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दिल्ली-अंबाला रेल मार्ग में सुधार: Indian Railways के सिग्नल सिस्टम के लिए 421.41 करोड़ का बजट मंजूर

अंबाला  रेलवे ने अपने नेटवर्क को हाई-टेक बनाने और रेल हादसों पर लगाम लगाने की दिशा में पहल करते हुए रेल मंत्रालय ने उत्तर रेलवे के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत दिल्ली और अंबाला रेल मंडल के व्यस्त रूटों पर सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा। मंत्रालय ने इसके लिए 421.41 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।  रेलवे के उच्च घनत्व (एचडीएन) और अत्यधिक उपयोग वाले नेटवर्क (एचयूएन) पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की सुविधा दी जाएगी। खास बात यह है कि यह अपग्रेड उन स्टेशनों पर किया जा रहा है जहां स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच पहले से ही स्वीकृत है। दिल्ली रेल मंडल के अधीन हाई डेंसिटी रूट के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लिए 292.24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसी प्रकार अंबाला रेल मंडल के अधीन 13 स्टेशनों को इस आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। इस पर 129.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पिंक बुक से मिली रफ्तार ये सभी कार्य उत्तर रेलवे के लिए निर्धारित 1,547 करोड़ रुपये के व्यापक प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जिसे वर्ष 2024-25 के पिंक बुक (कार्य, मशीनरी और रोलिंग स्टॉक कार्यक्रम) में शामिल किया गया था। अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक विनोद भाटिया ने बताया कि पारंपरिक मैकेनिकल इंटरलॉकिंग की जगह अब कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लेगा। इससे सिग्नल और पॉइंट को डिजिटल तरीके से नियंत्रित किया जाएगा, इससे मानवीय गलती की संभावना शून्य हो जाएगी। कवच और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से न केवल सफर सुरक्षित होगा, बल्कि व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की रफ्तार और संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी। इस बदलाव से ट्रेनों का परिचालन सुरक्षित होने के साथ-साथ समयबद्धता में भी सुधार होगा, इससे यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।  

भोपाल मंडल की ट्रेनों में नया सुरक्षा मॉडल, सादे कपड़ों में जवान करेंगे गश्त

भोपाल  भोपाल से हर दिन हजारों यात्री लंबी दूरी और लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। यात्रियों की इसी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने वर्ष 2025 में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। पिछले साल सामने आई चोरी और असुरक्षा की घटनाओं से सबक लेते हुए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और जीआरपी ने मिलकर नया सुरक्षा मॉडल लागू किया है। अब ट्रेनों में लगातार गश्त, सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती और तकनीकी निगरानी बढ़ा दी गई है। भोपाल मंडल से गुजरने वाली प्रमुख एक्सप्रेस और भीड़भाड़ वाली ट्रेनों पर खास नजर रखी जा रही है। रात के समय यात्रा करने वाले कोच और संवेदनशील ट्रेनों में चेकिंग तेज की गई है। वर्ष 2025 में आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त कार्रवाई में 160 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 125 मामलों में चोरी गया सामान बरामद किया गया। करीब 33 लाख रुपये की रिकवरी हुई है। राहत की बात यह है कि चोरी हुए मोबाइल फोन में से लगभग आधे यात्रियों को वापस मिल चुके हैं। सीसीटीवी कैमरे लगाए गए बिलासपुर एक्सप्रेस और इंदौर एक्सप्रेस में चोरी की शिकायतें ज्यादा मिलने के बाद इन ट्रेनों को विशेष निगरानी में रखा गया है। साथ ही इटारसी से रानी कमलापति स्टेशन के बीच के हिस्से को सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। यहां अतिरिक्त पेट्रोलिंग और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने जीरो टालरेंस नीति अपनाई है। छेड़छाड़ के मामलों में तुरंत कार्रवाई की जा रही है। पहले जहां मामलों के निपटारे में महीनों लग जाते थे, अब औसतन दो महीने में ही केस सुलझाए जा रहे हैं। ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता     भोपाल से गुजरने वाली और यहां से चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगातार गश्त, सादे कपड़ों में तैनाती और तकनीकी निगरानी के जरिए ट्रेनों के अंदर होने वाली घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा रहा है। – एमएस सोमवंशी, थाना प्रभारी, आरकेएमपी  

किराया बढ़ा, लेकिन राहत भी: 26 दिसंबर से इन रेल यात्रियों को मिलेगा पूरा फायदा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने आगामी 26 दिसंबर से रेल टिकट के किराए को बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे रेलवे को लगभग 600 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है। रेलवे के इस बड़े बदलाव से जहां कुछ यात्रियों को 26 दिसंबर के बाद ज्यादा किराया देना पड़ेगा, तो वहीं कुछ यात्रियों को कोई बढ़ा किराया नहीं देना पड़ेगा। रेलवे के इस नए नियम के तहत, साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा पर यात्रियों को 1 पैसा प्रति किलोमीटर ज्यादा देना होगा।  वहीं मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी और एसी श्रेणियों में 2 पैसे प्रति किलोमीटर ज्यादा किराया लगेगा। अगर कोई यात्री 500 किलोमीटर की नॉन-एसी यात्रा करता है, तो उसे 10 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। लेकिन अगर कोई यात्री 215 किलोमीटर से कम दूरी की यात्रा करता है, तो उसे कोई बढ़ा किराया नहीं देना पड़ेगा, यानी 215 किलोमीटर से कम दूरी पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसके साथ ही रेलवे ने यह भी साफ किया है कि लोकल (सब-अर्बन) ट्रेन और मासिक सीजन टिकट के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ऐसा इसलिए, ताकि कम और मध्यम आय वाले परिवारों पर बोझ न पड़े और यात्रा सस्ती बनी रहे। रेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पिछले एक दशक यानी दस वर्षों में भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क को काफी बढ़ाया है और अब देश के दूर-दराज इलाकों तक सेवाएं पहुंच रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और बेहतर सेवाएं देने के लिए रेलवे ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है। इसके कारण कर्मचारियों पर खर्च बढ़कर 1.15 लाख करोड़ रुपए हो गया है और पेंशन पर खर्च 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वर्ष 2024-25 में रेलवे का कुल खर्च 2.63 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इन बढ़े हुए खर्चों को पूरा करने के लिए रेलवे माल ढुलाई (कार्गो) को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही यात्रियों के किराए में थोड़ा-सा बदलाव किया गया है। रेलवे ने बताया कि इन सुधारों से सुरक्षा भी बेहतर हुई है और भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माल ढुलाई करने वाला रेलवे बन गया है। रेलवे ने यह भी बताया कि माल ढुलाई के किराए 2018 के बाद से नहीं बढ़ाए गए हैं, जबकि खर्च बढ़ता रहा है। रेलवे अब ज्यादा माल ढोकर अपनी कमाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रेल मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में त्योहारों के दौरान 12,000 से ज्यादा ट्रेनें सफलतापूर्वक चलाई गईं, जो रेलवे की बेहतर योजना और काम करने की क्षमता को दिखाता है। इस बीच, मंत्रालय ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए 100 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण पूरा हो चुका है।

पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने ट्रेनों के समय पालन क्षमता बढ़ाने के लिए किया संशोधन

इंदौर आने वाले दिनों में अगर आप ट्रेन से सफर करने वाले हैं तो ये खबर आपके काम की है। जानकारी के लिए बता दें कि पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने इंदौर-देवास-उज्जैन रेल मार्ग पर ट्रेनों की समय पालन क्षमता सुधारने के लिए तीन महत्वपूर्ण ट्रेनों के समय में आंशिक बदलाव किए हैं। इसलिए जो भी पैसेंजर यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं उन्हें पहले चेक करना जरूरी होगा। यह संशोधित समय-सारणी अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम ट्रेनों के सुचारु संचालन और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इन ट्रेनों की बदली रहेगी टाइमिंग -गाड़ी संख्या 19343 इंदौर-नैनपुर पेंचवैली एक्सप्रेस ट्रेन 22 नवंबर से अगले आदेश तक इंदौर से 13:15 बजे प्रस्थान करेगी। गाड़ी संख्या 20917 इंदौर-पुरी हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन 25 नवंबर से अगले आदेश तक इंदौर से 15:05 बजे चलेगी। देवास स्टेशन पर इसका आगमन 15:31 बजे तथा प्रस्थान 15:33 बजे निर्धारित किया गया है। -गाड़ी संख्या 22191 इंदौर-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन 22 नवंबर से अगले आदेश तक इंदौर से 19:35 बजे रवाना होगी। देवास स्टेशन पर इसका आगमन 20:01 बजे तथा प्रस्थान 20:03 बजे रहेगा।

यात्रा सुविधा बढ़ाने के लिए रानी कमलापति स्टेशन से सात विशेष ट्रेन सेवा शुरू

भोपाल दीपावली के पावन त्योहार के बाद घर लौटने वाले यात्रियों और छठ पूजा के अवसर पर यात्रा करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए रेलवे ने सात जोड़ी विशेष ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया है। डीआरएम पंकज त्यागी और सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने यात्रियों से व्यवस्थाओं पर चर्चा की। यात्री सुविधाओं में सुधार हेतु कर्मचारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। डीआरएम ने बताया कि भोपाल और आरकेएमपी स्टेशन पर क्राउड मैनेजमेंट प्लान लागू किया गया है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अधिक भीड़ देखी जा रही है, लेकिन अब तक किसी भी अव्यवस्था की घटना नहीं हुई है। इस प्रकार होगा ट्रेनों का संचालन     गाड़ी संख्या 01667 रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल प्रत्येक शनिवार और मंगलवार दिनांक 27.09.2025 से 01.11.2025 तक (छठ महापर्व स्पेशल) चलेगी।     गाड़ी संख्या 01665 रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल प्रत्येक गुरुवार को संचालित होगी।     गाड़ी संख्या 01661 रानी कमलापति हजरत निजामुद्दीन स्पेशल 17.10.2025 और 18.10.2025 को (दीपवाली स्पेशल) चलेगी।     गाड़ी संख्या 01289 रानी कमलापति रीवा एक्सप्रेस 17.10.2025 को संचालित होगी।     गाड़ी संख्या 02191 रानी कमलापति-रीवा एक्सप्रेस 27.09.2025 से 18.10.2025 तक चलेगी।     गाड़ी संख्या 22187 रानी कमलापति-जबलपुर एक्सप्रेस और 12061 रानी कमलापति-जबलपुर एक्सप्रेस भी उपलब्ध रहेंगी। क्राउड मैनेजमेंट योजना के तहत     रस्सियों और बैरिकेड्स का उपयोग करके यात्रियों के लिए लाइन का प्रबंधन किया जाएगा।     होल्डिंग और सर्कुलेटिंग क्षेत्रों में लाउड स्पीकर के माध्यम से नियमित घोषणाएं की जाएंगी, जिसमें आने वाली ट्रेनों की जानकारी दी जाएगी।     यात्रियों को प्लेटफार्म की क्षमता के अनुसार व्यवस्थित किया जाएगा।     आरक्षित और अनारक्षित यात्रियों के लिए अलग-अलग प्रवेश की व्यवस्था की जाएगी।     24 घंटे निगरानी के लिए कंट्रोल रूम में एक वार रूम स्थापित किया गया है।     सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से स्टेशनों की लाइव निगरानी की जा रही है। अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है।     मंडल पर बुकिंग काउंटर के अतिरिक्त 16 स्टेशनों पर 38 एटीवीएम (ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन) की सुविधा है, जिससे अनारक्षित टिकटों का वितरण किया जा रहा है।  

यात्रियों के लिए खुशखबरी, मऊ से उधना तक स्पेशल ट्रेन की शुरुआत, मिलेगा खास ठहराव

रतलाम  त्योहारी सीजन के दौरान ट्रेनों में अतिरिक्त यात्रियों की भीड़ को समायोजित करने के लिए रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव के साथ मऊ से उधना के मध्य स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में छह-छह फेरे चलेंगी। 05017 मऊ-उधना स्पेशल मऊ से 27 सितंबर से एक नवंबर तक चलेंगी। यह ट्रेन मऊ से प्रति शनिवार सुबह 5.30 बजे चलकर अगले दिन रविवार दोपहर 12 बजे उधना पहुंचेंगी। इस ट्रेन का नागदा तड़के 4.28 बजे तथा रतलाम 6.15 बजे आगमन होगा। इसी प्रकार 05018 उधना-मऊ स्पेशल उधना से 28 सितंबर से दो नवंबर तक प्रति रविवार को चलेंगी। यह ट्रेन उधना से प्रति रविवार दोपहर तीन बजे चलकर अगले दिन सोमवार रात 10.30 बजे मऊ रेलवे स्टेशन पहुंचेंगी। इस ट्रेन का रतलाम में रात 9.30 बजे तथा नागदा 10.40 बजे प्रति रविवार को आगमन होगा। यह ट्रेन सेकंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर व सामान्य श्रेणी कोच के साथ चलेंगी। इस ट्रेन का दोनों दिशाओं में बेलथरा रोड, सलेमपुर, भटनी, देवरिया सदर, गोरखपुर, खलिलाबाद, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, बादशाहनगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, इदगाह, बयाना, गंगापुर सिटी, भवानी मंडी, शामगढ़, नागदा, रतलाम व वड़ोदरा रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिया गया है। गौतमपुरा रोड स्टेशन पर जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का प्रायोगिक ठहराव यात्रियों की मांग व सुविधा को ध्यान में रखकर रेल मंडल के गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का ठहराव दिया जा रहा है। पांच सितंबर, को सांसद शंकर लालवानी अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर ट्रेन के ठहराव का शुभारंभ करेंगे। पांच सितंबर से जोधपुर से चलने वाली 14801 जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर आगमन/प्रस्थान रात 9.50/9.52 बजे होगा। इसी प्रकार छह सितंबर से इंदौर से चलने वाली 14802 इंदौर-जोधपुर एक्सप्रेस का गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर आगमन/प्रस्थान सुबह 5.17/5.19 बजे होगा। रतलाम-नागदा खंड में ब्लाक के कारण तीन ट्रेनें निरस्त रेल मंडल के रतलाम-नागदा खंड में आटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए शीघ्रता से कार्य जारी है। रतलाम-नागदा खंड में आटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग सिस्टम को कार्यान्वित करने के लिए छह सितंबर को प्रस्तावित ब्लाक के कारण मंडल की चार ट्रेनें प्रभावित होंगी। 59318 उज्जैन-नागदा पैसेंजर, 59346 नागदा-उज्जैन पैसेंजर, 59345 रतलाम-नागदा पैसेंजर निरस्त रहेंगी। नागदा से चलने वाली 19341 नागदा-बीना एक्सप्रेस उज्जैन से चलेंगी तथा नागदा से उज्जैन के मध्य निरस्त रहेंगी।

यात्रियों की सहूलियत के लिए रेलवे का बड़ा फैसला, इन 15 ट्रेनों में बढ़े फेरे

भोपाल   त्योहारी सीजन में यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे 21 सितंबर से 30 नवंबर तक 150 पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाएगा। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार आने-जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी। बिहार के यात्रियों के लिए 12000 से अधिक ट्रेनें चलाने की योजना है। इन ट्रेनों के चलने से यूपी-बिहार आने-जाने वाले लोगों को राहत मिलेगी। इन सबके बीच रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और उनकी यात्रा मांग को पूरा करने के लिए नया ट्रेन शेड्यूल जारी किया गया है। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि नियमित ट्रेनों को अतिरिक्त फेरों में चलाकर वेटिंग और नो रूम जैसे हालात से निपटने का प्रयास किया जा रहा है। इन ट्रेनों के चलेंगी अतिरिक्तत फेरे ट्रेन संख्या 09025 वलसाड-दानापुर स्पेशल 29 दिसंबर ट्रेन संख्या 09026 दानापुर- वलसाड स्पेशल 30 दिसंबर ट्रेन संख्या 09031 उधना-जयनगर स्पेशल 28 दिसंबर ट्रेन संख्या 09032 जयनगर-उधना स्पेशल 29 दिसंबर ट्रेन संख्या 09039 उधना-धनबाद स्पेशल 26 दिसंबर ट्रेन संख्या 09040 धनबाद-उधना स्पेशल 28 दिसंबर ट्रेन संख्या 09045 उधना-पटना स्पेशल 26 दिसंबर ट्रेन संख्या 09046 पटना-उधना स्पेशल 27 दिसंबर ट्रेन संख्या 09343 डॉ. अंबेडकर नगर – पटना स्पेशल 25 दिसंबर ट्रेन संख्या 09344 पटना – डॉ. अंबेडकर नगर स्पेशल 26 दिसंबर ट्रेन संख्या 04156 उधना – सूबेदारगंज स्पेशल 30 दिसंबर ट्रेन संख्या 04155 सूबेदारगंज – उधना स्पेशल 29 दिसंबर ट्रेन संख्या 09044 बढ़नी-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 29 दिसंबर ट्रेन संख्या 09117 उधना – सूबेदारगंज स्पेशल 26 दिसंबर ट्रेन संख्या 09118 सूबेदारगंज-उधना स्पेशल 27 दिसंबर

रेलवे का नया नियम: ट्रेन में अनलिमिटेड सामान ले जाने पर रोक, क्लासवार तय हुई सीमा

 नई दिल्ली रेल यात्रा में अकसर आपने लोगों को भारी सामान लाते ले जाते देखा होगा, लेकिन जल्दी ही यह पुरानी बात हो जाएगी। रेलवे अब हवाई यात्रा की तरह सामान को लेकर सख्त नीति अपनाने जा रहा है। इसके तहत एक निश्चित वजन या आकार से ज्यादा सामान लेकर जाने पर पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है। इसके लिए रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इनसे होकर जब सामान गुजरेगा तो पता चल जाएगा कि वजन और माप तय सीमा के भीतर ही है या नहीं। यदि माप और वजन तय लिमिट से ज्यादा हुआ तो फिर जुर्माना या अतिरिक्त चार्ज चुकाना होगा। यही नहीं रेलवे स्टेशनों पर भी अब लोगों का अनुभव बदलने की तैयारी पूरी हो गई है। अब रेलवे स्टेशनों पर बड़े ब्रांड्स की दुकानें दिख सकती हैं। रेलवे स्टेशनों पर कपड़े, ट्रैवल, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान आदि आप आसानी से खरीद पाएंगे। इसके लिए शानदार दुकानें होंगी, जिनका रेलवे की ओर से टेंडर जारी किया जाएगा। इससे रेलवे स्टेशनों पर पहुंचकर लोग एयरपोर्ट जैसे माहौल का अनुभव करेंगे। इसके अलावा रेलवे के रेवेन्यू में भी इजाफा होगा। दुकानें टेंडर से आवंटित की जाएंगी, जिनके शुल्क से रेलवे को अच्छी आय होने की उम्मीद है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि सामान की वजन सीमा श्रेणी के अनुसार तय होगी। जैसे सामान्य श्रेणी का टिकट लेकर यदि कोई सफर कर रहा है तो उसे अपने साथ 35 किलो सामान से ज्यादा ले जाने की परमिशन नहीं होगी। यदि एक से ज्यादा लोग सफर कर रहे हैं तो तय लिमिट प्रति यात्री के अनुसार होगी। जैसे एक व्यक्ति पर 35 किलो की परमिशन है तो दो लोग साथ होंगे तो 70 किलो वजन तक का सामान ले जा सकते हैं। अब श्रेणी वार लिमिट की बात करें तो स्लीपर और थर्ड एसी में यह 40 किलो प्रति व्यक्ति होगी। इसके अलावा सेकेंड एसी में एक व्यक्ति को 50 किलो तक सामान ले जाने की परमिशन रहेगी। वहीं फर्स्ट एसी में यह लिमिट 70 किलोग्राम रहेगी। रेलवे सूत्रों का कहना है कि यह लिमिट इसलिए तय की गई है ताकि सभी यात्रियों का सफर सुखद और सुगम रहे। अब श्रेणीवार लिमिट की बात करें तो ऐसा इसलिए तय किया गया है ताकि सीटों की व्यवस्था के अनुसार ही सामान रखा जा सके। जैसे जनरल में जगह सबसे कम बचती है, ऐसे में उसके लिए लिमिट कम है। इसी प्रकार स्लीपर और थर्ड एसी का सीटिंग पैटर्न एक जैसा है। इसलिए वहां सामान की लिमिट एक समान रखी गई है। वहीं सेकेंड में एसी में एक लाइन में दो सीटें ही रहती हैं। इसलिए सामान की परमिशन थोड़ी ज्यादा है। फिलहाल इस लिमिट के तहत प्रयागराज जोन में काम शुरू होने वाला है। इसके बाद पूरे देश में ही रेलवे का यह फॉर्मूला लागू होगा।

रेलवे ने लगाई नई मिसाल, पटरियों के बीच सोलर पैनल से होगी बिजली की बचत

नई दिल्ली भारतीय रेलवे (Indian Railway) न केवल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए लगातार कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी नए तरीके अपना रही है. इसी क्रम में रेलवे को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. रेलवे मिनिस्ट्री (Ministry Of Railway) की ओर से एक सोशल मीडिया (Social Media) पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया गया है कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने रेल की पटरियों के बीच भारत का पहला 70 मीटर लंबा रिमूवेबल सोलर पैनल सिस्टम (Solar Panal System On Track) स्थापित किया है.  70 मीटर ट्रैक पर 28 सोलर पैनल  मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले Twitter) पर एक पोस्ट के जरिए भारतीय रेलवे ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बारे में बताया गया है. पोस्ट में जानकारी दी गई है कि वाराणसी के बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने रेलवे ट्रैक पर पटरियों के बीच भारत का पहला 70 मीटर लंबा रिमूवेबल सोलर पैनल सिस्टम स्थापित कर लिया है. इसमें 28 Sola Panal लगाए गए हैं, जिनकी क्षमता 15 किलोवाट पीक है.  बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण रेल मंत्रालय की ओर से Indian Railway के इस कदम को हरित और टिकाऊ रेल परिवहन की दिशा में एक मील का पत्थर करार दिया गया है. इस संबंध में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे की यह पहल न केवल बिजली की बचत करेगी और एनर्जी लागत में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित होगी.  सबसे खास बात ये है कि रेल की पटरियों के बीच में लागए गए इन सोलर पैनल्स को आसानी से हटाया और फिर से दोबारा लगाया भी जा सकता है. दरअसल, रेलवे ट्रैक पर अक्सर मेंटिनेंस काम चलता रहता है, ऐसे में इन रिमूवेबल Solar Panal को वहां काम करने वाले कर्मचारी आसानी से बाहर निकाल सकते हैं और काम खत्म होने के बाद ट्रैक पर वापस लगा सकते हैं.  रेल मंत्रालय ने शेयर कीं तस्वीरें रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से ट्रैक पर सोलर पैनल सिस्टम स्थापित करने की जानकारी शेयर किए जाने के साथ ही इसकी तमाम तस्वीरें भी शेयर की गई हैं, जिनमें देखने को मिल रहा है कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) ने किस तक रेल की पटरियों की बीच पत्थरों के ऊपर सोलर पैनल लगाए हैं. एक अन्य तस्वीर में इनके ऊपर से ट्रेन का इंजन गुजरता हुआ भी नजर आ रहा है. निश्चित तौर पर रेलवे का ये कदम अन्य सेक्टर्स को भी ग्रीन और क्लीन एनर्जी की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरणादायक है. 

रेल नेटवर्क विस्तार: भोपाल-इटारसी-बीना रूट पर चौथी लाइन के लिए सर्वे कार्य शुरू

भोपाल  रेलवे यातायात को सुगम, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में भोपाल मंडल के अंतर्गत इटारसी-भोपाल-बीना खंड पर चौथी रेल लाइन परियोजना की शुरुआत कर दी गई है। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल माल और यात्री परिवहन की क्षमता में इजाफा होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन को भी नया आयाम मिलेगा। वर्तमान में इस खंड पर पहले से मौजूद तीन रेल लाइनों पर भारी यातायात का दबाव है, जिससे ट्रेनों की गति और समयबद्धता पर असर पड़ता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि चौथी लाइन के निर्माण से यह दबाव कम होगा और मालगाड़ियों के निर्बाध संचालन के साथ-साथ यात्री ट्रेनों को भी समय पर और बेहतर ढंग से चलाया जा सकेगा। सर्वे और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी परियोजना के तहत इटारसी से भोपाल और फिर भोपाल से बीना तक सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। सर्वे के पूर्ण होते ही नियमानुसार आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। इसमें स्थानीय प्रशासन के सहयोग से भूमि स्वामियों को उचित मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेगा रूट यह चौथी रेल लाइन मप्र के नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा और सागर जैसे जिलों से होकर गुजरेगी। इन जिलों में रेलवे नेटवर्क के विस्तार से आवागमन की सुविधा बढ़ेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। परियोजना से इन क्षेत्रों में आवागमन के समय में कमी आएगी और साथ ही माल परिवहन की लागत और समय में भी कमी आएगी। निर्माण, रखरखाव और संचालन से जुड़े कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही, इस परियोजना के तहत माल गोदाम, लॉजिस्टिक्स हब जैसे रेलवे से जुड़े अन्य ढांचागत विकास से आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा। सर्वे कार्य किया जा रहा है     चौथी लाइन के निर्माण के लिए इटारसी से लेकर बीना खंड तक सर्वे का कार्य जारी है। सर्वे पूर्ण होने के बाद आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल बीना-इटारसी के बीच बिछेगी चौथी रेल लाइन रेलवे के अधिकारियों की मानें तो बीना से इटारसी के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने के बाद सुपरफास्ट और एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें 160 से 220 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी। इतना ही नहीं ट्रैफिक का लोड भी कम होगा और ट्रैफिक क्लियर मिलने के कारण अभी जो गाड़ियां आउटर पर खड़ी करनी पड़ती हैं उन्हें भी खड़ा नहीं करना पड़ेगा जिसके कारण समय की काफी बचत होगी। बीना से इटारसी के बीच की दूरी 230 किमी. है जिसे पूरा करने में अधिकतर ट्रेनों को 4 से साढ़े 4 घंटे का वक्त लगता है। चौथी रेलवे लाइन की सर्वे रिपोर्ट रेलव बोर्ड को भेजने की जानकारी देते हुए रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि उम्मीद है कि 2025 में ही चौथी रेल लाइन का काम शुरू हो जाएगा और अगले 3 साल में चौथी रेल लाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। बीना-भोपाल-इटारसी रूट व्यस्ततम रूट है जिस पर रोजाना सैकड़ों ट्रेनें चलती हैं। 160 से 220 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें भोपाल रेल मंडल के डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि "बीना से इटारसी के बीच तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो चुका है. नवंबर 2023 से इस पर ट्रेनें चल रही हैं. तीसरी लाइन के चालू होने से भोपाल मंडल को 10 से अधिक नई ट्रेनें मिली हैं. इन ट्रेनों में वंदे भारत, महामना, सिंगरौली-पुणे हमसफर और आरकेएमपी-एलटीटी एक्सप्रेस आदि शामिल हैं. इससे बाकी मंडलों को भी फायदा पहुंचा है. अब चौथी रेल लाइन बिछाने के बाद सुपरफास्ट और एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें 160 से 220 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी. ट्रैफिक क्लियर होने से अधिक देर तक आउटर में भी नहीं खड़े रहना पड़ेगा." वर्तमान में लगते हैं 4 से 5 घंटे बीना से इटारसी की दूरी 230 किलोमीटर है. इस दूरी को तय करने में निजामुद्दीन-जबलपुर सुपरफास्ट को 4 घंटे 20 मिनट लगते हैं. इसी प्रकार ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस और कुशीनगर बीना से इटारसी पहुंचने में करीब 4 घंटे का समय लेती है. 3 लाइनों में लोड के कारण ट्रेन को समय अधिक लगता है. लेकिन चौथी रेल लाइन बिछने के बाद लोड कम हो जाएगा और ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी. यानि नई रेल लाइन बिछने के बाद बीना से इटारसी के बीच यात्रा करने पर 2 से ढाई घंटे की बचत होगी. 3 साल में पूरा होगा चौथी रेल लाइन का काम डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि "चौथी लाइन बिछाने के लिए सर्वे की रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है. 2025 में ही इसका काम शुरू हो जाएगा. बीना से इटारसी के बीच चौथी रेल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की रफ्तार 160 से 220 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ जाएगी. अगले 3 साल में चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी. इसका मतलब है कि बीना से इटारसी का सफर 2 से ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा." केंद्रीय बजट में मिले 14,745 करोड़ रुपये केंद्रीय रेलवे बजट में मध्य प्रदेश के लिए 14,745 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इससे मध्य प्रदेश में जहां ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, वहीं यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा. अभी बीना-भोपाल-इटारसी रूट मालगाड़ी और पैसेंजर ट्रेन के लिए काफी जरूरी है. यह व्यस्ततम रूट में गिना जाता है. वर्तमान में इस रूट से सैकड़ों एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं. चौथी नई लाइन न केवल यात्रा के समय को कम करेगी बल्कि माल ढुलाई को भी आसान बनाएगी. इससे प्रमुख शहरों की आपस में कनेक्टिविटी बेहतर होगी.