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जबलपुर में मंदिर के भीतर पेशाब करने से विवाद, मोहम्मद रिजवान गिरफ्तार

 जबलपुर शहर के गढ़ा थाना अंतर्गत छोटी बजरिया क्षेत्र में सोमवार रात एक धार्मिक स्थल पर की गई आपत्तिजनक हरकत के बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। 1963 से स्थापित एक प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे स्थित पूजनीय स्थल पर एक संप्रदाय विशेष के युवक द्वारा की गई अमर्यादित क्रिया ने स्थानीय लोगों और हिंदूवादी संगठनों को आक्रोशित कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि क्षेत्र में एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है। यह है घटनाक्रम जानकारी के अनुसार, गढ़ा छोटी बजरिया में एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे दशकों पुराना धार्मिक स्थल है, जहां स्थानीय नागरिक नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक पूजन-पाठ करते हैं। सोमवार की रात काजी मोहल्ला, गढ़ा निवासी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जू वहां पहुंचा और धार्मिक स्थल पर लघुशंका कर दी। इस घृणित कृत्य पर पास ही खड़े स्थानीय निवासी मोहित तिवारी की नजर पड़ गई। मोहित द्वारा आपत्ति जताने और शोर मचाने पर आरोपित रिजवान मौके से भाग निकला।     दरअसल, घटना 9 फरवरी की रात करीब 9:30 बजे गढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटी बजरिया स्थित एक शिव मंदिर की है. यहां मुजावर मोहल्ला के रहने बाले एक मुस्लिम युवक रिजवान ने शिवलिंग पर पेशाब कर दिया था. लोगों ने जब उसे ऐसा करते देखा, तो पीटने लगे. इसकी सूचना हिंदूवादी संगठनों को भी मिली. वो भी वहां पहुंचे. साथ ही पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई. इससे पहले की पुलिस वहां पहुंची आरोपी मौके से फरार हो गया. पुलिस ने लिया ये एक्शन पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान रिजवान खान उर्फ रिज्जु उर्फ भूरा के रूप में हुई. गढ़ा थाना पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196B, 298 और 299 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है. थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा ने बताया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है. साथ ही आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में शांति व्यवस्था भंग न हो. शिवलिंग का शुद्धिकरण घटना के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मंदिर पहुंचे और विधि-विधान के साथ शिवलिंग का शुद्धिकरण किया. हनुमान चालीसा और शिव स्तोत्र का पाठ किया गया तथा गंगा और नर्मदा जल से जलाभिषेक कर मंदिर परिसर को पुनः पवित्र किया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे. वहीं सुरक्षा में भी भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा. इसके अलावा पुलिस की पेट्रोलिंग लगातार की जा रही है और अतिरिक्त फोर्स को भी तैनात किया गया है. मुस्लिम समुदाय ने की निंदा इधर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इस घटना की निंदा की है. समुदाय के लोगों ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी का समाज से कोई संबंध नहीं है और उसके कृत्य का वे समर्थन नहीं करते. ज्ञापन में आरोपी को समाज से बहिष्कृत करने की बात कही गई है. साथ ही ये भी मांग की गई कि कानून के तहत उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की हरकत करने का साहस न करे. मंदिरों में पुलिस गश्त बढ़ाई महाशिवरात्रि पर्व को देखते हुए प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है. मंदिरों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है. वहीं पूरे मामले में जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने आम नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव फैलाने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है. थाने का घेराव कर प्रदर्शन सूचना जंगल की आग की तरह फैल गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी, सदस्य और क्षेत्रीय नागरिक गढ़ा थाने पहुँच गए। आक्रोशित भीड़ ने थाने का घेराव कर जमकर नारेबाजी की और आरोपित को तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने की ऐसी कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। तनाव के बाद पुलिस ने मोहित तिवारी की शिकायत पर आरोपी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जू के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे देर रात ही गिरफ्तार कर लिया।

गंगा जल छिड़ककर रानी बेगम ने लिया हिंदू धर्म, बोली- अब महसूस हो रहा पुनर्जन्म

छतरपुर  छतरपुर में वार्ड क्रमांक 11 की पूर्व पार्षद रानी बेगम ने साधु-संतों की मौजूदगी में विधि-विधान से पुनः हिंदू धर्म अपनाते हुए घर वापसी की। इस अवसर पर हनुमान जी को साक्षी मानकर हवन-पूजन किया गया और गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण संपन्न कराया गया। घर वापसी के बाद उन्होंने अपना मूल नाम शीला यादव पुनः धारण किया। वर्ष 1995 में साबिर काजी के साथ निकाह कर इस्लाम धर्म अपनाया शीला यादव मूल रूप से छतरपुर जिले के ग्राम कुर्रा, थाना ईसानगर की निवासी हैं। जो वर्तमान वार्ड नंबर 12 मैं रह रही है उन्होंने बताया कि उनका बचपन का नाम शीला यादव था और उनके पिता का नाम चिंटोले यादव है। वर्ष 1995 में साबिर काजी के साथ निकाह कर इस्लाम धर्म अपनाया और करीब 21 वर्षों तक वैवाहिक जीवन व्यतीत किया। हालांकि, वहां की परंपराओं और जीवनशैली को स्वीकार न कर पाने के कारण वर्ष 2018 में उन्होंने तलाक लेकर हिंदू धर्म पुनः अपना लिया था, लेकिन धार्मिक विधि से घर वापसी नहीं हो सकी थी।  शीला यादव का कहना है कि बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा घर वापसी और हिंदू राष्ट्र को लेकर चलाए जा रहे अभियान से वे प्रेरित हुईं। उन्होंने कहा कि भारतीय और हिंदू होने के नाते हिंदू धर्म ही उनकी आत्मा से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि नाम परिवर्तन को लेकर समाचार पत्रों में इश्तिहार प्रकाशित कराया, आधार कार्ड में नाम अपडेट कराया, लेकिन प्रशासनिक दस्तावेजों में रानी बेगम से शीला यादव नाम दर्ज कराने के लिए वे पिछले एक वर्ष से कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं। छतरपुर के साधू संतो औऱ सनातन धर्म सेवा समिति से संपर्क किया जहां एआज गुरुवार को अनगढ़ टोरिया में साधु-संतों की उपस्थिति में विधिवत घर वापसी कराई गई शीला यादव बोलीं, जैसे पुनर्जन्म  हुआ हो.. शीला यादव ने कहा कि मैंने यादव कुल में जन्म लिया था और मैं यादव परिवार में पली बढ़ी। वो याद करते हुए कहती हैं कि  मैने शादी के बाद इस्लाम कुबूल किया और 20-25 साल तक मैं साबिर काजी के साथ मुस्लिम रीतिरिवाज के साथ रही, लेकिन ये रास नहीं आ रहा था, घुटन महसूस हो रही थी।  अब से मैं अपने धर्म और समाज में जीना मरना चाहती हूँ। रानी बताती हैं कि इन बीच रानी बेगम बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा और पार्षद रही, लोगों की जनसेवा की, पर जो सुकून अपने धर्म में था और है वो कहीं नहीं हैं मैं मजबूरी में घुट-घुट कर जीती रही।   

मंडला में 15 ईसाई लोगों ने हिंदू धर्म अपनाया, कहा- अब हम अपनी मूल संस्कृति में लौटे हैं

मंडला मध्य प्रदेश के मंडला जिले में 15 ईसाई लोगों ने घर वापसी की है। घर वापसी कार्यक्रम का आयोजन सुरंगदेवरी गांव स्थित प्रसिद्ध सिद्धेश्वर धाम में आयोजित किया गया था। सोमवार को यहां धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया है। इसके बाद तीन परिवारों के 15 सदस्यों ने सनातन धर्म अपनाया है। धार्मिक अनुष्ठान का हुआ आयोजन दरअसल, जिले के सुरंगदेवी गांव स्थित प्रसिद्ध सिद्धेश्वर धाम में एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इसमें कुल 15 लोगों ने ईसाई धर्म को छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया है। यह घर वापसी कार्यक्रम आचार्य ललित मिश्रा की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे यह आयोजन आचार्य ललित मिश्रा द्वारा आयोजित गणेश पुराण कथा के समापन दिवस पर हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ इस धार्मिक प्रक्रिया को साक्षी भाव से देखा। तीन वर्षों से कर रहे हैं धार्मिक आयोजन आचार्य ललित मिश्रा पिछले करीब तीन वर्षों से इस क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन कर रहे हैं। उनके द्वारा आयोजित कथाओं और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से अब तक कई परिवारों की घर वापसी कराई जा चुकी है। आचार्य मिश्रा ने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वेच्छा से की जाती है और किसी पर कोई दबाव नहीं डाला जाता। स्वेच्छा से लौटे मूल धर्म में घर वापसी करने वाले परिवारों के सदस्यों ने बताया कि वे कुछ वर्ष पूर्व विभिन्न व्यक्तिगत और सामाजिक कारणों से ईसाई धर्म में चले गए थे। समय के साथ उन्हें अपनी मूल परंपराओं, संस्कारों और संस्कृति से जुड़ाव महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म में लौटने का निर्णय लिया। संस्कृति से जोड़ना ही उद्देश्य इस अवसर पर आचार्य ललित मिश्रा ने कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और किसी भी धर्म के प्रति द्वेष नहीं रखते। उनका उद्देश्य केवल उन लोगों को उनकी मूल संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक संस्कारों से दोबारा जोड़ना है, जो किसी कारणवश उनसे दूर हो गए थे। ग्रामीणों की रही मौजूदगी कार्यक्रम के दौरान सुरंगदेवरी गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के कई लोग मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान शांति और अनुशासन बना रहा। घर वापसी के बाद हवन-पूजन कर सभी के सुख-समृद्धि की कामना की गई।

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के मंसूबे बुलंद, बैनर लगाकर नरसंहार की धमकी दे रहे

चटगांव  बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस घटना के बाद से देश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में डर बढ़ गया है. हाल ही में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर फर्जी ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने से यह डर और गहरा गया है. एक ताजा घटना में चटगांव के राउजान उपजिला में एक बैनर सामने आया है, जिसमें हिंदू और बौद्ध समुदाय के दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया है. यह बैनर उस इलाके से बरामद हुआ है, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आगजनी की गई थी. फिलहाल पुलिस ने बैनर को जब्त कर लिया है. बांग्लादेशी सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रतिनिधि कुशल बरुण चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने हिंसा से पीड़ित हिंदू परिवारों से मुलाकात की है. उनके मुताबिक, बैनर में लिखा था कि हिंदू और बौद्ध समुदाय को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई गई और इसके लिए फंडिंग भी की गई. इस पूरे मामले में इस्लामी कट्टरपंथी तत्व उस्मान हादी की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का बिना सबूत दावा कर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं. ‘हिंदुओं और अल्पसंख्यकों का वजूद मिटा देंगे’ स्थानीय मीडिया और पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बैनर में भड़काऊ और डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया था. हिंदू और बौद्ध समुदाय के करीब दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया. अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा की धमकी दी गई. इलाके को साफ करने और अस्तित्व खत्म करने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. संदेश का मकसद डर फैलाना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना बताया जा रहा है. यह बैनर उसी क्षेत्र से मिला, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आग लगाकर उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी. ऐसे में पुलिस मान रही है कि बैनर और आगजनी की घटना आपस में जुड़ी हो सकती हैं. इस तरह से पोस्टर सिर्फ धमकी नहीं, सामूहिक हिंसा की मानसिक तैयारी की तरह हैं, जो अल्पसंख्यकों का मनोबल तोड़कर उन्हें डराती हैं. यूनुस हिंदुओं का नामोनिशान मिटवा देंगे क्या? बांग्लादेश में सिर्फ दिसंबर के महीने में अब तक 4 हिंदुओं की हत्याएं हो चुकी हैं, जबकि देश में हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान से लगातार हिंदुओं को टार्गेट किया जा रहा है.     जोगेश चंद्र रॉय को 7 दिसंबर को बेरहमी से गला रेतकर मार डाला गया. जोगेश के साथ उनकी पत्नी सुबर्णा रॉय की भी हत्या कर दी गई, दोनों का शव उनके घर के अंदर से मिला.     18 दिसंबर 2025 को भालुका में दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप में लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला और शरीर को आग के हवाले कर दिया गया था. इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा.     इसी महीने राजबारी जिले में अमृत मंडल नामक एक हिंदू युवक को भी भीड़ के पीट-पीटकर मार डालने की खबरें आईं. 24 दिसंबर को देर रात उनके ऊपर अचानक हमला हुआ और उन्हें बचने तक का मौका नहीं मिला, 25 दिसंबर को उनकी मौत हो गई. इसके अलावा मंगलवार को हिंदुओं को घर में जिंदा जलाने के मकसद से उनके घरों में आग लगा दी गई थी और अब उन्हें नरसंहार के बैनर ने और दहशत फैला दी है. सवाल ये है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू होना अपराध हो गया है? यूनुस के राज में हिंदुओं की यूं ही हत्या होती रहेगी और वे उन्हें मरते देखेंगे?

हिंदू, ईसाई और सिख समुदाय बांग्लादेश में हिंसा का शिकार, दुनिया ने जताई चिंता

नई दिल्ली बांग्लादेश में हिंदुओं सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है. हालात ऐसे हैं कि केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि ईसाई और सिख समुदाय भी हिंसा और अमानवीय व्यवहार का शिकार बन रहे हैं. हाल ही में एक हिंदू युवक को भीड़ द्वारा बेरहमी से मार डाले जाने और बाद में उसके शव को पेड़ से लटकाकर जला दिए जाने की घटना ने पूरी दुनिया को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हिंदुओं के लिए आखिर सबसे अत्याचारी मुस्लिम देश कौन सा है? क्या सबसे अत्याचारी देश की कोई आधिकारिक रैंकिंग है? सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी मान्य अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा हिंदुओं के लिए सबसे अत्याचारी मुस्लिम देश की आधिकारिक रैंकिंग जारी नहीं की जाती है. धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली संस्थाएं- जैसे USCIRF, Amnesty International और Pew Research देशों की स्थिति को घटनाओं, कानूनों और सामाजिक माहौल के आधार पर आकलित करती हैं, न कि किसी एक समुदाय के लिए सीधी रैंकिंग बनाती हैं.  धार्मिक उत्पीड़न को कैसे मापा जाता है अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स आमतौर पर तीन आधार देखती हैं- कानूनी ढांचा, सरकारी संरक्षण या निष्क्रियता, और सामाजिक हिंसा. जब किसी देश में अल्पसंख्यकों पर हमले होते हैं और उन पर कार्रवाई नहीं होती, तो उसे धार्मिक स्वतंत्रता के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है. यह आकलन किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सभी अल्पसंख्यकों पर लागू होता है. कौन सा देश हिंदुओ के लिए सबसे अत्याचारी किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने यह घोषित नहीं किया है कि किस मुस्लिम देश में हिंदुओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार होता है, लेकिन मान्य वैश्विक रिपोर्टों और तथ्यों के आधार पर कुछ देशों का नाम बार-बार गंभीर स्थिति के रूप में सामने आता है. वर्तमान अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार हिंदुओं के लिए सबसे ज्यादा कठिन और असुरक्षित हालात जिन मुस्लिम देशों में माने जाते हैं, उनमें पाकिस्तान और अफगानिस्तान टॉप पर आते हैं. पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ जबरन धर्मांतरण, विशेषकर नाबालिग लड़कियों के मामले, मंदिरों पर हमले, ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग और सामाजिक भेदभाव जैसी घटनाएं लगातार अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दर्ज होती रही हैं. यही कारण है कि USCIRF और अन्य मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में पाकिस्तान को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए उच्च जोखिम वाला देश माना जाता है. अफगानिस्तान के हालात अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद हालात और भी खराब हुए हैं. वहां हिंदू समुदाय लगभग समाप्ति की कगार पर है. धार्मिक स्वतंत्रता लगभग नहीं के बराबर है और खुले तौर पर हिंदू पहचान के साथ रहना बेहद मुश्किल माना जाता है. बांग्लादेश की स्थिति क्या कहती है बांग्लादेश एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में बांग्लादेश को अक्सर वॉच लिस्ट या चिंताजनक घटनाओं वाला देश माना गया है. दुर्गा पूजा के दौरान हिंसा, मंदिरों पर हमले और जबरन पलायन की घटनाएं समय-समय पर रिपोर्ट हुई हैं. हालांकि बांग्लादेश का संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात करता है और सरकार आधिकारिक रूप से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का दावा करती है. लेकिन इस वक्त वहां के हालात हिंदुओं के बद से बदत्तर हो चुके हैं. 

धर्म परिवर्तन मामला: हिंदू युवक को गौ मांस खाने और जमात में शामिल होने पर मजबूर किया, 3 पर FIR दर्ज

भोपाल  भोपाल के जहांगीराबाद में एक युवक का बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराए जाने का मामला सामने आया है। फरियादी 27 वर्षीय ने शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।पुलिस के मुताबिक पीड़ित युवक ने बताया कि जहांगीराबाद में रहने वाली मुस्लिम युवती से उसका प्रेम प्रसंग था। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। लिहाजा वर्ष 2022 में परिजनों की मर्जी के खिलाफ घर से बिना बताए एक साथ रहने चले गए। मामले में युवती के परिजनों ने थाना जहांगीराबाद में बहला फुसलाकर अपहरण और रेप करने की एफआईआर दर्ज करा दी। युवक के खिलाफ रेप का केस कोर्ट में विचाराधीन है। पेशी के दौरान की शादी की बात रेप केस के मामले में युवक की पिछले दिनों पेशी थी, जबकि रेप पीड़िता के पिता और माता की गवाही कोर्ट में होना थी। तभी युवक ने प्रेमिका से शादी के लिए बात की। युवती के कहने पर ही उसके पिता से शादी की बात की। पिता ने स्वयं के मुस्लिम होने का हवाला देते हुए बेटी से शादी करने के ऐवज में युवक को मुस्लिम धर्म अपनाने की पेशकश की। मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद उसके खिलाफ चल रहे रेप के केस को खत्म करने और बेटी से शादी करने का वादा किया। शादी की लालच में अपनाया मुस्लिम धर्म युवक ने पूर्व प्रेमिका से शादी की लालच में मुस्लिम धर्म को अपना लिया। तब युवती के भाई ने उसे जमातों में भेजना शुरू कर दिया। युवक ने FIR में बताया कि उसे तीन दिन से लेकर 4 महीने तक की जमातों में विभिन्न प्रदेशों और जिलों में भेजा गया। इसके बाद भी लड़की के परिजनों ने बेटी से उसकी शादी नहीं कराई। कर्नाटक में खिलाया गौ मांस युवक ने पुलिस को यह भी बताया कि एक जमात में उसे कर्नाटक भेजा गया था जहां उसे गौ मांस खाने के लिए मजबूर किया गया। वहां से लौटने के बाद भी लड़की के पिता ने बेटी से उसकी शादी नहीं कराई। लिहाजा युवक हिंदू धर्म में वापस लौट आया है। इसकी शिकायत के आधार पर जहांगीराबाद थाना पुलिस ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लड़की के पिता मां और भाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

हिंदू प्रेमियों के लिए अपना धर्म छोड़ा, रुखसाना और जास्मीन की नई पहचान

लखीमपुर खीरी  यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में दो मुस्लिम बहनों ने हिंदू लड़कों से मंदिर में शादी रचा ली. हिंदू रीति-रिवाज से जास्मीन और रुखसाना बानो स्थानीय लड़कों रामप्रवेश और सर्वेश के साथ शादी के बंधन में बंध गईं. इनके बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था. नाम बदलकर रुखसाना अब रूबी और जास्मीन चांदनी बन गई हैं. ये शादी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.  दरअसल, सोमवार को पड़ुआ थाना क्षेत्र के बैरिया गांव में दो मुस्लिम बहनें जास्मीन और रुखसाना बानो अपने प्रेमियों के घर पहुंच गईं. वे दोनों रविवार देर रात से वहीं मौजूद थीं और शादी की जिद पर अड़ी थीं. दोनों का गांव के ही एक ही परिवार के दो लड़कों- रामप्रवेश और सर्वेश से प्रेम संबंध था. दोनों बहनें बालिग हैं, जिसकी पुष्टि उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों से हुई.  जानकारी के मुताबिक, रविवार की देर रात दोनों बहनें अपने घर से चुपचाप निकलीं और सीधे रामप्रवेश और सर्वेश के घर पहुंच गईं. उनके अचानक पहुंचने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई. गांव वाले और परिवार के लोग हैरान थे कि आखिर ये कैसे हुआ. खबर फैलते ही दोनों परिवारों में हलचल मच गई और लोग इस मामले को सुलझाने के लिए इकट्ठा हुए. गांव में तनाव का माहौल बन गया था, लेकिन दोनों बहनें अपने फैसले पर अडिग थीं.  सोमवार सुबह इस मामले को सुलझाने के लिए गांव के बुजुर्गों ने पंचायत बुलाई. सभी चाहते थे कि दोनों परिवारों के बीच कोई सहमति बन जाए, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका. क्योंकि, दोनों बहनें अपनी बात पर अड़ी रहीं कि वे अपने प्रेमियों से ही शादी करेंगी. उनकी जिद के सामने पंचायत भी नाकाम रही. जब उनकी उम्र की जांच की गई तो शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर पता चला कि दोनों बहनें बालिग हैं.  जब पंचायत में कोई बात नहीं बनी, तो दोनों बहनों और उनके प्रेमियों की खुशी के लिए हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कराने का फैसला लिया गया. जास्मीन और रुखसाना ने अपना धर्म छोड़कर अपने प्यार को चुना. इस फैसले ने न सिर्फ दोनों परिवारों को बल्कि पूरे गांव को चौंका दिया है. 

अमेरिका से बांग्लादेश-पाकिस्तान तक, मंदिरों और अल्पसंख्यकों पर हमलों का केंद्र ने दिया ब्यौरा

नई दिल्ली विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि बांग्लादेश में 2021 से अब तक हिंदुओं पर 3,582 हमलों की घटनाएं हुई हैं। रंगपुर-चटगांव जैसे क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों पर हिंसा जारी है। उन्होंने शिवसेना (UBT) सांसद अनिल देसाई के सवाल के जवाब देते हुए कहा- भारत ने पाकिस्तान के सामने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के 334 प्रमुख मामले उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में हिंदुओं पर हमले और मंदिरों में तोड़फोड़ के मामले सामने आए, पिछले साल से अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ के 5 और कनाडा में 4 मामले सामने आए हैं। राज्यसभा में पूछे गए अन्य सवालों के जवाब     लालमोनिरहाट एयरबेस पर भारत ने संज्ञान लिया विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में कहा कि बांग्लादेश के लालमोनिरहाट एयरबेस से जुड़ी रिपोर्टों का संज्ञान लिया है। भारत इस मामले पर सतर्क है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर पहलू पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार से पूछा गया था कि क्या बांग्लादेश ने चीन को लालमोनिरहाट एयरबेस से सैन्य गतिविधि शुरू करने की अनुमति दी है?     1962 में चीन का 38 हजार वर्ग किमी जमीन पर कब्जा था सरकार ने बताया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के अंत में चीन ने 38,000 वर्ग किमी भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया था। विदेश राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि चीन के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत ने कई कूटनीतिक प्रयास किए हैं।     1 जुलाई तक 6,774 भारतीय कामगार इजराइल गए इस वर्ष 1 जुलाई तक 6,774 भारतीय कामगार इजराइल गए हैं। ये सभी नवंबर 2023 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय समझौते के तहत वहां काम करने गए। सरकार ने बताया कि मार्च 2024 में लेबनान से हुए एक हमले में एक भारतीय कृषि श्रमिक की मौत हो गई। 3 भारतीय घायल हुए।     आयुष्मान भारत में धोखाधड़ी, 1,504 अस्पतालों पर जुर्माना आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में अनियमितताओं और धोखाधड़ी पर अब तक 1114 अस्पतालों को पैनल से हटाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि 1,504 अस्पतालों पर ₹122 करोड़ का जुर्माना लगाया और 549 अस्पतालों को निलंबित किया है।     देशभर में सिकल सेल के 2.16 लाख मामले मिले केंद्र सरकार ने बताया कि 17 राज्यों में 6.04 करोड़ लोगों की सिकल सेल रोग की जांच की गई, जिनमें 2.16 लाख संक्रमित पाए गए। स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने बताया कि यह जांच ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत हुई। UN का दावा-बांग्लादेश में हिंसा से 2024 में 1400 की मौत युक्त राष्ट्र (UN) ने बांग्लादेश में पिछले साल सरकार विरोधी छात्र प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई को लेकर फरवरी 2025 में एक रिपोर्ट जारी की थी। UN का दावा था कि इस कार्रवाई में 1400 लोगों की हत्या कर दी गई। इनमें ज्यादातर लोगों की मौत के पीछे सुरक्षा बलों की गोलीबारी जिम्मेदार है। रिपोर्ट में बताया गया था कि पिछले साल शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद हिंदुओं के घरों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और पूजा स्थलों पर हमले हुए। खासतौर पर ग्रामीण और तनाव वाले जिले जैसे ठाकुरगांव, लालमोनिरहाट, दिनाजपुर, सिलहट, खुलना और रंगपुर में हमले हुए। रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी सुरक्षा बलों ने आंदोलन को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गोलीबारी, गिरफ्तारियां और प्रताड़ना का सहारा लिया। ये कार्रवाई राजनीतिक नेतृत्व और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के आदेश पर हुई। UN ने इसे 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने  लोकसभा में बताया कि साल 2024 में 2,06,378 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़कर दूसरे देशों की नागरिकता ले ली। कीर्ति सिंह ने कहा कि नागरिकता छोड़ने के कारण व्यक्तिगत होते हैं और यह वही व्यक्ति जानता है जिसने यह फैसला लिया हो। 

टीटी नगर में ‘मकान बिकाऊ’ पोस्टरों से हड़कंप, हिंदू परिवारों के पलायन की आशंका पर प्रशासन सतर्क

भोपाल   मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। भोपाल के टीटी नगर थाना इलाके में रहने वाले हिंदू परिवार पलायन करने को मजबूर हैं। इन हिंदू परिवारों ने अपने-अपने घरों के बाहर पोस्टर लगाए हैं जिनमें उन्होंने मुस्लिम वर्ग के लोगों की प्रताड़ना से परेशान होकर मकान बेचने की बात लिखी है। हिंदू परिवारों के द्वारा घर के बाहर ये पोस्टर लगाए जाने से हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन किया। 'मुस्लिमों से परेशान होकर मकान बेचना है..' भोपाल शहर के टीटी नगर थाना इलाके की बाणगंगा बस्ती में रहने वाले परिवारों ने अपने घरों के बाहर मकान बेचने के पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टर में उन्होंने लिखा है कि मुस्लिम वर्ग के लोगों की प्रताड़ना से तंग आकर वो अपना मकान बेचना चाहते हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि आए दिन होने वाली परेशानियों और बदमाशों के आतंक से वो परेशान हो चुके हैं। बीती रात भी मुस्लिम वर्ग के कुछ असामाजिक तत्वों ने जमकर आतंक मचाया जिसके कारण वो अपने घरों में भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हिंदू संगठनों ने किया प्रदर्शन बाणगंगा बस्ती से हिंदू परिवारों के पलायन का मन बनाने और मकान बेचने के पोस्टर लगाए जाने की खबर जब हिंदू संगठनों को लगी तो बड़ी संख्या में हिंदू संगठन के कार्यकर्ता बस्ती में पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया है कि पुराने भोपाल के अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों से पहले भी बड़ी संख्या में हिंदुओं का पलायन हो चुका है और अब अन्य बस्तियों व बड़े क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है। हिंदू संगठनों के बस्ती में पहुंचने के बाद पुलिस भी बस्ती में पहुंची और लोगों के घरों के बाहर लगाए गए मकान बेचने के पोस्टरों को हटवाया और हर मुस्लिम घर के सामने पुलिसकर्मी तैनात किया गया।