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गोवर्धन पर्व: प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और समग्र विकास का पर्व – डॉ. मोहन यादव

गोवर्धन पर्वः प्रकृति से सह-अस्तित्व और समग्र विकास का उत्सव डॉ. मोहन यादव भोपाल आप सभी को दीपोत्सव, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव की शुभकामनाएं और बधाई… दीपावली के उत्सव की श्रृंखला में आरोग्य, आर्थिक समृद्धि, परिवार एवं समाज समन्वय और पर्यावरण संरक्षण का संदेश है। दीपावली के अगले दिन होने वाला गोवर्धन पर्व प्रकृति, पर्वत और गौ-वंश संरक्षण की भारतीय प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। इस परंपरा का साक्षात दर्शन हमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण करने से मिलता है। मानवता की रक्षा के इसी पावन स्मृति में गोवर्धन पूजन किया जाता है। इस पर्व में गौ-धन के संवर्धन की प्रेरणा है जो भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें भारतीय समाज की वह जीवनदृष्टि समाहित है, जिसमें प्रकृति, पशु, मनुष्य और देवत्व का संतुलन देखने को मिलता है। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि हम प्रदेशभर में गोवर्धन पर्व का आयोजन कर रहे हैं। यह पर्व सभी जिलों में लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जा रहा है। आयोजन में पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित किया जायेगा। इस अवसर पर पशुपालन, कृषि और सहकारिता विभाग की जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के साथ लोगों को जोड़ने और ग्रामीण आजीविका के लिए दुग्ध उत्पादन और वृंदावन ग्राम योजना के विस्तार की गतिविधियों का संचालन शुरू किया गया है। हमारे पर्व-परंपराओं में प्रकृति से सह-अस्तित्व और समग्र विकास का भाव है। इसी कड़ी में गोवर्धन पर्व प्रकृति और प्राणियों के बीच समन्वय और संरक्षण से जुड़ा है। इस दिन गोबर से पर्वत का प्रतीक बनाकर उसकी पूजा की जाती है। पर्वत का प्राकृतिक संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान है। पर्वत जल संरक्षण, संवर्धन और ऋतुओं के संतुलन का समन्वय करते हैं। इससे नदी, तालाब तथा अन्य जलस्रोत सुरक्षित रहते हैं। गोवर्धन पूजन में पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प भी है। हमारा प्रयास है कि इस पर्व के माध्यम से प्रकृति और पशुधन का महत्व नई पीढ़ी तक पहुंचे। मध्यप्रदेश अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ गौ-वंश से समृद्ध है। गौ-माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। हमने वर्ष 2024-25 को गौ-संरक्षण एवं संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया। हम पशुपालक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रयासरत हैं। देश के दुग्ध उत्पादन का 9 प्रतिशत मध्यप्रदेश में होता है इसे 20 प्रतिशत तक करना हमारा लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के गांव-गांव में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत घर-घर जाकर पशुपालकों को पशुओं में नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं के टीकाकरण, स्वास्थ्य रक्षा, संतुलित पशु आहार, पशु पोषण आदि के बारे में तकनीकी और व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है। इन सभी प्रयासों से हम मध्यप्रदेश को दुग्ध केपिटल बनायेंगे। मुझे इस बात का संतोष है कि मध्यप्रदेश सरकार गौ-पालन, गौ-संवर्धन के लिए संकल्पित है। हमने गौ-शालाओं के लिए अनुदान को 20 रुपये प्रति गौ-वंश प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गौ-वंश प्रतिदिन किया है। गौ-वंश के भरण-पोषण के लिए दो वर्ष पहले बजट 90 करोड़ रुपये था, जिसे 250 करोड़ रुपये किया गया और अब यह राशि बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ग्वालियर में देश की पहली आधुनिक और आत्मनिर्भर गौ-शाला परिसर में कम्प्रेस्ड बायो गैस संयंत्र की स्थापना की गई है। प्रदेश में नवीन गौ-शालाओं का निर्माण, प्रति गाय अनुदान राशि बढ़ाने, गौ-उत्पादकों को प्रोत्साहन, गोबर से सीएनजी निर्मित करने वाले आधुनिक प्लांट की स्थापना तथा नेशनल डेयरी विकास बोर्ड के साथ करार जैसे नवाचार किये गये हैं। हमारे लिए खुशी की बात है कि मध्यप्रदेश में किसानों और पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिये 2900 गौ-शालाएं हैं। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना के अंतर्गत 2203 गौ-शालाओंका संचालन हो रहा है। विगत एक वर्ष में एक हजार से अधिक नवीन गौ-शालाएं प्रारंभ की गई हैं। गौ-वंश के आश्रय एवं भरण-पोषण के लिए नगर पालिक निगम ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर में गौ-शालाएं खोली गई हैं। भोपाल में 69.18 एकड़ भूमि पर 10 हजार गौ-वंश क्षमता की गौ-शाला का निर्माण किया जा रहा है। गौ-अभयारण्य अनुसंधान एवं उत्पादन केन्द्र, सालरिया, जिला आगर-मालवा में वर्तमान में 6500 गौ-वंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गौ-वंश का संवर्धन दुग्ध उत्पादन से रोज़गार और स्वरोज़गार का बड़ा स्रोत होगा। महिलाओं की आत्मनिर्भरता में भी दुग्ध व्यवसाय का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में जिस तरह खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये किसानों को प्रोत्साहित किया गया और हमारे किसान भाइयों ने उपज का भंडार भर दिया, उसी तरह दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे प्रदेश में गौ-वंश पालन बढ़ेगा, कृषि की पारंपरिक व्यवस्था को आधार प्राप्त होगा और प्राकृतिक खेती को सहयोग मिलेगा। रसायन रहित पौष्टिक अन्न तथा अन्य वस्तुओं का उत्पादन जहां स्वास्थ्य के लिये लाभदायी होगा, वहीं प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। गौ-संवर्धन रोज़गार सृजन के साथ समाज को सांस्कृतिक मजबूती प्रदान करता है और सु-संस्कृत, स्वस्थ और सबल समाज का निर्माण करता है, जिससे सतत और समर्थ अर्थव्यवस्था का विकास संभव है। यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि यहां विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत की विपुल वन संपदा है। प्रदेश की समृद्धि और आत्मनिर्भरता पर्वतों और गौ-वंश के संरक्षण से जुड़ी है, जो मध्यप्रदेश और देश की प्रगति का आधार है। मुझे प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार गौ-सेवा, जैविक कृषि और दुग्ध उत्पादन से ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है। गोवर्धन पर्व के अवसर पर मेरा प्रदेश की जनता से आग्रह है कि हम सब मिलकर गोवर्धन पर्व-परंपरा के संकल्प को आत्मसात करें और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें।    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संदेश: त्यौहार मनाएं सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को संजोते हुए

प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को सहेजने के भाव से मनाएं आगामी त्यौहार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाए धूमधाम से आत्मनिर्भर भारत और जीएसटी उत्सव का सभी विधानसभा क्षेत्रों में हो आयोजन दीपावली पर स्वदेशी वस्तुओं के क्रय-विक्रय को करें प्रोत्साहित सभी जिलों में सामाजिक समरसता पर हों कार्यक्रम दीपावली पर वृद्धाश्रम, गरीब बस्तियों और अनाथ आश्रमों में साझा की जाएं खुशियां कलेक्टर्स, संवेदनशील घटनाओं और खबरों पर तत्काल लें संज्ञान सभी ओर हो पुलिस की उपस्थिति : जनसामान्य करे सुरक्षा की भावना महसूस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी त्यौहारों के संबंध में वर्चुअल कॉन्फ्रेंस से किया संबोधित सांसद, विधायक, सहित सभी जिलों के कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक-नगरीय निकायों के पदाधिकारी और अधिकारी वीसी में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को सहेजने के लिए आगामी 21 और 22 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और गौशालाओं में गोवर्धन पूजा का आयोजन धूमधाम से किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को 20% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियों का संचालन किया जाए। इन आयोजनों में मंत्री, सांसद, विधायक, नगरीय निकायों के पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधियों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हों। स्थानीय स्तर पर सक्रिय सांस्कृतिक मंडलों को सम्मिलित करते हुए कार्यक्रमों को उत्सव के रूप में मनाया जाए। पशुपालन विभाग इन आयोजनों के लिए नोडल विभाग रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आगामी त्यौहारों के संबंध में रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से सांसद, विधायक, सहित सभी जिलों के कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक-नगरीय निकायों के पदाधिकारी और अधिकारियों को वीसी के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी दीपावली मनाते हुए आत्मनिर्भर भारत के भाव को सशक्त करने के उद्देश्य से त्यौहारों में स्वदेशी वस्तुओं के क्रय विक्रय को प्रोत्साहित किया जाए। आत्मनिर्भर भारत और जीएसटी उत्सव के कार्यक्रम आगामी 25 दिसंबर तक जारी रहेंगे। सभी विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारी मंत्रीजनप्रतिनिधि और कलेक्टर्स परस्पर समन्वय से तिथियां निर्धारित करते हुए आत्मनिर्भर भारत/जीएसटी उत्सव के कार्यक्रम आयोजित करें। इन आयोजनों में स्वदेशी वस्तुओं के प्रदर्शन एवं क्रय-विक्रय को बढ़ावा दिया जावे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रत्येक जिले में सामाजिक समरसता के आयोजन सम्पन्न किए जायें। इन आयोजनों में सामाजिक चेतनाशील प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए और सामाजिक समरसता की दिशा में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए विचार-विमर्श भी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिवाली पर्व हम सबके लिए है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से आहवान किया कि वे दीपावली पर वृद्धाश्रम, गरीब बस्तियों और अनाथ आश्रम जाकर उनके साथ दिवाली मनाएं। दिवाली के दूसरे दिन मजदूर मैदान, मजदूर हाट में जाकर श्रमिकों के साथ दिवाली की खुशियां साझा की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर्स द्वारा संवेदनशील घटनाओं और खबरों पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। कलेक्टर्स की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी घटनाओं और समाचारों के संबंध में प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद तथा विधायकगण को वस्तुस्थिति से तत्काल अवगत करायें, उनके द्वारा आवश्यकतानुसार मौका स्थल का भ्रमण भी किया जाए। जिला कलेक्टर्स ऐसी सूचनाओं और खबरों पर तत्काल फैक्ट चेक और आवश्यकता हो तो खंडन जारी करें। प्रभारी मंत्री, विभागीय मंत्री, सांसद, विधायक भी भ्रामक और समाज में सद्भावना बिगाड़ने वाली खबरों के संबंध में सही स्थिति रखें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस आवश्यक रूप से घनी बस्ती और चौराहों पर रहे, पुलिस बल भी इलाके में घूमें, पुलिस की उपस्थिति जनता के बीच दिखना चाहिए, जिससे जनता में सुरक्षा की भावना महसूस हो। विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, संगठन मंत्री हितानंद शर्मा और विधायक भगवानदास सबनानी ने भी अपने विचार रखे।  

मध्य प्रदेश में बदलेगा शिकायत निवारण का सिस्टम, अब मुख्य सचिव देखेंगे लंबित मामलों को

 भोपाल  मुख्यमंत्री (सीएम) हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का शीघ्र समाधान हो, इसके लिए अब संबंधित विभाग के अधिकारी के अलावा लंबित शिकायतें मुख्य सचिव तक पहुंचेंगी। मध्य प्रदेश सरकार एल-4 के बाद अब एल-5 स्तर को भी जोड़ने जा रही है। यहां मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव की निगरानी में लंबित शिकायतों का समाधान होगा। एल-1 यानी पहले स्तर के अधिकारी को जवाबदेह बनाने के लिए कार्रवाई विवरण भरने के कालम में संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इसके अलावा अन्य स्तर पर भी अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर करने का नियम लागू किया जाएगा। सीएम हेल्पलाइन-181 में दर्ज समस्याओं के समाधान में लगातार देरी के बीच राज्य सरकार इसमें यह महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। फोर्स क्लोज करने से पहले शिकायतकर्ता को बताना होगा कारण शिकायतों के निराकरण के लिए एल-1, एल-2, एल-3 व एल-4 हैं। एल-1 से एल-3 तक निराकरण नहीं होता है तो वह एल-4 पर जाती हैं। यहां फिर भी लंबित रहती हैं या उसे फोर्स क्लोज कर दिया जाता है। अब ऐसा करने से पहले एल-5 लेबल पर मुख्य सचिव या अपर मुख्य सचिव भी शिकायतों का समाधान करेंगे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को यह भी बताना होगा कि उसकी शिकायत को फोर्स क्लोज क्यों किया जा रहा है। गुजरात मॉडल पर होगा काम यह पूरी व्यवस्था गुजरात मॉडल पर होगी। इसके लिए मप्र सरकार के अधिकारियों का एक दल गुजरात भेजा गया था। यहां दल ने गुजरात की सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली और निराकरण करने के तरीके व मानीटरिंग सिस्टम को समझा। गुजरात से आए दल ने मध्य प्रदेश की सीएम हेल्पलाइन की विशेषताओं और खामियों का अध्ययन कर रिपोर्ट पेश की थी। इसमें बताया गया कि एल-1 स्तर पर उचित जिम्मेदारी नहीं होने से शिकायतों के समाधान में देरी होती है। अधिकांश कार्रवाई का विवरण कंप्यूटर आपरेटरों के भरोसे चलता है, जिसमें शिकायत का केवल प्रारंभिक ब्यौरा ही दिया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही नई व्यवस्था की जा रही है। यह कार्रवाई अभी प्रस्तावित है     गुजरात मॉडल की तर्ज पर मध्य प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतें के निराकरण के लिए एल-5 स्तर को जोड़ा जा रहा है, इसमें मुख्य सचिव तक शिकायतें भेजी जाएगी। यह कार्रवाई अभी प्रस्तावित है, शासन से अनुमति मिलने पर लागू करेंगे। – संदीप आष्ठाना, अवर सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय  

महाकाल की नगरी में भजनों की गूंज! दिवाली से शुरू होगा ‘महाकाल बैंड’, 30 कलाकार शामिल

उज्जैन  भगवान श्री महाकाल का धाम करोड़ों भक्तों की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर में लगभग 300 वर्ष पुरानी सिंधिया परंपरा के साथ अब मंदिर समिति नया अध्याय जोड़ने जा रही है. मंदिर समिति खुद का एक बैंड तैयार करने में जुटी है, जिसे बाबा महाकाल की होने वाली सभी आरती व अन्य आयोजनों के दौरान उपयोग में लिया जाएगा. सिंधिया शासन काल के वक़्त से शहनाई और नगाड़े आरती के दौरान बजाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है. मंदिर समिति अब भगवान महाकाल की पांचों आरतियों के दौरान विशेष बैंड तैयार करवा रही है. मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिकका कहना है "विशेष प्रकार का बैंड तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे ही काम पूरा हो जाएगा तो सभी को जानकारी साझा की जायेगी कि इसे कब-कहां, कैसे उपयोग में लाया जाना है." अभी मंदिर में दो बार होता है शहनाई वादन श्री महाकाल मंदिर में हर रोज आरती के दौरान नगाड़े बजते हैं तो वहीं सुबह भस्म आरती के बाद 06 बजे करीब और शाम में 07 बजे करीब संध्या आरती के आसपास शहनाई वादन की परंपरा है, जोकि लगभग 300 साल पुरानी सिंधिया शासन काल के दौरान शुरू की गई थी. मंदिर समिति के अनुसार जिस बैंड को तैयार किया जाना है, उसके लिए वाद्य यंत्रों की दानदाताओं के माध्यम से खरीदारी शुरू कर दी गई है. साथ ही मंदिर समिति बैंड बजाने के लिए वाद्य वादकों की भर्ती प्राक्रिया भी शुरू करने की तैयारी में है, जिसके लिए संभवतः आउटसोर्स के माध्यम से प्रयास होगा. बैंड पूरी तरह से धार्मिक परंपरा का हो श्री महाकाल मंदिर के महेश पुजारीका कहना है "शिव तो आदि अनादि हैं. उन्हें पौराणिक कथाओं में वाद्यों का रचयिता भी कहा गया है. वे नटराज हैं, कलाधर हैं. अगर मंदिर समिति बैंड पर विचार कर रही है और आरती के दौरान व अन्य आयोजन के लिए तो यह एक अच्छा प्रयास है. पुरानी परंपराओं के साथ नई परंपराओं को भी जोड़ना अच्छा है. बस सब कुछ धर्मसंवत् होना चाहिए. बैंड धार्मिक और सांस्कृतिक उपयोग के लिए ही हो."  

भारत की पेंशन व्यवस्था संकट में, श्रमिकों के केवल एक-चौथाई को ही कवरेज

नई दिल्ली सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक स्थिरता और सम्मान बनाए रखने के लिए पेंशन आवश्यक है। सेवानिवृत्त लोगों को अक्सर कम होती कमाई क्षमता, बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल लागत और मुद्रास्फीति के कारण वित्तीय अस्थिरता का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए पेंशन के रूप में सुरक्षा कवच की आवश्यकता होती है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारतीय पेंशन परिसंपत्तियाँ सकल घरेलू उत्पाद का केवल 17% हैं, जबकि कई उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में यह 80% तक है। वर्तमान में, भारत के केवल लगभग 12% कार्यबल ही औपचारिक पेंशन योजनाओं के अंतर्गत आते हैं। यह कवरेज भी असंगत है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र और संगठित निजी क्षेत्र के श्रमिकों को कई समानांतर योजनाओं के तहत सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसके विपरीत, अनौपचारिक क्षेत्र के लिए एकमात्र सुरक्षा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और अटल पेंशन योजना के तहत स्वैच्छिक रूप से अपनाना है। वित्त वर्ष 2024 में इन दोनों योजनाओं का कुल जनसंख्या में लगभग 5.3% हिस्सा था। अनौपचारिक क्षेत्र को एकीकृत करें उल्लेखनीय है कि अनौपचारिक श्रम शक्ति का लगभग 85% देश के सकल घरेलू उत्पाद के आधे से ज़्यादा का उत्पादन कर रहा है। जैसे-जैसे बाज़ार विकसित होंगे, गिग अर्थव्यवस्था का और विस्तार होगा। पेंशन ढाँचे से उनका बहिष्कार न केवल एक नीतिगत खामी है, बल्कि एक आसन्न वित्तीय संकट भी है। 2050 तक, भारत का वृद्धावस्था निर्भरता अनुपात बढ़कर 30% हो जाएगा। परिणामस्वरूप, 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त करने का भारत का मार्ग, काफी हद तक, वृद्धावस्था गरीबी के विरुद्ध भविष्य को सुरक्षित करने के हमारे प्रयासों पर निर्भर करेगा। वर्तमान में, पेंशन कवरेज का विस्तार उन मुद्दों के कारण बाधित है जो मापनीयता, संवेदनशीलता और स्थिरता से जुड़े हैं। पेंशन ढांचे से अनौपचारिक श्रमिकों को बाहर रखने का प्राथमिक कारण पेंशन योजनाओं की खंडित प्रकृति है। हालाँकि सरकार ने गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा शुरू की है, जो आंशिक रूप से एग्रीगेटर्स द्वारा वित्त पोषित है, यह अनौपचारिक क्षेत्र के केवल एक अंश को ही संबोधित करता है और पहले से ही जटिल जाल में एक और समानांतर योजना जोड़ता है। इसके विपरीत, अधिकांश परिपक्व अर्थव्यवस्थाओं में कई स्तरों वाला एक सुव्यवस्थित पेंशन पारिस्थितिकी तंत्र होता है जो पूरी आबादी की विविध आवश्यकताओं को पूरा करता है। उदाहरण के लिए, जापान 20 से 59 वर्ष की आयु के सभी निवासियों के लिए एक अनिवार्य फ्लैट-रेट अंशदायी योजना संचालित करता है, जिसमें स्व-नियोजित, किसान, सार्वजनिक और निजी कर्मचारी और उनके आश्रित शामिल हैं। इसी तरह, न्यूजीलैंड 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के निवासियों को 10 साल की निवास आवश्यकता के अधीन एक सार्वभौमिक, फ्लैट-रेट सार्वजनिक पेंशन प्रदान करता है

दिवाली पर बड़वानी में हिंगोट पर पाबंदी, ड्रोन से चेकिंग, पुलिस मुस्तैद

बड़वानी  दिवाली की रात कुछ जगहों पर 'आग के गोले' बरसने की पुरानी परंपरा देखने को मिलती है. इस बार बड़वानी प्रशासन और पुलिस ने इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. जिले में हिंगोट के निर्माण, भंडारण, क्रय-विक्रय और चलाने पर दो माह के लिए रोक लगा दी गई है. पुलिस को आदेश दिए गए हैं कि नियमों का कड़ाई से पालन कराए जाए. शहर-गांव की सड़कों पर जगह-जगह तैनात पुलिस अब हिंगोट चलाने वालों की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती. कई जगह डंडे लेकर खड़ी टीमें नजर आ रही हैं और निगरानी के लिए सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों का उपयोग भी किया जा रहा है. क्यों उठाया यह कदम, चोटें और जान-माल की आशंका हिंगोट जिसे कुछ स्थानों पर 'दीपावली युद्ध' का हिस्सा माना जाता है, असल में एक फल होता है, जिसे खाली करके उसमें बारूद और विस्फोटक सामग्री भरी जाती है. युद्ध की तरह खेले जाने पर यह तेज रफ्तार से उड़ता हुआ किसी के भी शरीर में घातक चोट पहुंचा सकता है. पिछले कुछ वर्षों में बड़वानी जिले में हिंगोट खेलने के दौरान कई गंभीर दुर्घटनाएं हुई हैं. पिछले साल एमजी रोड पर एक 8 वर्षीय बच्चे को गंभीर सिर की चोट लगी. अस्पताल में जांच में उसकी खोपड़ी में फ्रैक्चर व दिमाग पर असर पाया गया और लाखों रुपये खर्च कर उसकी जान बचाई गई थी. इसी तरह दर्ज घटनाओं व संभावित जान-माल के जोखिम को देखते हुए प्रशासन ने आपात कदम उठाने का निर्णय लिया. प्रशासनिक आदेश, दो माह का पूर्ण प्रतिबंध कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी जयति सिंह ने हिंगोट के निर्माण, भंडारण, विक्रय और उपयोग पर दो माह के लिए प्रतिबंध आदेशित किया है. एसडीएम भूपेंद्र रावत ने निर्देशों का पालन कराने और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी. आदेश में उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम 1884, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908, विस्फोटक नियम 2008 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 208 समेत अन्य प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है. पुलिस की तैयारी, पेट्रोलिंग, ड्रोन, सीसीटीवी और मुकदमे एडिशनल एसपी धीरज सिंह बबर ने बताया कि, ''एसपी के निर्देशानुसार पुलिस हिंगोट चलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर रही है. जिलेभर में कई संदिग्धों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके हैं. दिन-रात पेट्रोलिंग, संदिग्ध व्यक्तियों व विक्रेताओं की निगरानी, मुखबिर नेटवर्क को सक्रिय करने के साथ-साथ जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है. मुहल्लों में जाकर टीमों द्वारा लोगों को समझाया जा रहा है कि यह खतरनाक प्रथा क्यों बंद होनी चाहिए और इसे रोकना किस तरह समुदाय की सुरक्षा के लिए आवश्यक है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के उल्लंघन करने वालों के साथ सख्ती होगी. न केवल एफआईआर दर्ज की जाएगी, बल्कि आवश्यकतानुसार संपत्तियों व भंडारण पर भी कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की तुरंत सूचना पुलिस कंट्रोल रूम पर दें.      समाज का समर्थन और चेतावनी कई वार्डों व मोहल्लों के लोगों ने प्रशासन के निर्णय का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में हुई दुर्घटनाओं ने सबको हिलाया है और युवा वर्ग को इस तरह की खतरनाक रस्मों से दूर रखना चाहिए. वहीं कुछ परंपरावादी समुदायों में अभी भी यह रस्म जारी रखने की जिद दिखाई देती है, जिससे प्रशासन चौकन्ना है. एसडीएम भूपेंद्र रावत ने कहा, 'हमारा लक्ष्य केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि इस खतरनाक कुप्रथा को जड़ों से खत्म करना है ताकि आने वाले वर्षों में कोई भी परिवार इस तरह की त्रासदी का सामना न करे.'' हिंगोट क्या है, जानें खतरनाक प्रक्रिया हिंगोट मूल रूप से जंगलों से कच्चा तोड़ा जाने वाला फल है. इसे भीतर से खोखा कर लिया जाता है और फिर उसमें बारूद व विस्फोटक सामग्री भर दी जाती है. दीपावली के दिन ग्रामीण व युवा इसे एक खेल की तरह आपस में उछालते हैं, इस दौरान तेज धमाके व उड़ान के कारण गंभीर चोटें, आँखों व चेहरे पर आघात, हाथ-पैर कटने व यहाँ तक कि जान जाने तक की घटनाएं देखने को मिली हैं. इसलिए प्रशासन के लिए इसे नियंत्रित करना अनिवार्य हो गया है.

अयोध्या की गलियों में चमकी दीपों की रोशनी, पर्यटन मंत्री ने किया दीपोत्सव का उद्घाटन

अयोध्या रामनगरी अयोध्या में आज होने वाले दीपोत्सव को लेकर लोगों में उमंग नजर आ रहा है। सुबह से शाम तक चलने वाले इस आयोजन में परंपरा, गरिमा और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दीपोत्सव पर झांकियों की शोभायात्रा का आगाज हो गया है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। सुरक्षा के बड़े व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वहां पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि शोभायात्रा साकेत महाविद्यालय से निकली। यह रामपथ पर लगभग चार किलोमीटर की दूरी तय करेगी। कई प्रदेशों के लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं। रामकथा पार्क में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोपहर को शोभायात्रा का स्वागत करेंगे। झांकियों में विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित अयोध्या की उपलब्धियों को दर्शाया गया है। इसके अलावा रामायण कालीन प्रसंग की भी छटा देखने को मिल रही है। अयोध्यावासी पूरे रास्ते घरों की छतों से पुष्प वर्षा करके स्वागत करेंगे। हजारों की संख्या में लोग इस शोभायात्रा को देखने के लिए साकेत महाविद्यालय पहुंचे हैं। इसमें स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश के पर्यटक और श्रद्धालु भी शामिल हैं। भगवान श्रीराम माता सीता के साथ पुष्पक विमान रूपी हेलीकॉप्टर से अयोध्या में पधारेंगे। यहां सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उनकी अगवानी करेंगे। रामकथा पार्क में भव्य राज्याभिषेक समारोह होगा। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में इस बार राम की पैड़ी पर बनाया जा रहा भव्य पुष्पक विमान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण और सेल्फी प्वाइंट बनने जा रहा है। त्रेतायुग की उस अलौकिक कथा को, जब भगवान श्रीराम लंका विजय के बाद पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे थे, इस दीपोत्सव में वास्तविक रूप में साकार किया जा रहा है। राम की पैड़ी के किनारे बन रहा यह राजशाही लुक वाला पुष्पक विमान अयोध्या की पहचान को नया आयाम देगा। इसकी लंबाई 32 फीट, ऊंचाई 25 से 30 फीट, और चौड़ाई 20 फीट होगी। मोर की आकृति पर आधारित इस डिजाइन को ईपीसी सीट पर तैयार किया जा रहा है, जिससे विमान हल्का, आकर्षक और लंबे समय तक संरक्षित रह सके। पुष्पक विमान के सामने रामायण काल के दृश्यों को उकेरा जाएगा, जिसमें भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या आगमन की झांकी सजाई जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान सेल्फी प्वाइंट के रूप में खोला जाएगा, ताकि हर आगंतुक इस दिव्य दृश्य को अपनी यादों में सहेज सके। संध्या के समय लेज़र लाइट शो, दीपों की रेखा और पुष्पवर्षा के साथ यह स्थान अयोध्या के सांस्कृतिक पर्यटन का नया केंद्र बनेगा। अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी के कुशल शिल्पकार मिलकर इस पुष्पक विमान को आकार दे रहे हैं। पारंपरिक कला में आधुनिक तकनीक का संगम इस कृति को अनोखा बना रहा है। स्वर्णिम रंगों, मोरपंखी डिजाइन और राजशाही शैली का यह विमान दीपोत्सव की शोभा में चार चांद लगाएगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा चयनित कार्यदाई संस्था सार्क मीडिया के मालिक सौरभ कुमार सिंह का कहना है कि उनका लक्ष्य दीपोत्सव के दौरान ऐसा वातावरण तैयार करना है, जो न केवल दर्शनीय रूप से आकर्षक हो बल्कि अयोध्या के समृद्ध सांस्कृतिक मूल्यों को भी प्रतिबिंबित करें।

समस्तीपुर से उठेगा चुनावी जादू, पीएम मोदी ने रैली की तारीख की घोषणा की

पटना 6 नवंबर से शुरू हो रहे बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों का शेड्यूल तय हो गया है। पीएम मोदी 24 अक्टूबर से बिहार में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। इस दौरान वह प्रदेश के कई जिलों में जनसभाएं करेंगे और जनता से सीधा संवाद करेंगे। चुनावी अभियान की शुरुआत समस्तीपुर से होगी, जहां प्रधानमंत्री मोदी कर्पूरी ग्राम जाकर समाजवादी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के घर पहुंचेंगे। वहां वह कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देंगे। इसी कार्यक्रम से प्रधानमंत्री अपने बिहार दौरे और चुनावी रैलियों की औपचारिक शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री के दौरे का यह आगाज बेहद प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि कर्पूरी ठाकुर को बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा और सामाजिक न्याय का प्रतीक माना जाता है। कर्पूरी ग्राम से शुरुआत करके पीएम मोदी एक बार फिर 'सबका साथ, सबका विकास' के संदेश के साथ बिहार में एनडीए की ताकत को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे। जानकारी के मुताबिक, 24 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समस्तीपुर और बेगूसराय में दो बड़ी चुनावी सभाएं करेंगे। इसके बाद उनका अगला चरण 30 अक्टूबर को तय है, जब वह मुजफ्फरपुर और छपरा में रैलियां संबोधित करेंगे। सूत्रों के अनुसार, 2 नवंबर, 3 नवंबर, 6 नवंबर और 7 नवंबर को भी प्रधानमंत्री बिहार के अलग-अलग जिलों में जनसभाएं करेंगे। इन रैलियों के कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी की रैलियों से बिहार में एनडीए के चुनावी अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समस्तीपुर से शुरुआत करना एक रणनीतिक कदम है, क्योंकि यह क्षेत्र न सिर्फ समाजवादी राजनीति की धरती रहा है, बल्कि उत्तर बिहार की राजनीति में इसका विशेष प्रभाव है। बिहार में पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को होनी है और दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी और इसके साथ ही चुनाव के नतीजे सामने आ जाएंगे।

कल की दिवाली: लक्ष्मी-गणेश पूजा कैसे करें? समय, भोग और आरती का संपूर्ण विवरण

दिवाली का त्योहार हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस साल दिवाली 20 अक्टूबर, सोमवार को है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ही भगवान राम 14 वर्षों का वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे। प्रभु राम के स्वागत के लिए अयोध्यावासियों ने पूरे नगर में दीये जलाए थे। एक अन्य मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का विधान है। जानें 20 अक्टूबर को दिवाली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त, गणेश-लक्ष्मी पूजा विधि, मंत्र, भोग व आरती समेत सभी जरूरी बातें। अमावस्या तिथि कब से कब तक: अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट पर प्रारंभ होगी और 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। दिवाली पूजा मुहूर्त 2025: दिवाली पर गणेश-लक्ष्मी पूजन प्रदोष व वृषभ काल में अत्यंत शुभ माना गया है। दिवाली पर प्रदोष काल शाम 05:46 बजे से रात 08:18 बजे तक रहेगा। वृषभ काल शाम 07:08 बजे से रात 09:03 बजे तक रहेगा। दिवाली के दिन बन रहे ये शुभ मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:44 बजे से सुबह 05:34 बजे तक। अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक। विजय मुहूर्त- दोपहर 01:59 बजे से दोपहर 02:45 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:46 बजे से शाम 06:12 बजे तक। सायाह्न सन्ध्या- शाम 05:46 बजे से रात 07:02 बजे तक। अमृत काल- दोपहर 01:40 बजे से दोपहर 03:26 बजे तक। निशिता मुहूर्त- रात 11:41 बजे से अगले दिन देर रात 12:31 बजे तक। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के दिन शुभ चौघड़िया मुहूर्त: अमृत – सर्वोत्तम: 06:25 ए एम से 07:50 ए एम शुभ – उत्तम: 09:15 ए एम से 10:40 ए एम लाभ – उन्नति: 02:56 पी एम से 04:21 पी एम अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 03:44 पी एम से 05:46 पी एम सायाह्न मुहूर्त (चर) – 05:46 पी एम से 07:21 पी एम अमृत – सर्वोत्तम: 04:21 पी एम से 05:46 पी एम दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के रात के शुभ चौघड़िया मुहूर्त: लाभ – उन्नति: 10:31 पी एम से अगले दिन देर रात 12:06 बजे तक। राहुकाल का समय: दिवाली के दिन राहुकाल सुबह 07:50 बजे से सुबह 09:15 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल के दौरान पूजा-पाठ व शुभ मांगलिक कार्यों की मनाही है। देखें सिटीवाइज लक्ष्मी पूजन मुहूर्त- 07:38 पी एम से 08:37 पी एम – पुणे 07:08 पी एम से 08:18 पी एम – नई दिल्ली 07:20 पी एम से 08:14 पी एम – चेन्नई 07:17 पी एम से 08:25 पी एम – जयपुर 07:21 पी एम से 08:19 पी एम – हैदराबाद 07:09 पी एम से 08:19 पी एम – गुरुग्राम 07:06 पी एम से 08:19 पी एम – चंडीगढ़ 05:06 पी एम से 05:54 पी एम- कोलकाता 07:41 पी एम से 08:41 पी एम – मुंबई 07:31 पी एम से 08:25 पी एम – बेंगलूरु 07:36 पी एम से 08:40 पी एम – अहमदाबाद 07:07 पी एम से 08:18 पी एम – नोएडा दिवाली पूजन सामग्री: गणेश-लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र, कलश ढकने के लिए ढक्कन, चांदी का सिक्का, तांबूल (लौंग लगा पान का बीड़ा), मिट्टी के दीये, गुलाब व कमल के फूल, चौकी, चौकी पूरने के लिए सूखा आटा, गंगाजल, घी, शक्कर, पंच मेवा, दूर्वा, गणेश-लक्ष्मी जी के वस्त्र, मिट्टी या पीतल का कलश, अगरबत्ती, कपूर, धूप, तुलसी दल, इत्र की शीशी, कलावा, छोटी इलाचयी, जल पात्र, गट्टे, खील-बताशे, मुरमुरे, कलम, नारियल, सिंदूर, कुमकुम, जनेऊ, केसर, सिंघाड़े, लौंग, सरसों का तेल, सप्तमृत्तिका, साबुत धनिया, रुई, 16 श्रृंगार व चंदन, लाल कपड़ा व कुबेर यंत्र आदि। दिवाली गणेश-लक्ष्मी पूजा विधि: दिवाली पूजन के लिए घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा की साफ-सफाई करें। इसके बाद यहां एक चौकी में नया या साफ लाल कपड़ा बिछाएं। अब गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित करें। सबसे पहले गंगाजल से मां लक्ष्मी व भगवान गणेश को स्नान कराएं। अब उन्हें वस्त्र, कमल या गुलाब के फूल व इत्र आदि अर्पित करें। इसके बाद भक्ति भाव के साथ एक-एक करके सभी सामग्री चढ़ाएं। अब गणेश-लक्ष्मी जी का तिलक करें और अक्षत लगाएं। अब भोग लगाने के बाद आरती उतारें और अंत में भूल चूक के लिए मांगी मांगें। भगवान गणेश व माता लक्ष्मी का प्रिय भोग: मां लक्ष्मी को खीर प्रिय है। दिवाली पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए खीर का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा आप सिंघाड़ा, नारियल, पान का पत्ता, हलुआ व मखाने आदि का भी भोग लगा सकते हैं। भगवान गणेश को मोदक व बेसन का लड्डू भोग के रूप में प्रिय माना गया है। दिवाली पर करें मां लक्ष्मी के मंत्र का जाप: ॐ लक्ष्मी नारायण नमः। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः॥ भगवान गणेश के मंत्र: मूल मंत्र: ऊँ गं गणपतये नमः गायत्री मंत्र: ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

19 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक बिहार में छुट्टियों का शेड्यूल – जानिए पूरी सूची

पटना  त्योहारी सीजन में बिहार में छुट्टियों की भरमार लग गई हैं। राज्य में 19 अक्टूबर से लेकर 29 अक्टूबर तक छुट्टियां ही छुट्टियां हैं। अगर स्कूल की बात करें तो सरकार ने 20 अक्टूबर से लेकर 29 अक्टूबर तक स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। आइए डिटेल में जानते हैं कि बैंक, सकूल और अदालतें किस-किस दिन बंद रहेंगे।  जानें दिवाली पर कितने दिन बंद रहेंगे बैंक? दिवाली से लेकर छठ पूजा तक बैंक 4 से 5 दिन बंद रहेंगे। छुट्टियों की पूरी लिस्ट के लिए किल्क करें।   कितने दिन बंद रहेंगी अदालतें?  बिहार में पटना व्यवहार न्यायालय समेत पटना न्याय मंडल की सभी अदालतें 19 अक्टूबर 2025 से 28 अक्टूबर 2025 तक दीपावली एवं छठ महापर्व की (Bihar Court Holidays 2025) छुट्टियों के कारण बंद रहेंगी। पूरी खबर के लिए क्लिक करें।   बच्चों की लगी मौज…इतने दिन बंद रहेंगे School बिहार सरकार ने 20 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2025 तक स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया है। इस अवधि में राज्य के सभी जिलों में सरकारी और निजी स्कूलों में (Bihar Govt School Closed ) अवकाश रहेगा। ये छुट्टियां दिवाली और छठ पूजा दोनों को कवर करेंगी।