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रोनाल्डो के आखिरी विश्व कप की उम्मीदों के साथ पुर्तगाल उतरेगा मैदान में

नई दिल्ली फीफा विश्व कप 2026 में पुर्तगाल अपने अभियान की शुरुआत बुधवार को ग्रुप-के के मुकाबले में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) के विरुद्ध करेगा। ये मुकाबला बुधवार रात 10:30 बजे ह्यूस्टन में खेला जाएगा। 41 वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो के लिए यह विश्व कप संभवतः आखिरी मौका हो सकता है, जहां वह अपने शानदार करियर में विश्व कप ट्रॉफी जोड़ने का सपना पूरा करना चाहेंगे। दूसरी ओर 52 वर्षों बाद विश्व कप में लौटी डीआर कांगो की टीम इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेगी। पुर्तगाल की रणनीति कोच रॉबर्टो मार्टिनेज की टीम आमतौर पर 4-3-3 या 4-2-3-1 फार्मेशन में खेलती है। टीम का पूरा खेल मिडफील्ड में गेंद पर नियंत्रण और विंग्स से आक्रमण तैयार करने पर आधारित रहता है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो अग्रिम पंक्ति में मुख्य स्ट्राइकर की भूमिका निभाएंगे जबकि राफेल लियाओ और बर्नार्डो सिल्वा जैसे खिलाड़ी दोनों किनारों से गति और रचनात्मकता प्रदान करेंगे। मिडफील्ड में ब्रूनो फर्नांडिस और वितिन्हा खेल की गति नियंत्रित करने के साथ-साथ आक्रमण को धार देंगे। डिफेंस में रुबेन डियास टीम के सबसे अहम खिलाड़ी हैं। यदि डियास पूरी तरह फिट नहीं होते हैं तो पुर्तगाल की रक्षापंक्ति थोड़ी कमजोर पड़ सकती है। कांगो की रणनीति कोच सेबास्टियन डेसाब्रे की टीम तकनीकी रूप से पुर्तगाल से कमजोर मानी जा रही है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताकत सामूहिक खेल और तेज काउंटर अटैक हैं। कांगो संभवतः 4-5-1 या 4-3-3 फॉर्मेशन के साथ मैदान में उतर सकती है, जिसमें प्राथमिक लक्ष्य पुर्तगाल को मिडफील्ड में जगह न देना होगा। टीम के खिलाड़ी यूरोप की विभिन्न लीगों में खेलते हैं और शारीरिक रूप से काफी मजबूत हैं। कांगो की कोशिश होगी कि वह रोनाल्डो और ब्रूनो फर्नांडिस को गेंद पर कम समय दे तथा तेज ट्रांजिशन के जरिए पुर्तगाल की रक्षा पर दबाव बनाए। सेट पीस भी उनके लिए बड़ा हथियार साबित हो सकते हैं।  

FIFA World Cup: मेसी का ऐतिहासिक शो, 16वां वर्ल्ड कप गोल और हैट्रिक से अर्जेंटीना की शानदार जीत

कैनसस सिटी फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना ने अपने खिताब बचाने के अभियान की शुरुआत जीत के साथ की, लेकिन इस मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी एक बार फिर लियोनेल मेसी बने. 38 वर्षीय सुपरस्टार ने अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच और रिकॉर्ड छठे वर्ल्ड कप में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे फुटबॉल प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे।  कैनसस सिटी के GEHA फील्ड एट एरोहेड स्टेडियम में 69,045 दर्शकों के सामने मेसी ने शानदार हैट्रिक जमाकर अर्जेंटीना को अल्जीरिया पर 3-0 की जीत दिलाई. इसके साथ ही उन्होंने वर्ल्ड कप में अपने गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।  यह मेसी के वर्ल्ड कप करियर की पहली हैट्रिक भी रही. साथ ही वह टूर्नामेंट के इतिहास में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए. उन्होंने क्रिस्टियानो रोनाल्डो का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।  शुरुआत में अल्जीरिया ने दी कड़ी टक्कर मैच की शुरुआत अर्जेंटीना के लिए आसान नहीं रही. पांचवें मिनट में मेसी ने गेंद को नेट में पहुंचा दिया था, लेकिन बिल्ड-अप में ऑफसाइड होने के कारण गोल रद्द कर दिया गया. कुछ ही देर बाद अल्जीरिया ने भी जश्न मनाया, जब फार्स चाबी ने गोल किया, मगर VAR ने उसे भी ऑफसाइड करार दिया।  शुरुआती 15 मिनट तक अल्जीरिया ने विश्व चैम्पियन टीम को खुलकर चुनौती दी और गेंद पर अच्छा नियंत्रण बनाए रखा. लेकिन फिर मेसी ने अपनी क्लास दिखा दी।  20 साल बाद फिर 16 जून को मेसी का कमाल 17वें मिनट में रोड्रिगो डी पॉल ने शानदार थ्रू बॉल खेली. मेसी ने डिफेंडरों के दबाव के बावजूद गेंद को शानदार अंदाज में टॉप कॉर्नर में पहुंचा दिया. अल्जीरियाई गोलकीपर लुका जिदान के पास कोई जवाब नहीं था।  यह गोल कई मायनों में खास था. ठीक 20 साल पहले, 16 जून 2006 को मेसी ने सर्बिया और मोंटेनेग्रो के खिलाफ अपना पहला वर्ल्ड कप गोल किया था. अब उसी तारीख पर उन्होंने एक और ऐतिहासिक अध्याय लिख दिया।  इसके साथ ही मेसी पुरुष फुटबॉल में पांच अलग-अलग वर्ल्ड कप में गोल करने वाले केवल दूसरे खिलाड़ी बने. उनसे पहले यह उपलब्धि सिर्फ क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम थी।  छठा वर्ल्ड कप खेलने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर इस मुकाबले ने मेसी को एक और ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचा दिया. वह वर्ल्ड कप इतिहास में छह संस्करण खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए. इसके अलावा वह दक्षिण अमेरिका के पहले पुरुष फुटबॉलर और दुनिया के केवल तीसरे पुरुष खिलाड़ी बने, जिन्होंने 200 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।  पहले गोल के बाद अर्जेंटीना ने मैच पर पकड़ मजबूत कर ली. हालांकि अल्जीरिया ने हार नहीं मानी और गेंद पर लगभग बराबर कब्जा बनाए रखा, लेकिन उसकी सात कोशिशों में एक भी शॉट टारगेट पर नहीं जा सका।  60वें मिनट में एलेक्सिस मैक एलिस्टर के शॉट को लुका जिदान पूरी तरह नहीं रोक पाए. गेंद उनके हाथों से छिटक गई और मेसी ने रिबाउंड पर गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया।  इसके बाद 76वें मिनट में निकोलस गोंजालेज ने ऊंचे क्षेत्र में गेंद छीनी और मेसी को पास दिया. अर्जेंटीना के कप्तान ने बिना कोई गलती किए बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया और गेंद को नेट में पहुंचाकर अपनी पहली वर्ल्ड कप हैट्रिक पूरी कर ली।  रिकॉर्ड्स की झड़ी इस हैट्रिक के साथ मेसी ने कई और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए. – वर्ल्ड कप में अब उनके नाम 16 गोल और 8 असिस्ट यानी कुल 24 गोल योगदान हैं. – उन्होंने ब्राजील के महान खिलाड़ी पेले के 21 गोल योगदान के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. – लगातार पांच वर्ल्ड कप मैचों में गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए. – वर्ल्ड कप में पेनल्टी बॉक्स के बाहर से उनके गोलों की संख्या पांच हो गई, जो पिछले छह दशकों में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा है. – क्लब और देश के लिए उनके करियर का यह 911वां गोल योगदान रहा. अर्जेंटीना ने भी तोड़ा पुराना सिलसिला यह जीत सिर्फ मेसी के रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं रही. तीन बार की विश्व चैम्पियन अर्जेंटीना ने पहली बार बतौर डिफेंडिंग चैम्पियन अपना शुरुआती वर्ल्ड कप मैच जीता. इससे पहले 1982 और 1990 में खिताब जीतने के बाद उसे अपने पहले मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।  ग्रुप J में जीत के साथ अर्जेंटीना ने शानदार शुरुआत कर ली है. अब उसकी नजरें अगले मुकाबलों में ऑस्ट्रिया और जॉर्डन के खिलाफ जीत दर्ज कर नॉकआउट चरण की ओर बढ़ने पर होंगी. लेकिन फिलहाल पूरी दुनिया सिर्फ एक नाम की चर्चा कर रही है- लियोनेल मेसी. जिन्होंने 38 साल की उम्र में भी साबित कर दिया कि महान खिलाड़ी उम्र से नहीं, अपने जादू से पहचाने जाते हैं। 

48 टीमों के वर्ल्ड कप में भी भारत बाहर! जानिए भारतीय फुटबॉल आखिर कहां पिछड़ गया

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा और मेक्सिको की सह-मेजबानी में खेला जा रहा है. दुनिया के 48 देश फुटबॉल के इस महाकुंभ में शिरकत कर रहे हैं, मगर अपना भारत वर्ल्ड कप से एक बार फिर गायब है. जब भी फीफा वर्ल्ड कप का आगाज होता है, तो भारत के करोड़ों प्रशंसक उस जुनून से इस टूर्नामेंट को देखते हैं, मानो उनका देश भी इसमें भाग ले रहा हो. सोशल मीडिया पर बहस होती है, घरों में पसंदीदा टीमों के लिए जश्न मनाया जाता है और पूरा देश फुटबॉल के रंग में रंग जाता है. कोई लियोनेल मेसी की टीम को चीयर करता नजर आता है, तो कोई रोनाल्डो के देश पुर्तगाल का समर्थक होता है. लेकिन इस उत्साह के बीच एक सवाल हर बार सामने आ खड़ा होता है- आखिर सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? यह सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि भारत का फुटबॉल से रिश्ता नया नहीं है. देश में लाखों बच्चे फुटबॉल खेलते हैं, करोड़ों लोग इसे देखते हैं और कई राज्यों में यह खेल क्रिकेट जितना ही लोकप्रिय है. इसके बावजूद भारतीय टीम आज तक विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच तक नहीं पहुंच सकी. फीफा के सदस्य देशों की संख्या 211 है, जिसमें भारत भी शामिल है. आपको जानकर ये दुख होगा कि भारत फिलहाल फीफा रैंकिंग में 138वें स्थान पर हैं. केप वर्डे और कुराकाओ जैसे छोटे देश भी फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं. भारत फीफा वर्ल्ड कप तो कभी खेल नहीं पाया, एशिया में भी उसकी स्थिति अच्छी नहीं हैं. भारतीय टीम अगले साल होने वाले एएफसी एशियन कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर सकी, जो किसी शर्मिंदगी से कम नहीं है. वैसे भारत फीफा वर्ल्ड कप खेलने के सबसे करीब 1950 में पहुंचा था. ब्राजील में आयोजित उस वर्ल्ड कप के लिए भारत ने बिना कोई क्वालफाइंग मैच खेले ही क्वालिफाई कर लिया था. एशियाई क्वालिफाइंग ग्रुप की टीमें- बर्मा (अब म्यांमार), इंडोनेशिया और फिलीपींस प्रतियोगिता से हट गई थीं, जिससे भारत को तब डायरेक्ट एंट्री मिल गई. स्वीडन, इटली और पराग्वे जैसी टीमों के साथ भारत को ग्रुप में रखा गया था, लेकिन टीम ब्राजील पहुंच ही नहीं सकी. लंबे समय तक यह कहानी सुनाई जाती रही कि फीफा ने भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं दी, इसलिए टीम ने टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया. हालांकि पूरा सच यह नहीं था. असल वजह आर्थिक और प्रशासनिक थी. आजादी के बाद देश संसाधनों की कमी से जूझ रहा था. टीम को ब्राजील भेजने में काफी ज्यादा खर्च लगता और पर्याप्त तैयारी का समय भी नहीं था. साथ ही उस समय अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ओलंपिक को वर्ल्ड कप से ज्यादा महत्वपूर्ण मानता था. नतीजा यह हुआ कि भारत ने सबसे बड़ा मौका गंवा दिया. 1950 के बाद भारत ने कई बार फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर में हिस्सा लिया, लेकिन कभी भी अंतिम स्टेज तक नहीं पहुंच सका. कई बार टीम ने उम्मीद जगाई, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में अनुभव और गुणवत्ता की कमी साफ नजर आई. बाइचुंग भूटिया, सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ियों ने 21वीं सदी में भारतीय फुटबॉल को नई पहचान दी. टीम ने एशियाई स्तर पर कुछ अच्छी जीतें भी दर्ज कीं, लेकिन जापान, साउथ कोरिया, ईरान, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों से भारत अब भी काफी पीछे है. एक समय भारतीय टीम कम से कम एशिया में तो अपना दबदबा बनाने में जरूर सफल रही थी. 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स ने भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को 2-1 के अंतर से हराकर गोल्ड मेडल जीता था. चुन्नी गोस्वामी, पीके बनर्जी और तुलसीदास बलराम की तिकड़ी की वजह से ही भारतीय टीम ने ये ऐतिहासिक सफलता अर्जित की थी. फिर बैंकॉक में आयोजित 1970 के एशियाई खेलों में भारतीय फुटबॉल टीम ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही. इसके बाद से जो भारतीय फुटबॉल में गिरावट आनी शुरू हुई, वो अब तक जारी है. क्या क्रिकेट जिम्मेदार है? भारत के फुटबॉल वर्ल्ड कप से दूर रहने की बड़ी वजह क्रिकेट को माना जाता है, लेकिन पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है. यह सच है कि क्रिकेट भारतीय स्पोर्ट्स पर लगभग एकाधिकार रखता है. पैसा, प्रायोजक, मीडिया कवरेज और लोकप्रियता- सब कुछ क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमता है. ऐसे में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी फुटबॉल की बजाय क्रिकेट चुन लेते हैं. लेकिन सिर्फ क्रिकेट को दोष देना भी गलत होगा. जापान, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया जैसे देशों में दूसरे खेल भी लोकप्रिय हैं, फिर भी उन्होंने मजबूत फुटबॉल संस्कृति विकसित की है. ऑस्ट्रेलिया तो क्रिकेट में भी हमेशा से एक मजबूत शक्ति रहा है. असली फर्क योजनाओं, निवेश और दीर्घकालिक सोच का है. भारतीय फुटबॉल लंबे समय से प्रशासनिक विवादों से भी जूझता रहा है. एआईएफएफ में नेतृत्व परिवर्तन, कानूनी विवाद और नीतिगत अस्थिरता के कारण कई योजनाएं अधूरी रह गईं. यहां तक इंडियन सुपर लीग (ISL) का 12वां सीजन किसी तरह इस बार आयोजित करवाया जा सका. आखिर कहां पिछड़ गया भारत? भारतीय फुटबॉल में सबसे बड़ी समस्या प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमी है. दुनिया की सफल फुटबॉल टीमें खिलाड़ियों को 8-10 साल की उम्र से तैयार करना शुरू कर देती हैं. उनके पास मजबूत स्कूल लीग, स्थानीय टूर्नामेंट, हजारों कोच और आधुनिक एकेडमी होती हैं. बच्चे हर साल दर्जनों प्रतिस्पर्धी मैच खेलते हैं और धीरे-धीरे प्रोफेशनल लेवल तक पहुंचते हैं. भारत में यह ढांचा अभी भी कमजोर है. कई राज्यों में बच्चों को नियमित रूप से प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका तक नहीं मिलता. कोचिंग की कमी, कमजोर स्काउटिंग सिस्टम और सीमित सुविधाएं भी बड़ी बाधाएं हैं. बिना स्थिर और पेशेवर प्रशासन के किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना मुश्किल है. वैसे उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है. 2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई. इससे एशियाई देशों के लिए अधिक स्लॉट उपलब्ध हुए हैं. सैद्धांतिक रूप से भारत की संभावनाएं पहले से बेहतर हुई हैं, लेकिन सिर्फ अतिरिक्त स्थान मिल जाने से बात नहीं बनेगी. भारत को स्कूल स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना होगा, हजारों नए कोच तैयार … Read more

नेमार बाहर, ब्राजील की ओपनिंग मैच में मोरक्को से कड़ी टक्कर

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच नॉर्थ अमेरिका में लगातार जारी है। शनिवार को टूर्नामेंट में चार ग्रुप-स्टेज मुकाबले खेले जाने हैं, लेकिन सबकी निगाहें जिस महामुकाबले पर टिकी हैं, वह है ब्राजील बनाम मोरक्को। इसके अलावा आज कतर का मुकाबला स्विट्जरलैंड से, हैती का स्कॉटलैंड से और ऑस्ट्रेलिया की भिड़ंत तुर्की से होगी। छठे वर्ल्ड कप खिताब की तलाश में जुटी ब्राजील की टीम के लिए टूर्नामेंट का पहला ही मैच काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है, क्योंकि मोरक्को की टीम उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है। नेमार पहले मैच से बाहर, कोच कार्लो एंसेलोटी ने की पुष्टि मैच से ठीक पहले ब्राजील के फैंस के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। टीम के स्टार फॉरवर्ड और पूर्व कप्तान नेमार मोरक्को के खिलाफ इस ओपनिंग मैच में नहीं खेल पाएंगे। ब्राजील के हेड कोच कार्लो एंसेलोटी ने शनिवार को इस खबर की पुष्टि की। टूर्नामेंट की शुरुआत से ठीक पहले नेमार के पैर की पिंडली में चोट लग गई थी, जिसके कारण वह इस मैच से बाहर हो गए हैं। कोच एंसेलोटी ने कहा, 'नेमार जल्द से जल्द फिट होने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि वह अगले हफ्ते से फुल ट्रेनिंग में लौट आएंगे।' ब्राजील को अपना अगला मैच 19 जून को हैती से और 24 जून को स्कॉटलैंड से खेलना है, और कोच को भरोसा है कि नेमार इन दोनों मैचों के लिए उपलब्ध रहेंगे। रैंकिंग में टॉप-10 की एकमात्र जंग यह ग्रुप-स्टेज का एकमात्र ऐसा मुकाबला है जहां फीफा वर्ल्ड रैंकिंग की टॉप-10 में शामिल दो टीमें आपस में भिड़ रही हैं। फिलहाल ब्राजील दुनिया में छठे और मोरक्को आठवें स्थान पर काबिज है। वर्ल्ड कप इतिहास में दोनों टीमें सिर्फ एक बार 1998 में आपस में भिड़ी थीं, जहां ब्राजील ने 3-0 से जीत दर्ज की थी। हालांकि, साल 2023 में खेले गए एक दोस्ताना मैच में मोरक्को ने ब्राजील को 2-1 से हराकर उस हार का बदला ले लिया था। मुकाबला 50-50 का है मोरक्को के कप्तान अशरफ हकीमी से जब पूछा गया कि क्या उनकी टीम इस मैच में अंडरडॉग के रूप में उतरेगी, तो उन्होंने इस बात को पूरी तरह खारिज कर दिया। हकीमी ने कहा, 'वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट के ऐसे बड़े मैच में कोई फेवरेट नहीं होता। यह मुकाबला 50-50 का है। जीत-हार का फैसला बहुत छोटी-छोटी बारीकियों और मौकों को भुनाने से तय होगा। हमें उम्मीद है कि वह टीम हम होंगे।' वहीं ब्राजील के स्टार फॉरवर्ड विनीसियस जूनियर ने भी मोरक्को की तारीफ करते हुए उन्हें एक बेहद मजबूत और किसी भी टीम को हराने में सक्षम टीम बताया है। ब्राजील का अफ्रीकी टीमों के खिलाफ दबदबा इतिहास गवाह है कि वर्ल्ड कप में ब्राजील का प्रदर्शन अफ्रीकी देशों के खिलाफ बेहद शानदार रहा है। ब्राजील ने अफ्रीकी टीमों के खिलाफ खेले अपने 8 मैचों में से 7 में जीत हासिल की है, जबकि उन्हें एकमात्र हार 2022 वर्ल्ड कप में कैमरून के खिलाफ मिली थी। साल 2002 के बाद से ब्राजील की टीम अक्सर क्वार्टर फाइनल में ही बाहर होती आई है। ऐसे में कोच एंसेलोटी को भरोसा है कि उनके पास किसी भी टीम को हराने का अनुभव और क्वालिटी मौजूद है।  

काई हावर्ट्ज के डबल गोल से जर्मनी की 7-1 की बड़ी जीत

हॉस्टन  फीफा विश्व कप 2026 में जर्मनी ने एकतरफा जीत के साथ शुरुआत की है। 4 बार की चैंपियन जर्मनी का मुकाबला कुराकाओ से हुआ। यह फीफा विश्व कप में कुराकाओ का डेब्यू मैच था। मैच को जर्मनी ने 7-1 के अंतर से अपने नाम किया। जर्मनी की तरफ से काई हावर्ट्ज ने दो गोल किए। उन्होंने पहले हाफ इंजरी टाइम में पेनल्टी पर पहला गोल दागा। इसके बाद 88वें मिनट में अपना दूसरा और टीम का सातवां गोल मारा। फीफा विश्व कप 2026 की सबसे बड़ी जीत जर्मनी के लिए हावर्ट्ज के अलावा फेलिक्स नमेचा, निको श्लोटरबेक ने पहले जबकि जमाल मुसियाला, नथानिएल ब्राउन और डेनिज उंडाव ने दूसरे हाफ में गोल दागे। 7-1 की जीत फीफा विश्व कप 2026 में सबसे बड़ी जीत है। फेलिक्स नमेचा ने मैच के छठे मिनट में ही गोल दाग दिया। यह इस बार के टूर्नामेंट में अब तक का सबसे तेज गोल भी है। फीफा विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल रैंक     टीम     गोल 1     जर्मनी     239 2     ब्राजील     238 3     अर्जेंटीना     152 4     फ्रांस     136 5     इटली     128 कुराकाओ के लिए यादगार मैच रहा 22 साल के लिवानो कोमेनेन्सिया ने कुराकाओ के लिए 21वें मिनट में गोल किया। कुराकाओ फीफा विश्व कप में गोल करने वाले सबसे कम जनसंख्या वाला देश बन गया है। इस देश की आबादी सिर्फ 158,000 ही है। नवंबर 2025 में कुराकाओ ने फीफा विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था। वह टूर्नामेंट में जगह बनाने वाला सबसे कम जनसंख्या वाला देश बना था। इसके लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी उनका नाम दर्ज है। जर्मनी ने गोल की बौछार कर दी जर्मनी ने जल्द ही अपना दबदबा बना लिया और छठे मिनट में फेलिक्स नमेचा के गोल से खाता खोला। मिडफील्डर ने फ्लोरियन विर्ट्ज के साथ अच्छा तालमेल बिठाया और फिर पेनल्टी एरिया के किनारे से शानदार शॉट लगाकर गेंद को नेट में पहुंचा दिया। कुराकाओ की तरफ से 21वें मिनट में ऐतिहासिक पल आया लेकिन 38वें मिनट में निको श्लॉटरबेक ने 38वें मिनट में कॉर्नर पर हेडर से अपना पहला इंटरनेशनल गोल किया और जर्मनी को फिर से आगे कर दिया। पहले हाफ के इंजरी टाइम में कुराकाओ के खिलाफ ने बॉक्स में खतरनाक टैकल किया। इससे जर्मनी को पेनल्टी मिली और काई हावर्ट्ज ने गोल में दागकर स्कोर 3-1 कर दिया। जर्मनी ने दूसरे हाफ में अपना आक्रामक खेल जारी रखा। जमाल मुसियाला ने 47वें मिनट में जोशुआ किमिच के पास पर गोल मारकर टीम को 4-1 से आगे कर दिया।। इसके बाद नथानिएल ब्राउन ने 68वें मिनट में 5वां और 10 मिनट बाद डेनिज उंडाव ने छठा गोल दागा। 88वें मिनट में काई हावर्ट्स ने अपना दूसरा और मैच का 7वां गोल दागा।  

इरंकुंडा-मेटकाफ के गोल से ऑस्ट्रेलिया की शानदार जीत

वैंकूवर  नेस्टोरी इरंकुंडा और कॉनर मेटकाफ के गोल की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 से जीत दर्ज करके तुर्किए की 24 साल बाद विश्व कप फुटबॉल में वापसी के जश्न में रंग में भंग डाल दिया। इस मैच को देखने के लिए फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो भी स्टेडियम में पहुंचे थे। ऑस्ट्रेलिया की जीत का श्रेय उसके गोलकीपर पैट्रिक बीच को भी जाता है जिन्होंने ग्रुप डी के इस मैच में आठ शानदार बचाव किए। ऑस्ट्रेलिया लगातार छठी बार और कुल मिलाकर सातवीं बार विश्व कप में खेल रहा था। तुर्किए 2002 में विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचा था। उसने इस साल प्लेऑफ में कोसोवो को हराकर क्वालीफाई किया। इरंकुंडा ने तीन डिफेंडरों से घिरे होने के बावजूद 27वें मिनट में निचले शॉट से गोल करके ऑस्ट्रेलिया को बढ़त दिला दी। इरंकुंडा ने ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल के दिग्गज टिम कहिल के इस खेल में योगदान को याद करने के लिए कॉर्नर फ्लैग पर मुक्का मारकर जश्न मनाया। वाटफोर्ड के लिए खेलने वाले 20 वर्षीय इरंकुंडा ऑस्ट्रेलिया की तरफ से विश्व कप में सबसे कम उम्र के गोल स्कोरर बन गए हैं। इसके कुछ मिनट बाद बीच ने अब्दुलकरीम बरदाकसी के जोरदार शॉट को रोककर शानदार बचाव किया। ऑस्ट्रेलिया के कोच टोनी पोपोविच ने अनुभवी गोलकीपर मैथ्यू रयान की जगह बीच को शुरुआती एकादश में रखने का चौंकाने वाला फैसला किया जो सही साबित हुआ। तुर्किए को 57वें मिनट में फ्री किक मिली, लेकिन बीच ने बड़ी खूबसूरती से अर्दा गुलेर के शॉट को बचा दिया। रियाल मैड्रिड के लिए खेलने वाले 21 वर्षीय मिडफील्डर गुलेर का जन्म उस समय नहीं हुआ था जब तुर्किए इससे पहले आखिरी बार विश्व कप में खेला था। कॉनर मेटकाफ ने 75वें मिनट में इस्माइल युकसेक की गलती का फायदा उठाते हुए ऑस्ट्रेलिया की बढ़त को दोगुना कर दिया।

वर्ल्ड कप में स्कॉटलैंड की जीत, लेकिन रेफरी के फैसलों पर उठा विवाद

बोस्टन फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप सी के मुकाबले में स्कॉटलैंड ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए हैती को 1-0 से हराया। स्कॉटलैंड ने विश्व कप में यह 36 साल बाद जीत दर्ज की है। यह जीत स्कॉटलैंड के लिए कई मायनों में खास रही। टीम ने 1990 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप में जीत दर्ज की। इसके अलावा 1982 के बाद यह पहली बार है जब स्कॉटलैंड ने किसी वर्ल्ड कप के पहले मुकाबले में जीत हासिल की है। 1982 में टीम ने न्यूजीलैंड को 5-2 से हराया था। इसके अलावा 1998 के बाद यह स्कॉटलैंड का पुरुषों के वर्ल्ड कप में पहला मैच था। स्कॉटलैंड और हैती का मुकाबला विवादित रहा रेफरी के फैसलों की वजह से स्कॉटलैंड और हैती का यह मुकाबला विवादित रहा। मैच के 79वें मिनट में हैती के जीन-रिकनर बेलेगार्डे ने जोरदार किक मारा। बॉक्स के अंदर स्कॉटलैंड के डिफेंडर के हाथ में गेंद लगी। हैती के खिलाड़ियों की जोरदार अपील के बावजूद रेफरी ने उसपर ध्यान नहीं दिया। वीएआर ने भी इसमें कोई दखल नहीं दिया। बॉक्स के अंदर हैंडबॉल होने पर विपक्षी टीम को पेनल्टी मिलती है। इससे पहले 73वें मिनट में भी स्कॉटलैंड के डिफेंडर के हाथ में गेंद लगी थी। इस बार भी रेफरी ने पेनल्टी नहीं दी। अल्जीरिया के मुस्तफा घोरबल इस मैच में रेफरी की भूमिका में थे। केनी मैक्लीन ने पहले हाफ में जोसु कासिमिर के घुटने पर खतरनाक तरीके से टैकल किया। उन्हें रेड कार्ड मिल सकता था लेकिन रेफरी ने नहीं दिया। 29वें मिनट में हुए एकमात्र गोल 29वें मिनट में स्कॉटलैंड की टीम बढ़त हासिल करने में सफल रही। फॉरवर्ड खिलाड़ी चे एडम्स ने लंबी गेंद पर नियंत्रण बनाया और बेन गैनन-डोक को पास दिया। उनके क्रॉस को हैती के डिफेंडर ने ब्लॉक कर दिया, लेकिन गेंद जॉन मैकगिन के पास पहुंच गई। मैकगिन ने बॉक्स के किनारे से जोरदार शॉट लगाया, जो हल्के से डिफ्लेक्ट होकर गोलकीपर जॉनी प्लेसिड को चकमा देकर गोल पोस्ट में पहुंच गया।  

20 साल के इरानकुंडा बने स्टार, ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 से दर्ज की जीत

 नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत जीत के साथ की। ऑस्ट्रेलिया ने वैंकूवर में तुर्किए को 2-0 से हराकर बड़ा उलटफेर किया। ऑस्ट्रेलिया से नेस्टोरी इरानकुंडा और कॉनर मेटकाफ ने 1-1 गोल किए और अहम मौकों पर ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर पैट्रिक ने कमाल का बचाव करते हुए टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, तुर्किए की 24 साल बाद विश्व कप में वापसी खराब रही। FIFA World Cup 2026: ऑस्ट्रेलिया ने तुर्किए को 2-0 से हराया दरअसल, इस मैच में तुर्किए के पास बॉल ज्यादा रही, जिससे लग रहा था कि वह मैच जीत सकती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की टीम का डिफेंस कमाल का रहा। कोच टोनी पॉपोविक की टीम ने मजबूत डिफेंस किया और जैसे ही मौके मिले तुरंत गोल कर दिया। इस तरह ऑस्ट्रेलिया की धमाकेदार जीत रही। नेस्टोरी ईरानकुंडा और कॉनर मेटकाफ ने गोल दागे और तब से टीम कभी पीछे नहीं रही। फर्स्ट हाफ में 27वें मिनट पर पहला गोल हुआ। 20 साल के इरानकुंडा फीफा विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की ओर से गोल दागने वाले सबसे युवा प्लेयर बने। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के गोलकीपर पैट्रिक ने शानदार डिफेंस किया। तुर्किए के अब्दुलकेरिम बर्दाकसी ने गोल मार दिया था, लेकिन इसका बचाव ऑस्ट्रेलिया ने कर लिया और फिर काउंटर अटैक करना शुरू किया और इस तरह इरानकुंडा ने पहला गोल किया। इसके बाद तुर्किए ने मैच में वापसी करने के लिए पलटवार किया। मैच के 53वें मिनट में कॉर्नर किक में हैरी साउटर ने हेडर पर गोल करने की कोशिश की, जिससे गोलकीपर उगुरकान काकिर रोकने में नाकाम हुए। 56वें मिनट में तुर्किए के अर्दा गुलेर ने फ्रीकिक ली, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के गोलकीपर बीच में नीचे झुककर डाइव लगाते हुए उनके इस गोल को रोक लिया। मैच के 75वें मिनट में मेटकाफ ने गोल करते हुए बढ़त को दोगुना किया। इस तरह मैच में मिली जीत के साथ ग्रुप-डी की अंक तालिका में 3 अंक के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरे पायदान पर पहुंच गई। इरानकुंडा का ऐतिहासिक कारनामा नेस्टोरी इरानकुंडा वर्ल्ड कप में गोल करने वाला सबसे युवा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बन गए हैं। इरानकुंडा की उम्र 20 साल 125 दिन है। उसने ब्रेट होलमैन का रिकॉर्ड तोड़ दिया हैं। होलमैन ने 2010 में घाना के खिलाफ गोल किया था। तब उसकी उम्र 26 साल 84 दिन थी।  

मेक्सिको की जीत में 17 वर्षीय मोरा का इतिहास रचने वाला डेब्यू, 96 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

 नई दिल्‍ली  मेक्सिको ने फीफा वर्ल्‍ड कप 2026 में अपने अभियान की विजयी शुरुआत की। मेक्सिको ने साउथ अफ्रीका को 2-0 से मात दी। हालांकि, सबसे ज्‍यादा चर्चा एक 17 साल का खिलाड़ी गिलबर्टो मोरा बटोर ले गया। गिलबर्टो मोरा ने मैदान पर उतरते ही इतिहास के पन्‍नों को पलट दिया और वर्ल्‍ड कप मैच खेलने वाले सबसे युवा मेक्सिकन फुटबॉलर बन गए। इसी के साथ मोरा ने 96 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। मोरा मैच के 65वें मिनट में मैदान पर उतरे। तब मेक्सिको की टीम 1-0 से आगे थी। दो मिनट बाद ही जेमिनेज के गोल के दम पर मेक्सिको ने अपनी बढ़त 2-0 कर ली। यही मैच का निर्णायक स्‍कोर भी साबित हुआ। मोरा से पहले 1930 में मेनुअल रोसास ने मेक्सिको के लिए सबसे युवा डेब्‍यूटेंट की भूमिका निभाई थी। वर्ल्‍ड कप में डेब्‍यू करने वाले मेक्सिको के सबसे युवा खिलाड़ी गिलबर्टो मोरा – 17 साल, 240 दिन (बनाम साउथ अफ्रीका, 2026) मेनुअल रोसास – 18 साल, 134 दिन (बनाम फ्रांस 1930) अलफ्रडो टोरेस – 19 साल, 16 दिन (बनाम ऑस्‍ट्रिया 1954) रउल अरेलानो – 19 साल, 108 दिन (बनाम फ्रांस 1954) आंद्रेस गार्डाडो – 19 साल, 269 दिन (बनाम ईरान, 2006) ह्युगो सांचेज – 19 साल, 326 दिन (बनाम ट्यूनीशिया, 1978) कौन हैं गिलबर्टो मोरा? मोरा ने बहुत जल्‍द अपनी चमक बिखेरी। चियापास में जन्‍में मिडफील्‍डर को क्‍लब तिजुआना यूथ एकेडमी से पहचान मिली। उन्‍होंने बहुत जल्‍द पहली टीम में अपनी जगह पक्‍की की। 17 साल की उम्र में मोरा के पास 50 से ज्‍यादा सीनियर मैच खेलने का अनुभव हासिल है। मोरा की लगातार तरक्‍की से कोच जेवियर एगुएरे प्रभावित हुए और उन्‍हें वर्ल्‍ड कप स्‍क्‍वाड में शामिल किया। मोरा ने 2025 में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर अपनी धाक दिखाई और मेक्सिको सीनियर नेशनल टीम में डेब्‍यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। मोरा को फीफा ने टूर्नामेंट में सबसे शानदार युवाओं में से एक करार दिया।

16 साल बाद वापसी कर रही साउथ अफ्रीका की बड़ी परीक्षा

जोहानिसबर्ग फीफा विश्व कप 2026 का भव्य आगाज शुक्रवार को प्रतिष्ठित एज्टेका स्टेडियम में मेजबान मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुकाबले से होगा। यह मैच रात 12:30 बजे से खेला जाएगा। सह मेजबान होने के कारण मेक्सिको पर घरेलू दर्शकों की उम्मीदों का भारी दबाव है और टीम अपने अभियान की शुरुआत जीत के साथ करना चाहेगी। घरेलू मैदान पर किसी भी तरह की चूक पूरे टूर्नामेंट के माहौल को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर 16 साल बाद विश्व कप में वापसी कर रही दक्षिण अफ्रीका के लिए यह मुकाबला खुद को फिर से वैश्विक फुटबॉल मंच पर स्थापित करने का सुनहरा अवसर है। यदि वह मेजबान टीम को हराने में सफल रहती है तो ग्रुप ए की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है और उसके लिए नाकआउट चरण का रास्ता आसान हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि 2010 विश्व कप के उद्घाटन मुकाबले में भी ये दोनों टीमें आमने-सामने थीं। तब जोहानिसबर्ग में खेला गया मैच 1-1 से बराबरी पर छूटा था और दक्षिण अफ्रीका बाद में गोल अंतर के कारण अगले दौर में जगह बनाने से चूक गया था। मेक्सिको के मुख्य कोच जेवियर अगुइरे अपने तीसरे कार्यकाल में टीम की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने टीम को मजबूत रक्षात्मक ढांचे, मिडफील्ड में एडसन अल्वारेज की अगुआई और स्ट्राइकर राउल जिमेनेज की गोल करने की क्षमता के इर्द-गिर्द तैयार किया है। एज्टेका स्टेडियम में मौजूद हजारों समर्थक टीम के लिए 12वें खिलाड़ी की भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, कोच ह्यूगो ब्रूस के मार्गदर्शन में दक्षिण अफ्रीका केवल रक्षात्मक रणनीति अपनाने नहीं उतरेगा। अफ्रीकी क्वालीफायर में नाइजीरिया जैसी मजबूत टीम को पीछे छोड़कर विश्व कप में पहुंची इस टीम ने छह मैचों में केवल चार गोल खाए और नौ गोल दागे। लाइल फोस्टर, ओसविन अपोलिस और मिडफील्डर टेबोहो मोक्वेना टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं। ग्रुप ए में आगे कोरिया गणराज्य और चेकिया जैसी टीमों से भी मुकाबले होने हैं। ऐसे में विश्व कप के इस उद्घाटन मैच की जीत किसी भी टीम को शुरुआती बढ़त और आत्मविश्वास प्रदान कर सकती है। फुटबाल प्रेमियों की नजरें अब एज्टेका स्टेडियम पर टिकी हैं, जहां से विश्व कप 2026 की रोमांचक यात्रा शुरू होगी। दूसरे मैच में दक्षिण कोरिया का सामना चेकिया से विश्व कप में शुक्रवार को दूसरा मैच दक्षिण कोरिया और चेकिया के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला सुबह 7:30 बजे से होगा। चेकिया की टीम 2006 के बाद पहली बार विश्व कप में खेल रही है और उसे दक्षिण कोरियाई टीम की कड़ी चुनौती का सामना करना है। दक्षिण कोरियाई टीम क्वालीफाइंग दौर में एक भी मैच नहीं हारी है। इस विश्व कप में सभी की नजरें दक्षिण कोरिया के स्टार खिलाड़ी सन हेंग मिन पर होंगी क्योंकि यह संभवत: उनका अंतिम विश्व कप हो सकता है।