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भिंड के भारतीय छात्र की स्कॉटलैंड में संदिग्ध मौत, परिवार ने हत्या का आरोप लगाया

भिंड  स्कॉटलैंड में पढ़ाई कर रहे ग्वालियर-भिंड के 21 वर्षीय छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने इसे आत्महत्या बताया है, लेकिन परिजनों ने इस पर गंभीर सवाल उठाते हुए हत्या की आशंका जताई है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और भारत में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की है। मृतक छात्र फॉरेंसिक साइंस में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहा था और पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम काम भी कर रहा था। जानकारी के अनुसार, वह पढ़ाई में अव्वल था और हर महीने अच्छी आय भी अर्जित कर रहा था। ऐसे में परिवार का कहना है कि उसके आत्महत्या करने का कोई कारण नजर नहीं आता। परिजनों के मुताबिक, 5 मार्च को छात्र ने अपने परिवार से लंबी वीडियो कॉल पर बात की थी और जल्द घर लौटने का भरोसा दिया था। इसके दो दिन बाद संपर्क टूट गया और 7 मार्च को उसकी मौत की सूचना मिली। इस बीच, परिवार को घटना की जानकारी भी कई दिन बाद दी गई, जिससे संदेह और गहरा गया है। परिवार ने मामले में कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मौत के आसपास छात्र के बैंक खाते से बड़ी राशि का ट्रांजेक्शन हुआ, जो संदिग्ध है। इसके अलावा, जिन दोस्तों के संपर्क नंबर छात्र ने दिए थे, वे अब जवाब नहीं दे रहे हैं। छात्र के हॉस्टल का दरवाजा खुला मिलने और मोबाइल डेटा के गायब होने को लेकर भी परिजन शंका जता रहे हैं। पिता ने प्रशासन और केंद्र सरकार से बेटे का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की गुहार लगाई है। जानकारी के अनुसार, शव 27 मार्च तक दिल्ली पहुंच सकता है। इसके बाद परिजन ग्वालियर में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके। मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा है क्योंकि संबंधित विश्वविद्यालय परिसर में पिछले कुछ समय में अन्य संदिग्ध मौतों और एक छात्र के लापता होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे परिवार की आशंका और मजबूत हो गई है।फिलहाल, परिवार न्याय की उम्मीद में सरकारी एजेंसियों की ओर देख रहा है और पूरे मामले की गहन जांच की मांग कर रहा है। कर्ज लेकर पढ़ने भेजा था मूल रूप से भिंड के मौ कस्बा निवासी किसान कुलदीप श्रीवास्तव ने इकलौते बेटे संस्कार श्रीवास्तव के लिए लगभग 40 लाख रुपए कर्ज लिया था। कर्ज लेकर जिस बेटे को पढ़ने विदेश भेजा था। 7 मार्च को उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। मां को तो बेटे की मौत के बारे 10-12 दिन बाद बताया। अब 20 दिन बीत जाने के बाद भी मां-पिता की पथराई आंखें बेटे के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रही हैं। मामला संदिग्ध, दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग पिता कुलदीप आंखों के रोग के कारण कम देख पाते हैं। उन्होंने ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान और भारत सरकार से गुहार लगाई है कि बेटे का शव जल्द से जल्द भारत लाया जाए। जानकारी के मुताबिक, संस्कार का शव 27 मार्च को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच सकता है। परिजन की मांग है कि ग्वालियर के जेएएच (जयारोग्य अस्पताल) में शव का वापस पोस्टमॉर्टम कराया जाए, ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके। पूरे परिवार को यकीन है कि संस्कान सुसाइड जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकता है। परिजनों के 5 बड़े सवाल? संस्कार की मां नीलम और चाचा अनूप श्रीवास्तव ने पुलिस और प्रशासन के सामने कुछ गंभीर सवाल रखे हैं।     संदेहास्पद ट्रांजैक्शनः मौत के बाद या उसके आसपास संस्कार के बैंक अकाउंट से करीब 2.50 लाख रुपए किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर हुए हैं, जो अपने आप में पूरे मामले को संदिग्ध बता रहा है।     दोस्तों की चुप्पीः जिन 3 दोस्तों के नंबर संस्कार ने घर पर दिए, वे कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। उनकी चुप्पी ने पूरा मामला संदिग्ध कर दिया है।     हॉस्टल का खुला दरवाजाः यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि उसने सुसाइड किया, लेकिन उसके रूम का दरवाजा खुला मिला। सवाल है कि वह दरवाजा खुला छोड़कर बाहर क्यों जाएगा?     यूनिवर्सिटी का रिकॉर्डः 13 महीनों में इस यूनिवर्सिटी में यह तीसरी संदिग्ध हालात में मौत है। इससे पहले 2025 में मेलिसा यंग और 2025 में रूबेन एगाडो भी मृत मिले थे। छात्रा यूएक्सिन काओ अब भी लापता हैं।     मोबाइल डेटाः संस्कार के मोबाइल का डेटा गायब है। उसके मोबाइल रिकॉर्ड से बहुत कुछ मिल सकता है। आखिरी वीडियो कॉल… अगले साल घर आऊंगा मां पिता कुलदीप ने रुंधी आवाज में बताया, 5 मार्च (होली) की रात संस्कार ने पूरे परिवार से करीब 2 घंटे वीडियो कॉल पर बात की थी। वह बहुत खुश था। उसने मां नीलम से वादा किया कि पढ़ाई पूरी कर अगले साल वह घर लौटेगा। दो दिन तक जब उसका फोन नहीं आया तो हमें चिंता हुई, क्योंकि वह अपनी मां से रोज बात करता था। उन्होंने यह बात जर्मनी में रहने वाले रिश्तेदार गौरव को बताई। उन्होंने स्कॉटलैंड यूनिवर्सिटी से संपर्क किया। पहले जवाब आया संस्कार से बात कराते हैं। इसके बाद पुलिस ने कॉल कर पूछा आप संस्कार के कौन है? उन्होंने कहा कि चाचा लगते हैं। पुलिस ने बताया, संस्कार ने सुसाइड कर लिया है और माता-पिता का फोन नंबर लिया। इसके बाद 7 मार्च को यूनिवर्सिटी और भारतीय दूतावास से फोन आया कि संस्कार ने कॉलेज परिसर के पीछे सुसाइड कर लिया है। चाचा ने कहा-पढ़ने में तेज था संस्कार चाचा अनूप ने कहा कि संस्कार न केवल पढ़ाई में तेज था, बल्कि जिम्मेदार भी था। ग्वालियर के एमएलबी कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद वह पीजी के लिए स्कॉटलैंड गया था। वहां वह पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम जॉब भी कर रहा था। उसे महीने के करीब 90 हजार से एक लाख रुपए मिलते थे। वह कहता था- मैं कमाने लगा हूं। घर पर पैसे की जरूरत हो तो भेज दूंगा। हमने उससे कहा कि बेटा पढ़ाई पर ध्यान दो। यहां कोई दिक्कत नहीं है। मां बोली- मेरे बेटे की हत्या की गई है दैनिक भास्कर से बात करते हुए संस्कार की मां फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनका कहना है कि उनका बेटा बुजदिल नहीं था, जो सुसाइड करेगा। उससे वहां … Read more

मंगल की मिट्टी को ईंट में बदलने में भारत का वैज्ञानिक सफलता, स्पेस मिशनों के लिए बड़ी सुविधा

बैंगलोर अंतरिक्ष यानी स्पेस सेक्टर में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है. इस लिस्ट में अब एक और गर्व की बात जुड़ गई है. पिछले साल इंटरनेशलन स्पेस स्टेशन जाकर लौटने वाले भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने अपने करियर में एक नई और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. उन्होंने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी IISc के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक ऐसी रिसर्च की है, जो भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बना सकती है. यह स्टडी इस बात पर फोकस है कि क्या मंगल ग्रह की मिट्टी से ही वहां कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स यानी इमारतें बनाने का सामान जैसे- ईंट, सीमेंट आदि तैयार की जा सकती है. इस रिसर्च का मकसद सीमेंट जैसी कार्बन उत्सर्जन करने वाले साधानों पर निर्भरता को मंगल ग्रह के साथ-साथ पृथ्वी पर भी कम करना है. इस रिसर्च जर्नल को PLOS One में पब्लिश किया गया है. शुभांशु शुक्ला फिलहाल IISc में मास्टर डिग्री कर रहे हैं. उनका कहना है कि भविष्य की मंगल यात्राओं में अगर हमें सड़कें, लैंडिंग पैड या रोवर के लिए मजबूत ज़मीन चाहिए, तो वहां की मिट्टी का ही इस्तेमाल करना सबसे बेहतर तरीका होगा. इससे पृथ्वी से भारी कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स को लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेही और मिशन ज्यादा टिकाऊं हो पाएंगे. रिसर्च में इस्तेमाल हुआ खास बैक्टीरिया इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास तरह के बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया है, जो मिट्टी के कणों को आपस में जोड़कर ईंट जैसा स्ट्रक्चर बना सकते हैं. पहले के एक्सपेरीमेंट्स में Sporosarcina pasteurii नाम का बैक्टीरिया यूज़ किया गया था. इस बार टीम ने बेंगलुरु की मिट्टी से मिला एक ज्यादा मजबूत बैक्टीरिया चुना, जिससे बायोसीमेंटेशन का प्रोसेस बेहतर हो सके. हालांकि, मंगल ग्रह की मिट्टी में पाए जाने वाले परक्लोरेट नाम के जहरीले केमिकल ने वैज्ञानिकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी. जब बैक्टीरिया को सिर्फ परक्लोरेट के संपर्क में लाया गया, तो वो तनाव में आ गए और धीरे-धीरे बढ़ने लगे, आपस में चिपकने लगे. लेकिन जब वही बैक्टीरिया ईंट बनाने वाले जरूरी तत्वों के साथ मौजूद थे, तो उसके रिजल्ट्स काफी चौंकाने वाले निकले. रिसर्च की पहली ऑथर यानी लेखिका स्वाति दूबे के अनुसार, इस स्थिति में बैक्टीरिया एक खास तरह का मैट्रिक्स छोड़ते हैं, जो कमजोर बैक्टीरिया तक पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है. इससे ईंट बनने का प्रोसेस और मजबूत हो जाता है. अब वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को मंगल जैसे वातावरण में, खासकर ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड वाली परिस्थितियों में टेस्ट करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर ये प्लानिंग सफल रही, तो यह टेक्नोलॉजी न सिर्फ मंगल पर कंस्ट्रक्शन वर्क करने में मदद करेगी, बल्कि पृथ्वी पर भी पर्यावरण के अनुकूल एक अच्छा विकल्प बन सकती है.

16 भारतीय नाविक ईरान में फंसे, सरकार ने उनकी रिहाई के लिए उठाया कूटनीतिक कदम

नई दिल्ली  ईरान में जब्त किए गए वाणिज्यिक जहाज 'एमटी वैलेंट रोर' पर फंसे 16 भारतीय नाविकों की सुरक्षित घर वापसी के लिए भारत सरकार ने अपनी कूटनीतिक कोशिशें तेज कर दी हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह ईरानी अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द कॉन्सुलर एक्सेस और कानूनी मदद मिल सके। जहाज जब्ती और कूटनीतिक पहल 14 दिसंबर को ईरान द्वारा हिरासत में लिए गए इस जहाज के मामले में भारत ने सक्रियता दिखाते हुए बंदर अब्बास और तेहरान, दोनों स्तरों पर बातचीत की है।     लगातार संपर्क: भारतीय राजदूत स्तर की चर्चाओं के माध्यम से ईरान पर दबाव बनाया जा रहा है कि न्यायिक प्रक्रिया को तेज किया जाए।     परिवार से संपर्क: दूतावास ने ईरानी नौसेना और अधिकारियों से अनुरोध किया है कि क्रू मेंबर्स को भारत में उनके चिंतित परिजनों से बात करने की अनुमति दी जाए।     खाद्य आपूर्ति: जनवरी की शुरुआत में जब जहाज पर राशन और पानी का स्टॉक खत्म होने लगा, तब भारतीय मिशन के हस्तक्षेप के बाद ईरानी नौसेना ने आपातकालीन रसद (Emergency Supply) पहुंचाई। बहुपक्षीय सहयोग और कानूनी सहायता जहाज की मालिक कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित है, जिसके चलते यह मामला त्रिपक्षीय कूटनीति का रूप ले चुका है।     दुबई से दबाव: दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास जहाज के मालिक पर दबाव बना रहा है कि वह क्रू के लिए उचित कानूनी प्रतिनिधित्व और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करे।     ईरानी अदालतों में पैरवी: भारतीय दूतावास ईरान की अदालतों में फंसे हुए नाविकों के लिए स्थानीय कानूनी विशेषज्ञों का इंतजाम कर रहा है, ताकि उन्हें न्यायिक जटिलताओं से राहत मिल सके।  

भारत को मिलेगा फायदा, 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उत्पाद होंगे ड्यूटी-फ्री

नई दिल्ली भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते के तीन साल पूरे होने पर बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार, 29 दिसंबर को घोषणा की कि 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया भारतीय निर्यात के लिए अपनी सभी टैरिफ लाइनों को शून्य ड्यूटी (zero-duty) कर देगा. यानी भारत से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले किसी भी सामान पर कोई भी शुल्क नहीं लगेगा. ये समझौता 29 दिसंबर 2022 को लागू हुआ था और इसे 'अर्ली हार्वेस्ट' डील कहा जाता है. जिसमें शुरुआती चरण में कुछ प्रमुख व्यापारिक मुद्दों को शामिल किया गया था. अब तीन साल बाद ये डील अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है, जहां ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय सामान के लिए पूरी तरह ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस देने का फैसला किया है. पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, पीयूष गोयल का पोस्ट. उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में इस समझौते ने निर्यात में लगातार वृद्धि की है. बेहतर बाजार तक पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद की है. इससे भारतीय निर्यातक, MSME, किसान और काम करने वाले लोगों को खास फायदा हुआ है.  रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 8 प्रतिशत बढ़ा है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन (trade balance) में सुधार हुआ है. विभिन्न क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है. मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल्स, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और जेम्स एवं ज्वेलरी जैसे सेक्टर में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई. निर्यात में 8% की शानदार बढ़ोतरी वाणिज्य मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात 8 प्रतिशत बढ़ा है। इस वृद्धि में रसायन, कपड़ा, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और रत्न व आभूषण (जेम्स एंड जूलरी) जैसे प्रमुख क्षेत्रों का बड़ा योगदान रहा है। पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर कहा, "1 जनवरी, 2026 से भारतीय निर्यात के लिए 100 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई टैरिफ लाइन्स (उत्पाद श्रेणियां) जीरो-ड्यूटी होंगी। इससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।" समझौते के 3 साल के दौरान क्या-क्या हुआ? भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह अंतरिम व्यापार समझौता 29 दिसंबर, 2022 को लागू हुआ था। आज इसके तीन साल पूरे हो गए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और शुल्क बाधाओं को कम करना था। मंत्री ने समझौते की सफलता के बारे में बताते हुए कहा, "पिछले तीन वर्षों में इस करार ने निरंतर निर्यात वृद्धि, बाजार तक गहरी पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने का काम किया है। इसका सीधा लाभ भारतीय निर्यातकों, एमएसएमई, किसानों और श्रमिकों को मिला है।" श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से भारतीय उत्पाद वहां चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ज्यादा किफायती हो जाएंगे। चूंकि कपड़ा, चमड़ा और आभूषण उद्योग में बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होता है, इसलिए यह कदम भारत की रोजगार वृद्धि में भी सहायक होगा। भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते में क्या खास?     समझौता लागू हुआ: 29 दिसंबर, 2022     पूर्ण शुल्क माफी: 1 जनवरी, 2026 से (100% टैरिफ लाइन्स पर)     मौजूदा वित्त वर्ष में वृद्धि: निर्यात में 8% का इजाफा     लाभ लेने वाले सेक्टर: टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल्स, जेम्स एंड जूलरी नए साल में लागू होने वाली 100 प्रतिशत टैरिफ छूट के साथ, भारत सरकार को उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में और तेजी देखने को मिलेगी।  कृषि निर्यात में भी व्यापक प्रगति हुई है. फल-सब्जियां, समुद्री उत्पाद, मसाले और खास तौर पर कॉफी में खासा उछाल देखा गया है. श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स-ज्वेलरी और प्रोसेस्ड फूड को इस नई व्यवस्था से सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि टैरिफ खत्म होने से इनके लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार में पहुंच आसान और सस्ती हो जाएगी. ये कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के चलते भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लग रहा है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित बाजार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस भारत के लिए निर्यात की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा. दोनों देश फिलहाल व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (Comprehensive Economic Cooperation Agreement – CECA) पर बातचीत कर रहे हैं, जो और भी गहरा और व्यापक होने की उम्मीद है. पीयूष गोयल ने कहा कि Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की आर्थिक मौजूदगी को मजबूत करता है और 'मेक इन इंडिया' तथा 'विकसित भारत@2047' के विजन से जुड़ा है.

अमेरिका को पीछे छोड़ा, इस मुस्लिम देश ने 2025 में निकाले सबसे ज्यादा भारतीय

नई दिल्ली साल 2025 में भारतीयों को निकाले जाने के मामलों में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमेरिका से सबसे ज्यादा भारतीयों को वापस भेजा जाता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। विदेश मंत्रालय के ताजा डेटा के अनुसार, 2025 में सबसे ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट करने वाला देश मुस्लिम राष्ट्र सऊदी अरब रहा। 11,000 भारतीयों को डिपोर्ट किया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने इस साल करीब 11,000 भारतीयों को डिपोर्ट किया, जो किसी भी अन्य देश से कहीं ज्यादा है। इनमें ज्यादातर मजदूर और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग शामिल थे, जिन्हें वीजा उल्लंघन, अवैध प्रवास या स्थानीय कानूनों के उल्लंघन के आरोप में वापस भेजा गया। वहीं, अमेरिका ने 2025 में केवल 3,800 भारतीयों को डिपोर्ट किया, जो पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा तो है, लेकिन सऊदी अरब के आंकड़ों से काफी कम। अमेरिका से डिपोर्ट होने वालों में भी ज्यादातर प्राइवेट कर्मचारी थे।  रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर, 2025 में 81 देशों से 24,600 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया गया। सऊदी अरब में भारतीयों की बड़ी संख्या (लगभग 19-27 लाख) होने के कारण ऐसे मामले ज्यादा सामने आते हैं, क्योंकि वहां निर्माण, स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों में लाखों भारतीय काम करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एजेंटों की धोखाधड़ी, स्थानीय कानूनों की अनभिज्ञता और वीजा नियमों का सख्ती से पालन न करना ऐसे मामलों की मुख्य वजहें हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा राज्यसभा में पेश ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 12 महीनों में अमेरिका से 3,800 भारतीयों को निर्वासित किया गया। अधिकांश कार्रवाई वाशिंगटन डीसी (3,414) और ह्यूस्टन (234) से की गई। विशेषज्ञ इस बढ़ोतरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार में शुरू हुई सख्ती और दस्तावेजों की कड़ी जांच- जैसे वीजा स्टेटस, वर्क ऑथराइजेशन और ओवरस्टे से जोड़ रहे हैं। खाड़ी देशों से लगातार ऊंचे आंकड़े MEA के अनुसार खाड़ी देशों में वीजा और श्रम नियमों के उल्लंघन के कारण बड़ी संख्या में निर्वासन हुए। जिन देशों से उल्लेखनीय संख्या सामने आई, उनमें संयुक्त अरब अमीरात (1,469), बहरीन (764) और सऊदी अरब शामिल हैं। सामान्य कारणों में वीजा/रेजिडेंसी ओवरस्टे, बिना वैध परमिट काम करना, श्रम कानूनों का उल्लंघन, नियोक्ता से फरार होना और सिविल या आपराधिक मामलों में फंसना शामिल है। दक्षिण–पूर्व एशिया और म्यांमार-कंबोडिया का अलग पैटर्न दक्षिण–पूर्व एशियाई देशों से भी बड़ी संख्या में भारतीयों का निर्वासन दर्ज किया गया- म्यांमार (1,591), मलेशिया (1,485), थाइलैंड (481) और कंबोडिया (305)। तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष भीमा रेड्डी ने बताया कि म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में निर्वासन का पैटर्न अलग है। उनके मुताबिक, यह अक्सर साइबर स्लेवरी से जुड़ा होता है- जहां भारतीयों को ऊंची तनख्वाह का झांसा देकर बुलाया जाता है, बाद में अवैध साइबर गतिविधियों में जबरन काम कराया जाता है और अंततः हिरासत व निर्वासन होता है। छात्रों का निर्वासन: यूके सबसे आगे, रूस भी शामिल MEA के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारतीय छात्रों का निर्वासन सबसे ज्यादा यूनाइटेड किंगडम से हुआ, जहां 170 छात्रों को वापस भेजा गया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया (114), रूस (82) और संयुक्त राज्य अमेरिका (45) का स्थान रहा। एजेंटों की ठगी और कानूनों की अनभिज्ञता बनी बड़ी वजह भीमा रेड्डी का कहना है कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक निर्माण क्षेत्र, केयरगिविंग और घरेलू काम में जाते हैं। इनमें से कई कम कौशल वाले कामगार एजेंटों के जरिए जाते हैं और अतिरिक्त कमाई की कोशिश में मामूली अपराधों या नियम उल्लंघन में फंस जाते हैं। कई मामलों में एजेंटों की ठगी और स्थानीय कानूनों की जानकारी का अभाव भारी पड़ता है।

अमेरिका में भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल: पत्रकार के बयान में मंदिरों और समुदाय को निशाना बनाने की बात

वाशिंगटन अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत और धमकियों के बीच एक अमेरिकी पत्रकार के बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े अमेरिकी पत्रकार मैट फॉर्नी ने दावा किया है कि आने वाले साल यानी 2026 में अमेरिका में भारतीयों को निशाना बनाया जाएगा और हिंदू मंदिरों पर हमले हो सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने नस्लवादी और जहरीली टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट कर देना चाहिए। अमेरिकी पत्रकार ने कहा है कि भारतीय-अमेरिकियों की जान बचाने और देश में सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी को भारत वापस भेज दिया जाना चाहिए। मैट फॉर्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि वर्ष 2026 में अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत चरम पर पहुंच सकती है और भारतीय मूल के लोगों, उनके घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमले हो सकते हैं। फॉर्नी ने लिखा, "हमें DEI करना चाहिए: हर भारतीय को डिपोर्ट करो।" हालांकि, भारी विरोध के बाद उन्होंने यह पोस्ट हटा ली है। फॉर्नी ने खुद को “अमेरिका में शांति चाहने वाला” बताते हुए यह दावा किया कि भारतीयों को देश से बाहर भेजना ही इस नफरत का समाधान है। उन्होंने अपने पोस्ट में “Deport Every Indian” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे भारतीयों के खिलाफ नफरती बयान माना जा रहा है। पहले भी दे चुके हैं भारत विरोधी नफरत भरे बयान मैट फॉर्नी एक अमेरिकी कॉलमनिस्ट, लेखक और पत्रकार हैं, जिनका X जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर भारत विरोधी नफरत भरे बयान फैलाने और उन्हें डिपोर्ट करने का आह्वान करने का इतिहास रहा है। उन्हें ऐसी ही हरकत की वजह से एक अमेरिकी मीडिया संस्थान से नौकरी से भी निकाला जा चुका है। हाल ही में उन्होंने एक भारतीय-अमेरिकी महिला अधिकारी की नियुक्ति पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। विशेषज्ञों और शोध संस्थानों के अनुसार, अमेरिका में खासकर भरतीय मूल के लोगों और H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर हाल के दिनों में नकारात्मक बयानबाजी बढ़ी है। भारतीयों के खिलाफ घृणास्पद पोस्ट बढ़े हैं एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ नस्लवादी और घृणास्पद पोस्ट्स की संख्या में तेजी आई है। नवंबर 2025 की CNN रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट के रिसर्चर्स ने पिछले एक साल में X पर भारत विरोधी भावना में बढ़ोतरी दर्ज की है। रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर ने अक्टूबर में भारतीयों और भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ नस्लवाद और ज़ेनोफ़ोबिया को बढ़ावा देने वाली लगभग 2,700 पोस्ट रिकॉर्ड कीं हैं। फॉर्नी की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया फॉर्नी की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे हिंसा भड़काने वाला बयान बताया है और अमेरिकी जांच एजेंसियों से कार्रवाई की मांग की है। कुछ यूजर्स ने भारत के विदेश मंत्रालय को भी टैग कर इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। इस पूरे मामले ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और बढ़ती नस्लीय नफरत को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।