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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से पहले रेलवे ने शुरू की अहम कवायद

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे आने वाले समय में आठवें वेतन आयोग से बढ़ने वाले वेतन बोझ को संभालने की तैयारी में जुट गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे मेंटेनेंस, खरीद और एनर्जी जैसे सेक्टर में खर्च घटाने के उपाय अपना रहा है, ताकि भविष्य में वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहे। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मकसद यह है कि जब नया वेतनमान लागू हो, तब उस अतिरिक्त खर्च को आसानी से झेला जा सके और रेलवे की कमाई पर ज्यादा दबाव न पड़े। आठवां केंद्रीय वेतन आयोग जनवरी 2024 में गठित किया गया था। इसकी अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। यह आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करेगा। आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। इससे करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी, जिनमें रक्षा कर्मी भी शामिल हैं, और लगभग 69 लाख पेंशनर्स प्रभावित होंगे। आयोग को 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट देनी है, हालांकि जरूरत पड़ने पर अंतरिम रिपोर्ट भी सौंपी जा सकती है। क्या कहते हैं रेलवे के आंकड़े रेलवे के वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो (OR) 98.90% रहा, जिससे उसे करीब ₹1,341 करोड़ की शुद्ध आय हुई। 2025-26 के लिए रेलवे ने OR को घटाकर 98.42% तक लाने का लक्ष्य रखा है, जिससे अनुमानित नेट रेवेन्यू ₹3,041 करोड़ तक पहुंच सकता है। अच्छी बात यह भी है कि 2027-28 से रेलवे को IRFC को किए जाने वाले सालाना भुगतान में कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि हाल के वर्षों में पूंजीगत खर्च सरकार की बजटीय सहायता (GBS) से किया गया है। अधिकारियों ने क्या कहा रेलवे अधिकारियों ने साफ किया है कि फिलहाल नए शॉर्ट-टर्म कर्ज लेने की कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि जब 2027-28 में नए वेतन का असर पड़ेगा, तब तक फ्रेट से होने वाली सालाना कमाई में करीब ₹15,000 करोड़ की बढ़ोतरी हो जाएगी। इससे बढ़े हुए वेतन खर्च को संभालने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि इससे पहले 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना था और उसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं। आमतौर पर हर 10 साल में वेतन आयोग बनता है। कर्मचारियों को महंगाई से राहत देने के लिए महंगाई भत्ता (DA) भी दिया जाता है, जिसे हर छह महीने में महंगाई दर के आधार पर बढ़ाया जाता है।  

सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, भारतीय रेलवे ने आरओबी/आरयूबी निर्माण को बढ़ाकर तीन गुना किया

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे पर रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज (आरओबी/आरयूबी) के कार्यों की मंजूरी और क्रियान्वयन एक सतत् प्रक्रिया है। ऐसे कार्यों को ट्रेन संचालन में सुरक्षा और गतिशीलता पर प्रभाव और सड़क उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव के आधार पर प्राथमिकता दी जाती है और उन्हें शुरू किया जाता है।   मालदा डिवीजन के अजीमगंज-न्यू फरक्का खंड में किमी 239/9-10 पर एलसी नंबर 43/एसपीएल/ई के बदले आरओबी के निर्माण कार्य को मंजूरी दे दी गई है। जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) और विस्तृत अनुमान तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में स्वीकृत 302 आरओबी/आरयूबी कार्यों में से, 99 आरओबी/आरयूबी कार्य राज्य सरकार के कारण विलंबित हैं। विवरण इस प्रकार हैं:    आरओबी/आरयूबी कार्यों का पूरा होना और चालू होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जैसे एलसी को बंद करने के लिए सहमति देने में राज्य सरकारों का सहयोग, एप्रोच अलाइंमेंट को ठीक करना, सामान्य व्यवस्था ड्राइंग (जीएडी) की मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाना, उल्लंघनकारी उपयोगिताओं का स्थानांतरण, विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी, परियोजना/कार्य स्थलों के क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति, जलवायु की स्थितियों के चलते विशेष परियोजना/क्षेत्र के लिए एक वर्ष में काम करने वाले दिनों की अवधि आदि। ये सभी कारक परियोजनाएं/कार्यों को पूरा होने के समय को प्रभावित करते हैं। रेलवे ने आरओबी/आरयूबी कार्यों में तेज़ी तेजी लाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं: (i) सुचारू कार्यान्वयन करने के लिए जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) को अंतिम रूप देने से पहले, संबंधित राज्य सरकार/सड़क स्वामित्व प्राधिकरण के साथ संयुक्त सर्वेक्षण किया जाता है। (ii) आरओबी/आरयूबी कार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए रेलवे और राज्य सरकार के अधिकारियों की समय-समय पर बैठकें की जाती हैं। (iii) डिजाइन अनुमोदन के दौरान देरी से बचने के लिए रेलवे के हिस्सों पर सड़क के विस्तार, तिरछापन और चौड़ाई के विभिन्न संयोजनों के लिए सुपरस्ट्रक्चर ड्राइंग का मानकीकरण किया गया है। इसे एक सार-संग्रह के रूप में जारी किया गया है, जिसे शीघ्र योजना के लिए सीधे रेलवे लाइनों पर रोड ओवर ब्रिज के लिए अपनाया जा सकता है। (iv) जहां भी मुमकिन हो, रेलवे द्वारा आरओबी/आरयूबी कार्यों को एकल इकाई के आधार पर क्रियान्वयन करने की योजना है। अगर कोई सड़क स्वामित्व प्राधिकारी/राज्य सरकार चाहे तो रेलवे उन्हें एकल इकाई के आधार पर कार्य करने की अनुमति दे सकता है। यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में सवालों के लिखित जवाब में दी।

यात्रियों के लिए खुशखबर, अब पुणे और सांगानेर के बीच साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का संचालन

रतलाम  शीतकालीन छुट्टियों के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की मांग व सुविधा को ध्यान में रखकर रतलाम से होकर पुणे से सांगानेर के मध्य स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जाएगा। 01405/01406 पुणे-सांगानेर-पुणे स्पेशल दोनों दिशाओं में तीन-तीन फेरे चलेगी। 01405 पुणे-सांगानेर स्पेशल पुणे से 19 व 26 दिसंबर तथा दो जनवरी को सुबह 9.45 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 6.45 बजे सांगानेर पहुंचेगी। इस ट्रेन का शुक्रवार को रतलाम आगमन रात 11.35 बजे तथा प्रस्थान 11.45 बजे होगा। इसी प्रकार वापसी में 01406 सांगानेर-पुणे स्पेशल सांगानेर से 20, 27 दिसंबर तथा तीन जनवरी को सुबह 11.35 बजे चलेगी तथा अगले दिन सुबह 9.30 बजे पुणे पहुंचेगी। इन स्टेशनों पर रुकेगी इस ट्रेन का शनिवार को रतलाम आगमन शाम 7.10 बजे तथा प्रस्थान 7.20 बजे होगा। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में लोनावला, कल्याण, भिवंडी रोड, बोईसर, पालघर, वापी, वलसाड़, सूरत, अंकलेश्वर, वड़ोदरा, रतलाम, भवानी मंडी, रामगंज मंडी, कोटा व सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी।  

भारतीय रेल की गति बढ़ाने की योजना: स्विहैग एजी की तकनीक उज्जैन में लागू हो सकती है

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन भारतीय रेल की गति बढ़ाने का नया केंद्र बन सकती है। स्विट्जरलैंड की रेल ट्रैक टेक्नोलॉजी कंपनी स्विहैग एजी ने विक्रम उद्योगपुरी में अपनी यूनिट लगाने की मंशा जताई है। यूनिट लगने पर यहां ऐसे मॉडर्न उपकरण तैयार होंगे, जो कई देशों में हाई-स्पीड रेल, हैवी ड्यूटी ट्रेनें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में उपयोग किए जाते हैं। स्विस कंपनी स्विहैग एजी पहले चरण में 70 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव रखा है। विक्रमपुर उद्योगपुरी में 5 एकड़ जमीन मांगी है। हाल ही में कंपनी के सीईओ डेनियल डाहिन्डन, भारत में कंपनी के प्रतिनिधि चेतन शर्मा और हर्ष वाजपेयी ने विक्रम उद्योगपुरी सेकंड फेज का दौरा भी किया। एमपी में स्विस कंपनी आने से नजर आएगा बदलाव ● स्विहैग एजी रेल ट्रैक टेक्नोलॉजी में विश्व की अग्रणी कंपनियों में एक है। यह जर्मनी, ब्रिटेन और अमरीका में उत्पादन केंद्र संचालित करती है। ● कंपनी के उत्पाद रेलवे ट्रैक की सुरक्षा, टिकाऊपन और लागत-कुशलता बढ़ाने में इस्तेमाल होते हैं। ● इसके स्विच कंपोनेंट्स, रेल फास्टनिंग सिस्टम का उपयोग हाई-स्पीड रेल, हैवी-ड्यूटी नेटवर्क और सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में होता है। ● कंपनी के उत्पाद 40 देशों में उपयोग में हैं। ऐसे में उज्जैन आगे रेल उपकरणों का निर्यातक केंद्र बन सकता है कंपनी की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही स्विहैग इंडिया के लिए उपयुक्त भूमि का निरीक्षण कराया है। कंपनी प्रतिनिधियों को उज्जैनकी विशेषताएं और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बताया है। कंपनी की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। -राजेश राठौर, कार्यकारी निदेशक, मप्र औद्योगिक विकास

रेल हादसों की रोकथाम को बड़ा कदम, धौलपुर-बीना रूट पर लगेगा ‘कवच 4.0’ सिस्टम

ग्वालियर  उत्तर मध्य रेलवे के धौलपुर-बीना के 321 किमी लंबे रेल खंड को रेल दुर्घटना रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) से लैस आधुनिक टक्कररोधी तकनीक कवच 4.0 से लैस किया जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी, जिसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कार्यादेश जारी कर दिया गया है। संबंधित कंपनी ने प्राथमिक कार्य भी शुरू कर दिया है। आधुनिक उपकरण इंस्टाल किए जाएंगे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित कवच 4.0 के लिए ट्रैक किनारे व रेल स्लीपर में आधुनिक उपकरण भी इंस्टाल किए जाएंगे। कवच 4.0 को इंटरनेट से जोड़ने के लिए धौलपुर से मुरैना-ग्वालियर-झांसी होते हुए बीना के बीच 38 नए टावर लगाए जाएंगे। इसमें हर दस किलोमीटर की दूरी पर एक लांग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) टावर स्थापित किया जाएगा। इससे ट्रेन की हर गतिविधि पर नजर भी रखी जाएगी। एआई कवच से जोड़ने के लिए ट्रेन के इंजन पर भी एक टावर लगाया जाएगा। इसके साथ ही AI डिवाइस भी इंजन की कैब में लगाई जाएगी। एक किलोमीटर के फासले पर डिवाइस लगेंगे एआई कवच 4.0 का संपर्क ट्रेन से न टूटे, इसके लिए जिन सीमेंट के स्लीपर पर पटरी को बिछाया जाता है, उस पर भी हर एक किलोमीटर के फासले पर डिवाइस लगाई जाएगी। जब भी ट्रेन उस स्लीपर के ऊपर से निकलेगी, तो उसकी जानकारी कंट्रोल रूम तक अपने आप पहुंच जाएगी। कवच 4.0 ट्रेन को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही क्रासिंग पर होने वाले हादसों को रोकने में भी मददगार होगा। हर रेलवे क्रासिंग पर कवच के जरिए अपने आप हॉर्न बजने लगेगा। यदि सिग्नल लाल है और ट्रेन नहीं रुकती है, तो सिग्नल से 50 मीटर पहले ही AI ट्रेन को रोक देगा। क्या है कवच 4.0? रेलवे का कवच 4.0 पूरी तरह आटोमेटेड प्रोटेक्शन सिस्टम है। यह नई आधुनिक तकनीक पर आधारित है। यह सिस्टम ट्रेन की निर्धारित गति से दो किमी प्रतिघंटा से ज्यादा की स्पीड होने पर ओवर स्पीड अलार्म बजा देगा। अगर ट्रेन की निर्धारित स्पीड से पांच किमी प्रतिघंटा से ज्यादा होगी तो फिर आटोमैटिक ब्रेक लग जाएंगे। अगर ट्रेन निर्धारित स्पीड से नौ किमी प्रतिघंटा से ज्यादा की स्पीड पर पहुंचेगी तो फिर ऐसा होने पर खुद इमरजेंसी ब्रेक लग जाएंगे। कवच सिस्टम 4.0 पर इंटरलाकिंग लगाई गई है, जिससे अगले सिग्नल रेडियो वेव व इंटरनेट के जरिए से सीधे इंजन तक पहुंचेगी। कवच 4.0 का कार्य अक्टूबर से शुरू किया जाएगा और वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे अधिकारियों ने क्या कहा? रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अब तक कवच तकनीक मुख्य रूप से रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की टक्कर को रोकने पर केंद्रित रही है, लेकिन कवच 4.0 मानवीय भूल-चूक पर भी अंकुश लगाएगा। रेल मंडल झांसी के जनसंपर्क अधिकारी मनोज सिंह ने कहा कि धौलपुर से ग्वालियर-झांसी होते हुए बीना रेल खंड पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से युक्त कवच 4.0 प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस पर 300 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दी गई है और काम अक्टूबर माह में शुरू हो जाएगा।

रेलवे अलर्ट! त्योहारों के सीजन में 46 ट्रेनें रद्द, कई ट्रेनों का रूट बदला – जानें पूरी लिस्ट

मुजफ्फरपुर  त्योहारों में घर लौटने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए बड़ा झटका है। गोरखपुर-डोमिनगढ़ तीसरी लाइन और गोरखपुर-नकहा जंगल दोहरीकरण की कमीशनिंग को लेकर 22 से 26 सितंबर तक प्री-इंटरलाकिंग और नन-इंटरलाकिंग कार्य किया जाएगा। इसी कारण रेलवे ने 46 ट्रेनों को रद्द कर दिया है, वहीं कई ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित किया गया है। पूर्व मध्य रेल के सीपीआरओ सरस्वती चंद्रा ने बताया कि नन-इंटरलाकिंग कार्य पूरा होने के बाद 26 सितंबर को रेल संरक्षा आयुक्त निरीक्षण करेंगे। इसके बाद डोमिनगढ़ में ट्रेनों के विलंब में कमी आएगी और आगामी त्योहारों (दशहरा, दीपावली, छठ) में अधिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा। रद्द की गईं प्रमुख ट्रेनें 12537 मुजफ्फरपुर–प्रयागराज जं. एक्सप्रेस – 22 व 24 सितंबर 15098 जम्मूतवी–भागलपुर अमरनाथ एक्सप्रेस – 23 सितंबर 15047 कोलकाता–गोरखपुर पूर्वांचल एक्सप्रेस – 25 व 27 सितंबर 15705 कटिहार–दिल्ली चंपारण हमसफर – 22 व 25 सितंबर 15273 रक्सौल–आनंद विहार सत्याग्रह एक्सप्रेस – 22 से 27 सितंबर कुल 46 ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। परिवर्तित मार्ग से चलने वाली ट्रेनें 02563 बरौनी–नई दिल्ली क्लोन स्पेशल अब छपरा–औंड़िहार–वाराणसी–प्रयागराज होते हुए जाएगी। 11123 ग्वालियर–बरौनी एक्सप्रेस अब लखनऊ–सुल्तानपुर–वाराणसी–छपरा रूट से चलेगी। 12553 वैशाली एक्सप्रेस अब भटनी–मऊ–वाराणसी–अयोध्या कैंट–बाराबंकी मार्ग से जाएगी। कई अन्य ट्रेनें भी वैकल्पिक मार्गों से चलाई जाएंगी। आंशिक समापन/पुनर्निर्धारण 15027 संबलपुर–गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस का आंशिक समापन देवरिया सदर तक होगा। 15047 कोलकाता–गोरखपुर एक्सप्रेस भी देवरिया सदर तक ही चलेगी। 13507 आसनसोल–गोरखपुर एक्सप्रेस का समापन अब सीवान जं. पर होगा। कई ट्रेनों को 90 मिनट से लेकर 4 घंटे तक की देरी से पुनर्निर्धारित किया गया है। 

जबलपुर-रायपुर और रीवा-पुणे ट्रेन शुरु होने से मध्यप्रदेश के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भारतीय रेलवे गढ़ रही है नए-नए कीर्तिमान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सहयोग के लिए माना आभार जबलपुर-रायपुर और रीवा-पुणे ट्रेन शुरु होने से मध्यप्रदेश के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में नया भारत विश्व में अपनी अलग पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में रेलवे नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। भावनगर से अयोध्या नई एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत अत्यंत सुखद है। इससे भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के साथ संबंध का स्मरण भी हो रहा है। प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण से ही दुनियाभर में भारत की पहचान बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को जबलपुर-रायपुर एक्सप्रेस और रीवा-पुणे (हडपसर) एक्सप्रेस के शुभारंभ कार्यक्रम में उज्जैन से वर्चुअली शामिल हुए और संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आज रेल कनेक्टिविटी के मामले में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से सीधे जुड़ रहा है। जबलपुर-रायपुर एक्सप्रेस और रीवा-पुणे (हडपसर) एक्सप्रेस के शुभारंभ से यात्रियों के साथ व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। बघेलखंड अंचल के रीवा में टाइगर सफारी और मैहर शक्तिपीठ की मां शारदा देवी के दर्शन सुलभ हो पाएंगे। इसी प्रकार संस्कारधानी जबलपुर और भेड़ाघाट आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। भारतीय रेलवे ने गत 11 वर्ष में उल्लेखनीय प्रगति की है। इलेक्ट्रिफिकेशन का शतप्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2025-26 में 2 लाख 65 हजार करोड़ के बजट का प्रावधान रखा गया है। जबलपुर-रायपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से पड़ोसी राज्य के साथ कनेक्टिविटी और बढ़ जाएगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रेलवे के साथ भावनात्मक जुड़ाव है। यह देश के गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है। प्रधानमंत्री मोदी के विजन से केंद्र सरकार ने 10-11 वर्ष में रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए संकल्प के साथ कार्य किए हैं। नई ट्रेनों की शुरुआत, आधुनिक कोच निर्माण और रेलवे स्टेशनों का जीर्णोद्धार रेलवे के अभूतपूर्व कार्य हैं। रीवा से पुणे की कनेक्टिविटी बढ़ रही है। जबलपुर और रायपुर के बीच नई ट्रेन से जनजातीय अंचल को लाभ मिलेगा। गत 11 साल में 34 हजार किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बनाए हैं। प्रतिदिन 12 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जा रहा है और 1300 स्टेशनों का नव निर्माण किया जा रहा है, यह दुनियाभर के विकसित देशों में अपने आप में अलग स्थान रखता है। वंदेभारत जैसी नई ट्रेन चलाई जा रही हैं। देश में 8 अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू की जा चुकी हैं, इसमें वंदेभारत जैसी सुविधाएं कम किराये पर दी जा रही है। नमो भारत, आसपास के दो शहरों की कनेक्टिंग ट्रेन हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने रेलवे की सूरत बदलने का संकल्प लिया है। वैष्णव ने कहा कि पोरबंदर से राजकोट नई ट्रेन जल्द शुरू करेंगे। राणावाद स्टेशन पर नई कोच मेंटेनेंस फैसिलिटी विकसित करेंगे।सारडिया से बांसजालिया नई रेल लाइन बिछाएंगे। मुंबई से अहमदाबाद के बीच जल्द ही बुलेट ट्रेन की भी शुरुआत होगी। यह ट्रेन मात्र 2 घंटे 13 मिनट में गंतव्य तक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का माना आभार केंद्रीय रेल मंत्री वैष्णव ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार मानते हुए कहा कि उनका सहयोग रेल नेटवर्क के विस्तार में निरंतर प्राप्त हो रहा है। डबल इंजन की सरकार होने से कोई भी प्रकल्प अधिक समय लंबित नहीं रह पाता है। नए रेल संचालन के शुभारंभ कार्यक्रम में अनेक मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि और नागरिक प्रत्यक्ष और वर्चुअल रूप से शामिल हुए। प्रारंभ हुई नई रेल सेवाओं से 4 राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के मध्य बेहतर रेल कनेक्टिविटी स्थापित होगी, जिसका इन चारों राज्यों के नागरिकों को परिवहन और व्यापार-वाणिज्य की दृष्टि से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। जबलपुर से रायपुर, रीवा से पुणे और भावनगर से अयोध्या के लिए नई एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन प्रारंभ होने से रेल नेटवर्क के विस्तार में नया आयाम जुड़ा है।  

रक्षाबंधन स्पेशल ट्रेन की घोषणा, MP के इन स्टेशनों से मिलेगी सुविधा

भोपाल   रक्षाबंधन के दौरान भोपाल व इंदौर से आने वाली सभी ट्रेनों में रिजर्वेशन फुल हो चुका है। ऐसे में रेलवे  ने अभी एक स्पेशल ट्रेन का ऐलान कर सतना-रीवा के यात्रियों को थोड़ी राहत दी है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर यात्रियों की सुविधा के लिए रीवा-रानी कमलापति-रीवा एक-एक ट्रिप सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इस स्पेशल ट्रेन में एसी क्लास, स्लीपर क्लास और जनरल क्लास के कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों दिशाओं में सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना, विदिशा हाल्ट लेकर गन्तव्य को जाएगी। शनिवार से यात्री ट्रेन में रिजर्वेशन करा सकते हैं। यह होगा आने-जाने का समय गाड़ी संख्या 02190 रीवा-रानी कमलापति सुपरफास्ट शुक्रवार 08 अगस्त को रीवा स्टेशन से 12.30 बजे प्रस्थान कर, 1.20 सतना, 1.50 मैहर, 2.50 कटनी मुड़वारा, 4.10 दमोह, 5.15 सागर, 6.45 बीना, 7.50 विदिशा और रात 9.15 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। इसी तरह गाड़ी संख्या 02159 रानी कमलापति-रीवा सुपरफास्ट शुकवार 3 अगस्त को ही रानी कमलापति स्टेशन से रात 10.15 बजे चलकर, 11.08 बजे विदिशा, 00.20 बीना, 1.30 सागर, 2.40 दमोह, 04.10 कटनी मुड़वारा, 5.35 मैहर, 6.15 सतना और सुबह 7.20 बजे रीवा स्टेशन पहुंचेगी।

IRCTC आईडी पर बड़ा अपडेट: रेलवे ने 2.5 करोड़ अकाउंट किए डीएक्टिवेट, बदली गाइडलाइन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्‍टम में दुरुप्रयोग को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के 2.5 करोड़ से ज्‍यादा यूजर्स आईडी डीएक्टिवट हो चुके हैं. संदिग्‍ध बुकिंग पैटर्न और फेक यूजर्स की पहचान के बाद IDs डीएक्टिवेट की गई हैं. संसद में सांसद ए.डी. सिंह के सवाल पर सरकार ने इसकी जानकारी दी गई है. इन अकाउंट के डीएक्टिव होने से पहले तत्‍काल टिकट बुकिंग में कई तरह की समस्‍याएं आ रही थीं. अक्‍सर देखा जा रहा था कि तत्‍काल बुकिंग विंडो खुलने के कुछ ही मिनटों में टिकट गायब हो जाते थे, क्‍योंकि बॉट्स का यूज करके एजेंट सारे टिकट गायब कर देते थे, जिससे आम यात्री टिकट बुक नहीं कर पाता था. हालांकि अब बदलाव के बाद रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है.  सरकार ने क्‍या दी जानकारी?  संसद में सरकार ने बताया कि टिकट बुकिंग सिस्‍टम में गड़बड़‍ियों को रोकने के लिए IRCTC ने हाल ही में 2.5 करोड़ से ज्‍यादा यूजर आईडी डीएक्टिव किए हैं. क्‍योंकि ये यूजर्स आईडी संदिग्‍ध पाए गए थे. सरकार ने बताया कि भारतीय रेलवे ने कंफर्म टिकट बुकिंग और डिजिटल को बढ़ावा देने के लिए कुछ और बदलाव किए हैं.  रेलवे ने  बदले हैं ये नियम     रिजर्व टिकट ऑनलाइन या कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) काउंटरों पर 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर बुक किए जा सकते हैं.  हालांकि कुल टिकटों का लगभग 89% ऑनलाइन माध्यम से बुक हो रहा है.      PRS काउंटर्स पर डिजिटल माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.     1 जुलाई 2025 से तत्‍काल योजना के तहत टिकट केवल आधार वेरिफाई यूजर्स द्वारा ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप के माध्‍यम से बुक किए जा सकते हैं.      एजेंटों को तत्‍काल रिजर्व खुलने के पहले 30 मिनट के दौरान तत्‍काल टिकट बुक करने से रोक दिया गया है.      ट्रेनों की वेटिंग लिस्‍ट का स्‍टेटस की नियमित आधार पर निगरानी की जाती है और अतिरिक्‍त मांग को पूरा करने के लिए, भारतीय रेलवे स्पेशल ट्रेनें चला रहा है.  इमरजेंसी कोटा को लेकर भी बदलाव  सरकार ने इमरजेंसी कोटा को लेकर भी बदलाव किया है. पहले इमरजेंसी कोटा के तहत टिकट बुकिंग करने के लिए यात्रा वाले दिन ही आवेदन किया जा सकता था, लेकिन अब 1 दिन पहले इमरजेंसी कोटा के लिए अप्‍लाई करना होगा. यह कोटा सांसद, उच्‍च अधिकारी, मेडिकल इमरजेंसी और सीनियर सिटीजन के लिए होता है. 

भारी बारिश और रेलवे ट्रैक के नान-इंटरलाकिंग व मेंटेनेंस कार्यों के चलते ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाया

 भोपाल   देशभर में हो रही भारी बारिश और रेलवे ट्रैक के नान-इंटरलाकिंग व मेंटेनेंस कार्यों के चलते ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। इसका सीधा असर राजधानी भोपाल पहुंचने वाली ट्रेनों पर पड़ा है। सोमवार को विभिन्न रूटों से भोपाल आने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों की देरी से पहुंचीं। इस देरी ने यात्रियों को काफी परेशान किया। भोपाल स्टेशन पर सबसे ज्यादा देरी से पहुंचने वाली ट्रेन 01704 रीवा-चर्लापल्ली एक्सप्रेस रही, जो 14 घंटे लेट आई। इस ट्रेन के बी-2 कोच में पानी खत्म हो जाने के कारण यात्रियों को दोगुनी परेशानी झेलनी पड़ी। यात्रियों ने ट्रेन के स्टाप्स पर रेल कर्मचारियों से शिकायत की, लेकिन समय पर समाधान नहीं मिल सका। बाद में यात्रियों ने रेलवे हेल्पलाइन और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराई। रेलवे सूत्रों के अनुसार इन दिनों विभिन्न रेल मंडलों में नान इंटरलाकिंग कार्य और बारिश के कारण ट्रैक मरम्मत चल रहा है। इसके चलते भोपाल की ओर आने वाली ट्रेनें समय पर नहीं पहुंच रही हैं, विशेष रूप से पंजाब, दिल्ली और मुंबई रूट से आने वाली ट्रेनें सबसे अधिक प्रभावित रहीं। 25 फीसद वेटिंग टिकट के नियम से ट्रेनों में बनी नो-रूम की स्थिति इस बीच, ग्वालियर से खबर है कि रेल यात्रियों के लिए वेटिंग टिकट की नई व्यवस्था लागू होने से यहां से गुजरने वाली अधिकतर ट्रेनों में नो-रूम की स्थिति बन गई है। रेलवे के नए नियम के अनुसार अब ट्रेनों में सिर्फ 100 सीटों के बदले 25 वेटिंग टिकट जारी किए जाएंगे। ऐसे में अब 25 फीसद के ऊपर नो-रूम यानी वेटिंग टिकट भी लोगों को नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जम्मू जैसे दूरदराज के शहरों को जाने वाली ट्रेनों में सफर करने के प्रयास करने वाले यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे वेटिंग के टिकट ही नहीं ले पा रहे हैं। ग्वालियर से गुजरने वाली मंगला एक्सप्रेस, केरला एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस, पातालकोट एक्सप्रेस, कर्नाटक एक्सप्रेस सहित एक दर्जन से अधिक ट्रेनों में अगले कई दिनों तक नो-रूम की स्थिति बनी हुई है। इसके चलते यात्री सिर्फ तत्काल टिकट के भरोसे हैं। यदि किसी व्यक्ति को आपात स्थिति में यात्रा करनी है, तो उसके पास सिर्फ जनरल श्रेणी में सफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। नई व्यवस्था से बुजुर्गों और महिलाओं को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक आरक्षित कोचों में 25 प्रतिशत वेटिंग टिकट ही जारी किए जा रहे हैं ताकि आरक्षित श्रेणी में लोग आराम से यात्रा कर सकें। असुविधा से बचने के लिए यात्री वैकल्पिक ट्रेन या अनारक्षित श्रेणी में यात्रा कर सकते हैं।