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संस्कृत हमारी विरासत का आधार, इसे संरक्षित करना सबकी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन में हुए शामिल रायपुर भारतीय संस्कृति की आत्मा संस्कृत में निहित है, जो हमें विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। संस्कृत भाषा व्याकरण, दर्शन और विज्ञान की नींव है, जो तार्किक चिंतन को बढ़ावा देती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के संजय नगर स्थित सरयूपारीण ब्राह्मण सभा भवन में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी प्रासंगिक और उपयोगी है। संस्कृत भाषा और साहित्य हमारी विरासत का आधार हैं, जिन्हें हमें संरक्षित और संवर्धित करना चाहिए।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देववाणी संस्कृत पर चर्चा के साथ यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने का एक महान प्रयास है। मुख्यमंत्री साय ने संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ और सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा में संस्कृत भाषा को शामिल करने से विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास सुनिश्चित होगा। संस्कृत में वेद, उपनिषद और पुराण जैसे ग्रंथों का विशाल भंडार है, जो दर्शन, विज्ञान और जीवन-मूल्यों का संदेश देते हैं। वेदों में वर्णित आयुर्वेद, गणित और ज्योतिष आज भी प्रासंगिक हैं और शोध का विषय हो सकते हैं। इन ग्रंथों में कर्म, ज्ञान और भक्ति के सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रतिपादित हैं, जो आधुनिक जीवन में शांति और संतुलन ला सकते हैं।ऐसे में संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वेदों और उपनिषदों के ज्ञान को अपनाकर हम अपनी विरासत को संजोने के साथ-साथ अपने जीवन को भी समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं को संस्कृत साहित्य से जोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि वे इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचा सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को आकर्षक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है। राज्य में संस्कृत विद्वानों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से हमें संस्कृत विद्या के प्रचार-प्रसार और अगली पीढ़ी को जोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने सरयूपारीण ब्राह्मण सभा, छत्तीसगढ़ के प्रचार पत्रक का विमोचन भी किया। विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन का आयोजन संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ एवं सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।  सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्कृत भारती के प्रांताध्यक्ष डॉ. दादू भाई त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक प्रमाण मिलते हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि एक समय संस्कृत जनभाषा के रूप में प्रचलित थी। छत्तीसगढ़ी भाषा का संस्कृत से सीधा संबंध है। छत्तीसगढ़ी में पाणिनि व्याकरण की कई धातुओं का सीधा प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरगुजा क्षेत्र में सर्वाधिक आदिवासी विद्यार्थी संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में सरयूपारीण ब्राह्मण समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। इनमें गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्लेषा शुक्ला, उत्कृष्ट तैराक अनन्त द्विवेदी तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला शामिल थे। सम्मेलन को दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला और अखिल भारतीय संस्कृत भारती शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीराम महादेव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. सतेंद्र सिंह सेंगर, अजय तिवारी, बद्रीप्रसाद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संस्कृत शिक्षकगण, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित थे।

मंत्री देवांगन ने छात्रावास का व्यवस्थित व सुचारू संचालन हेतु कॉलेज प्रबंधन को दी शुभकामनाएं

रायपुर : कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में कन्या छात्रावास  शुभारंभ कार्यक्रम का हुआ आयोजन मुख्य आतिथ्य में कन्या छात्रावास  शुभारंभ कार्यक्रम का हुआ आयोजन छात्रावास का व्यवस्थित व सुचारू संचालन हेतु कॉलेज प्रबंधन को दी शुभकामनाएं छात्रावास संचालन से दूर दराज क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को मिलेगा लाभ:- मंत्री देवांगन छात्रावास में प्रवेश हेतु निर्धारित राशि का भुगतान करने में असक्षम,पिछड़े परिवार की योग्य छात्रा की डीएमएफ से  की जायेगी मदद : – कलेक्टर वसंत पीवीटीजी वर्ग की महिलाओं को कन्या छात्रावासों में चतुर्थ श्रेणी पद पर प्रदान की गई नियुक्ति पत्र पीजी कॉलेज में 100 व 50 सीटर एवं मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में 100 सीटर कन्या छात्रावास का हुआ शुभारंभ रायपुर शासकीय इंजीनियर विश्वेसरैया स्नाकोत्तर महाविद्यालय  परिसर कोरबा में कल वाणिज्य, उद्योग, सार्वजिनक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी) व श्रम मंत्री छत्तीसगढ़ शासन लखन लाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में कन्या छात्रावास का शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मंत्री देवांगन ने शासकीय ई व्ही पी जी कॉलेज के 100 व 50 सीटर एवं शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय के 100 सीटर कन्या छात्रावास के जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ किया एवं रिबन काटकर संस्थाओं में कन्या छात्रावास संचालन कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन एवं सभी छात्राओं को बधाई देते हुए छात्रावास के बेहतर  संचालन हेतु  शुभकामनाएं दी। कैबिनेट मंत्री देवांगन ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए  हुए कहा कि उन्होंने डीएमएफ राशि का उपयोग करने का अधिकार जिला को दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप डीएमएफ राशि का उपयोग जिले में अनेक महत्वपूर्ण कार्यो में किया जा रहा है। पहुँचविहीन, दूरस्थ  क्षेत्रों में अनेक स्थानों में जरूरत अनुसार नए सड़क, पुल पुलिया, स्कूल, आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जा रहा है। जिले के सभी शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक शाला में सबेरे पौष्टिक नास्ता का वितरण, पीवीटीजी वर्ग के शिक्षित युवाओं को रोजगार, मेधावी छात्रों को निःशुल्क नीट व जेईई की तैयारी जैसे अनेक कार्य डीएमएफ के माध्यम से किए जा रहे है।  मंत्री देवांगन ने छात्रावास संचालन से होने वाले लाभ के बारे में बताते हुए कहा कि जिले के दूर दराज क्षेत्रों से छात्राएं अध्ययन के लिए आते है, छात्रावास के संचालन से निश्चित ही उन्हें लाभ मिलेगा। इससे छात्राओं की समय और धन की बचत होगी, जिससे उनका पढ़ाई और रुचिकर होगी। उन्होंने कहा कि इस छात्रावास का संचालन रियायती दरों पर किया जा रहा है, जिससे छात्राएं इसका लाभ उठा सकें साथ ही अति पिछड़ी वर्ग से सम्बंधित छात्राएं जो छात्रावास की राशि जमा करने में असक्षम हो ऐसे योग्य छात्राओं के छात्रावास का खर्च जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ से उठाया जाएगा।  देवांगन ने कहा कि आज के छात्र कल के भविष्य है, बेटियों से दो कुल का नाम रौशन होता है, एक बेटी के शिक्षित होने से पूरा परिवार शिक्षित बनता है। इसलिए आप सभी मन लगाकर अपना पढ़ाई करिए। उन्होंने छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यकताओं की पूर्ति शीघ्र करने की बात कही। जिससे छात्राएं सुरक्षित माहौल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।  उन्होंने हॉस्टल का संचालन बेहतर ढंग से करने के निर्देश कॉलेज प्रशासन को दिए एवं हॉस्टल की व्यवस्था को और अधिक मजबूती प्रदान करने हेतु मिल जुलकर प्रयास करने की बात कही। विधायक कटघोरा प्रेमचंद पटेल एवं महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने भी छात्रावास संचालन के लिए जिला प्रशासन की पहल की प्रशंसा करते हुए छात्राओं को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा हेतु कन्या छात्रावास प्रारम्भ करने की मांग लंबे समय से आती रही है। डीएमएफ से  छात्रावास का जीर्णोद्धार व जरूरत की चीजों की पूर्ति कर छात्राओं को सुव्यवस्थित हॉस्टल सौंपा गया है। गर्ल्स हॉस्टल शुरू होने से छात्राओं का उच्च अध्ययन का मार्ग आसान होगा और उनके बेहतर भविष्य की पथ प्रदर्शित होगी। उन्होंने हॉस्टल के उचित व प्रभावी ढंग से संचालन करने एवं ग्रामीण आदिवासी क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को लाभांवित करने के लिए कहा। कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा कि जिला प्रशासन की मंशा थी कि इस सत्र से महाविद्यालय में हॉस्टल संचालन का कार्य प्रारंभ हो, जिससे कॉलेज की छात्राओं को इसका लाभ मिल सकें।  लाइट एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। इस दौरान कैबिनेट मंत्री देवांगन सहित अन्य अतिथियों द्वारा कोरबा व कटघोरा के शासकीय महाविद्यालयों के कन्या छात्रावासों में पहाड़ी कोरवा वर्ग की नियुक्त चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। जिसमें सुमित्रा बाई, सरोजनी कुमारी, सामायन कुमारी, फगनी, कुसुम, किरण शामिल है। मंत्री देवांगन ने सभी महिला कर्मचारियों को मन लगाकर कार्य करने हेतु प्रेरित किया। पीवीटीजी वर्ग की सभी महिला कर्मचारियों ने रोजगार उपलब्ध कराकर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने हेतु मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कैबिनेट मंत्री देवांगन एवं जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर एसडीएम कोरबा सरोज महिलांगे, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग श्रीकांत कसेर, प्राचार्य पीजी कॉलेज डॉ शिखा शर्मा, प्राचार्य मिनीमाता कॉलेज राजेन्द्र सिंह, डॉ राजीव सिंह, अन्य जनप्रतिनिधि , जनभागीदारी के सदस्य, महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं छात्राएं उपस्थित थी।  गौरतलब है कि जिला प्रशासन द्वारा दोनों महाविद्यालयो के कन्या छात्रावास के संचालन हेतु लगभग 3 करोड़ की राशि प्रदान की गई है। जिसमें  शासकीय ई व्ही पी जी कॉलेज में 100 सीटर कन्या छात्रावास के जीर्णोद्धार कार्य हेतु 31.40 लाख एवं संचालन हेतु आवश्यक सामग्री क्रय के लिए 57 लाख की राशि प्रदान की गई है। इसी प्रकार शासकीय ई व्ही पी जी कॉलेज में 50 सीटर कन्या छात्रावास के जीर्णोद्धार कार्य हेतु 38.13 लाख एवं संचालन हेतु आवश्यक सामग्री क्रय हेतु 41 लाख की राशि एवं शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय कोरबा में 100 सीटर कन्या छात्रावास के जीर्णोद्धार कार्य हेतु 58.30 लाख एवं संचालन हेतु आवश्यक सामग्री क्रय हेतु 57 लाख की राशि प्रदान की गई है।

CM डॉ. यादव बोले- देवतालाब, बनारस और प्रयागराज है धार्मिक आस्था का अनूठा त्रिकोण

देवतालाब, बनारस और प्रयागराज धार्मिक क्षेत्र का अनूठा त्रिकोण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देवतालाब शिव मंदिर में होगा शिवलोक का निर्माण बहुती जल प्रपात को विकसित करेगा पर्यटन विकास निगम देवतालाब में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का होगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन देवतालाब और नईगढ़ी में बनेंगे नए तहसील भवन हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना से विंध्य के चार जिलों में 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होगी सिंचाई लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद से 1500 रुपए प्रतिमाह अंतरित किए जाएंगे मुख्यमंत्री ने देवतालाब में 241 करोड़ 33 लाख रुपए के निर्माण कार्यों का किया शिलान्यास और लोकार्पण मऊगंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहा है कि शिव मंदिर देवतालाब अदभुत है। यहां पांच तत्वों का आभास होता है। ऐसा अद्भुत मंदिर केवल विश्वकर्मा जी ही बना सकते हैं। देवतालाब, बनारस और प्रयागराज महत्वपूर्ण धार्मिक त्रिकोण हैं। देवतालाब आस्था, इतिहास और आनंद का संगम है। यह श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि है। ऐसी मान्यता है कि देवतालाब के शिव का दर्शन करने पर ही चारधाम की यात्रा का फल मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मऊगंज के देवतालाब स्टेडियम में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 241 करोड़ 33 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास कर विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये और मऊगंज को विकास की अनेक सौगातें देते हुए घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्यापूजन कर मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारे गांव स्वावलम्बन की अद्भुत मिसाल हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में स्वदेशी को अपनाते हुए आत्मनिर्भरता और स्वावलम्बन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश एकजुट है। हमारी इस सामर्थ्य के परिणामस्वरूप ही देश की कीर्ति गाथा सम्पूर्ण विश्व में गूंज रही है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का कथन की "21वीं सदी भारत की होगी" साकार हो रहा है। गर्व का विषय है कि स्वामी विवेकानंद अर्थात श्रद्धेय नरेन्द्र नाथ दत्त की भावना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चरितार्थ किया है। देश के गरीब, युवा, अन्नदात और महिलाओं का कल्याण तथा विकास तपोनिष्ट प्रधानमंत्री मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसी माह प्रदेश आगमन के लिए स्वीकृति प्रदान की है। राज्य सरकार ने प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में विकास और जनकल्याण के लिए कभी भी संसाधनों की कमी नहीं होने दी, इसी का परिणाम है कि प्रदेश में चहुंओर विकास का परचम लहरा रहा है। जबकि अन्य दलों की सरकारें विकास के लिए सदैव संसाधनों के अभाव का बहाना बनाती रहीं। विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत है केंद्र बिंदु मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रयागराज और काशी विश्वनाथ के बीच बसा यह स्थान देवताओं की अभिरूचि की अभिव्यक्ति है। उनके स्वयं के लिए भी देवतालाब आगमन सदैव सुखद और भाग्यशाली रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ने विश्व को मानवता का विचार देते हुए जीवन जीने का सही मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में भी प्रधानमंत्री मोदी की प्रभावशीलता के परिणाम स्वरूप विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत केंद्र बिंदु बना हुआ है। यह हम सबके लिए गर्व-गौरव और स्वाभिमान का विषय है कि अमेरिका हो या दुनिया का कोई भी अन्य बड़ा देश, सभी प्रधानमंत्री मोदी की स्वीकार्यता के लिए उत्सुक हैं। खेत में किसान और सीमा पर जवान का सम्मान हमारी सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेत में किसान और सीमा पर जवान दोनों का सम्मान हमारी सरकार के लिए सर्वोपरि है। किसान सम्मान निधि तथा अन्य प्रोत्साहन गतिविधियों के माध्यम से राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। पर्याप्त सिंचाई और बिजली की उपलब्धता प्रदेश के सभी क्षेत्रों में सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना मंजूर की गई है। जिससे रीवा, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज जिलों की एक लाख 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। रीवा के सोलर प्लांट की बिजली से दिल्ली की मेट्रो रेल दौड़ रही है। मऊगंज के घुरेहटा में बाबा रामदेव के पतंजलि संस्थान द्वारा एक हजार करोड़ रुपए की लागत से कृषि पर आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। इससे लाखों किसान लाभान्वित होंगे। उज्ज्वला गैस योजना से 64 हजार से अधिक गैस के कनेक्शन दिए गए हैं। मऊगंज में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 44 हजार गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के आवास मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों के खाते में जारी की जा रही राशि दीपावली के बाद से 1500 रुपए प्रतिमाह की जाएगी, जिसे वर्ष 2028 तक प्रतिमाह 3 हजार रुपए किया जायेगा। मऊगंज को दी अनेक सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज जिले और देवतालाब विधानसभा क्षेत्र को अनेक सौगातें दीं। मुख्यमंत्री ने देवतालाब शिव मंदिर में शिवलोक के निर्माण और नईगढ़ी एवं देवतालाब में तहसील भवन निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवतालाब के अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जायेगा। देवतालाब के शासकीय महाविद्यालय में ऑडिटोरियम और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया जाएगा। अनुसूचित जाति और जनजाति विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास भवन बनाए जाएंगे। बहुती जल प्रपात को पर्यटन विकास निगम के माध्यम से विकसित किया जायेगा। अष्टभुजी माता मंदिर में सौंदर्यीकरण और जनजाति अंचल में टीपा बदोर से गढ़वा रोड तक 11 किलोमीटर की सड़क बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में बनारस से आये लोक कलाकारों द्वारा दी गई सांगीतिक प्रस्तुति की सराहना की और लोक कलाकारों को 25 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा की। लोक नृत्य प्रस्तुत करने वाले दल के प्रत्येक सदस्य को 5-5 हजार रूपए और स्वागत गीत गाने वाली लोक गायिका राखी द्विवेदी को 50 हजार रूपए देने की घोषणा की। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने 2 साल से कम समय में जो विकास किया है वह ऐतिहासिक है। उन्होंने विकास योजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी। आज मऊगंज को 241 करोड़ रुपए की सौगात मिली है। क्षेत्र में सड़क, नहर और माइक्रो इरिगेशन परियोजना से विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने … Read more

शेयर बाजार में उथल-पुथल? ग्लोबल सेंटीमेंट और महंगाई के आंकड़ों से खुला भविष्य

मुंबई  स्थानीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह ग्लोबल सेंटीमेंट, विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियों और महंगाई के आंकड़ों से तय होगी। एक्सपर्ट्स ने यह राय जताई है। एक एक्सपर्ट्स ने कहा कि मजबूत घरेलू वृहद आर्थिक आंकड़ों और नीतिगत सुधारों के समर्थन से पिछले सप्ताह बेंचमार्क सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। क्या है एक्सपर्ट्स की राय? रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट रिसर्च अजित मिश्रा ने कहा, “इस सप्ताह भी घरेलू और वैश्विक स्तर पर काफी आंकड़े आएंगे। घरेलू मोर्चे पर मुद्रास्फीति का आंकड़ा 12 सितंबर को जारी किया जाएगा।” मिश्रा ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर अमेरिका के महत्वपूर्ण आंकड़ों पर नजर रहेगी। इनमें उपभोक्ता मुद्रास्फीति, बेरोजगारी के दावे और उपभोक्ता धारणा शामिल हैं, जो फेडरल रिजर्व की नीतिगत अपेक्षाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई भी नई सूचना बाजार की धारणा को और मजबूत कर सकती है। पिछले हफ्ते शेयर बाजार में दिखी थी तेजी पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 901.11 अंक या 1.12 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 314.15 अंक या 1.28 प्रतिशत के लाभ में रहा। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के वरिष्ठ तकनीकी एक्सपर्ट प्रवेश गौड़ ने कहा, “आगे की ओर देखते हुए, भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह सतर्क और आशावादी रुख के साथ शुरुआत कर सकता हैं। निवेशक विशेष रूप से उपभोग-आधारित और पूंजीगत व्यय-आधारित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।” इसी महीने होनी है फेड रिजर्व की मीटिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये-डॉलर का रुख भी इस सप्ताह बाजार का रुख तय करेगा। मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा, ‘‘यह सप्ताह भारतीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती की घोषणा एक संभावित प्रोत्साहन के रूप में काम कर रही है जो बाजार की धारणा को बेहतर बना सकती है और क्षेत्रीय स्तर पर तेजी ला सकती है, जिससे निकट भविष्य में शुल्क की नकारात्मक धारणा का मुकाबला किया जा सकता है।’’ शेयर बाजार के लिए अगला बड़ा घटनाक्रम 16-17 सितंबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख-संपदा प्रबंधन सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘‘इस सप्ताह के प्रमुख वृहद आंकड़ों में भारत और अमेरिका की मुद्रास्फीति, ईसीबी (यूरोपीय केंद्रीय बैंक) का ब्याज दर पर निर्णय और जापान की दूसरी तिमाही की जीडीपी आंकड़े शामिल हैं।’’

हॉकी एशिया कप 2025: भारत ने जीता खिताब, PM मोदी बोले- गर्व का पल, खिलाड़ियों को मिली लाखों की इनामी राशि

नईदिल्ली  हॉकी एशिया कप 2025 के फाइनल मुकाबलें में भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को करारी शिकस्त दी. बिहार के राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय हॉकी टीम ने साउथ कोरिया को 4-1 के अंतर से पटखनी दी. इस जीत के साथ ही टीम ने अगले साल यानी 2026 में बेल्जियम और नीदरलैंड द्वारा संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाले विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर लिया है. भारत ने चौथी बार हॉकी एशिया कप के खिताब पर अपना कब्जा जमाया है. ये जीत इसलिए भी खास है क्योंकि भारत ने 5 बार की चैम्पियन साउथ कोरिया को शिकस्त दी है. इससे पहले 2017 में मलेशिया को हराकर भारत ने एशिया कप जीता था.  ऐसे रहा दोनों टीमों के बीच मुकाबला इस फाइनल मुकाबले के पहले क्वार्टर के पहले ही मिनट में भारत के सुखजीत सिंह ने गोल दागा. पहला क्वार्टर खत्म होने के बाद भारत 1-0 से आगे रहा. भारत ने दोनों क्वार्टर में 1-1 गोल दागा और 2-0 की बढ़त बना ली. हाफ टाइम तक भारत का स्कोर 2-0 रहा. साउथ कोरिया ने अटैकिंग खेल दिखाया लेकिन वो गोल नहीं कर सके.  तीसरे क्वार्टर के आखिरी मिनट में भारत ने फिर गोल दागा और बढ़त 3-0 की कर ली. चौथे क्वार्टर के 50वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला. रोहिदास ने मौके को भुनाया और गोल दाग दिया. लेकिन इसी क्वार्टर में साउथ कोरिया ने भी एक गोल दागा. लेकिन भारत की बढ़त 4-1 की हो चुकी थी. इसके बाद भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को गोल नहीं दागने दिया और डिफेंसिव अप्रोच अपनाया. आखिरकार भारत ने जीत हासिल कर ली. दोनों टीमों ने ऐसे हासिल किया था फाइनल का टिकट भारतीय हॉकी टीम ने अपने आखिरी सुपर-4 मैच में चीन को 7-0 से हराया और फाइनल में जगह बनाई. लीग में भारत का सफर अजेय रहा था. वहीं दूसरी तरफ कोरिया ने आखिरी सुपर-4 मैच में मलेशिया को 4-3 से हराकर दूसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई थी. ऐसा रहा है एशिया कप में भारत का इतिहास भारत ने अब तक 2003, 2007, 2017 के बाद अब 2025 में चौथी बार एशिया कप का टाइटल अपने नाम किया है. टीम 1982, 1985, 1989, 1994 और 2013 में 5 बार उपविजेता भी रही है. 

39 दिनों की आस्था: महाकाल के दरबार में सवा करोड़ भक्तों ने नवाया शीश, चढ़े 30 करोड़

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण-भाद्रपद मास में भगवान महाकाल के दर्शन करने आए भक्तों की भेंट से राजाधिराज महाकाल का खजाना एक बार फिर भर गया है। मंदिर समिति को 29 करोड़ 61 लाख रुपये की आय हुई है, जो बीते तीन सालों में (श्रावण-भाद्रपद मास में) सर्वाधिक है। इस साल 39 दिनों चले महापर्व के दौरान भक्तों की संख्या ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। देश-विदेश से आए सवा करोड़ भक्त मंदिर प्रशासन के अनुसार इस दौरान देश विदेश से आए सवा करोड़ भक्तों ने अवंतिकानाथ को शीश नवाया। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया महाकालेश्वर मंदिर में 11 जुलाई से 18 अगस्त तक श्रावण-भाद्रपद मास का उल्लास छाया रहा। हर दिन आए तीन लाख से ज्यादा भक्त 39 दिनों तक चले इस महा महोत्सव में प्रतिदिन औसतन सवा तीन लाख भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालुओं की यह संख्या वर्ष 2023-24 के मुकाबले 38.9 प्रतिशत अधिक रही। वर्ष 2023 में प्रतिदिन औसतन ढाई लाख दर्शनार्थियों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए थे।   इस बार देखी गई आय में बढ़ोतरी वर्ष 2024 में भक्तों की संख्या कम रही। प्रतिदिन औसतन सवा दो लाख भक्तों ने ही भगवान महाकाल के दर्शन किए थे। दर्शनार्थियों की संख्या के अलावा इस बार शीघ्र दर्शन टिकट, लड्डू प्रसाद की बिक्री, भेंट पेटी में आई दान राशि तथा अन्य स्रोत से हुई आय में भी बीते सालों के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। मंदिर को शीघ्र दर्शन टिकट मद में 10.79 करोड़ रुपये, लड्डू प्रसाद विक्रय से 10.13 करोड़ रुपये की आय हुई। जबकि भेंट पेटियों से 5.23 करोड़ रुपये व दान से 3.26 करोड़ रुपये की आय हुई है।

जल जीवन मिशन: नल से पानी ने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी आसान बनाई

राजगढ़ जिले के समलाबेह गांव के परिवारों तक पहुँचा शुद्ध पेयजल भोपाल मध्यप्रदेश के दूरस्थ गांवों में नल से जल पहुंचने से जीवन आसान हो गया है। राजगढ़ जिले की ग्राम पंचायत चाँदपुरा का छोटा-सा दूरस्थ गांव समलाबेह इसका आदर्श उदाहरण है। नल से जल की सुविधा मिलने से यह गांव नई पहचान बन गया है। मोहनपुरा ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत यहां की 130 की आबादी और 26 परिवारों तक घर-घर पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल पहुँच रहा है। पानी की कमी से जूझता यह गांव अब सुविधा, स्वास्थ्य और खुशहाली की ओर अग्रसर है। कुछ वर्ष पहले तक इस गांव का जीवन बेहद कठिन था। पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को रोज़ सुबह-शाम कई किलोमीटर दूर कुओं से पानी लाना पड़ता था। बरसात के मौसम में जब गंदा पानी इन स्रोतों में मिल जाता था तो ग्रामीणों को दूषित जल पीना पड़ता था। गर्मियों में गांव में पानी का संकट बढ़ जाता था। सीमित जलस्रोतों पर निर्भरता के कारण आए दिन झगड़े की स्थिति भी बनती थी। इन परिस्थितियों से बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो रही थी। गांव की बदली तस्वीर समूह नलजल योजना ने इस गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। अब गांव के हर घर में पाइपलाइन से जलापूर्ति हो रही है। 26 घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। महिलाएँ बताती हैं कि पहले उनका आधा दिन पानी ढोने में ही निकल जाता था। अब यही समय परिवार और अन्य कार्यों को दे पा रही हैं। बच्चों को भी पानी लाने के काम से मुक्ति मिली है और उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी है। स्वास्थ्य के स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है। पहले बारिश के दिनों में डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियाँ आम थीं। अब ग्रामीण साफ पेयजल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और इलाज पर होने वाला खर्च भी कम हो गया है। मोहनपुरा समूह जल योजना केवल समलाबेह तक सीमित नहीं है। यह योजना राजगढ़ जिले के कई गांवों को कवर कर रही है, जिनमें हजारों परिवारों तक नल के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुँचाया जा रहा है। योजना का उद्देश्य पूरे क्षेत्र को स्थायी जलस्रोत उपलब्ध कराना है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक जीवन की नींव है। अब पानी के लिए नहीं करना पड़ता है संघर्ष: नौरंग बाई वर्षों तक पानी ढोने को मजबूर रहीं, गांव की 70 वर्षीय नौरंग बाई बताती हैं कि जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष पानी ही रहा। रोज़ाना सिर पर घड़ा रखकर पानी ढोना उनकी दिनचर्या थी। बरसों तक पानी की एक-एक बाल्टी के लिए कतार में खड़े रहना पड़ा। अब घर में नल लगने से यह संघर्ष बीते जमाने की बात हो गयी है। वे कहती हैं कि अब नई पीढ़ी को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण भी मानते हैं कि नल से जल की व्यवस्था ने उनके जीवन स्तर को ही नहीं, पूरे गांव की सोच और संस्कृति को भी बदल दिया है। अब पानी केवल आवश्यकता नहीं रहा, बल्कि सम्मान, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक बन गया है। नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. क्रेमर ने भी की सराहना जल जीवन मिशन से ग्रामीण स्वास्थ्य संकेतकों में भी व्यापक सुधार परिलक्षित हो रहा है। स्वच्छ जल की आपूर्ति होने से विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हाल ही में नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी विकास अर्थशास्त्री डॉ. माइकल रॉबर्ट क्रेमर ने राज्य की विकास रणनीतियों पर चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश की इस पहल पर प्रसन्नता जाहिर की कि जल जीवन मिशन द्वारा ग्रामीण घरों में जल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने अपने अध्ययन का हवाला देते हुए कहा यदि परिवारों को पीने के लिए सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जाए तो लगभग 20% शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। नवजात शिशु, जल जनित बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं। बच्चों से संबंधित हर चार में से एक मृत्यु सुरक्षित जल उपलब्ध कराकर रोकी जा सकती है। प्रो. क्रेमर ने गत शुक्रवार को भोपाल में मख्य सचिव श्री अनुराग जैन के साथ बैठक कर मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन की उपलब्धियों पर संतोष को सराहा।  

बदल सकता है खेल… इस टीम की कमान संभाल सकते हैं श्रेयस अय्यर

नई दिल्ली श्रेयस अय्यर को इंडिया ए टीम का कप्तान बनाया जा सकता है. दाएं हाथ के बल्लेबाज श्रेयस इस समय दलीप ट्रॉफी में खेल रहे हैं. हालांकि वह सेमीफाइनल मुकाबले की पहली पारी में सस्ते में आउट हो गए. ऑस्ट्रेलिया ए टीम भारत के दौरे पर इस महीने आएगी. भारतीय दौरे पर इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए के बीच 2 अनौपचारिक टेस्ट और 3 मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी. इंडिया ए टीम के चयन के लिए जब भारतीय चयनकर्ता बैठेंगे तो उनके सामने श्रेयस अय्यर का नाम सबसे पहले होगा. भारतीय सेलेक्टर्स के सामने सबसे बड़ा सवाल ये होगा कि वो उन्हें किस भूमिका में देखना चाहेंगे. वेबसाइट क्रिकबज के मुताबिक, श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) को ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ बड़ी भूमिका दी जा सकती है. इसमें कप्तानी भी हो सकती है. ऑस्ट्रेलियाई ए टीम अगले सप्ताह भारत के दौरे पर आएगी. दाएं हाथ के बल्लेबाज श्रेयस दलीप ट्रॉफी में वेस्ट जोन की ओर से खेल रहे हैं.सेंट्रल जोन के खिलाफ पहली पारी में वह 25 रन बनाकर आउट हो गए थे. श्रेयस अय्यर के अलावा मौजूदा दलीप ट्रॉफी में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले नितीश रेड्डी, ए ईश्वरन और साई सुदर्शन जैसे कुछ अन्य खिलाड़ियों पर भी चयन के लिए विचार किया जा सकता है. एन जगदीशन, रुतुराज गायकवाड़ और रजत पाटीदार जैसे खिलाड़ी भी चयनकर्ताओं के रडार में हो सकते हैं. इंडिया ए बनाम ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच सीरीज का पहला चार दिवसीय मैच 16 सितंबर से लखनऊ में होगा. दूसरा मैच 23 सितंबर को उसी मैदान पर शुरू होगा. उसके बाद 30 सितंबर से तीन वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी. वनडे के सभी मैच कानपुर में होंगे. पूरी संभावना है कि सेलेक्टर्स 7 सितंबर के बाद इंडिया ए टीम का चयन करेंगे. चयनकर्ता दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल खत्म होने के बाद और 11 सितंबर को होने वाले फाइनल से पहले टीम की घोषणा कर सकते हैं.  श्रेयस का इंडिया ए टीम में चुना जाना तय है.

रूस-फ्रांस में खलबली! तेजस Mark-1A के सामने फीके राफेल और सुखोई

नई दिल्ली तेजस Mark-1A फाइटर जेट की डिलीवरी डेट लगातार टल रही है. एचएएल यानी हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड ने पहले इसे सितंबर में एयरफोर्स को देने की बात कही थी. अब तेजस Mark-1A की दो यूनिट अक्‍टूबर में उपलब्‍ध होगी. इंजन मिलने में देरी की वजह से डिलीवर डेट की डेडलाइन लगातार आगे खिसकती रही है. अब तो डिटेल सामने आया है, उसके अनुसार तेजस Mark-1A फाइटर जेट में ऐसे वेपन इंटीग्रेट किए जा रहे हैं, जिससे दुश्‍मनों का दम फूलना तय है. साथ ही फ्रांस और रूस जैसे फाइटर जेट सप्‍लायर देश भी भौंचक्‍का हो जाएंगे, क्‍योंकि भारत फाइटर जेट बनाने में आत्‍मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. लंबे इंतजार के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की ओर से अगले महीने भारतीय वायुसेना (IAF) को पहले दो इंप्रूव्ड और अपग्रेड तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान सौंपने की उम्मीद है. हालांकि, यह डिलीवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वदेशी सिंगल-इंजन जेट अपने तयशुदा हथियार फायरिंग ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पूरा कर पाता है या नहीं. मॉडर्न वेपन के साथ सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन सूत्रों के मुताबिक, इस महीने के अंत तक तेजस Mark-1A पर अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल, एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल और लेजर-गाइडेड बम की फायरिंग ट्रायल्स निर्धारित हैं. इन ट्रायल्स के जरिए यह भी परखा जाएगा कि इजरायली मूल के एल्टा ELM-2052 रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम के साथ हथियारों का इंटीग्रेशन सही ढंग से हुआ है या नहीं. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले ट्रायल में असफलता के बाद तेजस Mark-1A में सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन किए गए हैं. इंजन सप्‍लाई में देरी बनी बड़ी बाधा तेजस Mark-1A परियोजना की धीमी प्रगति की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) की ओर से इंजन की सप्लाई में हुई लगभग दो साल की देरी रही. HAL ने अगस्त 2021 में 99 GE-404 इंजनों की खरीद 5,375 करोड़ रुपये में की थी, लेकिन अब तक सिर्फ दो इंजन ही मिले हैं. कंपनी ने वादा किया है कि अगले साल मार्च तक 10 और इंजन, और उसके बाद हर साल 20 इंजन सप्लाई करेगी. हथियार और रडार इंटीग्रेशन में आई तकनीकी दिक्कतें भी उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं. एयरफोर्स का इंतजार लंबा IAF को अब तक तेजस के शुरुआती वर्जन मार्क-1 के 40 में से 38 विमान ही मिल पाए हैं, जिनका सौदा 2006 और 2010 में कुल 8,802 करोड़ रुपये में हुआ था. वहीं, फरवरी 2021 में किए गए 46,898 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 83 तेजस मार्क-1ए में से अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं मिला है. इनकी आपूर्ति फरवरी 2024 से फरवरी 2028 के बीच पूरी होनी थी. पिछले महीने प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने तेजस के और 97 विमानों की खरीद 66,500 करोड़ रुपये में मंजूर की, जिससे कुल संख्या और बढ़ जाएगी. एयरफोर्स की चिंता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सार्वजनिक रूप से HAL की देरी पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा था कि IAF की संख्या पहले से ही बेहद कम है और लड़ाकू क्षमता बनाए रखने के लिए हर साल कम से कम 40 नए विमान शामिल करने की जरूरत है. फिलहाल IAF के पास 31 स्क्वॉड्रन हैं, लेकिन 26 सितंबर को सेवा में मौजूद 36 पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों के रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर 29 स्क्वॉड्रन रह जाएगी, जो अब तक का सबसे कम स्तर होगा.

किसानों के लिए बंपर खबर: सितंबर में बोएं ये फसलें, जल्दी तैयार और मुनाफा गारंटीड!

भोपाल  अच्छी फसल के लिहाज से सितम्बर महीना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह महीना ना ही ज्यादा गर्म होता है और ना ही ज्यादा ठंडा। यह मौसम रबी की फसलों के साथ-साथ सब्जी की फसलों के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है और उनका तेजी से विकास होता है। इन सब्जियों में शलगम, बैंगन, गाजर, मूली, चुकंदर, मटर, गोभी, ब्रोकली, पत्ता गोभी, सेम की फली और टमाटर शामिल हैं। अगर आप भी खेती के जरिए अच्छी कमाई के बारे में सोच रहे हैं तो इनमें से किसी भी सब्जी का खेती करके अच्छे पैसे कमा सकते हैं। बड़ी बात यह है कि इनमें से कुछ सब्जियां तो ऐसी हैं, जो दो महीने से भी कम समय में तैयार हो जाती है, जिन्हें बेच कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। एक नजर डालते हैं इन सब्जियों पर।   टमाटर भारत ही नहीं पूरे बल्कि पूरी दुनिया में टमाटर की काफी डिमांड है। टमाटर की खेती के लिए सितंबर महीना उपयुक्त माना जाता है। टमाटर की खेती के लिए काली दोमट मिट्टी, रेतीली दोमट मिट्टी और लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। अगर आप सितंबर में टमाटर की बुआई करते हैं तो इसकी फसल दिसंबर से जनवरी के बीच तैयार हो जाती है। गाजर सर्दी की शुरुआत होते-होते बाजार में गाजर की डिमांड बढ़ जाती है। गाजर की बुवाई अगस्त से लेकर नवंबर तक की जाती है। अच्छी बात यह है कि इसकी फसल दो महीने के अंदर ही तैयार हो जाती है, जिससे आप काफी मुनाफा कमा सकते हो। पूसा रुधिर, पूसा मेघाली और पूसा केसर गाजर की कुछ उन्नत किस्में हैं, जिन्हें आप इस समय बो सकते हैं। ब्रोकली सितंबर में ब्रोकली की खेती करने का सबसे अच्छा समय होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह ठंडे मौसम की फसल है। इस फसल की डिमांड शहरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसकी कीमत 50 से 100 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है। ब्रोकली की फसल के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। बैंगन सितंबर माह की प्रमुख फसलों में एक नाम बैंगन का भी है, जो कम खर्च में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है। बैंगन के लिए अच्छी तरह जुताई की गई, भुरभुरी और जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। यह फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है।