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केंद्र सरकार का बड़ा कदम: अपात्र राशन कार्ड होंगे कैंसिल, तुरंत करें दस्तावेज़ों की जांच

नई दिल्ली सरकार से मिलने वाला गेहूं-चावल तो छोड़िए..सरकारी योजनाओं के लाभ भी हाथ से फिसलने वाले हैं। राशन कार्ड बनवाकर सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों पर सरकार ने सख्ती करने का मूड बना लिया है। केंद्र सरकार ने राज्यों को नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। 22 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि जो लोग 6 महीने से ज्यादा समय से राशन नहीं ले रहे हैं, उनके राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएं। अभी देश में करीब 23 करोड़ राशन कार्ड हैं। माना जा रहा है कि देशभर में करीब 18 फीसदी तक राशन कार्ड रद्द हो सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश में 25 लाख से ज्यादा फर्जी राशन कार्ड हैं। सरकार के नए आदेश के मुताबिक जिन लोगों ने 6 महीने से राशन नहीं लिया है, उन पर सबसे पहले गाज गिरने वाली है। बात यहीं नहीं रुकेगी। प्रशासन घर-घर जाकर राशनकार्ड धारकों की जांच करने वाला है। यहां तक कि जिन लोगों ने ई-केवाईसी कराया हुआ है, उनकी भी पात्रता की फिर से जांच होगी। गरीब कल्याण अन्न योजना भी दायरे में केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना यानी गरीब कल्याण अन्न योजना के लाभार्थियों पर भी नया आदेश लागू होगा। अगर कोई लाभार्थी इस योजना के तहत मुफ्त राशन ले रहा है और पिछले 6 महीने से उसने राशन नहीं उठाया है तो नाम कटने की पूरी संभावना है। तुरंत करा लें राशन कार्ड का ई-केवाईसी अगर अभी तक आपने अपने राशन कार्ड का ई-केवाईसी नहीं कराया है तो इस काम को पहली फुर्सत में निपटा लें। बिना ईकेवाईसी के राशन कार्ड पर खतरा सबसे ज्यादा है। राशन कार्ड का ई-केवाईसी आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं। लगातार मौके दिए जाने के बावजूद अभी भी बड़ी संख्या में राशन कार्ड के e-KYC नहीं हुए हैं। सरकार को आशंका है कि ये कार्ड फर्जी हो सकते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फर्जी राशन कार्ड दरअसल ऐसा देखा जा रहा है कि ऐसे लाखों लोगों ने भी राशन कार्ड बनवा रखे हैं, जो पात्रता की शर्तों को पूरा भी नहीं करते हैं। इन लोगों ने सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए फर्जी दस्तावेजों की मदद से राशन कार्ड बनवा रखे हैं। इन परिवारों को राशन की जरूरत नहीं है, लेकिन राशन कार्ड के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेना है। मसलन आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए राशन कार्ड की जरूरत होती है। आयुष्मान कार्ड से 5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है। इसी तरह EWS कोटे से दाखिला लेने में भी राशन कार्ड बहुत काम आता है।

चुनावी पारदर्शिता पर सवाल: CEC ने उठाया मुद्दा, मरे हुए लोगों के नाम लिस्ट में क्यों?

 नई दिल्ली बिहार में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान को लेकर विपक्ष के लगातार विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इस प्रक्रिया का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग को मरे हुए मतदाताओं, डुप्लिकेट मतदाता पहचान पत्र धारकों और विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल करने की अनुमति देनी चाहिए। यह बयान तब आया है जब राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने SIR अभियान के खिलाफ तीखा विरोध जताया है। विपक्षी दलों का दावा है कि SIR की प्रक्रिया से 50 लाख से अधिक मतदाताओं के मताधिकार छिन सकते हैं। SIR अभियान पर उठे सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त ने इंटरव्यू में कहा, "क्या चुनाव आयोग को मृत मतदाताओं को वोटर लिस्ट में रखने की अनुमति देनी चाहिए? क्या डुप्लिकेट वोटर आईडी वाले लोगों को अनुमति दी जानी चाहिए? क्या विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल करना चाहिए? इस पर आपत्ति क्या है?" उन्होंने जोर देकर कहा कि एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची लोकतंत्र की सफलता की नींव है। विपक्ष का विरोध और संसद में हंगामा कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत इंडिया गठबंधन के कई सांसदों ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में संशोधन के खिलाफ संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और इसे वापस लेने के साथ-साथ दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले, कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, झामुमो, राजद और वामपंथी दलों सहित विपक्ष के शीर्ष नेता और सांसद संसद के मकर द्वार के बाहर एकत्र हुए और सरकार तथा मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप है कि यह अभियान बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं, खासकर गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की साजिश है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RJD नेता तेजस्वी यादव ने इस अभियान को "लोकतंत्र के खिलाफ साजिश" करार दिया। चुनाव आयोग का आंकड़ा चुनाव आयोग ने  एक बयान में बताया कि SIR अभियान के तहत अब तक 56 लाख मतदाताओं को अयोग्य पाया गया है। इसमें 20 लाख मृत मतदाता, 28 लाख ऐसे मतदाता जो बिहार से बाहर चले गए हैं, 7 लाख ऐसे मतदाता जो दो जगहों पर पंजीकृत हैं, और 1 लाख ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनका पता नहीं चल सका। CEC ने सवाल उठाया, “क्या चुनाव आयोग को ऐसे मतदाताओं को नहीं हटाना चाहिए?” पारदर्शी प्रक्रिया का दावा ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR अभियान पूरी तरह पारदर्शी है और इसका उद्देश्य एक शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना है। उन्होंने बताया कि बिहार के मतदाताओं ने इस अभियान में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया है और अब तक 57.48% गणना फॉर्म एकत्र किए जा चुके हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है, जबकि शेष 3 करोड़ मतदाताओं को अपनी जन्म तिथि या स्थान साबित करने के लिए 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक जमा करना होगा। उन्होंने पूछा, "क्या चुनाव आयोग द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से तैयार की जा रही शुद्ध मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव और एक मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला नहीं है?" मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "किसी न किसी मोड़ पर, हम सभी को, और भारत के सभी नागरिकों को, राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर, इन सवालों पर एक साथ गहराई से विचार करना होगा।" सुप्रीम कोर्ट में मामला SIR अभियान के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि यह प्रक्रिया असंवैधानिक है और लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को अभियान जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन यह भी सुझाव दिया कि आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों को स्वीकार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने अभियान के समय पर भी सवाल उठाए, पूछा कि इसे केवल बिहार में ही क्यों लागू किया गया और इसे पूरे देश में क्यों नहीं किया गया। विपक्ष की रणनीति एक दिन पहले, बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने धमकी दी थी कि अगर एसआईआर प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो वे राज्य में आगामी चुनावों का बहिष्कार करेंगे। उनके बहिष्कार वाले बयान के बारे में पूछे जाने पर, तेजस्वी ने कहा, "देखेंगे कि लोग क्या चाहते हैं और हमारे सहयोगी क्या कहते हैं।" उन्होंने पूछा, "अगर राज्य के चुनाव पक्षपातपूर्ण और जोड़-तोड़ वाले तरीके से कराए जाते हैं, जहां यह पहले से ही तय होता है कि कौन कितनी सीटें जीतेगा, तो ऐसे चुनाव कराने का क्या फायदा?"

मध्यप्रदेश के गांव बनेंगे स्मार्ट! 23 हजार पंचायतों में शहरी ढांचे की होगी शुरुआत

भोपाल  मध्य प्रदेश के गांवों की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है. आने वाले सालों में एमपी के गांव विकास के मामले में शहरों को टक्कर देंगे. एमपी की हर पंचायत के लिए एक मास्टर प्लान बनाया जाएगा जिसमें शहरों जैसी तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी. इस मास्टर प्लान के तहत रोजगार और पर्यटन पर ज़्यादा फोकस रहेगा. फिलहाल दो पंचायतों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जबकि आने वाले समय में कुल 23 हज़ार पंचायतों को कवर करने की योजना है. क्या है ये मास्टर प्लान अक्सर शहरों को डेवलप करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जाते हैं लेकिन मध्य प्रदेश ग्रामीण विकास की ये पहल प्रदेश के गांवों को नई दिशा प्रदान करेगी. इस मास्टर प्लान के तहत रोजगार और पर्यटन पर फोकस किया जाएगा जिससे लोग अपने स्तर पर कमाई को रास्ते खोज सकें. फिलहाल पंचायत  बिलकिसगंज, जिला सीहोर और पंचायत मुरवास, जिला विदिशा में इस मास्टर प्लान की नींव रखी जा चुकी है. ऐसे ही बाकी पंचायतों के लिए भी प्लान तैयार किए जाएंगे. किन बिंदुओं पर केंद्रित होगा प्लान इस मास्टर प्लान के तहत गांव में सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट और cctv कैमरे जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. साथ ही साथ साफ-सफाई, और वेस्ट मैनेजमेंट पर भी ध्यान रखा जाएगा. हेल्थ, एजुकेशन, हाउसिंग और एंटरटेंमेंट के  लिए भी पूरी व्यवस्थाएं रखी जाएंगी. शहरों की तरह गांव की जमीन के हिसाब से सेक्टर भी मार्क किया जाएगा.   किस स्तर तक पहुंची मास्टर प्लान की गाड़ी फिलहाल बिलकिसगंज और मुरवास, दोनों पंचायतों में सीसीटीवी लगाए जाने, लेक फ्रंट, नया बाजार, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, ग्रे वॉटर और ड्रेनेज सिस्टम, प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर, नट उत्पादन, खेती, गौशाला निर्माण करने की योजना बनाई जा रही है. ये मेगा प्लान दो चरणों में काम करेगा. पहला चरण साल 2026 से 2030 और दूसरा चरण साल 2030 से 2035 तक चलेगा.  भोपाल के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर द्वारा दोनों पंचायतों का प्लान तैयार किया गया है.  प्लान में हुई शामिल बातें     गांव में सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं। साफ-सफाई, सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था।     हेल्थ, एजुकेशन, हाउसिंग और मनोरंजन के लिए अलग क्षेत्र तय। गांव की जमीन के हिसाब से सेक्टर चिह्नित किए गए हैं। गांवों में भी लेक फ्रंट, स्थानीय व्यापार पर जोर     इस प्लान के तहत दो चरणों में काम होगा। पहला चरण 2026 से 2030 और दूसरा चरण 2030 से 2035 तक चलेगा।     बिलकिसगंज के लिए 11 और मुरवास के लिए 7 खास प्रोजेक्ट बनाए गए हैं, जैसे- लेक फ्रंट, नया बाजार, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, ग्रे वॉटर और ड्रेनेज सिस्टम, प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर, गो-काष्ठ निर्माण, नट उत्पादन और खेती, गौशाला निर्माण। प्लान की जरूरत क्यों पड़ी? अभी इनमें रोजगार, छोटे कारोबार और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी जरूरतें नहीं हैं। गांवों व जंगलों को साफ-सुथरा और टिकाऊ बनाए रखना जरूरी है। क्या संभावना है? : अगर लोगों को सही ट्रेनिंग दी जाए, तो वे अपने स्तर पर कमाई के रास्ते खोज सकते हैं। गांवों में चल रहे स्वयं सहायता समूह और पर्यटन से भी आमदनी बढ़ सकती है। आईआईटी बना रहा प्लान : योजना को लेकर भोपाल में दो दिन तक अफसरों और विशेषज्ञों की बैठक हुई। इसमें गांवों के सरपंच भी थे। योजना केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसमें 14 राज्यों की 36 पंचायतें शामिल हैं। योजना आईआईटी व एसपीए जैसे संस्थान बना रहे हैं।

इंडिया से हायरिंग पर ट्रंप का ऐक्शन! टेक दिग्गजों को सख्त हिदायत

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को एक सख्त मैसेज दिया है, जिसमें भारत समेत दूसरे देशों से हायरिंग करने को मना किया है. इसमें Google, Microsoft, Meta जैसे नाम शामिल हैं. बुधवार को वॉशिंगटन में आयोजित AI Summit के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी टेक कंपनियों को ये संदेश दिया है. साथ ही अमेरिकी टैलेंट को हायरिंग करने की भी सलाह दी है.  यहां आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में बहुत से कर्मचारी यहां तक कि CEO तक के पोस्ट पर कई भारतीय मूल के लोग पहुंच चुके हैं. इसमें Google CEO सुंदर पिचाई और Microsoft CEO सत्य नडेला जैसे नाम शामिल हैं. हाल ही में Meta ने भी एक बड़ी AI टीम की हायरिंग की है, जिसमें कई भारतीय नाम शामिल हैं.  डोनाल्ड ट्रंप ने AI Summit  के दौरान के दौरान टेक इंडस्ट्री में ग्लोबल माइंडेस्ट की आलोचना की. उन्होंने आगे कहा कि इस वजह से कई अमेरिकी नागरिक और अमेरिकी टैलेंट को इग्नोर किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया है कि कई टॉप कंपनियां प्रोफिट के लिए अमेरिका की आजादी का फायदा उठा रहे हैं और बाहरी लोगों पर बड़ा इनवेस्ट कर रहे हैं.  चीन में लगा रहे फैक्ट्री और भारत से कर रहे भर्तीः ट्रंप  ट्रंप ने आगे कहा कि बहुत सी टेक कंपनियां अमेरिकी आजादी की वजह से अपनी फैक्टरी को चीन में लगा रहे हैं और भारत से कर्मचारियों को भर्ती कर रहे हैं, ये सब बातें आप जानते हैं. इन सब के बावजूद वे अपने ही देश के लोगो को नकार रहे हैं और आलोचना तक कर रहे हैं.  अमेरिका AI टेक कंपनियां Sr No- कंपनी का नाम संस्थापक / CEO स्पेशल प्रोडक्ट 1 OpenAI सैम ऑल्टमैन (CEO), एलन मस्क (Co-founder) ChatGPT, GPT मॉडल्स 2 Google DeepMind डेमिस हासाबिस (CEO) Gemini, AlphaGo, AI रिसर्च 3 Anthropic डारियो अमोदेई (CEO, Ex-OpenAI) Claude AI मॉडल 4 xAI एलन मस्क (Founder) Grok AI, Twitter/X इंटीग्रेशन 5 NVIDIA जेन्सेन हुआंग (CEO) AI चिप्स (GPU), AI हार्डवेयर 6 Microsoft सत्या नडेला (CEO) Azure AI, Copilot, OpenAI में निवेशक 7 Amazon (AWS AI) एंडी जेसी (CEO), रूहित प्रसाद (Alexa AI Chief) Alexa, Amazon Bedrock 8 IBM Watson अरविंद कृष्णा (CEO) Watson AI, एंटरप्राइज AI समाधान 9 Meta AI (Facebook) मार्क ज़ुकरबर्ग (Founder & CEO) LLaMA, FAIR रिसर्च, AI चैटबॉट 10 Palantir Technologies एलेक्स कार्प (CEO) AI डेटा एनालिटिक्स, गोथाम प्लेटफॉर्म अमेरिकी फर्स्ट पॉलिसी को फिर से दोहराया  ट्रंप ने एक बार फिर से अमरिकी फर्स्ट पॉलिसी को याद दिलाया. उन्होंने आगे कहा कि AI की रेस में न्यू स्प्रिट की मांग है, साथ ही राष्ट्र के प्रति लगाव जरूरी है. उन्होंने कहा कि हमें अमेरिकी कंपनियों की जरूरत है, जो अमेरिका में ही रहें. साथ ही वह अमेरिकी फर्स्ट पॉलिसी को फॉलो करें. ये सब आपको करना ही पड़ेगा.   

पुलिस थानों में रामायण पाठ शुरू, कॉन्स्टेबल खुश तो कांग्रेस ने खड़े किए सवाल

भोपाल  मध्य प्रदेश में पुलिस के नए आरक्षकों की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है. प्रदेश में 8 अलग अलग ट्रेनिंग सेंटर में करीब 3800 आरकक्षों की ट्रेनिंग चल रही है, जो 9 महीने तक चलेगी. हालांकि, इस बार की ट्रेनिंग चर्चा में इसलिए है क्योंकि इस बार नई रंगरूट फिजिकल ट्रेनिंग के साथ-साथ रामचरितमानस का पाठ करते भी नजर आएंगे. मध्य प्रदेश पुलिस के पुलिस प्रशिक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक रामबाबू सिंह ने नए रिक्रूटर्स को रामचरितमानस पढ़ने के निर्देश दिए हैं. भगवान राम के जीवन से शिक्षा लें दरअसल कई नए रिक्रूटर्स ने यह इच्छा जताई थी कि उनकी ट्रेनिंग उनके गृह जिले के पास के ट्रेनिंग सेंटर में होनी चाहिए. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में संबोधित करते हुए कहा कि ने रिक्रूटर्स ट्रेनिंग के साथ-साथ रामचरितमानस का पाठ करें. भगवान राम के जीवन से शिक्षा लें, उन्होंने कहा प्रभु श्री राम 14 साल तक वन में रहें है. आप 9 माह अपने घर से दूर ट्रेनिंग सेंटर में नहीं रह सकते. उन्होंने एक आदेश भी जारी किया जिसमें लिखा कि आप सभी को प्रेरणा के लिए रामचरितमानस पढ़ना चाहिए. इससे आपके जीनव को प्रेरणा और ऊर्जा मिलेगी.  क्यों पढ़ाई जा रही रामचरितमानस? तनावभरे माहौल में रोज जनता की सेवा में डटी रहने वाली मध्य प्रदेश पुलिस ने अब एक नई पहल शुरू की है, रामचरितमानस पाठ. इसका उद्देश्य सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि नैतिक और मानसिक सशक्तिकरण है. यह पाठ अब नए पुलिसकर्मियों को उनके ड्यूटी के बीच मानसिक शांति, आत्मनियंत्रण और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनेगा. सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता, सेवा और त्याग जैसे आदर्श अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं वर्दीधारी कर्मयोगियों के व्यवहार में उतर रहे हैं. 'रामजी के वनवास के आगे ये ट्रेनिंग कुछ भी नहीं' ट्रेनिंग ले रही कॉन्स्टेबल उस्मानी शबनम ने कहा, साहब ने बताया कि राम जी ने किस तरह 14 साल का वनवास लिया था। उसके सामने तो ये पुलिस ट्रेनिंग कुछ भी नहीं है। इससे हमें सीख लेना चाहिए कि परिवार से दूर रहकर हम भी देशभक्ति कर सकें। रामचरितमानस का पाठ करने से हमें रामजी के आचरण पर चलने और अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान रहने की सीख मिलेगी। 'रामायण पाठ करने से हम मोटिवेटेड रहेंगे' कॉन्स्टेबल अयान महमूद खान ने कहा, राम जी हमारे प्रेरणा स्रोत हैं। यहां अच्छे से ट्रेनिंग करके निकलेंगे और देश की सेवा करेंगे। रामचरित मानस पढ़ने का अच्छा सुझाव दिया है। इससे हम मोटिवेटेड रहेंगे और हमारा मन शांत रहेगा। दिन भर की थकान के बाद अगर हम शाम को इसका पाठ करते हैं तो हमें मेंटली पीस मिलेगा। एडीजी सर का अच्छा सजेशन है, हम लोग भी इसे ट्राय करेंगे। ट्रेनिंग से एक दिन पहले की कॉन्स्टेबलों से बात बुधवार 23 जुलाई से मप्र के आठ पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में करीब 4 हजार नए पुलिस आरक्षकों की ट्रेनिंग शुरू हुई। जून में पुलिस की नौकरी में चयनित होकर आए करीब 600 आरक्षकों ने अपने गृह जिले के करीब वाले पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS) में तबादला करने के आवेदन दिए। बड़ी संख्या में जब नए आरक्षकों की ट्रेनिंग के पहले ही तबादलों के आवेदन और सिफारिशें आईं तो एडीजी ने प्रशिक्षण शुरू होने एक दिन पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इसके जरिए सभी आठ पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के एसपी और नए कॉन्स्टेबलों से बात की। ट्रांसफर एप्लिकेशन से परेशान होकर दी सलाह एडीजी (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह ने बताया, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (पीटीएस) चेंज करने के लिए बहुत सारे एप्लिकेशन आ रहे थे। पीटीएस बदलवाने के लिए भीड़ लगी हुई थी। ज्यादातर एप्लिकेशन में लिखा है- छिंदवाड़ा का रहने वाला हूं, मुझे पीटीएस पचमढ़ी में कर दिया जाए। मैं चंबल का रहने वाला हूं, पीटीएस तिघरा कर दिया जाए। कोई कह रहा था मां बीमार तो किसी के पिता बीमार हैं। मंगलवार को एडीजी राजाबाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में ट्रेनिंग लेने पहुंचे कॉन्स्टेबलों से कहा, भगवान राम ने 14 साल का वनवास स्वीकार किया था। भगवान जब माता-पिता की आज्ञा मानने के लिए 14 साल वन में रह सकते हैं तो आप अपने ट्रेनिंग के लिए घर-परिवार से दूर नहीं रह सकते। आप भगवान राम के जीवन को देखिए, रावण से लड़ने के लिए वानरों की सेना तैयार की और लंका पर विजय प्राप्त की। मेरा सुझाव है कि जो नए आरक्षक हैं वो रोज सोने से पहले रामचरितमानस का पाठ करें। रामचरितमानस से क्या बदलेगा? • तनाव में राहत: रोज की भागदौड़ और तनाव में यह आध्यात्मिक अभ्यास शांति देगा • सकारात्मक कार्यसंस्कृति: आपसी रिश्तों में सौहार्द और जनता के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी • अनुशासन और प्रेरणा: मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन से सीखकर पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों में और निखार ला सकेंगे क्या है मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा रामायण पाठ की सलाह का मामला?     रामायण पाठ की सलाह: मप्र पुलिस के नव आरक्षकों को प्रशिक्षण के दौरान रामायण पाठ करने की सलाह दी गई है, ताकि वे मानसिक शांति और प्रेरणा प्राप्त कर सकें।     एडीजी का संदेश: एडीजी (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में नव आरक्षकों से रामायण का पाठ करने की अपील की, भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने की बात की।     विपक्ष का विरोध: कांग्रेस ने इस निर्णय पर सवाल उठाए, और इसे धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन बताया, क्योंकि किसी को धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।     प्रशिक्षण में बदलाव: मप्र पुलिस के नव आरक्षकों की नौ महीने की ट्रेनिंग में तकनीकी शिक्षा, जैसे ई-साक्ष्य और सीसीटीएनएस, भी शामिल की गई है।     सिर्फ सलाह, अनिवार्य नहीं: रामायण पाठ करना अनिवार्य नहीं है, यह सिर्फ एक सुझाव है जो जवानों को प्रेरणा और मार्गदर्शन देने के लिए दिया गया है। भोपाल के भौरी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से ट्रेनिंग कर रहे आरक्षकों से बातचीत  भोपाल स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पहुंची, जहां ट्रेनिंग कर रहे आरक्षकों से हमने बातचीत की. उन्होंने कहा कि ADG साहब ने कोई गलत बात नहीं कही है. रामचरितमानस से हमें प्रेरणा ही मिलेगी, त्याग, समर्पण और सेवा ही सीखेंगे. वहीं, ट्रेनिंग कर रहे कुछ मुस्लिम आरक्षकों ने कहा कि जहां से भी प्रेरणा मिले, वहां से लेना चाहिए. राम जी वन में रहे और हम क्या 9 माह ट्रेनिंग … Read more

मंदिर में इस्लाम प्रचार पर दर्ज FIR रद्द, हाईकोर्ट ने कहा– यह अपराध नहीं, मुस्लिम युवकों को राहत

बेंगलुरु कर्नाटक हाई कोर्ट ने वैसे तीन मुस्लिम व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है, जिन पर एक हिंदू मंदिर में इस्लाम की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले पर्चे बांटने और मौखिक रूप से अपनी धार्मिक मान्यताओं को समझाने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि किसी मंदिर में सिर्फ इस्लाम का प्रचार करने वाला पर्चा बांटने और उसके बारे में व्याख्या करने से कोई अपराध नहीं हो जाता, जब तक कि धर्मांतरण से जुड़ा कोई साक्ष्य न मिलता हो। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 299, 351(2) और 3(5) और कर्नाटक धर्म स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2022 की धारा 5 के तहत आरोप लगाए गए थे। जस्टिस वेंकटेश नाइक टी की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों ने उपरोक्त कानूनों के तहत कोई अपराध नहीं किया है, क्योंकि उन लोगों ने किसी भी व्यक्ति को इस्लाम में धर्मांतरित करने का कोई प्रयास नहीं किया। हिन्दू धर्म पर अपमानजनक टिप्पणी के भी आरोप लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि चार मई 2025 को शाम 4:30 बजे, जब वह जामखंडी स्थित रामतीर्थ मंदिर गया था, तो कुछ लोग वहां मंदिर परिसर में इस्लामिक शिक्षा का प्रचार करने वाले पर्चे बाँट रहे थे और अपनी धार्मिक मान्यताओं के बारे में लोगों को मौखिक रूप से समझा रहे थे। शिकायत में बताया गया है कि घटनास्थल पर मौजूद हिन्दू श्रद्धालुओं ने उन लोगों से उनकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ की थी, तो इसके जवाब में, मुस्लिम युवकों ने कथित तौर पर हिंदू धर्म की आलोचना करते हुए अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। नौकरी और गाड़ी का दिया था प्रलोभन शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी मंदिर में मौजूद लोगों को इस्लाम धर्म अपनाने के एवज में गाड़ी देने और दुबई में नौकरी दिलाने का प्रलोभन दे रहे थे। दूसरी तरफ, अपने खिलाफ दर्ज अपराध को रद्द करने की मांग करते हुए, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे केवल अल्लाह या पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं का प्रचार कर रहे थे। धर्मांतरण के साक्ष्य नहीं याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा किसी व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास करने के आरोप केपीआरएफआर अधिनियम की धारा 5 के तहत दंडनीय अपराध के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करते हैं क्योंकि ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिससे साबित हो कि वे सभी धर्मांतरण कराने की कोशिश कर रहे थे।

फैंस के लिए खुशखबरी: एशिया कप में हो सकती है भारत-पाक टक्कर, जानिए वेन्यू की डिटेल

मुंबई  एशिया कप क्रिकेट 2025 सितंबर के महीने में आयोजित हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) इस टूर्नामेंट को दुबई और अबू धाबी में कराने पर सहमत हो गया है. BCCI के वाइस प्रेसिडेंट राजीव शुक्ला और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी अगले कुछ दिनों में टूर्नामेंट की फाइनल डेट्स तय करेंगे. स्पॉन्सर्स से भी बातचीत की जाएगी क्योंकि मार्केटिंग प्लान्स बनाने के लिए उन्हें अधिक समय चाहिए. टूर्नामेंट का आगाज 7 सितंबर को होने की संभावना है और इसकी समाप्ति तीसरे या चौथे हफ्ते में होगी. BCCI ने ECB (एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड) के साथ 3 वेन्यू के लिए करार किया है, लेकिन एशिया कप के लिए केवल 2 स्टेडियमों का उपयोग होगा. बीसीसीआई टूर्नामेंट के लिए सरकार की मंजूरी का भी इंतजार कर दिया है. इस टूर्नामेंट के लिए संभावित वेन्यू दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम और जायद क्रिकेट स्टेडियम (अबू धाबी) हैं. सूत्रों के मुताबिक इस टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान दोनों को एक ही ग्रुप में रखा जाएगा. यानी दोनों का मुकाबला ग्रुप स्टेज में होना तय दिख रहा है. एशियन क्रिकेट काउंसिल की बैठक 24 जुलाई को ढाका में हुई, जिसमें ये निर्णय लिए गए है. बैठक में BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने वर्चुअली भाग लिया. न्यूट्रल वेन्यू पर क्यों होगा ये टूर्नामेंट? बीसीसीआई के पास आठ टीमों के इस टूर्नामेंट की मेजबानी का अधिकार है, लेकिन भारत-पाकिस्तान के संबंधों में तल्खी के कारण टूर्नामेंट को न्यूट्रल वेन्यू पर कराया जाएगा. यह पहली बार है जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एक उच्च-स्तरीय एसीसी बैठक की मेजबानी की. बीसीबी के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ने कहा था कि बीसीबी केवल एसीसी को लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान कर रहा है. एशिया कप के आगामी संस्करण में आठ टीमें भाग लेंगीं. इसमें भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, हॉन्ग कॉन्ग, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात का नाम शामिल है. टूर्नामेंट में आठ टीमों को चार-चार के दो ग्रुपों में विभाजित किया जाएगा. फिर प्रत्येक ग्रुप से टॉप-2 टीमें सुपर-4 स्टेज के लिए क्वालिफाई करेंगी. ग्रुप-ए में भारत, पाकिस्तान, यूएई और हॉन्ग कॉन्ग को रखा जा सकता है. वहीं ग्रुप-बी में अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और ओमान को जगह मिल सकती है.

50 लोगों की जान पर आफत: रूस का यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त, बचाव अभियान जारी

मॉस्को  रूस में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक एक यात्री विमान चीन की सीमा के पास लापता हो गया था। विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया था। An-24 नाम के इस यात्री विमान में 49 लोग सवार थे और ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि सभी लोगों की मौत हो गई है। लापता विमान क्रैश हो गया था और अब उसका मलबा मिल गया है। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS की रिपोर्ट में पहले कहा गया था कि विमान ने टिंडा (Tynda) के लिए उड़ान भरी थी लेकिन गंतव्य के नजदीक पहुंचते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका उसका संपर्क टूट गया। बताया गया था कि चीन की सीमा के पास ये विमान लापता हो गया है। TASS की रिपोर्ट के मुताबिक यात्री विमान, अंगारा एयरलाइंस का था और अंतिम बार जब उससे संपर्क हुआ था, वह टिंडा एयरपोर्ट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर था। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है। यह इलाका चीन की सीमा के काफी पास स्थिति है और इस क्षेत्र में करीब करीब हमेशा मौसम काफी खराब रहता है, जिससे विमानों के लिए उड़ान भरना काफी चुनौतीपूर्ण रहता है। AN-24 का पूरा नाम Antonov-24 है, जो एक सोवियत निर्मित मध्यम दूरी का डबल इंजन टर्बोप्रॉप यात्री विमान है. इसे मुख्य रूप से कम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है और क्षेत्रीय उड़ानों के लिए इसका इस्तेमाल होता है. ये पहली बार 1959 में उड़ा था और इसे रूसी, पूर्वी यूरोप और एशिया के कठिन इलाकों में उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया था. ये विमान लगभग 1,500 से 2,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, जो इसे क्षेत्रीय उड़ानों के लिए परफेक्ट बनाता है. इसकी खासियत ये है कि ये कम दूरी के रनवे से टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है, जो इसे दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त बनाता है. इसके मजबूत और भरोसेमंद डिजाइन की वजह से इसे कार्गो विमान और सैन्य परिवहन में भी इस्तेमाल किया जाता है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS और SHOT न्यूज आउटलेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यात्री विमान के लापता होने की रिपोर्ट आने के साथ ही स्थानीय प्रशासन और एविएशन अथॉरिटी ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया था। बचाव दलों को जंगलों और पहाड़ी इलाकों की ओर रवाना किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि विमान की क्रैश लैंडिंग हो सकती है। जिस क्षेत्र में विमान लापता हुआ था वो अमूर क्षेत्र मौसम के लिहाज से काफी मुश्किल क्षेत्र है। यहां काफी ज्यादा ठंड होती है और पहाड़ी इलाका है। यहां घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ इलाके हैं। इसके अलावा मौसम में अचानक परिवर्तन आता रहता है। इसलिए पायलट्स के लिए इस क्षेत्र से विमानों को उड़ाना काफी मुश्किल होता है।

नक्सलवाद को तगड़ा झटका: 61 इनामी नक्सली सुरक्षा बलों के सामने हुए सरेंडर

बीजापुर/कांकेर/ नारायणपुर/दन्तेवाड़ा छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी मुहिम को बड़ी सफलता मिली है. कांकेर, बीजापुर और नारायणपुर में कुल 61 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का ऐलान किया है. इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर 2 करोड़ 10 लाख रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित था. कांकेर में मिलिट्री कमांडर का सरेंडर कांकेर में मिलिट्री कंपनी नंबर 1 के कमांडर मंगलू उर्फ रूपेश सहित 13 ईनामी नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया. इनमें 5 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं. उत्तर बस्तर डिविजन के रावघाट, परतापुर एरिया कमेटी एवं माड़ डिविजन में सक्रिय थे. आत्म समर्पित नक्सलियों पर कुल 62 लाख रुपए का इनाम घोषित था. बीजापुर में माओवादियों को बड़ा झटका बीजापुर जिले में 25 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें से एक 25 लाख का इनामी SZCM (साउथ जोनल कमेटी मेंबर) भी शामिल है. आत्मसमर्पण करने वालों में DVCM, ACM, LOS सदस्य, जनताना सरकार के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे शीर्ष कैडर शामिल हैं. इन सभी पर कुल 1 करोड़ 15 लाख रुपए का इनाम था. नारायणपुर में 8 ने किया सरेंडर इधर नारायणपुर से भी बड़ी खबर आई है जहां 8 सक्रिय माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं. इन पर कुल 33 लाख रुपए का इनाम था. सरेंडर करने वालों में दो बड़े नाम शामिल हैं कमलेश और डॉक्टर सुखलाल, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे. दन्तेवाड़ा में एक दंपति समेत 15 ने किया सरेंडर दन्तेवाड़ा जिले में चलाये जा रहे लोन वर्राटू अभियान और पूना मारगेम (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान से प्रभावित होकर कुल 17 लाख के 05 इनामी माओवादियों सहित 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इसमें  01 माओवादी दम्पति भी शामिल है. लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 254 ईनामी माओवादियों सहित कुल 1020 माओवादियों ने  आत्मसमर्पण किया. जिसमें जिला दन्तेवाड़ा के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के 824 पुरूष माओवादी और 196 महिला माओवादी शामिल हैं.  

प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुर्नवास बड़ी उपलब्धि निगम ने जंगल के साथ लोगों की जिन्दगी भी संवारी प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सम्मानित वन‍विकास निगम के विजन डाक्यूमेंट-2047 का किया अनावरण जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों के रेस्क्यू सेंटर स्थापित होंगे वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान सराहनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में खनन गतिविधियों और बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में बने राख के पहाड़ों पर वनों को विकसित करने की चुनौती स्वीकार कर मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया है। प्रदेश के तीन लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुनर्वास करना बड़ी उपलब्धि है। वन विकास निगम इस उपलब्धि के लिए बधाई का पात्र है। यह गर्व का विषय है कि अन्य राज्य भी निगम की इस विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए उत्सुक हैं। प्रदेश में अद्यतन तकनीक के माध्यम से वनों का उचित प्रबंधन किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश वन सम्पदा में देश में सर्वश्रेष्ठ है। राज्य सरकार वनों और वन उपज के साथ वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में भी हरसंभव प्रयास कर रही है। प्रदेश के सघन वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारी प्रशंसा के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सभी दिशाओं में क्षमता विकास और प्रगति के अवसर उपलब्ध हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में विशेष पहल की जा रही है। राज्य सरकार जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों का रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य वन विकास निगम द्वारा विकसित वनों के प्रबंधन और आगामी कार्ययोजना के बारे में विचार मंथन की आवश्यकता है। अब तक किए गए कार्यों का सिंहावलोकन करते हुए राज्य सरकार वन विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष नवाचार और पहल करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विकास निगम के केन्द्रों में ईको टूरिज्म की गतिविधियां संचालित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का जोधपुर आम और बबूल की लकड़ी के आधार पर फर्नीचर के बड़े केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में उपलब्ध सागौन और अन्य श्रेष्ठ काष्ठ के उपयोग से मध्यप्रदेश भी इस प्रकार की पहल कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। प्रदेश के वन, देश की कई प्रमुख नदियों को जलराशि से समृद्ध बनाते हैं। प्रदेश के विशाल भू-क्षेत्र में फैली वन आधारित जीवनशैली हमें प्रकृति के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। देश में सर्वाधिक बाघ मध्यप्रदेश में हैं। चंबल क्षेत्र में घड़ियाल भी वन्यजीव पर्यटन की शोभा बढ़ा रहे हैं। वन विभाग ने विलुप्तप्राय गिद्धों का संरक्षण करते हुए प्रदेश में गिद्धों को नया जीवन प्रदान किया है। सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्य सरकार योजनाओं पर कार्य कर रही है। प्रदेश में सर्प गणना की तैयारी हो रही है। मध्यप्रदेश ऐसा क्षेत्र हैं, जहां टाइगर और मनुष्य सहचर्य की भावना से साथ-साथ रहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने वन विकास निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों का सम्मान किया। इनमें सर्वआर.के. नामदेव, आर.एस. नेगी, रतन पुरवार, पी.सी. ताम्रकार तथा भगवंतराव बोहरपी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम के स्वर्ण जयंती वर्ष पर वन विकास की आगामी कार्ययोजना पर केन्द्रित विजन-2047 का अनावरण किया। इस अवसर पर वन विकास निगम द्वारा संचालित गतिविधियों और उसकी विकास यात्रा पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के संचालक के.रविचंद्रन ने अंगवस्त्रम और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा भेंटकर अभिवादन किया। वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन विकास निगम, स्थानीय लोगों को जोड़ते हुए वन संरक्षण की गतिविधियां संचालित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अनेक नवाचार क्रियान्वित हो रहे हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश को वन संपदा से समृद्ध करने के लिए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल-गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश में अनेकों कुए, बावड़ी, तालाब और जलस्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया गया। जल-गंगा संवर्धन अभियान भूजल स्तर सुधार के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है। राज्य वन विकास निगम की भूमिका सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णबाल ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि आयोग की अनुशंसा पर 1975 में स्थापित राज्य वन विकास निगम अपनी स्थापना से लेकर अब तक निरंतर लाभ में ही रहा है। पर्यावरणीय आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध निगम की गतिविधियों से जंगल के साथ-साथ लोगों की जिन्दगी भी संवर रही है। निगम का 50वां स्थापना दिवस मनाना हम सभी के लिए गौरव का क्षण है। वन विकास निगम के सहयोग से 3 लाख 90 हजार हेक्टेयर जंगलों का विकास और ट्रीटमेंट किया गया। इस उपलब्धि में निगम के अधिकारी और कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन तथा वानिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि और भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।