले जा रहे यूनिटी मार्च को वल्लभ भवन के सरदार पटेल पार्क में संबोधित कर रहे थे। देशभक्ति गीतों की धुनों के बीच आसमान में छोड़े गए तिरंगे बैलून मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान में कटहल और आम के पौधे रोपे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और पुलिस बैंड द्वारा बजाई जा रही देशभक्ति गीतों की धुनों के बीच आसमान में तिरंगे बैलून छोड़े। सामूहिक समवेत स्वर में वंदे मातरम का गान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झंडी दिखाकर यूनिटी मार्च को रवाना किया। यूनिटी मार्च में 2 हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया।  सरदार पटेल के प्रयासों से भोपाल सहित कई रियासतें अखंड भारत का बनीं हिस्सा: सांसद  आलोक शर्मा सांसद  आलोक शर्मा ने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर के प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में 3 दिवसीय यूनिटी मार्च (पदयात्रा) का आयोजन किया जा रहा है। सरदार पटेल ने 562 रियासतों का विलय कर अखंड भारत की नींव रखी। भारत 1947 में अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गया था लेकिन भोपाल सहित जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी कई रियासतों ने भारत में शामिल होने से इनकार किया। इसके बाद इन रियासतों को अखंड भारत का हिस्सा बनाने में सरदार पटेल की अहम भूमिका रहीं। उन्होंने बताया‍ कि यह रैली बैरसिया और सीहोर में भी आयोजित की जाएगी। अखंड भारत के लक्ष्य से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिए गतिविधियां जारी वरिष्ठ विधायक  हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सरदार पटेल ऐसा व्यक्तित्व थे, जिन्होंने देश को एक करने का कार्य किया। वर्तमान समय में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत, दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बना है। हमारी सरकार द्वारा सरदार पटेल के अखंड भारत के लक्ष्य से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में भोपाल महापौर मती मालती राय, विधायक  भगवानदास सबनानी, पूर्व सांसद  आलोक संजर, पूर्व विधायक  ध्रुव नारायण सिंह, नगर निगम अध्यक्ष  किशन सूर्यवंशी सहित  रवींद्र यति, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे। 

धान परिवहन कार्य में लगे वाहनों पर लगेगा जीपीएस: खाद्य मंत्री राजपूत

मिलिंग कार्य में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी : खाद्य मंत्री  राजपूत धान परिवहन कार्य में लगे वाहनों पर लगेगा जीपीएस: खाद्य मंत्री  राजपूत खाद्य मंत्री ने दिये एनसीसीएफ के प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई एवं ब्लैक लिस्टेड करने के निर्देश भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने सख्त निर्देश दिये हैं कि मिलर्स धान मिलिंग के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरते।मिलिंग कार्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आई तो कठोर कार्रवाई की जायेगी। मिलिंग कार्य के दौरान कोई भी गड़बड़ी या अनियमितता पाई जायेगी तो संबंधित जिला प्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ भी दण्डात्मक कार्रवाई की जायेगी। खाद्य मंत्री  राजपूत मंत्रालय में प्रदेश के मिलर्स के साथ आयोजित बैठक में विपणन वर्ष 2025-26 की मिलिंग नीति के प्रारूप पर चर्चा कर रहे थे। बैठक में शहडोल उमरिया क्षेत्र के मिलर्स द्वारा एनसीसीएफ के प्रभारी एवं कर्मचारियों के कार्य व्यवहार पर विरोध जताये जाने के कारण खाद्य मंत्री  राजपूत ने एनसीसीएफ के प्रभारी एवं संबंधित जिले के ब्रांच मैनेजर के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के साथ कम्पनी को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश अपर मुख्य सचिव खाद्य को दिये। मंत्री  राजपूत ने कहा कि अन्तर जिला मिलिंग एवं धान के परिवहन के लिये किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि विपणन वर्ष 2025-26 में जिन ट्रकों से धान परिवहन होगा उन पर जीपीएस ट्रेकर अनिवार्य रूप से लगाते हुए उक्त वाहनों का सत्यापन परिवहन सेवा पोर्टल से कराया जाये। खाद्य मंत्री  राजपूत ने कहा कि यदि कोई ट्रक बिना जीपीएस पाया जायेगा, तो संबंधित धान प्रदाय करने वाले कर्मचारी एवं परिवहनकर्ता तथा संबंधित मिलर्स के खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई की जायेगी। गोदामों की भंडारण क्षमता का निरीक्षण करे अधिकारी खाद्य मंत्री  राजपूत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि वो समय पर मिलर्स के गोदामों की वास्तविक भंडारण क्षमता की पड़ताल करने के साथ इस वर्ष धान मिलिंग के लिये अनुबंध करने वाले मिलर्स के साथ उनके गोदाम, मिल का निरीक्षण जिला स्तरीय समिति द्वारा आवश्यक रूप से कराया जाये। उन्होंने कहा कि यह संज्ञान में आया है कि मिलर्स द्वारा बताये गये गोदाम की स्थिति एवं उसकी क्षमता पर्यप्त नहीं होती है, इसलिये अधिकारी पड़ताल में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरते। खाद्य मंत्री ने अफसरों को निर्देश दिये कि इस विपणन वर्ष 2025-26 में जो मिलर्स गुणवत्तायुक्त अच्छा कार्य करेंगे, उन्हें गत वर्ष की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक मात्रा में धान देने के प्रावधान किये जाए, जिससे उनकी मिलिंग क्षमता का पूरा उपयोग किया जा सके। तय समय सीमा में पूर्ण करें मिलिंग कार्य खाद्य मंत्री  राजपूत ने कहा कि सभी मिलर्स द्वारा इस बार धान मिलिंग का कार्य भारत सरकार द्वारा जून 2026 की तय की गई समय सीमा में पूर्ण करना अनिवार्य है। उन्होंने दिसम्बर 2025 से ही पूरी मिलिंग प्रक्रिया की सतत् निगरानी एवं समीक्षा करने के निर्देश नान के प्रबंध संचालक को दिये। इसके साथ ही उन्होंने निगम मुख्यालय पर प्रत्येक 15 दिवस में क्षेत्रीय प्रबंधक एवं जिला प्रबंधक की बैठक कर प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिये। मिलर्स को समय पर भुगतान करने के दिये निर्देश मिलर्स द्वारा उपार्जन एवं मिलिंग का भुगतान समय पर नहीं होने की समस्या पर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव मती रश्मि अरूण शमी ने नान के प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा को समय पर मिलर्स के भुगतान करने के निर्देश दिये गये। साथ ही निर्देश दिये गये कि नियमित रूप से भुगतान कार्य की समीक्षा अनिवार्य रूप से करें। अपर मुख्य सचिव खाद्य मती रश्मि अरूण समी ने मिलिंग के लिये उपार्जन केन्द्र से ही अधिक से अधिक धान उठाव कराने के निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि धान उठाव के उपयोग में आने वाले वाहनों के रजिस्टेशन प्रक्रिया का टेस्ट रन करें। बैठक में मिलर्स ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस दौरान एमडी नागरिक आपूर्ति विभाग  अनुराग वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।