samacharsecretary.com

AIIMS भोपाल में शुरू हुई अत्याधुनिक छाती कैंसर इलाज सुविधा, मरीजों को अब लंबा सफर नहीं

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के सर्जिकल आंकोलाजी विभाग में अब विशेष रूप से छाती के कैंसर (फेफड़ों और भोजन नली) के इलाज के लिए एक 'समर्पित थोरासिक आंकोलाजी सुविधा' शुरू की गई। अब मध्य भारत के कैंसर रोगियों के लिए यह सुविधा मिलती रहेगी, अब इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस नई सुविधा की शुरुआत के साथ ही एक बेहद जटिल आपरेशन को अंजाम दिया गया है। डॉक्टरों ने एक मरीज की भोजन नली (इसोफेगस) के कैंसरग्रस्त हिस्से को निकाला। इसके बाद पेट के एक हिस्से से एक नई नली बनाकर उसे गले तक जोड़ा गया। यह पूरी सर्जरी दूरबीन और कैमरे वाली अत्याधुनिक थोरोस्कोपिक और लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मरीज को बड़े चीरे नहीं लगाए जाते, जिससे दर्द कम होता है और वह जल्दी ठीक हो पाता है। एम्स भोपाल का सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग पहले से ही मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के लगभग 20 हजार कैंसर मरीजों का हर साल इलाज करता है। अब तक छाती से जुड़े जटिल कैंसर के ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और मुश्किल होता था। अब यह विश्वस्तरीय सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से हजारों मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। विशेषज्ञ नेतृत्व और मजबूत टीम इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व प्रो. डॉ. माधवानंद कर रहे हैं, जो न केवल एक बेहतरीन सर्जन हैं, बल्कि एक कुशल शिक्षक भी हैं। उन्होंने देश के कई एम्स संस्थानों का मार्गदर्शन किया है और लगातार युवा डाक्टरों को प्रशिक्षित करते रहते हैं। उनके नेतृत्व में डॉ. विनय कुमार (विभागाध्यक्ष, सर्जिकल आंकोलाजी), डॉ. अंकित, डॉ. वैशाली, डॉ. जैनब और डॉ. शिखा सहित एक विशेषज्ञ टीम ने पहली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।

प्लास्टिक से डीजल! मध्य प्रदेश में शुरू होगी खास तकनीक, कचरा नहीं जलेगा बल्कि पिघलकर बनेगा ईंधन

शिवपुरी  कचरे में मौजूद प्लास्टिक से पायरोलिसिस प्रक्रिया को अपनाकर डीजल बनाने का प्लांट शहर में लगाया जाएगा। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा प्लांट होगा, जहां प्लास्टिक से डीजल बनेगा। यह प्लांट शिवपुरी में लगाया जाएगा जिसके लिए टेंडर रविवार को खुलेंगे। सबकुछ सही रहा तो 3-4 माह में प्लांट शुरू हो जाएगा। अभी तक देश में इस तरह के 3-4 प्लांट हैं। ऐसा ही प्लांट उत्तरप्रदेश के मथुरा में है। शिवपुरी का प्लांट पीपीई मोड पर होगा। नगर पालिका के बड़ौदी स्थित ट्रेंचिंग गाउंड में फर्म को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को कम से कम 15 साल के लिए प्लांट चलाने की शर्त होगी। प्लांट लगाने में 3-4 करोड़ खर्च होंगे। कंपनी अपना लाभ निकालने के साथ ही नगर पालिका को भी तय रकम हर माह या सालाना देगी। इस डीजल का प्रयोग वाहनों में कम, बल्कि जनरेटर और हैवी मशीनरी को चलाने में ज्यादा किया जाता है। इस तरह तैयार होगा डीजल प्लास्टिक कचरे को रियक्टर में 350 से 450 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है। इसमें हाइड्रो कार्बन बनते हैं। इससे पेट्रोल, डीजल व कार्बन गैस का उत्पादन होता है। एक टन प्लास्टिक कचरे से 150 से 200 लीटर डीजल बन सकता है। यह हैं तकनीक के अविष्कारक मेट्रो अटलांटा के 21 वर्षीय अश्वेत आविष्कारक जूलियन ब्राउन ने प्लास्टोलाइन नामक तकनीक विकसित की है, जो माइक्रोवेव पायरोलिसिस का उपयोग कर सौर ऊर्जा से चलने वाला रिएक्टर है। यह प्लास्टिक कचरे को गैसोलीन, डीजल व जेट ईंधन जैसे ईंधन में परिवर्तित करता है। नगर पालिका स्वास्थ्य अधिकारी योगेश शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक से पायरोलिसिस प्रक्रिया के तहत डीजल बनाने का प्लांट जल्द लगेगा। इसमें दो-तीन फर्म ने रुचि दिखाई है। केले के छिलके और प्लास्टिक के कचरे से बनेंगे डीजल वैज्ञानिकों ने कमाल का काम किया है। जिस केले के छिलके और प्लास्टिक के कचरे को कम फेक देते थे, उनसे यहां के वैज्ञानिकों ने डीजल बनाने का तरीका खोज निकाला है। यह डीजल सस्ता होगा। साथ ही पर्यावरण के लिए भी अच्छा होगा। इसके लिए वैज्ञानिकों ने को-पैरोलीसिस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इससे बायोडीजल तैयार होगा। डीजल वाहनों में अच्छे से काम करेगा वैज्ञानिकों का दावा है कि यह बायो-डीजल, डीजल वाहनों में भी अच्छे से काम करेगा। यह खोज कचरे को उपयोगी बनाने के लिए की गई है। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन को इससे आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ने की खोज यह रिसर्च आइसर भोपाल के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शंकर चाकमा के नेतृत्व में हुई। उनके साथ बबलू अलावा और अमन कुमार ने भी इस रिसर्च में भाग लिया। वैज्ञानिकों ने केले के छिलके और प्लास्टिक कचरे को 25:75 के अनुपात में मिलाया। फिर उन्होंने इसे एक खास तापमान पर गर्म करके पायरो-ऑयल (तरल ईंधन) प्राप्त किया। ऐसे होगा इस्तेमाल रिसर्च में पता चला कि इस ईंधन को डीजल के साथ 20 प्रतिशत तक मिलाकर गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस रिसर्च को जर्नल ऑफ द एनर्जी इंस्टीट्यूट और एनर्जी नेक्सस में भी छापा गया है। रिसर्च करने वालों के अनुसार, एक किलोग्राम केले के छिलके और प्लास्टिक कचरे से लगभग 850 ग्राम तरल पदार्थ, 140 ग्राम गैस और 10 ग्राम चारकोल मिलता है। गैस का इस्तेमाल खाना बनाने में किया जा सकता है, जबकि चारकोल का इस्तेमाल पानी को साफ करने के लिए किया जा सकता है। तरल ईंधन को डीजल के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। क्या होता है पायरो आयल वहीं, यह जो पायरो-आयल है, उसमें कई तरह के हाइड्रोकार्बन होते हैं। जैसे कि ओलेफिन, पैराफिन, एरोमैटिक्स, एस्टर और अल्कोहल। इसमें लगभग 12 प्रतिशत ऑक्सीजन वाले यौगिक और लंबी श्रृंखला वाले एस्टर भी पाए जाते हैं। इससे इसकी ऊष्मा (हीट) देने की क्षमता लगभग 55 मेगाजूल प्रति किलोग्राम तक बढ़ जाती है। यह सामान्य डीजल से कहीं ज्यादा गर्मी देता है।इसके अलावा, यह ईंधन ठंडे मौसम में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि इसका पोर पाइंट -25 डिग्री सेल्सियस तक है. साथ ही, इसका फ्लैश पाइंट भी 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पाया गया है, जिससे यह ज्यादा सुरक्षित भी है। ईंधन की खपत कम हुई इस वैकल्पिक ईंधन को डीजल इंजनों में भी टेस्ट किया गया। टेस्ट में पाया गया कि इससे ईंधन की खपत कम हुई और बीटीई (ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी) में भी काफी सुधार हुआ। इससे यह साबित होता है कि यह ईंधन डीजल से न केवल सस्ता है, बल्कि प्रदर्शन के मामले में भी बेहतर है।

आरा से बड़ा तोहफा: बिहार सरकार करेगी 1 करोड़ युवाओं को रोजगार मुहैया

आरा बिहार के विकास में केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है। जुलाई 2024 के बजट में विशेष आर्थिक सहायता के रूप में सड़क, उद्योग, स्वास्थ्य, पर्यटन, बाढ़ नियंत्रण, के साथ-साथ मखाना कारखाने की स्थापना, खेलो इंडिया समेत अन्य कार्यों के लिए पूरी राशि मिल रही है। इस तरह से एक तरफ जहां विकास का कार्य तेज गति से हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने की योजना है। उक्त बातें भोजपुर जिले के उच्च विद्यालय जगदीशपुर मैदान में शनिवार को आम लोगों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कही। वे परिभ्रमण यात्रा में बक्सर के बाद भोजपुर के बिहिया और जगदीशपुर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। उनके साथ उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी भी थे। 'अब नहीं जाएंगे' मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से भाजपा और जेडीयू मिलकर तेजी से बिहार का विकास कर रही है, पहले की सरकार विकास करने के बदले केवल गड़बड़ करती थी, हम भी गलती से दो बार उधर चले गए, अब नहीं जाएंगे। 2020 में हमने 10 लाख नौकरी और 10 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, उसे पूरा करते हुए उससे भी ज्यादा 29 लाख लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार अब तक दिया जा चुका है। विपक्ष के लोगों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि 2005 के पहले शाम ढलते ही कोई डर से निकलता नहीं था और ना पहले रोड, रास्ता, स्वास्थ्य, बिजली व शिक्षा की स्थिति ठीक थी। योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री ने 754 करोड़ की लागत से 432 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास बिहिया तथा जगदीशपुर में किया। सीएम सबसे पहले बिहिया चौरास्ता कार्यक्रम स्थल पहुंचे। वहां पर लगभग तीन सौ करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने के बाद जगदीशपुर के नयका टोला बस पड़ाव मैदान पर मुख्यमंत्री ने 454 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास रिमोट दबाकर किया। जगदीशपुर में योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास के पहले प्रांगण में लगाए गए 10 स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान वे जीविका, समाज कल्याण, ऊर्जा, उपभोक्ता संरक्षण, कृषि, डीआरडीओ, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, गृह, आपदा और पंचायती राज विभाग के स्टाल का निरीक्षण करते हुए लाभुकों से मिलते हुए उनका अभिवादन स्वीकार किया और कई स्टाल पर योजनाओं का फीडबैक लिया।

कांग्रेस में हलचल: बीड़ी-बिहार मामले पर केरल इकाई के सोशल मीडिया प्रमुख का इस्तीफा

नई दिल्ली मोदी सरकार द्वारा जीएसटी की दरों में बदलाव करने के बाद कांग्रेस की केरल इकाई के सोशल मीडिया अकाउंट से बीड़ी और बिहार को जोड़ने वाला पोस्ट किया गया था। इस पोस्ट पर खूब बवाल मचा था। विपक्षी दलों ने इसके लिए कांग्रेस की जमकर आलोचना की थी। विवाद के बाद अब केरल कांग्रेस के सोशल मीडिया हेड वीटी बलराम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वीटी बलराम केरल की थ्रीथला विधानसभा सीट से दो बार के विधायक रहे हैं। पहले केरल प्रदेस कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया का जिम्मा डॉ. पी. सरीन के संभाल रहे थे। लेकिन उनके सीपीआई(एम) में शामिल होने के बाद बलराम को यह जिम्मेदारी मिली थी।   केरल कांग्रेस ने किया था पोस्ट जीएसटी काउंसिल की तरफ से बीड़ी पर लगने वाले 28 फीसदी टैक्स को घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया था। जबकि इसके उलट सिगरेट पर टैक्स बढ़ाया गया था। इस बढ़े हुए टैक्स को सिन टैक्स (पाप के लिए टैक्स) नाम दिया गया। इसी विषय पर केरल कांग्रेस के एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया गया था। पोस्ट में लिखा था कि बीड़ी और बिहार दोनों बी से शुरू होते हैं। अब इसे पाप नहीं माना जा सकता। लेकिन विवाद के बाद पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। एनडीए के नेताओं ने इसे लेकर कांग्रेस पर बिहार का अपमान करने का आरोप लगाया। यहां तक कि कांग्रेस के सहयोगी दल राजद ने भी खुद को इससे अलग कर लिया। आक्रोश देख केपीसीसी ने माफी मांगी। नई पोस्ट में कहा गया कि हमारे तंज को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और अगर किसी को ठेस पहुंची है तो हम क्षमा चाहते हैं। माफी के बाद अब केपीसीसी के सोशल मीडिया हेड का इस्तीफा भी हो गया है। बता दें कि बीड़ी पर 18 फीसदी और बीड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेंदू के पत्तों पर 5 फीसदी टैक्स लगाया गया है। बीड़ी उत्पादन में बिहार का अहम योगदान है और इस उद्योग से लगभग 70 लाख लोग जुड़े हुए हैं।  

बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर: CM यादव ने तुरंत भेजे 20 करोड़ रुपए

भोपाल मध्यप्रदेश की सरकार हर संकट में किसानों के साथ खड़ी है। इस स्पष्ट संदेश के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6 सितंबर को अतिवृष्टि-बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए राहत राशि का वितरण किया। उन्होंने एक क्लिक के माध्यम से किसानों को 20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। मध्यप्रदेश सरकार साल 2025-26 तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये आपदा प्रभावित लोगों को ट्रांसफर कर चुकी है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इन दिनों मौसम असंतुलित हो गया है। इसलिए सरकार किसानों की हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की मुस्कान ही राज्य की ताकत है। गौरतलब है कि सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से कई जिलों के किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की। उन्होंने किसानों से उनका हालचाल जाना और सरकार का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में मौसम की मार से परेशानी आई है। इस परेशानी का सरकार ने समाधान कर दिया है। खेतों में किसान और सीमा पर जवान दोनों आंधी-तूफान और कष्टों के बीच अपनी मौजूदगी से, मेहनत से, जान की बाजी लगाकर देश के लोगों की सेवा करते हैं। प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत ज्यादा बारिश हुई और कहीं-कहीं कम बारिश भी हुई। इस असंतुलन की कीमत हमें थोड़ी-थोड़ी चुकानी पड़ रही है। सरकार हर परेशानी में किसान के साथ है। हमारी सरकार बाढ़ के दौरान भी जनता के बीच गई। सरकार किसानों के हर संकट में साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को सरकार पर पूरा भरोसा सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज 11 जिलों के 12 हजार हेक्टेयर से ज्यादा बड़े क्षेत्र में 17500 भाई-बहनों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 20 करोड़ रुपये की राशि दे रहे हैं। किसान हमारी सरकार पर पूरा भरोसा करता है। किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। उनके नेतृत्व में हमारी सरकार लगातार जनकल्याण के काम कर रही है। इससे पहले हमने 30 करोड़ की राहत राशि ट्रांसफर की थी। 2025-26 में अभी तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। मिलकर आपदा से मुकाबला करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं हर किसान को आश्वासन देना चाहता हूं कि संकट की घड़ी में हमारी सरकार सदैव आपके साथ खड़ी है। किसानों की मुस्कान ही मध्यप्रदेश की ताकत है। किसान अपनी मेहनत से एक फिर जीवन के मैदान में उतरेंगे। हमें आशा है कि अगली फसल इस नुकसान की भरपाई कर देगी। हम सब मिलकर इस आपदा से मुकाबला करेंगे। किसान कभी हार नहीं मानता, वह जीवटता के साथ आने वाले कल की तैयारी करता है। आइए हम सब मिलकर एक बार फिर कामना करें कि एक बार फिर धरती माता हमारे अन्न के भंडार भरेगी।

एम्स रायपुर में ‘देव हस्त’ रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का मुख्यमंत्री साय ने किया शुभारंभ

रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित टाटीबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मध्य भारत के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों के प्रथम रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम ‘देव हस्त’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “रोबोटिक सर्जरी छत्तीसगढ़ में चिकित्सा सुविधाओं के विकास में एक नया आयाम है। यह ऐतिहासिक क्षण प्रदेश की जनता को अत्याधुनिक और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।” मुख्यमंत्री  साय ने स्वयं ‘देव हस्त’ पर पहला ड्राई लैब डिसेक्शन कर इस अत्याधुनिक तकनीक की औपचारिक शुरुआत की। यह सिस्टम मध्य भारत के किसी शासकीय स्वास्थ्य संस्थान में स्थापित होने वाला पहला रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर एम्स रायपुर में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भर्ती होने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा हेतु एम्स रायपुर में सर्व-सुविधायुक्त परिजन निवास निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि “डॉक्टरों को धरती पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वे हमें जीवन प्रदान करते हैं। आज जिस रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का शुभारंभ हो रहा है, उसे ‘देव हस्त’ नाम दिया गया है। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि एम्स रायपुर में भर्ती होने वाले अन्य राज्यों के मरीजों को भी मिलेगा। एम्स रायपुर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगातार मील का पत्थर साबित हो रहा है।” मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एम्स रायपुर से मुझे विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि “जब रायपुर एम्स के निर्माण को स्वीकृति मिली, उस समय मैं सांसद था और प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी से छत्तीसगढ़ में एम्स की शाखा स्थापित करने का आग्रह किया था। यह आवश्यक था ताकि दिल्ली स्थित एकमात्र एम्स पर मरीजों का दबाव कम हो और अन्य राज्यों के लोगों को भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उनके राज्य में ही उपलब्ध हो। हमारा सौभाग्य है कि जिन छह राज्यों में एम्स स्थापित करने की स्वीकृति मिली, उनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल था।” मुख्यमंत्री  साय ने परिजन निवास की घोषणा करते हुए कहा कि “दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा कितनी आवश्यक है, यह मैं भली-भांति समझता हूं। सांसद रहते हुए दिल्ली स्थित मेरे आवास को लोग ‘मिनी एम्स’ कहते थे क्योंकि वहां मैं मरीजों के परिजनों की रुकने की व्यवस्था करता था। जनसेवा का यह कार्य मेरे दिल के बेहद करीब है। 2014 से 2019 के संसदीय कार्यकाल में मैंने लगभग 12 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष से मरीजों को दिलवाए थे। रायपुर में भी कुनकुरी सदन में मरीजों के परिजनों की व्यवस्था की गई है, जिसका लाभ पूरे प्रदेश के लोग उठाते हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 20 महीनों में सरकार बनने के बाद राज्य में पाँच नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति मिली है और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में 5,000 बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। उन्होंने कहा कि जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में वृद्धि हुई है और इनका इलाज भी महंगा होता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना प्रारंभ की, जिसके अंतर्गत गरीब वर्ग के लोगों को पाँच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध है। अब वय वंदन योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वर्गों के मरीजों को भी यह सुविधा प्रदान की जा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि समय के साथ जहाँ चिकित्सा सुविधाएँ बढ़ रही हैं, वहीं बीमारियों का दायरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोबोटिक सर्जरी का विशेष महत्व है। इसके माध्यम से चिकित्सकीय क्षमता और गुणवत्ता में कई गुना वृद्धि की जा सकती है। छत्तीसगढ़ को ‘देव हस्त’ रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का अत्यधिक लाभ मिलेगा और शीघ्र ही राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।” इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने ‘देव हस्त’ के नामकरण हेतु आयोजित प्रतियोगिता की विजेता सुश्री ज्योत्स्ना किराडू को पाँच हजार रुपये की पुरस्कार राशि भेंट की। कार्यक्रम में एम्स रायपुर के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) डॉ. अशोक जिंदल, विभागाध्यक्ष डॉ. देवज्योति मोहंती, बड़ी संख्या में चिकित्सा छात्र और गणमान्यजन उपस्थित थे।  

पावागढ़ शक्तिपीठ त्रासदी: रोपवे गिरा, 6 श्रद्धालुओं की जान गई

नई दिल्ली गुजरात के पंचमहल में शनिवार बड़ा हादसा हो गया। मध्य गुजरात के प्रसिद्ध शक्तिपीठ पावागढ़ में एक माल रोपवे का तार टूटने से 6 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इस रोपने का इस्तेमाल पावागढ़ के मांची इलाके से निज मंदिर तक निर्माण सामग्री को आसानी से पहुंचाने के लिए किया जाता था। शनिवार को भी रोपवे से सामान ले जाया जा रहा था। लेकिन इसी दौरान तार टूट गया और हादसा हो गया। इस घटना में दो लिफ्ट ऑपरेटर, दो मजदूर और दो अन्य लोगों की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। राहत और बचाव का कार्य किया जा रहा है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। बता दें कि यह शक्तिपीठ मध्य गुजरात में स्थित है।  

ड्रग माफिया पर बड़ी कार्रवाई, मुंबई में 12 गिरफ्तार और 12 हजार करोड़ का खुलासा

मुंबई  मुंबई से सटे मिरा-भायंदर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए हैदराबाद में चल रही अब तक की सबसे बड़ी एमडी ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस फैक्ट्री से 32,000 लीटर ड्रग्स का कच्चा माल, खतरनाक केमिकल, और मशीनें भी जब्त की है। बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा जब्त की गई इस खेप की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में करीब 12 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। 12 हजार करोड़ का माल बरामद पुलिस ने दावा किया है कि ड्रग्स का ये बड़ा नेटवर्क महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से ऑपरेट किया जा रहा था। इस नेटवर्क का पर्दाफाश होने से देश भर में ड्रग्स की सप्लाई चेन को तगड़ा झटका लगेगा। बता दें कि पुलिस मिरा रोड में दर्ज एक मामले की जांच में जुटी थी, महज 25 लाख कीमत के 200 ग्राम ड्रग्स की जड़ें जब खंगाली गई तो पुलिस इसके सुराग तलाशते हुए हैदराबाद की इस फैक्ट्री तक जा पहुंची और 32 हजार लीटर का कच्चा माल आदि बरामद किया। पुलिस ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 12 हजार करोड़ रुपए है। फल बेचने की आड़ में तस्‍करी मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कुछ दिनों पहले बांद्रा इलाके में केले बेचने की आड़ में ठेले पर एमडी ड्रग्स बेचने के आरोप में एक बुजुर्ग को गिरफ्तार किया है. इस आरोपी की पहचान 60 वर्ष के मोहम्मद अली अब्दुल गफ्फार शेख के रूप में हुई है और आरोपी के पास से 35 लाख रुपये कीमत की 153 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद हुई है. इसके बाद मोहम्मद अली अब्दुल के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लियागया था. नेवी को मिली थी बड़ी सफलता इस साल भारतीय नौसेना के अग्रणी युद्धपोत आइएनएस तरकश ने पश्चिमी हिंद महासागर में 2,500 किलोग्राम से अधिक ड्रग्स जब्त की थी. 31 मार्च को नौसेना को कुछ जहाजों की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी. इसके बाद अभियान चलाकर ये ड्रग्स जब्त किए गए थे. इस ड्रग्स में 2,386 किलोग्राम हशीश और 121 किलोग्राम हेरोइन था. यह सीलबंद पैकेटों में भरी हुई थी. पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क का कनेक्शन अंडरवर्ल्ड के किसी गैंग या पड़ोसी मुल्क समेत किसी इंटरनेशनल माफिया से जुड़ा हो सकता है। इस जड़ें खंगाली जा रही है और मामले की आगे की जांच की जा रही है। बता दें कि पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। इस मामले में शामिल अन्य लोगों को भी जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। मुंबई भेजे जाते थे ड्रग्स यह ड्रग्स फैक्ट्री में तैयार किए जाते थे और फिर स्थानीय आरोपियों और एजेंट्स के द्वारा यह ड्रग्स मुंबई भेजे जाते थे। कैमिकल फैक्ट्री के नामपर इस जगह बड़े पैमाने पर ड्रग्स का कारोबार हो रहा था। 1 महीने की निगरानी के बाद छापेमारी अनुमान के अनुसार, अब तक हजारों किलोग्राम मेफेड्रोन नामक ड्रग्स बनाकर बाजार में सप्लाई किए जा चुके हैं। मुंबई पुलिस ने टिप के आधार पर मिया भयंदर पुलिस, वसाई विरार पुलिस और क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर पिछले 1 महीने से इस पूरे प्रकरण पर नजर रखी थी। जानकारी पुख्ता होने के बाद पुलिस ने 60 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की। 12 लोग हिरासत में पुलिस ने एक बांग्लादेशी महिला समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया है। महिला का नाम फातिमा मुराद शेख अलियास मोल्लाह है, जिसकी उम्र 23 वर्ष के आसपास है। आरोपी महिला के पास 24 लाख रुपये के ड्रग्स भी बरामद हुए हैं। कौन है मुख्य आरोपी? वहीं, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी एक आईटी एक्सपर्ट है, जो कैमिकल फैक्ट्री के नाम पर इसका दुरुपयोग कर रहा था। इस ड्रग रैकेट में विदेशियों के भी शामिल होने की आशंका है। पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। कैसे हुआ ड्रग फैक्ट्री का खुलासा पुलिस को पिछले कई दिनों से जानकारी मिल रही थी कि मीरा-भायंदर इलाके में बड़ी मात्रा में ड्रग्स तैयार की जा रही है. इसके बाद पुलिस की एक टीम ने जाल बिछाकर छापेमारी की. पुलिस की गाड़ी देखते ही वहां मौजूद लोग भागने लगे, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर 12 लोगों को धर दबोचा. 32,000 लीटर कच्ची ड्रग्स बरामद कार्रवाई के दौरान पुलिस को करीब 32,000 लीटर कच्ची ड्रग्स मिली. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन ड्रग्स को प्रोसेस करके अंतरराष्ट्रीय बाजार साथ-साथ देश के दूसरे हिस्सों में बेचने की तैयारी की जा रही थी. बरामद ड्रग्स की कीमत करीब ₹12,000 करोड़ आंकी गई है. जोकि ड्रग्स बहुत बड़ी खेप है. मीरा-भायंदर पुलिस ने कहा कि यह हाल के समय की सबसे बड़ी कार्रवाई है. ₹12,000 करोड़ की ड्रग्स जब्त करना बड़ी सफलता है. उन्होंने बताया कि जांच अभी जारी है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े और लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा. ड्रग्स के खिलाफ सरकार सख्त पिछले कुछ महीनों में महाराष्ट्र पुलिस और एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने कई जगहों पर बड़ी ड्रग्स फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है. महाराष्ट्र सरकार भी लगातार कह रही है कि ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी. ये ड्रग्स माफिया अक्सर युवाओं को अपना शिकार बनाते है. जिसको लेकर सरकार लगातार एक्शन मोड में है. पहले भी पकड़ी जा चुकी है ड्रग्स की खेप बता दें बीते अप्रैल के महीने में साकीनाका पुलिस ने वसई की एमके ग्रीन फैक्ट्री में छापेमारी कर 8 करोड़ रुपये का 4 किलो एमडी ड्रग्स जब्त की थी. इस मामले में 3 आरोपियों सादिक शेख, सिराज पंजवानी और सय्यद ईरानी की गिरफ्तारी हुई थी. वहीं बार्शी में भी ड्रग्स रैकेट पकड़ा गया था, जिसमें 7 लोगों को हिरासत में लिया गया था.  

छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेज रायपुर में 65 करोड़ की लागत से बनेगा छात्रावास : मुख्यमंत्री साय

बस्तर–सरगुजा सहित दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस कैंसर के शोध, रोकथाम और इलाज में उपयोगी साबित होगी एरोकॉन 2025 संगोष्ठी रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में वित्तीय संसाधन कभी बाधा नहीं बनेंगे। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सभागार में ‘एरोकॉन 2025’ छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश चैप्टर के दो दिवसीय आयोजन का शुभारंभ कर विशेषज्ञों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज रायपुर के छात्रों के लिए 65 करोड़ रुपये की लागत से नए छात्रावास निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हजारों मरीज आज विशेषज्ञ चिकित्सकों के परिश्रम और नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों के कारण संजीवनी प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते दो दशकों में कैंसर की प्रारंभिक पहचान और उपचार के क्षेत्र में हुए शोध से भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रत्येक जिले में कैंसर डे-केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं और छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत प्रदेश में अनेक मरीजों का इलाज संभव हुआ है। जीएसटी में कैंसर की दवाइयों और उपकरणों को सस्ता किए जाने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है।  साय ने बताया कि राज्य के अस्पतालों में कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं और आज ही एम्स रायपुर में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का शुभारंभ किया जा रहा है, जो यह प्रमाणित करता है कि सरकारी अस्पताल नवीनतम तकनीक अपनाने में अग्रणी हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कैंसर की पहचान में बेहद उपयोगी सिद्ध हो रही है और राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में इसे तेजी से शामिल कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार लगातार स्वास्थ्य बजट में वृद्धि कर रही है और नये मेडिकल कॉलेज खोल रही है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में 5,000 बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार हर विकल्प पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरगुजा, धरमजयगढ़ और बस्तर में नये अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एरोकॉन 2025 संगोष्ठी कैंसर की रोकथाम और उपचार की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एरोकॉन 2025 के सातवें आयोजन में कैंसर उपचार से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक मंच पर आए हैं। इससे इस बीमारी के इलाज में नये आयाम खुलेंगे। उन्होंने कहा कि रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि मध्यभारत के अन्य राज्यों के मरीजों के लिए भी प्रमुख उपचार केंद्र है। भविष्य में अत्याधुनिक तकनीकों और मशीनों के माध्यम से यहां चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज रायपुर राज्य का सबसे बड़ा कैंसर सेंटर है, जहाँ आधुनिकतम सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आने वाले समय में प्रदेश में छह फिजियोथेरेपी कॉलेज स्थापित होंगे, बस्तर और सरगुजा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारंभ होंगे, मानसिक रोगियों के लिए पृथक चिकित्सालय और नेचुरोपैथी कॉलेज खोले जाएंगे। मेकाहारा में 232 करोड़ रुपये की लागत से 700 बिस्तरों की वृद्धि की जाएगी तथा रोबोटिक सर्जरी और आईवीएफ सेंटर जैसी नवीनतम सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, मेडिकल कॉलेज रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. पात्रा, विशेषज्ञ चिकित्सकगण, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

यूपी का लक्ष्य : 2030 तक फसल उत्पादकता में देश में नंबर एक, 2047 तक दुनिया में अग्रणी

‘विकसित यूपी @2047’ योगी सरकार का संकल्प, 2047 तक यूपी बनेगा कृषि उत्पादकता में वैश्विक लीडर यूपी का लक्ष्य : 2030 तक फसल उत्पादकता में देश में नंबर एक, 2047 तक दुनिया में अग्रणी  कृषि निर्यात में भी यूपी दिखाएगा दम, 2030 तक भारत में नंबर 1 और 2047 तक वैश्विक स्तर पर शीर्ष देशों में – भंडारण, प्रोसेसिंग, फूड पार्क और कोल्ड चेन इंफ्रा से किसानों को मिलेगा अधिक लाभ – पीएसीएस, एफपीओ और मेगा फूड पार्क से बदलेगा यूपी का कृषि परिदृश्य – नवाचार और वैज्ञानिक तकनीकों से योगी सरकार बना रही है ‘सस्टेनेबल एग्रीकल्चर’ का मॉडल – फसल विविधीकरण और शोध पर जोर, यूपी कृषि शिक्षा और रिसर्च का हब बनने की ओर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को “विकसित यूपी @2047” बनाने का संकल्प लिया है, जिसके तहत आने वाले 22 वर्षों में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बड़ी रणनीति बनाई गई है। इस विजन का सबसे अहम हिस्सा है कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार और तकनीक आधारित विकास। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि कृषि और औद्योगिक विकास मिलकर यूपी को विकसित भारत के ग्रोथ इंजन में बदलेंगे। आने वाले समय में प्रदेश न केवल भारत के किसानों के लिए, बल्कि वैश्विक कृषि जगत के लिए भी रोल मॉडल बनकर उभरेगा। भविष्य का लक्ष्य (विजन 2047) योगी सरकार ने 2030 तक यूपी को देश में फसल उत्पादकता में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य तय किया है, जबकि 2047 तक प्रदेश दुनिया के अग्रणी देशों, मैक्सिको, चीन, फ्रांस और अमेरिका के बराबर खड़ा होगा। यही नहीं, कृषि निर्यात के क्षेत्र में भी यूपी 2030 तक भारत में प्रथम स्थान पर पहुँचेगा और 2047 तक रूस, ऑस्ट्रेलिया व कनाडा जैसे वैश्विक कृषि निर्यातकों की श्रेणी में शामिल होने का संकल्प ले चुका है। इसके लिए राज्य सरकार ने फोकस एरिया तय किए हैं, जिनमें भंडारण और मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर (PACS, FPOs, मेगा फूड पार्क, कोल्ड चेन), कृषि शिक्षा, नवाचार और रिसर्च, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, वैज्ञानिक तकनीकों का विस्तार और फसल विविधीकरण प्रमुख हैं। बीते साढ़े आठ साल में हुए बड़े बदलाव 2017 से पहले प्रदेश की स्थिति बेहद पिछड़ी हुई थी। कृषि उत्पादन सीमित था, वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग नगण्य था और किसान अपनी उपज का सही मूल्य नहीं पा पाते थे। कोल्ड चेन और फूड प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं लगभग न के बराबर थीं। लेकिन पिछले साढ़े आठ साल में तस्वीर बदल चुकी है। योगी सरकार ने किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, मंडी व्यवस्था को मजबूत करने, स्टोरेज और कोल्ड चेन सुविधाओं को बढ़ाने और एफपीओ मॉडल को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। परिणामस्वरूप आज प्रदेश कृषि उत्पादकता और विविधता दोनों में नई ऊंचाइयां छू रहा है।