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होली पर मध्य प्रदेश में दो दिन का अवकाश: तीन मार्च के साथ चार मार्च भी रहेगा सार्वजनिक अवकाश

भोपाल  मध्य प्रदेश में होली पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। प्रदेश के हजारों स्थानों पर सोमवार को होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस बार होली का मुख्य दिन कुछ अलग रहेगा, क्योंकि तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान सूतक काल लागू रहता है और इस अवधि में उत्सव नहीं मनाया जाता है, इसलिए इस साल होली का रंगोत्सव दहन के दूसरे दिन के बजाए चार मार्च बुधवार को तीसरे दिन मनाया जाएगा।  राज्य सरकार ने पहले ही तीन मार्च को होली के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था, लेकिन अब रविवार को जारी नए आदेश के अनुसार, अब तीन और चार मार्च 2026 दोनों दिन सार्वजनिक और सामान्य अवकाश रहेगा। यह आदेश ‘निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881’ के तहत लिया गया है। धार्मिक और खगोलीय कारणों से होली उत्सव का दिन बदलना आवश्यक था, ताकि जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस बार होली उत्सव की शुरुआत दो मार्च की रात से होगी, जब पूरे राज्य में होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद रंग उत्सव चार मार्च को मनाया जाएगा। कन्फ्यूजन खत्म, अब मनाएं जश्न दरअसल, इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों में काफी उलझन थी। कोई 3 मार्च को होली मनाने की तैयारी में था, तो कोई 4 मार्च को। दफ्तर जाने वालों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर छुट्टी कब मिलेगी? शासन ने अब इस भ्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया है। मध्य प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब होली के मौके पर लगातार दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। कर्मचारी संगठनों की जिद के आगे झुकी सरकार बता दें कि सरकार ने पहले सिर्फ 3 मार्च यानी कि मंगलवार की छुट्टी घोषित की थी। लेकिन कर्मचारी संगठनों का तर्क था कि चूंकि होली दो दिन मनाई जा रही है, इसलिए 4 मार्च को भी दफ्तर बंद रहने चाहिए। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास भेजा, जिस पर रविवार को मुहर लग गई। बैंक और दफ्तर सब रहेंगे बंद जारी अधिसूचना के मुताबिक, 4 मार्च को 'निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' के तहत छुट्टी घोषित की गई है। इसका मतलब यह है कि उस दिन सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ सभी बैंक भी बंद रहेंगे। यह आदेश पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू होगा। प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी जिलों में होली समारोह को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। बता दें, होली का पर्व धार्मिक रीति-रिवाज और खगोलीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मनाया जाता है। जनता को रंगों और खुशियों के साथ-साथ सावधानी और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है। यह बदलाव इस पर्व को सुरक्षित और आनंददायक बनाने के लिए किया गया है। 

चंद्र ग्रहण और होली एक साथ: नाथद्वारा में श्रीनाथजी के दर्शन कब होंगे? जानिए पूरा विवरण

राजसमंद पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी की हवेली में 3 मार्च 2026, फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को पड़ रहे चंद्र ग्रहण के कारण होली एवं डोल उत्सव के सेवा क्रम में परिवर्तन किया गया है। तिलकायत राकेश महाराज की आज्ञा अनुसार मंगलवार को होने वाले चंद्र ग्रहण को देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 3 मार्च को प्रातः 3 बजे शंखनाद होगा और उसी दिन डोल उत्सव का आयोजन किया जाएगा। चंद्र ग्रहण का स्पर्श सायं 3:20 बजे से होगा तथा मोक्ष 6:47 बजे रहेगा। ग्रहण काल 3:20 बजे से 6:48 बजे तक रहेगा। इस कारण डोल उत्सव के बाद ग्रहण क्रम की सेवा ही संपन्न होगी। युवाचार्य विशाल बावा ने बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा में डोल उत्सव का मुख्य आधार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है और सामान्यतः उत्सव इसी नक्षत्र में मनाया जाता है। किंतु शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार यदि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन किसी क्षेत्र में चंद्र ग्रहण दृश्य हो, तो नक्षत्र की अपेक्षा पूर्णिमा तिथि को प्रधानता दी जाती है। जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां डोल उत्सव पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है। चूंकि प्रधानपीठ श्रीनाथद्वारा में चंद्र ग्रहण दृश्य होगा, इसलिए यहां डोल उत्सव 3 मार्च 2026 को ही आयोजित किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में ग्रहण दृश्य नहीं होगा, वहां 4 मार्च 2026 को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में डोल उत्सव मनाया जाएगा। दर्शन व्यवस्था इस प्रकार रहेगी     प्रातः मंगला, श्रृंगार और ग्वाला दर्शन नहीं खुलेंगे।     डोल के तीसरे-चौथे राजभोग दर्शन लगभग 10:30 बजे होंगे।     उत्थापन, भोग, संध्या आरती और शयन दर्शन नहीं खुलेंगे।     ग्रहण का सूतक लगने के कारण राजभोग का सखड़ी प्रसाद गौशाला भेजा जाएगा।     उत्सव के पश्चात ग्रहण क्रम की सेवा होगी।     ग्रहण से संबंधित प्रमुख समय     ग्रहण का वेध: प्रातः 3:52 बजे     ग्रहण का स्पर्श: सायं 3:20 बजे     मध्य/गौदान: सायं 5:04 बजे     मोक्ष: सायं 6:47 बजे     चंद्रोदय: सायं 6:42 बजे     पर्वकाल: 3 घंटे 27 मिनट     दृश्यपर्व: 4 मिनट 26 सेकंड

त्योहारों के दौरान सुरक्षा कड़ी: झारखंड में होली और रमजान को लेकर हाई अलर्ट

रांची झारखंड में आगामी होली के त्योहार को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने सभी जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। स्पेशल ब्रांच ने राज्य के सभी जिलों के डीसी और एसपी को पत्र लिखकर विशेष सतकर्ता बरतने तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। इस वर्ष तीन मार्च को होलिका दहन और चार मार्च को होली मनाई जाएगी। खास बात यह है कि मुस्लिम समुदाय का पवित्र रमजान माह भी चल रहा है। शाम के समय जहां एक ओर इफ्तार होता है, वहीं दूसरी ओर होली मिलन समारोह आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतकर्ता बरतने को कहा गया है। फेसबुक, व्हाट्सएप सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। नफरत फैलाने वाले ग्रुप एडमिन के नाम और मोबाइल नंबरों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरे संप्रदाय के लोगों पर जबरन रंग डालने या धार्मिक स्थलों के पास हुड़दंग करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। साल 2021 से 2025 के दौरान होली पर हुई सांप्रदायिक घटनाओं का पूरा विवरण तैयार करने को कहा गया है। जिन क्षेत्रों में पहले लाउडस्पीकर या डीजे बजाने को लेकर विवाद हुआ है, वहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। त्योहार के दौरान अवैध और नकली शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए छापेमारी के निर्देश दिए गए हैं। होलिका दहन के समय झोपड़ी, गुमटी या दुकान में आगजनी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सघन गश्ती की जाएगी। जिला और थाना स्तर पर शीघ्र शांति समिति की बैठकें आयोजित कर स्थानीय समस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया है। पशु तस्करी, अवैध पशुवध और प्रतिबंधित मांस की बिक्री पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नशे में तेज रफ्तार वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। पुलिस बलों की प्रतिनियुक्ति त्योहार की समाप्ति तक सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि होली और रमजान दोनों पर्व शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हो सकें।  

ग्रामीण अंचलों में वर्षों पुरानी ‘बर्तन प्रथा’ बंद, होली पर नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना

भोपाल  चंद्रवंशी खाती समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है. ग्राम पंचायत खेरी स्थित हनुमान मंदिर में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि होली के पर्व पर बरसों से चली आ रही 'बर्तन प्रथा' को अब पूरी तरह समाप्त किया जाएगा. समाज के इस निर्णय का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 5000 रुपये का आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान भी किया गया है. फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़ा फैसला बैठक में ग्राम खेरी के सरपंच प्रतिनिधि धनपाल सिंह वर्मा गांव के पटेल मेहरबान सिंह वर्मा के नेतृत्व में समाज के वरिष्ठजनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहारों के नाम पर बढ़ती फिजूलखर्ची और उपहारों के लेन-देन की प्रतिस्पर्धा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है. 'बर्तन प्रथा' जैसी कुरीतियां समाज में भेदभाव पैदा करती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए समाज ने अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है.  क्या है 'बर्तन प्रथा'? ग्रामीण अंचलों में विशेषकर होली या दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर, शादीशुदा बेटियों और बहनों के घर (ससुराल) जाकर उन्हें उपहार देने की परंपरा रही है. इस परंपरा में कपड़ों और मिठाई के साथ-साथ पीतल, तांबे या स्टील के बर्तनों का सेट (जैसे थाली, लोटा, बाल्टी या कड़ाही) भेंट करना अनिवार्य माना जाने लगा. इसी लेन-देन की प्रक्रिया को 'बर्तन प्रथा' कहा जाता है. समाज में यह एक तरह की होड़ बन गई कि कौन कितने कीमती और बड़े बर्तन देता है. लोग अपनी आर्थिक स्थिति से बाहर जाकर दिखावा करने लगे. आर्थिक दबाव: मध्यम और गरीब परिवारों के लिए हर साल होली पर महंगे बर्तन खरीदना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया. कई बार इसके लिए कर्ज तक लेना पड़ता था. ससुराल में अपमान का डर: यदि कोई परिवार कम बर्तन देता या साधारण बर्तन ले जाता, तो अक्सर बहू-बेटियों को ससुराल में ताने सुनने पड़ते थे. ग्रामीणों ने किया फैसले का स्वागत ग्राम पंचायत खेरी के इस निर्णय की आसपास के क्षेत्रों में भी सराहना हो रही है. ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार के कड़े निर्णयों से न केवल समाज में समानता आएगी, बल्कि युवाओं को भी फिजूलखर्ची से दूर रहने की प्रेरणा मिलेगी. समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि का उपयोग समाज के सामूहिक कार्यों और विकास में किया जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि समाज के विकास के लिए पुरानी और बोझिल परंपराओं को त्यागना आवश्यक है. होली खुशियों का त्योहार है, इसे सादगी और प्रेम से मनाया जाना चाहिए. यह फैसला समाज के हर वर्ग के हित में लिया गया है.

होलिका दहन और होली के रंग: विंध्य में चार मार्च को उठेगा खुशियों का गुलाल

मैहर  विंध्य क्षेत्र में इस वर्ष रंगों का पर्व होली परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, अलग तिथि पर मनाया जाएगा। मैहर, सतना सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में 2 मार्च की रात होलिका दहन किया जाएगा, जबकि रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी। सूतक (शुद्धक) काल लगने के कारण इस बार 3 मार्च को रंग खेलने से परहेज किया जाएगा और तीसरे दिन होली मनाई जाएगी।  2 मार्च की रात होगा होलिका दहन धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार 2 मार्च को रात्रि लगभग 11 बजे से होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्रारंभ होगा। यह मुहूर्त सुबह तक रहेगा, जिसके दौरान श्रद्धालु परंपरागत विधि-विधान से होलिका दहन करेंगे। विंध्य क्षेत्र में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग होलिका दहन में शामिल होकर पूजा-अर्चना करते हैं। सूतक लगने से 3 मार्च को नहीं खेली जाएगी होली होलिका दहन के बाद सूतक (शुद्धक) काल लगने के कारण कुछ समय तक शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक के दौरान रंग खेलना उचित नहीं माना जाता, इसलिए 3 मार्च को होली नहीं खेली जाएगी। इसी कारण विंध्य क्षेत्र में इस बार 4 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा। पुजारी ने दी धार्मिक जानकारी मैहर के मां शारदा मंदिर के पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी होली का पर्व विधि-विधान से मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2 मार्च की रात 11 बजे से सुबह लगभग 6 बजे तक होलिका दहन किया जा सकता है। इसके बाद सूतक लगने के कारण रंग नहीं खेला जाएगा, इसलिए होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। धार्मिक परंपराओं का रखा जाएगा ध्यान हिंदू संगठन से जुड़े अनुराग मिश्रा ने बताया कि हिंदू धर्म में सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। होली जैसे धार्मिक पर्व में परंपराओं का विशेष महत्व होता है, इसलिए होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को मनाने की अपील की गई है। होली को लेकर बढ़ा उत्साह विंध्य क्षेत्र में होली को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। बाजारों में रंग-गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों की खरीदारी शुरू हो गई है। लोगों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शांतिपूर्ण माहौल में होली मनाने की तैयारी की जा रही है। 

होलिका दहन, धूडेली और होली उत्सव के लिए निर्णय, ज्योतिष मठ संस्थान में संगोष्ठी का आयोजन

होलिका दहन, धूडेली, होली उत्सव, चल समारोह हेतु हुआ निर्णय ज्योतिष मठ संस्थान में संगोष्ठी संपन्न  भोपाल  इस वर्ष तारीख दो की रात्रि को भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन किया जाएगा। इस दिन पूरी रात्रि भर पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी। लेकिन 3 तारीख को होलिका दहन का प्रश्न ही नहीं उठाता धर्म सिंधु निर्णय सिंधु आदि ग्रंथों के अनुसार प्रतिपदा तिथि को होलिका दहन नहीं करना चाहिए चाहे भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन क्यों ना करनी पड़े।होलिका दहन का कर्म काल रात्रि कालीन होता है अतः 3 तारीख को रात्रि में  पूर्णिमा तिथि नहीं रहेगी , ग्रहण का सूतक तथा ग्रहण की समाप्ति पश्चात रात्रि में प्रतिपदा तिथि आ जाएगी ।  अतः होलिका  दहन के कर्मकाल हेतु यह तिथि उपयुक्त नहीं है । ग्रहण रात्रि दूषित मानी जाती है जो होलिका दहन के लिए अशुभता देगी । यह जरूर है की 2 तारीख की रात्रि में होलिका दहन  पश्चात धुलेंडी  उत्सव प्रारंभ हो जाता है। परंतु इस वर्ष ग्रहण के सूतक काल की वजह से यह कार्य प्रभावित होगा, साथ ही होलिका दहन के दूसरे दिन होने वाला होली उत्सव,चल समारोह भी ग्रहण होने के कारण  4 तारीख को ही किया जाना चाहिए।   लगभग सभी पंचांगकर्ता एवं विद्वानों द्वारा यह जानकारी वेब संगोष्ठी कर प्रदान की गई।संगोष्ठी ज्योतिष मठ संस्थान द्वारा आयोजित की गई थी। संस्थान के संचालक ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम ने बताया की वेब संगोष्ठी में होली का दहन एवं होली उत्सव को लेकर सभी पंचांगकरो एवं अनेक विद्वानों के तर्क वितर्क हुए एवं सर्वसम्मति से तारीख दो की  रात्रि 2:00 बजे के बाद पुच्छकाल भाद्रा पश्चात पूरे भारत देश में होलिका दहन किया जाएगा। तथा पर्व उत्सव 4 तारीख को मनाया जाएगा अतः भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है ।

कन्फ्यूजन दूर करें: 3 मार्च को सरकारी छुट्टी, धुलेंडी 4 को, जानें सही जानकारी

होलिका दहन और होली की तारीख को लेकर इस साल लोगों में कन्फ्यूजन बना हुआ है। इस साल यह कन्फ्यूजन है कि होलिका दहन 2 मार्च को होगा या 3 मार्च को और रंगों वाली होली किस दिन मनाई जाएगी। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग और ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस साल होलिका पूजन और दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा। वहीं, रंगभरी होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। 2 मार्च को कब से कब तक है पूर्णिमा तिथि- पंचांग के अनुसार 2 मार्च को सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर सूर्योदय होगा। इस दिन चतुर्दशी तिथि शाम 5 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। नक्षत्र की बात करें तो सुबह 7 बजकर 24 मिनट तक आश्लेषा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद मघा नक्षत्र लग जाएगा। योग की स्थिति में दिन में 12 बजकर 6 मिनट तक अतिगंड योग रहेगा, उसके बाद सुकर्मा योग बनेगा। औदायिक योग सौम्य रहेगा। अगले दिन यानी 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। होलिका दहन रात में ही क्यों होता है- शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन हमेशा रात में और पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है। दिन में होलिका जलाने की परंपरा नहीं है। यही वजह है कि होलिका दहन के लिए रात का समय ही शुभ माना गया है। इस बार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू हो रही है, इसलिए होलिका दहन भी 2 मार्च की रात में ही होगा। होलिका दहन 2026 तिथि और तारीख हिंदू शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को प्रदोष काल यानि की सूर्यास्त के बाद भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में करते हैं. भद्रा रहित मुहूर्त का अर्थ है कि सूर्यास्त के बाद भद्रा नहीं होनी चाहिए. यदि भद्रा होगी, तो होलिका दहन नहीं होगा. भद्रा के बाद किया जाएगा. दृक पंचांग के आधार पर देखते हैं तो फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5:55 से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 5:07 बजे खत्म हो रही है. अब 2 मार्च को भद्रा पूर्णिमा तिथि के साथ ही यानि शाम 05:55 बजे से लग जाएगी और 3 मार्च को सुबह में 05:28 ए एम तक रहेगी. भद्रा की वजह से 2 मार्च को प्रदोष या रात्रि के समय में होलिका दहन नहीं हो पाएगा. इस वजह से होलिका दहन 3 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त में किया जाना सही है. भद्रा की पूंछ 3 मार्च को 01:25 ए एम से 02:35 ए एम तक है और भद्रा मुख 02:35 ए एम से 04:30 ए एम तक है.     होलिका दहन मुहूर्त: 3 मार्च, मंगलवार, ब्रह्म मुहूर्त 05:05 ए एम से 05:55 ए एम के बीच. सुकर्मा योग और मघा नक्षत्र में होलिका दहन इस साल होलिका दहन पर सुकर्मा योग और मघा नक्षत्र का संयोग बना है. 3 मार्च को सुकर्मा योग सुबह में 10:25 बजे तक है, उसके बाद से धृति योग बनेगा. वहीं मघा नक्षत्र सुबह में 07:31 बजे तक है, फिर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है. 3 मार्च की शाम क्यों न करें होलिका दहन? 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम को 5:07 बजे खत्म हो जा रही है और उसके बाद से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा की शुरूआत होगी. 3 मार्च को प्रदोष काल प्रतिपदा तिथि का हो जाएगा क्योंकि सूर्यास्त का समय 06:22 पी एम है. होली 2026 की तारीख होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. उस समय में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होती है. दृक पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे से शुरू होकर 4 मार्च को शाम 04:48 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च को है. इसलिए इस साल होली का त्योहार 4 मार्च बुधवार को मनाना शास्त्र सम्मत है. भद्रा का साया और दहन का सही समय– इस साल होलिका दहन पर भद्रा का प्रभाव भी है। पंचांग के अनुसार 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से लेकर 3 मार्च की सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक भद्रा रहेगी। यानी पूरी रात भद्रा का साया रहेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रा के समय होलिका दहन नहीं किया जाता, लेकिन अगर पूरी रात भद्रा हो तो भद्रा के पुच्छ भाग में दहन करना शुभ माना जाता है। इस साल भद्रा का पुच्छ भाग रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। यही समय होलिका दहन के लिए सबसे अच्छा माना गया है। यानी 2 मार्च की रात 12:50 से 2:02 के बीच होलिका दहन करना शुभ रहेगा। यह करीब 1 घंटा 12 मिनट का समय है। इन तारीखों को जान लीजिए     2 को पूर्णिमा का आगमन, भद्रा भी रहेगी     भद्रा 3 मार्च को ब्रहम मुहूर्त तक रहेगी     3 मार्च को ही सुबह से चंद्रग्रहण का सूतक रहेगा, शाम को ग्रहण समाप्त होगा     4 मार्च को धुलेंडी पर्व 3 मार्च को क्या है खास- 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम तक रहेगी। इस दिन स्नान-दान का महत्व माना जाता है। कई लोग इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करते हैं। हालांकि, रंग खेलने की परंपरा इस दिन नहीं होती है। रंगों वाली होली अगले दिन मनाई जाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा जिस वजह से सूतक काल मान्य होगा। इस दिन किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। 4 मार्च को होली- रंगों वाली होली 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली का त्योहार मनाएंगे। क्यों हो रहा है लोगों में कन्फ्यूजन- तिथि और वार के बदलने की वजह से हर साल होली की तारीख को लेकर भ्रम रहता है। कुछ लोग सिर्फ कैलेंडर देखकर तारीख मान लेते हैं, जबकि त्योहार तिथि के हिसाब से मनाए जाते हैं। इस बार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण लग रहा है, जिस वजह से कन्फ्यून की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार शास्त्रीय नियमों को देखें तो होलिका दहन 2 मार्च की रात को ही होगा और … Read more

छत्तीसगढ़ में होली के दिन नहीं खुलेंगी शराब दुकानें, सरकार का बड़ा फैसला

रायपुर छत्तीसगढ़ में होली पर्व को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। होली के दिन प्रदेशभर में सभी शराब दुकानें बंद रहेंगी। इस संबंध में छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार 4 मार्च 2026 को होली त्योहार के अवसर पर पूरे राज्य में शुष्क दिवस (ड्राई डे) घोषित किया गया है। इस दिन देशी-विदेशी मदिरा की सभी फुटकर दुकानें, बार और शराब से संबंधित अन्य प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रहेंगे। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। किसी भी दुकान के खुले पाए जाने या अवैध रूप से शराब बिक्री करने पर संबंधित संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने जिला आबकारी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाएं और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करें। होली के मद्देनजर यह कदम सामाजिक शांति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि त्योहार सौहार्द और सुरक्षित वातावरण में मनाया जा सके। प्रदेशवासियों से भी अपील की गई है कि वे नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी के साथ होली मनाएं।

ब्रेकिंग: होली के मौके पर वृंदावन में नहीं होंगे ठाकुर जी के दर्शन, नई अपडेट जारी

वृंदावन होली के अवसर पर इस वर्ष वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। तीन मार्च को पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्रग्रहण पड़ने के कारण ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के कपाट सूतक काल के दौरान बंद रहेंगे। इसी वजह से ब्रज में होली का उत्सव एक दिन पहले मनाया जाएगा और होलिका दहन भी निर्धारित तिथि से पहले किया जाएगा। मंदिर के सेवायत प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने जानकारी दी कि सामान्यतः पूर्णिमा के दिन होली मनाई जाती है और शाम को होलिका दहन होता है। लेकिन इस बार दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 45 मिनट तक चंद्रग्रहण रहेगा। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च की रात्रि में किया जाएगा। परंपरा के अनुसार अगले दिन डोलोत्सव मनाया जाता है, किंतु ग्रहण और सूतक के कारण दर्शन व्यवस्था में बदलाव रहेगा। सूतक काल के दौरान सुबह से शाम लगभग सात बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। तीन मार्च को ठाकुर बांकेबिहारी की सेवा-पूजा सुबह 9 बजकर 5 मिनट से पहले तथा शाम सात बजे के बाद ही संपन्न की जाएगी। नगर के प्राचीन सप्तदेवालयों में शामिल ठाकुर राधा दामोदर मंदिर में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू रहेगी। यहां सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक मंदिर के पट बंद रखे जाएंगे। सेवायत कृष्ण बलराम गोस्वामी के अनुसार, मंगला आरती प्रातः चार बजे होगी, जिसके बाद धूप और श्रृंगार आरती संपन्न की जाएगी। शाम सात बजे कपाट खुलने के बाद गौर पूर्णिमा के अवसर पर ठाकुरजी का अभिषेक, धूप, संध्या आरती और शयन आरती आयोजित होगी। ठाकुर राधारमण मंदिर में भी तीन मार्च को धुलेंडी मनाई जाएगी, लेकिन चंद्रग्रहण के चलते यहां भी पूजा समय में परिवर्तन रहेगा। सेवायत पदमलोचन गोस्वामी ने बताया कि सुबह की सेवा छह बजे तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक, लगभग 13 घंटे, मंदिर के पट बंद रहेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की धुलाई और शुद्धिकरण प्रक्रिया के उपरांत नियमित पूजा-अर्चना पुनः आरंभ की जाएगी। ज्योतिषाचार्य रामविलास चतुर्वेदी के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जबकि सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा। सूतक अवधि में पूजा-पाठ का विधान नहीं होने के कारण ब्रज के अधिकांश मंदिरों में कपाट बंद रखे जाएंगे। इस प्रकार चंद्रग्रहण के कारण इस वर्ष होली के पर्व पर वृंदावन में धार्मिक कार्यक्रमों और दर्शन व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा। श्रद्धालुओं को मंदिर जाने से पहले समय की जानकारी अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।  

होली 2026: 3 या 4 मार्च, पंडितों से जानें रंगों के पर्व की सही तिथि

इंदौर      इस साल होली के पर्व को लेकर लोगों में काफी ज्यादा असमंजस की स्थिति बनी हो गई है. इसके पीछे का मुख्य कारण है 3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण. गणनाओं के मुताबिक, 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा है, जबकि रंगों का पर्व होली 4 मार्च को मनाया जाएगा. तो आइए देश के प्रसिद्ध पंडितों से जानते हैं कि होली की सही तिथि या डेट क्या रहने वाली है.  ज्योतिषाचार्य पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, भारतीय ज्योतिष और निर्णय सिंधु ग्रंथ के आधार पर फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च 2026 को पड़ रही है. शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन भद्रा समाप्त होने के बाद या भद्रा के पूंछ काल में होलिका दहन करना ही शास्त्र सम्मत माना जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2 मार्च की रात 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा. अगले दिन 3 मार्च 2026 को फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा. ग्रहण होने के कारण अगले दिन चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा यानी 4 मार्च 2026 को पूरे भारत में होली मनाई जाएगी.  3 मार्च को ये रहेगी चंद्रग्रहण की टाइमिंग  दरअसल गणनाओं के मुताबिक, 3 मार्च 2026 फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा, जबकि ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी. ग्रहण का (मध्यकाल) मध्यान्ह समय शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा और ग्रहण का मोक्ष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट रहेगा. पूरे भारत में चंद्रोदय के समय यानी 3 मार्च की शाम 05 बजकर 59 के बाद ही सभी स्थानों में चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा. केवल ग्रहण का मोक्ष काल ही दिखाई देगा, जबकि ग्रहण का प्रारंभ और मध्य काल भारत में कहीं भी दिखाई नहीं होगा, क्योंकि चंद्रोदय से पहले ही ग्रहण का आरंभ हो जाएगा.  सनातन धर्म के अनुसार, सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पूर्व और चंद्र ग्रहण में 9 घंटे पूर्व सूतक काल मान्य होता है. इस गणना के अनुसार, 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा. कहां कहां दिखाई देगा चंद्रग्रहण?  3 मार्च को लगने जा रहा यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी दिखाई देगा. ऐसे में पूरे भारत में होली का पर्व 4 मार्च 2026 को ही मनाया जाना उचित रहेगा. होलिका दहन 2 मार्च 2026 को भद्रा पूंछ काल में, रात 12 बजकर 50 मिनट के बाद करना ही शास्त्र सम्मत माना जा रहा है.  होली की तिथि को लेकर पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने भी दिया अपना मत ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, होलिका दहन रात में और रंगोत्सव अगले दिन प्रातः काल मनाया जाता है. लेकिन 3 मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक काल होने के कारण उस दिन रंगोत्सव करना उचित नहीं है. इसी कारण होली का पर्व 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. दरअसल, हृषीकेश पंचाङ्ग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट पर होगी, जो 3 मार्च को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी. इस प्रकार 2 मार्च को निशाव्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है. हालांकि, 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा लग रही है, इसलिए भद्रा के मुख काल को त्यागकर, भद्रा पूंछ काल में रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 02 मिनट तक होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है.  आगे पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि, प्रचलित मान्यता के अनुसार, होलिका दहन के अगले दिन अर्थात् 3 मार्च को होली का पर्व मनाया जाना चाहिए. लेकिन इस दिन शाम को ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण है, जो शाम 5 बजकर 59 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद 3 मार्च को चौसठ्ठी देवी की यात्रा और पूजन किया जाएगा.  यानी, सभी मतों और पंडितों के मुताबिक, 4 मार्च को ही होली मनाना ज्यादा शुभ माना जा रहा है.