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जगदलपुर : केंद्रीय जेल के बंदियों को दी गई स्वरोजगार संबंधी जानकारी

जगदलपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर रजत महोत्सव के तहत विशेष कार्यक्रम के तौर पर जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र जगदलपुर द्वारा केन्द्रीय जेल जगदलपुर में सोमवार को बढ़ई, दर्जी, लोहारी, जूट बैग, मूर्तिकार, प्रिटिंग प्रेस का कार्य सीख रहे बंदियों को भविष्य में स्वरोजगार के क्षेत्र में स्वयं का कुछ व्यवसाय प्रारंभ करने हेतु विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। क्षेत्रीय व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के मुख्य महाप्रबंधक श्री अजीत सुंदर बिलुंग के द्वारा योजनाओं की जानकारी देने सहित भविष्य में आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर समाज के विकास में चलने बंदियों को प्रेरित किया गया। इस दौरान केन्द्रीय जेल के अधिकारी-कर्मचारियों सहित उद्योग विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

क्राइम कंट्रोल का नया तरीका: हरियाणा की जेलों में हाई-टेक सिस्टम से अपराधियों पर नजर

चंडीगढ़  अब अपराधियों की पहचान को और अधिक सटीक व आधुनिक बनाने के लिए हरियाणा की 20 जेलों में मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (एमसीयू) और फिंगर एनरोल्ड डिवाइस (एफईडी) लगाए जाएंगे। इससे अपराधियों की यूनिक पहचान तैयार होगी जिसमें उंगलियों के निशान, चेहरे की विशेषताएं, डीएनए नमूने और रेटिना स्कैन शामिल होंगे।  महानिदेशक कारागार आलोक कुमार राय ने बताया कि अपराधियों के पुराने परंपरागत पहचान के तरीकों से आगे बढ़ते हुए ये तकनीक अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखने, उनकी ट्रैकिंग और गतिविधियों का पता लगाने में मददगार साबित होगी। एमसीयू से जुटाए गए आंकड़े स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) के पास सुरक्षित रहेंगे और इन्हें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ भी साझा किया जाएगा। यह जानकारी 75 साल तक संग्रहित रखी जा सकेगी। आसानी से ट्रैक होंगे अपराधियों के नेटवर्क इन यूनिट्स से मिलने वाले अपराधियों के फिंगर प्रिंट्स और रेटिना स्कैन सीधे नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर प्रिंट्स इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) में अपलोड होंगे। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नैफिस) में देशभर के अपराधियों, बंदियों और संदिग्धों का डेटा दर्ज होता है, जिससे अपराधियों का नेटवर्क ट्रैक करना और आसान होगा।  पंचकूला सेक्टर-14 स्थित दफ्तर में महानिदेशक कारागार ने कहा कि ये पहल आपराधिक न्याय प्रणाली को और मजबूत करेगी। अपराधियों का विस्तृत यूनिक डेटा उपलब्ध होने से न केवल उनकी पहचान पुख्ता होगी बल्कि लंबे समय तक उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। यह कदम प्रदेश में अपराध पर अंकुश लगाने और कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।  

प्रदेश की जेलों से आई राहत की खबर, जन्माष्टमी पर 14 हजार पात्र बंदियों को मिली सजा में छूट

गंभीर अपराध के दोषी बंदियों की सजा यथावत रहेगी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जेल विभाग को प्रदेश की जेलों के पात्र दंडित बंदियों की सजा में लगभग 60 दिन की छूट देने के निर्देश दिए हैं। सजा में दी गई इस छूट से विभिन्न जेलों में बंद 21 हजार बंदियों में से लगभग 14 हजार बंदी लाभान्वित होंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की इस समय पूर्व रिहाई नीति में आतंकवादी गतिविधि, लैंगिक अपराध (पास्को, बलात्कार), मादक पदार्थ और दो से अधिक हत्या जैसे गंभीर अपराध के दोषी बंदी पात्र नहीं होते हैं, उनकी सजा यथावत रहेगी।  इसकी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि  श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इस वर्ष भी प्रदेश की जेलों के दंडित बंदियों को सजा में करीब 60 दिन की छूट हेतु जेल विभाग को निर्देश दिए हैं। आतंकवादी गतिविधि, लैंगिक अपराध, हत्या के गंभीर आरोपी इसमें शामिल नहीं हैं। इससे 21 हजार बंदियों में से लगभग 14 हजार लाभान्वित होंगे। सरकार का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व समाज में सद्भाव और मानवीय संवेदना का संदेश देते हैं। ऐसे में जन्माष्टमी जैसे अवसर पर कैदियों को सजा में छूट देकर सुधार की भावना को बल मिलेगा। बता दें कि इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी प्रदेश की जेलों से बड़ी संख्या में कैदियों की सजा माफ कर उन्हें रिहा किया गया। मध्य प्रदेश जेल मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भोपाल केंद्रीय जेल से 25, सतना से 17, उज्जैन से 14, नर्मदापुरम से 11, ग्वालियर से 16, जबलपुर से 14, रीवा से 19, सागर से 14, इंदौर केंद्रीय जेल से 10, नरसिंहपुर से 6 और बड़वानी से 3 बंदियों को रिहा किया गया। इसके अलावा, जिला जेल देवास से 1, टीकमगढ़ से 2, इंदौर से 2 तथा उप जेल पवई और बंडा से 1-1 बंदी को भी स्वतंत्रता दिवस पर रिहा किया गया था।    

अभियुक्त की मौत के बाद भी जारी रहा केस, सह-आरोपी पत्नी, बेटे और बहू को 3 साल कैद

जबलपुर   आय से अधिक संपत्ति मामले में प्रवर्तन निर्देशालय (ईडी) ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसे सुनकर भ्रष्टाचार करने वालों के होश उड़ जाएंगे. दरअसल, विशेष न्यायाधीश इरशाद अहमद ने अभियुक्त कर्मचारी की मौत के बावजूद प्रकरण में सह आरोपी पत्नी, बेटे व बहू को तीन-तीन साल के कारावास व दस-दस हजार रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है. विशेष न्यायालय ने माना कि आय से अधिक अर्जित संपत्ति का उपयोग सह आरोपियों के नाम सम्पत्ति खरीदने व निवेश में किया गया था. परिवार के लोगों को क्यों मिली सजा? अभियोजन के अनुसार जबलपुर में पदस्थ रहे कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट, सहायक लेखाधिकारी सूर्यकांत गौर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. ईडी ने साल 2011 में उनके खिलाफ कार्रवाई की थी. इस दौरान ईडी को उनके पास से आय से लगभग 90 लाख रु अधिक की संपत्ति मिली थी. आय से अधिक राशि का उपयोग पत्नी विनिता गौर, पुत्र शिशिर गौर व पुत्रवधू सुनीता गौर के नाम पर संपत्ति खरीदने व निवेश में किया गया था. ईडी ने प्रकरण में मुख्य आरोपी सहित परिवार के अन्य सदस्यों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था. सभी को माना गया भ्रष्टाचार का दोषी प्रवर्तन निर्देशालय ने सभी आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तु किया था. न्यायालय में प्रकरण के लंबित रहने के दौरान मुख्य आरोपी सूर्यकांत गौर की मृत्यु हो गई थी. विशेष न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर सह आरोपियों को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार देते हुए सजा से दंडित किया. स्पेशल कोर्ट ने यह भी कहा है कि जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर 6-6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजन अधिवक्ता विक्रम सिंह ने पैरवी की.

जुमे की नमाज अनिवार्य: मलेशिया में न पढ़ने वालों को होगी जेल

टेरेंगानु मलेशिया के टेरेंगानु राज्य में जुमे की नमाज न पढ़ने वाले मुस्लिम पुरुषों को दो साल तक की जेल हो सकती है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने शरिया कानून को सख्ती से लागू करने की चेतावनी दी है। बिना किसी उचित कारण के शुक्रवार की नमाज छोड़ने पर दो साल की कैद की सजा हो सकती है। जुमे की नमाज न पढ़ने पर सजा रिपोर्ट के मुताबिक, टेरेंगानु में पैन-मलेशियाई इस्लामिक पार्टी (पीएएस) की सरकार है। इसने घोषणा की कि पहली बार जुमे की नमाज न पढ़ने वाला व्यक्ति 3,000 रिंगिट (लगभग 710 अमेरिकी डॉलर) तक के जुर्माने, जेल की सजा, या दोनों का सामना कर सकता है। यह सजा तब लागू होगी, जब कोई बिना वैध कारण के नमाज में शामिल न हो। पहले तीन बार चूकने पर ही सजा राज्य की कार्यकारी परिषद के सदस्य मुहम्मद खलील अब्दुल हादी ने बेरिटा हरियन अखबार को बताया कि शुक्रवार की नमाज न केवल एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि मुसलमानों के लिए आज्ञाकारिता का प्रतीक भी है। पहले, केवल वे लोग जो लगातार तीन शुक्रवार को नमाज छोड़ते थे, उन्हें सजा दी जाती थी। मलेशियाई वकील अजीरा अजीज ने तर्क दिया कि यह कुरान के सिद्धांत 'धर्म में कोई ज़बरदस्ती नहीं' के खिलाफ है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जुमे की नमाज अनिवार्य है, लेकिन इसे अपराध बनाना जरूरी नहीं। जागरूकता कार्यक्रम ही पर्याप्त हैं। हम तालिबान बन जाएंगे एससीएमपी के अनुसार, अहमद अजहर ने कहा कि हमें सभी मलेशियाई लोगों की चिंताओं को आवाज़ देनी होगी, वरना हम तालिबान बन जाएंगे। कुछ लोगों का मानना है कि कानूनी दबाव सच्ची धार्मिकता को कमजोर करता है। एक आलोचक ने कहा कि धार्मिकता दिल से आनी चाहिए, डर से नहीं। वहीं, केनी टैन ने लिखा कि मुसलमानों को यह मामला संभालने दें। हमें अनावश्यक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। टेरेंगानु में कोई विपक्ष नहीं रिपोर्ट के अनुसार, टेरेंगानु की 12 लाख की आबादी में अधिकतर मलय मुस्लिम हैं। यह मलेशिया का एकमात्र राज्य है, जहां विधानसभा में कोई विपक्ष नहीं है। 2022 के चुनाव में पीएएस ने सभी 32 सीटें जीतीं। उल्लेखनीय है कि इस्लाम मलेशिया का आधिकारिक धर्म है, लेकिन देश का समाज धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित है।

तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें

महिला बंदियों ने सीखा संवाद, संवेदना और सपनों को संवारने का हुनर महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें भोपाल  कभी टूटी हुई उम्मीदों के सहारे जी रही केन्द्रीय जेल भोपाल की महिलाएं अब सपनों को नया आकार दे रही हैं। केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जब इन महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें गर्व से नम हो गई। यह कार्यशाला मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और तिनका-तिनका फाउंडेशन के सहयोग से “टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुधार और व्यक्तित्व विकास” विषय पर आयोजित की गई थी। कार्यशाला में महिला बंदियों ने न सिर्फ संवाद के गुर सीखे बल्कि आत्मविश्लेषण, सुधार और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने का संकल्प भी लिया। बहुत कुछ सीखा मैंने यहाँ 56 वर्षीय पुतलीबाई, जो कभी अनपढ़ थीं, आज अख़बार पढ़ती हैं, टीवी समाचार देखती हैं और चित्र बनाना जानती हैं। भावुक होकर उन्होंने कहा,“मेरा जीवन बहुत कठिन था। लेकिन यहां मैंने पढ़ना, चित्र बनाना और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानना सीखा है। परिवार में औरत की ज़िंदगी कहीं ज़्यादा कठिन होती है। यहां मुझे आज़ादी महसूस होती है।” “मैं फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं” कल्पना, जो किन्नर समुदाय से हैं, ने कहा “बाहर हमारे साथ भेदभाव होता है, यहां नहीं। यहां पढ़ाई की, कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। अब मैं बाहर जाकर फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं।”  “खेतों में मेहनत करूंगी, बच्चों को पालूंगी” सुनीता बाई ने अपने भीतर के पश्चाताप को शब्द दिए “मुझसे गलती हुई, उसका पछतावा है। यहां रहकर मैंने बागवानी सीखी है। अब बाहर जाकर खेती करूंगी और अपने बच्चों का पालन-पोषण करूंगी।” कला और शब्दों से उभरे भाव कार्यशाला में महिलाओं ने “जेल में सपना”, “जेल में उत्सव”, “जेल में रेडियो” जैसे विषयों पर चित्र बनाकर अपने मन की स्थिति को व्यक्त किया। हर बंद दरवाज़े के पीछे खुलती है एक उम्मीद की खिड़की कार्यक्रम की सूत्रधार और तिनका-तिनका फाउंडेशन की अध्यक्ष सुवर्तिका नंदा ने कहानियों और संवाद के ज़रिए महिलाओं को संदेश दिया कि “हर परिस्थिति में डटे रहना ही असली नारी शक्ति है। सीखते रहना, आगे बढ़ते रहना ही जीत है।” सतत कौशल विकास की प्रतिबद्धता राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने बताया कि महिला बंदियों के लिए आयोग द्वारा कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और आगे भी प्रदेश में इन्हें विस्तारित किया जाएगा। कार्यशाला में डीआईजी जयपटेल, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे, और आनंद विभाग के संचालक प्रवीण गंगराड़े भी उपस्थित रहे। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यशाला नहीं, बल्कि उन ज़िंदगियों की कहानी है जो तिनका-तिनका जोड़कर खुद को फिर से गढ़ रही हैं। जहां दीवारें हैं, वहीं नए रास्ते भी हैं। जहां सज़ा है, वहीं पुनर्जन्म भी।  

तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें

महिला बंदियों ने सीखा संवाद, संवेदना और सपनों को संवारने का हुनर महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें भोपाल  कभी टूटी हुई उम्मीदों के सहारे जी रही केन्द्रीय जेल भोपाल की महिलाएं अब सपनों को नया आकार दे रही हैं। केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जब इन महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें गर्व से नम हो गई। यह कार्यशाला मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और तिनका-तिनका फाउंडेशन के सहयोग से “टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुधार और व्यक्तित्व विकास” विषय पर आयोजित की गई थी। कार्यशाला में महिला बंदियों ने न सिर्फ संवाद के गुर सीखे बल्कि आत्मविश्लेषण, सुधार और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने का संकल्प भी लिया। बहुत कुछ सीखा मैंने यहाँ 56 वर्षीय पुतलीबाई, जो कभी अनपढ़ थीं, आज अख़बार पढ़ती हैं, टीवी समाचार देखती हैं और चित्र बनाना जानती हैं। भावुक होकर उन्होंने कहा,“मेरा जीवन बहुत कठिन था। लेकिन यहां मैंने पढ़ना, चित्र बनाना और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानना सीखा है। परिवार में औरत की ज़िंदगी कहीं ज़्यादा कठिन होती है। यहां मुझे आज़ादी महसूस होती है।” “मैं फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं” कल्पना, जो किन्नर समुदाय से हैं, ने कहा “बाहर हमारे साथ भेदभाव होता है, यहां नहीं। यहां पढ़ाई की, कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। अब मैं बाहर जाकर फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं।”  “खेतों में मेहनत करूंगी, बच्चों को पालूंगी” सुनीता बाई ने अपने भीतर के पश्चाताप को शब्द दिए “मुझसे गलती हुई, उसका पछतावा है। यहां रहकर मैंने बागवानी सीखी है। अब बाहर जाकर खेती करूंगी और अपने बच्चों का पालन-पोषण करूंगी।” कला और शब्दों से उभरे भाव कार्यशाला में महिलाओं ने “जेल में सपना”, “जेल में उत्सव”, “जेल में रेडियो” जैसे विषयों पर चित्र बनाकर अपने मन की स्थिति को व्यक्त किया। हर बंद दरवाज़े के पीछे खुलती है एक उम्मीद की खिड़की कार्यक्रम की सूत्रधार और तिनका-तिनका फाउंडेशन की अध्यक्ष सुवर्तिका नंदा ने कहानियों और संवाद के ज़रिए महिलाओं को संदेश दिया कि “हर परिस्थिति में डटे रहना ही असली नारी शक्ति है। सीखते रहना, आगे बढ़ते रहना ही जीत है।” सतत कौशल विकास की प्रतिबद्धता राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने बताया कि महिला बंदियों के लिए आयोग द्वारा कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और आगे भी प्रदेश में इन्हें विस्तारित किया जाएगा। कार्यशाला में डीआईजी जयपटेल, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे, और आनंद विभाग के संचालक प्रवीण गंगराड़े भी उपस्थित रहे। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यशाला नहीं, बल्कि उन ज़िंदगियों की कहानी है जो तिनका-तिनका जोड़कर खुद को फिर से गढ़ रही हैं। जहां दीवारें हैं, वहीं नए रास्ते भी हैं। जहां सज़ा है, वहीं पुनर्जन्म भी।  

यूपी में डिजिटल अरेस्ट केस में पहली सजा, 7 साल की कैद से शुरू हुआ नया अध्याय

लखनऊ उत्तर प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट मामले में पहली बार सजा सुनाई गई. राजधानी लखनऊ में महिला डॉक्टर से 85 लाख ठगने वाले एक ठग को कोर्ट द्वारा 7 साल की सजा दी गई. आपको बता दें कि खुद को CBI अधिकारी बताकर केजीएमयू की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये ठगने वाले साइबर अपराधी देवाशीष को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. यह ऐतिहासिक फैसला स्पेशल सीजेएम कस्टम अमित कुमार ने सुनाया.  मामले की विवेचना साइबर थाना लखनऊ ने की थी और इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव द्वारा कोर्ट में ठोस साक्ष्य पेश किए गए. साइबर क्राइम के इतिहास में यह देश का पहला मामला है जिसमें डिजिटल अरेस्ट के आरोप में 14 महीने के भीतर कोर्ट से सजा सुनाई गई है. जानिए पूरा मामला  अभियोजन अधिकारी मषिन्द्र ने बताया कि 15 अप्रैल 2024 को डॉ. सौम्या गुप्ता केजीएमयू में अपनी ड्यूटी कर रही थीं. तभी आरोपी देवाशीष ने उन्हें कॉल कर खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि वह दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से बोल रहा है. उसने दावा किया कि डॉ. गुप्ता के नाम से एक कार्गो बुक है जिसमें जाली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम एमडीएम मिला है. इसके बाद देवाशीष ने कॉल को ट्रांसफर कर खुद को फर्जी CBI अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से बात करवाई, जिसने डॉ. गुप्ता को धमकाया कि उन्हें सात साल की जेल हो सकती है. डर के चलते डॉक्टर ने अपनी पर्सनल जानकारी जैसे- बैंक खाता, पैन नंबर और संपत्ति विवरण साझा कर दिया.  आरोपियों ने डर और धमकी के माध्यम से डॉक्टर को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और अलग-अलग चार बैंक खातों में कुल 85 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए. जांच-पड़ताल के क्रम में आरोपी की पहचान देवाशीष के रूप में हुई जिसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया. मजबूत साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उसे सात साल की सजा और जुर्माना भी लगाया. देवाशीष आजमगढ़ के अजमतगढ़ क्षेत्र के मसौना गांव का रहने वाला है.  

सेंट्रल जेल के कैदियों को मिलेगी नई सुविधा, 16 नए वीसी रूम का निर्माण कार्य शुरू, इसी से पेशी भी होगी

भोपाल भोपाल सेंट्रल जेल जल्द ही पहले से अधिक हाईटेक होने जा रहा है। अब तक यहां केवल 11 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम होते थे। जिसके माध्यम से आतंकियों और हाईप्रोफाइल कैदियों की ही पेशी करा पाना जेल प्रशासन के लिए संभव होता था। जल्द यहां 16 नए वीसी रूम का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। इसके लिए मुख्यालय से बजट पास कर दिया गया है। इसका उद्देश्य कैदियों को अदालत में पेशी के लिए जेल से बाहर ले जाने की आवश्यकता को कम करना है, और सुरक्षा, दक्षता में सुधार करना है। मुलाकात प्रक्रिया आसान होगी जेल अधीक्षक राकेश भांगरे ने बताया कि यह कदम कैदियों को उनके परिवार से जोड़े रखने और उन्हें सामाजिक रूप से जुड़े रहने में मदद करेगा। साथ ही, इससे जेलों में मुलाकातों की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी, जिससे कैदियों और उनके परिजनों दोनों को सुविधा होगी। वीसी रूम के माध्यम से, कैदियों को अदालत में शारीरिक रूप से पेश होने की आवश्यकता कम होती है। सुरक्षा जोखिम कम होता है वीसी से पेशी कराने पर सुरक्षा जोखिम कम होता है। वीसी के माध्यम से, कैदी अपने परिवार और दोस्तों से आसानी से मिल सकते हैं, जिससे उनके मानसिक सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वीसी अदालती कार्यवाही और अन्य जेल गतिविधियों को अधिक कुशल बना सकता है। वीसी के उपयोग से यात्रा और सुरक्षा लागतों को कम किया जाने में भी फायदा मिलेगा। हाल ही में हाई सिक्योरिटी सेल का भी निर्माण हुआ है हाल ही में जेल में 12 नई हाई सिक्योरिटी सेल का निर्माण कराया गया है। जिसके लिए 1.20 करोड़ का बजट पारित हुआ था। करीब दो साल में यह हाई सिक्योरिटी सेल बनकर तैयार हुई हैं। जल्द ही इनमें कुख्यात आतंकियों को शिफ्ट किया जाएगा। हाई सिक्योरिटी सेल में क्षमता से अधिक कैदी बंद जेल में हाई सिक्योरिटी सेल की क्षमता 58 हैं। वर्तमान में 69 आतंकियों को यहां रखा गया है। जल्द नई हाई सिक्योरिटी सेल में भी आतंकियों को शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।