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वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले बढ़ा तनाव, ईरान-अमेरिका विवाद ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप के 23वें संस्करण (FIFA World Cup 2026) को शुरू होने में अब 2 दिन बचे हैं. इससे पहले एक और विवाद खड़ा हो गया है. ईरान फुटबॉल फेडरेशन (FFIRI) ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनकी टीम के वर्ल्ड कप के ग्रुप मैचों के टिकेटों का आवंटन रद्द कर दिया है. बता दें कि इस बार 3 देश मिलकर टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे हैं, जिसमें USA भी है।  ईरान फुटबॉल फेडरेशन का कहना है कि डिप्लोमेटिक विवाद के कारण अमेरिका ईरानी दर्शकों को फीफा वर्ल्ड कप के मैच देखने से रोकने की कोशिश कर रहा है. बता दें कि इससे पहले अमेरिका में इराक फुटबॉल टीम के एक खिलाड़ी को एयरपोर्ट पर डिटेन कर लिया था, जिसे 7 घंटे पूछताछ के बाद छोड़ा था।  मंगलवार को बयान जारी करते हुए ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने कहा, "फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब 2 दिन बचे हैं. अमेरिका ने एक बार फिर ग्रुप स्टेज में ईरान फुटबॉल टीम के तीनों मैचों के वेन्यू पर ईरानी समर्थकों के आने में बाधा डालने का काम किया है।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के लिए कई प्रशासनिक मुश्किलें भी खड़ी की हैं, जैसे उन्होंने कुछ सपोर्ट स्टाफ के सदस्यों को वीजा देने से मना कर दिया. बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच अभी रिश्ते बिल्कुल भी अच्छे नहीं है।  फीफा के नियमों के मुताबिक हर मैच के लिए 8 प्रतिशत टिकट ईरान को मिलने चाहिए. ईरान ने आरोप लगाया है कि टिकट का ये हिस्सा टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले फेडरेशन को दिए जाते हैं, जिससे वह अपने माध्यम से समर्थकों को इन्हें बांट सके।  ईरान फुटबॉल फेडरेशन के मुताबिक उन्होंने अपने ग्रुप मैचों की टिकट बिक्री शुरू कर दी थी, जो अमेरिका में होने वाले हैं. लेकिन अमेरिका ने उन्हें मिलने वाला कोटा वापस ले लिया है, और अभी ईरान अपने समर्थकों को एक भी टिकट नहीं देने की स्थिति में है. ईरान फुटबॉल टीम ग्रुप 'जी' में है, जिसमें उनका सामना बेल्जियम, इजिप्ट और न्यूजीलैंड से होगा। 

अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में होगा फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन

नई दिल्ली  फीफा वर्ल्ड कप 2026 बेहद खास होने वाला है। इस बार का विश्व कप ऐतिहासिक होने वाला है क्योंकि इसमें पहली बार 48 टीमें खेलती हुई दिखाई देंगी। ये वर्ल्ड कप फैंस के लिए भी खास होगा। विश्व कप की शुरुआत 12 जून से होने वाली है और इसका फाइनल मुकाबला 19 जुलाई को खेला जाएगा। ये वर्ल्ड कप तीन देशों में आयोजित किया जाएगा, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको शामिल हैं। ऐसा पहली बार होगा, जब फीफी विश्व कप तीन देशों की मेजबानी में खेला जाएगा। आइए बताते हैं ऐसे पांच फैक्ट्स जो आपके लिए जानना जरूरी है। 1. पहली बार 48 टीमों होंगी शामिल यह विश्व कप 48 देशों की टीमों के साथ खेला जाएगा। इससे पहले कतर 2022 में सिर्फ 32 टीमें थीं। अब 12 ग्रुप बनाए गए हैं, हर ग्रुप में 4 टीमें होंगी। कुल मैच 64 से बढ़कर 104 हो गए हैं। ये टूर्नामेंट भी लंबा चलेगा और 39 दिनों तक खेला जाएगा। इस बदलाव से अफ्रीका, एशिया और कनाडा-मैक्सिको-अमेरिका क्षेत्र की ज्यादा टीमों को मौका मिला है। फीफा का लक्ष्य है कि विश्व कप और भी वैश्विक बने और इसी को ध्यान में रखते हुए फीफा ने 48 टीमों को शामिल कर लिया है। 2. तीन देश पहली बार संयुक्त मेजबान फीफा विश्व कप 2026 को तीन देश अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको मिलकर होस्ट करेंगे। पुरुष विश्व कप में यह पहली बार हो रहा है, जब तीन देश मेजबानी साझा कर रहे हैं। कुल 16 शहर मैचों की मेजबानी करेंगे, जिनमें वैंकूवर से लेकर मैक्सिको सिटी और मियामी तक शामिल हैं। अमेरिका सबसे ज्यादा मैच कराएगा, खासकर क्वार्टर फाइनल से आगे के सभी नॉकआउट मैच उसी के स्टेडियमों में होंगे। 3. एज्टेका स्टेडियम बनेगा ऐतिहासिक मैक्सिको सिटी का प्रसिद्ध एज्टेका स्टेडियम तीन अलग-अलग विश्व कप में मैच होस्ट करने वाला पहला स्टेडियम बनेगा। यहां 1970 और 1986 में भी मैच हुए थे। 2026 में टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच भी यहीं खेला जाएगा। इस स्टेडियम में पेले की ब्राजील (1970) और माराडोना की अर्जेंटीना (1986) ने विश्व कप फाइनल जीते थे। पेले की याद में स्टेडियम के बाहर हाल ही में उनकी बड़ी प्रतिमा भी लगाई गई है। 4. गर्मी होगी खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए चुनौती जून-जुलाई में उत्तर अमेरिका के कई शहरों में गर्मी और नमी बहुत ज्यादा होती है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग एक चौथाई मैच ऐसे मौसम में खेले जा सकते हैं जो खिलाड़ियों और फैंस दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मियामी, कैनसस सिटी और फिलाडेल्फिया जैसे शहरों में यह समस्या ज्यादा हो सकती है। फीफा कूलिंग ब्रेक और अन्य सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये ब्रेक काफी छोटे हैं। 5. मनोरंजन पर खास फोकस, सुपर बाउल स्टाइल शो इस बार विश्व कप को और ज्यादा रोचक और मनोरंजक बनाने की कोशिश की जा रही है। फाइनल मैच न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में होगा। फीफा फाइनल के हाफ टाइम में एक बड़ा म्यूजिकल परफॉर्मेंस आयोजित करने की योजना बना रहा है, जैसा अमेरिका के सुपर बाउल में होता है।  

World Cup में दिखेगा भारतीय कनेक्शन, इन 4 भारतीय मूल के खिलाड़ियों को मिला बड़ा मौका

नई दिल्ली फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत 12 जून से हो रही है. भारत में फुटबॉल के इस महाकुंभ को लेकर फैंस में गजब का उत्साह है. फैंस का यह उत्साह तब और चरम पर पहुंच गया, जब अंतिम समय में हुए एक समझौते के बाद जी (Zee) ने भारत में मैचों के लाइव प्रसारण राइट्स मिलने का ऐलान किया. हालांकि, इसके बावजूद भारतीय फुटबॉल फैंस को इस बात की कसक जरूर रहती है कि आखिर उनकी नेशनल टीम फीफा विश्व कप में क्यों नहीं खेलती? इसके पीछे कई वजहें हैं, लेकिन फैंस के लिए एक खुशखबरी यह है कि फीफा विश्व कप में बेशक भारतीय टीम हिस्सा नहीं ले रही है, लेकिन इस बार भारतीय मूल के चार खिलाड़ी अलग-अलग टीमों से खेलते हुए नजर आ सकते हैं।  फीफा विश्व कप 2026 में इस बार कुल 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं. हालांकि, भारत में फ्रांस, अर्जेंटीना, ब्राजील और स्पेन जैसी चुनिंदा यूरोपीय व लैटिन अमेरिकी टीमों के समर्थक ज्यादा हैं. इस लिस्ट में अगर आप कतर जैसी टीम का नाम लेंगे, तो भारत में गिने-चुने लोग ही उसके सपोर्टर मिलेंगे. लेकिन इस बार भारत में खासकर मलयाली लोग कतर को जरूर सपोर्ट करेंगे. दरअसल, कतर की टीम में केरल का एक खिलाड़ी शामिल है, जिनका नाम तहसीन जमशीद है. तहसीन का जन्म दोहा में, कन्नूर जिले के रहने वाले मलयाली माता-पिता के यहां हुआ था।  शशि थरूर भी तहसीन को लेकर हैं उत्साहित 19 साल के विंगर तहसीन को विश्व कप के लिए कतर की प्रारंभिक टीम में शामिल किया गया था. अब केरल के फैंस को उम्मीद है कि तहसीन को संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में आयोजित होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए अंतिम टीम में भी जगह मिलेगी. यही वजह है कि कतर की टीम में तहसीन के नाम की चर्चा से लोगों में उत्साह भर गया है. तहसीन को फीफा विश्व कप में खेलते हुए देखने के लिए तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर भी उत्सुक हैं. बता दें कि तहसीन के पिता भी पूर्व फुटबॉलर रहे हैं और वह कतर के लिए अंडर-17 और अंडर-19 स्तर पर खेल चुके हैं।  न्यूजीलैंड के लिए मैदान पर उतरेंगे सरप्रीत सिंह तहसीन के अलावा सरप्रीत सिंह पर भी फुटबॉल फैंस की नजरें होंगी. 27 साल के सरप्रीत न्यूजीलैंड के लिए एक अटैकिंग मिडफील्डर के रूप में खेलेंगे. सरप्रीत का परिवार पंजाब के जालंधर से ताल्लुक रखता है. वह 2018 से न्यूजीलैंड की सीनियर टीम के लिए खेल रहे हैं और अब तक तीन गोल दाग चुके हैं।  सैमुअल मुतुसामी कांगो के लिए खेलेंगे तमिल मूल के खिलाड़ी सैमुअल मुतुसामी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की टीम में शामिल हैं. सैमुअल की मां कांगो की हैं, जबकि उनके पिता तमिल मूल के इंडो-गुआराडेलूपियन हैं. पेरिस में जन्मे 29 वर्षीय डिफेंसिव मिडफील्डर ने 2019 में कांगो के लिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था. बता दें कि 2006 के बाद यह पहला विश्व कप होगा, जिसमें कोई भारतीय मूल का खिलाड़ी दिखाई देगा. आखिरी बार विकास धोरासू फ्रांस के लिए खेले थे. इसके अलावा भारतीय मूल के निशान वेलुपिल्ले ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल हैं. विंगर के रूप में वाले निशान के पिता तमिलनाडु से जुड़े एक मलेशियाई नागरिक हैं, जबकि उनकी मां एक एंग्लो-इंडियन हैं।   

फुटबॉल का युग बदलने की तैयारी: 2026 विश्व कप में दिग्गजों की विदाई की चर्चा तेज

 नई दिल्ली  फुटबॉल के महाकुंभ फीफा विश्व कप 2026 में अब कुछ ही दिन शेष हैं और ओलिंपिक के बाद खेलों की दुनिया का यह सबसे बड़ा उत्सव इसके कुछ दिग्गज सितारों के लिए आखिरी हो सकता है। पांच-पांच विश्व कप खेल चुके गत चैंपियन अर्जेंटीना के स्टार लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो को हम इस टूर्नामेंट में उन्हें आखिरी बार अपने देश के लिए खेलते हुए देखेंगे। वहीं छोटे से देश क्रोएशिया को 2018 के विश्व कप में फाइनल तक पहुंचाकर सबको चौंकाने वाले लुका मोड्रिक भी उम्र और करियर के उस पड़ाव पर हैं कि शायद उनके लिए भी यह आखिरी विश्व कप होगा। 41 वर्षीय रोनाल्डो 23 साल से पुर्तगाल टीम में 41 वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने दो दशक से अधिक समय पहले 2003 में राष्ट्रीय टीम में पदार्पण किया था। वह राष्ट्रीय टीम के लिए सबसे अधिक गोल (143) के साथ दुनिया में सबसे ऊपर हैं। 2006 फीफा विश्व से अब तब वह व्यक्तिगत तौर पर अपनी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करते आए हैं, लेकिन अपनी टीम को यही एकमात्र बड़ा खिताब न दिला पाने की कसक हमेशा उनके मन में रही है। अब इसे इसे पूरा करना चाहेंगे। मेसी का सपना खिताब की रक्षा करना 2022 विश्व कप में अर्जेंटीना को खिताब दिलाने वाले लियोनेल मेसी इस बार 38 वर्ष की आयु में अर्जेंटीना के इस खिताब के बचाव के लिए मैदान पर उतरेंगे। मेसी फिलहाल अमेरिका में एमएलएस में इंटर मियामी टीम के लिए खेलते हैं, पर विश्व कप से ठीक पहले वर्कलोड के चलते और एमआरआई में उनके बाएं हेमस्ट्रिंग मांसपेशियों में अधिक दबाव की पुष्टि हुई है। यह चिंता की बात तो है पर वह अब आराम करेंगे और इस विश्व में तरोताजा होकर राष्ट्रीय टीम के लिए अपना शत प्रतिशत देंगे। क्रोएशिया का फिर लोहा मनवाएंगे लुका मिडफील्ड के दिग्गज और बैलन डी ओर विजेता मोड्रिक भी इस विश्व तक 40 साल की उम्र के करीब पहुंच चुके हैं। उनकी कप्तानी में क्रोएशिया 2018 के विश्व कप में फाइनल तक पहुंची थी। इस बार वह क्रोएशिया का संभवत: आखिरी बार नेतृत्व कर इस देश का फुटबॉल की दुनिया में एक बार फिर लोहा मनवाने का प्रयास करेंगे। कोच के भरोसे पर संन्यास से लौटे मैनुअल 2024 में ही जर्मन टीम से संन्यास ले चुके गोलकीपर मैनुअल नेयर पर कोच जुलियन नागेल्समैन ने भरोसा जताया तो उन्होंने संन्यास से वापसी की और कोच ने उन्हें टीम में शामिल किया। मैनुअल 2014 की विश्व विजेता टीम का भी हिस्सा थे। वहीं दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े स्टार टोटेनहम क्लब के पूर्व खिलाड़ी सोन ह्युंग-मिन का भी यह आखिरी विश्व कप हो सकता है। उन्होंने 2014 में पहला विश्व कप खेला था। पांच विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ी खिलाड़ी                          देश          कब से कब तक एंटोनियो कार्बाजल           मेक्सिको     1950 से 1966 लोथर मथाउस                जर्मनी        1982 से 1998 राफेल मार्केज                 मेक्सिको      2002 से 2018 लियोनेल मेसी                अर्जेंटीना      2006 से 2022 क्रिस्टियानो रोनाल्डो          पुर्तगाल      2006 से 2022 आंद्रेज गार्डैडो                  मेक्सिको     2006 से 2022

फीफा विश्व कप: ईरान के मैचों को मैक्सिको में आयोजित करने का मामला अमेरिका के खिलाफ अभी भी विवादित

नई दिल्ली  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच फीफा और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल राजनीति (डिप्लोमेसी) एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले ने हालात को मुश्किल और जटिल बनाया था। ईरान की फुटबॉल टीम और उसके विश्व कप अभियान पर इसका सीधा असर पड़ा था। इस बीच फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और ईरानी फुटबॉल अधिकारियों के बीच तुर्की में हुई बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब ईरान की विश्व कप भागीदारी को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे थे। हालांकि इस मुलाकात में सकारात्मक संकेत मिले, लेकिन एक बड़ा मुद्दा—ईरान के मैचों को अमेरिका से हटाकर मेक्सिको में कराने का—अब भी अनसुलझा है। मार्च 2025 के दौरान ईरान की स्थिति काफी अनिश्चित रही। सरकारी स्तर पर यह संकेत दिए गए कि टीम विश्व कप में हिस्सा नहीं ले सकती या उसे अमेरिका जाने में मुश्किल हो सकती है। यहां तक कि फीफा से यह भी मांग उठी कि ईरान के मैचों को किसी अन्य देश, खासकर मेक्सिको, में स्थानांतरित कर दिया जाए। हालांकि फीफा ने स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा और ईरान को अमेरिका में ही अपने मैच खेलने होंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने स्थिति को और उलझा दिया। ट्रंप ने पूर्व में ईरान को विश्व कप के लिए अहम न होने या फिर टीम के भाग लेने की स्थिति में खिलाड़ियों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी। हालांकि फीफा लगातार एक स्पष्ट रुख अपनाए हुए है और इन्फेंटिनो ने भरोसा दिलाया है कि ईरान की टीम को सभी आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा दी जाएगी। ईरान की टीम ने भी मुश्किल हालातों के बीच तैयारी जारी रखी है। जॉर्डन में प्रस्तावित अभ्यास मैचों को सुरक्षा कारणों से तुर्की के अंताल्या में शिफ्ट किया गया, जहां टीम ने नाइजीरिया और कोस्टा रिका के खिलाफ मुकाबले खेले। इन मैचों के दौरान खिलाड़ियों ने युद्ध के विरोध में प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। विश्व कप की तैयारियों के तहत ईरान 10 जून तक एरिजोना के टक्सन स्थित ट्रेनिंग कैंप में पहुंचेगा। टीम अपना पहला मैच 15 जून को लॉस एंजिल्स में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेगी। इसके बाद उसे बेल्जियम और मिस्र जैसी मजबूत टीमों से भी भिड़ना है। हालांकि वीजा से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं, जिससे टीम के कुछ अधिकारियों को अमेरिका में प्रवेश नहीं मिल पाया है। कुल मिलाकर, यह स्थिति केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति, कूटनीति और वैश्विक संबंधों की जटिलताएं भी शामिल हैं। फीफा के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह खेल की निष्पक्षता बनाए रखते हुए सभी टीमों के लिए सुरक्षित और समान माहौल सुनिश्चित करे। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की टीम इन चुनौतियों के बीच कैसा प्रदर्शन करती है और क्या फुटबॉल वाकई कूटनीतिक पुल का काम कर पाता है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में टिकटॉक की एंट्री, वीडियो कंटेंट पार्टनर घोषित

जिनेवा फुटबॉल की संचालन संस्था फीफा ने 11 जून से 19 जुलाई तक चलने वाले पुरुष फुटबॉल विश्व कप में सोशल मीडिया पर वीडियो कंटेंट के लिए ‘टिकटॉक’ को अपना प्रमुख प्लेटफॉर्म चुना है। इस साझेदारी के अंतर्गत ‘कंटेंट क्रिएटर्स’ को 48 टीम वाले विश्व कप में विशेष अनुमति मिलेगी। यह टूर्नामेंट 16 शहरों में आयोजित होगा। इनमें अमेरिका के 11, मेक्सिको के तीन और कनाडा के दो शहर शामिल हैं। फीफा ने बताया कि विश्व कप के प्रसारण अधिकार रखने वाले ब्रॉडकास्टर टिकटॉक ऐप पर बने एक विशेष ‘हब’ के जरिए 104 मैच के कुछ हिस्सों का लाइव प्रसारण कर सकेंगे। अमेरिका में टिकटॉक के 17 करोड़ से अधिक यूजर हैं। ⁠ फीफा ने कहा, ‘‘इसके अलावा बड़ी संख्या में क्रिएटर्स को फीफा के ‘आर्काइव’ फुटेज का इस्तेमाल और इन्हें साथ में बनाने का मौका भी मिलेगा।’’ फीफा ने इस करार की कीमत, निविदा प्रक्रिया या अन्य प्रतिस्पर्धी बोलीदाताओं का विवरण साझा नहीं किया। इससे पहले 2022 कतर विश्व कप में ‘यूट्यूब’ का एक सीमित प्रायोजन समझौता हुआ था जिसमें क्रिएटर्स को विशेष अनुमति मिली थी।  

यूएस ने किया वीजा देने से इनकार, फीफा विश्व कप के फाइनल ड्रॉ का बॉयकॉट करेगा ईरान

तेहरान ईरान की फुटबॉल फेडरेशन 2026 फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल ड्रॉ का बहिष्कार करेगी। यह ड्रॉ 5 दिसंबर को वॉशिंगटन डीसी में निर्धारित है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान प्रतिनिधिमंडल के कई प्रमुख सदस्यों को वीजा देने से इनकार कर दिया है। शुक्रवार को घोषणा करते हुए फेडरेशन के प्रवक्ता आमिर मेहदी अलावी ने आईआरआईबी टीवी को बताया कि यह फैसला आवश्यक पूछताछ, आंतरिक चर्चाओं और खेल एवं युवा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से परामर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे खेल भावना के विपरीत बताया है। आमिर मेहदी अलावी ने स्पष्ट किया है उन्होंने फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो समेत उनके अधिकारियों को वीजा के मुद्दे के बारे में बता दिया गया है। ‘सिन्हुआ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अलावी ने बताया है कि फीफा ने इस मामले को गंभीरता से लेने का वादा किया है। वीजा देने से इनकार करने के बाद फेडरेशन के अध्यक्ष समेत कई खास लोगों पर इसका असर पड़ा है। हालांकि, पुरुषों की नेशनल टीम के हेड कोच आमिर घालेनोई समेत चार सदस्यों को वीजा मिल गया है। फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत 11 जून से होगी। फुटबॉल का यह महाकुंभ 19 जुलाई तक खेला जाएगा, जिसमें 48 टीमें हिस्सा लेने जा रही हैं। इन टीमों को चार-चार के 12 ग्रुप में बांटा जाएगा। इसे यूनाइटेड स्टेट्स, कनाडा और मेक्सिको मिलकर होस्ट करेंगे। ऐसा पहली बार है जब यह टूर्नामेंट तीन देशों में खेला जाएगा। ग्रुप स्टेज के बाद हर ग्रुप से टॉप दो टीमें, साथ ही आठ सबसे ऊंची रैंक वाली तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमें, एक बड़े नॉकआउट फेज में जाएंगी, जिससे पिछले एडिशन की तुलना में एक बड़ा और ज्यादा कॉम्पिटिटिव एलिमिनेशन ब्रैकेट बनेगा। फीफा विश्व कप 2026 के लिए कुल 16 स्टेडियम चुने गए हैं। इनमें तीन वेन्यू मेक्सिको में, जबकि दो वेन्यू कनाडा में हैं। शेष 11 वेन्यू यूनाइटेड स्टेट्स में हैं। ईरान की टीम ने 2026 वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह बना ली है। यह फीफा विश्व कप में ईरान की लगातार चौथी मौजूदगी होगी। इस टीम ने कुल 7 बार इस विश्व कप में हिस्सा लिया है।  

केनेडी सेंटर में होगा फीफा वर्ल्ड कप 2026 का ड्रॉ : ट्रंप

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि वॉशिंगटन स्थित जॉन एफ. केनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ड्रॉ की मेजबानी करेगा। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “इस वर्ष 5 दिसंबर को 2026 फीफा वर्ल्ड कप ड्रॉ केनेडी सेंटर में आयोजित किया जाएगा।” इस मौके पर फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति ट्रंप इस समय केनेडी सेंटर के 257 मिलियन डॉलर के नवीनीकरण कार्य की देखरेख कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सेंटर अगले साल होने वाले अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ समारोह का प्रमुख आकर्षण होगा। फीफा वर्ल्ड कप 2026 अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे। यह पहला वर्ल्ड कप होगा जिसमें 48 टीमें हिस्सा लेंगी और कुल 104 मैच खेले जाएंगे। कनाडा में 13 मुकाबले होंगे, जिनमें से 10 ग्रुप स्टेज के होंगे और ये टोरंटो व वैंकूवर में बराबर बांटे जाएंगे। मैक्सिको को भी 13 मैचों की मेजबानी मिलेगी, जिनमें ग्रुप स्टेज के 10 मैच मेक्सिको सिटी, ग्वाडलजारा और मॉन्टेरी में होंगे। बाकी मुकाबले अमेरिका के 11 शहरों में आयोजित किए जाएंगे। फीफा ने इस भव्य आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। संगठन ने अमेरिका में अपने फील्ड ऑफिस मियामी और न्यूयॉर्क के ट्रंप टॉवर में स्थापित किए हैं।