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हाईकोर्ट जज की अनोखी पहल: कार नहीं, साइकिल से पहुंचे अदालत; हर तरफ हो रही चर्चा

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस डी.डी. बंसल ने अपनी सादगी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। जस्टिस बंसल सरकारी वाहन छोड़ साइकिल से हाईकोर्ट पहुंचे, जिसे देखकर राहगीर से लेकर हाईकोर्ट परिसर तक हर कोई हैरान रह गया। आमतौर पर न्यायाधीशों के साथ प्रोटोकॉल और वाहनों का काफिला जुड़ा रहता है, लेकिन जस्टिस बंसल ने अलग संदेश देते हुए सादगीपूर्ण जीवनशैली को अपनाया। बताया जा रहा है कि जस्टिस बंसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की अपील से प्रेरित हैं। पीएम मोदी लगातार ‘मिशन लाइफ’ के तहत पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की बात करते रहे हैं। जस्टिस बंसल ने उसी संदेश को व्यवहार में उतारते हुए साइकिल से अदालत पहुंचकर लोगों को प्रदूषण कम करने और फिट रहने का संदेश दिया है। उनकी इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। जस्टिस बंसल की साइकिल यात्रा की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी उनकी जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि समाज के उच्च पदों पर बैठे लोग यदि इस तरह की पहल करेंगे तो आम जनता भी प्रेरित होगी। उनकी यह पहल उन लोगों के लिए भी संदेश मानी जा रही है जो छोटी दूरी के लिए भी वाहनों का उपयोग करते हैं। जज के साथ सुरक्षाकर्मी भी साइकिल पर सामान्य तौर पर हाई कोर्ट के जस्टिस का काफिला जब भी निकलता है तो ट्रैफिक रोक दिया जाता है. काफिले में जज साहब की गाड़ी के साथ पायलट भी चलता है. जबलपुर के सिविल लाइन इलाके में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में काम करने वाले सभी जज रहते हैं और सभी लोग सामान्य तौर पर अपनी कार से ही बंगले से हाई कोर्ट तक आते हैं. लेकिन मंगलवार सुबह का नजारा कुछ अलग था. जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल अपनी साइकिल पर बंगले से निकले और साइकिल से ही वह हाई कोर्ट पहुंचे. उनके साथ में उनके सुरक्षाकर्मी भी थे। सुबह रोजाना करते हैं साइकिलिंग जस्टिस डीडी बंसल ने बताया "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि लोग पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें. इसलिए उन्होंने तय किया कि वह साइकिल से ही अपने बंगले से हाई कोर्ट तक जाएंगे. साइकिल चलाना उनके लिए कोई नई बात नहीं है. बचपन में भी साइकिल से ही स्कूल जाते थे. अभी भी डुमना रोड पर वह रोजाना साइकलिंग करते हैं. इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के साथ उन्होंने शहर के भीतर भी कई बार साइकिलिंग की है। तेज गर्मी के बावजूद असुविधा नहीं हुई जस्टिस डीडी बंसल का कहना है "ऐसा नहीं है कि हाई कोर्ट जज साइकिल से नहीं चल सकते. भले ही गर्मी है, थोड़ी सी परेशानी होती है लेकिन साइकिलिंग करना अच्छी बात है और उन्हें सिविल लाइन से हाई कोर्ट तक लगभग 3 किलोमीटर गर्मी में साइकिल चलाने में कोई असुविधा नहीं हुई." मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे दूसरे लोगों को भी अमल करना चाहिए. खासतौर पर अधिकारी-कर्मचारियों और नेताओं को, क्योंकि उनके राजनीतिक प्रशासनिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा ईंधन की बर्बादी होती है।

SC जज ने उठाया बड़ा सवाल: लालची जजों को सिस्टम से बाहर करना क्यों है जरूरी?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अदालत में जजों के आचरण को लेकर अहम बातें कही हैं। शनिवार को न्यायपालिका में ईमानदारी के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो जज लालच का शिकार हो जाते हैं, उनका सिस्टम में कोई स्थान नहीं है और उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद आज ज्यूडिशियरी में शामिल अधिकारियों को बहुत अच्छा वेतन और सेवा शर्तें मिल रही हैं, इसलिए किसी भी तरह का अनैतिक आचरण अपनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई जज लालच में आ जाता है, तो उसे सिस्टम से ही हटा दिया जाना चाहिए।” प्रलोभन से बचना चाहिए- SC जज SC जज ने आगे कहा कि एक जज को अपने वैध वेतन में खुश रहना चाहिए और किसी भी तरह के प्रलोभन से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न कर पाना न्याय प्रणाली की बुनियाद को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता केवल बाहरी दबावों से मुक्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आंतरिक अनुशासन और ईमानदारी बनाए रखना भी शामिल है। जस्टिस नागरत्ना ने फैसले लेने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि एक भी गलत फैसला न्यायपालिका पर जनता का भरोसा कमजोर कर सकता है। उन्होंने अदालतों के प्रशासनिक कामकाज में भी पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया, खासकर जिला न्यायपालिका में। वहीं उन्होंने हाईकोर्ट से अपील की है कि वे अधिकारियों के लिए सहयोगी वातावरण बनाने की कोशिश करें। AI के खतरों पर भी बोलीं जस्टिस नागरत्ना इस दौरान ज्यूडिशियरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां वकीलों ने अदालत में एआई टूल्स से तैयार किए गए ऐसे कानून का हवाला दिया, जो थे ही नहीं। उन्होंने कहा है कि वकीलों को जिन फैसलों का वे हवाला देते हैं, उनकी सत्यता की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए।

संघर्ष से सफलता तक: कुरुक्षेत्र के युवक ने दूसरे अटेम्प्ट में पाई AIR-6, राजस्थान न्याय सेवा में चयन

कुरुक्षेत्र हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि यहां के होनहार युवा भारत जांगड़ा ने राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर जज बनने का सपना साकार किया है। भारत जांगड़ा ने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया छठी रैंक प्राप्त कर न केवल परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। भारत जांगड़ा ने पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की, जहां उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने न्यायिक सेवा की तैयारी शुरू की। पहले अटेम्प्ट में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी रणनीति को और मजबूत किया। वे रोजाना 10 से 12 घंटे तक नियमित अध्ययन करते रहे, जिसका नतीजा दूसरे प्रयास में सफलता के रूप में सामने आया। भारत के पिता सोहन लाल जांगड़ा ने बताया कि भारत बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहा है। पढ़ाई के प्रति उसका लगाव इस कदर था कि उसे सोने के लिए भी टोकना पड़ता था। उन्होंने बताया कि वे जेल विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। माता ममता जांगड़ा गृहिणी हैं। भारत जांगड़ा ने अपनी सफलता का श्रेय पूरे परिवार को दिया है। उन्होंने बताया कि पहले प्रयास में असफल होने के बाद वे काफी निराश हो गए थे, लेकिन दादा के भाई श्याम लाल जांगड़ा ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दोबारा प्रयास करने की सलाह दी, जिसका परिणाम आज सभी के सामने है। भारत के दादा कंज्यूमर कोर्ट में सेवाएं दे चुके हैं, जबकि उनके चाचा गौरव जांगड़ा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। भारत ने बताया कि बचपन में वे अपने दादा से अदालत में आने वाले लोगों के दुख-दर्द की कहानियां सुनते थे। तभी उनके मन में न्याय सेवा में जाने का संकल्प पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी और खुद को पूरी तरह पढ़ाई में झोंक दिया। भारत जांगड़ा ने कुरुक्षेत्र के एक संस्थागत स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। वे पहली कक्षा से ही मेधावी रहे और 10वीं व 12वीं की परीक्षाओं में जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। चयन के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है। जल्द ही भारत जांगड़ा राजस्थान के जोधपुर में प्रशिक्षण के लिए रवाना होंगे।