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एम्स भोपाल में नया हृदय सर्जरी केंद्र, मरीजों के लिए तेज और बेहतर इलाज संभव

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के हार्ट पेशेंट का इलाज पहले से आधुनिक और त्वरित होने वाला है। हृदय रोगियों, गर्भ में बच्चों का हृदय दोष और ऑपरेशन के लिए 6 एडवांस मशीनें आने वाली है। करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से एम्स में एक नया कार्डियक सेटअप तैयार किया जाएगा। साथ ही हाई-टेक बाइप्लेन कार्डियक कैथलैब लगाई जाएगी। इस व्यवस्था से इलाज के लिए ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का तत्काल इलाज मिल पाएगा। एम्स के उपसंचालक संदेश जैन ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि यह सुविधा कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत प्रारंभ की जाएगी। नवंबर से रोगियों को इस सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। एम्स में आएगी ये 6 अत्याधुनिक मशीनें बाई प्लेन कार्डियक कैथलैब यह एक नई लैब है जो एक साथ दो अलग-अलग एंगल से एक्सरे वाली इमेज देती है। इस रिपोर्ट को देखकर डॉक्टर हार्ट और धमनियों का दो तरह का दृश्य देख सकता है। बच्चों में जन्मजात हृदय रोग जटिल ब्लॉकेज, वाल्व रिपेयर, ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों के बारे में आसानी से जानकारी लग पाती है। होल्टर मशीन इस मशीन के द्वारा लगातार 24 से 48 घंटे तक हार्टबीट को रिकॉर्ड किया जाता है। इससे हार्ट की धड़कन में अनियमितता जैसी समस्याओं का पता चल जाता है। वर्तमान में इस जांच में मरीजों को दो महीने तक इंतजार करना पड़ता है। आधुनिक ट्रेडमिल एक्सरसाइज मशीन यह मशीन हार्ट और फेफड़ों की क्षमता की जांच करती है। जब किसी रोगी का हार्ट सर्जरी होती है तो उसकी रिकवरी का आकलन किया जाता है। अभी इस जांच के लिए करीब 3 से 4 महीने इंतजार करना पड़ता है। ट्रांस ईसोफेगल इकोकार्डियोग्राफी मशीन इस मशीन के द्वारा हृदय की 2D, 3D और 4D तस्वीर निकाल कर आती हैं। जन्मजात हृदय दोष, हार्ट वाल्व ऑपरेशन के लिए यह बेहद कारगर है। ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी इस तंत्र के द्वारा धमनियों का 3D दृश्य मिलता है। रक्त का प्रवाह को मापा जाता है। दवा देने के दौरान मरीज को इसका असर होगा या नहीं? इस जांच में आसानी होती है। इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड तंत्र इस तंत्र के द्वारा धमनियों के अंदर की बहुत ही हाई डेफिनेशन वाली फोटो मिल जाती है। इससे ब्लॉकेज का सही आकलन किया जा सकता है। इस मशीन के द्वारा डॉक्टर अनुमान लगाते हैं कि क्या स्टंट के द्वारा इलाज संभव है या दवा देने जरूरत है। मरीजों की लंबी कतार आपको बता दें कि वर्तमान में भोपाल एम्स में दो कैथलैब हैं। लेकिन यहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बार हार्ट अटैक के पेशेंट को तुरंत इलाज नहीं मिल पाता। 22 करोड़ से मिलने वाली 6 मशीन से मरीज का इंतजार खत्म होगा।वर्तमान में एम्स भोपाल में हर दिन करीब 200 से 300 एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर जैसी इलाज होते हैं। मशीनों की कमी के चलते मरीजों को इको और कैथलैब प्रोसीजर के लिए ढाई से तीन माह तक इंतजार करना पड़ता है। नई कैथ लैब और मशीनों के जुड़ने से वेटिंग टाइम लगभग आधा रह जाएगा। इसके साथ ही हमीदिया में भी नई कैथलेब शुरू होने दिल के रोगियों को काफी मदद मिलेगी

अरविंद सैनी का बयान: प्रधानमंत्री मोदी ने GST सुधारों से बदल दी देश की टैक्स व्यवस्था

हरियाणा देश की मोदी सरकार ने जी.एस.टी दरों में कमी करके जहां देश के विभिन्न वर्गों को राहत देते हुए विपक्ष को मुद्दाविहीन कर दिया है तो वहीं महंगाई को कम करने की दशा में एक बड़ी पहल की है । अहम बात ये है कि भारत पर टैरिफ लगाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से जितना अमेरिका मुखर था, उतनी ही मुखरता से भारत के अंदर विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश में लगे थे। विपक्षी नेताओं ने अमेरिकी टैरिफ के गुब्बारे में महंगाई और बेरोज़गारी की नकारात्मक हवा भर इसे और बड़ा बनाने की कोशिश की, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने नए जी.एस.टी रिफार्म्स से न केवल अमेरिकी टैरिफ के गुब्बारे को फोड़ा, बल्कि विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे मंहगाई और बेरोज़गारी बढ़ने के नैरेटिव को भी धराशाई कर दिया। सच तो यह है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार देखा है। जी.एस.टी और अब नेक्स्ट जेन जी.एस.टी सुधारों ने आम उपभोक्ताओं को राहत, व्यापारियों को सरलता और देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दी है। यह सुधार व्यवस्था में सरलीकरण लाएगा जो व्यापार करने के माहौल को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाएगा।  हालांकि विपक्ष (खासकर कांग्रेस) मोदी सरकार के इस एतिहासिक नए जीएसटी रिफार्म्स को पचा नहीं पा रहा है और बिहार चुनाव को इससे जोड़कर दिखाना चाह रहा है। इसी चाह में कांग्रेस बीड़ी और बिहार की तुलना भी कर चुकी है। ये बात और है कि जब कांग्रेस का यह दांव उलटा पड़ गया तो केरल कांग्रेस ने ट्वीट कर इस पर माफ़ी भी मांगी है। खैर ये कांग्रेस और विपक्षी दलों की मानसिकता बन गई है। विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में इतने अंधे हो चुके हैं कि अब उन्हें पता ही नहीं चलता कि मोदी सरकार का विरोध करते-करते कब देश का विरोध करने लग जाते हैं। ट्रंप के सुर में सुर मिलाते हुए राहुल गांधी का भारत को डेड अर्थव्यवस्था कहना इसका ताजा उदाहरण है। अमेरिकी टैरिफ लागू होने के दौरान भी भारत की बढ़ती जी.डी.पी भारत को डेड इकोनोमी कहने वालों के मुंह पर तमाचा है। इसी तरह नए जीएसटी रिफार्म्स जहां आम जनता को राहत और बचत देते दिख रहे हैं, वहीं विपक्षी पार्टियों को इसके बाद वोटों में चपत लगती दिख रही है।  जीएसटी में नेक्स्ट जेन रिफॉर्म्स का तोहफा 22 सितंबर, नवरात्रि के पहले दिन से मिलने जा रहा है। जीएसटी में यह सुधार माँग बढ़ाएगा, निवेश लाएगा और करोड़ों युवाओं को रोज़गार देगा। मोदी सरकार के इस दावे पर देश विश्वास करता दिख रहा है कि उद्योग जगत जीएसटी दरों में कमी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाएंगा।    हरियाणा भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी अरविंद सैनी ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने केवल वादे किए, लेकिन सुधार कभी लागू नहीं कर पाई। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को भरोसा दिया, घाटा होने पर क्षतिपूर्ति की गारंटी दी और एक राष्ट्र-एक कर का सपना साकार किया। दैनिक रोज़मर्रा की कई वस्तुओं, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, मेडिकल उपकरणों और जीवनरक्षक दवाओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। कपड़े, जूते, दवाइयाँ, फ्रिज-टीवी, कृषि उपकरण, घर निर्माण की सामग्री तक सब सस्ते हुए हैं। इस बदलाव से हमारे देश के युवा-युवतियों, महिलाओं, किसानों, कृषि उत्पादन, एमएसएमई क्षेत्र, उपभोक्ताओं, दुकानदारों और उद्योग चलाने वाले उद्यमियों सहित हर वर्ग को बड़ा लाभ मिलेगा। 2014 से पहले कांग्रेस की सरकारों के दौरान उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर जितना बोझ था, चाहे वह टैक्स का हो या कागजी झंझटों का, वह 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद लगातार कम होता गया। आज भारत की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत स्थिति में है कि बैंक के ब्याज दरों में कमी आई है, महंगाई दर में भारी गिरावट आई है और विकास दर ऐतिहासिक ऊँचाइयों पर पहुँची है। जब पूरी दुनिया आर्थिक सुस्ती से जूझ रही है, तब भारत 7.8% की दर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी। जीएसटी सुधारों का यह निर्णय देश को 2047 तक विकसित भारत के संकल्प की ओर ले जाता दिख रहा है। वैसे इन परिस्थितियों में नए जीएसटी रिफार्म्स कर पाना आसान नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने घाटा होने पर राज्यों को क्षतिपूर्ति की गारंटी दी और एक राष्ट्र-एक कर का सपना साकार किया।  रोज़मर्रा की वस्तुएँ, कपड़े, जूते, दवाइयाँ, बीमा, टू-व्हीलर से लेकर फ्रिज-टीवी तक सब सस्ते हुए हैं। मेडिकल उपकरणों और जीवनरक्षक दवाओं पर टैक्स शून्य कर दिया गया है। यह सुधार माँग बढ़ाएगा, निवेश लाएगा और करोड़ों युवाओं को रोज़गार देगा। आजादी के बाद पहली बार देश के टैक्स ढांचे में इतना बड़ा परिवर्तन किया गया है। व्यवस्था में सरलीकरण आएगा, जो व्यापार करने के माहौल को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाएगा।    15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री ने देश से वादा किया था कि अब भारत रुकेगा नहीं, झुकेगा नहीं, बल्कि आगे बढ़कर बड़े कदम उठाएगा। जो क्षमता देश में अब दिखाई दे रही है, वो क्षमता 2014 से पहले नहीं थी। उस समय देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर हालत में थी।  कांग्रेस के 10 वर्षों के शासन में भ्रष्टाचार तो खूब हुआ, लेकिन कोई ठोस और परिवर्तनकारी सुधार नहीं किए गए।  श्रद्धेय अटल जी ने एक राष्ट्र-एक कर की परिकल्पना की थी। उस समय देश में लगभग 30-35 तरह के टैक्स, ड्यूटी और लेवीस लागू थे। अटल जी चाहते थे कि इन सबको समेटकर एक टैक्स बने, लेकिन 2004 में वे दोबारा चुनकर नहीं आए और इसके बाद यूपीए सरकार सिर्फ वादे करती रही। कांग्रेस के वित्त मंत्री बार-बार घोषणा करते रहे कि वे एक टैक्स लाएंगे, लेकिन राज्य सरकारें उन पर विश्वास नहीं करती थीं। तब राज्यों को भरोसा नहीं था कि अगर इस सुधार से उनका राजस्व घटा या घाटा हुआ, तो केंद्र उनकी मदद करेगा।  लेकिन मोदी जी ने प्रधानमंत्री के रूप में राज्यों को विश्वास दिलाया कि जीएसटी लागू होने के बाद यदि किसी राज्य के राजस्व में कमी आती है या उसकी वृद्धि दर 14% से कम रहती है, तो केंद्र सरकार उसे कंपनसेशन के माध्यम से पूरा करेगी, वह भी पूरे 5 साल तक। यही विश्वास और यह गारंटी इस ऐतिहासिक सुधार को सफल बनाने में निर्णायक … Read more

सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर: समय खत्म होने से पहले करें यह फैसला

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में लौटने का अवसर दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल एक बार मिलेगी और इसके बाद दोबारा UPS में लौटना संभव नहीं होगा। सरकार ने कहा कि पात्र कर्मचारी और रिटायर कर्मचारी इस विकल्प का इस्तेमाल 30 सितंबर 2025 तक कर सकते हैं। तय समय सीमा के बाद यदि कोई कर्मचारी कदम नहीं उठाता है, तो उसे डिफॉल्ट रूप से UPS के अंतर्गत ही माना जाएगा। बता दें कि यह कदम उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो तय लाभ वाली UPS योजना से हटकर बाजार-आधारित NPS में जाना चाहते हैं। UPS निश्चित पेंशन, DA से जुड़ा महंगाई समायोजन, ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसे लाभ देता है, जबकि NPS कर्मचारियों को अधिक रिटर्न और निवेश में लचीलापन प्रदान करता है, लेकिन इसमें बाजार जोखिम भी शामिल रहता है। क्या हैं शर्तें बता दें कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए UPS से NPS में बदलाव को लेकर स्पष्ट शर्तें तय की हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह विकल्प केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकेगा और कर्मचारी इसके बाद दोबारा (UPS) में वापस नहीं लौट पाएंगे। बदलाव का निर्णय भी समय से पहले लेना होगा। कर्मचारी को यह विकल्प अपनी सेवानिवृत्ति से कम से कम एक वर्ष पहले या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) से कम से कम तीन महीने पहले, जो भी पहले हो, चुनना होगा। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों पर हटाए जाने, बर्खास्तगी, दंडस्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई चल रही हो, या जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो, वे इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे। कौन सा विकल्प चुने कर्मचारी वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किए गए पेंशन विकल्पों को लेकर अब स्पष्ट तुलना सामने आ गई है। जानकारों का कहना है कि UPS कर्मचारियों के लिए एक कम जोखिम वाला, सरकारी गारंटी वाला विकल्प है। इसमें पेंशन के साथ ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसी सुविधाएँ भी मिलती हैं। हालांकि, इसकी सीमाएं भी हैं—जैसे कि निवेश में लचीलापन कम होना, एकमुश्त निकासी का हिस्सा छोटा होना और ऊंचे रिटर्न की संभावना अपेक्षाकृत कम रहना। वहीं, नेंशनल पेंशन स्कीम (NPS) एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन स्कीम है, जिसमें निवेश इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी में किया जाता है। इससे कर्मचारियों को निवेश आवंटन पर ज्यादा नियंत्रण और बेहतर ग्रोथ की संभावना मिलती है। NPS में कर्मचारी अपनी पेंशन राशि में से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं, जबकि बाकी 40% से अनिवार्य रूप से एन्युइटी खरीदनी पड़ती है। इसमें कर लाभ भी शामिल हैं, जैसे धारा 80C और 80CCD के तहत छूट। लेकिन चूंकि यह बाजार से जुड़ा है, इसलिए इसमें जोखिम बना रहता है और UPS की तरह मुद्रास्फीति समायोजन या पारिवारिक पेंशन की सुविधा नहीं मिलती। तुलनात्मक रूप से देखें तो, UPS एक डिफाइंड बेनिफिट प्लान है, जिसमें पेंशन की गारंटी और DA से जुड़ा महंगाई भत्ता मिलता है। UPS में कर्मचारी को बेसिक वेतन + DA का 10% योगदान करना होता है, जबकि नियोक्ता (सरकार) 18.5% योगदान करती है। दूसरी ओर, NPS एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन प्लान है, जिसमें कर्मचारी भी 10% योगदान करते हैं लेकिन नियोक्ता का हिस्सा 14% होता है। UPS में पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युइटी उपलब्ध हैं, जबकि NPS में ये दोनों सुविधाएं नहीं हैं। इसके बदले NPS अधिक रिटर्न और निवेश की आजादी देता है, लेकिन जोखिम और अनिश्चितता भी साथ लाता है।

वैज्ञानिकों का दावा: रूस की कैंसर वैक्सीन ने सभी ट्रायल में सफलता दर्ज की

रूस  रूस ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नई सफलता हासिल की है. वहां की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) FMBA ने कैंसर की वैक्सीन तैयार की है. FMBD प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने कहा कि रूसी एंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. mRNA-बेस्ड इस वैक्सीन ने सभी प्रीक्लिनिकल टेस्ट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित हो गई है. इस टीके का प्रारंभिक लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होगा.  वैक्सीन ने पार किए सभी ट्रायल्स रिपोर्ट के अनुसार, रूस के कैंसर वैक्सीन ने शानदार प्रदर्शन किया है और FMBA की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) में इसकी घोषणा की है.  वैज्ञानिकों को अब अप्रूवल का इंतजार स्कवोर्त्सोवा ने कहा, 'यह शोध कई वर्षों तक चला जिसमें से पिछले तीन साल सिर्फ मैंडेटरी प्रीक्लिनिकल स्टडीज को ही समर्पित थे. वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. हम आधिकारिक स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि प्रीक्लिनिकल ट्रायल्स टीके की सुरक्षा, बार-बार इस्तेमाल के बावजूद इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं. शोधकर्ताओं ने इस दौरान ट्यूमर के आकार में कमी और ट्यूमर के विकास में कमी देखी. इसके अलावा अध्ययनों ने टीके के कारण मरीज की जीवित रहने की दर में वृद्धि का भी संकेत दिया. कई और प्रकार के कैंसर के टीकों पर भी काम जारी इस टीके का शुरुआती टार्गेट कोलोरेक्टल कैंसर होगा. इसके अलावा ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर) और विशिष्ट प्रकार के मेलेनोमा जिनमें ऑक्यूलर मेलेनोमा (एक प्रकार का आंख का कैंसर) के लिए टीके विकसित करने में उम्मीद बांधने वाली प्रगति हुई है जो वर्तमान में अपनी एंडवांस स्टेज पर हैं.

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- सुमन सखी चैटबॉट नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम

प्रारंभिक चरण में फोकस मातृ स्वास्थ्य पर अगले चरण में समस्त स्वास्थ्य सेवाओं में होगा विस्तार भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया विज़न के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं में नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश में जल्द ही सुमन सखी चैटबॉट सेवा प्रारंभ की जा रही है। सुमन सखी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट होगा, जो नागरिकों को गर्भावस्था के दौरान देखभाल, उच्च जोखिम कारकों की जानकारी, तथा महिलाओं से संबंधित सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश में नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह सेवा न केवल योजनाओं की जानकारी और सेवाओं तक त्वरित पहुँच उपलब्ध कराएगी, बल्कि शासन की पारदर्शिता और जनविश्वास को भी मज़बूत करेगी। मिशन डायरेक्टर एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि सुमन सखी चैटबॉट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीएसईडीसी) के सहयोग से विकसित किया गया है। सुमन सखी चैटबॉट 24×7 उपलब्ध रहेगा और हिंदी भाषा में होगा, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएँ भाषा की किसी भी बाधा के बिना इसका लाभ उठा सकें। प्रारंभिक चरण में इसका फोकस मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर होगा और धीरे-धीरे अन्य प्रमुख योजनाएँ भी इसमें शामिल की जाएँगी। नागरिक इसे व्हाट्सएप के माध्यम से उपयोग कर सकेंगे।  

मऊगंज में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यू प्वाइंट से देखी दूधिया जलधारा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मऊगंज जिले के प्रवास पर नई गड़ी जनपद पंचायत के बहुती जल प्रपात का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वाटरफॉल के नजदीक जाकर व्यू प्वाइंट से जलप्रपात की गिरती हुई दूधिया जल धारा और वहा बनने वाले इंद्रधनुष की आभा को देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहुती जल प्रपात के समीप कार्यक्रम स्थल पर गौपूजन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव से जंगल में विचरण करने वाली गौमाताओं को अपनी एक आवाज में अपने पास बुलाने की कला रखने वाले रकरी गांव के गौसेवक सौखीलाल यादव ने भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम की दीदीओं द्वारा सम्मान कर उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बहुती में हुआ पारंपरिक स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बहुती पहुंचने पर पारंपरिक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मऊगंज की लोक कला की छात्राओं ने बघेली शैली नृत्य और स्थानीय लोक कलाकारों के दल ने अहिरहाई लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर स्वागत किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, पशुपालन डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री लखन पटेल, विधायक सर्वश्री गिरीश गौतम, दिव्यराज सिंह और प्रदीप पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, कमिश्नर रीवा श्री बी.एस. जामोद, आई.जी. श्री गौरव राजपूत, कलेक्टर श्री संजय जैन एवं पुलिस अधीक्षक श्री प्रजापति सहित नागरिक मौजूद थे। पर्यटक स्थल के रूप में किया जा रहा है विकसित कलेक्टर मऊगंज संजय जैन ने बताया कि बहुती जल प्रपात को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने एवं जन सुविधाओं के विकास के लिए 10 करोड़ रुपए लागत की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। कलेक्टर ने बातया कि बहुती प्रपात के अप स्ट्रीम में स्टॉप डैम का निर्माण प्रस्तावित है। स्टॉप डैम में जल का संचय होने से वाटर फॉल की जल धारा का बारह माह सदा अविरल प्रवाह बना रहेगा। प्रदेश का सबसे ऊँचा बहुती जल प्रपात बहुती जल प्रपात रीवा से 75 किलोमीटर दूर मऊगंज जिले में स्थित है। यह विन्ध्य क्षेत्र ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। बहुती में सेलर नदी 650 फिट की ऊंचाई से दो धाराओं में विभक्त होकर गिरती है। नीचे सुंदर कुंड और चारों ओर घने वन हैं। बहुती में अनंत जलराशि लंबवत चट्टानों पर गिरती है। जुलाई से सितम्बर माह तक इस प्रपात का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। प्रपात के समीप ही अष्टभुजा देवी का प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है। प्रयागराज और बनारस से सड़क मार्ग से सीधे जुड़ा होने से उत्तरप्रदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पहुंचते हैं। इसके पास भैंसहाई में प्रागैतिहासिक काल के भित्ति चित्र मिले हैं।  

नियुक्ति पत्र पाकर खुश हुए शिक्षक, मुख्यमंत्री योगी ने की प्रेरक बातें

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोकभवन में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) में चयनित 1510 अनुदेशकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कुछ चुनिंदा अनुदेशकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया, जबकि सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रम में सांसद और विधायक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया। प्रदेश के सभी जनपदों में भी भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां सांसद एवं विधायकगण सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर युवाओं के सपनों को साकार करने के साक्षी बने। उत्तर प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के मंत्र के साथ निरंतर कार्यरत है। देश के सबसे अधिक युवाओं वाले प्रदेश की युवा आकांक्षाओं को देखते हुए उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रोजगार मेलों के माध्यम से भी प्रदेश में 1736 कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें 4.13 लाख से अधिक युवाओं को 2537 कंपनियों में नौकरी का अवसर मिला है।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश को अनेक महानुभाव देने वाले प्रदेश को हमने बीमारू राज्य से ‍उबारा। हमने प्रदेश के नौजवानों का साफ सुथरा मंच दिया, जिससे उत्तर प्रदेश की अलग पहचान बनी है। उत्तर प्रदेश वर्ष 2017 से पहले देश के विकास के योगदान देने के मामले में निचली पायदान पर था और अब सभी अग्रणी राज्यों को पीछे छोड़कर लगातार आगे बढ़ रहा है। अब ‍उत्तर प्रदेश देश का ग्रोथ इंजन है और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में नियुक्त 1510 अनुदेशक ईमानदारी से काम पर प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम करें। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ चयन सेवा चयन आयोग की ओर से अनुदेशकों का परिणाम बीते दिनों घोषित किया गया था। इसमें 1510 अनुदेशकों का चयन हुआ। इस अवसर पर व्यावसायिक शिक्षा मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि यह अवसर न केवल चयनित अभ्यर्थियों के जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करेगा। बल्कि, प्रदेश सरकार के इस संकल्प का भी प्रमाण है कि योग्यता के आधार पर पारदर्शिता के साथ युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण हर जिले में किया गया। इस मौके पर व्यावसायिक शिक्षा मंत्री कपिल देव अग्रवाल, कौशल विकास विभाग के प्रमुख सचिव डा. हरिओम सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री यादव ने मऊगंज जिले के देवतालाब शिव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मऊगंज जिले के देवतालाब शिव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान आशुतोष का रुद्राभिषेक भी किया। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव से प्रदेश की निरंतर प्रगति और जनकल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिवकुंड का अवलोकन किया और इसका सौंदर्यीकरण कराए जाने की बात कही। मंदिर परिसर में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार बांकेलाल के शहनाई वादन की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, विधायक देवतालाब श्री गिरीश गौतम, विधायक सिरमौर श्री दिव्यराज सिंह, विधायक त्योंथर श्री सिद्धार्थ तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी सहित स्थानीय जन उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि विंध्य की धरा में मऊगंज जिले के देवतालाब शिव मंदिर का विशिष्ट स्थान है। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने केवल एक रात में एक ही पत्थर से शिव मंदिर का निर्माण किया था। रीवा-बनारस हाईवे पर स्थित देवतालाब शिव मंदिर में साल भर भक्तों की भीड़ रहती है। विंध्य में परंपरा रही है कि बद्रीनाथ और चारोंधाम की यात्रा का फल तभी मिलता है जब देवतालाब में भगवान शिव के दर्शन किए जाएं। चारधाम यात्रा के बाद भी लोग देवतालाब अवश्य जाते हैं।

बाढ़ से बेहाल पंजाब: प्रधानमंत्री मोदी पहुंचेंगे, जानिए किस हद तक होगा मदद पैकेज

पंजाब पंजाब में विनाशकारी बाढ़ ने हाहाकार मचा रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पंजाब में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक वह 9 सितंबर को पंजाब जाएंगे और बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। पीएम मोदी गुरदासपुर जाकर जमीनी स्तर पर हालात देखेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े राहत पैकेज का भी ऐलान कर सकते हैं। बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है, जबकि 1.75 लाख हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), सेना, सीमा सुरक्षा बल, पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। पंजाब दशकों में आई सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण सतलुज, ब्यास और रावी नदियों तथा मौसमी नालों के उफान के चलते यह स्थिति बनी है। इसके अलावा, हाल के दिनों में पंजाब में हुई भारी बारिश ने हालात को और गंभीर कर दिया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को पोंग बांध का जलस्तर मामूली घटकर 1,394.19 फुट दर्ज किया गया, हालांकि यह अब भी उसकी अधिकतम सीमा 1,390 फीट से चार फुट ऊपर है। शुक्रवार शाम बांध का जलस्तर 1,394.8 फुट था। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को बांध में पानी का प्रवाह 99,673 क्यूसेक था, जो घटकर 47,162 क्यूसेक रह गया, जबकि निकासी 99,673 क्यूसेक पर यथावत बनी रही। भाखड़ा बांध के मामले में शनिवार को जलस्तर 1,678.14 फुट दर्ज किया गया, जो शुक्रवार को 1,678.47 फुट था। सतलुज नदी पर बने इस बांध में पानी का प्रवाह 62,481 क्यूसेक और निकासी 52,000 क्यूसेक रही। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बाढ़ को पांच दशकों में सबसे भीषण बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब और पड़ोसी पहाड़ी राज्यों में लगातार हुई बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है, जिससे सभी जिलों के लगभग 2,000 गांव प्रभावित हुए हैं। ताजा बुलेटिन के अनुसार, 3.87 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 46 मौतों की पुष्टि हुई है। एक अगस्त से पांच सितंबर के बीच 14 जिलों से 43 मौतें दर्ज की गई थीं। कुल 23 जिलों के 1,996 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सबसे अधिक सात-सात मौतें होशियारपुर और अमृतसर से हुईं। इसके बाद पठानकोट में छह, बरनाला में पांच, लुधियाना और बठिंडा में चार-चार, मानसा में तीन, गुरदासपुर, रूपनगर और एसएएस नगर में दो-दो और पटियाला, संगरूर, फाजिल्का और फिरोजपुर से एक-एक मौत दर्ज की गई। पठानकोट में तीन लोग लापता हैं। इसी बीच, फिरोजपुर जिले के तल्ली गुलाम गांव का 50 वर्षीय व्यक्ति उफनती नदी की तेज धारा में बह गया और उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जिले में पानी का स्तर खतरनाक स्तर पर है और लगातार बाढ़ से गांवों में रहने वालों का जीवन कठिन हो गया है। बाढ़ से संबंधित यह आंकड़े एक अगस्त से छह सितंबर तक की अवधि के हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 22,854 लोगों को प्रभावित इलाकों से निकाला जा चुका है। चीमा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि क्षेत्र को 18 जिलों में भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे, मकानों और पशुधन को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि घग्गर नदी का जलस्तर भी 750 फुट के खतरे के निशान को पार कर गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने इस अभूतपूर्व बाढ़ पर तुरंत कार्रवाई करते हुए संवेदनशील रवैया अपनाया है। मंत्री ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से जवाबदेही और समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि इस संकट के लिए "राजनीतिक अवसरवाद" के बजाय सहयोगात्मक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। चीमा ने कहा कि तबाही के बावजूद पंजाब सरकार ने तेज और समन्वित तरीके से कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि राज्यभर में लगभग 200 राहत शिविर लगाए गए हैं, जहां 7,000 से अधिक विस्थापित लोगों को शरण दी गई है। एनडीआरएफ की 24 और एसडीआरएफ की दो टीमें, 144 नौकाओं की मदद से राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर शनिवार को निशाना साधते हुए कहा कि वह बाढ़ के लिए नदियों में अवैध खनन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि भाजपा नेता वित्तीय मदद की घोषणा करने के बजाय सिर्फ “फोटो खिंचवाने” के लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करते हैं। ‘आप’ ने भाजपा पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया और कहा कि चौहान ने बाढ़ सहायता के लिए “एक पैसा” भी घोषित नहीं किया, जबकि राज्य सरकार ने केंद्र से ‘लंबति’ 60,000 करोड़ रुपये की मांग की है। ‘आप’ के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। वहीं होशियारपुर जिले में टांडा और मुकेरियां उप-विभागों के निचले इलाकों में भारी नुकसान हुआ है, जहां धान, गन्ना और मक्का जैसी फसलों को भारी क्षति हुई है। उपायुक्त आशिका जैन ने कहा कि नुकसान का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा दिया जाएगा और समय पर राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग समन्वय से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। इस बीच, कपूरथला जिले के उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि ब्यास नदी में पानी का प्रवाह 1.72 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। 

बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए MP सीएम, 5 करोड़ की सहायता और राहत सामग्री भेजी

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने छत्तीसगढ़ में बाढ़ प्रभावित जिले दंतेवाड़ा के लिए 5 करोड़ की सहायता राशि दी है। एमपी से राहत सामग्री लेकर एक ट्रेन छत्तीसगढ़ रवाना होगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन ने कहा-छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा इलाके में बाढ़ के हालात हैं। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से 5 करोड़ की सहायता राशि सीएम फंड के लिए दी है। राहत सामग्री लेकर ट्रेन भी रवाना हो रही है। मध्य प्रदेश पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के साथ खड़ा है और भी जरूरत होगी तो मध्य प्रदेश की ओर से सहायता प्रदान दी जाएगी। प्रधानमंत्री जी की भावना है दुख और परेशानी के समय सभी सरकारें सहयोग करें। इसी भावना के तहत पड़ोसी राज्य होने के नाते पड़ोसी धर्म का निर्वहन कर रहे हैं