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रायपुर ATS की बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ में ISIS नेटवर्क पर शिकंजा, FIR दर्ज

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक बड़ा आतंकी नेटवर्क तैयार करने की कोशिश को एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने समय रहते विफल कर दिया है। रायपुर एटीएस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान स्थित इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) मॉड्यूल इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय किशोरों को अपने नेटवर्क में जोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस मामले में एटीएस ने सोमवार देर रात गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत पहली एफआईआर दर्ज की है। इसकी स्थापना के बाद से पहली बड़ी कार्रवाई है। सूत्रों के अनुसार, एटीएस ने दो नाबालिग लड़कों की पहचान की है, जिनकी उम्र 16 और 17 वर्ष बताई जा रही है। इनमें से एक रायपुर का रहने वाला है और दूसरा भिलाई का। खुफिया एजेंसियां इन दोनों पर पिछले डेढ़ साल से नजर रख रही थीं। जांच के दौरान इनके मोबाइल फोनों से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले कई संदेश और वीडियो सामग्री मिली है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि विदेशी हैंडलर्स इन युवाओं को आतंकी विचारधारा की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए गुमराह कर रहा था ISIS मॉड्यूल जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पाकिस्तानी हैंडलर फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट्स का इस्तेमाल कर भारतीय नाबालिगों से संपर्क साध रहे थे। एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक, ये हैंडलर्स पहले किशोरों से दोस्ती करते, फिर धीरे-धीरे उन्हें कट्टरपंथी सामग्री भेजकर उनकी मानसिकता को प्रभावित करते थे। ग्रुप चैट्स के जरिए उन्हें जिहादी वीडियो, कथित धार्मिक संदेश और ISIS से जुड़ी गलत सूचनाएं भेजी जाती थीं। हैंडलर्स का उद्देश्य नाबालिगों को इस कदर ब्रेनवॉश करना था कि वे स्थानीय स्तर पर ISIS की जड़ें फैलाने में मदद कर सकें। इसके तहत उन्हें "अंदरूनी सूचनाएं जुटाने", "स्थानीय समर्थन आधार बनाने" और "छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल खड़ा करने" के लिए प्रेरित किया जा रहा था। एजेंसियों को मिला संदिग्ध डिजिटल सबूत एटीएस और खुफिया एजेंसियों की जांच में यह भी पाया गया कि दोनों नाबालिगों के मोबाइल में ऐसे कई चैट, नोट्स और वीडियो मौजूद हैं जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। एजेंसियों को संदेह है कि इन युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से "लोन वुल्फ" हमलों और स्थानीय स्तर पर अस्थिरता पैदा करने के तरीकों पर भी प्रभावित किया जा रहा था। एटीएस अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान स्थित ISIS नेटवर्क का यह मॉड्यूल भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए किशोरों और युवाओं को सबसे आसान निशाना मानकर उन पर फोकस कर रहा था। स्थापना के बाद ATS की पहली FIR छत्तीसगढ़ एटीएस की स्थापना वर्ष 2017 में की गई थी। हालांकि विशेष मामलों में आमतौर पर स्थानीय पुलिस स्टेशन के माध्यम से UAPA लागू किया जाता था, लेकिन इस बार एटीएस ने स्वयं UAPA की पहली FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई आतंकवाद-रोधी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  एटीएस अधिकारियों के अनुसार, राज्य में ऐसे अन्य संभावित संपर्कों की तलाश की जा रही है जो विदेशी आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की जांच और सख्ती बढ़ाई जाएगी। राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती छत्तीसगढ़ में आतंकवादी संगठनों की ऑनलाइन घुसपैठ सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथ फैलाने की यह नई रणनीति युवा वर्ग को तेजी से प्रभावित कर रही है, जिसे रोकने के लिए एटीएस और साइबर सेल मिलकर रणनीतिक कदम उठा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य की एजेंसियां अधिक सतर्क हो गई हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठनों की घुसपैठ रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल की यह साजिश बेनकाब होना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

ATS की बड़ी रेड: लखीमपुर में आरोपी सुहैल खान के घर से ISIS फ्लैग बरामद

लखीमपुर खीरी गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने गुजरात ISIS मॉड्यूल मामले में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में छापेमारी की है. यूपी पुलिस के साथ की गई इस कार्रवाई में लखीमपुर निवासी आतंकी मोहम्मद सुहैल खान के घर से ISIS का फ्लैग बरामद किया गया है. गुजरात ATS की तहकीकात में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश के रहने वाले दोनों गिरफ्तार आतंकी मोहम्मद सुहैल खान और आजाद सुलेमान शेख हाल ही में कश्मीर भी गए थे. दोनों आतंकी   हथियार और केमिकल की डिलीवरी का रूट देखने के लिए गए थे.  बता दें कि गुजरात ATS ने सेंट्रल एजेंसियों के साथ मिलकर 9 नवंबर को ISIS से जुड़े तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एक MBBS डॉक्टर भी शामिल था. ये तीनों आतंकी खतरनाक जहर का इस्तेमाल करके आतंकी हमले की प्लानिंग में जुटे थे. इन्हीं आतंकियों ने लखनऊ स्थित RSS दफ्तर, दिल्ली की आजादपुर मंडी और अहमदाबाद में हमले के लिए रेकी भी की थी.  गिरफ्तार सुहेल के पिता ने कहा, 'किसी याराना-दोस्ताना या कैसे भी उसको फंसाया गया है.'' ये गिरफ्तारियां तब हुईं जब ये संदिग्ध हथियार लेने-देने के लिए इकट्ठा हुए थे. इनके पास से पाकिस्तान से भेजी गईं पिस्टल और कारतूस बरामद हुए हैं.  ATS के मुताबिक, ये संदिग्ध दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे और इसके लिए इन्होंने कुछ जगहों की रेकी भी की थी. गिरफ्तार किए गए युवकों में एक लखीमपुर, दूसरा शामली का रहने वाला है, जबकि तीसरा हैदराबाद का है. फिलहाल गुजरात एटीएस और यूपी एटीएस समेत कई एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं.

आतंकवादी नेटवर्क का खुलासा: भोपाल से गिरफ्तार शख्स ISIS सोशल मीडिया हैंडलर, जमानत के बाद समान विचारधारा वाले युवकों की भर्ती शुरू

भोपाल  भोपाल से गिरफ्तार आतंकी अदनान ISIS का सोशल मीडिया हैंडलर निकला। इससे पहले भी वह एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। जमानत मिलने के बाद से युवकों ​को खुद से जोड़ने का काम कर रहा था।वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियो सर्वे का ऑर्डर देने वाले जज को धमकी देने वाली पोस्ट (काफिरों का खून आपके लिए हलाल है…) भोपाल से गिरफ्तार आतंकी सैयद अदनान ने इंस्टाग्राम में की थी। जज की फोटो पर काफिर लिखा और उन्हें मारने के लिए उकसाया। इस मामले में लखनऊ के गोमती नगर थाने में केस दर्ज हुआ था। यूपी पुलिस ने इसके खिलाफ UAPA भी लगाया था। 12वीं के बाद ही जिहादी पेज और चैनलों को फॉलो किया अदनान को 4 जून 2024 को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। यूपी पुलिस ने उसे 10 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। इसके बाद 26 सितंबर 2024 को उसे जमानत मिल गई थी। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि जमानत मिलने के बाद वह चरमपंथी सामग्री पोस्ट करने और समान विचारधारा वाले युवकों को भर्ती करने की गतिविधियों में तेजी ले आया। इससे पहले वह 12वीं के बाद ही जिहादी पेज और चैनलों को फॉलो करने लगा था। इसी दौरान ISIS की विचारधारा से प्रभावित हो गया। जेहादी वीडियो इंटरनेट से जुटाने का काम करता था सीए का स्टूडेंट सैयद अदनान ISIS के लिए सोशल मीडिया हैंडलर के तौर पर काम करता था। वे आईएसआईएस से जुड़ी जेहादी वीडियो इंटरनेट से जुटाने का काम करता था। इन वीडियोज में मजहब के नाम पर मर मिटने जैसी तकरीरें होती थीं। इन्हें तोड़-मरोड़कर हदीसों से जोड़ा जाता था। इन वीडियो को तोड़ने-मरोड़ने और फर्जी तरीके से एडिट करने का काम दिल्ली का अदनान करता था। दोनों ही सिग्नल ऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सीरियाई ISIS कमांडर के संपर्क में रहते थे। वहां से मिले निर्देश के अनुसार वीडियोज को अलग-अलग सोशल मीडिया ग्रुप्स पर शेयर करने का काम किया जाता था। फर्जी पहचान से बनाए गए यूट्यूब चैनल्स पर भी इन वीडियोज को प्रचारित और प्रसारित किया जाता था। ISIS मॉड्यूल से जुड़े दोनों अदनान सोशल मीडिया पर 'सात-उल-उम्माह' और 'वॉयस ऑफ इंडिया' नाम के ग्रुप्स से जुड़े थे। इन ग्रुप्स में एक हजार से ज्यादा सीरिया स्थित अबू मेंबर्स थे। उत्तर प्रदेश का रहने वाला है दूसरा अदनान     मोहम्मद अदनान खान मूल रूप से यूपी के एटा जिले से है। एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखता है।     पिता सलीम खान दूरदर्शन में ड्राइवर का जॉब करते हैं और मां अंजुम खान होम मेकर हैं।     तीन बड़ी बहनें है, जिनकी शादी हो चुकी है। एटा में 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की। पिता का 2020 में ट्रांसफर हुआ तो फैमिली दिल्ली आ गई।     अदनान ने दिल्ली में पढ़ाई फिर शुरू करने की कोशिश की, जो विफल रहा। इस साल में डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा पूरा किया। ISIS खलीफा के प्रति निष्ठा की शपथ ली, वीडियो बनाया था भोपाल का अदनान सात महीने पहले ही दिल्ली के अदनान के टच में आया था। दिल्ली के मोहम्मद अदनान ने पुलिस को बताया कि 2023 में सादिक नगर में सरकारी फ्लैट्स में आने के बाद उसने इंस्टाग्राम पर कट्टरपंथी पेजों को फॉलो करना शुरू किया। एक ग्रुप में शामिल हो गया। शुरुआत में इस ग्रुप में 25-30 मेंबर थे। सीरिया स्थित हैंडलर अबू इब्राहिम अल कुरैशी ने आईएसआईएस से संबंधित वीडियो-फोटो और पीडीएफ उपलब्ध कराए थे। इन सामग्रियों और संपर्कों से प्रभावित होकर उसने आईएसआईएस खलीफा के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी, जिसका विडियो भी बनाया था। भोपाल वाला अदनान मिडिल क्लास फैमिली से है     मध्य प्रदेश के भोपाल के करोंद का रहने वाला अदनान खान मिडिल क्लास फैमिली से है, जिसके पिता सलाम अलग-अलग प्राइवेट फर्म में अकाउंटेंट का काम करते हैं।     मां पार्ट टाइम एक्ट्रेस है। वह 12वीं तक भोपाल में पढ़ा। फिलहाल भोपाल ईदगाह में एक व्यक्ति के मार्गदर्शन में चार्टर्ड अकाउंटेंट की तैयारी कर रहा है।     यह छह से 10 साल की उम्र तक मदरसे में पढ़ा है। इसके बाद इसका झुकाव कट्टरपंथ की तरफ बढ़ता चला गया, जिसमें 12वीं के बाद इजाफा होता चला गया। कमरे से धार्मिक कट्टरपंथ से जुड़ी किताबें भी मिली थीं अदनान को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 18 अक्टूबर की सुबह चार बजे उसके घर से गिरफ्तार किया था। उसके कमरे से धार्मिक कट्टरपंथ से जुड़ी किताबें भी मिली थीं। पुलिस उसका एक लैपटॉप भी ले गई है, अदनान ने इंस्टाग्राम पर खिलजी नाम से एक फेक आईडी भी बना रखी थी। पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीयता के साथ अंजाम दिया गया। जिसकी भनक स्थानीय पुलिस से लेकर कॉलोनी में रहने वाले अदनान के पड़ोसियों तक को नहीं लगी। 4 साल पहले भी पकड़े गए थे 4 आतंकी इससे पहले भोपाल में चार साल पहले ATS ने जमात के 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये सभी बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-ए-मुजाहिदीन (बांग्लादेश) के सदस्य थे। यहां रहकर आतंकी गतिविधियों के लिए स्लीपर सेल तैयार कर रहे थे। ताकि भविष्य में आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया जा सके। इनमें से दो आतंकी ऐशबाग इलाके की फातिमा मस्जिद के पास किराए से रह रहे थे। इनकी निशानदेही पर करोंद इलाके की खातिजा मस्जिद के करीब एक घर में रह रहे 2 और आतंकियों को पकड़ा गया था।

तालिबान ने कहा — इस्लामिक स्टेट को NATO-अमेरिका ने पनपाया, हमने जड़ से मिटाया

तालिबान अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने दावा किया कि आतंकी संगठन ISIS को अफगान जमीन से पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद इस्लामिक अमीरात ने पूरे देश में सुरक्षा और नियंत्रण स्थापित कर लिया है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में सोमवार को मुत्तकी ने कहा, 'जब अमेरिका और नाटो की मौजूदगी थी, तब विभिन्न प्रांतों में आईएसआईएस के बड़े केंद्र थे। उस समय भी हमें संघर्षों का सामना करना पड़ा। लेकिन इस्लामिक अमीरात ने पूरे देश पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद मजबूत अभियान चलाया। शुक्र है कि अब अफगानिस्तान की एक इंच जमीन पर भी ISIS या कोई अन्य समूह सक्रिय नहीं है।' आमिर खान मुत्तकी ने भारतीय उद्योग जगत को आश्वासन दिया कि तालिबान शासित देश में शांति स्थापित हो गई है। भारत के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि वीजा एक गंभीर समस्या बनी हुई है और दोनों पक्षों के व्यापारियों की सुगम आवाजाही के लिए इस मुद्दे का तुरंत समाधान करने जरूरत है। फिक्की ने अफगान मंत्री के हवाले से बयान में कहा, ‘अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने भारतीय उद्योग जगत को आश्वासन दिया कि आवश्यक शांति स्थापित हो गई है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की गई हैं।’ उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार पहले ही एक अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। अमृतसर और काबुल-कंधार के बीच जल्द सीधी उड़ानें अफगान विदेश मंत्री मुत्तकी ने कहा कि अमृतसर और काबुल व कंधार के बीच जल्द ही सीधी उड़ानें शुरू होंगी। उन्होंने इसे व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताया। राज्यसभा सांसद और वाणिज्य पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि नई उड़ानें भारत और अफगानिस्तान के बीच तेज और सुरक्षित हवाई पुल बनाएंगी। वहीं, आमिर खान मुत्तकी ने कहा कि भारत को चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंध हटाने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत करनी चाहिए। वह रणनीतिक रूप से स्थित चाबहार बंदरगाह के अधिकतम इस्तेमाल के पक्ष में हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ अपनी बैठकों में प्रतिबंध हटाने का मुद्दा भी उठाया है।

ISIS से जुड़ा नेटवर्क ध्वस्त, स्पेशल सेल ने राजगढ़ से पांच संदिग्ध आतंकवादी दबोचे

राजगढ़  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बुधवार को मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा से ISIS से जुड़े आतंकवादी कामरान कुरैशी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी कई राज्यों में एक साथ की गई कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें कुल पांच आतंकवादियों को पकड़ा गया है। पुलिस के अनुसार, ये सभी पाकिस्तान आधारित पैन टेरर मॉड्यूल से जुड़े हुए हैं। गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों में दो लोग दिल्ली से, एक झारखंड, एक मध्यप्रदेश और एक तेलंगाना से हैं। उनके पास से हाइड्रोक्लोरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, सल्फर पाउडर, कॉपर शीट, बॉल बेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है। यह सामग्री संभावित रूप से किसी बड़े हमले की तैयारी में उपयोग की जा सकती थी। कामरान कुरैशी की गिरफ्तारी का विवरण कामरान कुरैशी, जो ब्यावरा का निवासी है, के खिलाफ अवैध हथियारों की खरीदारी का आरोप है। पुलिस ने बताया कि उसने इस साल कुछ अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अवैध देशी कट्टे और अन्य हथियार खरीदे थे। इन हथियारों का उपयोग किसी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था। दिल्ली पुलिस ने कामरान की गिरफ्तारी के लिए ब्यावरा में सुबह 5:30 बजे दबिश दी। पुलिस की विशेष टीम ने सिविल ड्रेस में तीन गाड़ियों से पहुंचकर उसे उसके घर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए युवक के पिता का मोबाइल भी जब्त किया गया है। पुलिस कार्रवाई की जानकारी ब्यावरा के टीआई वीरेंद्र धाकड़ ने बताया कि कामरान कुरैशी को सहायक के रूप में आरोपित किया गया है। दिल्ली में अन्य आरोपियों ने अवैध हथियारों की खरीदारी की थी, जिसमें वह शामिल था। इस गिरफ्तारी से पुलिस को आतंकवादी गतिविधियों की योजना को नाकाम करने में मदद मिली है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से अन्य संभावित आतंकवादी गतिविधियों को रोकने में मदद मिलेगी। आतंकवादियों के नेटवर्क का खुलासा गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों का नेटवर्क पाकिस्तान से संचालित होता है, जो भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने का प्रयास कर रहा था। पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क अवैध हथियारों की खरीदारी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलग्न था। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद के खिलाफ कितनी सक्रिय हैं। पुलिस ने यह भी कहा है कि वे आगे की जांच जारी रखेंगे और इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने का प्रयास करेंगे।

ISIS नेटवर्क पर NIA का शिकंजा, पुणे स्लीपर मॉड्यूल केस में 11 गिरफ्तार

 पुणे  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने  एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिस पर आतंकवादी संगठन 'इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया' (ISIS) की गतिविधियों को बढ़ावा देने में संलिप्त होने का आरोप है. उसका नाम रिजवान अली उर्फ ​​अबू सलमा उर्फ ​​मोला है और वह ISIS पुणे स्लीपर मॉड्यूल केस में 11वां वांटेड आरोपी और प्रमुख साजिशकर्ता है. उसे लखनऊ से गिरफ्तार किया गया.  एनआईए ने एक बयान में कहा कि ISIS, जिसे विभिन्न अन्य नामों से भी जाना जाता है, उसकी भारत विरोधी साजिश के हिस्से के रूप में रिजवान अली ने विभिन्न स्थानों की रेकी करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिनका इस्तेमाल आतंकवादी ठिकानों के रूप में किया जा सकता था. एनआईए के मुताबिक वह बंदूक चलाने और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IEDs) बनाने की ट्रेनिंग देने में भी शामिल था.  उसकी गिरफ्तारी के लिए सूचना देने पर 3 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था. बयान में कहा गया है कि रिजवान अली के खिलाफ एक स्थायी गैर-जमानती वारंट (NBW) भी जारी किया गया था, जो कथित तौर पर विदेशी आतंकवादी संगठन की आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से शामिल था. जांच एजेंसी ने कहा कि पहले से गिरफ्तार और न्यायिक हिरासत में बंद 10 अन्य आरोपियों के साथ अली ने देश को अस्थिर करने और सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने के लिए कई आतंकवादी वारदातों की साजिश रची थी.  रिजवान अली के अलावा, गिरफ्तार किए गए अन्य स्लीपर-सेल सदस्यों की पहचान मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद यूनुस साकी, अब्दुल कादिर पठान, सिमाब नसीरुद्दीन काजी, जुल्फिकार अली बड़ौदावाला, शमिल नाचन, आकिफ नाचन, शाहनवाज आलम, अब्दुल्ला फैयाज शेख और तलहा खान के रूप में की गई है. सभी आरोपियों के खिलाफ एनआईए ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, (UAPA) विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है.  बयान में कहा गया है कि एनआईए भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़कर हिंसा और आतंक के माध्यम से देश में इस्लामी शासन स्थापित करने की आईएसआईएस/आईएस की साजिश को विफल करने के अपने प्रयासों के तहत मामले में अपनी जांच जारी रखे हुए है. पुणे आईएसआईएस हथियार और विस्फोटक जब्ती मामले में गिरफ्तार रिजवान अली को यहां की एक अदालत ने शुक्रवार को 18 जुलाई तक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हिरासत में भेज दिया.