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अक्टूबर से शुरू हो सकती है नई इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन, मुंबई से आए 16 नए कोच

 इंदौर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने अब इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन को 16 कोचों के साथ चलाने का फैसला किया है. मुंबई से सभी नए कोच इंदौर पहुंच चुके हैं और इंदौर रेलवे डिपो में इनके मेंटेनेंस का काम चल रहा है. सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर से यह ट्रेन नए और बढ़े हुए कोचों के साथ चल सकती है. फिलहाल यह ट्रेन 8 कोचों के साथ चल रही है, जिनमें कुल 530 सीटें हैं, लेकिन 16 कोच होने के बाद सीटों की संख्या बढ़कर 1150 से ज़्यादा हो जाएगी, जिससे यात्रियों को सुविधा होगी.रतलाम मंडल इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को अपग्रेड करने के साथ ही इसे अब आठ की जगह 16 कोच के साथ चलाएगा। इसके लिए पिछले सात से आठ दिन पहले मुंबई के वाड़ी बंदर डिपो से 16 रैक इंदौर आ चुके हैं, जिनका रखरखाव का कार्य इंदौर रेलवे डिपो पर जारी है। फिलहाल ये 16 रैक लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं। रतलाम मंडल के एक वरिष्ठ ने बताया कि संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलेगी। सात वंदे भारत ट्रेनों में कोच बढ़ाने का फैसला इंदौर से भोपाल होकर नागपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड की कमेटी ने लिया है। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और सीटों की भारी मांग को देखते हुए ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ने की तैयारी चल रही है। रेलवे बोर्ड कमेटी ने पिछले दिनों वंदे भारत ट्रेन की ऑक्यूपेंसी (ट्रेन में कितनी सीटें भरी हुई हैं) और यात्रियों की मांग के संबंध में सभी जोन और मंडलों से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद देशभर में चल रही सात वंदे भारत ट्रेनों में कोच बढ़ाने का फैसला लिया गया था। 52 सीटें एक्जीक्यूटिव और शेष चेयरकार कोच में रतलाम रेलवे मंडल से मिली जानकारी के अनुसार मंडल ने बढ़ती संख्या में यात्रियों और टिकट की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया था। वर्तमान में इंदौर-नागपुर वंदे भारत आठ कोच की है, जिसमें कुल 530 सीटें हैं। इसमें 52 सीटें एक्जीक्यूटिव क्लास और शेष चेयरकार कोच में हैं। नए सिरे से कर रहे रखरखाव रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले सात से आठ दिन पहले सेंट्रल रेलवे के तहत आने वाले मुंबई के वाड़ी बंदर डिपो से वंदे भारत के लिए 16 रैक आ चुके हैं, जो फिलहाल लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन के तीन नंबर प्लेटफार्म के पास वाले ट्रैक पर खड़े हैं। इन रैक का नए सिरे से रखरखाव कर रहे हैं। 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन इंदौर-नागपुर के पुराने आठ कोच को कहां भेजा जाएगा, इस विषय पर रेलवे बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलेगी। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड कमेटी ने लिया है। कोच संख्या आठ बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। 8 कोच कहां भेजेंगे, इस पर निर्णय नहीं वर्तमान में इंदौर-नागपुर के पुराने 8 कोच को कहां भेजा जाएगा, इस विषय पर रेलवे बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलना शुरू हो जाएगी। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड कमेटी ने लिया है। कोच संख्या आठ बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। 1150 से अधिक होगी सीटों की संख्या इंदौर-भोपाल वंदे भारत 8 कोच की है, जिसमें कुल 530 सीटें हैं। इसमें 52 सीटें एक्जीक्यूटिव क्लास में और शेष चेयरकार कोच में हैं। सी-1 और सी-7 कोच में कुल 88 सीटें हैं। सी-2 से सी-6 तक के पांच कोच में प्रत्येक कोच में 78 सीटें हैं, कुल 390 सीटें। बी-1 कोच (एक्जीक्यूटिव क्लास) में 52 सीटें हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, कोच संख्या बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसके बाद इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। इन रूटों पर कोच का अपग्रेडेशन मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, सिकंदराबाद-तिरुपति, चेन्नई एग्मोर-तिरुनेलवेली, मदुरै-बेंगलुरु कैंट, देवघर-वाराणसी, हावड़ा-राउरकेला, इंदौर-नागपुर। पश्चिम मध्य रेल के यात्रियों को भी मिलेगा लाभ पश्चिमी मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस (20911/12) में कोच की संख्या बढ़ने से इस मार्ग पर अधिक सीटें उपलब्ध होंगी। इसका सीधा लाभ भोपाल, नर्मदापुरम और इटारसी के यात्रियों को भी मिलेगा। इस विस्तार से न केवल वेटिंग लिस्ट कम होगी, बल्कि यात्रियों का सफर भी और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। यह दिखाता है कि वंदे भारत एक्सप्रेस अब सिर्फ अपनी गति और तकनीक के लिए ही नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरतों के अनुसार लगातार बेहतर होती सुविधाओं के लिए भी जानी जाती है। 27 जून से हुई थी इंदौर-भोपाल ट्रेन की शुरुआत इंदौर और भोपाल के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत 27 जून को हुई थी। ट्रेन इंदौर से भोपाल तक के सफर में सिर्फ उज्जैन में 5 मिनट के लिए रुकती है। इससे पहले इंदौर-भोपाल के बीच सबसे तेज़ ट्रेन इंदौर–जबलपुर एक्सप्रेस थी, जो 3 घंटे 55 मिनट में यह दूरी तय करती थी। रेल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत के एक महीने में इस ट्रेन में औसतन रोजाना 75 फीसदी सीटें खाली रहीं। केवल 25 फीसदी यात्रियों के साथ ही ट्रेन का संचालन हुआ। रेल अधिकारियों ने यात्रियों की कम संख्या को लेकर इसका रिव्यू भी किया। ट्रेन का नियमित संचालन 28 जून से शुरू हुआ, जिसके बाद यात्रियों ने पूरी सीट क्षमता के साथ सफर किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आग्रह पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ट्रेन को नागपुर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके बाद इंदौर–भोपाल वंदे भारत अब नागपुर तक चलने लगी है। इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में कोच बढ़ाने के मामले में 16 रैक मिल चुके हैं। इन कोच का रखरखाव इंदौर रेलवे डिपो में जारी है। इंदौर-नागपुर वंदे भारत में कुल 90 फीसदी और कुछ सेक्शन में 100 प्रतिशत आक्यूपेंसी है। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच … Read more

गोल्फ कार्ट सेवा, किराया तय इस महीने से वन विहार में निजी वाहनों की एंट्री बंद, गोल्फ कार्ट सेवा से होगी सुविधा

भोपाल  राजधानी भोपाल स्थित नेशनल पार्क वन विहार में अब आप अपना निजी वाहन लेकर प्रवेश नहीं कर पाएंगे। वन विभाग इसी महीने निजी वाहनों पर रोक लगा देगा। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। दरअसल वन विहार नेशनल पार्क को पॉल्यूशन फ्री करने की तैयारी की जा रही है। वन विहार के अधिकारियों के अनुसार यहां पर अब 40 गोल्फ कार्ट चलाया जाए। जिनका पर्यटकों से 50 से 60 रुपए तक किराया वसूला जाएगा। जानकारी के लिए बतादें कि वन विहार नेशनल पार्क नेट जीरो पॉल्यूशन वाला प्रदेश का पहला नेशनल पार्क बनने जा रहा है।    जानवरों के प्रजनन क्षमता पर पड़ता है असर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निजी वाहनों की तेज रफ्तार और हॉर्न की आवाज से जानवरों के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है। जिससे उनके प्राकृतिक रहवास में भी व्यवधान होता है। वाहनों के शोर की वजह से वन जीवों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे वो तनाव ग्रस्त होते हैं और इसका असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। इसीलिए अब वन विहार में पेट्रोल-डीजल वाले निजी वाहनों में प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि वन विहार में सिंगल यूज पालीथिन और प्लास्टिक बोतलें पहले से प्रतिबंधित है। पर्यटक यहां खाने-पीने का सामान नहीं ले जा सकते हैं। अब वन विहार में वन्य प्राणियों और परिसर में निकलने वाले कचरे का 100 प्रतिशत निष्पादन किया जाएगा।  मुख्यमंत्री करेंगे गोल्फ कार्ट का शुभारंभ  वन विहार के 40 ई गोल्फ कार्ट का संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक बाइक और साइकिल भी वन विहार की सफारी के लिए पर्यटकों को दी जाएगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गोल्फ कार्ट वन विहार में चलने को तैयार है। इसके शुभारंभ के लिए सीएम डॉ.मोहन यादव से समय मांगा गया है। संभवतः सितंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में ई गोल्फ कार्ट को सीएम डॉ. यादव हरी झंडी दिखा सकते हैं। वन विहार की असिस्टेंट डायरेक्टर डायरेक्टर डॉ.रुही हक ने बताया कि विभाग वन विहार में पेट्रोल-वाहनों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहा है। लेकिन इससे नेशनल पार्क में पर्यटकों की संख्या प्रभावित न हो और उन्हें मामूली शुल्क में सफारी कराई जा सके। इसके लिए गोल्फ कार्ट मंगवाए गए हैं। पर्यटकों के लिए ऐसी रहेगी व्यवस्था डॉ.रुही हक ने बताया कि पर्यटकों को एक ही स्थान पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए गोल्फ कार्ट का संचालन ऐसे किया जाएगा, जिससे हर 10 मिनट में वन विहार के सभी बाड़े के सामने गोल्फ कार्ट पहुंच सके। वन विहार में 4 पहिया वाहनों से आने वाले पर्यटकों के लिए गेट नंबर दो पर पार्किंग बनाई जा रही है। जबकि दो पहिया वाहन चालकों के लिए एक और दो दोनों गेट पर पार्किंग स्थल बनाया जा रहा है। पर्यटकों को पार्किंग स्थल के सामने से ही नेशनल पार्क की सफारी के लिए गोल्फ कोर्ट मिलेंगे। 

प्राकृतिक खेती से सजेगा नर्मदा का किनारा, MP सरकार ने बनाई नई कार्ययोजना

 भोपाल  नर्मदा नदी के जल को प्रदूषण से बचाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है। नदी के दोनों किनारों के पांच-पांच किमी तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे कीटनाशक व अन्य रसायनों के नर्मदा नदी में जाने से रोकने में मदद मिलेगी। नदी के दोनों ओर स्थित जनजातीय बहुल क्षेत्र में साल और सागौन का पौधारोपण और जड़ी-बूटियों की खेती को प्राथमिकता दी जाएगी। समृद्ध बायोडायवर्सिटी के संरक्षण व प्रोत्साहन गतिविधियों में वनस्पति शास्त्र और प्राणी शास्त्र के विशेषज्ञों को जोड़ते हुए विविध गतिविधियां संचालित की जाएंगी। नर्मदा तट पर बसे धार्मिक नगरों और स्थलों के आसपास मांस-मदिरा का उपयोग कड़ाई से प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके अलावा अमरकंटक में उद्गम स्थल से दूर भूमि चिह्नित कर सैटेलाइट सिटी विकसित की जाएगी। ड्रोन के जरिए रखी जाएगी नजर बता दें कि बीते दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक समीक्षा बैठक में यह विषय आया था। मुख्यमंत्री ने वन एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाने के निर्देश दिए थे। यही विभाग योजना बनाएगा और क्रियान्वित करेगा। इसके तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए नर्मदा के आसपास चलने वाली गतिविधियों पर सैटेलाइट इमेजरी व ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी नजर रखी जाएगी। एमपी में 1079 किमी लंबी है नर्मदा नदी विभिन्न शासकीय विभागों के साथ स्वयंसेवी संगठनों, आध्यात्मिक मंचों और जनसामान्य की सक्रिय सहभागिता से कार्ययोजना को धरातल पर उतारा जाएगा। मप्र में अमरकंटक से आंरभ होकर खम्बात की खाड़ी(अरब सागर) में मिलने वाली 1312 किलोमीटर लंबी नर्मदा नदी की प्रदेश में लंबाई 1079 किलोमीटर है। नर्मदा के किनारे 21 जिले, 68 तहसीलें, 1138 ग्राम और 1126 घाट हैं। नर्मदा किनारे 430 प्राचीन शिव मंदिर और दो शक्तिपीठ विद्यमान हैं।

2050 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट: एमपी के किसानों को मिलेगा मालामाल होने का मौका

भोपाल मध्यप्रदेश के किसानों की किस्मत संवरनेवाली है। खासतौर पर प्रदेश के 18 जिलों के किसान जल्द ही मालामाल हो सकते हैं। ये जिले कपास उत्पादन में अग्रणी हैं। यहां के कपास किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए धार में पीएम मित्रा पार्क की स्थापना की जा रही है। 2050 करोड़ का यह प्रोजेक्ट कपास उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोल देगा। ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध‍ि पा चुका है। यही वजह है कि इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। वस्त्र उद्योग में निवेश के लिए मध्यप्रदेश सबसे उपयुक्त राज्य साबित हो रहा है। ऐसे में किसानों का कपास न केवल हाथों हाथ बिकेगा बल्कि इसकी कीमत भी अच्छी मिलेगी। राज्य सरकार का दावा है कि कपास आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनकी फसल का दोगुना मूल्य मिलेगा। पीएम मित्रा पार्क प्रोजेक्ट गांव-गांव तक आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और स्थानीय बाजारों से लेकर निर्यात तक नई संभावनाएं पैदा करेगा। प्रदेश के मालवा अंचल के डेढ दर्जन जिलों में सबसे ज्यादा कपास होता है। इनमें प्रमुख रूप से इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी, खण्डवा और बुरहानपुर शामिल हैं। पिछले 3 वर्षों में यहां खासा कपास हुआ है। वर्ष 2022-23 में 8.78 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 6.30 लाख मीट्र‍िक टन और 2024-25 में 5.60 लाख मीट्र‍िक टन कपास उत्पादन हुआ।‍ सीएम डॉ. मोहन यादव बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को धार के पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। इससे मध्यप्रदेश देश की काटन कैपिटल बन जाएगा। कपास उत्पादक किसानों का अंतर्राष्ट्रीय बाजार से सीधा संपर्क हो जाएगा। किसान वैश्व‍िक बाजार से जुड़ जाएंगे। इस तरह धार का पीएम मित्रा पार्क कपास उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोलेगा। धार का पार्क 2158 एकड़ जमीन पर करीब ₹ 2050 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। फर्स्ट फेज के अधोसंरचना विकास के लिए 773 करोड़ रुपए की लागत के टेंडर 30 जून 2025 को जारी किए गए। यह पार्क विश्व स्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां 20 MLD का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 10 MVA का सौर ऊर्जा संयंत्र, पानी और बिजली की पुख्ता आपूर्ति, आधुनिक सड़कें और 81 प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। 18 जिलों की धरती कपास की फसल से लहलहाती बता दें कि मध्यप्रदेश लंबे समय से कपास उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। प्रदेश के करीब 18 जिलों की धरती कपास की फसल से लहलहाती है। करीब 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बोवनी की जाती है। हर साल करीब 24 लाख टन कपास पैदा होता है। 27 हजार 109 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव इतना ही नहीं, देश में जितना ऑर्गेनिक कॉटन पैदा होता है, उसका करीब 40 प्रतिशत अकेले मध्यप्रदेश से आता है। यही वजह है कि वस्त्र उद्योग के लिए मध्यप्रदेश सबसे उपयुक्त गंतव्य साबित हुआ है। इस प्रोजेक्ट के लिए निवेशकों का भरोसा भी साफ दिखाई देता है। अब तक कुल 27 हजार 109 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। पार्क “फार्म से फाइबर, फैक्ट्री से फैशन और विदेश” की संपूर्ण वैल्यू चेन को साकार करेगा। यहां किसानों से प्राप्त कच्चे कपास का उद्योगों में धागा बनेगा, वहीं से वस्त्र-परिधान तैयार होंगे और यही उत्पाद विदेशों तक जाएंगे। इस तरह पूरी वैल्यू चेन एक ही स्थान पर पूरी होगी। पीएम मित्रा पार्क से करीब 3 लाख रोजगार सृजित होंगे। इसमें एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल होंगे। वस्त्र क्षेत्र के बड़े संगठन और उद्योग समूह यहां आकर निवेश की रुचि दिखा चुके हैं। इससे न केवल प्रदेश को औद्योगिक लाभ मिलेगा, बल्कि निर्यात को भी नई दिशा मिलेगी। धार से तैयार वस्त्र और परिधान अब सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचेंगे और मध्यप्रदेश वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

दादा-दादी की संपत्ति पर पोते-पोतियों का अधिकार नहीं, जब तक माता-पिता जीवित हैं – दिल्ली HC

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पोता या पोती अपने माता-पिता के जीवित रहते संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकते हैं। यह आदेश अदालत ने एक सिविल याचिका को खारिज करते हुए दिया, जिसमें याचिकाकर्ता कृतिका जैन ने अपने पिता राकेश जैन और चाची नीना जैन के खिलाफ दिल्ली की एक संपत्ति में एक चौथाई हिस्सेदारी का दावा किया था। न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया कि कृतिका के दावे में कोई कानूनी आधार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कृतिका की दादी-पोती का दर्जा प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी के रूप में नहीं आता, जब तक उसके माता-पिता जीवित हैं। कोर्ट ने कहा कि कृतिका के दिवंगत दादा पवन कुमार जैना की ओर से जो संपत्ति खरीदी गई थी, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा आठ के तहत केवल उनकी विधवा और संतान में ही विभाजित होती है। अदालत ने कहा कि वर्ष 1956 के बाद से प्रथम श्रेणी उत्तराधिकारी की संपत्ति उनका व्यक्तिगत स्वामित्व बन गई है, जो संयुक्त परिवार की संपत्ति नहीं मानी जाएगी। अदालत ने यह भी साफ किया कि यह निर्णय समाज में व्याप्त भ्रांति को दूर करता है, जहां यह माना जाता था कि पोते-पोतियां अपने दादा-दादी की संपत्ति पर माता-पिता के रहते ही हकदार बन जाते हैं।

मुख्यमंत्री साय बोले – प्रदेश की 3 करोड़ जनता के आरोग्य के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का सपना करेंगे पूरा

मानव मुस्कान को सुरक्षित रखने और सहेजने में दंत चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश की 3 करोड़ जनता के आरोग्य के साथ हम विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार करेंगे। पिछले 20 महीनों में प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करते हुए दुर्गम अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का कार्य हमारी सरकार ने किया है। मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित तीन दिवसीय डेंटल कॉन्फ्रेंस 2025 का शुभारंभ कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दंत चिकित्सा और दांतों की देखभाल से जुड़े उपयोगी उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा डेंटल एसोसिएशन की वार्षिक स्मारिका का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार बनने के पहले दिन से ही हमने प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति दी गई है, साथ ही फिजियोथैरेपी, नर्सिंग और मदर-चाइल्ड हॉस्पिटल जैसे संस्थानों की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के साथ ही हम प्रगति की भी बात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2000 में जहां केवल एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज 15 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री वय वंदना योजना से मरीजों और बुजुर्गों को निःशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं, सस्ती जेनेरिक दवाइयां आम जनता को राहत प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पान मसाला, गुटखा और तंबाकू की वजह से मुँह के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि  दाँतों की देखभाल और सुंदर मुस्कान देने में दंत चिकित्सकों की अहम भूमिका है।उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि इस दिशा में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएँ। उन्होंने भावुक होकर अपने संसदीय कार्यकाल की स्मृतियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि 1999 में जब श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, उस समय एम्स दिल्ली पर पूरे देश के मरीजों का दबाव था। तब हमने संसद में निवेदन किया था कि छत्तीसगढ़ में भी एम्स की स्थापना हो। सौभाग्य से 1 नवम्बर 2000 को राज्य गठन के बाद पहली किस्त में छह राज्यों को एम्स की सौगात मिली और छत्तीसगढ़ को भी यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ विजन 2047’ डॉक्यूमेंट तैयार किया और 10 मिशन बनाकर प्रदेश को आगे बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। श्री साय ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश का जीएसडीपी 5 लाख करोड़ है, जिसे वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस दिशा में हम पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से समृद्ध है, मेहनतकश किसान और परिश्रमी जनता इसकी असली ताकत हैं। “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया” की कहावत को दोहराते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश 2047 तक अपने लक्ष्यों को अवश्य प्राप्त करेगा। जीएसटी सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में जीएसटी के स्लैब को 5 और 18 प्रतिशत में एकरूप किया गया है। इससे व्यापार और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा तथा व्यावसायिक गतिविधियाँ सरल होंगी। यह प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि को दर्शाता है, जो भारत को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाएगा। मुख्यमंत्री साय ने अंत में कहा कि “मानव की मुस्कान सबसे कीमती है और उसे सुरक्षित रखने व सहेजने में दंत चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दंत चिकित्सक मुँह और दाँत से जुड़ी बीमारियों पर विस्तृत चर्चा करेंगे और उनके उपचार की दिशा में नए संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और नक्सल प्रभावित व दूरस्थ अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर में 20 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है और यह हमारे प्रयासों का प्रमाण है कि सुकमा जिले के चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र को एनक्यूएएस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति के साथ अब कुल 15 मेडिकल कॉलेज होंगे। इसके अलावा बिलासपुर में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, 12 नए नर्सिंग कॉलेज और पाँच फिजियोथैरेपी कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट और दुर्गम क्षेत्रों के लिए बाइक एम्बुलेंस सेवा शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पूरे देश में सबसे अधिक कैशलेस इलाज सुविधा देने वाला राज्य बन चुका है। कॉन्फ्रेंस में इंडियन डेंटल एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रेसिडेंट डॉ. अरविंद कुमार, पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. राजीव सिंह, कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. वैभव तिवारी सहित बड़ी संख्या में देशभर से आए दंत चिकित्सक उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: विक्रमादित्य थे भारतीय न्याय व्यवस्था के महान पुरोधा

मुख्यमंत्री इंदौर में अखिल भारतीय बैठक में हुए शामिल  इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय न्याय व्यवस्था का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। सम्राट विक्रमादित्य भारतीय न्याय व्यवस्था के महान पुरोधा थे, जिनके निर्णयों की मिसाल आज भी दी जाती है। न्याय के क्षेत्र में उनकी पहचान विश्व स्तर पर अद्वितीय थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में विश्व हिंदू परिषद विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अनेक कानूनों में समयानुकूल बदलाव किए गए हैं, जो समय की आवश्यकता भी थे। न्याय व्यवस्था में मन की पवित्रता और पंचों का निष्पक्ष निर्णय ही असली न्याय है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भारतीय संस्कृति और न्याय परंपरा पर गर्व है और न्यायालयों के निर्णयों का सबको समान रूप से पालन करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में कोलाहल नियंत्रण अधिनियम का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। साथ ही खुले में मांस विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है और उसका भी सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान है और उसके साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लव जिहाद के विषय में स्पष्ट कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा के विरुद्ध है। प्रदेश में लव जिहाद करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि न्याय और कानून व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। समाज के प्रत्येक वर्ग को समान न्याय मिले और जनता को यह विश्वास रहे कि मध्यप्रदेश में कानून सर्वोपरि है। कार्यक्रम को स्वामी जितेंद्रानंद जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक जी, संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन, राष्ट्रीय संयोजक विधि प्रकोष्ठ डॉ. अभिषेक अत्रे एवं विधि प्रकोष्ठ के संरक्षक न्यायमूर्ति व्ही.एस. कोकजे विशेष रूप मौजूद थे।  

रायपुर विशेष: महतारियों के सशक्तिकरण में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापित की एक नई मिसाल

रायपुर स्त्री पुरुष समानता के मामले में छत्तीसगढ़ की मिसाल पूरे देश में रही है लेकिन आर्थिक समानता में फिर भी पुरुषों का पलड़ा अब तक भारी होता था। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी की सरकार आने के बाद इस आर्थिक विषमता को दूर करने का रास्ता भी खुल गया है। अब छत्तीसगढ़ की हर माँ और बहन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है। अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए वे स्वयं निर्णय ले सकती हैं। महतारी वंदन योजना जैसी योजनाएं महिलाओं को उनके श्रम और भागीदारी के लिए सम्मानित करती हैं वहीं साय सरकार की आजीविकामूलक योजनाओं से महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की राह मिली है। आधी आबादी को सशक्त कर मुख्यमंत्री ने विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला रख दी है। छत्तीसगढ़ ने पिछले 19 महीनों में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य के हर मोर्चे पर मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और त्वरित लाभ पहुंचाने की व्यवस्था स्थापित की गई है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। आर्थिक स्वावलंबन – महतारी वंदन योजना आत्मनिर्भर महिला की ओर कदम  1 मार्च 2024 से लागू इस महत्वाकांक्षी योजना ने राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में क्रांति ला दी है। विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जा रहे हैं।मार्च 2024 से सितम्बर 2025 तक 69.15 लाख से अधिक महिलाओं को 12,376.19 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।यह राशि महिलाओं की आत्मनिर्भरता, पोषण और मूलभूत जरूरतों की पूर्ति में सहायक है।चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 5, 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।  179 महतारी सदन के निर्माण के लिए 52.20 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक सदन 2,500 वर्गफुट में 29.20 लाख रुपए की लागत से बनेगा, जो महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, बैठक और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र होगा। स्वरोजगार और उद्यमिता का विस्तार साय सरकार ने महिला श्रमिकों और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं: जिसमें मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को 7,900 रुपए की सहायता एक सिलाई मशीन के लिए दी जा रही है।दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना से 3 वर्ष से पंजीकृत महिला श्रमिकों को 1 लाख रुपए की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि उन्हें पौष्टिक आहार मिल सके। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना ने पंजीकृत श्रमिकों को अपनी 18-21 वर्ष की अविवाहित पुत्रियों के पढ़ाई लिखाई तथा अन्य आवश्यक खर्चों के लिए 20,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त  और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी साय सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसमें महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से  उन्हें बिना जमानत के 25,000 रुपए का ऋण देकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।सक्षम योजना – 2 लाख से कम वार्षिक आय वाली महिलाओं को 3% ब्याज पर 2 लाख रुपए तक ऋण भी दिया जा रहा है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) – 800 करोड़ रुपए का प्रावधान, “लखपति महिला” और “ड्रोन दीदी” जैसी नवाचारी पहलें भी योजनाओं में शामिल है।इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ, उन्हें रोजगार के स्थायी अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं। साय सरकार ने महिला सुरक्षा को नीति के केंद्र में रखा है। नवाबिहान योजना से घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा, परामर्श और आश्रय सुविधा प्रदान की जाती है।इसके लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ सखी वन-स्टॉप सेंटर में SOP लागू करने वाला देश में पहला राज्य बन गया है। 27 जिलों में सेंटर संचालित, 24×7 सेवा उपलब्ध है।महिला हेल्पलाइन 181 और डायल 112 द्वारा संकट में फंसी महिलाओं को त्वरित सहायता और पुलिस समन्वय की सुविधा प्रदान की जाती है।  शुचिता योजना के तहत 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीनें, 3 लाख से अधिक किशोरियों को स्वच्छता सामग्री प्रदान की जा रही है जिसके लिए 13 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान है।हाई स्कूल छात्राओं के लिए साइकिल वितरण योजना के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान है।  गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य पूरक और पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।   नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है,जहाँ महिला समूहों के उत्पादों की बिक्री होगी।जशप्योर ब्रांड  जशपुर जिला में निवासरत आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित वन-आधारित उत्पाद है,जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहचान बना रहा है, साथ ही“वोकल फॉर लोकल” का सफल उदाहरण भी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महिला एवं बाल विकास विभाग को 8,245 करोड़ रुपए का बजट आबंटित किया गया है। इसमें महतारी वंदन, पोषण, स्वास्थ्य, ऋण और सुरक्षा योजनाओं का विस्तार शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर वास्तविक बदलाव लाने से संभव है। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हर योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर और पारदर्शी ढंग से पहुँचे।     डॉ. दानेश्वरी संभाकर     सहायक संचालक

समाज में अनुशासन लाने में संत, महात्मा और मुनियों का अहम योगदान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

समाज में अनुशासन लाने में संत, महात्मा और मुनियों का अहम योगदान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव डॉ. यादव के अनुसार समाज को अनुशासित करने में संत-महात्माओं की महत्वपूर्ण भूमिका मुख्यमंत्री ने इंदौर में जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के अधिवेशन में की सहभागिता इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज को अनुशासित रखने में संत महात्माओं और मुनियों की महती भूमिका रही है। धर्म गुरुओं के संदेश, उपदेशों से भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में आयोजित जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के 14 वें अधिवेशन एवं श्रीसंघ मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रदेश में "सेवा पखवाड़ा अभियान" शुरू किया जा रहा है। अभियान सभी जिलों में विभिन्न गतिविधियाँ और कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने सभी से अभियान में सहभागिता का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्योग विकास, निवेश और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। गौमाताओं, गौशालाओं का संरक्षण, दुग्ध संघ के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में बेहतर कार्य हुए हैं। इन सब प्रयासों से प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहा है। संघ मिलन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आचार्य विश्वरत्न सागर का शुभाशीष प्राप्त किया। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंगल कलश और शुभ अक्षतों की वर्षा कर स्वागत किया गया। इस दो दिवसीय समारोह में अन्य राज्यों व जिलों से धर्मावलंबी शामिल हुए। इस दौरान आचार्य विश्वरत्न सागर ने आशीष वचनों से उपस्थितजन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के मुखिया अपने सरल, सहज और समन्वय भाव से प्रदेश को विकास की ओर ले जा रहे हैं। नए उद्योग और रोजगार, धार्मिक न्यास को लेकर प्रदेश में जो कार्य हुए है वे अतुल्यनीय है। सरकार ने जन हितैषी कार्यों बढ़ावा दिया है। समारोह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड़, मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, श्वेतांबर मालवा महासंघ के पदाधिकारी, सदस्य, एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: पर्यटन को नई पहचान दिलाने के लिए जारी हैं सतत प्रयास

प्रदेश में पर्यटन को नई पहचान दिलाने हो रहे हैं निरंतर कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चंबल नदी में बोटिंग कर जेट स्काय की सवारी की गांधी सागर के प्राकृतिक सौंदर्य का लिया आनंद गांधीसागर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को गांधीसागर में चंबल नदी के अद्भुत और आकर्षक प्राकृतिक नजारे का अनुभव करते हुए बोटिंग की। बोट में बैठकर उन्होंने नदी की मनोहारी छटा को निहारा और इस मनमोहक सफर का आनंद लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन को नई पहचान दिलाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। चंबल नदी क्षेत्र में विकसित हो रही पर्यटन गतिविधियाँ न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करेंगी बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगी। बोटिंग के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चंबल नदी में जेट स्काय की सवारी भी की। पानी की लहरों पर बाइक बोट चलाते हुए मुख्यमंत्री अत्यंत प्रसन्नचित और उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल पर्यटन को बढ़ावा देंगी बल्कि प्रदेश की प्राकृतिक धरोहरों को देखने-समझने का नया अवसर भी प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सफारी जीप में बैठकर टेंट सिटी का भी अवलोकन किया और यहां की पर्यटन सुविधाओं एवं आकर्षक व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ सांसद सुधीर गुप्ता, गरोठ विधायक चंदर सिसोदिया, कमिश्नर आशीष सिंह, आईजी उमेश जोगा, कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीणा सहित पर्यटक मौजूद रहे।