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लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर, UN शांति सैनिक की मौत, हालात बिगड़े

बेरूत  ईरान से जुड़े युद्ध ने अब वैश्विक संकट का रूप ले लिया है, जहां एक तरफ तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ जमीनी और हवाई हमले भी तेज हो गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने परमाणु हथियार नहीं छोड़े तो उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है और जल्द कोई समझौता हो सकता है. इसी बीच बगदाद में अमेरिकी बेस पर हमले और लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह टकराव ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, जहां लाखों लोग बेघर हो चुके हैं।  तेल संकट भी लगातार गहराता जा रहा है. होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण सप्लाई बाधित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर के पार पहुंच गया. कई देश अब रूस से तेल खरीदने को मजबूर हैं, जबकि कुछ देशों में फ्यूल की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं. ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को आम लोगों को राहत देने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट मुफ्त करना पड़ा है. वहीं कुवैत में पावर प्लांट पर हमले और ड्रोन-मिसाइल घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में भी डर का माहौल बना दिया है।  इसी बीच ईरान की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है. ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोलफकारी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने फारस की खाड़ी में किसी द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश की, तो अमेरिकी सैनिक ‘शार्क का खाना’ बन जाएंगे. उन्होंने ट्रंप पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया।  तनाव को और बढ़ाने वाला दावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने किया. उन्होंने आरोप लगाया कि रूस ने ईरान की मदद की. उनके मुताबिक रूसी जासूसी सैटेलाइट्स ने डिएगो गार्सिया में अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य अड्डे की तस्वीरें लीं और यह जानकारी ईरान को दी गई. जेलेंस्की ने कहा कि 24 और 25 मार्च को ली गई इन तस्वीरों के बाद ईरान ने वहां मिसाइल हमला करने की कोशिश की, हालांकि दोनों मिसाइल निशाने पर नहीं लगीं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है. हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का अहम सैन्य अड्डा है. ऐसे में इस पर किसी भी तरह की गतिविधि पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती है।   दबाव के बीच ईरान की कमाई बढ़ी  अमेरिका और इजरायल के दबाव के बीच ईरान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा फायदा होता दिख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी के अंत से अब तक ईरान की रोजाना तेल आय लगभग दोगुनी हो गई है. बताया जा रहा है कि बढ़ती वैश्विक कीमतों और सप्लाई संकट का फायदा उठाकर तेहरान ने अपनी रणनीति मजबूत की है।   इजरायल ने हथियारों का बड़ा सौदा किया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने अपनी सैन्य तैयारी और तेज कर दी है. रक्षा मंत्रालय ने Elbit Systems के साथ 48 मिलियन डॉलर का समझौता किया है, जिसके तहत हजारों 155mm आर्टिलरी शेल खरीदे जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक यह कदम विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम करने और घरेलू हथियार उत्पादन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है. युद्ध के बीच सप्लाई चेन सुरक्षित रखने के लिए इजरायल लगातार अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने में जुटा है।  बेथलहम के पास आगजनी, फिलिस्तीनी वाहनों को जलाया वेस्ट बैंक के बेथलहम के पास नहालिन इलाके में इजरायली बसने वालों पर आगजनी का आरोप लगा है. फिलिस्तीनी न्यूज एजेंसी के मुताबिक हमलावरों ने इलाके में घुसकर दो फिलिस्तीनी वाहनों को आग के हवाले कर दिया और दीवारों पर नस्लीय नारे लिखे. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घटना बाहरी इलाके में हुई, जहां हमलावरों ने पहले हमला किया और फिर बाकौश इलाके में इकट्ठा होकर तोड़फोड़ की।   कतर ने कुवैत पर हमले की निंदा की, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव कतर ने कुवैत के पावर स्टेशन और पानी के प्लांट पर हुए हमले को लेकर ईरान की कड़ी निंदा की है. कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे ‘गंभीर आक्रामक कार्रवाई’ बताते हुए तुरंत रोकने की मांग की है और कुवैत के साथ पूरी एकजुटता जताई है. कुवैत अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में एक भारतीय कर्मचारी की मौत हुई है और साइट पर मौजूद सर्विस बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा है।  इजरायल लिंक के आरोप में दो लोगों को फांसी  ईरान में दो लोगों को फांसी दे दी गई है, जिन पर अमेरिका और इजरायल से जुड़े विपक्षी संगठन मुजाहिदीन-ए-खलक के साथ काम करने का आरोप था. अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक दोनों पर सुरक्षा बलों पर हमले करने के आरोप भी लगाए गए थे. अधिकारियों का कहना है कि ये कार्रवाई देश की सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों के चलते की गई है।   वियतनाम भी रूसी तेल की ओर झुका  वैश्विक तेल संकट के बीच वियतनाम की बिन्ह सोन रिफाइनरी ने रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए बातचीत शुरू कर दी है. साथ ही अफ्रीका, अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया से भी सप्लाई के विकल्प तलाशे जा रहे हैं. अमेरिका ने रूसी तेल पर 30 दिन की छूट देकर खरीद की अनुमति दी है, जिससे कई देशों को राहत मिली है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद सप्लाई पर असर पड़ा है, जिसके चलते थाईलैंड, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं. वहीं चीन और भारत अब भी रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं।   

ईरान युद्ध का प्रभाव: हल्दी के दाम ₹3,500 प्रति क्विंटल कम, किसान परेशान

 मराठवाड़ा महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध हल्दी का निर्यात ईरान के युद्ध की वजह से पूरी तरह ठप हो गया है. इससे घरेलू बाजार में हल्दी की कीमतें तेजी से गिर गई हैं. कुछ ही दिनों में हल्दी की कीमत 16,500 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है. यानी एक क्विंटल हल्दी पर किसानों को 3,500 रुपये का नुकसान हो रहा है।   शिवसेना नेता और विधान परिषद सदस्य हेमंत पाटील ने मंगलवार को बताया कि मराठवाड़ा की हल्दी मुख्य रूप से खाड़ी देशों (गल्फ) और अफ्रीकी देशों में निर्यात की जाती है. पिछले महीने शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह बंद हो गया है. निर्यात रुकने से माल घरेलू बाजार में ही सड़ रहा है, जिससे दाम तेजी से गिर रहे हैं।  बता दें कि मराठवाड़ा क्षेत्र पूरे देश के हल्दी निर्यात का लगभग आधा हिस्सा संभालता है. यहां की हल्दी गुणवत्ता में बेहतरीन मानी जाती है. हिंगोली जिले में ही लगभग 2 लाख एकड़ जमीन पर हल्दी की खेती होती है. हिंगोली की वासमत हल्दी को साल 2024 में GI टैग मिला था. यह हल्दी अपनी खास खुशबू, रंग, स्वाद के लिए जानी जाती है. आयुर्वेद, दवा, खाने-पीने और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका खूब इस्तेमाल होता है।  टेंशन में किसान निर्यात बंद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. हल्दी व्यापारी प्रकाश सोनी ने बताया कि अगर युद्ध जल्दी नहीं रुका तो कीमतें और भी गिर सकती हैं.  किसान पहले से ही महंगाई और अन्य समस्याओं से परेशान हैं, अब हल्दी जैसी नकदी फसल पर यह झटका उनके लिए बहुत बड़ा नुकसान साबित हो रहा है।  मराठवाड़ा के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्दी कोई राहत पैकेज या वैकल्पिक बाजार का इंतजाम करे, ताकि उनकी मेहनत बर्बाद न हो. फिलहाल युद्ध की वजह से न सिर्फ हल्दी बल्कि कई अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ रहा है। 

ईरान में जंग से बढ़ी तेल-गैस की किल्लत, भारत पर कितना असर? सरकार का प्लान क्या है

नई दिल्ली ईरान में जारी जंग के चलते पैदा हुए हालातों के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी आज देश को जानकारी देंगे। वह लोकसभा में दोपहर 2 बजे बोलने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि इस स्पीच में वह बताएंगे कि ईरान में जंग के बीच देश में गैस और तेल की सप्लाई की क्या स्थिति है। यदि किसी प्रकार का संकट है तो फिर सरकार उससे निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है। इन सभी सवालों के जवाब पीएम नरेंद्र मोदी इस भाषण में दे सकते हैं। पीएमओ में रविवार को जो बैठक हुई थी, उसमें प्रधानमंत्री ने पूरी प्रजेंटेशन देखी थी। इसमें उन्होंने जाना था कि दुनिया में पैदा हुए हालातों के बीच भारत ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और देश में तेल और गैस सप्लाई की क्या स्थिति है। इस दौरान सभी संबंधित मंत्रालयों से उन्होंने जरूरी अपडेट लिए थे। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में ऐग्रिकल्चर, फर्टिलाइजर, फूड सिक्योरिटी, पेट्रोलियम, पावर, एक्सपोर्ट, शिपिंग, फाइनेंस, सप्लाई समेत तमाम विभागों से बात की गई। उनकी ओर से उठाए कदमों के बारे में पीएम मोदी ने जानकारी हासिल की। खरीफ सीजन में फर्टिलाइजर की कमी ना हो, PM मोदी के निर्देश बैठक की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि इस दौरान यह चर्चा हुई कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर हो सकता है। फिर भारत खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। बीते कुछ दिनों में देश में फर्टिलाइजर्स की कमी पर भी काफी खबरें आई थीं। ऐसे में बैठक में इसकी उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई थी। कुछ महीनों बाद खरीफ का सीजन होगा और सरकार नहीं चाहती कि उस दौरान किसी भी तरह से फर्टिलाइजर्स की कमी रहे। एक पक्ष इस दौरान बिजली आपूर्ति का भी आया। इसे लेकर आदेश दिया गया है कि देश के सभी पावर प्लांट्स में कोयले की पर्याप्त सप्लाई होती रहे ताकि बिजली उत्पादन में गिरावट न आए। संकट के बीच बिजली पर जोर, मीटिंग में हुई चर्चा एलपीजी की कमी के बीच बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन की ओर शिफ्ट हुए हैं। ऐसी स्थिति में बिजली की सप्लाई लगातार जारी रहना भी जरूरी है। पीएम मोदी की बुलाई बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कैसे पेट्रोकेमिकल्स, फार्मा और केमिकल्स की कमी ना होने दी जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस जंग से पूरी दुनिया ही प्रभावित हो रही है, लेकिन हमें कुछ ऐसे कदम उठाने होंगे कि देश के हितों की रक्षा की जा सके। इस बैठक में उन्होंने सरकार के सभी विभागों से समन्वय के साथ काम करने की अपील की।  

LPG को लेकर बढ़ी चिंता, ईरान युद्ध का असर लेकिन सरकार बोली—स्थिति नियंत्रण में

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक भारत भी इससे अछूता नहीं है। केंद्र सरकार लगभग प्रतिदिन ही लोगों को शांत रहने की अपील कर रही है, लेकिन जनता के बीच में डर बना हुआ है। आज भी पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से एलपीजी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि फिलहाल देश में संतोषजनक मात्रा में एलपीजी मौजूद है। किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के यहां कोई कमी सामने नहीं आई है। इसके अलावा देश में क्रूड ऑयल के भी पर्याप्त भंडार मौजूद हैं। साथ ही पेट्रोल पंपों, घरेलू पीएनजी और गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की सप्लाई भी लगातार जारी है। देश की जनता से शांति की अपील करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इस संकट के बीच सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को विस्तार बताया। उन्होंने कहा, "कच्चे तेल की स्थिति और रिफाइनरी संचालन सामान्य है। पेट्रोल पंपों पर भी कहीं भी सूखा (ड्राई-आउट) नहीं देखा गया है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की भी पर्याप्त सप्लाई बनी हुई है।" उन्होंने कहा, "हम पिछले कुछ दिनों से व्यापारिक एलपीजी उभोक्ताओं से अपील कर रहे हैं कि जहां तक संभव हो, एलपीजी से सीएनजी की ओर शिफ्ट करें, सरकार इस दिशा में कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है।" पीएनजी पर शिफ्ट हो रहे उपभोक्ता: सरकार एलपीजी संकट के बीच में सरकार ने पीएनजी की ओर उपोभोक्ताओं को शिफ्ट करने के काम में तेजी लाई है। इस प्रक्रिया को आसान भी बनाया गया है। सुजाता शर्मा ने बताया, "भारत सरकार ने सभी राज्य सरकारों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त वाणिज्यिक पीएनजी देने का वादा किया है, यह प्रक्रिया पीएनजी नेटवर्क को मजबूत और विस्तार देने में मदद करेगी। हमारे इन संयुक्त प्रयासों से पिछले दो हफ्तों में लगभग 1,25,000 नए घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक कनेक्शन जारी किए गए हैं। पिछले तीन दिनों में 5,600 से अधिक एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी में भी शिफ्ट हुए हैं।" पश्चिम एशिया में जारी युद्ध चिंता का विषय: सरकार मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया में तेल रिफाइनरियों और क्रूड ऑयल भंडारों पर होते हमलों को लेकर भी अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि, कहीं भी कोई कमी नहीं है। ऑनलाइन बुकिंग भी बढ़कर 94 फीसदी हो गई है। इसके अलावा 83 फीसदी रिफिल डिलीवरी ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेट’ कोड के माध्यम से की जा रही है। घबराहट में की जाने वाली बुकिंग (पैनिक बुकिंग) में कमी आ रही है। लगभग 17 राज्य सरकारों ने वाणिज्यिक एलपीजी के लिए आवंटन आदेश जारी किए हैं। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति आवंटित की जा चुकी है।" पेट्रोलियम मंत्रालय के अलावा एमईए ने भी इस संकट को लेकर अपना पक्ष रखा। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से केवल भारत ही नहीं लगभग सभी देशों में ऊर्जा का संकट है। उन्होंने बताया कि कतर, से भारत की लभगभ 40 फीसदी से ज्यादा एलपीजी आती है, ऐसे में जब उनकी रिफाइनरियों पर हमला होता है और होर्मुज बंद रहता है, तो भारत में भी इसका असर देखने को मिलता है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार लगातार इसका विकल्प खोजने का प्रयास कर रही है।  

अमेरिका का बड़ा कदम: मिडल ईस्ट में 2500 नौसैनिक और युद्धपोत भेजने का आदेश

दुबई अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में 2,500 मरीन (नौसैनिक) और एक बख्तरबंद नौसैनिक युद्धपोत भेजने का आदेश दिया है. ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद इस इलाके में अमेरिकी सेना की यह बड़ी तैनाती है। इस घोषणा के कुछ घंटों बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी फोर्स ने ईरान के खार्ग द्वीप पर सैन्य ढांचे को 'खत्म' कर दिया है और चेतावनी दी कि अगला निशाना द्वीप का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकता है. खार्ग द्वीप तेल सप्लाई का मुख्य टर्मिनल है जो ईरान के तेल एक्सपोर्ट को हैंडल करता है. एक दिन पहले, ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के हमले से बदले की कार्रवाई का एक नया स्तर शुरू होगा। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि युद्ध तब खत्म होगा "जब मैं इसे अपनी हड्डियों में महसूस करूंगा." वह विरोधियों द्वारा इस्लामिक सरकार को गिराने की संभावना को लेकर भी अधिक सावधान थे। ट्रंप ने ईरान के अर्धसैनिक बल बसीज का हवाला देते हुए कहा, "इसलिए मुझे सचमुच लगता है कि जिन लोगों के पास हथियार नहीं हैं, उनके लिए यह एक बड़ी बाधा है." बसीज बल ने हाल के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। मरीन और युद्धपोत अमेरिकी सेना में शामिल होंगे अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और एम्फीबियस असॉल्ट शिप USS त्रिपोली को मिडिल ईस्ट जाने का ऑर्डर दिया गया है. उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर संवेदनशील सैन्य योजनाएं पर बात करने के लिए एसोसिएटेड प्रेस से बात की। मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स जल-थलीय लैंडिंग कर सकती हैं, लेकिन वे दूतावास की सुरक्षा बढ़ाने, आम लोगों को निकालने और आपदा राहत में भी विशेषज्ञता प्राप्त करती हैं. बड़ी सैन्य तैनाती का मतलब यह नहीं है कि कोई ग्राउंड ऑपरेशन जल्द ही होने वाला है या होगा. नए मरीन की तैनाती के बारे में सबसे पहले द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया था। अमेरिकी सेना द्वारा जारी तस्वीर के मुताबिक, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट, साथ ही यूएसएस त्रिपोली और मरीन को ले जाने वाले दूसरे एम्फीबियस असॉल्ट शिप जापान में हैं और कई दिनों से पैसिफिक ओशन में हैं. त्रिपोली को कमर्शियल सैटेलाइट ने ताइवान के पास अकेले चलते हुए देखा, इसे ईरान के जलक्षेत्र तक पहुंचने में एक हफ्ते से ज्यादा समय लग सकता है। इस हफ्ते की शुरुआत में, अमेरिकी नेवी के 12 जहाज थे, जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और आठ डिस्ट्रॉयर शामिल थे, जो अरब सागर में काम कर रहे थे. अगर त्रिपोली इस बेड़े में शामिल हो जाता है, तो यह इस इलाके में लिंकन के बाद दूसरा सबसे बड़ा जहाज होगा। हालांकि मिडिल ईस्ट में जमीन पर मौजूद यूएस सर्विस मेंबर्स की कुल संख्या साफ नहीं है, लेकिन कतर में स्थित अल-उदीद एयर बेस, जो इस इलाके के सबसे बड़े एयर बेस में से एक है, में आम तौर पर लगभग 8,000 अमेरिकी सैनिक रहते हैं।

ईरान का कड़ा संदेश: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज़ों को गुजरने के लिए नौसेना से बात करना आवश्यक

नई दिल्‍ली होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाज लेकर जाने के लिए भारत लगातार ईरान से बातचीत कर रहा है. इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान सामने आया है, जिसका कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए जहाज़ों को ईरान की नौसेना के साथ तालमेल बिठाना होगा। नौसेना के साथ बातचीत करने के बाद ही आप तेल-गैस जहाजों से लेकर जा सकते हैं. इस बयान से साफ है कि ईरान की नौसेना 'होर्मुज स्‍ट्रेट' पर नजर बनाए हुए है और उसका पूरा कंट्रोल है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को मेहर समाचार एजेंसी द्वारा जारी एक बयान में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए जहाज़ों को ईरान की नौसेना के साथ बातचीत करनी होगी। ऐसे में ईरान का यह संकेत साफ है कि वह इजरायल और अमेरिका सर्पोटिव जहाजों को छोड़कर बाकी देशों की जहाजों को 'स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने की अनुमति दे सकता है, लेकिन हमला करने वाले देशों को अनुमति नहीं देगा. यही बात ईरान के उप विदेश मंत्री ने भी स्‍पष्‍ट किया है। हमला करने वालों को अनुमति नहीं एएफपी के अनुसार, ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ देशों ने जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन के बारे में हमसे बातचीत की है और हमने उनके साथ सहयोग किया है. जहां तक ​​ईरान का सवाल है, हमारा मानना ​​है कि जिन देशों ने आक्रमण में साथ दिया, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन का लाभ नहीं मिलना चाहिए। होर्मुज स्‍ट्रेट को बंद रखेगा ईरान वहीं इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पिता की हत्या के बाद पहली बार बयान दिया और अपने एक चुनौती भरे बयान में कहा कि ईरान अपनी लड़ाई जारी रखेगा और अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ एक दबाव के तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखेगा। खामेनेई का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका बार-बार यह दावा कर रहा है कि ईरान के पास अब कुछ भी नहीं बचा है. ट्रंप का दावा है कि वह जब चाहें, तब युद्ध को समाप्‍त कर सकते हैं. वहीं अमेरिका अभी भी जहाजों को उस रास्‍ते से ले जाने को लेकर कतरा रहा है। 100 डॉलर के पार कच्‍चा तेल  मिडिल ईस्‍ट से तेल की सप्‍लाई बाधित होने के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है. वहीं डब्‍ल्‍यूटीआई कच्‍चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. एलएनजी के दाम में भी तेजी देखी जा रही है. वहीं ईरान का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों को वह 200 डॉलर प्रति बैरल तक लेकर जाएगा और अभी युद्ध खत्‍म नहीं करेगा।

12 दिन में संघर्ष तेज, ईरान ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला कर दिखाया कॉन्फिडेंस, हॉर्मुज पर कब्ज़ा

तेहरान ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया. रात भर पूरे पश्चिम एशिया में हवाई हमले के सायरन, मिसाइल लॉन्च और नए हमलों की खबरें सामने आईं. इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले जारी रखे, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया. हालांकि अब इन हमलों से ज्यादा बड़ा मुद्दा स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जिसने बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है।  ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है. इसमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के मध्य हिस्सों को निशाना बनाया गया. वहीं इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई ठिकानों पर एक और बड़ा हमला किया है. उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ईरान के लोगों को सीधा संदेश यह आपके लिए जीवन में एक बार मिलने वाला ऐसा अवसर है जिससे आप अयातुल्लाहशासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं. अयातुल्ला अब इस दुनिया में नहीं हैं और मैं जानता हूं कि आप नहीं चाहते कि उनकी जगह कोई दूसरा तानाशाह आ जाए।  स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज पर बढ़ा तनाव, बड़ी मुसीबत अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया, जिनमें बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाज भी शामिल थे. हॉर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसके बलों ने इस अहम तेल मार्ग के पास इन जहाजों को निशाना बनाया।  1300 से ज्यादा की हो चुकी है मौत संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका और इजराइल के हमलों में 1300 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है. रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के हो सकते हैं. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बताया कि ईरान के हमलों में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है।  बढ़ रहा है संघर्ष का दायरा     इस युद्ध का असर पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई दे रहा है. लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए, जो ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को हुए हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई. वहीं हिज्बुल्लाह ने उसी दिन इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया।      खाड़ी देशों में भी हवाई सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए. बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं. कतर ने सात मिसाइल हमलों की पुष्टि की जबकि कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में पांच ड्रोन घुसने की जानकारी दी।      सऊदी अरब ने चार ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया. वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1,475 ड्रोन और 260 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. इससे साफ है कि यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।  इजरायल ने रात में किया हमला, ईरान ने सुबह-सुबह दिया धुआंधार जवाब मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच इजरायल ने तेहरान में हमलों की दूसरी लहर शुरू की. इजरायली सेना ने बताया कि उसने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हवाई हमले किए. बुधवार सुबह ईरान की ओर से ने कहा कि तेहरान के एक रिहायशी इलाके को निशाना बनाया गया. वहीं लेबनान में इजरायली हमले के दौरान रेड क्रॉस की एक एम्बुलेंस पर हमला हुआ, जिसमें एक पैरामेडिक की मौत हो गई. दूसरी ओर ईरान की सेना ने दावा किया कि उसने युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे तेज और भारी ऑपरेशन शुरू किया है. सरकारी मीडिया के अनुसार इस हमले में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरान की 175 बच्चियों का हत्यारा कौन? ट्रंप की सेक्रेटरी ने क्या कहा व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एक स्कूल पर हमले के मामले में क्यों कहा कि ईरान के पास टॉमहॉक मिसाइल हो सकती है, जबकि ये मिसाइलें केवल अमेरिका और उसके तीन सहयोगी देशों के पास हैं. इस पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जवाब दिया कि राष्ट्रपति को अमेरिकी जनता के सामने अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है और इस पर जांच चल रही है. ईरान ने दागीं सऊदी अरब पर बैलिस्टिक मिसाइलें, 7 को मार गिराया गया ईरान के साथ चल रहे युद्ध के 12वें दिन सऊदी अरब ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश की ओर दागी गई सात बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये मिसाइलें देश के विभिन्न इलाकों की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया. मंत्रालय ने बताया कि सऊदी सेना लगातार हाई अलर्ट पर है और किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार है. हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं.  ईरान ने इजरायल में मचाई है भारी तबाही, दिखा नहीं रहे नेतन्याहू: अरागची ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे दुनिया से सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. अरागची ने दावा किया कि ईरान की शक्तिशाली सेना इजरायल के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, जिसे नेतन्याहू नहीं चाहते कि लोग देखें. उन्होंने दावा किया कि जमीन पर … Read more

100 घंटे की जंग में अरबों स्वाहा: ईरान से भिड़ंत में US को 31 हजार करोड़ का झटका

वाशिंगटन ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले का आज (शुक्रवार, 6 मार्च को) सातवां दिन है। शुक्रवार को अमेरिका ने स्टेल्थ बॉम्बर और एडवांस्ड वेपन सिस्टम से ईरान पर हमला बोला है। बदले में ईरान भी इजरायल पर और मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बना रहा है। इस बीच, अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने युद्ध के लागत पर एक विश्लेषण में कहा है कि ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के तहत पहले 100 घंटों में ही अमेरिका को लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 31,000 करोड़ रुपये) का खर्च उठाना पड़ा है। यह आकलन वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक CSIS के विशेषज्ञों मार्क कैंसियन और क्रिस पार्क द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में अमेरिका का औसत खर्च लगभग 891 मिलियन डॉलर प्रतिदिन यानी करीब 90 करोड़ डॉलर रोज रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में सबसे अधिक खर्च महंगे हथियारों, मिसाइलों और बमों के इस्तेमाल पर हुआ है, इसलिए शुरुआती दिनों में लागत सबसे ज्यादा है। हथियारों पर खर्च थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.7 अरब डॉलर पेट्रियट जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर सिस्टम पर खर्च किए गए हैं, जबकि 1.5 अरब डॉलर मिसाइलों और अन्य आक्रामक हथियारों पर किए गए हैं। इसके अलावा 125 मिलियन डॉलर लड़ाकू विमानों और हवाई अभियानों के परिचालन पर खर्च किए गए हैं। CSIS के मुताबिक कुल खर्च में से केवल लगभग 200 मिलियन डॉलर ही पहले से अमेरिकी रक्षा बजट में शामिल था, जबकि करीब 3.5 अरब डॉलर का खर्च अतिरिक्त है, जिसके लिए अलग से फंड की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी United States Department of Defense (पेंटागन) को जल्द ही युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त बजट की मांग करनी पड़ सकती है। 2000 से ज्यादा हथियारों का इस्तेमाल रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि युद्ध के पहले 100 घंटों में अमेरिका ने 2,000 से अधिक प्रकार के हथियार और मिसाइलें इस्तेमाल कीं हैं। इन हथियारों के स्टॉक को दोबारा भरने में ही लगभग 3.1 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा चला तो यह खर्च और तेजी से बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यदि युद्ध जारी रहता है तो अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सरकार को कांग्रेस से अतिरिक्त बजट की मंजूरी लेनी पड़ सकती है लेकिन अमेरिका में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और युद्ध के कारण बढ़ती तेल कीमतों के चलते यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का कारण भी बन सकता है। मानवीय नुकसान भी भारी थिंक टैंक ने अपने आकलन में कहा है कि युद्ध का मानवीय नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में अमेरिकी और इजरायली हमलों में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। साथ ही क्षेत्र के अन्य देशों में भी हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण कई लोगों की जान गई है। खर्च के अलावा, कुवैत में 'फ्रेंडली फायर' की घटना में तीन F-15 लड़ाकू विमानों के नष्ट होने जैसी खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान अभी कई हफ्तों तक जारी रह सकता है। ऐसे में इसका आर्थिक और राजनीतिक असर अमेरिका सहित पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।