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सालभर बाद शुरू हुए MPPSC सहायक प्राध्यापक इंटरव्यू, समाजशास्त्र व अर्थशास्त्र के लिए दो पैनल गठित

इंदौर सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 के तहत समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा पिछले साल करवाई गई। लगभग एक वर्ष के इंतजार के बाद अब चयनित उम्मीदवारों के लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू की है। उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने के कारण आयोग ने साक्षात्कार के लिए दो पैनल गठित किए हैं। 11 सितंबर से समाजशास्त्र और 22 सितंबर से अर्थशास्त्र विषय के साक्षात्कार प्रारंभ होंगे। उम्मीदवारों को इसके लिए आनलाइन एडमिट कार्ड जारी किए जा रहे हैं। आयोग ने सितंबर का विस्तृत शेड्यूल जारी किया है, जिसमें चार साक्षात्कार और दो परीक्षाएं शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक कुछ परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की संख्या कम होने से परीक्षा केंद्र इंदौर में रखने पर विचार किया जा रहा है।   समाजशास्त्र के 80 पदों पर चयनित हैं 305 उम्मीदवार सरकारी महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए आयोग ने अगस्त 2024 में परीक्षा का दूसरा चरण आयोजित किया था। चार अगस्त को 16 विषयों की परीक्षा हुई, जिनमें समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र भी शामिल थे। समाजशास्त्र विषय के लिए 80 पदों पर 305 उम्मीदवार चयनित हुए हैं। इनमें 43 सामान्य, छह अनुसूचित जाति (एससी), सात अनुसूचित जनजाति (एसटी), 18 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और छह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के पद शामिल हैं। समाजशास्त्र विषय के साक्षात्कार 11 सितंबर से शुरू होंगे और इन्हें आठ दिनों में पूरा किया जाएगा। प्रतिदिन 30 से 35 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। अर्थशास्त्र के 104 पदों पर 372 उम्मीदवारों का चयन आयोग 22 सितंबर से अर्थशास्त्र विषय की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इस विषय के लिए 104 पदों पर 372 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। इनमें 44 अनारक्षित, 26 एसटी, सात एससी, 20 ओबीसी और सात ईडब्ल्यूएस के पद शामिल हैं। अभ्यर्थियों को 15 सितंबर के बाद प्रवेश पत्र दिए जाएंगे। आयोग ने उम्मीदवारों को साक्षात्कार से एक घंटे पहले कार्यालय में रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए हैं। सहायक निदेशक पदों के साक्षात्कार दो-तीन दिनों में होंगे पूर्ण सहायक निदेशक उद्यान-2023 की परीक्षा 23 मार्च को हुई थी। इसके परिणाम 21 मई को जारी किए गए, जिनमें 10 पदों के लिए 28 मुख्य और सात प्रावधिक उम्मीदवार शामिल हुए। आयोग ने इसके साक्षात्कार आठ सितंबर को निर्धारित किए हैं। अधिकारियों के अनुसार अभ्यर्थियों की संख्या कम होने से साक्षात्कार दो-तीन दिन में पूरे कर लिए जाएंगे। सरकारी अस्पतालों में भर्ती साक्षात्कार नौ को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ईएनटी विशेषज्ञों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इनकी भर्ती के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दिसंबर 2024 में अधिसूचना जारी की थी। कुल 16 पदों में चार अनारक्षित, तीन एससी, पांच एसटी और दो-दो ओबीसी व ईडब्ल्यूएस पद शामिल हैं। आयोग ने इन पदों के लिए साक्षात्कार नौ सितंबर को निर्धारित किए हैं। 100 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, इसलिए साक्षात्कार प्रक्रिया दो पैनलों द्वारा करवाई जाएगी। खनिज अधिकारी की परीक्षा 28 को खनिज साधन विभाग ने लगभग दो वर्ष बाद खनिज अधिकारी के रिक्त पदों पर भर्ती निकाली है। 30 दिसंबर 2024 को आयोग ने 10 पदों के लिए अधिसूचना जारी की थी। आवेदन 28 दिसंबर 2024 से 31 जनवरी 2025 तक स्वीकार किए गए। अब आठ महीने के इंतजार के बाद अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा 28 सितंबर को होगी। यह परीक्षा आफलाइन ओएमआर शीट पर होगी। उम्मीदवार 15 सितंबर के बाद अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।

मध्यप्रदेश में बढ़ा धान का रकबा, लेकिन यूरिया की कमी से जूझ रहे किसान

सतना इस खरीफ सीजन की बुवाई के बाद यूरिया की मांग में भारी वृद्धि देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण दलहन फसलों की जगह धान की खेती के रकबे में लगातार बढ़ोतरी है। साथ ही धान को सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने से भी इसके प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। इस तरह एक तरफ धान की बढ़ती बुवाई ने यूरिया की खपत बढ़ा दी, वहीं दूसरी तरफ इस वर्ष देश में यूरिया का उत्पादन सीमित रहा और आयात की मात्रा भी हर साल घटती जा रही है। सरकार हर वर्ष दलहन व तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए अनुमानित लक्ष्य तय करती है, लेकिन किसानों की रुचि गेहूं व धान की फसलों की ओर ज्यादा है। यही वजह है कि एक बोरी यूरिया के लिए किसान रात-रात भर लंबी कतारों में लगा रहता है।   धान का रकबा 35 लाख हेक्टेयर केंद्रीय कृषि कल्याण एवं विकास विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में धान का क्षेत्रफल इस बार 1039.81 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 1002.41 लाख हेक्टेयर था। यानी लगभग 37 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं दलहन का रकबा बहुत मामूली बढ़ा है। इस बार दलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 109.52 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष से केवल 1.14 लाख हेक्टेयर अधिक है। मूंग और उड़द में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अरहर में 1.34 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है। धान में यूरिया की होती है अधिक खपत कृषि विभाग सतना के उपसंचालक आशीष पांडे बताते हैं कि दलहन फसलों में यूरिया की आवश्यकता बहुत कम होती है, क्योंकि वे स्वयं नाइट्रोजन का स्रोत होती हैं। इसके विपरीत धान की बुवाई और जर्मिनेशन के दौरान यूरिया की भारी मात्रा में जरूरत होती है। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां के विज्ञानी डॉ. अखिलेश कुमार का कहना है कि किसानों को धान और गेहूं की जगह दलहन व तिलहन फसलों की ओर ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, बल्कि खाद की समस्या से भी राहत मिलेगी। हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान व गेहूं की सरकारी खरीद होने से किसान इन्हीं फसलों पर निर्भर हैं। यूरिया का आयात घटा, आपूर्ति में कमी     हर साल यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ती जा रही है, जबकि उत्पादन और आयात दोनों घट रहे हैं।     आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते चार वर्षों में भारत में आयातित यूरिया की मात्रा में लगातार गिरावट आई है।     इसकी वजह वैश्विक भी हो सकती है। चीन, सऊदी अरब, ओमान से यूरिया आयात होता है। तिलहन फसलों में गिरावट दलहन की तरह तिलहन फसलों का रकबा भी घटा है। इस बार तिलहनों की बुवाई 178.64 लाख हेक्टेयर दर्ज हुई, जो पिछले वर्ष से 6.74 लाख हेक्टेयर कम है। सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख तिलहन फसलों में गिरावट देखी गई है।

ऐतिहासिक जीत! सबालेंका ने फाइनल में रचा कमाल, सेरेना के रिकॉर्ड की बराबरी

नई दिल्ली  यूएस ओपन 2025 के विमेंस सिंगल्स फाइनल में बेलारूस की स्टार खिलाड़ी और विश्व नंबर-1 आर्यना सबालेंका (Aryna Sabalenka Won Women's Singles Title) ने खिताबी जीत हासिल की। उन्होंने अमेरिका की अमांडा अनिसिमोवा को सीधे सेटों में 6-3, 7-6 (7-3) से हराकर लगातार दूसरी बार यह खिताब जीता। इसके साथ ही सबालेंका ने दिग्गज खिलाड़ी सेरेना विलियम्स (Serena Williams) की बराबरी कर ली। सेरेना ने भी यूएस ओपन लगातार दूसरी बार जीता था। ऑस्ट्रेलियन और फ्रेंच ओपन के फाइनल में हारीं सबालेंका के लिए यह इस साल का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब है। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलियन ओपन और फ्रेंच ओपन के फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ऑस्ट्रेलियन ओपन में मेडिसन कीज ने और फ्रेंच ओपन में कोको गॉफ ने उन्हें हराया था। वहीं, विंबलडन में वह ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकीं। इस बार जीत के बाद सबालेंका बेहद भावुक हो गईं और घुटनों के बल बैठकर खुशी जताई। मैच के बाद ईएसपीएन से बातचीत में सबालेंका ने कहा, “दो फाइनल हारने के बाद मैं भावनाओं पर नियंत्रण खो बैठी थी। इस बार मैंने शांत रहकर खेल पर ध्यान दिया और खुद को चीजों के साथ बहने दिया।” अमांडा अनिसिमोवा का टूटा सपना दूसरी ओर, अमेरिका की अमांडा अनिसिमोवा का सपना टूटा। यह उनका दूसरा मेजर फाइनल था। उन्होंने सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर-2 खिलाड़ी इगा स्विएंटेक को सीधे सेटों में 6-0, 6-0 से हराकर सबको चौंका दिया था। लेकिन खिताबी मुकाबले में वह सात डबल फॉल्ट की बड़ी गलतियों से जूझती रहीं। मैच के बाद उन्होंने अपनी हार के लिए कहीं न कहीं आर्थर एश स्टेडियम की फ्लड लाइट्स को भी जिम्मेदार ठहराया। अनिसिमोवा ने कहा, “यह समर मेरे लिए शानदार रहा। लगातार दो ग्रैंड स्लैम फाइनल तक पहुंचना एक उपलब्धि है, लेकिन हार का दुख भी है। आज मैं अपने सपनों के लिए पूरी तरह नहीं लड़ सकी।” इससे पहले वह विंबलडन 2025 के फाइनल तक भी पहुंची थीं, लेकिन वहां उन्हें पोलैंड की इगा स्विएंटेक से हार का सामना करना पड़ा था।  

शिप्रा नदी त्रासदी: कार डूबने से TI और SI के शव बरामद, महिला आरक्षक की खोज जारी

उज्जैन उज्जैन में शिप्रा के बड़े पुल से शनिवार रात 9. 30 बजे एक कार नीचे नदी में गिर गई थी। कार में उन्हेल टीआई अशोक शर्मा, एसआई मदनलाल निनामा और एक महिला आरक्षक आरती पाल बैठे थे। 11 घंटे चले रेस्क्यू के बाद टीआई शर्मा का शव मंगलनाथ क्षेत्र से मिला है। वहीं भैरवगढ़ क्षेत्र में एसआई निनामा का शव मिला है। महिला आरक्षक की तलाश जारी है। एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ग्राम गुराड़िया सांग से एक महिला लापता हुई थी। इसकी तलाश में उन्हेल टीआई अशोक शर्मा, एसआई निनामा और महिला आरक्षक चिंतामण क्षेत्र की ओर जा रहे थे। इस दौरान शिप्रा नदी का बड़ा पुल पार करते समय कार नीचे गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया। शिप्रा के बढ़े हुए जलस्तर, तेज बहाव और मटमैले पानी के कारण रेस्क्यू में परेशानी हुई।    लगातार सर्चिंग अभियान के बीच रविवार सुबह उन्हेल टीआई और दो अन्य पुलिसकर्मियों के मोबाइल बंद मिले। इनकी आखिरी लोकेशन घटनास्थल के पास पाई गई। इस बीच मंगलनाथ के समीप शिप्रा नदी में पुलिस यूनिफार्म में एक शव मिला। शव उन्हेल टीआइ अशोक शर्मा का है। इसके बाद एसआई का शव मिला। सर्चिंग में दो ड्रोन भी लगाए गए हैं देर रात कार नदी में गिरने की सूचना मिलने पर महाकाल टीआई गगन बादल व होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंचे गए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है। सर्चिंग के लिए दो ड्रोन भी लगाए गए हैं। टीआई बादल ने बताया कि शनिवार रात को बड़नगर रोड पर शिप्रा नदी पर बने बड़े पुल से एक कार गिरने की सूचना मिली थी। कार सवार लोग चक्रतीर्थ की ओर से कार्तिक मेला मैदान तरफ जाते समय पुल पर रैलिंग नहीं लगी होने के कारण कार सीधे नदी में गिर गई। जिले व आसपास के क्षेत्रों में कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। पुलिस का कहना है कि गोताखोरों की मदद से कार निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक दिन पहले ही पुल पर निरीक्षण करने पहुंचे थे एसपी     शुक्रवार रात को ही पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा बड़े पुल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने 24 घंटे पुलिस बल तैनात रहने के निर्देश दिए थे।     जिससे किसी भी आपात स्थिति में आमजन को तत्काल सहायता उपलब्ध हो सके। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास प्राथमिक उपचार किट एवं लाइफ जैकेट भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे।     पुलिस टीम द्वारा नियमित पेट्रोलिंग करते हुए स्थिति पर सतत निगरानी रखने को भी कहा था। वहीं आवश्यक बैरिकेडिंग एवं सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए थे।     इसके अतिरिक्त, वर्षा एवं बाढ़ जैसी परिस्थितियों में रेस्क्यू कार्यवाही के लिए पुलिसकर्मियों को रस्सी, टार्च एवं वायरलेस सेट उपलब्ध कराने को कहा था।

बिहार के 6 अमृत भारत स्टेशन होंगे नए उद्घाटन के साथ तैयार, 15 सितंबर को पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण

सुपौल आगामी 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्णिया में होंगे। इस दौरान वह पूर्णिया से ही पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल अंतर्गत अमृत भारत स्टेशन के तहत नवनिर्मित 06 रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे। इसमें 14.50 करोड़ की लागत से निर्मित सुपौल रेलवे स्टेशन भी शामिल है। इसको लेकर बीते 15 दिनों से रेलवे स्टेशन परिसर में काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। इस कार्यक्रम के साथ ही स्टेशन का नया भवन सहित पूरा परिसर आम यात्रियों की सुविधा के लिए चालू हो जाएगा। इसके अलावा 15 सितंबर से ही पूणे-दानापुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 12149/50 के सुपौल तक विस्तार की औपचारिक शुरुआत भी हो सकती है। सुपौल से लंबी दूरी के सफर के लिए यह पहली नियमित ट्रेन होगी। फिलहाल सुपौल से पैसेंजर ट्रेनों के अलावा केवल स्पेशल ट्रेनों का परिचालन हो रहा है, जो यात्रियों की जेब पर भी भारी पड़ रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ट्रेन के विस्तार को लेकर बीते 02 सितंबर को ही सांसद दिलेश्वर कामैत को पत्र लिख चुके हैं। लेकिन रेलवे की ओर से इसका नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। फिलहाल यह ट्रेन 03349/50 स्पेशल के रूप में सहरसा, बरौनी, हाजीपुर के रास्ते सुपौल और दानापुर के बीच चलती है। 03349 ट्रेन रोजाना दोपहर 02:30 बजे सुपौल के खुल कर रात 09:30 बजे दानापुर पहुंचती है। इसके बाद पुन: यह ट्रेन 12150 बन कर रात 11:15 बजे दानापुर से खुलती है और 28 घंटे 45 मिनट के सफर के बाद अगले दिन सुबह 04 बजे पूणे पहुंचती है। वही 12149 ट्रेन पूणे से रोजाना रात 09:05 बजे खुल कर 28 घंटे 45 मिनट का सफर करते हुए अगले दिन सुबह 02:15 बजे दानापुर पहुंचती है। इसके बाद 03350 स्पेशल बन कर सुबह 04:30 बजे दानापुर से पुन: उसी रास्ते दोपहर 01:15 बजे सुपौल पहुंचती है। ट्रेन के नियमित होने से यात्रियों को होगा लाभ 12149/50 पूणे-दानापुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के सुपौल तक नियमित हो जाने से खास तौर पर सुपौल वासियों को बड़ा लाभ होगा। इसके अलावा इस ट्रेन के नियमित ठहराव वाले सभी स्टेशन के यात्री लाभान्वित होंगे। दरअसल, फिलहाल इस ट्रेन से पूणे तक के सफर के लिए दानापुर स्टेशन से पहले सवार होने वाले यात्रियों को दो टिकट बनाना पड़ता था। ट्रेन का नंबर बदल जाने की वजह से यात्रियों को यह परेशानी होती थी। इसमें रिजर्वेशन के फिक्स चार्ज के अलावा अन्य कई प्रकार की फीस भी बढ़ जाती थी। लेकिन अब ट्रेन के नियमित होने के बाद एक बार में ही लोग अपने गंतव्य के लिए टिकट ले सकेंगे, जो सस्ता और सुलभ भी होगा। सुपौल से ट्रेन की शुरुआत होने की वजह से यहां रिजर्वेशन का कोटा भी अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, नोटिफिकेशन के बाद ट्रेन के टाइमिंग में बदलाव हो सकता है। इन छह स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे पीएम 15 सितंबर काे पीएम नरेंद्र मोदी अमृत भारत स्टेशन के तहत विकसित सुपौल सहित कुल रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे। इसमें 41.60 करोड़ की लागत से विकसित सहरसा सहित 21.40 करोड़ से विकसित सलौना, 14.55 करोड़ से विकसित सिमरी बख्तियारपुर, 15.96 करोड़ से विकसित दौरम मधेपुरा और 23.35 करोड़ से विकसित बनमनखी स्टेशन शामिल है। इन स्टेशनों का अमृत भारत स्टेशन के रूप में चयन वर्ष 2022 में हुआ था। फरवरी 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिलान्यास किया था। यात्रियों के लिए आरामदेह वेटिंग एरिया, पार्किंग की भी व्यवस्था अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित सुपौल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा का विशेष ख्याल रखा गया है। आरामदेह वेटिंग हॉल के अलावा फ्री वाई-फाई सुविधा, कैंटिन, लिफ्ट, महिलाओं और दिव्यांगजनों के सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। परिसर में वाहनों के पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही एक कॉमर्शियल बुकिंग काउंटर बनाया गया है, जहां से लोग व्यवसायिक बुकिंग भी कर सकेंगे। समस्तीपुर रेल मंडल के पीआरओ आरके सिंह ने बताया कि 15 मई को पीएम संभवत: मंडल क्षेत्र के 06 अमृत भारत स्टेशनों का उद्घाटन कर सकते हैं। सुपौल में फिलहाल सामान्य और आरक्षित टिकट काउंटर बढ़ाने को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। डिमांड के अनुरुप काउंटर की संख्या बढ़ाई या घटाई जा सकती है। अभी त्रिवेणीगंज तक सेवा विस्तार में देरी सुपौल-अररिया नई रेल लाईन पर फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और पिपरा तक ट्रेन का परिचालन किया जा रहा है। इस बीच मंगलवार को त्रिवेणीगंज तक स्पीड ट्रायल होने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि 15 सितंबर से त्रिवेणीगंज तक ट्रेन परिचालन आरंभ हो सकता है। हालांकि समस्तीपुर रेल मंडल के पीआरओ आरके सिंह ने बताया कि अभी त्रिवेणीगंज तक ट्रेन विस्तार में कुछ विलंब हो सकता है। स्पीड ट्रायल के बाद सीआरएस जांच होनी है। लेकिन सीआरएस का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। जांच के बाद अगर सबकुछ ठीक रहा तो रेल परिचालन का प्रस्ताव बोर्ड को भेजा जा सकता है। फिलहाल 15 सितंबर से त्रिवेणीगंज तक ट्रेन परिचालन की कोई योजना नहीं है।  

महिला सुरक्षा संकट: राजस्थान में आधे साल में 2966 दुष्कर्म मामले दर्ज

जयपुर राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध  के आंकड़ें चिंता बढ़ाने वाले हैं। प्रदेश में साल 2025 में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के 2966 मामले थानों में दर्ज हुए हैं। इनमें 12 प्रकरणों में दुष्कर्म के बाद हत्या किया जाना भी शामिल है। विधानसभा में पूछे गए गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से यह आंकड़े पेश किए गए हैं। कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने विधानसभा में सरकार से सवाल पूछा है कि प्रदेश में 1 जनवरी, 2025 से 30 जून, 2025 तक महिलाओं के साथ बलात्कार, बलात्कार के बाद हत्या, दहेज हत्या, आत्महत्या का दुष्प्रेरणा एवं महिला उत्पीड़न (दहेज) के कितने प्रकरण दर्ज हुए हैं? इनमें से कितने प्रकरणों में चालान पेश कर दिया गया है एवं कितने प्रकरणों में अब तक अनुसंधान लम्बित हैं? इसके जवाब में गृह विभाग की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में एक जनवरी से 30 जून तक दुष्कर्म के कुल 2966 प्रकरण दर्ज हुए। वहीं 12 प्रकरणों में दुष्कर्म के बाद पीड़िताओं की हत्या भी कर दी गई। पुलिस की तरफ से इनमें 1387 प्रकरणों में चालान पेश कर दिए गए हैं जबकि 1187 में एफआर लगा दी गई। इनके अलावा 392 प्रकरण अभी लंबित बताए गए हैं। इसी अवधि में दहेज हत्या के 187 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 92 में चालान पेश किए गए जबकि 31 में एफआर लगा दी गई, तथा 64 प्रकरणों में अभी जांच चल रही है। महिला उत्पीड़न के कुल 6192 प्रकरण सामने आए जिनमें 3004 में चालान पेश किए गए तथा 1863 में एफआर लगा दी गई। जयपुर- अलवर में दुष्कर्म के मामले सबसे ज्यादा दुष्कर्म के मामलों में राजधानी जयपुर के हालात सबसे ज्यादा खबरा है। यहां कुल 293 दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें से 128 मामलों में कोर्ट में चालान पेश हुए हैं। इनमें 2 मामले दुष्कर्म के साथ हत्या के भी हैं। जयपुर के बाद दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले अलवर जिले में रिपोर्ट हुए हैं। यहां दुष्कर्म की 143 एफआआईआर दर्ज हुई है। इनमें से 50 में चालान पेश किए गए हैं तथा 74 में एफआर लगा दी गई। गंगानगर में कुल 128 मामले दर्ज हुए हैं जिनमें से  45 मामलों में चालान पेश किए गए। 187 महिलाओं की दहेज हत्या दहेज के मालले भी चौंकाने वाले हैं। प्रदेश में दहेज के मामलों में 187 महिलाओं की हत्या हुई है। इनमें से 92 मामलों में कोर्ट में चालान पेश किए गए हैं। इनके अलावा महिला उत्पीड़न के 6 हजार से ज्यादा प्रकरण थानों में दर्ज हुए हैं। घरेलू हिंसा के मामलों में भावनात्मक और मानसिक प्रताड़ना, मारपीट, घर से बाहर निकालने की धमकी जैसी शिकायतें शामिल हैं। पिछले पांच साल में जयपुर जिले में 18 हजार से अधिक महिलाएं मदद मांगने आईं।  

बैरबी-सायरंग रेल परियोजना से म्यांमार बॉर्डर तक बढ़ेगा रेल मार्ग, आइजोल जुड़ा राष्ट्रीय नेटवर्क से, PM करेंगे उद्घाटन

मिजोरम   मिजोरम के एयरपोर्ट से पहली बार रेलवे स्टेशनों की कनेक्टिविटी होने जा रही है. इससे यात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी. ट्रेन 48 सुरंगों और 150 से ज्यादा पुलों से होकर गुजरेगी. इससे यात्री रोमांचक सफर का आनंद ले सकेंगे. देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले पर्यटकों के पास मिजोरम घूमने के बाद असम जाने के लिए सीमित विकल्प थे. अब 13 सितंबर से पर्यटकों को कई तरह की सहूलियत मिलनी शुरू हो जाएगी.मिजोरम की राजधानी आइजोल पहली बार भारतीय रेलवे के नेटवर्क से जुड़ गई है। अब यह रेल लाइन आगे बढ़कर म्यांमार बॉर्डर तक जाएगी। जिसका सर्वे किया जा रहा है।  अभी तक जो पर्यटक मिजोरम घूमने के लिए आते हैं, वे राजधानी के आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट पर उतरते हैं. मिजोरम घूमने के बाद अगर यहीं से वे असम घूमने जाना चाहें तो उनके पास केवल 2 ही विकल्प होते थे. या तो वे सड़क मार्ग से सीधे असम के सिलचर तक पहुंच सकते हैं या फिर मिजोरम के एक मात्र रेलवे स्टेशन बइरबी तक सड़क मार्ग से जाकर वहां से फिर ट्रेन पकड़कर असम में कदम रख सकते हैं. अब 13 सितंबर के बाद पर्यटकों की इन समस्याओं का समाधान होने जा रहा है. 13 सितंबर को पीएम करेंगे उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे और पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। खासबात है कि लगभग 8071 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह रेल लाइन न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि मिजोरम के आर्थिक और पर्यटन विकास को भी नई दिशा देगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह लाइन राज्य के लिए लाइफलाइन साबित होगी। खास बात यह है कि इस रेल लाइन के शुरू होने से आइजोल से सिलचर तक का सफर सड़क मार्ग से 7 घंटे के बजाय ट्रेन से सिर्फ 3 घंटे में तय होगा। दावा किया जा रहा है कि, यह रेल लाइन न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि मिजोरम के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगी। कुतुबमीनार से भी ऊंचा ब्रिज इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना इस बैराबी-सैरांग रेल लाइन को देश की सबसे कठिन परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस ट्रैक पर 48 सुरंगें बनाई गई हैं, जिनकी कुल लंबाई 12.8 किलोमीटर है। इसके अलावा बड़े और छोटे 142 ब्रिज तैयार किए गए हैं। इनमें से सबसे ऊंचा ब्रिज 104 मीटर का है, जो कुतुबमीनार से भी ऊंचा है और भारतीय रेलवे का दूसरा सबसे ऊंचा ब्रिज माना जा रहा है। इस लाइन पर पांच रोड ओवरब्रिज और छह अंडरपास भी बनाए गए हैं। पूरी परियोजना को आधुनिक तकनीक से डिजाइन किया गया है, जिससे ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी। खुलेगा आर्थिक विकास का नया रास्ता, मिलेगी मजबूती रेलवे से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह रेल लाइन मिजोरम के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी। इसकी वजह से राज्य की जीडीपी में हर साल 2-3 फीसदी की बढ़ोतरी संभव है। वर्तमान में 25 हजार करोड़ की अर्थव्यवस्था वाले इस राज्य को इस परियोजना से करीब 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सालाना आमदनी होगी। बताया जा रहा है कि इस नई लाइन से कोलकाता, अगरतला और दिल्ली तक सीधी ट्रेनों का रास्ता खुल जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। 26 साल में पूरा हुआ सपना, चुनौतियां -रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का काम 1999 में शुरू हुआ था। लेकिन मिजोरम की दुर्गम भौगोलिक स्थिति, घने जंगलों और भारी बारिश के कारण निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। कई बार सर्वे रिपोर्ट बदली गई। इस पर सालभर में केवल 4-5 महीने ही काम हो पाता था। भारी मशीनों को छोटे हिस्सों में बांटकर पहाड़ियों तक पहुंचाना पड़ा और निर्माण सामग्री असम व पश्चिम बंगाल से लाई गई। वर्ष 2008-09 में इसे नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा मिला और वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शिलान्यास किया। इसके बाद तेजी आई और अब यह परियोजना पूरी हो गई है। परियोजना की खासबात-लागत: 8071 करोड़ रुपए -लंबाई: 51.38 किमी -गति: 100 किमी/घंटा -सुरंगें: 48 (12.8 किमी) -ब्रिज: 142 (55 बड़े, 87 छोटे) -सबसे ऊंचा ब्रिज: 104 मीटर -स्टेशन: हार्तुकी, कौनपुई, मुलखांग, सैरांग 51 किलोमीटर की नई रेल लाइन पर बने 4 स्टेशन : पर्यटकों को असम जाने के लिए सड़क मार्ग के अलावा एयरपोर्ट से कुछ ही दूरी पर बनाए गए रेलवे स्टेशन से ट्रेन मिलनी शुरू हो जाएगी. आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट से पहले रेलवे स्टेशन की दूरी सिर्फ 25 किलोमीटर होगी, जो कुछ ही देर में आसानी से तय की जा सकती है. एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन का रूट भी एक ही है. इससे पर्यटकों को ट्रेन पकड़ने के लिए इधर उधर भटकने की आवश्यकता भी नहीं होगी. 51 किलोमीटर की नई रेल लाइन पर 4 नए रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं. ईटीवी भारत ने इन चारों रेलवे स्टेशनों का विस्टाडोम कोच से दौरा किया. जानने का प्रयास किया कि इस रूट पर बने चारों स्टेशनों की वर्तमान स्थिति क्या है… विस्टाडोम कोच से दिखे मनमोहक नजारे : राजधानी आइजोल से तकरीबन 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पहला रेलवे स्टेशन. इसका नाम सायरंग रेलवे स्टेशन है. आइजोल से ईटीवी रिपोर्टर सड़क मार्ग से होते हुए पहले सायरंग रेलवे स्टेशन पहुंचे. यहां से 196 नंबर के कुतुबमीनार से भी 42 मीटर ऊंचे ब्रिज के पास से विस्टाडोम कोच से बइरबी रेलवे स्टेशन तक की 51.38 किलोमीटर की दूरी तय की. इस रूट पर अद्भुत नजारे विस्टाडोम से देखने को मिले. ट्रैक की ऊंचाई इतनी है कि रास्ते भर पर्वत, पहाड़ और बादल आपस में गले मिलते हुए नजर आते हैं. हर पहाड़ पर बांस, केले और सुपारी के हरे भरे पेड़ आंखों को खूब सुहाते हैं. नया ट्रैक और रेलवे स्टेशन बनाने में इंजीनियरों की कारीगरी को सैल्यूट करते बनता है. मुआलखांग स्टेशन के पास बन रहे 2 हेलीपैड, आएंगे पीएम मोदी : पहाड़ों को काटकर ट्रैक तैयार किया गया है. जहां ये संभव नहीं था वहां पर सुरंगें बनाकर ट्रेन के लिए मार्ग तैयार किया गया है. सायरंग रेलवे स्टेशन अभी बनाकर तैयार हो रहा है. यहां पर तेजी से काम चल रहा है. यहां से चलने पर पहला रेलवे स्टेशन आता है मुआलखांग रेलवे स्टेशन. ये स्टेशन बनकर तैयार … Read more

केंद्र सरकार का दिवाली उपहार, कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में हो सकती है 3% बढ़ोतरी

नई दिल्ली त्‍योहारी सीजन में केंद्र सरकार कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकती है. 8वां वेतन आयोग लागू होने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) में इजाफा किया जा सकता है, जिससे 1.2 करोड़ से ज्‍यादा केंद्रीय कमचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिल सके.  केंद्र सरकार दिवाली से ठीक पहले, अक्टूबर के पहले हफ्ते में महंगाई भत्ते में इजाफा कर सकती है. इस बदलाव के साथ कर्मचारियों के लिए DA 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी हो जाएगा, जो जुलाई 2025 से लागू होगा.  फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तीन महीने का बकाया भी मिलेगा, जिसका भुगतान अक्टूबर के वेतन के साथ किए जाने की उम्मीद है.  2025 में महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ते में बदलाव करती है. एक बार जनवरी-जून की अवधि के लिए होली से पहले और दूसरी बार जुलाई-दिसंबर की अवधि के लिए दिवाली से पहले. पिछले साल केंद्र सरकार ने त्‍योहार से करीब 2 हफ्ते पहले 16 अक्टूबर, 2024 को महंगाई भत्ते में इजाफे का ऐलान किया थी. इस साल दिवाली 20-21 अक्टूबर को पड़ रही है.  DA का कैलकुलेशन कैसे किया जाता है? सातवें वेतन आयोग के तहत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर महंगाई भत्ते को तय किया जाता है. यह फॉर्मूला CPI-IW के 12 महीने के औसत आंकड़ों पर आधारित है. जुलाई 2024 से जून 2025 तक, औसत CPI-IW 143.6 रहा, जो 58% की महंगाई भत्ते की दर के बराबर है. इसका मतलब है कि जुलाई-दिसंबर 2025 सर्किल के दौरान केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता तीन प्रतिशत बढ़ जाएगा.  बढ़ जाएगी पेंशन और सैलरी अगर किसी कर्मचारी का बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो 55% की पुरानी DA पर भत्ता 27,500 रुपये होगा. वहीं बढ़ोतरी के बाद 58% के नए डीए के साथ, यह बढ़कर 29,000 रुपये हो जाएगा यानी अब कर्मचारी हर महीने 1,500 रुपये अतिरिक्त घर ले जाएगा. इसी तरह, 30000 रुपये की बेसिक पेंशन वाले पेंशनभोगी के लिए, DR 16,500 रुपये (55%) से बढ़कर 17,400 रुपये (58%) हो जाएगा, जिससे उन्हें हर महीने 900 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे. 7वें वेतन आयोग के तहत अंतिम बढ़ोतरी यह संशोधन इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह सातवें वेतन आयोग के तहत अंतिम डीए बढ़ोतरी होगी, जिसकी अवधि 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो रही है. सरकार जनवरी 2025 में आठवें वेतन आयोग की घोषणा पहले ही कर चुकी है, लेकिन इसके संदर्भ की शर्तें (टीओआर), अध्यक्ष और सदस्यों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है. 

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण: मंत्री का सख्त ऐलान, होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  शहर में शासकीय भूमि पर पक्के स्थायी निर्माण कर लाभ कमाने वाले भूमाफिया तो जेल जाएंगे ही, साथ ही जिन अधिकारियों के संरक्षण में ये पनप रहे हैं वह भी नपेंगे।पिछले दिनों कोकता ट्रांसपोर्ट नगर और हथाईखेड़ा डैम के आसपास स्थित पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन के सीमांकन में 80 से अधिक पक्के अतिक्रमण मिले थे। यदि समय रहते विभाग सीमांकन करवाता और प्रशासन, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी खसरा, खतौनी, बंटान आदि दस्तावेजों की जांच करवाते तो करोड़ों की जमीन पर कब्जे नहीं होते।ऐसे में इन अवैध कब्जों के लिए SDM, तहसीलदार, आरआइ, पटवारी सहित अन्य अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। अब उनकी जांच होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह बात प्रदेश के पशुपालन मंत्री लखन पटेल और भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कही है। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा की टीम द्वारा पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन का सीमांकन किया गया तो यहां पर करीब सात एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रमण निकला।इसमें नगर निगम की 50 दुकानें, एसटीपी प्लांट आदि भी विभाग की जमीन पर बनाए गए हैं। ये दुकानें तत्कालीन निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी के समय पर बनवाई गईं थीं। तब तत्कालीन भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया थे और प्रशासन ने सीमांकन कर जमीन नगर निगम को सौंपी थीं। विभाग की जमीन पर निगम की दुकानें आने के बाद से सवाल खड़े हो रहे हैं कि रिकार्ड में जब पशुपालन का रकबा था तो आरआइ, पटवारी ने किस आधार पर यह जमीन निगम की बता दी। ऐसे में अब दोनों विभागों के बीच नोकझोंक की स्थिति बनी हुई है। यही कारण है कि पशुपालन विभाग ने जिला प्रशासन को जमीन अतिक्रमणमुक्त करवाकर सौंपने के लिए कहा है। सभी अतिक्रमणकारियों को जारी होंगे नोटिस विभाग की जमीन पर पेट्रोल पंप, स्कूल, रिसार्ट, शादी हाल, फार्म हाउस, 20 मकान, 50 दुकान, एसटीपी प्लांट, डायमंड सिटी, कोर्टयार्ड प्राइम, कोर्टयार्ड कस्तूरी, राजधानी परिसर आदि का अतिक्रमण है। इन सभी को तहसीलदार द्वारा संभवत: प्रकरण बनाकर सोमवार से नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस सीमा के दौरान यदि ठोस दस्तावेज न्यायालय में नहीं दिए गए तो पक्के निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाएगी। निगम की 100 एकड़ से ज्यादा जमीन तत्कालीन निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी ने बताया कि मेरे समय दुकानों का निर्माण कराया गया था, यह निगम की जमीन है। इसी से लगी हुई पशुपालन विभाग की जमीन है। अब सीमांकन में दुकानें उनकी जमीन में बताई गई हैं जो समझ नहीं आ रहा है। कोकता ट्रांसपोर्ट नगर में नगर निगम भोपाल के पास 100 एकड़ से अधिक जमीन और कई दुकानें हैं। आलोक शर्मा (भाजपा सांसद) ने कहा, वर्जन राजधानी में शासकीय जमीनों पर भूमाफिया ने जमकर कब्जे किए हैं और यह एक दो नहीं बल्कि 50 से 100 एकड़ में कब्जे हैं। मछली हो या मगरमच्छ सभी के कब्जे से शासकीय भूमि मुक्त करवाई जाएगी। वहीं, जिन एसडीएम, तहसीलदार, आरआइ, पटवारी के रहते यह सब अतिक्रमण हुए हैं, उनकी जांच होनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लखन पटेल (राज्यमंत्री, पशुपालन एवं डेयरी विभाग) ने बताया, कोकता ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित पशुपालन विभाग की जमीन का सीमांकन पूरा कर लिया गया है। मुझे जानकारी मिली है यहां पर लोगों ने अतिक्रमण किए हैं। उनके दस्तावेज तक बनाए गए हैं। सभी बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है। भूमाफिया पर कार्रवाई होगी, साथ ही अधिकारियों पर भी सख्ती बरती जाएगी।

भोपाल का ऐतिहासिक होटल अब 7-स्टार में विकसित, टेंडर प्रक्रिया शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का प्रतिष्ठित होटल लेक व्यू अशोका(Lake View Ashoka Hotel Bhopal) अब शहर के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। श्यामला हिल्स स्थित यह होटल, जो फिलहाल 3-स्टार श्रेणी में आता है। इसे अब 7-स्टार होटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर क्रियान्वित किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य भोपाल में लग्जरी पर्यटन को बढ़ावा देना और निगम के लिए राजस्व का एक स्थायी स्रोत सुनिश्चित करना है। निजी पार्टनर की तलाश एक साल से जारी होटल के इस महत्वाकांक्षी कायाकल्प के लिए पर्यटन निगम ने एक साल से प्राइवेट पार्टनर की तलाश कर रहा है। योजना के अनुसार पीपीपी मॉडल के तहत पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा, जिसमें पार्टनर होटल का विकास और संचालन करेगा, जबकि इसका मालिकाना हक पर्यटन निगम के पास ही रहेगा। 150 से अधिक होंगे रूम वर्तमान में 7.16 एकड़ में फैले इस होटल में 4 सुइट्स, 39 डीलक्स रुम, एक स्वीमिंग पूल और एक रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं हैं। 7-स्टार बनने के बाद इसमें 150 से अधिक रूम होंगे और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां से बड़े तालाब का खूबसूरत नजारा दिखता है, जो इसे और भी खास बनाता है। स्पेशल पर्पज व्हीकल के निगरानी में होगा डेवलपमेंट यह निर्णय सात साल पहले ही किया गया था, जब होटल अशोक के शेयर निगम को ट्रांसफर किए गए थे। लेक व्यू अशोक के संचालन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) कंपनी बनाई गई थी। इसी कंपनी के जरिए होटल के डेवलपमेंट की पूरी याजना को अंजाम दिया जाएगा। इसे लेकर निगम ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। इस प्रोजेक्ट को लेकर गुरुवार (5 सितंबर) को मंत्रालय में बैठक भी हुई। जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पेश किया जाएगा। अभी 3 स्टार कैटेगरी में शामिल है होटल श्यामला हिल्स स्थित यह होटल फिलहाल 3 स्टार की कैटेगरी में शामिल है। यह 7.16 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें 4 सुइट, 39 डीलक्स रूम, स्वीमिंग पूल और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। होटल के कैंपस में एक बड़ा बैंक्वेट हॉल है, जिसमें 180 लोग एक साथ आ सकते हैं। साथ ही, होटल में 8135 मीटर बिल्ट अप का एरिया लेक व्यू रेसिडेंसी कैम्पस में मौजूद है। इसमें 82 लोग बैठ सकते हैं। बड़े तालाब के पास मौजूद होने के कारण यहां से बहुत ही शानदार नजारा देखने को मिलता है। वहीं इस नई योजना के बाद होटल लेक व्यू का भविष्य सुनहरा नजर आ रहा है। 40 साल पुराना है होटल अशोक होटल की शुरुआत 40 साल पहले लगभग 1985-86 के आसपास हुई थी। तब इसके लिए जमीन को 30 साल की लीज पर दिया गया था। होटल की शुरुआत के समय इसमें 51 प्रतिशत साझेदारी केंद्र सरकार की और 49 प्रतिशत शेयर मध्य प्रदेश सरकार के थे। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से होटल की सारी इक्विटी खरीद ली थी। अब इसमें केंद्र सरकार की कोई साझेदारी नहीं है। होटल का लीज 2016 में समाप्त होने के बाद इसकी लीज की फाइल पेंडिंग चल रही थी। पांच साल पहले सरकार 350 करोड़ के बाजार मूल्य के साथ अशोक होटल को निजी हाथों में सौंपना चाहती थी लेकिन किसी प्राइवेट कंपनी ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।  पहले भी हुई थी कोशिश यह पहला मौका नहीं है जब इस होटल को निजी हाथों में में सौंपने की कोशिश की गई हो। करीब 6 साल पहले भी इसे निजी कंपनियों को देने का प्रयास किया गया था। तब इसकी कीमत लगभग 350 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन उस समय कोई भी निजी कंपनी इसे लेने के लिए तैयार नहीं हुई थी। होटल लेक ब्यू अशोका वर्तमान में पूरी तरह से निगम के नियंत्रण में है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट पर समीक्षा बैठक भी हुई थी।– डॉ. इलैया राजा टी. एमडी एमपी टूरिज्म